ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter – Sanskar Aur Bhavna, Vishnu Prabhakar, The Best Solutions,  संस्कार और भावना, विष्णु प्रभाकर

विष्णु प्रभाकर – एकांकीकार का परिचय

श्री विष्णु प्रभाकर का जन्म उत्तर प्रदेश में 21 जून, सन् 1912 में हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करके स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ समय तक इन्होंने पंजाब सरकार के कृषि विभाग में कार्य किया, पर बाद में ये नौकरी छोड़कर लेखन-कार्य में संलग्न हो गए।

श्री विष्णु प्रभाकर बहुमुखी प्रतिभासंपन्न साहित्यकार थे। इन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं; जैसे – कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी आदि पर अपनी लेखनी चलाई। 11 अप्रैल, सन् 2009 को इनका देहांत हो गया।

प्रभाकर जी की सभी रचनाओं में मानवतावादी दृष्टिकोण मुखरित हुआ है। इनके एकांकी समस्या – प्रधान तथा मानव-प्रकृति से ओत-प्रोत तथा भावनात्मक गहराई से संबंधित हैं।

एकांकी का कथानक

विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित एकांकी ‘संस्कार और भावना’ एक सशक्त पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक नाटक है। यह एकांकी रूढ़िवादी संस्कारों और मानवीय भावनाओं के बीच चलने वाले द्वंद्व को बड़ी कुशलता से चित्रित करता है।

  1. पृष्ठभूमि और परिवार का परिचय

कहानी एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार की है। घर की मुखिया ‘माँ’ हैं, जो पुराने संस्कारों और परंपराओं में गहरा विश्वास रखती हैं। उनका बड़ा बेटा अविनाश एक बंगाली और विजातीय अर्थात् दूसरी जाति की युवती से विवाह कर लेता है, जिससे माँ अत्यधिक क्रोधित और आहत होती हैं। वे इसे कुल और धर्म की मर्यादा के खिलाफ मानती हैं और अविनाश का त्याग कर देती हैं। अविनाश अपनी पत्नी के साथ अलग रहने लगता है।

  1. संस्कारों की दासता और ममता का द्वंद्व

एकांकी की शुरुआत में माँ का छोटा बेटा अतुल और उसकी पत्नी उमा घर में हैं। माँ बाहर से लौटती हैं और उन्हें पता चलता है कि अविनाश पिछले महीने हैजे जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित था। वह मरते-मरते बचा है। यह सुनकर माँ का ‘संस्कार’ और उनकी ‘ममता’ आपस में टकराने लगते हैं। वे दुखी हैं कि उनका बेटा बीमार रहा और उन्हें खबर तक नहीं हुई, लेकिन संस्कारों की कट्टरता के कारण वे अपनी पीड़ा को ‘निर्ममता’ के परदे में छिपाए रखती हैं।

  1. उमा का रहस्योद्घाटन

माँ अपनी पुत्रवधू अविनाश की पत्नी को ‘डाकिन’ और अपने बेटे को अलग करने वाली स्त्री मानती हैं। तभी उमा उन्हें बताती है कि वह छिपकर अपनी उस जेठानी से मिलने गई थी। उमा अविनाश की पत्नी के चरित्र और सुंदरता का वर्णन करती है और बताती है कि वह कितनी भोली और समर्पित स्त्री है। उमा यह भी बताती है कि वह अपनी जेठानी से लड़ने गई थी, लेकिन जेठानी के तर्कों और प्यार ने उसका दिल जीत लिया। उसे पता चलता है कि अतुल भी छिप-छिपकर अपने भाई की खबर लेने जाता रहा है।

  1. अविनाश की पत्नी का समर्पण

माँ को पता चलता है कि जब अविनाश हैजे से मरणासन्न था, तब उसकी पत्नी ने बिना किसी की सहायता लिए, अकेले दिन-रात सेवा करके अविनाश के प्राण बचाए। समाज और परिवार के तिरस्कार के बावजूद उसने हार नहीं मानी। माँ का हृदय यह सुनकर पिघलने लगता है कि जिस बहू को वे घृणा की दृष्टि से देखती थीं, उसने उनके बेटे को नया जीवन दिया है।

