“Bharat Maa Ke Laal, Tune Kar Diya Kamaal (Jeevani) – Betu Kansal”, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह पाठ टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा के प्रेरणादायक सफर पर आधारित है।

  1. ऐतिहासिक उपलब्धि –

नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक (2020) की भालाफेंक (Javelin Throw) प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर एक सदी से भी अधिक का इंतज़ार खत्म किया। एथलेटिक्स में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक है। इस जीत ने पूरे देश को उत्सव में डुबो दिया।

  1. बचपन और मोटापे की चुनौती –

नीरज का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के ‘खंडरा’ गाँव में एक किसान परिवार में हुआ। बचपन में लाड़-प्यार और ‘चूरमा’ खाने के कारण उनका वज़न बहुत बढ़ गया था। मोटापे के कारण बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। स्वस्थ होने के लिए उनके चाचा उन्हें पानीपत के स्टेडियम ले गए।

  1. भालाफेंक की शुरुआत –

स्टेडियम में जिम करने के बाद नीरज ‘साई सेंटर’ में खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे। एक दिन कोच जयवीर के कहने पर उन्होंने भाला फेंका। उनकी पहली थ्रो देखकर ही जयवीर समझ गए कि नीरज में ‘नैसर्गिक प्रतिभा’ (Natural Talent) है।

  1. परिवार का त्याग और संसाधन –

एक साधारण किसान परिवार होने के बावजूद, नीरज के चाचा सुरेंद्र चोपड़ा और उनके पिता ने अपने घर के निर्माण और अन्य खर्चों को रोककर सारा ध्यान और संसाधन नीरज के खेल पर लगाया। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब 2015 में उन्हें नेशनल कैंप के लिए बुलाया गया।

  1. सफलताओं का सफर –

नीरज ने कोच नसीम अहमद की देखरेख में खुद को निखारा। 2016 में पोलैंड में हुई ‘वर्ल्ड अंडर-20’ प्रतियोगिता में 86.48 मीटर भाला फेंककर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

  1. मिल्खा सिंह को समर्पण –

स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीरज ने इसे महान धावक मिल्खा सिंह को समर्पित किया। मिल्खा सिंह का सपना था कि ओलंपिक स्टेडियम में भारत का राष्ट्रगान बजे। मिल्खा सिंह के पुत्र जीव मिल्खा ने भी इस उपलब्धि पर नीरज का आभार व्यक्त किया।

  1. युवाओं के लिए प्रेरणा –

नीरज की जीत ने 121 वर्षों का सूखा खत्म किया। उन्होंने पी.टी. उषा और मिल्खा सिंह जैसे दिग्गजों के उन सपनों को पूरा किया जो थोड़े से अंतर से पदक से चूक गए थे। उनके घर की दीवार पर लिखा वाक्य— “मात्र एक विचार आपके जीवन को प्रकाशित कर सकता है”—आज की युवा पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है।

 

मुख्य संदेश –

अनुशासन और लगन – मोटापा घटाने से शुरू हुआ सफर विश्व रिकॉर्ड तक पहुँच सकता है।

पारिवारिक सहयोग – सफलता के पीछे परिवार का त्याग और कोच का सही मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता है।

राष्ट्र गौरव – अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि को देश के महानायकों (जैसे मिल्खा सिंह) को समर्पित करना सच्ची खेल भावना है।

