Rotiyan (Videshi Kahani) – V. Dmitriev, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह कहानी रूसी लेखक वी. दिमित्रिएव द्वारा रचित है, जो मातृ-प्रेम और साहस की एक मर्मस्पर्शी गाथा है।

  1. माँ के प्रति प्रेम और संकल्प –

सर्दी के दिनों में स्कूल की मेट्रन अन्ना मिखाइलोवना ने एक दावत का आयोजन किया, जहाँ गरमा-गरम रोटियाँ बन रही थीं। स्कूल का एक गरीब विद्यार्थी माल्यूइश अपनी मेट्रन की मदद करने वहाँ पहुँचा था। ताज़ी रोटियाँ देखकर उसे अपनी माँ का ख्याल आया, जिन्हें गरम रोटियाँ बहुत पसंद थीं लेकिन गरीबी के कारण उन्होंने बहुत दिनों से ताज़ी रोटी नहीं खाई थी। माँ के प्रति अगाध प्रेम के कारण माल्यूइश ने कुछ रोटियाँ लीं और बर्फीले तूफान की परवाह किए बिना स्कूल से घर की ओर चल दिया।

  1. तूफान में लापता –

रास्ते में कोहरा और बर्फीली हवाएँ इतनी तेज़ थीं कि माल्यूइश रास्ता भटक गया और बर्फ के नीचे दब गया। इधर स्कूल में जब मेट्रन अन्ना को पता चला कि माल्यूइश गायब है, तो वे इवान के साथ उसे ढूँढ़ते हुए उसके घर पहुँचे। वहाँ माल्यूइश की माँ फेडोशिया उसे न पाकर अत्यंत व्याकुल हो उठीं।

  1. वफादार कुत्ता ‘ब्लैकी’ और खोज अभियान –

अन्ना और पड़ोसियों ने मिलकर खोज शुरू की। तभी एक लड़के ने सूचना दी कि पहाड़ी के पीछे एक कुत्ता लगातार भौंक रहा है। अन्ना ने पहचान लिया कि वह माल्यूइश का वफादार कुत्ता ब्लैकी है। ब्लैकी ने अपना रास्ता खोजा और लोगों को उस बर्फ के ढेर तक ले गया जहाँ माल्यूइश दबा हुआ था।

  1. जीवन की जीत –

बर्फ हटाकर माल्यूइश को निकाला गया। वह बेहोश था और उसका शरीर ठंड से अकड़ गया था। अन्ना और इवान ने सूझबूझ से काम लिया, उसके शरीर की मालिश की और आग जलाकर उसे गर्मी दी।

  1. भावुक अंत –

जैसे ही माल्यूइश को होश आया, उसने अपनी माँ को देखा। अपनी जान की परवाह किए बिना, होश आते ही उसके पहले शब्द थे— “रो मत माँ, देख, मैं तेरे लिए अपनी मेट्रन के घर से गरम-गरम रोटियाँ लाया हूँ।” यह सुनकर वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। माँ ने उसे गले लगा लिया।

मुख्य संदेश –

मातृ-प्रेम – एक छोटा बच्चा अपनी सुख-सुविधा से ऊपर अपनी माँ की खुशी को रखता है।

साहस और धैर्य – संकट के समय अन्ना मिखाइलोवना का धैर्य और ब्लैकी की वफादारी जीवन बचा लेती है।

परोपकार – पड़ोसियों और मेट्रन का साथ मिलकर बच्चे को ढूँढ़ना मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

कठिन शब्दार्थ

1  अतिथि – मेहमान  Guests

2  मेट्रन – छात्रावास की देखरेख करने वाली  Matron

3  हाथ बँटाना – मदद करना  To lend a hand / Help

4  खयाल – विचार / याद  Thought / Memory

5  थपेड़े – थप्पड़ जैसा प्रहार (हवा का)  Buffets / Blows (of wind)

