पाठ का सारांश
यह पाठ फिल्म ‘दंगल’ का कथा रूपांतरण है, जो प्रसिद्ध भारतीय पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों, विशेषकर गीता फोगाट के संघर्ष और सफलता की वास्तविक कहानी पर आधारित है।
यहाँ कहानी का सारांश दिया गया है –
- सपने का नया रूप
हरियाणा के बलाली गाँव के पहलवान महावीर फोगाट का सपना था कि उनका बेटा देश के लिए कुश्ती में स्वर्ण पदक जीते। लेकिन जब उनके घर चार बेटियों ने जन्म लिया, तो उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह जाएगा। एक दिन जब उनकी बेटियों, गीता और बबीता ने पड़ोस के लड़कों की पिटाई की, तो महावीर को अहसास हुआ कि “छोरी छोरों से कम नहीं होतीं”। उन्होंने अपनी बेटियों को ही विश्वस्तरीय पहलवान बनाने का संकल्प लिया।
- कठिन परिश्रम और सामाजिक विरोध
महावीर ने समाज और अपनी पत्नी के विरोध के बावजूद बेटियों को कुश्ती की ट्रेनिंग देना शुरू किया। उन्होंने बेटियों के बाल कटवा दिए और उन्हें लड़कों के कपड़े पहनाए। गाँव के लोग उनका मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन महावीर अडिग रहे। शुरुआत में गीता-बबीता को यह ट्रेनिंग बोझ लगी, लेकिन अपनी एक सहेली के बाल-विवाह के दुख को देखकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके पिता उन्हें एक बेहतर जीवन देना चाहते हैं।
- सफलता की सीढ़ी और पिता-पुत्री का द्वंद्व
गीता ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और उसका चयन ‘नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी’ (पटियाला) में हो गया। वहाँ के कोच प्रमोद कदम की तकनीक महावीर के पारंपरिक तरीकों से अलग थी। एकेडमी के वातावरण में ढलकर गीता अपने पिता के सिखाए दाँव-पेच भूलने लगी और उनके बीच दूरियाँ बढ़ गईं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में लगातार हार मिलने पर गीता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पिता से माफी माँगकर दोबारा उनके मार्गदर्शन में तैयारी शुरू की।
- महावीर का संघर्ष और ‘जीत का मंत्र’
महावीर चोरी-छिपे पटियाला जाकर गीता को ट्रेनिंग देने लगे। उन्होंने गीता के पुराने मैचों की सीडी (CD) देखकर उसकी कमियों को पहचाना और उसे ‘बचाव’ (Defense) के बजाय ‘आक्रमण’ (Attack) करके खेलने की सलाह दी। जब कोच ने महावीर पर प्रतिबंध लगवा दिया, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी और गीता को जीत का मंत्र दिया— “चाँदी जीती तो लोग भूल जाएँगे, सोना जीती तो मिसाल बन जाएगी।”
- राष्ट्रमंडल खेल 2010 और ऐतिहासिक जीत
2010 के राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के फाइनल में गीता का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की पहलवान से था। कोच की गलत रणनीति और पिता की अनुपस्थिति (कोच ने महावीर को एक कमरे में बंद करवा दिया था) के बावजूद, गीता ने अंतिम क्षणों में अपने पिता द्वारा सिखाया हुआ पाँच अंकों वाला दाँव लगाया और स्वर्ण पदक जीत लिया।
निष्कर्ष
जब महावीर स्टेडियम पहुँचे, तो गीता ने अपना पदक उनके हाथों में रख दिया। महावीर के मुँह से निकले एक शब्द “शाबाश” ने गीता के दस वर्षों के परिश्रम को सफल कर दिया। यह कहानी पिता के अटूट विश्वास और पुत्री की निष्ठा की जीत है, जो आधुनिक भारत में बेटियों की शक्ति का प्रतीक है।
मुख्य संदेश –
