Maa (Padya) – Class IX, Hindi Reader, Hindi Book, Tamilnadu State Board, The Best Solutions.

श्री ठाकुर गोपाल शरण सिंह

आप रीवाँ के नईगढ़ी नामक इलाके के जागीरदार थे। मानव की कोमल भावनाओं का सरस वर्णन करने में आप सिद्धहस्त है। ‘मानव’, ‘ज्योतिष्मती’, ‘ग्रामिका’ आदि आपकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

इस कविता में कवि ने अपनी मातृभूमि के वात्सल्य रस का सुंदर वर्णन किया है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि को संबोधित कर कहा कि हे माँ! निस्सहाय और भूखे संसार को देखकर तेरा हृदय पिघल जाता है। इसीलिए तेरे उर से दूध की धारा बहती रहती है।

माँ

है जग जीवन की जननी

तेरा जीवन ही है त्याग;

है अमूल्य वैभव वसुधा का

तेरा मूर्तिमान अनुराग।

कितनी घोर तपस्या करके

पाती है तू यह वरदान?

किन्तु विश्व को अनायास ही

कर देती है उसे प्रदान।

है तुझसे ही लालित – पालित

यह भोला भाला संसार

करती है प्लावित वसुधा को

तेरी प्रेम सुधा की धार।

तेरे दिव्य हृदय में जिसका

रहता है सदैव संसार

लिए अंक में मृदुल सुमन को

लता दिखाती है वह प्यार।

 

तेरी करुण साधना का माँ

है मातृत्व स्वयं उपहार

क्षुधित देख असहाय विश्व को

बहती है उर से पयधार।

माँ – सप्रसंग व्याख्या सहित

प्रसंग

प्रस्तुत पद्यांश श्री ठाकुर गोपालशरण सिंह द्वारा रचित कविता ‘माँ’ से लिया गया है। इस कविता में कवि ने अपनी मातृभूमि के प्रति अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त करते हुए, उसे माँ के रूप में संबोधित किया है। कवि अपनी जन्मभूमि के वात्सल्य और त्याग की महिमा का गुणगान कर रहे हैं।

व्याख्या

“है जग जीवन की जननी,

तेरा जीवन ही है त्याग;

है अमूल्य वैभव वसुधा का,

तेरा मूर्तिमान अनुराग।”

हे माँ! तू इस संपूर्ण जगत के जीवन को उत्पन्न करने वाली है। तेरा संपूर्ण जीवन ही त्याग और बलिदान की भावना से भरा हुआ है। तू इस पृथ्वी का अमूल्य धन है और तेरा अस्तित्व साक्षात् प्रेम की मूर्ति है, जिसमें केवल प्रेम ही दिखाई देता है।

“कितनी घोर तपस्या करके,

पाती है तू यह वरदान?

किन्तु विश्व को अनायास ही,

कर देती है उसे प्रदान।”

हे माँ! यह मातृत्व का वरदान तूने न जाने कितनी कठिन तपस्या करके प्राप्त किया होगा। लेकिन इतना कठिनता से पाया गया वरदान भी तू इस संसार को बिना किसी प्रयास या स्वार्थ के, सहजता से  दे देती है।

“है तुझसे ही लालित – पालित,

यह भोला भाला संसार,

करती है प्लावित वसुधा को,

तेरी प्रेम सुधा की धार।”

यह सारा संसार, जो अभी भोला-भाला है, वह केवल तुझसे ही पाला-पोसा गया है। माँ! तू अपनी प्रेम रूपी अमृत की धारा से इस धरती को सदा परिपूर्ण करती रहती है।

“तेरे दिव्य हृदय में जिसका,

रहता है सदैव संसार,

लिए अंक में मृदुल सुमन को,

लता दिखाती है वह प्यार।”

जिस असीम प्रेम का संसार तेरे पवित्र हृदय में सदैव विद्यमान रहता है, ठीक उसी प्रकार का प्रेम लता भी कोमल फूल को अपनी गोद में लेकर प्रदर्शित करती है अर्थात् जिस प्रकार लता फूल की रक्षा करती है, वैसे ही माँ भी संतान की रक्षा करती है।

“तेरी करुण साधना का माँ,

है मातृत्व स्वयं उपहार,

क्षुधित देख असहाय विश्व को,

बहती है उर से पयधार।”

