Rakhi Ka Mulya (Ekanki) – Harikrishna ‘Premi’, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह एकांकी प्रसिद्ध नाटककार हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ द्वारा लिखित है। यह ऐतिहासिक प्रसंग मध्यकालीन भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता और राखी के पवित्र बंधन के महत्त्व को दर्शाता है।

  1. मेवाड़ पर संकट – चित्तौड़ पर गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने आक्रमण कर दिया है। मेवाड़ की सेना संख्या में कम है और शत्रुओं के पास आधुनिक तोपखाना है। रानी कर्णावती चिंतित हैं क्योंकि उनके पति महाराणा संग्राम सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं। युद्ध में राजपूत वीरता से लड़ रहे हैं, लेकिन जीतना असंभव लग रहा है।
  2. राखी का अनूठा विचार – रानी कर्णावती अपनी सहेली जवाहरीबाई और सेनापति बाघ सिंह के सामने प्रस्ताव रखती हैं कि वे मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर मदद माँगें। जवाहरीबाई और बाघ सिंह को आश्चर्य होता है कि एक मुसलमान को भाई बनाकर मदद कैसे माँगी जा सकती है, जबकि हुमायूँ के पिता बाबर और महाराणा सांगा के बीच पुरानी शत्रुता रही थी।
  3. कर्णावती का मानवीय दृष्टिकोण – रानी समझाती हैं कि मुसलमान भी इंसान हैं और उनके पास भी हृदय होता है। वे कहती हैं कि राखी वह ‘शीतल दवा’ है जो पुराने वैर के सारे घाव भर देगी। वे हुमायूँ को एक पत्र और राखी भेजती हैं।
  4. हुमायूँ का दरबार और प्रतिक्रिया – बिहार में गंगा तट पर हुमायूँ का सैनिक डेरा है। जब मेवाड़ का दूत राखी लेकर पहुँचता है, तो हुमायूँ के दरबारी तातार खाँ और हिंदूबेग पुरानी दुश्मनी की याद दिलाकर हुमायूँ को रोकना चाहते हैं। लेकिन हुमायूँ राखी देखकर भावुक हो जाते हैं।
  5. राखी का मान और निर्णय – हुमायूँ कहते हैं कि “राखी वह जादू का पिटारा है जिसने मेरे सूने आसमान में मोहब्बत का चाँद चमका दिया है।” वे राखी को महज एक धागा नहीं, बल्कि एक ‘हुक्म’ मानते हैं। वे घोषणा करते हैं कि हिंदुओं के रस्मो-रिवाज़ मुसलमानों के लिए भी उतने ही प्यारे हैं। वे तुरंत अपनी सेना को चित्तौड़ की रक्षा के लिए ‘कूच’ करने का आदेश देते हैं।

मुख्य संदेश –

सांप्रदायिक एकता – धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानवता का रिश्ता सबसे बड़ा होता है।

राखी का मूल्य – राखी केवल एक सूत्र नहीं, बल्कि विश्वास और रक्षा का वचन है जो शत्रुता को भी मित्रता में बदल सकता है।

वीरता और त्याग – कर्णावती का साहस और हुमायूँ की उदारता भारतीय इतिहास के उज्ज्वल पक्ष को दर्शाते हैं।