- लैंगिक समानता – लड़कियाँ किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं।
- दृढ़ निश्चय – यदि इंसान ठान ले, तो संसाधनों की कमी (जैसे मैट की जगह गद्दे) भी उसे रोक नहीं सकती।
- गुरु का महत्त्व – सही मार्गदर्शन और तकनीक ही सफलता की कुंजी है।
कठिन शब्दार्थ
1 पहलवान – कुश्ती लड़ने वाला Wrestler
2 राष्ट्रिय स्तर – देश के स्तर पर National level
3 स्वप्न – सपना Dream
4 विरुद्ध – खिलाफ Against / Opposite
5 अपशब्द – बुरे शब्द / गाली Abusive words / Slang
6 बरबाद – नष्ट करना Ruined / Wasted
7 धुन के पक्के – दृढ़ निश्चयी Determined / Resolute
8 असहज – जो सहज न हो Uncomfortable / Uneasy
9 हौसला – उत्साह / साहस Courage / Morale
10 खुराक – भोजन की मात्रा Diet / Dose
11 बाधा – रुकावट Obstacle / Hurdle
12 कर्तव्य – फर्ज Duty / Obligation
13 ममता – माँ का प्रेम Maternal love / Affection
14 निहारना – ध्यान से देखना To gaze / Observe
15 विवाहोत्सव – विवाह का उत्सव Wedding celebration
16 सौभाग्यशाली – भाग्यवान Fortunate / Lucky
17 निखार – सुधार / चमक Refinement / Improvement
18 श्रेष्ठ – सबसे अच्छा Superior / Best
19 प्रशंसा – तारीफ Praise / Appreciation
20 प्रतियोगिताओं – होड़ / मुकाबले Competitions
21 कनिष्ठ – छोटा / जूनियर Junior
22 वरिष्ठ – बड़ा / सीनियर Senior
23 अभिनंदन – स्वागत Welcoming / Felicitation
24 मैडल – पदक Medal
25 उपेक्षा – ध्यान न देना Neglect / Disregard
26 तकनीक – काम करने का ढंग Technique
27 वातावरण – माहौल Atmosphere / Environment
28 अंतरराष्ट्रीय – देशों के बीच International
29 चैंपियनशिप – श्रेष्ठता का मुकाबला Championship
30 आश्चर्यचकित – हैरान Astonished / Surprised
31 शिकन – माथे पर बल Frown / Wrinkle
32 मनोबल – मन की शक्ति Morale / Mental strength
33 हतोत्साहित – उत्साह कम करना Discouraged / Dejected
34 दृष्टिकोण – देखने का नज़रिया Viewpoint / Perspective
35 विचलित – बेचैन Disturbed / Restless
36 मैल – गंदगी (यहाँ मन का भेद) Dirt / Malice
37 प्रतिबंध – रोक लगाना Ban / Restriction
38 बचाव – आत्म-रक्षा Defense
39 आक्रमण – हमला Attack / Offense
40 मंत्र – गुप्त तरीका Mantra / Success secret
41 विश्वविजयी – दुनिया को जीतने वाला World conqueror
42 श्रेय – यश / नाम Credit
43 दीर्घा – बैठने की जगह (Gallery) Gallery / Stand
44 व्यंग्य – ताना मारना Sarcasm / Satire
45 मिसाल – उदाहरण Example / Precedent
46 हावी होना – प्रभाव डालना To dominate
47 हक्के-बक्के – हैरान रह जाना Stunned / Dumbfounded
48 हताश – निराश Hopeless / Despaired
49 राष्ट्रगान – देश का गान National Anthem
50 गौरव – गर्व Pride / Glory
51 आत्मविश्वास – खुद पर भरोसा Self-confidence
52 अनसुनी – न सुना गया Ignored / Unheard
53 पदक – इनाम का सिक्का Medal
54 रुँधा हुआ गला – भावुक होकर गला भर आना Choked voice
55 निष्ठा – श्रद्धा / भक्ति Dedication / Devotion
56 साकार – पूरा होना Realized / Materialized
57 होड़ – प्रतियोगिता Competition / Rivalry
58 तस्वीर – चित्र (यहाँ दृश्य) Picture / Image
59 रूपांतरण – रूप बदलना Transformation / Adaptation
60 निर्देशक – दिशा दिखाने वाला Director
61 खचाखच – पूरी तरह भरा हुआ Jam-packed / Crowded