6  कोहरा – धुंध  Fog / Mist

7  सँभलकर – सावधानी से  Cautiously

8  चकित – हैरान  Surprised / Astonished

9  संकेत – इशारा  Signal / Hint

10  अनिष्ट – बुरा / अशुभ  Mishap / Harm

11  आशंका – डर / संदेह  Apprehension / Fear

12  निरंतर – लगातार  Continuous

13  दुबके – छिपे हुए  Huddled / Cowering

14  आश्चर्यजनक – हैरान करने वाला  Astonishing

15  खामोश – चुप  Silent

16  बर्फ़ीली – बर्फ से भरी  Icy / Snowy

17  तीखे – तेज़ / चुभने वाले  Sharp / Piercing

18  टटोलना – खोजबीन करना  Fumbling / Grope

19  कठिनाई – मुश्किल  Difficulty

20  शक्ति – ताक़त  Strength / Power

21  धम्म से – भारी आवाज़ के साथ बैठना  With a thud

22  फटी-फटी आँखें – हैरानी से देखना  Staring wide-eyed

23  इकट्ठा – जमा करना  Collect / Gather

24  झोंपड़ी – कुटिया  Hut / Cottage

25  हाँफ रहा – तेज़ साँस लेना  Panting

26  लड़खड़ाते – डगमगाते हुए  Faltering

27  गोदाम – भंडार गृह  Warehouse / Storehouse

28  तरंग – लहर  Wave / Surge

29  कुदाल – मिट्टी खोदने का औज़ार  Pickaxe

30  फावड़े – मिट्टी हटाने का औज़ार  Shovels

31  कंदील – लालटेन / चिराग  Lantern

32  मार्गदर्शन – रास्ता दिखाना  Guidance

33  सनसनाहट – सरसराहट की आवाज़  Whizzing / Hissing

34  पीड़ा – दर्द  Pain / Agony

35  साँय-साँय – हवा की तेज़ आवाज़  Whistling sound of wind

36  स्पष्ट – साफ़  Clear

37  फुर्ती – तेज़ी  Agility / Alacrity

38  राहत – चैन / आराम  Relief

39  अकड़ा – सख्त हो जाना  Stiff / Rigid

40  मूर्च्छित – बेहोश  Unconscious / Fainted

41  नब्ज़ – नाड़ी  Pulse

42  भयंकर – डरावना  Terrible / Severe

43  मालिश – मर्दन  Massage

44  मेहनत – परिश्रम  Hard work

45  सुबकना – धीरे-धीरे रोना  Sobbing

46  हरकत – हलचल  Movement

47  हर्ष – खुशी  Joy / Happiness

48  भीड़ – जनसमूह  Crowd

49  काबू – नियंत्रण  Control

50  फफक-फफककर – फूट-फूटकर रोना  Weeping bitterly

51  साहस – हिम्मत  Courage

52  धैर्य – धीरज  Patience

53  उपस्थित – हाज़िर  Present

54  मुश्किल – कठिन  Difficult

55  अनुपम – अनोखा  Unique / Incomparable

56  गाथा – कहानी  Saga / Tale

57  दावत – भोज  Feast

58  गरम-गरम – ताज़ा और तप्त  Piping hot

59  परवाह – चिंता  Care / Concern

60  निगाह – नज़र  Glance / Sight

61  संकेत – लक्षण  Sign

62  कलम – लेखनी (यहाँ प्रसंगानुसार)  Pen

63  लौटना – वापस आना  To return

64  आशंकाएँ – शक  Doubts / Apprehensions

65  पहचाना – जानना  Recognized

66  वक्त – समय  Time

67  गँवाए – खोना  To waste

68  खोजना – ढूँढना  To search

69  पंजों – पैर का अगला हिस्सा  Paws

70  नज़र – दृष्टि  Sight / Vision

71  अचंभित – चकित  Amazed

72  प्रयत्न – कोशिश  Effort

73  कलेजा मुँह को आना – बहुत घबरा जाना  Heart in one’s mouth

74  साँप सूँघ जाना – सन्न रह जाना  To be stunned

75  वायरलेस – बिना तार का यंत्र  Wireless

76  सनसनाहट – कंपकंपी  Shiver

77  आखिरी – अंतिम  Last

78  अजीब – विचित्र  Strange

79  प्रार्थना – विनती  Prayer

80  दृश्य – नज़ारा  Scene

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

मेट्रन, ध्यान, बर्फ़, क्षणभर, उत्साहित, आज्ञा, रूमाल, सरसराते, बढ़, ओझल, पढ़ने, बर्फानी, थपेड़े, टटोलता, खटखटाया, धम्म, अनिष्ट, पड़ोसियों, इकट्ठा, झोंपड़ी, ढूँढ़ा, आश्चर्यजनक, शक्ति, वायरलैस, मार्गदर्शन, सनसनाहट, पीड़ा, क्षणों, धैर्य, नब्ज़, मूर्च्छित, उपस्थित, हर्ष, आश्चर्य, मुश्किल