  1. चरम बिंदु और हृदय परिवर्तन

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब अतुल यह दुखद समाचार देता है कि अब अविनाश की पत्नी (भाभी) मरणासन्न है। पति की सेवा करते-करते उसने अपने प्राण संकट में डाल दिए हैं। अतुल माँ पर कटाक्ष करता है कि संस्कारों और कुल की झूठी मर्यादा के कारण वे कायर बन गई हैं और अपने बीमार बेटे-बहू के पास नहीं जा रही हैं। माँ को अहसास होता है कि यदि बहू को कुछ हो गया, तो अविनाश भी जीवित नहीं बचेगा।

  1. अंत – भावनाओं की विजय

अंत में माँ के भीतर की ‘माँ’ जाग उठती है। वे संस्कारों की बेड़ियों को तोड़कर चिल्ला उठती हैं— “वह निर्मम है, पर मैं माँ हूँ।” वे उस विजातीय बहू को अपनाने और उसे घर लाने का निर्णय लेती हैं। पूरा परिवार ताँगे में बैठकर अविनाश के घर की ओर निकलता है। नाटक के अंत में उमा वही वाक्य दोहराती है जिसे वह शुरू में पढ़ रही थी— कि जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करते हैं, समय आने पर उन्हें स्वीकार कर लेते हैं।

एकांकी का मुख्य संदेश

यह एकांकी यह संदेश देता है कि मानवीय भावनाएँ और प्रेम, संकुचित जातिगत संस्कारों और रूढ़ियों से कहीं अधिक ऊँचे हैं। समय और परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य को कठोर संस्कारों को छोड़कर ममता और मानवता को अपनाना चाहिए।

पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ

(क) माँ (प्रमुख पात्र)

संस्कारों और ममता के बीच द्वंद्व – माँ एकांकी का केंद्रीय पात्र है। वह पुराने हिंदू संस्कारों और कुल-मर्यादा की पक्षधर है, इसलिए विजातीय बहू को स्वीकार नहीं करती। लेकिन उनके भीतर ममता का सागर भी है।

भावुकता – वह अपने बेटे अविनाश से बहुत प्यार करती है। उसकी बीमारी की खबर सुनकर वह फूट-फूटकर रोने लगती है।

हृदय परिवर्तन – एकांकी के अंत में उसकी ‘भावना’ उसके ‘संस्कारों’ पर विजय प्राप्त कर लेती है। वह रूढ़ियों को तोड़कर बहू को अपनाने निकल पड़ती है।

 

(ख) अविनाश (बड़ा पुत्र – नेपथ्य पात्र)

आधुनिक और प्रगतिशील – वह जाति-पाँति के बंधनों को नहीं मानता और एक बंगाली युवती से प्रेम विवाह करता है।

दृढ़निश्चयी – वह सिद्धांतों का पक्का है। माँ के त्यागने पर भी वह झुकता नहीं और अपनी पत्नी के साथ अलग स्वाभिमान से रहता है।

संस्कारों का विरोधी – वह संस्कारों की दासता को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु मानता है।

 

(ग) अतुल (छोटा पुत्र)

स्पष्टवादी और निर्भीक – अतुल अपनी माँ को साफ-साफ कहता है कि वे संस्कारों के कारण कायर हो गई हैं। वह माँ की गलत धारणाओं पर प्रहार करता है।

व्यवहारकुशल – वह विद्रोही नहीं है, बल्कि माँ को तर्क और सच्चाई से बदलने की कोशिश करता है। वह छिपकर भाई की मदद भी करता है।

 

(घ) उमा (अतुल की पत्नी)

संवेदनशील – वह घर की शांति चाहती है। वह अपनी जेठानी से लड़ने जाती है, लेकिन उसका गुणगान करने लगती है।

मध्यस्थ – वह एकांकी में माँ और अविनाश के बीच की कड़ी का काम करती है। वह जेठानी की अच्छाइयों को माँ के सामने लाकर उनका हृदय परिवर्तन करने में मदद करती है।

एकांकी का उद्देश्य

इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य रूढ़िवादी संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं के टकराव को दिखाना है। कवि स्पष्ट करना चाहता है कि –

जाति-पाँति और संकुचित सामाजिक संस्कार मनुष्य के सुख और प्रेम में बाधक होते हैं।

प्रेम और सेवा किसी भी जाति या कुल से बड़ी होती है जैसा कि अविनाश की पत्नी ने सिद्ध किया।