62 सेकिंड – समय की इकाई Second
63 दाँव – कुश्ती की चाल Maneuver / Trick
64 कमेटी – समिति Committee
65 क्षमा – माफ़ी Forgiveness / Pardon
66 जिले – प्रशासनिक क्षेत्र Districts
67 अधिकारी – अफ़सर Officer
68 अंक – नंबर Marks / Points
69 वर्ग – श्रेणी Class / Category
70 अभ्यास – प्रैक्टिस Practice / Exercise
71 बंधन – रुकावट / रस्सी Bondage / Constraint
72 अकादमी – शिक्षण संस्थान Academy
73 चक्र – घेरा / राउंड Round / Cycle
74 टॉस – सिक्का उछालना Toss
75 विजेता – जीतने वाला Winner
76 निर्णय – फैसला Decision
77 अध्यक्ष – प्रधान Chairperson / President
78 चेयरमैन – सभापति Chairman
79 रेसलिंग – कुश्ती Wrestling
80 प्रिंसिपल – प्रधानाचार्य Principal
81 प्रशंसा – बड़ाई Commendation
82 भाग्य – किस्मत Fate / Destiny
83 प्रोटीन – एक पोषक तत्व Protein
84 सजग – सजा हुआ Adorned / Decorated
85 परवाह – चिंता Care / Concern
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
राष्ट्रीय, विवाहोत्सव, सौभाग्यशाली, सम्मानजनक, दृष्टि, कनिष्ठ, वरिष्ठ, अभिनंदन, अंतरराष्ट्रीय, हतोत्साहित
दृष्टिकोण, प्रतिबंध, विश्वविजेता, श्रेय, दर्शकदीर्घा, आत्मविश्वास राष्ट्रगान, निष्ठा
राष्ट्रीय – Raash-tree-ya
हतोत्साहित – Ha-tot-saa-hit
विवाहोत्सव – Vi-vaa-hot-sav
दृष्टिकोण – Drish-ti-kon
सौभाग्यशाली – Sau-bhag-ya-sha-lee
प्रतिबंध – Pra-ti-bandh
सम्मानजनक – Sam-maan-ja-nak
विश्वविजेता – Vish-va-vi-jay-taa
दृष्टि – Drish-ti श्रेय – Shray
कनिष्ठ – Ka-nish-th
दर्शकदीर्घा – Dar-shak-deer-ghaa
वरिष्ठ – Va-rish-th
आत्मविश्वास – Aat-ma-vish-vaas
अभिनंदन – Ab-hi-nan-dan
राष्ट्रगान – Raash-tra-gaan
अंतरराष्ट्रीय – An-tar-raash-tree-ya
निष्ठा – Nish-thaa
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) किस घटना से पता चलता है कि महावीर अपनी बेटियों से बहुत प्रेम करते थे?
उत्तर – जब महावीर कुश्ती के कठिन अभ्यास के बाद थक-हार कर सोई हुई अपनी बेटियों के पैर दबाते थे, तो इससे उनके मन में बेटियों के प्रति अगाध प्रेम और ममता का पता चलता है।
(ख) सहेली ने क्या कहा जिससे गीता और बबीता की आँखें खुल गईं?
उत्तर – सहेली ने कहा कि वे दोनों बहुत सौभाग्यशाली हैं कि उनके पिता उन्हें कुछ बनाना चाहते हैं, वरना गाँव की लड़कियों का भाग्य तो 14-15 साल में शादी करके चूल्हा-चौका करने तक सीमित है।
(ग) कोच के किस व्यवहार से लगता है कि वे नहीं चाहते थे कि गीता जीते?
उत्तर – कोच प्रमोद कदम गीता को प्रोत्साहित करने के स्थान पर हतोत्साहित करते थे। वे कहते थे कि हर कोई अंतरराष्ट्रीय खेलों में जीतने के लिए नहीं बना होता। साथ ही, उन्होंने गीता को उसके पिता से मिलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
(घ) राष्ट्रमंडल खेलों के लिए महावीर ने गीता को जीत का क्या मंत्र दिया?
उत्तर – महावीर ने कहा— “उस एक सेकंड का इंतज़ार करो जब सामने वाला गलती करे। अगर तुम उस एक सेकंड का सही प्रयोग कर पाओ तो जीत तुम्हारी।”
(ङ) फ़ाइनल मैच से पहले गीता को पिता के कहे कौन से शब्द याद आए?
उत्तर – गीता को याद आया— “चाँदी जीती तो लोग भूल जाएँगे। सोना जीती तो मिसाल बन जाएगी। मिसालें दी जाती हैं, भूली नहीं जातीं।”
(च) महावीर गीता को खेलते हुए क्यों नहीं देख सके?