कठिन शब्दार्थ

1  उपलब्धियाँ – प्राप्त की गई सफलताएँ  Achievements

 2  स्वर्ण पदक – सोने का मेडल  Gold Medal

 3  गौरव – मान-सम्मान  Pride / Glory

 4  कारनामा – साहसिक कार्य  Feat / Great deed

 5  एथलीट – खिलाड़ी  Athlete

 6  नैसर्गिक – प्राकृतिक  Natural

 7  प्रतिभा – हुनर  Talent

 8  संसाधन – साधन  Resources

 9  स्पर्धाओं – प्रतियोगिताओं  Competitions

 10  विजय – जीत  Victory

 11  साकार – सच करना  Realize / To make true

 12  एथलेटिक्स – खेलकूद की विधा  Athletics

 13  प्रतीक्षा – इंतज़ार  Wait

 14  स्वर्ण अक्षरों – सुनहरे शब्दों  Golden letters

 15  इतिहास – बीता हुआ समय  History

 16  साधारण – मामूली  Ordinary / Simple

 17  मोटापा – चर्बी बढ़ना  Obesity

 18  चिढ़ाया – मज़ाक उड़ाना  Teased

 19  चिंतित – परेशान  Worried

 20  व्यक्तित्व – पहचान / स्वभाव  Personality

 21  भनक – गुप्त जानकारी  Inkling / Hint

 22  अभ्यास – प्रैक्टिस  Practice

 23  निर्देशन – मार्गदर्शन  Guidance / Direction

 24  पुश्तैनी – पूर्वजों का  Ancestral

 25  निर्णय – फैसला  Decision

 26  अविश्वसनीय – जिस पर यकीन न हो  Unbelievable

 27  प्रकाशित – रोशन  Illuminated / Brightened

 28  उपयुक्त – सही  Appropriate / Suitable

 29  समर्पित – भेंट करना  Dedicated

 30  आत्मविश्वास – खुद पर भरोसा  Self-confidence

 31  अवसर – मौका  Opportunity

 32  सुविधाएँ – सहूलियत  Facilities

 33  प्रदान – देना  Provide / Bestow

 34  संयुक्त परिवार – बड़ा परिवार  Joint family

 35  कृषक – किसान  Farmer

 36  आग्रह – निवेदन  Request / Urge

 37  विकसित – निखरा हुआ  Developed

 38  भविष्य – आने वाला समय  Future

 39  प्रशंसा – तारीफ  Praise

 40  आभार – कृतज्ञता  Gratitude / Thanks

 41  मात्र – केवल  Only

 42  असंभव – जो न हो सके  Impossible

 43  दृश्य – नज़ारा  Sight / Scene

 44  यद्यपि – हालाँकि  Although

 45  क्षण – पल  Moment

 46  सुनहरा – सोने जैसा  Golden

 47  अनेक – बहुत सारे  Many

 48  स्वस्थ – तंदुरुस्त  Healthy

 49  भूमिका – रोल  Role

 50  प्रार्थना – इबादत / विनती  Prayer

 51  सपना – स्वप्न  Dream

 52  परंपरा – रीति-रिवाज़  Tradition

 53  नियमित – रोज़ाना  Regular

 54  कौशल – हुनर  Skill

 55  प्रेरणा – सीख  Inspiration

 56  अंततः – आखिर में  Eventually / Finally

 57  अनिवार्य – ज़रूरी  Compulsory

 58  योग्य – काबिल  Capable

 59  सम्मान – आदर  Respect

 60  उत्सव – त्योहार  Celebration

 61  राष्ट्रगान – देश का गीत  National Anthem

 62  समर्पण – अर्पण  Dedication

 63  सवेरा – सुबह  Dawn / Morning

 64  दीवार – भित्ति  Wall

 65  विचार – सोच  Thought

 66  आवश्यकता – ज़रूरत  Requirement

 67  अंतिम – आखिरी  Final

 68  आँचल – पल्लू (यहाँ देश)  Lap / Shelter

 69  सहयोग – मदद  Cooperation

 70  निखार – सुधार  Refinement

 71  योग्यता – काबिलियत  Eligibility / Merit

 72  परिचित – जानकार  Known / Familiar

 73  प्रोत्साहन – उत्साह बढ़ाना  Encouragement

 74  संघर्ष – मेहनत  Struggle

 75  विशिष्ट – खास  Special

 76  आकर्षण – खिंचाव  Attraction

 77  नतीजा – परिणाम  Consequence

 78  अभूतपूर्व – अनोखा  Unprecedented

 79  एकजुट – मिलकर  United

 80  मंजिल – लक्ष्य  Destination

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

लाडले, अंततः, स्वर्ण, अक्षरों, उत्सव, शक्कर, परिणाम, चिढ़ाया, जिमनेज़ियम, स्वस्थ, व्यक्तित्व, अभ्यास, निर्देशन, नैसर्गिक, संसाधन, संयुक्त, पुश्तैनी, निर्णय, स्पर्धाओं, प्रशंसा, अविश्वसनीय, समर्पित, यद्यपि

लाडले – Laad-lay – ‘ड’ पर थोड़ा ज़ोर दें

अंततः – An-ta-tah – अंत में ‘ह’ की हल्की आवाज़ (विसर्ग)

स्वर्ण – Svar-na – “‘स’ आधा है –  ‘व’ के साथ जोड़ें”

अक्षरों – Ak-sha-ron – ‘क्ष’ (K+Sha) का स्पष्ट प्रयोग

उत्सव – Ut-sav – ‘त्’ को जल्दी बोलें

शक्कर – Shak-kar – आधे ‘क’ पर दबाव दें

परिणाम – Pa-ri-naam – ‘ण’ (Na) का साफ़ उच्चारण

चिढ़ाया – Chi-dhaa-yaa – ‘ढ़’ (Flap sound) का ध्यान रखें

जिमनेज़ियम – Jim-nay-zi-um – ‘ज़’ (Z sound) का प्रयोग करें

स्वस्थ – Svas-th – ‘स’ और ‘थ’ आधे हैं

व्यक्तित्व – Vyak-ti-tva – Vyak-ti-tva (आधा ‘क’ और ‘त’)