समय के साथ मनुष्य को अपनी हठधर्मिता छोड़कर लचीला बनना चाहिए।

निष्कर्ष – मानवता और ममता ही सबसे बड़े ‘संस्कार’ होने चाहिए।

कठिन शब्दों के सरल अर्थ

1 – संक्रांति काल – परिवर्तन का समय – Transition period

2 – कुण्डलाकार – घेरेदार / गोल – Coiled / Circular

3 – कपोल – गाल – Cheek

4 – स्निग्धता – कोमलता / चमक – Smoothness / Glossiness

5 – वेदना – पीड़ा / दुख – Agony / Pain

6 – भर्राया स्वर – भारी या रुँधा हुआ गला – Hoarse / Choked voice

7 – अचरज – आश्चर्य – Wonder / Surprise

8 – शर्म से गड़ना – बहुत लज्जित होना – To be buried in shame

9 – द्रवित होना – पिघलना / भावुक होना – To be moved / Melted

10 – सांत्वना – ढाँढस बंधाना – Consolation

11 – अपराध – कसूर / गलती – Crime / Fault

12 – हाथ पसारना – मदद माँगना – To beg for help

13 – हैज़ा – एक संक्रामक बीमारी – Cholera

14 – विद्रूप – व्यंग्य / उपहास – Mockery / Ridicule

15 – माया-ममता – सांसारिक लगाव / मोह – Attachment / Affection

16 – दुहाई देना – पुकारना / शपथ लेना – To appeal / To invoke

17 – निर्मम – दयाहीन / कठोर – Heartless / Ruthless

18 – कोसना – बुरा-भला कहना – To curse

19 – निंदा – बुराई करना – Criticism / Slander

20 – तिलमिलाना – तड़प उठना – To be agitated / Stung

21 – खीझ – चिड़चिड़ापन – Irritation

22 – रोष – गुस्सा – Anger / Wrath

23 – शैशव – बचपन – Childhood / Infancy

24 – लज्जा – शर्म – Shyness / Modesty

25 – गद्गद् होना – भावविभोर होना – To be overwhelmed

26 – परिचय – जानकारी / जान-पहचान – Introduction

27 – भौंचक – हैरान – Stunned / Amazed

28 – हृदय की साक्षी – अंतरात्मा की गवाही – Evidence of heart / Conscience

29 – वरण करना – चुनना (जीवनसाथी) – To choose / Elect

30 – हठात् – अचानक – Suddenly / Abruptly

31 – त्रस्त – डरा हुआ / व्याकुल – Terrified / Distressed

32 – पचड़े – झमेले / बेकार की बातें – Complications / Mess

33 – अंतर्मन – मन का भीतरी भाग – Inner self / Conscience

34 – मोहिनी – जादू / सम्मोहन – Spell / Enchantment

35 – मोहग्रस्त – भ्रमित – Deluded / Infatuated

36 – दासता – गुलामी – Slavery / Bondage

37 – विछोभ – अलग होने का दुख – Separation / Grief

38 – नैतिक – आचरण संबंधी – Moral / Ethical

39 – एहसान – उपकार – Favor / Obligation

40 – परितोष – संतोष / तृप्ति – Satisfaction

41 – आतुर – बेचैन / उत्सुक – Eager / Impatient

42 – डाकिन – बुरी स्त्री (एक गाली) – Witch / Evil woman

43 – दृढ़ता – मजबूती – Firmness / Determination

44 – सौम्यता – सज्जनता / कोमलता – Gentleness / Mildness

45 – विजातीय – दूसरी जाति का – Of another caste

46 – व्यर्थ – बेकार – Useless / Vain

47 – कायर – डरपोक – Coward

48 – पसीजना – दया आना – To feel pity / To melt

49 – कटु सत्य – कड़वा सच – Bitter truth

50 – प्रौढ़ा – अधेड़ उम्र की स्त्री – Middle-aged woman

51 – तीव्र – तेज़ – Sharp / Intense

52 – उद्विग्न – परेशान / बेचैन – Disturbed / Anxious

53 – रुँध जाना – गला भर आना – To be choked with emotion

54 – मरणासन्न – मृत्यु के निकट – On the verge of death

55 – खपाना – नष्ट करना / लगाना – To exhaust / Consume

56 – सुलभ – आसानी से मिलने वाला – Easily available