माँ, रोटियाँ, आंटी, अँधेरा, हालाँकि, चिंता, धुंध, झाँक, आँधी, अंदर, बंद, मुँह, साँप, सूँघ, सँभाला, आशंका, निरंतर, वहाँ, हाँफ, तरंग, गँवाए, कंदील, साँय-साँय, संकेत, पंजों, आँख, आँसू, माँ

मेट्रन – Met-ran 

क्षणभर – Kshan-bhar

उत्साहित – Ut-saa-hit 

अनिष्ट – A-nisht

मार्गदर्शन – Maarg-dar-shan 

मूर्च्छित – Moor-chhit

उपस्थित – U-pas-thit 

आश्चर्य – Aash-char-ya

धैर्य – Dhair-ya 

नब्ज़ – Nabz (Z sound)

बर्फ़ – Barf 

बर्फानी – Bar-faa-nee

नब्ज़ – Nabz 

गँवाए – Gan-vaa-ay

आज्ञा – Aa-gyaa 

वायरलैस – Vaa-yar-lais

माँ – Maan 

रोटियाँ – Ro-ti-yaan

अँधेरा – An-dhay-raa 

हालाँकि – Haa-laan-ki

चिंता – Chin-taa 

झाँक – Jhaank

आँधी – Aan-dhee 

अंदर – An-dar

मुँह – Moonh 

साँप – Saanp

सूँघ – Soon-gh 

आशंका – Aa-shan-kaa

हाँफ – Haanph 

तरंग – Ta-rang

कंदील – Kan-deel 

साँय-साँय – Saany-Saany

पंजों – Pan-jon 

आँसू – Aan-soo

थपेड़े – Tha-pay-day 

टटोलता – Ta-tol-taa

खटखटाया – Khat-kha-taa-yaa 

धम्म – Dhamm

इक इकट्ठा – I-kat-thaa 

झोंपड़ी – Jhom-pa-dee

शक्ति – Shak-ti 

सनसनाहट – San-sa-naa-hat

हर्ष – Harsh 

मुश्किल – Mush-kil

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) मिखाइलोवना ने इवान से पड़ोसियों को इकट्ठा करने के लिए क्यों कहा?

उत्तर – मिखाइलोवना ने पड़ोसियों को इकट्ठा करने के लिए इसलिए कहा ताकि भारी बर्फबारी और तूफान के बीच सब मिलकर माल्यूइश को तुरंत ढूँढ़ सकें।

(ख) माल्यूइश खिड़की से बाहर झाँकने के बाद निराश क्यों हो गया?

उत्तर – माल्यूइश खिड़की से बाहर झाँकने के बाद इसलिए निराश हो गया क्योंकि बाहर भयंकर बर्फीला तूफान चल रहा था और धुंध के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे घर जाना कठिन लग रहा था।

(ग) दौड़कर आए हुए लड़के ने सब लोगों को क्या सूचना दी?

उत्तर – लड़के ने सूचना दी कि पहाड़ी के पीछे गोदाम के पास एक कुत्ता लगातार भौंक रहा है, जो इस मौसम में बहुत अजीब और आश्चर्यजनक है।

(घ) क्या देखकर उपस्थित लोगों के चेहरों पर हर्ष की लहर दौड़ गई?

उत्तर – माल्यूइश के शरीर में हरकत होते देखकर और उसका अकड़ा हुआ शरीर धीरे-धीरे खुलते देखकर उपस्थित लोगों के चेहरों पर हर्ष की लहर दौड़ गई।

 

लिखित

1. सही उत्तर पर का निशान लगाइए

(क) माल्यूइश के चले जाने के बाद अन्ना का मन पढने में नहीं लग रहा था क्योंकि-

(i) बाहर तूफ़ान आया हुआ था।

(ii) वे माल्यूइश की माँ के लिए रोटियाँ देना भूल गई थीं।

(iii) माल्यूइश तूफ़ान में अकेला चला गया था।

(iv) उन्होंने माल्यूइश को कंदील नहीं दिया था।

(ख) माल्यूइश की माँ अन्ना को देखकर चकित क्यों हो गई?