अभ्यास – Abhy-aas – ‘भ’ और ‘य’ को मिलाकर बोलें

निर्देशन – Nir-day-shan – ‘र’ की ध्वनि ‘दे’ से पहले आएगी

नैसर्गिक – Nai-sar-gik – ‘नै’ पर ज़ोर दें

संसाधन – San-saa-dhan – ‘न’ की हल्की नासिक ध्वनि

संयुक्त – San-yuk-t – ‘यु’ और ‘क्त’ को जोड़कर बोलें

पुश्तैनी – Push-tai-nee – ‘श’ आधा है (Sh sound)

निर्णय – Nir-nay – ‘र’ की आवाज़ ‘ण’ से पहले

स्पर्धाओं – Spar-dhaa-on – “‘स’ आधा है –  ‘प’ के साथ बोलें”

प्रशंसा – Pra-shan-saa – ‘प्र’ (Pra) और ‘श’ (Sha)

अविश्वसनीय – A-vish-va-sa-nee-ya – टुकड़ों में बोलें – अ-विश-वस-नीय

समर्पित – Sa-mar-pit – ‘र’ की आवाज़ ‘प’ से पहले

यद्यपि – Yad-ya-pi – ‘द्य’ (D+Ya) का मिला-जुला स्वर

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) नीरज के किस कारनामे से देश को उत्सव में डूब जाने का अवसर मिला?

उत्तर – नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक की भालाफेंक (Javelin Throw) प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इस ऐतिहासिक जीत के कारनामे ने पूरे देश को उत्सव में डूब जाने का अवसर दिया।

(ख) क्या कारण था कि नीरज का वज़न बढ़ गया?

उत्तर – बचपन में नीरज की दादी उन्हें बड़े प्यार से मलाई, देशी घी और शक्कर से बना ‘चूरमा’ खिलाती थीं, जिसके कारण 14 वर्ष की आयु में उनका वज़न 80 किलोग्राम से अधिक हो गया था।

(ग) नीरज को पहली बार भाला फेंकते देख श्री जयवीर ने क्या अनुभव किया?

उत्तर – नीरज को पहली बार भाला फेंकते देख श्री जयवीर ने अनुभव किया कि नीरज में ‘नैसर्गिक प्रतिभा’ (Natural Talent) है।

(घ) वर्ष 2016 में नीरज ने किन दो बड़ी खेल स्पर्धाओं में भाग लिया?

उत्तर – नीरज ने 2016 में रियो ओलंपिक में योग्यता सिद्ध करने के लिए और पोलैंड में हुई आई.ए.ए.एफ. वर्ल्ड अंडर-20 प्रतियोगिता में भाग लिया।

(ङ) मिल्खा सिंह जी को स्वर्ण पदक समर्पित करते हुए नीरज ने क्या कहा?

उत्तर – नीरज ने कहा कि मिल्खा सिंह जी ओलंपिक स्टेडियम में भारत का राष्ट्रगान सुनना चाहते थे। यद्यपि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, पर उनका सपना पूरा हो गया।

लिखित

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) नीरज के साथी बच्चे उन्हें क्यों चिढ़ाया करते थे?

(i) उनके चूरमा खाए जाने के कारण

(ii) उनकी दादी के प्यार के बाद

(iii) उनके मोटापे के कारण

(iv) उनके खेल – कूद न करने के कारण

(ख) नीरज परिचित चेहरा कब बन गए थे?

(i) 2015 में नेशनल कैंप में बुलावा आने के बाद

(ii) 2016 में रियो ओलंपिक में योग्यता सिद्ध करने के कारण

(iii) टोकियो ओलंपिक में किसी के उनके निकट न पहुँच पाने के बाद

(iv) आई. ए. ए. एफ. वर्ल्ड अंडर 20 प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद

(ग) नीरज के पिता को क्या अविश्वसनीय लग रहा था?

(i) पत्रकारों का नीरज को सिर आँखों पर बैठाना

(ii) नीरज द्वारा स्वर्ण पदक को मिल्खा सिंह जी को समर्पित करना

(iii) बेटे का टोकियो ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण जीतना

(iv) ओलंपिक स्टेडियम में राष्ट्रगान बजना

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) नीरज चोपड़ा ने अंततः कौन सी प्रतीक्षा समाप्त की?