57 – फ़ौलाद – लोहा / इस्पात – Steel

58 – अवाक् – निशब्द / चुप – Speechless

59 – कंपित – काँपता हुआ – Trembling

60 – रक्तिम आभा – लालिमा – Reddish glow

61 – शून्य में ताकना – खोया रहना – Staring into vacancy

62 – व्यवस्थित – सही ढंग से रखा हुआ – Organized / Systematic

63 – दिवा की किरण – दिन की रोशनी – Day’s ray / Sunlight

64 – पग-ध्वनि – कदमों की आवाज़ – Footsteps

65 – अपराध – गुनाह – Offense / Sin

66 – पसारना – फैलाना – To spread / Extend

67 – दुहाई – अपील – Supplication / Appeal

68 – विस्मय – हैरानी – Astonishment

69 – साक्षी – गवाह – Witness

70 – मोह – आकर्षण – Attachment / Illusion

71 – चेतन – सजीव – Conscious

72 – अचेतन – निर्जीव / बेहोश – Unconscious

73 – आकर्षण – खिंचाव – Attraction

74 – ऋण – कर्ज – Debt / Loan

75 – पुकार – आवाज़ – Call / Cry

76 – बलिदान – त्याग – Sacrifice

77 – अत्याचार – जुल्म – Oppression / Cruelty

78 – वेदी – यज्ञ का स्थान – Altar

79 – स्फूर्ति – तेज़ी – Vitality / Agility

80 – फरियाद – याचना – Plea / Complaint

81 – दोष – बुराई / गलती – Defect / Fault

82 – स्वार्थ – खुदग़र्ज़ी – Selfishness

83 – बाधा – रुकावट – Obstacle / Hindrance

84 – विकास – प्रगति – Development / Progress

85 – आशंका – डर / संदेह – Apprehension / Doubt

86 – कोलाहल – शोर – Noise / Clamor

87 – संघर्ष – लड़ाई – Struggle / Conflict

88 – संचय – इकट्ठा करना – Accumulation / Storage

89 – विकीर्ण – फैला हुआ – Scattered / Diffused

90 – तुष्ट – तृप्त – Contented / Satisfied

91 – क्रीत – खरीदा हुआ – Purchased / Bought

92 – समीरण – हवा – Breeze / Wind

93 – सुलभ – प्राप्त करने योग्य – Attainable

94 – वाम – प्रतिकूल / उल्टा – Adverse / Contrary

95 – रोड़ा – अड़चन – Stone / Obstruction

96 – अभिराम – सुंदर – Pleasing / Beautiful

97 – सजीव – जिंदा – Alive / Living

98 – सराहनीय – प्रशंसा के योग्य – Praiseworthy

99 – आत्म-बलिदान – खुद का त्याग – Self-sacrifice

100 – व्यथित – दुखी – Distressed / Grieved

101 – भार – वजन / जिम्मेदारी – Burden / Weight

102 – पंकज – कमल – Lotus

103 – नयन – आँख – Eye

104 – अज्ञान – जानकारी न होना – Ignorance

105 – सोपान – सीढ़ी – Stairs / Steps

106 – वाद्य – संगीत यंत्र – Musical Instrument

107 – कल-गान – मधुर गीत – Melodious song

108 – तान – स्वर की लय – Tune / Note

109 – स्निग्धता – चिकनाहट – Smoothness / Oiliness

110 – संस्कार – शुद्धि / मूल्य – Sacrament / Values

 

अवतरणों पर आधारित प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(i) वहीं उसकी मिसरानी ने मुझे बताया। कहने लगी- “तुम्हारा बेटा तो बहुत बीमार रहा, मरकर बचा। सुनकर मैं शर्म से गड़ गई। मेरा बेटा बीमार रहे और मुझे पता भी न लगे।”

(क) कौन किसके घर गई थी और क्यों?

उत्तर – माँ कुमार के घर गई थी। वह वहाँ संभवतः मिलने या किसी सामाजिक कारण से गई थी।

(ख) वहाँ उसे किसने क्या बताया?

उत्तर – वहाँ उसे कुमार की मिसरानी मिली। उसने बताया कि माँ का बड़ा बेटा अविनाश पिछले दिनों हैजे से बहुत बीमार रहा और बड़ी मुश्किल से मरकर बचा है।

(ग) उसका बेटा उससे अलग क्यों रहता है? वक्ता उससे क्यों नहीं मिलने जाता?