उत्तर – क्योंकि कोच प्रमोद कदम के इशारे पर एक व्यक्ति महावीर को धोखे से रेसलिंग फेडरेशन के चेयरमैन से मिलवाने के बहाने स्टेडियम से दूर ले गया और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया।
लिखित
- सही विकल्प पर ✓ लगाइए-
(क) बेटियों द्वारा एक लड़के को पीटे जाने की बात सुनकर महावीर ने क्या सोचा?
(i) बेटियों को नियंत्रण में करना चाहिए।
(ii) लड़कों को उचित व्यवहार करना सिखाना चाहिए।
(iii) बेटियाँ उनका सपना पूरा कर सकती हैं।✓
(iv) उन्हें स्वयं बेटियों को स्कूल छोड़ने जाना चाहिए।
(ख) प्रिंसिपल ने गीता और बबीता की प्रशंसा की क्योंकि-
(i) कुश्ती को सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाता था।
(ii) गाँववाले गीता और बबीता पर गर्व करते थे।
(iii) वे गाँव से बाहर जाकर भी कुश्ती लड़ रही थीं।
(iv) उन्होंने स्कूल का नाम रोशन किया था।✓
(ग) स्पोट्र्स एकेडमी के कोच के किस व्यवहार से महावीर दुखी हुए?
(i) कोच गीता की योग्यता नहीं पहचान रहा था।
(ii) कोच का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था।
(iii) कोच उनकी उपेक्षा कर रहा था।✓
(iv) कोच उन्हें पहलवान नहीं समझ रहा था।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) लड़कियों को पहलवानी करता देखकर परिवार और गाँववालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर – परिवार और गाँववालों ने प्रारंभ में बहुत विरोध किया। वे कहते थे कि महावीर अपनी बेटियों की ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं और लड़कियों का कुश्ती लड़ना समाज के विरुद्ध है।
(ख) पहलवानी सीखने में पुत्रियों की सुविधा के लिए महावीर ने क्या-क्या किया?
उत्तर – महावीर ने बेटियों के बाल कटवा दिए, उन्हें लड़कों के कपड़े पहनाए और उनकी खुराक के लिए घर में मांस-मछली खुद पकाना शुरू किया ताकि उन्हें प्रोटीन मिल सके और वे मज़बूत बन सकें।
(ग) महावीर ने गीता को राष्ट्रीय खेलों की तैयारी कैसे कराई?
उत्तर – महावीर ने ज़िले के अधिकारियों द्वारा मैट देने से मना करने पर सादे गद्दों पर ही अभ्यास कराना शुरू कर दीया। उन्होंने लैपटॉप और वीडियो सीडी के ज़रिए तकनीकी बारीकियों को समझाकर अभ्यास कराया।
(घ) स्पोर्ट्स एकेडमी जाकर गीता के व्यवहार में क्या बदलाव आया?
उत्तर – स्पोर्ट्स एकेडमी जाकर गीता कोच के प्रभाव में आ गई। उसने अपने पिता के सिखाए दाँव-पेच छोड़ दिए, पिता से दूरियाँ बना लीं और अपनी अनुशासनहीनता के कारण अंतरराष्ट्रीय मैच हारने लगी। यहाँ तक कि उसे अपने हार पर भी कोई खास पछतावा नहीं हुआ।
(ङ) महावीर ने दसवें अंतर्राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए अपनी बेटी की किस प्रकार सहायता की?
उत्तर – महावीर ने दसवें अंतर्राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए अपनी बेटी गीता के पुराने मैचों की सी.डी. देखी, सिनेमाहॉल किराए पर लेकर उसकी कमियों को पहचाना और उसे ‘बचाव’ (Defence) के बजाय ‘आक्रमण’ (Attack) करना सिखाया।
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
बड़े उत्साह से सज-धज कर अपनी एक सहेली के विवाहोत्सव में जाने पर गीता और बबीता को पता चला कि उनकी सखी पंद्रह वर्ष की आयु में विवाह कर दिए जाने से बहुत दुखी है। दोनों बहनों को उनकी सहेली ने बताया कि वे दोनों बहनें बहुत सौभाग्यशाली हैं कि उनके पिता उन्हें कुछ बनाना चाहते हैं।
गाँव की अन्य लड़कियों का भाग्य इतना अच्छा नहीं है। यह सुनकर गीता और बबीता की आँखें खुल गईं। दोनों ने पिता के साथ सहयोग करना शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी कुश्ती में निखार आने लगा। रोहतक में हुए कुश्ती के एक मुकाबले में जब गीता ने वहाँ के सबसे श्रेष्ठ पहलवान को हराया तो घर आने पर कुश्ती का विरोध करने वाली उसकी माँ ने उसकी आरती उतारी। घटना से गाँव में दोनों बहनों का सम्मान तो बढ़ा ही, स्कूल में भी उन्हें सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाने लगा।
(क) गीता और बबीता की सखी दुखी क्यों थी?