कठिन शब्दार्थ

1  एकांकी – एक अंक वाला नाटक  One-act play

2  प्रसंग – घटना / विषय  Incident / Context

3  आतंक – दहशत / डर  Terror / Dread

4  अत्याचारी – ज़ुल्म करने वाला  Oppressor / Tyrant

5  शत्रुता – दुश्मनी  Enmity / Hostility

6  स्वाहा – भस्म / नष्ट करना  Sacrificed / Destroyed

7  पश्चाताप – पछतावा  Remorse / Repentance

8  सम्मति – सलाह / राय  Consent / Advice

9  जहाँपनाह – संसार को शरण देने वाला  Emperor / Protector of the world

10  दूत – संदेशवाहक  Messenger

11  हिफ़ाज़त – रक्षा / सुरक्षा  Protection / Safety

12  कूच करना – प्रस्थान करना (सेना का)  To march / Depart

13  तोपखाना – जहाँ तोपें रखी हों  Artillery

14  सीमा – सरहद  Border / Boundary

15  हुक्म – आदेश  Order / Command

16  वैरभाव – दुश्मनी की भावना  Feeling of enmity

17  मनुष्यता – इंसानियत  Humanity

18  सम्मान – आदर  Respect / Honor

19  मुहब्बत – प्रेम / प्यार  Love / Affection

20  वहम – भ्रम / शक  Illusion / Suspicion

21  विचारमग्न – सोच में डूबा हुआ  Pensive / Lost in thought

22  उचित – सही  Proper / Appropriate

23  घृणा – नफ़रत  Hatred

24  शीतल – ठंडा / सुखद  Cool / Soothing

25  वरदान – आशीष  Boon / Blessing

26  भस्म – जलाकर राख करना  To ash / Incinerate

27  अफ़सोस – दुख / खेद  Regret / Sorrow

28  खुशकिस्मती – सौभाग्य  Good fortune / Luck

29  मुग्ध – मोहित  Spellbound / Mesmerized

30  कसम – शपथ  Oath / Vow

31  रस्मो-रिवाज़ – रीति-रिवाज़  Customs and traditions

32  कुरबानियाँ – बलिदान  Sacrifices

33  गवाह – साक्षी  Witness

34  काफ़िला – यात्रियों का समूह  Caravan

35  जन्मभूमि – पैदा होने की जगह  Motherland / Birthplace

36  स्वर्गीय – मरणोपरांत  Late (deceased)

37  अब्बाजान – पिता (उर्दू)  Father

38  भेंट – उपहार  Gift / Offering

39  न्योता – आमंत्रण  Invitation

40  पिटारा – छोटा संदूक  Casket / Box

41  भीतरी – अंदरूनी  Interior / Inner

42  मुकाबला – सामना  Contest / Face-off

43  साहस – हिम्मत  Courage

44  ज़ख्म – घाव  Wound

45  निशान – चिह्न  Mark / Sign

46  प्रकट – साफ़ दिखना  Reveal / Manifest

47  तारीफ़ – प्रशंसा  Praise

48  बंदे – भक्त / मनुष्य  Servant of God / Human

49  ज़ंजीर – शृंखला  Chain

50  प्रार्थना – विनती  Request / Prayer

51  मंजूर – स्वीकार  Accepted

52  दौलत – धन  Wealth

53  ताकत – शक्ति  Power / Strength

54  सगे – अपना (खून का रिश्ता)  Own / Blood relative

55  परीक्षा – इम्तिहान  Test / Trial

56  असंभव – जो न हो सके  Impossible

57  भविष्य – आने वाला समय  Future

58  अनोखा – विचित्र  Unique

59  मुसीबत – परेशानी  Trouble

60  आज्ञापालन – कहना मानना  Obedience

61  अभिवादन – प्रणाम  Salutation / Greeting

62  किस्मत – भाग्य  Fate / Destiny

63  जादू – चमत्कार  Magic

64  सपना – स्वप्न  Dream

65  हिम्मत – साहस  Courage

66  पहरेदार – द्वारपाल  Guard

67  सेनापति – कमांडर  General / Commander

68  अटूट – जो न टूटे  Unbreakable

69  पवित्र – पावन  Holy / Pure

70  मान – प्रतिष्ठा  Honor / Dignity

71  अग्नि – आग  Fire

72  हृदय – दिल  Heart

73  कठिन – मुश्किल  Difficult

74  शीतलता – ठंडक  Coolness

75  विनाश – तबाही  Destruction

76  आवाज़ – ध्वनि  Voice / Sound

77  विजय – जीत  Victory

78  अमूल्य – कीमती  Priceless

79  प्रयत्न – कोशिश  Effort

80  मंच – स्टेज  Stage

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

कर्णावती, युद्ध, संख्या, शत्रुओं, रक्षा, प्रसंग, अत्याचारियों, प्राण, स्वाहा, पश्चाताप, मनुष्य, हृदय, घृणा, ज़ख्मों, जन्मभूमि, काफिला, सम्मति, आज्ञापालन, अभिवादन, स्वर्गीय, भेंट, किस्मत, इज़्ज़त, चश्मा, विचारमग्न, मुहब्बत, अब्बाजान, चित्तौड़, जंजीरों, खुशकिस्मती, हिफ़ाज़त, जहाँपनाह, न्योता, कुरबानियाँ, रस्मो-रिवाज़, रिश्ता

