Rahim Ke Dohe (Kavita) – Rahim, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution

दोहों की व्याख्या

अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) के ये दोहे जीवन के गहरे सत्यों को बहुत ही सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हैं।

1. याचना और दानशीलता

दोहा – रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।

उनते पहले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

व्याख्या – रहीम जी कहते हैं कि वे मनुष्य मरे हुए के समान हैं जो दूसरों के पास कुछ माँगने जाते हैं। लेकिन उनसे भी पहले वे लोग मृत समान हैं, जो समर्थ होने के बावजूद माँगने वाले को देने से मना कर देते हैं अर्थात् जिनके मुख से ‘नहीं’ निकलता है।

सीख – हाथ फैलाने से मनुष्य का आत्मसम्मान खत्म होता है, और किसी ज़रूरतमंद को मना करना उससे भी बड़ा पाप है।

 

2. छोटे और बड़े का महत्त्व

दोहा – रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।

जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥

व्याख्या – रहीम जी कहते हैं कि बड़ी चीज़ों या धनी लोगों को देखकर छोटी चीज़ों या गरीब मित्रों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जहाँ कपड़े सिलने के लिए छोटी-सी सुई काम आती है, वहाँ बड़ी तलवार किसी काम की नहीं होती।

सीख – संसार में हर छोटी-बड़ी वस्तु का अपना अलग महत्त्व और स्थान होता है।

 

3. परोपकार की महिमा

दोहा – तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहि न पान।

कह रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

व्याख्या – जिस प्रकार पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीता, उसी प्रकार सज्जन और विद्वान व्यक्ति अपनी संपत्ति का संचय अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए करते हैं।

सीख – सच्चा धन वही है जो दूसरों के काम आए।

 

4. अच्छे स्वभाव की शक्ति

दोहा – जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।

चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥

व्याख्या – रहीम जी कहते हैं कि जिस व्यक्ति का स्वभाव उत्तम और चरित्र दृढ़ होता है, बुरी संगति अर्थात् कुसंग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। जैसे चंदन के पेड़ पर ज़हरीले साँप लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन अपनी शीतलता नहीं छोड़ता और न ही उसमें ज़हर फैलता है।

सीख – यदि आप अंदर से अच्छे हैं, तो बाहरी बुराई आप पर असर नहीं करेगी।

 

5. उपकारी का स्वभाव

दोहा – वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।

बाँटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥

व्याख्या – वे लोग धन्य हैं जिनका शरीर हमेशा दूसरों का उपकार करता है। परोपकारी व्यक्ति को फल वैसे ही मिलता है जैसे मेहंदी पीसने वाले के हाथों में बिना लगाए ही मेहंदी का रंग चढ़ जाता है।

सीख – दूसरों का भला करने वाले का भला अपने आप हो जाता है।

 

6. मन की पीड़ा

दोहा – रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय।

सुनि अठिलैहे लोग सब, बाँट न लैहें कोय॥

व्याख्या – रहीम जी सलाह देते हैं कि अपने मन के दुख को अपने मन के अंदर ही छिपा कर रखना चाहिए। क्योंकि जब आप दूसरों को अपना दुख सुनाते हैं, तो लोग सुनकर उसका मज़ा तो उड़ाते हैं, लेकिन उसे बाँटने वाला कोई नहीं होता।

सीख – अपनी कमज़ोरी हर किसी के सामने ज़ाहिर नहीं करनी चाहिए।

 

कठिन शब्दार्थ

दोहा 1 – (याचना और दान)

रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।

उनते पहले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

नर – मनुष्य / आदमी  Human / Man

जे – जो  Who

कहुँ – कहीं  Anywhere

माँगन – माँगने  To beg / Ask

जाहिं – जाते हैं  Go

मुए – मर गए  Dead

निकसत – निकलता है  Comes out

 

दोहा 2 – (महत्त्व)

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।

जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥

बड़ेन – बड़ों को / कीमती चीज़  Great / Big things

लघु – छोटा  Small

डारि देना – छोड़ देना / फेंक देना  To discard / Throw away

आवै – आता है  Comes

तरवारि – तलवार  Sword

 

दोहा 3 – (परोपकार)

तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहि न पान।

कह रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

तरुवर – श्रेष्ठ वृक्ष / पेड़  Tree

सरवर – सरोवर / तालाब  Lake / Pond

पियहि – पीते हैं  Drink

पर काज – दूसरों के काम  Others’ work

हित – भलाई के लिए  Welfare / For sake of

सँचहि – संचय करना / इकट्ठा करना  To accumulate

सुजान – सज्जन / विद्वान  Wise / Noble person

 

दोहा 4 – (स्वभाव)

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।

चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥

उत्तम – श्रेष्ठ / अच्छा  Excellent / Best

प्रकृति – स्वभाव  Nature / Temperament

कुसंग – बुरी संगति  Bad company

व्यापत – असर होना / फैलना  To affect / Spread

भुजंग – साँप  Snake

 