उत्तर – गीता और बबीता की सखी दुखी थी क्योंकि 15 वर्ष की कम उम्र में उसका विवाह कर दिया गया था।
(ख) सखी ने गीता और बबीता को सौभाग्यशाली क्यों कहा है?
उत्तर – सखी ने गीता और बबीता को सौभाग्यशाली कहा क्योंकि उनके पिता महावीर जी ने उन्हें समाज की कुप्रथाओं से बचाकर एक सफल पहलवान बनाना चाहते थे।
(ग) रोहतक से कुश्ती में जीतकर आने पर माँ ने गीता के साथ कैसा व्यवहार किया?
उत्तर – रोहतक से कुश्ती में जीतकर आने पर माँ ने, जो पहले विरोध करती थी, गीता की आरती उतारकर उसका स्वागत किया।
(घ) किस घटना के बाद गीता और बबीता को सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाने लगा?
उत्तर – रोहतक के मुकाबले में जब गीता ने वहाँ के सबसे श्रेष्ठ पहलवान को हरा दिया उस जीत के बाद गीता और बबीता को सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाने लगा।
(ङ) ‘आँखे खुल जाना’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर – अपनी सहेली की दुर्दशा देखकर गीता और बबीता की आँखें खुल गईं।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
- पिता की लगन और पुत्री की निष्ठा की जीत किसे कहा गया है?
उत्तर – ‘पिता की लगन और पुत्री की निष्ठा की जीत’ गीता फोगाट द्वारा 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में जीते गए स्वर्ण पदक (Gold Medal) को कहा गया है।
- पिता की लगन – महावीर फोगाट ने समाज के विरोध, संसाधनों की कमी और कोच की उपेक्षा के बावजूद अपनी बेटियों को विश्वस्तरीय पहलवान बनाने के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया। उनकी हार न मानने वाली ज़िद ही ‘लगन’ थी।
- पुत्री की निष्ठा – गीता ने अपने पिता के कठोर प्रशिक्षण को स्वीकार किया, अपनी गलतियों से सीखा और अंततः पिता के सिखाए दाँव-पेच और उनके विश्वास पर अडिग रहकर जीत हासिल की। उनकी यह मेहनत और पिता के प्रति अटूट विश्वास ही ‘निष्ठा’ थी।
- किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किन गुणों का होना आवश्यक है?
उत्तर – पाठ के आधार पर किसी भी कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –
- दृढ़ निश्चय (Determination) – जब हम किसी कार्य को करने की ठान लेते हैं, तो आधी सफलता वहीं मिल जाती है, जैसा कि महावीर फोगाट ने किया।
- कठोर परिश्रम (Hard Work) – सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता। गीता और बबीता ने बरसों तक सुबह पाँच बजे उठकर कड़ा अभ्यास किया।
- धैर्य और सहनशीलता (Patience) – विपरीत परिस्थितियों और समाज की आलोचनाओं के बावजूद अपने मार्ग पर डटे रहना बहुत ज़रूरी है।
- अनुशासन (Discipline) – खेल हो या पढ़ाई, नियमों का पालन और समय की पाबंदी लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करती है।
- गुरु के प्रति विश्वास (Faith in Mentor) – अपने मार्गदर्शक या गुरु की सीख पर भरोसा करना अनिवार्य है, क्योंकि वे हमारी कमियों को बेहतर जानते हैं।
- एकाग्रता (Focus) – बाहरी शोर और हतोत्साहित करने वाली बातों पर ध्यान न देकर केवल अपने ‘स्वर्ण पदक’ यानी अंतिम लक्ष्य पर नज़र रखना आवश्यक है।
भाषा ज्ञान
- सही विकल्प पर ✓ लगाइए –
(क) किस शब्द में ऑ (ॉ) का प्रयोग नहीं किया जाएगा?