उत्तर – उसके बेटे अविनाश ने अपनी पसंद से एक विजातीय बंगाली युवती से विवाह किया था, जिसे माँ ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए वह अलग रहता है। माँ अपने पुराने संस्कारों और जातिगत रूढ़ियों के कारण उससे मिलने नहीं जाती।

(घ) ‘वे बहुत समझाते थे, नाराज़ भी हो जाते थे’- पंक्ति में ‘वे’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर – ‘वे’ शब्द का प्रयोग माँ के स्वर्गीय पति अर्थात अविनाश के पिता के लिए किया गया है। उनके चरित्र की विशेषता यह थी कि वे अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ, भावनाओं से दूर रहने वाले, कठोर और ‘निर्मम’ स्वभाव के व्यक्ति थे।

(ii) ‘अपराध और किसका है! सब मुझी को दोष देते हैं।’

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? परिचय दीजिए।

उत्तर – वक्ता ‘माँ’ है और श्रोता उसकी छोटी बहू ‘उमा’ है। माँ एक रूढ़िवादी हिंदू नारी है और उमा आधुनिक, समझदार और संवेदनशील स्त्री है।

(ख) वक्ता अपने किस अपराध की ओर संकेत कर रहा है?

उत्तर – वक्ता अपने उस ‘अपराध’ की ओर संकेत कर रही है जिसके कारण उसका बेटा उससे अलग हो गया। वह खुद को दोषी मानती है क्योंकि उसकी ममता संस्कारों की बेड़ियों में जकड़ी हुई है।

(ग) सब वक्ता को किस बात के लिए दोष देते थे?

उत्तर – सब उसे इस बात के लिए दोष देते थे कि उसने अपने संस्कारों और जाति-पाँति की कट्टरता के कारण अपने ही बेटे को खुद से दूर कर दिया और उसकी सुध तक नहीं ली।

(घ) मिसरानी ने वक्ता को किसके बारे में क्या बताया?

उत्तर – मिसरानी ने बताया कि अविनाश मरणासन्न था, लेकिन उसकी पत्नी ने अकेले अपने प्राणों की बाजी लगाकर और बिना किसी की मदद लिए अविनाश की जान बचा ली।

 

(iii) ‘माया-ममता किसी को भी नहीं छू गई है। हर बात में देश, धर्म और कर्तव्य की दुहाई देना उन्होंने सीखा है। आखिर इनका बाप भी तो ऐसा ही निर्मम था।’

(क) वक्ता कौन है? ‘उन्होंने’- शब्द का प्रयोग किनके लिए किया गया है?

उत्तर – वक्ता ‘माँ’ है। ‘उन्होंने’ शब्द का प्रयोग उसके दोनों बेटों— अविनाश और अतुल के लिए किया गया है।

(ख) ‘इनका बाप भी तो ऐसा ही निर्मम था’ – वक्ता को उसके निर्ममता के संबंध में कौन-सी घटना याद आ गई?

उत्तर – माँ को याद आता है कि जब अतुल छोटा था और उसके बचने की आशा नहीं थी, तब उसके पिता अर्थात् अविनाश और अतुल के पिता शांत मन से उसे धरती पर लिटाने के लिए सामान हटा रहे थे, जैसे उन्हें कोई दुख ही न हो।

(ग) वक्ता के बेटों ने उसे किस बात के लिए कोसा है और क्यों?

उत्तर – वक्ता के बेटों ने उसे ‘माया-ममता’ में फँसी हुई कहकर कोसा है क्योंकि वे कर्तव्य और आदर्शों को भावनाओं से ऊपर मानते हैं।

(घ) माँ का हृदय परिवर्तन कब हुआ और कैसे?