दोहा 5 – (सेवा का फल)

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।

बाँटनवारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग॥

धन्य – भाग्यशाली  Blessed

पर उपकारी – दूसरों का भला करने वाला  Altruistic / Benevolent

बाँटनवारे – बाँटने वाला (पीसने वाला)  Distributor / One who grinds

ज्यों – जैसे  As / Like

दोहा 6 – (मन की पीड़ा)

रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय।

सुनि अठिलैहे लोग सब, बाँट न लैहें कोय॥

निज – अपना  Own

व्यथा – दुख / पीड़ा  Sorrow / Pain

गोय – छिपाकर  Hidden

अठिलैहे – मज़ाक उड़ाना / इठलाना  To mock / Jeer

कोय – कोई  Anyone

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

माँगन, जहाँ, दीजिए, संपत्ति, उत्तम, प्रकृति, कुसंग, व्यापत, धन्य, बाँटनवारे, मेंहदी, व्यथा।

माँगन – Maan-gan  ‘माँ’ की ध्वनि नाक से निकालें।

मेंहदी – May-han-dee  ‘May’ में नासिका स्वर का प्रयोग करें।

बाँटनवारे – Baan-tan-vaa-ray  ‘Baan’ का उच्चारण नाक और मुँह दोनों से करें।

संपत्ति – Sam-pat-ti  ‘त’ पर ज़ोर दें (Double T)।

प्रकृति – Pra-kri-ti  ‘प्र’ (Pra) और ‘कृ’ (Kri) को ध्यान से बोलें।

व्यापत – Vyaa-pat  ‘व्या’ को ‘Vya’ की तरह जल्दी बोलें।

व्यथा – Vya-thaa  ‘व्य’ (Vya) और ‘था’ (Thaa) को मिलाकर बोलें।

उत्तम – Ut-tam  ‘त’ पर ज़ोर दें (जैसे – कुत्ते में ‘त्त’)।

जहाँ – Ja-haan 

धन्य – Dhan-ya

दीजिए – Dee-ji-ye 

कुसंग – Ku-sang

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) सुई और तलवार के माध्यम से कवि क्या बताना चाहते हैं?

उत्तर – कवि बताना चाहते हैं कि संसार में हर छोटी और बड़ी वस्तु का अपना महत्त्व होता है। जहाँ छोटी सुई काम आती है, वहाँ बड़ी तलवार बेकार सिद्ध होती है। इसलिए बड़ों के सामने छोटों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

(ख) ‘चंदन के वृक्ष पर सर्प लिपटे रहते हैं…’ इस उदाहरण से कवि क्या समझाना चाहते हैं?

उत्तर – इस उदाहरण से कवि यह समझाना चाहते हैं कि जो लोग उत्तम स्वभाव और दृढ़ चरित्र के होते हैं, उन पर बुरी संगति (कुसंग) का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।

(ग) मेंहदी पीसने वाले का उदाहरण देकर कवि ने क्या समझाया है?

उत्तर – कवि ने समझाया है कि परोपकार करने वालों का भला अपने आप हो जाता है, ठीक उसी तरह जैसे मेहंदी पीसने वाले के हाथ बिना लगाए ही लाल हो जाते हैं।

 

लिखित

1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) रहीम ने माँगने वाले लोगों को कैसा बताया है?

(i) मना करने वाला

(ii) मरा हुआ

(iii) स्वाभिमानी

(iv) भिखारी

(ख) कवि के अनुसार सुजान जन धन का संचय किसके लिए करते हैं?

(i) वृक्षों के लिए

(ii) सरोवर के लिए

(iii) अपने लिए

(iv) दूसरों के लिए

(ग) कवि के अनुसार दूसरों से क्या नहीं बाँटना चाहिए?

(i) इठलाना

(ii) रहस्य

(iii) दुख

(iv) अपनापन

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) जो लोग माँगने वालों को मना करते हैं, रहीम ने उनके लिए क्या कहा है?

उत्तर – जो लोग माँगने वालों को मना करते हैं, रहीम जी ने उनके लिए कहा है कि वे लोग तो माँगने वालों से भी पहले ही मर चुके हैं, क्योंकि वे समर्थ होने पर भी मदद के लिए मना कर देते हैं।

(ख) ‘रहिमन देख बड़ेन करै….. तरवारि’ इस दोहे के माध्यम से रहीम क्या शिक्षा दे रहे हैं?

उत्तर – इस दोहे के माध्यम से रहीम जी शिक्षा दे रहे हैं कि हमें बड़े लोगों या वस्तुओं के मोह में आकर अपने छोटे और पुराने मित्रों या साधारण वस्तुओं का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

(ग) रहीम ने वृक्ष और सरोवर की क्या विशेषता बताई है?

उत्तर – रहीम ने वृक्ष और सरोवर की विशेषता बताते हुए कहा है कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते; वे दूसरों के लिए ही इनका संचय करते हैं।

(घ) पाठ में दिए गए दोहे के आधार पर लिखिए कि दूसरे का दुख सुनकर लोग किस प्रकार का व्यवहार करते हैं?