(i) इतनी रात को अन्ना को घर आया देखकर

(ii) अन्ना के माल्यूइश के बारे में पूछने पर

(iii) अन्ना के मुख पर छाई परेशानी देखकर

(iv) माल्यूइश की जगह ईवान को देखकर

(ग) अन्ना के मुख पर राहत के भाव इसलिए आ गए क्योंकि-

(i) ब्लैकी ने माल्यूइश का पता बता दिया था।

(ii) सभी साहस और धैर्य से काम ले रहे थे।

(iii) माल्यूइश की नब्ज़ चल रही थी।

(iv) लोग उनकी सहायता कर रहे थे।

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) गरम रोटियों को बनती देखकर माल्यूइश को क्या ख्याल आया?

उत्तर – रोटियाँ बनती देखकर माल्यूइश को अपनी माँ का ख्याल आया, जिन्हें गरम रोटियाँ बहुत पसंद थीं लेकिन गरीबी के कारण उन्होंने बहुत दिनों से गरम ताज़ी रोटियाँ नहीं खाई थीं। वह गरम रोटियाँ अपनी माँ को खिलाना चाहता था।

(ख) खराब मौसम में बाहर का वातावरण कैसा हो गया था?

उत्तर – खराब मौसम में बाहर बर्फीली हवा के तीखे थपेड़े चल रहे थे और कोहरा इतना घना था कि कुछ ही दूरी पर स्थित मकानों की रोशनी भी ओझल हो रही थी।

(ग) अन्ना की बेचैनी क्यों बढ़ती जा रही थी?

उत्तर – बाहर तूफान बढ़ता जा रहा था और माल्यूइश को गए हुए बहुत देर हो गई थी, इसलिए अन्ना की बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

(घ) ब्लैकी ने माल्यूइश का पता कैसे बताया?

उत्तर – ब्लैकी लगातार एक ही दिशा में भौंक रहा था और लोगों के आने पर वह बर्फ के एक विशेष ढेर को अपने पंजों से खोदने लगा, जिससे माल्यूइश का पता चला।

(ङ) बर्फ़ के नीचे दबे माल्यूइश को देखकर अन्ना ने क्या किया?

उत्तर – अन्ना ने साहस और धैर्य से काम लिया। उन्होंने सबसे पहले माल्यूइश की नब्ज़ जाँची और फिर लोगों की मदद से उसे घर ले जाकर आग जलाई और उसके शरीर की मालिश की।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

माल्यूइश के छोटे भाई-बहनों की आँखों में खुशी के आँसू भर आए। धीरे-धीरे माल्यूइश ने आँखें खोल दीं। वह आश्चर्य से चारों तरफ़ देखने लगा। वह समझ नहीं पा रहा था कि यहाँ इतनी भीड़ क्यों जमा हुई है। तभी उसकी नज़र अपनी माँ पर पड़ी। माँ की आँखों में खुशी के आँसू थे।

माल्यूइश उठ बैठा और अपनी माँ के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर बोला, “रो मत माँ, देख, मैं तेरे लिए अपनी मेट्रन के घर से गरम-गरम रोटियाँ लाया हूँ।”

माँ ने कस कर माल्यूइश को अपने सीने से लगा लिया और फफक-फफक कर रो उठी। मिखाइलोवना माल्यूइश के सिर पर हाथ फेरा और बड़ी मुश्किल से अपने आँसुओं को काबू किया।

वहाँ उपस्थित अन्य लोगों का भी यही हाल था।

(क) माल्यूइश के भाई-बहनों की आँखों में क्या देखकर आँसू भर आए?

उत्तर – माल्यूइश को आँखें खोलते देख भाई-बहनों की आँखों में खुशी के आँसू भर आए।

(ख) माल्यूइश चारों तरफ़ आश्चर्य से क्यों देख रहा था?

उत्तर – माल्यूइश को समझ नहीं आ रहा था कि उसके चारों ओर इतनी भीड़ क्यों जमा है।

(ग) माल्यूइश ने उठकर अपनी माँ से क्या कहा?

उत्तर – माल्यूइश ने उठकर अपनी माँ से कहा— “रो मत माँ, देख, मैं तेरे लिए अपनी मेट्रन के घर से गरम-गरम रोटियाँ लाया हूँ।”

(घ) माल्यूइश को होश में आया देखकर उसकी माँ और मिखाइलोवना की क्या दशा हुई?