उत्तर – माँ का हृदय परिवर्तन तब हुआ जब उसे पता चला कि अविनाश की पत्नी ने अविनाश को बचाने के लिए खुद को संकट में डाल दिया है और अब वह स्वयं मरणासन्न है। यह सुनकर उनकी ममता जाग गई।

 

(iv) ‘दुनिया ने दाँतों तले उँगली दबाकर कहा था- ‘ऐसा भी क्या बाप जो अपने बेटे के लिए भी नहीं रोता। उसी बाप के ये बेटे हैं। मुझे सदा इन्होंने माया-ममता में फँसी हुई कहकर कोसा है। सदा मेरी निंदा की है।’

(क) उपर्युक्त अवतरण का संदर्भ लिखिए।

उत्तर – उपर्युक्त अवतरण का संदर्भ – माँ उमा को बता रही है कि उसके पति और बेटे कितने भावनाशून्य और कर्तव्यनिष्ठ हैं।

(ख) दुनिया ने किसके संबंध में दाँतों तले उँगली दबाकर क्या कहा था और क्यों?

उत्तर – दुनिया ने माँ के पति के संबंध में ऐसा कहा था क्योंकि उनका इकलौता बेटा अतुल जब मृत्यु के निकट था, तब भी वे विचलित नहीं हुए और न ही रोए।

(ग) बाप बेटों की किस समानता का उल्लेख किया गया है?

उत्तर – बाप और बेटों में यह समानता है कि वे सभी भावनाओं के बजाय सिद्धांत, राष्ट्र और कर्तव्य की दुहाई देते हैं और ‘निर्मम’ दिखाई देते हैं।

(घ) माँ के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – माँ का चरित्र ममता और संस्कारों के द्वंद्व से भरा है। वह स्वभाव से सरल है, अपने बच्चों से गहरा प्यार करती है, लेकिन समाज और जाति की मर्यादाओं से डरी हुई भी है।

 

(v) ‘हाँ, बहुत भोली माता जी! बहुत प्यारी। जो एक बार देख लेता है, वह फिर उसी रूप को नहीं भुला सकता। बार-बार देखने को मन करता है।

(क) उपर्युक्त पंक्तियों में किसके बारे में बात की जा रही है? उसके व्यक्तित्व एवं चरित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर – यहाँ अविनाश की पत्नी अर्थात् बंगाली बहू की बात हो रही है। वह रूपवती, भोली, समर्पित और उच्च संस्कारों वाली स्त्री है, जिसने समाज के विरोध के बावजूद पति का साथ निभाया।

(ख) उमा अविनाश की बहू के घर क्यों और कब गई थी?

उत्तर – उमा अपनी जेठानी से लड़ने के लिए दोपहर के समय गई थी, क्योंकि वह मानती थी कि जेठानी ही घर टूटने का कारण है।

(ग) उमा की बात सुनकर माँ की क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर – उमा की बातें सुनकर माँ चकित रह गई क्योंकि उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि उसकी बहू इतनी सुंदर और गुणी हो सकती है।

(घ) उमा ने अविनाश की बहू को क्या सुझाव दिया था?

उत्तर – उमा ने अविनाश की बहू को सुझाव दिया था कि वह अविनाश को छोड़ दे ताकि वह वापस अपनी माँ के पास चला जाए।

(vi) सोचो, तुम स्वयं पत्नी हो। यद्यपि तुमने मेरी तरह पति का वरण नहीं किया है, फिर भी तुम उन्हें प्यार करती हो। मुझे यह बात बुरी लगी, मैंने कहा, “सब पत्नियाँ अपने पतियों को प्यार करती हैं, मैं भी करती हूँ, प्राणों से अधिक प्यार करती हूँ।”

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? किसे, किसकी कौन-सी बात बुरी लगी और क्यों?

उत्तर – वक्ता अविनाश की पत्नी है और श्रोता उमा है। उमा को जेठानी की यह बात बुरी लगी कि उमा ने अपने पति का ‘वरण’ स्वयं नहीं किया है, जबकि जेठानी ने किया है।

(ख) श्रोता ने वक्ता की बात सुनकर क्या उत्तर दिया?

उत्तर – उमा ने उत्तर दिया कि वह भी अपने पति को प्राणों से अधिक प्यार करती है।

(ग) वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – अविनाश की पत्नी साहसी, तर्कशील और अपने पति के प्रति पूर्ण समर्पित स्त्री है।

(घ) अविनाश क्यों अलग रहने लगा था? माँ अविनाश के घर क्यों नहीं जाती थी?