हे माँ! तेरी करुणा से भरी हुई साधना का फल ही मातृत्व है, जो स्वयं एक उपहार है। जब तू भूखे और निस्सहाय संसार को देखती है, तो तेरा दयालु हृदय पिघल जाता है, और तेरे हृदय से दूध की धारा बहने लगती है। यह वात्सल्य की चरम सीमा है, जो बताती है कि माँ हर दुख में संसार का पोषण करने को तैयार है।

विशेष –

  1. रस – सम्पूर्ण कविता में वात्सल्य रस की प्रधानता है, जो मातृभूमि के प्रति कवि के प्रेम को दर्शाता है।
  2. शैली – भाषा सरल, सरस और प्रवाहमयी है। शैली संबोधनात्मक है, जिससे भावों की अभिव्यक्ति प्रभावी बन पड़ी है।
  3. अलंकार – “मूर्तिमान अनुराग”, “प्रेम सुधा की धार” में रूपक अलंकार है। “लालित-पालित” में अनुप्रास अलंकार है।
  4. भाव – कवि ने मातृभूमि को त्याग, अनुराग, करुणा और मातृत्व का पर्याय बताया है, जो निस्वार्थ भाव से पूरे विश्व का पालन-पोषण करती है।

 

कठिन शब्दार्थ

धूल-धूसरित – धूल से लिपटा हुआ

प्लावित – प्रवाह में डूबा हुआ

गोदी का जाल – प्रिय पुत्र

मृदुल – सुकुमार, कोमल

जलज – कमल

उपहार – तोहफा

बाहु मृणाल – कमल नाल जैसी बाहु

क्षुधित – भूखा

लालित-पालित – पाला-पोसा गया

पयधार – दूध की धारा

 

Hindi (हिंदी)

Tamil (தமிழ்)

English

जननी (Janani)

தாய் (Thaai)

Mother

त्याग (Tyaag)

தியாகம் (Thiyagam)

Sacrifice, Renunciation

अमूल्य (Amoolya)

விலைமதிப்பற்ற (Vilaimathippatra)

Priceless, Invaluable

वैभव (Vaibhav)

பிரகாசம், மகிமை (Pirakasam, Magimai)

Grandeur, Splendor

वसुधा (Vasudhaa)

பூமி (Bhoomi)

Earth

मूर्तिमान (Moortimaan)

வடிவம் பெற்ற (Vadivam Petra)

Embodied, Personified

अनुराग (Anuraag)

அன்பு (Anbu)

Affection, Love

घोर (Ghor)

கடுமையான (Kadumaiyana)

Severe, Intense

तपस्या (Tapasyaa)

தவம் (Thavam)

Penance, Austerity

वरदान (Vardaan)

வரம் (Varum)

Boon, Blessing

अनायास (Anaayaas)

எளிதாக (Elidhaga)

Effortlessly, Easily

लालित-पालित (Laalit-Paalit)

வளர்க்கப்பட்ட மற்றும் பராமரிக்கப்பட்ட (Valarkkappatta & Paramarikkappatta)

Nurtured and Cherished

प्लावित (Plaavit)

நிரப்பப்பட்ட (Nirappappatta)

Flooded, Filled

सुधा (Sudhaa)

அமிர்தம் (Amirtham)

Nectar

दिव्य (Divya)

தெய்வீக (Dheiviga)

Divine

मृदुल (Mridul)

மென்மையான (Menmaiyana)

Soft, Tender

सुमन (Suman)

மலர் (Malar)

Flower

करुण (Karun)

கருணை (Karunai)

Compassionate

साधना (Saadhnaa)

சாதனை (Saathanai)

Spiritual Practice, Devotion

मातृत्व (Maatrutva)

தாய்மை (Thaaimai)

Motherhood

क्षुधित (Kshudhit)

பசியுள்ள (Pasiyulla)

Hungry

पयधार (Payadhaar)

பால்நீர் ஓட்டம் (Paalneer Oattam)

Stream of Milk

 

I निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर पूरे वाक्यों में लिखिए।

  1. श्री ठाकुर गोपालशरण सिंह के बारे में लिखिए।

उत्तर – श्री ठाकुर गोपालशरण सिंह रीवाँ के नईगढ़ी नामक इलाके के जागीरदार थे। वे मानव की कोमल भावनाओं का सरस वर्णन करने में सिद्धहस्त हैं और उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ ‘मानव’, ‘ज्योतिष्मती’, और ‘ग्रामिका’ आदि हैं।

  1. माँ की महिमा बताइए।

उत्तर – माँ जग जीवन की जननी है, उसका जीवन ही त्याग है, वह वसुधा का अमूल्य वैभव और मूर्तिमान अनुराग है, तथा उसकी करुण साधना का उपहार मातृत्व है।

  1. माँ का जीवन कैसा है?