कर्णावती – Kar-naa-va-tee 

संख्या – Sankh-yaa

युद्ध – Yudh 

हृदय – Hrid-ya

रक्षा – Rak-shaa 

सम्मति – Sam-ma-ti

प्रसंग – Pra-sang

स्वर्गीय – Svar-gee-ya

मनुष्य – Ma-nush-ya 

पश्चात्ताप – Pash-chaa-taap

इज़्ज़त – Iz-zat 

हिफ़ाज़त – Hi-faa-zat

ज़ख्मों – Zakh-mon 

जहाँपनाह – Ja-haan-pa-naah

जंजीरों – Jan-zee-ron 

रस्मो-रिवाज़ – Ras-mo-Ri-vaaz

काफिला – Kaa-fi-laa 

अब्बाजान – Ab-baa-jaan

शत्रुओं – Shat-ru-on 

जन्मभूमि – Janm-bhoo-mi

प्राण – Praan 

मुहब्बत – Mu-hab-bat

न्योता – Nyo-taa 

कुरबानियाँ – Kur-baa-ni-yaan

चित्तौड़ – Chit-taur 

विचारमग्न – Vi-chaar-mag-na

अत्याचारियों – At-yaa-chaa-ri-yon 

भेंट – Bhent

घृणा – Ghri-naa 

किस्मत – Kis-mat

स्वाहा – Svaa-haa 

अभिवादन – Ab-hi-vaa-dan

आज्ञापालन – Aa-gyaa-paa-lan 

खुशकिस्मती – Khush-kis-ma-ti

चश्मा – Chash-maa 

रिश्ता – Rish-taa

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) रानी कर्णावती को मदद की आवश्यकता क्यों पड़ी?

उत्तर – चित्तौड़ पर गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने आक्रमण कर दिया था। राजपूतों की संख्या कम थी और उनके पास शत्रुओं जैसा भारी तोपखाना नहीं था, इसलिए मेवाड़ की रक्षा के लिए रानी को मदद की आवश्यकता पड़ी।

(ख) रानी को युद्ध में विजय पाने का क्या उपाय सूझा?

उत्तर – युद्ध में विजय पाने के लिए रानी को हुमायूँ को राखी भेजकर उसे भाई बनाने और उससे सहायता माँगने का उपाय सूझा।

(ग) कर्णावती ने दूत के हाथ क्या भेजा?

उत्तर – कर्णावती ने दूत के हाथ हुमायूँ के लिए एक पत्र और एक राखी भेजी।

(घ) हुमायूँ को कर्णावती द्वारा भेजी राखी पाकर कैसा लगा?

उत्तर – हुमायूँ राखी पाकर अत्यंत भावुक और प्रसन्न हुए। उन्होंने इसे अपनी खुशकिस्मती माना और कहा कि इस राखी ने उनके सूने आसमान में मोहब्बत का चाँद चमका दिया है।

लिखित

1. सही उत्तर पर का निशान लगाइए

(क) बाघसिंह ने ऐसा क्यों कहा कि मर कर भी मेवाड़ की रक्षा नहीं कर पाएँगे?

(i) राजपूतों के पास तोपखाना न होने के कारण

(ii) राजपूतों की संख्या बहुत कम होने के कारण

(iii) राजपूतों के पास पर्याप्त हथियार नहीं होने के कारण

(iv) बाघसिंह हथियार न उठा पाने के कारण

(ख) ‘काफ़िला बनाकर अरब नहीं भेजा जा सकता- किसके लिए कहा है?

(i) जवाहरीबाई के लिए

(ii) हुमायूँ और अन्य मुसलमानों के लिए

(iii) मेवाड़ के शत्रुओं के लिए

(iv) हिंदूबेग और तातार खाँ के लिए

(ग) हुमायूँ ने अपना डेरा कहाँ डाला हुआ था?

(i) चित्तौड़ के बाहर

(ii) कर्णावती के महल के बाहर

(iii) बिहार में गंगातट पर

(iv) राजपूतों के शिविर के पास

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) बाघ सिंह अपने किस दुख का वर्णन रानी कर्णावती से कर रहे थे?