उत्तर – नीरज चोपड़ा ने एथलेटिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने की 121 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा समाप्त की।

(ख) नीरज के चाचा उनको पानीपत के खेलकूद स्टेडियम में क्यों लेकर गए?

उत्तर – नीरज के चाचा उन्हें मोटापे से निजात दिलाने, स्वस्थ करने और एक अच्छा व्यक्तित्व विकसित करने के लिए स्टेडियम लेकर गए थे।

(ग) घरवालों को नीरज के एथलीट होने का पता कैसे चला?

उत्तर – जब नीरज ने अपने जिले के लिए कई प्रतियोगिताएँ जीतीं और उनका चित्र समाचार पत्र में छपा, तब घरवालों को उनके एथलीट होने का पता चला।

(घ) नीरज को खेल में आगे बढ़ाने के लिए उसके परिवार ने उसका साथ कैसे दिया?

उत्तर – परिवार ने अपने पुश्तैनी घर के निर्माण सहित अन्य सभी खर्चों को रोककर सारा ध्यान और संसाधन नीरज के खेल पर लगाने का निर्णय लिया।

(ङ) टोकियो ओलंपिक से पहले नीरज ने पिता से क्या कहा और क्या कर दिखाया?

उत्तर – टोक्यो ओलंपिक से पहले नीरज ने अपने पिता से कहा था कि उन्हें स्वर्ण पदक जीतने का पूरा विश्वास है और उन्होंने अंततः स्वर्ण जीतकर यह कर दिखाया।

 

  1. पाठ के आधार पर अथवा x का चिह्न लगाइए-

(क) दादी नीरज को मलाई, देशी घी और शक्कर से बना चूरमा खिलाती थी।

(ख) नीरज का जन्म पानीपत शहर में हुआ था। x (गाँव खंडरा में हुआ)

(ग) नीरज के चाचा उन्हें पानीपत के खेलकूद स्टेडियम में ले गए।

(घ) नीरज ने श्री जयवीर के निर्देशन में भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किया।

(ङ) 2016 के रियो ओलंपिक में नीरज अपनी योग्यता सिद्ध न कर सके।

(च) पत्रकारों ने नीरज को सिर आँखों पर बैठाया।

(छ) पिता का सपना साकार करने पर जीव मिल्खा ने नीरज का आभार जताया।

(ज) नीरज ने देश का आँचल खुशियों से भर दिया।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

नीरज चोपड़ा की सफलता के आधार पर लिखिए कि उचित अवसर का लाभ उठाकर ही जीवन में सफलता पाई जा सकती है।

उत्तर – नीरज चोपड़ा की सफलता यह सिखाती है कि प्रतिभा हर किसी में हो सकती है, लेकिन सही समय पर मिला ‘अवसर’ और परिवार का ‘सहयोग’ उसे सफलता तक पहुँचाता है। यदि उनके चाचा उन्हें स्टेडियम न ले जाते या परिवार संसाधनों की कमी का बहाना बनाता, तो देश को यह गौरव प्राप्त न होता। अतः उचित अवसर को पहचानना और उसका लाभ उठाना ही सफलता की कुंजी है।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) ‘राष्ट्रगान’ शब्द कैसे बना है?

(i) राष्ट्र के गान

(ii) राष्ट्र से गान

(iii) राष्ट्र को गान

(iv) राष्ट्र का गान

(ख) छू कर निकल गया’ वाक्यांश का क्या अर्थ है?

(i) आकर छुआ और चला गया

(ii) छूने के बाद रुका नहीं

(iii) पास से चला गया

(iv) निकलने के लिए छूना पड़ा

(ग) यदि ‘मोटा से मोटापा’ तो ‘बूढ़ा’ से क्या शब्द बनेगा-

(i) बूढ़पा

(ii) बुढ़ापा

(iii) बुढ़ियापा

(iv) बोढ़ापा

 

  1. रचना के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों के भेद लिखिए-

(क) वहाँ नीरज ने भाला फेंकने का अभ्यास करना आरंभ कर दिया।

सरल वाक्य

(ख) नीरज इतने मोटे हो गए थे कि साथी बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे।

मिश्रित वाक्य

(ग) नीरज ने भाला उठाया और फेंक दिया।

संयुक्त वाक्य

(घ) वे चाहते थे कि नीरज एक अच्छा व्यक्तित्व विकसित करे।

मिश्रित वाक्य

(ङ) कोच नसीम अहमद की देखरेख में नीरज एक अच्छे खिलाड़ी बन गए।

सरल वाक्य

(च) नीरज ने अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा तथा देश को उत्सव में डूबने का अवसर दिया।