उत्तर – माँ का जीवन त्याग से भरा है, और वह वसुधा का अमूल्य वैभव तथा मूर्तिमान अनुराग है।

  1. माँ किस प्रकार वरदान प्राप्त करती है।

उत्तर – माँ घोर तपस्या करके मातृत्व का वरदान प्राप्त करती है।

II निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर तीन वाक्यों में लिखिए।

  1. माँ का स्वभाव कैसा है?

उत्तर – माँ का स्वभाव अत्यंत त्यागी और करुणामय है। वह घोर तपस्या करके वरदान प्राप्त करती है, किन्तु उसे अनायास ही विश्व को प्रदान कर देती है। निस्सहाय और भूखे संसार को देखकर उसका हृदय पिघल जाता है।

  1. माँ किसकी मूर्ति है?

उत्तर – माँ अमूल्य वैभव वसुधा का और मूर्तिमान अनुराग की मूर्ति है। उसके हृदय में प्रेम सुधा की धारा बहती है जिससे वह पूरे संसार को प्लावित करती है। उसकी करुण साधना का फल ही उसका

III निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर पाँच वाक्यों में लिखिए।

  1. माँ के प्यार के बारे में लिखिए।

उत्तर – माँ का प्यार अमूल्य और मूर्तिमान अनुराग के समान है। वह विश्व को अपनी प्रेम सुधा की धार से प्लावित करती है और यह भोला-भाला संसार उसी से लालित-पालित है। जिस प्रकार लता कोमल फूल को अंक में लेकर प्यार दिखाती है, उसी प्रकार माँ के हृदय में सदैव प्यार का संसार रहता है। निस्सहाय और भूखे विश्व को देखकर माँ का हृदय पिघल जाता है और उसके उर से दूध की धारा बहने लगती है, जो उसके वात्सल्य और करुणा का प्रतीक है।

  1. माँ कविता द्वारा कवि क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर – ‘माँ’ कविता द्वारा कवि अपनी मातृभूमि के वात्सल्य रस का सुंदर वर्णन करना चाहते हैं। कवि कहते हैं कि माँ ही जग जीवन की जननी है और उसका जीवन त्याग तथा अनुराग का प्रतीक है। वह कठिन तपस्या से प्राप्त वरदान को सहजता से विश्व को प्रदान कर देती है। कवि यह बताना चाहते हैं कि माँ अपने प्रेम सुधा से पूरे संसार का पालन-पोषण करती है और उसकी करुणा इतनी गहरी है कि भूखे व असहाय संसार को देखकर उसके उर से दूध की धारा बह निकलती है।

  1. “माँ” कविता का सारांश लिखिए।

उत्तर – ‘माँ’ कविता में कवि ठाकुर गोपालशरण सिंह ने अपनी मातृभूमि को माँ के रूप में संबोधित करते हुए उसके वात्सल्य और त्याग की महिमा का गुणगान किया है। कवि कहते हैं कि माँ जग जीवन की जननी है, उसका जीवन ही त्याग है और वह वसुधा का मूर्तिमान अनुराग है। वह घोर तपस्या करके मातृत्व का वरदान प्राप्त करती है, किन्तु उसे बिना किसी प्रयास के ही संसार को प्रदान कर देती है। यह भोला-भाला संसार माँ के प्रेम सुधा की धारा से ही लालित-पालित होता है। कवि अंत में कहते हैं कि माँ की करुण साधना का उपहार ही मातृत्व है, और निस्सहाय तथा भूखे संसार को देखकर उसका हृदय पिघल जाता है, जिसके कारण उसके हृदय से दूध की धारा बहती रहती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

