प्रथम पद की व्याख्या
मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी?
किती बेर मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।
तू तो कहति बल की बेनी ज्यों, हवैहै लाँबी मोटी।
काढ़त, गुहत, न्हवावत जैहे, नागिन सी भुइँ लोटी।
काचो दूध पियावत पचि-पचि देत न माखन रोटी।
सूरदास त्रिभुवन मन मोहन, हरि-हलधर की जोटी॥
प्रसंग: इस पद में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत कर रहे हैं कि बहुत दूध पीने के बाद भी उनकी चोटी अर्थात् बाल बढ़ क्यों नहीं रहे हैं।
व्याख्या:
बालक कृष्ण मैया यशोदा से पूछते हैं कि माँ, मेरी यह चोटी कब बढ़ेगी? मुझे दूध पीते हुए कितना समय हो गया है, लेकिन यह आज भी उतनी ही छोटी है। तुम तो कहती थीं कि दूध पीने से मेरी चोटी बड़े भाई बलराम की चोटी की तरह लंबी और मोटी हो जाएगी। तुम कहती थीं कि जब तुम इसे कंघी करोगी, गूँथोगी और नहलाओगी, तब यह नागिन की तरह जमीन पर लोटने लगेगी। बालक कृष्ण आगे कहते हैं कि तुम मुझे बार-बार कच्चा दूध पिलाती हो और खाने को माखन-रोटी नहीं देती। सूरदास जी कहते हैं कि श्रीकृष्ण और बलराम अर्थात् हरि-हलधर की यह जोड़ी तीनों लोकों के मन को मोहने वाली है, वे चिरजीवी हों।
द्वितीय पद की व्याख्या
तेरो लाल मेरो माखन खायो।
दुपहर दिवस जानि घर सूनो, ढूँढ ढँढोरि आप ही आयो।
खोलि किवारि, पैठ मंदिर में, दूध-दही सब सखन खवायो।
ऊखल चढ़ि सीके को लीन्हो, अनभावत भुइँ में ढरकायो।
दिन-प्रति हानि होति गोरस की, यह ढोटा कौनो ठग लायो।
‘सूर’ स्याम को हटकि न राखै, तू ही पूत अनोखो जायो॥
प्रसंग: इस पद में एक गोपी माता यशोदा के पास कृष्ण की माखन चोरी करने की शिकायत लेकर आई है।
व्याख्या:
गोपी यशोदा से कहती है कि तुम्हारे बेटे ने मेरा माखन खा लिया है। दोपहर के समय जब घर सूना था, तब वह खुद ही ढूँढते-ढूँढते मेरे घर आ गया। उसने किवाड़ खोला और घर के भीतर घुसकर सारा दूध-दही अपने मित्रों को खिला दिया। उसने ऊखल पर चढ़कर छींके अर्थात् सीके – जिसमें माखन रखा जाता है, उस तक पहुँचकर उसे उतार लिया और जो अच्छा नहीं लगा, उसे जमीन पर बिखेर दिया। गोपी उलाहना देते हुए कहती है कि इस कृष्ण के कारण रोज़ दूध-दही का नुकसान हो रहा है। पता नहीं तूने कैसा लड़का पैदा किया है। सूरदास जी कहते हैं कि गोपी अंत में कहती है कि तू अपने बेटे को डाँटकर क्यों नहीं रखती? क्या तूने ही कोई अनोखा पुत्र पैदा किया है?