उत्तर – दोहे के अनुसार, दूसरे का दुख सुनकर लोग केवल उसका मज़ा उड़ाते हैं, उसे कम करने में कोई सहायता नहीं करता।

 

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

  1. अच्छे स्वभाव और चरित्रवाले लोगों पर बुरी संगति का कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ता?

उत्तर – अच्छे स्वभाव और चरित्रवाले लोगों पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि उनका आंतरिक चरित्र और नैतिकता इतनी मजबूत होती है कि बाहरी बुराइयाँ उन्हें विचलित नहीं कर पातीं।

  1. परोपकार करने वालों को उनके कार्यों का क्या फल मिलता है?

उत्तर – परोपकार करने वालों को मानसिक शांति मिलती है और समाज में सम्मान प्राप्त होता है। उनका अपना कल्याण स्वाभाविक रूप से हो जाता है।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) ‘बाँटनवारे’ शब्द का अर्थ है-

(i) बाँटने वाला

(ii) देने वाला

(iii) पीसने वाला

(iv) बँट जाने वाला

(ख) दिए गए वर्ण विच्छेद से क्या शब्द बनेगा?

प् + र् + अ + क् + ऋ + त् + इ

(i) परकिरिति

(ii) प्रकृति

(iii) पृक्रति

(iv) परकृति

 

  1. निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा शब्द छाँटकर लिखिए-

लघु, सुई, फल, सरवर, संचहि, उत्तम, चंदन, प्रकृति, भुजंग, धन्य, निज, व्यथा

सुई, फल, सरवर, चंदन, प्रकृति, भुजंग, व्यथा।

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के मानक हिंदी रूप लिखिए-

(क) कहुँ – कहीं

(ख) मुए – मरे हुए

(ग) सरवर – सरोवर

(घ) उनते – उनसे

(ङ) तरवारि – तलवार

(च) काज – कार्य

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची लिखिए-

नर – मनुष्य, आदमी, मानव

तरु – पेड़, वृक्ष, विटप

भुजंग – सर्प, साँप, विषधर

सरोवर – तालाब, जलाशय, ताल

तलवार – असि, खड्ग, करवाल

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. सुई से काम करते व्यक्ति और तलवार का प्रयोग करते व्यक्ति का चित्र बनाइए।

उत्तर – छात्र इसे पाने स्तर पर करें।

  1. आजकल लोग भिखारियों को भीख देने से क्यों सकुचाते हैं? इस बारे में चार वाक्य लिखिए।

उत्तर – लोग सोचते हैं कि वे भीख माँगने को व्यवसाय न बना लें।

समाज में नकली भिखारियों और गिरोहों का डर बना रहता है।

लोग चाहते हैं कि वे मेहनत करके कमाएँ।

अक्सर बच्चों से भीख मँगवाना लोगों को दुखी करता है, इसलिए वे इसे बढ़ावा नहीं देना चाहते।

  1. छोटे भाई बहन को पत्र लिखकर बताइए कि कैसे लोगों पर कुसंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता?

उत्तर – दिनांक – 20 फरवरी, 20XX

घर संख्या – W- 414

टीसीआई, राउरकेला

ओड़िशा

 

प्रिय अनुज,

(शुभाशीष!)

आशा है कि तुम स्वस्थ होगे और मन लगाकर पढ़ाई कर रहे होगे। आज मैंने रहीम जी का एक बहुत ही सुंदर दोहा पढ़ा, जिसके बारे में तुम्हें बताना चाहता हूँ।

रहीम जी कहते हैं— “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।” इसका अर्थ है कि जिन लोगों का स्वभाव और चरित्र ‘उत्तम’ अर्थात् मजबूत और श्रेष्ठ होता है, उन पर बुरी संगति का कोई असर नहीं पड़ता। जिस प्रकार चंदन के पेड़ पर जहरीले साँप लिपटे रहने के बावजूद चंदन अपनी शीतलता और खुशबू नहीं छोड़ता, वैसे ही तुम्हें भी अपने संस्कारों को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि तुम्हारे आस-पास की बुराइयाँ तुम्हें छू भी न सकें।

सदा अच्छे मित्रों का साथ चुनो और अपने चरित्र को चंदन की तरह महकता हुआ रखो।

तुम्हारा अग्रज,

अविनाश

गृहकार्य

  1. पता करके लिखिए कि भारतवर्ष में किन-किन अवसरों पर मेंहदी लगाई जाती है?

उत्तर – भारत में विवाह, सगाई, करवा चौथ, तीज, ईद और मुंडन जैसे शुभ अवसरों पर मेहंदी लगाई जाती है।

  1. हाथ में लगाई जाने वाली मेंहदी का एक डिज़ाइन बनाइए।

उत्तर – छात्र इसे पाने स्तर पर करें।

 

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