  1. कवि श्री ठाकुर गोपाल शरण सिंह किस इलाके के जागीरदार थे?
    (a) प्रयागराज
    (b) नईगढ़ी, रीवाँ
    (c) झाँसी
    (d) इलाहाबाद
  2. ज्योतिष्मतीऔर ग्रामिकाकिसकी रचनाएँ हैं?
    (a) तुलसीदास
    (b) मैथिलीशरण गुप्त
    (c) ठाकुर गोपाल शरण सिंह
    (d) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
  3. इस कविता में कवि ने किस रस का वर्णन किया है?
    (a) श्रृंगार रस
    (b) वीर रस
    (c) वात्सल्य रस
    (d) करुण रस
  4. है जग जीवन की जननी” – इस पंक्ति में जननीशब्द का क्या अर्थ है?
    (a) पृथ्वी
    (b) जन्मदात्री, माता
    (c) देवी
    (d) नदी
  5. तेरा मूर्तिमान अनुराग” – इस पंक्ति का भावार्थ है –
    (a) तेरा प्रेम साकार रूप में विद्यमान है।
    (b) तू बहुत सुंदर है।
    (c) तेरी मूर्ति बहुत प्यारी है।
    (d) तू प्रेम की पूजा करती है।
  6. कविता के अनुसार, माँ की किस साधना का परिणाम मातृत्व है?
    (a) योग साधना
    (b) ज्ञान साधना
    (c) करुणा की साधना
    (d) राजस साधना
  7. लिए अंक में मृदुल सुमन को” – इस पंक्ति में मृदुल सुमनकिसका प्रतीक है?
    (a) कठोर हृदय वाले लोग
    (b) कोमल और सुंदर बच्चे
    (c) पहाड़ और नदियाँ
    (d) ग्रह और नक्षत्र
  8. माँ के हृदय से पयधार (दूध की धार) क्यों बहती है?
    (a) क्योंकि वह अमीर है।
    (b) क्योंकि वह भूखे और असहाय संसार को देखकर द्रवित हो जाती है।
    (c) क्योंकि वह एक नदी है।
    (d) क्योंकि उसने ऐसा वरदान माँगा था।
  9. अनायासशब्द का विलोम है –
    (a) सहायास
    (b) सायास
    (c) प्रयास
    (d) अनुदास
  10. वसुधाशब्द का पर्यायवाची है –
    (a) आकाश
    (b) धरती, पृथ्वी
    (c) वायु
    (d) अग्नि
  11. कवि के अनुसार, माँ किसे अनायास ही प्रदान कर देती है?
    (a) धन और दौलत
    (b) वह वरदान जिसे पाने के लिए उसने कठिन तपस्या की
    (c) फल और फूल
    (d) ज्ञान और बुद्धि
  12. तेरी प्रेम सुधा की धार” – इस पंक्ति में सुधाकिसका प्रतीक है?
    (a) जहर
    (b) अमृत के समान प्यार
    (c) पानी
    (d) रक्त
  13. कविता में लताकिसका प्रतीक है?
    (a) माँ
    (b) पिता
    (c) बच्चा
    (d) प्रकृति
  14. कवि ने संसार को कैसा बताया है?
    (a) चालाक और धूर्त
    (b) भोला-भाला
    (c) उदास और निराश
    (d) समृद्ध और शक्तिशाली
  15. प्लावितशब्द का सही अर्थ क्या है?
    (a) सूखा हुआ
    (b) पूरी तरह से भर देना, बहा देना
    (c) साफ करना
    (d) छिपा हुआ
  16. माँ का जीवन किसका प्रतिरूप है?
    (a) वैभव का
    (b) ईर्ष्या का
    (c) त्याग का
    (d) भोग का
  17. दिव्य हृदयसे कवि का क्या तात्पर्य है?
    (a) जादुई दिल
    (b) पवित्र और देवतुल्य हृदय
    (c) बड़ा दिल
    (d) कमजोर दिल
  18. क्षुधितका तामिल अर्थ क्या है?
    (a) தாகமான (Thaagamana)
    (b) பசியுள்ள (Pasiyulla)
    (c) களைப்பான (Kalaippaana)
    (d) மகிழ்ச்சியான (Magizhchiyana)
  19. त्यागका English में क्या अर्थ है?
    (a) Attachment
    (b) Sacrifice
    (c) Wealth
    (d) Love
  20. इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    (a) युद्ध की विभीषिका
    (b) प्रकृति का सौंदर्य
    (c) मातृभूमि का वात्सल्य और त्याग
    (d) रहस्यवाद

 

Answer Key (उत्तर कुंजी)

  1. (b) नईगढ़ी, रीवाँ
  2. (c) ठाकुर गोपाल शरण सिंह
  3. (c) वात्सल्य रस
  4. (b) जन्मदात्री, माता
  5. (a) तेरा प्रेम साकार रूप में विद्यमान है।
  6. (c) करुणा की साधना
  7. (b) कोमल और सुंदर बच्चे
  8. (b) क्योंकि वह भूखे और असहाय संसार को देखकर द्रवित हो जाती है।
  9. (b) सायास
  10. (b) धरती, पृथ्वी
  11. (b) वह वरदान जिसे पाने के लिए उसने कठिन तपस्या की
  12. (b) अमृत के समान प्यार
  13. (a) माँ
  14. (b) भोला-भाला
  15. (b) पूरी तरह से भर देना, बहा देना
  16. (c) त्याग का
  17. (b) पवित्र और देवतुल्य हृदय
  18. (b) பசியுள்ள (Pasiyulla)
  19. (b) Sacrifice
  20. (c) मातृभूमि का वात्सल्य और त्याग