उत्तर – माँ ने उसे कसकर सीने से लगा लिया और फफककर रो उठी, जबकि अन्ना ने बड़ी मुश्किल से अपने आँसुओं को काबू किया।

(ङ) निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-

खुशी x दुख/गम

मुश्किल x आसान

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

माल्यूइश ने मेटून से अपनी माँ के लिए रोटियाँ माँगी; होश में आने के बाद माँ को रोता देखकर उसने माँ से कहा ‘रो मत मैं तेरे लिए गरम रोटियाँ लाया हूँ।’ माल्यूइश के चरित्र का यह गुण क्या शिक्षा देता है?

उत्तर – माल्यूइश के चरित्र का यह गुण हमें ‘मातृ-प्रेम’ और ‘निःस्वार्थ सेवा’ की शिक्षा देता है। यह दिखाता है कि एक छोटा बच्चा भी अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी माँ की छोटी-सी खुशी (गरम रोटियाँ) पूरी करना चाहता है। यह हमें सिखाता है कि परिवार के प्रति प्रेम और कर्तव्य सबसे बढ़कर है।

 

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) ‘गरीब’ शब्द का विलोम रूप क्या होगा?

(i) भिखारी

(ii) निर्धन

(iii) अमीर

(iv) पैसा

(ख) ‘तरंग’ शब्द का क्या अर्थ है?

(i) तैरना

(ii) तर जाना

(iii) लहराना

(iv) लहर

(ग) कौन सा शब्द ‘माँ’ का पर्यायवाची नहीं है?

(i) माता

(ii) अंबा

(iii) धाय

(iv) जननी

  1. रिक्त स्थानों में कारक चिह्न लिखकर वाक्यों को पूरा कीजिए-

(क) मेट्रन ने उसके गाल थपथपाए।

(ख) अन्ना कमरे में लौट आई।

(ग) वह अपनी माँ के लिए रोटियाँ ले जाना चाहता था।

(घ) उन्होंने पड़ोस के लड़के को साथ लिया।

(ङ) इवान छड़ी से रास्ता टटोल रहा था।

(च) उन्होंने माल्यूइश को गरम कपड़े पहनाए।

(छ) अन्ना कुरसी पर बैठ गई।

(ज) धीरे-धीरे ब्लैकी का स्वर स्पष्ट हो गया।

 

  1. निम्नलिखित संबंधबोधक अव्ययों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए-

(क) के साथ – वह इवान के साथ माल्यूइश को ढूँढ़ने गई।

(ख) के पास – पहाड़ी के पास कुत्ता भौंक रहा था।

(ग) के भीतर – वह झोंपड़ी के भीतर चला गया।

 

  1. रिक्त स्थानों में उचित मुहावरा चुनकर लिखिए-

हाथ बँटाना, कलेजा मुँह को आना, साँप सूँघना, फटी-फटी आँखों से देखना, हर्ष की लहर दौड़ना

(क) पुत्र के पास होने की सूचना पाते ही घर में हर्ष की लहर दौड़ गई

(ख) कल से ही परीक्षा शुरू होने वाली है सुनकर छात्रों को साँप सूँघ गया

(ग) हमें घर के काम-काज में माता जी का हाथ बँटाना चाहिए।

(घ) अपने मित्र के एक्सीडेंट की खबर सुनकर मेरा कलेजा मुँह को आ गया

(ङ) मानसी युद्ध क्षेत्र से सकुशल लौटे भाई को फटी-फटी आँखों से देखने लगी

 

  1. ‘कि’ अथवा ‘की’ के प्रयोग से रिक्तपूर्ति कीजिए-

(क) उन्होंने माल्यूइश को जाने की आज्ञा दे दी।

(ख) वे सोच ही रहे थे कि तभी एक लड़का दौड़ता हुआ आया।

(ग) अन्ना के चेहरे पर उत्साह की लहर दौड़ गई।

(घ) धुंध इतनी बढ़ गई थी कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

(ङ) अन्ना ने माल्यूइश की सहायता करनी चाहिए।

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. माल्यूइश को बर्फ़ से बाहर निकाल लेने के बाद फेडोशिया ने अन्ना से जो कहा होगा अपनी कल्पना के आधार पर उसे संवाद के रूप में लिखिए।

उत्तर – संवाद – फेडोशिया और अन्ना मिखाइलोवना

(दृश्य – माल्यूइश को होश आने के बाद फेडोशिया अन्ना के हाथ पकड़कर रोने लगती है।)