(i) लैपटॉप
(ii) ऑफ़िस
(iii) ऑस्ट्रेलिया
(iv) अंतराष्ट्रीय ✓
(ख) ‘आश्चर्यचकित’ शब्द कैसे बना है?
(i) आश्चर्य में चकित
(ii) आश्चर्य पर चकित
(iii) आश्चर्य से चकित ✓
(iv) आश्चर्य के लिए चकित
(ग) ‘बेटियाँ मेरा सपना पूरा कर सकती हैं।’ दिए वाक्य से संयुक्त क्रिया छाँटिए-
(i) पूरा कर सकती हैं।
(ii) सकती हैं।
(iii) कर सकती हैं। ✓
(iv) हैं।
- निम्नलिखित वाक्यों से संज्ञा पदबंध छाँटकर लिखिए-
(क) बेटों के लिए देखा गया सपना तो बेटियाँ भी पूरा कर सकती हैं।
बेटों के लिए देखा गया सपना
(ख) रात को महावीर थक-हार कर सोई हुई बेटियों के पैर दबाते थे।
थक-हार कर सोई हुई बेटियों
(ग) गीता के जीत जाने पर कुश्ती का विरोध करने वाली उसकी माँ ने उसकी आरती उतारी।
कुश्ती का विरोध करने वाली उसकी माँ
(घ) बबीता को खेल के प्रति बदला बहन का व्यवहार अच्छा नहीं लगा।
बदला बहन का व्यवहार
(ङ) दर्शकदीर्घा तिरंगा हाथ में लिए दर्शकों की भीड़ से खचाखच भरी थी।
तिरंगा हाथ में लिए दर्शकों की भीड़
- रिक्त स्थानों में ‘कि’ अथवा ‘की’ लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-
(क) कुश्ती लड़ने वालों के लिए प्रोटीन की खुराक आवश्यक होती है।
(ख) महावीर को लगा कि बेटियाँ उसका सपना पूरा कर सकती हैं।
(ग) प्रिंसिपल महोदय ने गीता और बबीता की प्रशंसा की।
(घ) गीता ने बहन को बताया कि अंतरराष्ट्रीय मैच जीतने के लिए कोच का होना आवश्यक है।
- निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए-
(क) गीता ने धीरे-धीरे एकेडमी के वातावरण में ढलता गया।
गीता धीरे-धीरे एकेडमी के वातावरण में ढलती गई।
(ख) इसका सूचना किसी तरह प्रमोद कदम को मिल गया।
इसकी सूचना किसी तरह प्रमोद कदम को मिल गई।
(ग) बबीता को बहन की बदली व्यवहार अच्छी नहीं लगी।
बबीता को बहन का बदला व्यवहार अच्छा नहीं लगा।
(घ) पहले चक्र में दोनों पहलवान ने एक-एक चक्र जीते।
पहले दो चक्रों में दोनों पहलवानों ने एक-एक चक्र जीता।
- दिए गए मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
(क) धुन का पक्का होना – महावीर अपनी धुन के पक्के थे, तभी बेटियों को चैंपियन बना पाए।
(ख) हक्का-बक्का रह जाना – गीता का दाँव देखकर ऑस्ट्रेलिया की खिलाड़ी हक्की-बक्की रह गई।
(ग) हौसला बढ़ाना – हार के बाद पिता ने गीता का हौसला बढ़ाया।
(घ) नाम रोशन करना – गीता ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
(ङ) हावी होना – तीसरे चक्र में गीता अपने प्रतिद्वंद्वी पर हावी हो गई।
- प्रत्येक के लिए दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(क) रात – निशा, रजनी
(ख) मछली – मत्स्य, मीन
(ग) घर – गृह, सदन
(घ) पिता – जनक, तात
(ङ) आँख – नयन, चक्षु
(च) माँ – जननी, अंबा
- दिए गए शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) उपेक्षा X अपेक्षा
(ख) कमज़ोर X ताकतवर
(ग) आशा X निराशा
(घ) कनिष्ठ X वरिष्ठ
(ङ) हतोत्साहित X प्रोत्साहित
(च) समाप्त X आरंभ
रोचक क्रियाकलाप
- 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में देश का नाम रोशन करने पर गीता को संवाद के रूप में लिखिए।
उत्तर – मैच के बाद एक प्रशंसक और गीता के बीच संवाद –
प्रशंसक – “वाह गीता! आज तुमने इतिहास रच दिया। पूरे देश को तुम पर गर्व है।”
गीता – “धन्यवाद! यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि मेरे पिता के संघर्ष और पूरे भारत की है।”
प्रशंसक – “अंतिम कुछ सेकंड में जब तुमने वह पाँच अंकों वाला दाँव लगाया, तो सबकी साँसें थम गई थीं। वह आत्मविश्वास कहाँ से आया?”