उत्तर – अविनाश विजातीय विवाह के कारण अलग रहने लगा। माँ समाज और कुल की मर्यादा टूटने के डर से उसके घर नहीं जाती थी।

(vii) “नहीं भाभी! मैं नहीं छोड़ सकूँगी। चाहूँ तब भी नहीं।” सुनकर वे मुस्कराईं, कहने लगीं “अच्छा! अब छोड़ो इन बातों को। अभी तो आई हो और अभी ले बैठी ये पचड़े। आओ अंदर चलें।”

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? वक्ता ने श्रोता की किस बात को सुनकर उपर्युक्त कथन कहा?

उत्तर – वक्ता उमा है और श्रोता अविनाश की पत्नी है। जब भाभी ने उमा से पूछा कि क्या वह अपनी माँ के लिए अतुल को छोड़ सकती है, तब उमा ने यह कहा।

(ख) भाभी कौन है? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर – भाभी अविनाश की पत्नी है, जो एक बंगाली युवती है। वह बहुत ही मोहिनी सूरत वाली और समझदार स्त्री है।

(ग) अविनाश की पत्नी का उमा पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – अविनाश की पत्नी के व्यक्तित्व ने उमा का मन बदल दिया। जो उमा लड़ने गई थी, वह उसकी मुरीद होकर लौटी।

(घ) उमा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – उमा एक आधुनिक सोच वाली, दयालु और परिवार को जोड़ने की इच्छा रखने वाली महिला है।

 

(viii) ‘कहते हैं चेतन से अचेतन अधिक शक्तिशाली है। उसमें अधिक आकर्षण है, इसलिए तुम एक-दूसरे के प्रति खिंचे। चाहे वह प्रेम था, चाहे घृणा थी, पर असल बात रक्त के खिंचाव की थी, वह होकर रही। काश कि (स्वर डूबता है) काश कि मैं निर्मम हो सकती, काश कि मैं संस्कारों की दासता से मुक्त हो सकती।’

(क) ‘चेतन से अचेतन अधिक शक्तिशाली है’- कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका आशय है कि मनुष्य का तर्क भले ही कुछ कहे, लेकिन उसके भीतर की दबी हुई भावनाएँ या संस्कार अधिक प्रभावी होते हैं।

(ख) ‘तुम एक-दूसरे के प्रति खिंचे’- एक-दूसरे शब्दों का प्रयोग किस-किस के लिए किया गया है

उत्तर – ‘एक-दूसरे’ का प्रयोग उमा और अविनाश की पत्नी के लिए किया गया है।

(ग) ‘रक्त के खिंचाव’ से क्या अभिप्राय है? ‘वह होकर रही’ वक्ता ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर – ‘रक्त का खिंचाव’ का अर्थ है परिवार के सदस्यों के बीच का स्वाभाविक जुड़ाव। वक्ता ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उमा न चाहते हुए भी अपनी जेठानी की ओर आकर्षित हुई।

(घ) वक्ता किन संस्कारों की दासता से मुक्त नहीं हो पाता? – स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – माँ जाति-पाँति, कुल की मर्यादा और पुराने धार्मिक संस्कारों की दासता से मुक्त नहीं हो पाती।

 

(ix) हाँ, उसी ने कहा था। मैंने उसे बहुत समझाया, अपने प्रेम की दुहाई दी, पर वह सदा यही कहता रहा “माँ संतान का पालन माँ-बाप का नैतिक कर्त्तव्य है। वे किसी पर एहसान नहीं करते, केवल राष्ट्र का ऋण चुकाते हैं। वे ऋण मुक्त हों, यही उनका परितोष है। इससे अधिक मोह है इसलिए पाप है!

(क) उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – यह संवाद माँ और उमा के बीच हो रहा है, जहाँ माँ अविनाश के विचारों को याद कर रही है।

(ख) वक्ता ने किसे क्या समझाया था?

उत्तर – माँ ने अविनाश को घर लौटने के लिए बहुत समझाया था।

(ग) संतान का पालन माँ-बाप का नैतिक कर्त्तव्य है- कथन पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर – अविनाश का मानना था कि बच्चों का पालना कोई एहसान नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी है।

(घ) वक्ता के कथन-‘इससे अधिक मोह है इसलिए पाप है’ पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – यह विचार व्यक्ति को मोह से मुक्त करता है, लेकिन माँ जैसा हृदय इसे ‘पाप’ या कठोरता मानता है क्योंकि उसके लिए ममता ही सर्वोपरि है।

(x) ‘निर्मम ही नहीं कायर भी। जिन संस्कारों में तुम पत्नी हो, उन्हें तोड़ने की शक्ति तुम में नहीं है, माँ!’