कठिन शब्दार्थ
प्रथम पद (मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी…)
कबहिं – कब When
किती बेर – कितनी बार / कितना समय How many times / How long
अजहूँ – आज भी Even today
बल – बलराम (कृष्ण के बड़े भाई) Balaram
बेनी – चोटी Braided hair
हवैहै – हो जाएगी Will become
काढ़त – बाल सँवारना / कंघी करना Combing
गुहत – गूँथना Braiding
न्हवावत – नहलाना Bathing
भुइँ – भूमि / ज़मीन Ground / Floor
पचि-पचि – बार-बार / जबरदस्ती Repeatedly / Forcefully
हरि-हलधर – कृष्ण और बलराम Krishna and Balaram
जोटी – जोड़ी Pair / Duo
द्वितीय पद (तेरो लाल मेरो माखन खायो…)
दिवस – दिन Day
सूनो – खाली / निर्जन Lonely / Empty
ढूँढ ढँढोरि – खोज-खोजकर Searching thoroughly
किवारि – दरवाजा / किवाड़ Door
पैठि – घुसकर / प्रवेश कर Entering
सखन – मित्रों Friends
सीके (छींका) – माखन रखने का पात्र Hanging pot for butter
अनभावत – जो अच्छा न लगे Disliked / Not pleasing
ढरकायो – गिरा दिया / बिखेर दिया Spilled / Scattered
गोरस – दूध-दही (गाय का रस) Milk products (Dairy)
ढोटा – लड़का / बेटा Son / Boy
हटकि – डाँटकर / रोककर Scolding / Stopping
जायो – जन्म दिया Gave birth
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
बढ़ेगी, ह्वैहै, काढ़त, न्हवावत, त्रिभुवन, ढँढोरि, सींके, अनभावत, भुइँ, ढरकायो, ढोटा, हटकि
बढ़ेगी – Ba-dhay-gee ‘ढ़’ के लिए जीभ को ऊपर ले जाकर झटके से नीचे लाएँ
ह्वैहै – Hvay-hai ‘ह’ और ‘व’ को मिलाकर बोलें (Hve-hai)
काढ़त – Kaa-dhat ‘ढ़’ पर ज़ोर दें (Kaa-dhat)
न्हवावत – Nha-vaa-vat ‘न’ और ‘ह’ को एक साथ जल्दी बोलें
त्रिभुवन – Tri-bhu-van ‘त्रि’ के लिए ‘Tri’ जैसी ध्वनि निकालें
ढँढोरि – Dhan-dho-ri ‘ढ’ को भारी आवाज़ में और ‘न’ को नाक से बोलें
सींके – Seen-kay ‘सीं’ पर नाक से गूँज (Nasal sound) दें
अनभावत – An-bhaa-vat इसे ‘अन’ और ‘भावत’ के रूप में जोड़कर बोलें
भुइँ – Bhu-in ‘इँ’ के लिए नाक से ध्वनि निकालें
ढरकायो – Dhar-kaa-yo ‘ढ’ (Dha) से शुरू करें
ढोटा – Dho-taa ‘ढ’ को भारी आवाज़ (Heavy Dha) में बोलें
हटकि – Hat-ki ‘ट’ को साफ़ और छोटा बोलें
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) पहले पद में कृष्ण को अपनी माता से क्या शिकायत है?
उत्तर: पहले पद में कृष्ण को शिकायत है कि वे बहुत समय से दूध पी रहे हैं, फिर भी उनकी चोटी नहीं बढ़ रही है। वह आज भी उतनी ही छोटी है।
(ख) गोपिकाओं ने यशोदा से क्या शिकायत की?
उत्तर: गोपिकाओं ने शिकायत की कि कृष्ण दोपहर में सूना घर देखकर माखन चोरी करते हैं, किवाड़ खोलकर घर में घुस जाते हैं और अपने मित्रों के साथ सारा दूध-दही खा जाते हैं।
(ग) गोपियों ने यशोदा को क्या उलाहना दिया?
उत्तर: गोपियों ने उलाहना दिया कि कृष्ण रोज़ दूध-दही का नुकसान करते हैं और यशोदा ने ही ऐसा अनोखा पुत्र पैदा किया है जिसे वह डाँटकर या रोककर नहीं रखतीं।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) पहले पद में कृष्ण अपनी माता से क्या पूछ रहे हैं?
(i) पीने के लिए मुझे दूध क्यों नहीं देती?
(ii) मेरी चोटी कब बढ़ेगी? ✓
(iii) बलदाऊ की चोटी लंबी क्यों हैं?
(iv) मुझे माखन रोटी ही क्यों खिलाती हो?
(ख) कृष्ण छींके तक पहुँचने के लिए क्या प्रयत्न करते हैं?
(i) किवाड़ खोलकर घर में घुस जाते हैं।
(ii) अपने मित्रों की सहायता लेते हैं।
(iii) ऊखल पर चढ़कर छीकें तक पहुँचते हैं। ✓
(iv) छीकें की रस्सी तोड़ देते हैं।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) यशोदा माता ने कृष्ण को दूध पीने का क्या लाभ बताया?
उत्तर – यशोदा माता ने कृष्ण को प्रलोभन दिया कि दूध पीने से उनकी चोटी बड़े भाई बलराम की तरह लंबी और मोटी हो जाएगी और नागिन की तरह जमीन पर लोटेगी।
(ख) कृष्ण दूध-दही खाने के लिए किस समय गोपियों के घर में घुसते हैं?