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – कविता ‘माँ’ के रचयिता कौन हैं?
    उत्तर – कविता ‘माँ’ के रचयिता ठाकुर गोपाल शरण सिंह हैं।
  2. प्रश्न – ठाकुर गोपाल शरण सिंह किस स्थान के जागीरदार थे?
    उत्तर – ठाकुर गोपाल शरण सिंह रीवाँ के नईगढ़ी नामक इलाके के जागीरदार थे।
  3. प्रश्न – कवि किस प्रकार की भावनाओं के वर्णन में सिद्धहस्त माने जाते हैं?
    उत्तर – कवि मानव की कोमल भावनाओं का सरस वर्णन करने में सिद्धहस्त माने जाते हैं।
  4. प्रश्न – ठाकुर गोपाल शरण सिंह की प्रसिद्ध रचनाएँ कौन-सी हैं?
    उत्तर – ठाकुर गोपाल शरण सिंह की प्रसिद्ध रचनाएँ ‘मानव’, ‘ज्योतिष्मती’ और ‘ग्रामिका’ हैं।
  5. प्रश्न – कवि ने इस कविता में किसका वर्णन किया है?
    उत्तर – कवि ने इस कविता में मातृभूमि के वात्सल्य रस का सुंदर वर्णन किया है।
  6. प्रश्न – कवि ने अपनी जन्मभूमि को किस रूप में संबोधित किया है?
    उत्तर – कवि ने अपनी जन्मभूमि को माँ के रूप में संबोधित किया है।
  7. प्रश्न – माँ को कवि ने किसकी जननी कहा है?
    उत्तर – कवि ने माँ को जगत जीवन की जननी कहा है।
  8. प्रश्न – माँ का जीवन किससे परिपूर्ण बताया गया है?
    उत्तर – माँ का जीवन त्याग से परिपूर्ण बताया गया है।
  9. प्रश्न – कवि ने माँ के प्रेम को किससे तुलना की है?
    उत्तर – कवि ने माँ के प्रेम को अमूल्य वैभव और मूर्तिमान अनुराग से तुलना की है।
  10. प्रश्न – माँ यह वरदान किस प्रकार प्राप्त करती है?
    उत्तर – माँ घोर तपस्या करके यह वरदान प्राप्त करती है।
  11. प्रश्न – माँ अपने वरदान का क्या करती है?
    उत्तर – माँ अपने वरदान को विश्व को अनायास ही प्रदान कर देती है।
  12. प्रश्न – संसार किससे लालित और पालित होता है?
    उत्तर – संसार माँ से ही लालित और पालित होता है।
  13. प्रश्न – माँ किससे वसुधा को प्लावित करती है?
    उत्तर – माँ अपने प्रेम की सुधा की धार से वसुधा को प्लावित करती है।
  14. प्रश्न – माँ के हृदय में सदैव कौन रहता है?
    उत्तर – माँ के हृदय में सदैव संसार रहता है।
  15. प्रश्न – लता किसे अंक में लेकर प्यार दिखाती है?
    उत्तर – लता मृदुल सुमन को अंक में लेकर प्यार दिखाती है।
  16. प्रश्न – माँ की करुण साधना का परिणाम क्या है?
    उत्तर – माँ की करुण साधना का परिणाम मातृत्व का उपहार है।
  17. प्रश्न – जब माँ विश्व को क्षुधित और असहाय देखती है, तो क्या होता है?
    उत्तर – जब माँ विश्व को क्षुधित और असहाय देखती है, तो उसके उर से दूध की धारा बहने लगती है।
  18. प्रश्न – कवि ने माँ के हृदय को कैसा बताया है?
    उत्तर – कवि ने माँ के हृदय को दिव्य और करुणा से पूर्ण बताया है।
  19. प्रश्न – कविता में माँ की कौन-सी विशेषता सबसे प्रमुख है?
    उत्तर – कविता में माँ की करुणा, त्याग और प्रेम सबसे प्रमुख विशेषताएँ हैं।
  20. प्रश्न – इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
    उत्तर – इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि माँ त्याग, करुणा और प्रेम की मूर्ति है, जो निःस्वार्थ भाव से संसार का पोषण करती है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – श्री ठाकुर गोपालशरण सिंह का संक्षिप्त परिचय दीजिए और उनकी किन्हीं दो प्रमुख रचनाओं के नाम बताइए।