(क) वक्ता और श्रोता कौन हैं? वक्ता ने श्रोता को निर्मम एवं कायर क्यों कहा?

उत्तर – वक्ता अतुल है और श्रोता ‘माँ’ है। अतुल ने माँ को कायर इसलिए कहा क्योंकि वह संस्कारों को तोड़ने का साहस नहीं दिखा पा रही थी।

(ख) एकांकी में विजातीय विवाह की समस्या को किस प्रकार उठाया गया है? विजातीय विवाह पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर – एकांकी विजातीय विवाह को एक सामाजिक समस्या के रूप में दिखाती है जो परिवारों को तोड़ती है। विचार यह है कि विवाह गुणों के आधार पर होना चाहिए, जाति के आधार पर नहीं।

(ग) माँ अतुल के यहाँ जाने को क्यों तैयार हो जाती है?

उत्तर – माँ अविनाश के घर जाने को तैयार हो जाती है क्योंकि उसे पता चलता है कि बहू मर रही है और उसके बिना अविनाश भी नहीं बचेगा।

(घ) ‘संस्कार और भावना’ कहानी का संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘संस्कार और भावना’ कहानी का संदेश मानवीय भावनाएँ और प्रेम, संकुचित जातिगत संस्कारों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

 

(xi) ‘जिन बातों का हम प्राण देकर भी विरोध करने को तैयार रहते हैं एक समय आता है, जब चाहे किस कारण से भी हो, हम उन्हीं बातों को स्वीकार कर लेते हैं।’

(क) उपर्युक्त कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – आशय है कि समय और परिस्थितियाँ मनुष्य के कठोरतम सिद्धांतों को भी बदल देती हैं।

(ख) ‘संस्कार और भावना’ शीर्षक एकांकी में किस समस्या को उजागर किया गया है?

उत्तर – इसमें पुरानी और नई पीढ़ी के विचारों के टकराव तथा जाति-पाँति की समस्या को उजागर किया गया है।

(ग) माँ के व्यवहार में किस प्रकार बदलाव आया?

उत्तर – माँ का कठोर व्यवहार ममता के प्रभाव में आकर कोमल हो गया और उन्होंने बहू को अपनाने का निर्णय लिया।

(घ) एकांकी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर – शीर्षक सार्थक है क्योंकि पूरी कहानी ‘संस्कार’ (पुरानी रीतियाँ) और ‘भावना’ (ममता/प्रेम) के द्वंद्व के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

(xii) ‘इससे अधिक मोह है, इसलिए पाप है। पर मैं क्या करूँ! मैं जो इससे अधिक है, उसी को पाने को आतुर हूँ। मैं ही क्यों, सभी माता-पिता यही चाहते हैं। तभी मैं समझती हूँ, उस डाकिन ने मेरे बेटे को मुझसे छीना है। पर वास्तव में दोष उसका नहीं है।’

(क) वक्ता कौन है? उसने उपर्युक्त कथन किससे तथा किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर – वक्ता ‘माँ’ है। उसने यह अतुल से अविनाश के संदर्भ में कहा है।

(ख) ‘इससे अधिक मोह है, इसलिए पाप है’- वक्ता ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर – अविनाश के अनुसार, कर्तव्य से अधिक मोह करना स्वार्थ है और इसलिए वह इसे पाप कहता था।

(ग) वक्ता के अनुसार उसकी तरह सभी माता-पिता क्या चाहते हैं?

उत्तर – सभी माता-पिता अपने बच्चों से केवल कर्तव्य पालन नहीं, बल्कि अगाध मोह और जुड़ाव चाहते हैं।

(घ) वक्ता ने ‘डाकिन’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया? फिर उसने यह क्यों कहा कि वास्तव में दोष उसका नहीं है?

उत्तर – माँ ने ‘डाकिन’ शब्द अविनाश की पत्नी के लिए इस्तेमाल किया क्योंकि वह मानती थी कि उसने उसके बेटे को उससे छीन लिया। बाद में उसने अपनी गलती मानी क्योंकि उसे पता चला कि असली बाधा बहू नहीं, बल्कि उसके स्वयं के संस्कार थे।

 

 

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