उत्तर – कृष्ण दूध-दही खाने के लिए दोपहर के समय घर सूना जानकर गोपियों के घर में घुसते हैं।
(ग) कृष्ण के किस व्यवहार से गोपियों के घर में गोरस की हानि हो रही है?
उत्तर – कृष्ण स्वयं माखन खाते हैं, मित्रों को खिलाते हैं और जो अच्छा नहीं लगता उसे जमीन पर गिरा देते हैं। इस व्यवहार से गोरस की हानि हो रही है।
- पदों का वह अंश छाँटकर लिखिए जिसमें निम्नलिखित बातें बताई गई हैं-
(क) कृष्ण और बलराम की जोड़ी तीनों लोकों में सबका मन मोहती है।
उत्तर – सूरदास त्रिभुवन मन मोहन, हरि – हलधर की जोटी॥
(ख) अच्छा न लगने पर यह उसे पृथ्वी पर लुढ़का देता है।
उत्तर – अनभावत भुइँ में ढरकायो।
(ग) यह लड़का तो कोई ठग लगता है।
उत्तर – यह ढोटा कौनो ठग लायो।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
इन पदों के आधार पर लिखिए कि माँ अपने बच्चों को पौष्टिक भोजन कराने के लिए क्या-क्या करती है?
उत्तर: माँ अपने बच्चों को पौष्टिक भोजन कराने के लिए उन्हें विभिन्न प्रलोभन देती है। जैसे यशोदा ने चोटी बढ़ने का लालच दिया, वैसे ही आज की माताएँ बच्चों को शक्तिशाली बनने, लंबी उम्र पाने या खेल में अव्वल आने की बातें कहकर उन्हें दूध, फल और सब्जियाँ खिलाती हैं।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
‘रोटी’ का बहुवचन रूप क्या होगा?
(i) रुटियाँ
(ii) रोटिएँ
(iii) रोटियाँ
(iv) रोटीयाँ
- निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-
(क) बेनी – वेणी
(ख) स्याम – श्याम
(ग) माखन – मक्खन
(घ) पूत – पुत्र
(ङ) भुइँ – भूमि
(च) दूध – दुग्ध
- प्रत्येक के लिए दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(क) मैया – माता, माँ
(ख) पूत – पुत्र, बेटा
(ग) दूध – दुग्ध, पय
(घ) भुइँ – भूमि, धरती
(ङ) सखा – मित्र, दोस्त
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) छोटी x बड़ी
(ख) हानि x लाभ
(ग) काचा (कच्चा) x पक्का
(घ) मोटी x पतली
(ङ) दिवस x रात्रि/निशा
(च) खोलि (खोलना) x मूँदना (बंद करना)
रोचक क्रियाकलाप
- आपकी माता जी आपको जंक फूड के स्थान पर पौष्टिक भोजन खाने के लिए क्या-क्या तर्क देती हैं? इसे अनुच्छेद के रूप में लिखिए-
उत्तर – मेरी माता जी मुझे जंक फूड से दूर रखने के लिए अक्सर यह तर्क देती हैं कि पिज्ज़ा-बर्गर खाने से शरीर में आलस आता है और दिमाग कमज़ोर होता है। वे कहती हैं कि यदि मैं घर का बना पौष्टिक भोजन और हरी सब्जियाँ खाऊँगा, तो मेरी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और मैं खेलों में भी नीरज चोपड़ा की तरह कमाल कर सकूँगा।
- दूसरे पद के आधार पर गोपियों और यशोदा के बीच हुई बातचीत को संवाद के रूप में लिखिए।
गोपी: यशोदा मैया! देखो तुम्हारे इस कन्हैया ने आज फिर मेरा सारा माखन खा लिया।
यशोदा: अरे! पर वह तो घर पर ही खेल रहा था।
गोपी: नहीं मैया, दोपहर में जब सब सो रहे थे, वह ऊखल पर चढ़कर छींके तक पहुँच गया और सारा दही जमीन पर बिखेर दिया। तुमने कैसा अनोखा पुत्र पैदा किया है जो किसी की नहीं सुनता!
यशोदा: (मुस्कुराते हुए) अच्छा, मैं इसे अभी डाँटती हूँ।