फेडोशिया – (सजल आँखों से) अन्ना जी, आज आपने मुझ पर जो उपकार किया है, उसे मैं जीवन भर नहीं भूलूँगी। अगर आज आप इवान के साथ मेरे घर न आतीं, तो मेरा बच्चा उस बर्फ़ में ही दम तोड़ देता।

अन्ना – फेडोशिया, अपने आप को सँभालो। यह सब ईश्वर की कृपा और उस वफादार ब्लैकी की वजह से हुआ है। माल्यूइश बहुत भाग्यशाली है।

फेडोशिया – नहीं अन्ना जी, आपकी ममता और सूझबूझ ही उसे मौत के मुँह से खींच लाई है। आप हमारे लिए किसी देवदूत से कम नहीं हैं।

अन्ना – माल्यूइश का अपनी माँ के प्रति प्रेम ही उसकी असली ताकत थी। देखो, मौत के करीब होकर भी उसे केवल तुम्हारी गरम रोटियों की चिंता थी। वह सचमुच एक अद्भुत बालक है।

  1. माल्यूइश को बर्फ़ से सुरक्षित निकाल लिए जाने की खबर अखबार में किस रूप में छपती? उसे समाचार बनाकर लिखिए।

उत्तर – बर्फीले तूफान में वफादार कुत्ते और मेट्रन की सूझबूझ ने बचाई बालक की जान!

रूस, 18 फरवरी – कल रात आए भीषण बर्फीले तूफान में एक हृदयविदारक घटना होते-होते बची। स्कूल से घर लौट रहा नन्हा माल्यूइश पहाड़ी के पास भारी बर्फ के नीचे दब गया था। स्कूल की मेट्रन अन्ना मिखाइलोवना और वफादार कुत्ते ‘ब्लैकी’ की तत्परता से बालक को सुरक्षित निकाल लिया गया।

हैरानी की बात यह रही कि होश में आते ही बालक ने सबसे पहले अपनी माँ को वे गरम रोटियाँ सौंपीं, जिन्हें वह तूफान की परवाह किए बिना स्कूल से लाया था। डॉक्टरों के अनुसार बालक अब खतरे से बाहर है। पूरे इलाके में ब्लैकी की वफादारी और अन्ना के साहस की चर्चा हो रही है।

  1. ‘रोटियाँ’ ‘फिर क्या होगा उसके बाद’ और ‘सूर के पद’ तीनों पाठों में माँ का पुत्र के प्रति प्रेम दिखाया गया है। तीनों माँओं के व्यवहार पर दो-दो वाक्य लिखिए।

उत्तर – ‘रोटियाँ’ – फेडोशिया अपने पुत्र को संकट में देखकर अत्यंत व्याकुल और असहाय हो जाती है। बेटे के सुरक्षित मिलने पर उसकी ममता आँसुओं के रूप में बह निकलती है।

‘फिर क्या होगा उसके बाद’ – इस कविता में माँ अपने बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के प्रति बहुत सचेत और चिंतित दिखाई देती है। वह बच्चों की हर ज़रूरत और आने वाले कल की योजना को प्राथमिकता देती है।

‘सूर के पद’ – माता यशोदा अपने पुत्र कृष्ण के बाल-हठ को प्यार से सँभालती हैं। वे उन्हें पौष्टिक दूध पिलाने के लिए ममता भरे तर्क और चोटी बढ़ने का मीठा लालच देती हैं।

 

गृहकार्य

यदि आपको चोट लग जाए या आपके साथ कोई दुर्घटना हो जाए तो आपकी माता जी कैसे व्यवहार करेंगी? अपने विचार को अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

यदि मुझे कभी चोट लग जाए, तो मेरी माता जी बहुत घबरा जाती हैं लेकिन तुरंत संयम बरतते हुए प्राथमिक उपचार करती हैं। वे मुझे गोद में लेकर पुचकारती हैं और मेरा दर्द कम करने के लिए सांत्वना देती हैं। उनकी आँखों में मेरे प्रति चिंता और अपार ममता साफ़ दिखाई देती है। वे रात-भर जागकर मेरी सेवा करती हैं ताकि मैं जल्दी ठीक हो सकूँ। उनका स्पर्श ही मेरे आधे दर्द को दूर कर देता है।

You cannot copy content of this page