गीता – “वह मेरे पिता का सिखाया हुआ ‘ब्रह्मास्त्र’ था। मुझे बस उनकी कही बात याद थी कि ‘मिसालें दी जाती हैं, भूली नहीं जातीं’।”
प्रशंसक – “आज तुमने साबित कर दिया कि भारत की बेटियाँ किसी से कम नहीं हैं। बहुत-बहुत बधाई!”
- जीत जाने के बाद गीता की अपने पिता से क्या बातें हुई होंगी?
उत्तर – मैच के तुरंत बाद स्टेडियम के गलियारे में गीता और महावीर
गीता – (आँखों में आँसू लिए पदक पिता के हाथ में रखते हुए) “पापा, यह आपके सपनों का सोना है। मुझे माफ़ कर दीजिए कि बीच में मैं भटक गई थी।”
महावीर – (रुँधे हुए गले से गीता के सिर पर हाथ रखकर) “शाबाश! आज तुमने सिर्फ मैडल नहीं जीता, बल्कि उन सबकी बोलती बंद कर दी जो कहते थे कि छोरियाँ कुश्ती नहीं लड़ सकतीं।”
गीता – “पापा, जब आप स्टेडियम में नहीं थे, तो मैं डर गई थी। पर आपकी दी हुई तकनीक और ‘आक्रमण’ की सीख ने मुझे हारने नहीं दिया।”
महावीर – “तूने आज जो मिसाल पेश की है, वह कल लाखों लड़कियों की ताकत बनेगी। मुझे तुम पर बहुत गर्व है, बेटा।”
- गीता के जीत जाने के बाद यदि आप महावीर फोगाट से साक्षात्कार लेते तो कौन से प्रश्न पूछते? कोई प्रश्न बनाकर लिखिए।
उत्तर – यदि मुझे महावीर फोगाट जी का साक्षात्कार लेने का अवसर मिले, तो मैं उनसे निम्नलिखित प्रश्न पूछूँगा –
“महावीर जी, जब पूरे गाँव ने आपका सामाजिक बहिष्कार करने की धमकी दी थी, तब आपने अपने डर पर काबू कैसे पाया?”
“एक पिता और एक सख्त गुरु (कोच) की भूमिका को एक साथ निभाना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था?”
“जब गीता एकेडमी में जाकर अपनी पुरानी तकनीक भूलने लगी थी, तब एक गुरु के रूप में आपने उसे वापस पटरी पर लाने के लिए क्या रणनीति अपनाई?”
“भारत की अन्य लड़कियों के माता-पिता के लिए आपका क्या संदेश है जो आज भी अपनी बेटियों को खेल के मैदान में भेजने से हिचकिचाते हैं?”
“कुश्ती के उन सादे गद्दों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मैट तक के इस सफर में आपका सबसे यादगार क्षण कौन-सा रहा?”
गृहकार्य
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए-
चाँदी जीती तो लोग भूल जाएँगे। सोना जीती तो मिसाल बन जाएगी। मिसालें दी जाती हैं, भूली नहीं जाती।
आशय – इस पंक्ति के माध्यम से महावीर गीता को समझाते हैं कि द्वितीय स्थान अर्थात् रजत पदक पाने वाले को दुनिया कुछ समय बाद भुला देती है, लेकिन जो प्रथम आता है और ‘स्वर्ण’ जीतता है, वह इतिहास रचता है। उसकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण अर्थात् मिसाल बन जाती है जिसे युगों-युगों तक याद रखा जाता है।