उत्तर – श्री ठाकुर गोपालशरण सिंह रीवाँ के नईगढ़ी इलाके के जागीरदार थे। वे मानव की कोमल भावनाओं का सरस वर्णन करने में सिद्धहस्त हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘मानव’ और ‘ज्योतिष्मती’ शामिल हैं, जो उनकी साहित्यिक पहचान हैं।

  1. प्रश्न – कवि ने माँ के जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ क्या बताई हैं?

उत्तर – कवि के अनुसार, माँ के जीवन की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं – पहला, उसका जीवन ही त्याग है, जो निस्वार्थ भाव को दर्शाता है। दूसरा, वह वसुधा का अमूल्य वैभव और साक्षात् प्रेम की मूर्ति है।

  1. प्रश्न – माँ किस प्रकार मातृत्व का वरदान प्राप्त करती है और उसे कैसे प्रदान करती है?

उत्तर – माँ घोर तपस्या करके मातृत्व का वरदान प्राप्त करती है। लेकिन, अपने परम करुणामय स्वभाव के कारण, वह इस अमूल्य वरदान को विश्व को बिना किसी प्रयास या स्वार्थ के अनायास ही प्रदान कर देती है।

  1. प्रश्न – ‘प्रेम सुधा की धार’ से कवि का क्या तात्पर्य है और इसका संसार पर क्या प्रभाव होता है?

उत्तर – ‘प्रेम सुधा की धार’ से कवि का तात्पर्य माँ के अमृत तुल्य प्रेम की अविरल धारा से है। इसी प्रेम सुधा की धारा से वह पूरी पृथ्वी को सींचती है और यह भोला-भाला संसार उसी से लालित-पालित होता है।

  1. प्रश्न – कवि ने माँ की करुणा की पराकाष्ठा किस भाव से व्यक्त की है?

उत्तर – कवि ने कहा है कि क्षुधित और असहाय विश्व को देखकर माँ का हृदय करुणा से पिघल जाता है। उसकी करुण साधना के फलस्वरूप, उसके उर से दूध की धारा बहने लगती है, जो उसके अनंत वात्सल्य को दर्शाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने माँ के त्याग और अनुराग को किस प्रकार परिभाषित किया है?

उत्तर – कवि ने माँ को जग जीवन की जननी और अमूल्य वैभव कहा है। उनका जीवन पूर्ण रूप से त्याग और मूर्तिमान अनुराग है। वह घोर तपस्या से प्राप्त मातृत्व वरदान को भी स्वार्थरहित होकर, सहजता से, संपूर्ण विश्व को प्रदान कर देती है। यह निस्वार्थ भाव ही उनके त्याग और असीमित प्रेम की पराकाष्ठा है।

  1. प्रश्न – कवि ने माँ के दिव्य हृदय में विद्यमान प्रेम की तुलना किस उदाहरण से की है? इस तुलना का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – कवि ने माँ के दिव्य हृदय में सदैव रहने वाले प्रेम की तुलना लता द्वारा कोमल सुमन को अंक में लेकर दिखाए गए प्यार से की है। इसका आशय यह है कि जिस प्रकार लता अपने फूल की कोमलता से रक्षा करती है और उसे पोषण देती है, उसी प्रकार माँ भी अपने भोले-भाले संसार को प्रेमपूर्वक अपनी गोद में पालती और उसकी रक्षा करती है।

  1. प्रश्न – ‘माँ’ कविता में कवि अपनी जन्मभूमि को क्या संदेश देते हैं और उसके मातृत्व की अंतिम पहचान क्या है?

उत्तर – ‘माँ’ कविता में कवि अपनी जन्मभूमि को संबोधित करते हुए कहते हैं कि उसका मातृत्व स्वयं एक उपहार है। कवि संदेश देते हैं कि माँ का हृदय इतना करुणामय है कि निस्सहाय और भूखे विश्व को देखकर वह द्रवित हो जाती है। उसके मातृत्व की अंतिम पहचान यह है कि करुणावश उसके उर से दूध की धारा बह निकलती है, जो संसार के प्रति उसके शाश्वत पोषण भाव को दर्शाती है।

 

You cannot copy content of this page