संयुक्त वाक्य

 

  1. निम्नलिखित प्रेरणार्थक क्रियाओं का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

(क) खिलाना – माँ ने बच्चे को दूध खिलाया।

(ख) चिढ़ाना – हमें किसी को उसके शारीरिक रूप के लिए नहीं चिढ़ाना चाहिए।

(ग) लिखवाना – मैंने प्रधानाचार्य से पत्र लिखवाया।

(घ) समझाना – कोच ने नीरज को खेल की तकनीक समझाना शुरू किया।

(ङ) बढ़ाना – हमें अपने देश का मान बढ़ाना चाहिए।

 

  1. सही मुहावरा चुनकर रिक्त स्थानों में लिखिए-

स्वर्ण अक्षरों में लिखवाना, निकट तक न पहुँचना, भनक तक न लगने देना, आँचल खुशियों से भर देना, सिर आँखों पर बैठाना

(क) गुप्ता जी के पड़ोस में चोरी हो गई और उन्हें भनक तक न लगेए।  

(ख) कारगिल विजय का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिख गया है।

(ग) ओलंपिक में पदक लाने वाले खिलाड़ियों को देश ने सिर आँखों पर बिताया

(घ) दादी माँ को तीर्थयात्रा करवाकर जीतेश ने उनका आँचल खुशियों से भर दिया

(ङ) किसी भी खिलाड़ी का भाला नीरज के फेंके गए भाले के निकट तक न पहुँच

 

  1. निम्नलिखित प्रत्ययों से शब्द बनाकर लिखिए-

(क) विकास + इत = विकसित

(ख) परिचय + इत = परिचित

(ग) समर्पण + इत = समर्पित

(घ) प्रकाश + इत = प्रकाशित

(ङ) विश्वास + अनीय = विश्वसनीय

(च) निंदा + अनीय = निंदनीय

(छ) दर्शन + ईय = दर्शनीय

(ज) स्मरण + ईय = स्मरणीय

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. नीरज चोपड़ा के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर उसे बधाई पत्र लिखिए।

उत्तर – बधाई पत्र

भारतवीर, नीरज चोपड़ा

प्रिय नीरज, टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर आपने इतिहास रच दिया है। आपकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर पूरा देश गौरवान्वित है। आपको बहुत-बहुत बधाई!

आपका प्रशंसक

अविनाश रंजन गुप्ता

  1. स्वर्ण पदक जीतकर आने पर गाँववालों ने नीरज का स्वागत कैसे किया होगा- एक अनुच्छेद लिखिए। उत्तर – जब नीरज चोपड़ा स्वर्ण पदक जीतकर अपने गाँव ‘खंडरा’ पहुँचे होंगे, तो वहाँ का नज़ारा किसी बड़े उत्सव जैसा रहा होगा। पूरे गाँव को फूलों और तिरंगों से सजाया गया होगा। जैसे ही नीरज की गाड़ी गाँव की सीमा पर पहुँची होगी, ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘भारत माता की जय’ के नारों से आसमान गूँज उठा होगा।

गाँव के बुजुर्गों ने नीरज की आरती उतारी होगी और उन्हें आशीर्वाद दिया होगा। युवाओं ने उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया होगा और पूरे गाँव में विजय जुलूस निकाला होगा। नीरज की दादी और माता जी ने उन्हें गले लगाकर अपनी आँखों में खुशी के आँसू लिए उनका पसंदीदा ‘चूरमा’ खिलाया होगा। गाँव की हर गली में मिठाइयाँ बाँटी गई होंगी और देर रात तक जश्न का माहौल रहा होगा। खंडरा गाँव का वह साधारण लड़का आज पूरे देश का ‘लाडला’ बन गया था, और गाँववालों के लिए यह केवल नीरज की जीत नहीं, बल्कि उनकी मिट्टी के गौरव की जीत थी। 

  1. नीरज चोपड़ा पर जानकारी एकत्र करके एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाइए।

उत्तर – छात्र अपने शिक्षक और इंटरनेट की मदद से इसे पूरा करें।  

गृहकार्य

नीरज के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर आने का समाचार यदि अखबार में छपवाना हो तो कैसे लिखा जाएगा। संक्षेप में लिखिए।

“स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया इतिहास – नीरज चोपड़ा ने टोक्यो में जीता गोल्ड”

पानीपत के खंडरा गाँव के लाल ने भालाफेंक में 87.58 मीटर थ्रो के साथ भारत की झोली में डाला पहला एथलेटिक्स स्वर्ण। मिल्खा सिंह का सपना हुआ पूरा।

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