उत्तर – बाघ सिंह इस दुख का वर्णन कर रहे थे कि राजपूत वीरता से लड़ने और हँसते-हँसते मरने को तैयार हैं, लेकिन कम संख्या और तोपखाने के अभाव के कारण वे मरकर भी मेवाड़ के मान की रक्षा नहीं कर पाएँगे।

(ख) राखी भेजने के पक्ष में रानी ने क्या तर्क दिया?

उत्तर – रानी ने तर्क दिया कि राखी वह शीतल दवा है जो सारे पुराने घाव भर देती है और यह वह वरदान है जो सारे वैर-भाव को जलाकर भस्म कर देता है।

(ग) मुसलमान को राखी भेजने की जवाहरीबाई की आपत्ति पर रानी ने उसे क्या समझाया?

उत्तर – रानी ने समझाया कि मुसलमान भी इंसान हैं, उनकी भी बहनें होती हैं और वे भी ईश्वर अर्थात् खुदा के ही बंदे हैं। केवल अलग इबादतगाह होने से उनसे घृणा नहीं करनी चाहिए।

(घ) एकांकी के आधार पर कर्णावती और हुमायूँ के चरित्र की दो-दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – एकांकी के आधार पर कर्णावती और हुमायूँ के चरित्र की दो-दो विशेषताएँ –

कर्णावती – दूरदर्शी, साहसी और सांप्रदायिक सद्भाव में विश्वास रखने वाली।

हुमायूँ – भावनाओं का सम्मान करने वाला, उदार और राखी की मर्यादा निभाने वाला वीर।

 

  1. किसने किससे कहा?

(क) “उन्हें रहना पड़ेगा और हमें उन्हें रखना होगा।”

कर्णावती ने — जवाहरीबाई से।

(ख) “हम तो आज्ञापालन करना जानते हैं, सम्मति देना नहीं।

बाघ सिंह ने — रानी कर्णावती से।

(ग) “मेवाड़ की इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है, जाओ।”

हुमायूँ ने — दूत से।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

अफ़सोस कि तुम इस राखी की कीमत नहीं जानते। छोटे-छोटे दो धागे दुश्मन को भी मुहब्बत की जंजीरों में जकड़ देते हैं। यह मेरी खुशकिस्मती है कि मेवाड़ की बहादुर रानी ने मुझे अपना भाई बनाया है और बहादुरशाह से मेवाड़ की हिफ़ाज़त करने के लिए मेरी मदद चाही है।”

“तो क्या जहाँपनाह ने उनकी प्रार्थना मंजूर कर ली है?”

“वह प्रार्थना नहीं हुक्म है। राखी आ जाने के बाद भी क्या सोच-विचार किया जा सकता है? यह तो आग में कूद पड़ने का न्योता है। हिंदुस्तान का इतिहास गवाह है कि राखी के धागों ने हज़ारों कुरबानियाँ कराई हैं। मैं दुनिया को बता देना चाहता हूँ कि हिंदुओं के रस्मो-रिवाज़ मुसलमानों के लिए भी उतने ही प्यारे हैं। हम हर कीमत पर उनकी हिफ़ाज़त करेंगे।”

(क) राखी के धागों के बारे में हुमायूँ ने क्या बताया?

उत्तर – हुमायूँ ने बताया कि राखी के ये छोटे-छोटे दो धागे दुश्मन को भी मोहब्बत की ज़ंजीरों में जकड़ देते हैं।

(ख) हुमायूँ ने किसे अपनी खुशकिस्मती बताया है?

उत्तर – हुमायूँ ने मेवाड़ की बहादुर रानी कर्णावती द्वारा उसे भाई बनाए जाने को अपनी खुशकिस्मती बताया है।

(ग) हिंदुस्तान का इतिहास किस बात का गवाह है?

उत्तर – हिंदुस्तान का इतिहास इस बात का गवाह है कि राखी के धागों ने हज़ारों कुर्बानियाँ कराई हैं।

(घ) हुमायूँ दुनिया को क्या बताना चाहता था?

उत्तर – हुमायूँ बताना चाहता था कि हिंदुओं के रस्मो-रिवाज़ मुसलमानों के लिए भी उतने ही प्यारे हैं।

(ङ) निम्नलिखित वर्ण-विच्छेद से क्या शब्द बनेगा?

प् + र् + आ + र् + थ् + अ + न् + आ

उत्तर – प्रार्थना

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

‘राखी का मूल्य’ एकांकी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर – ‘राखी का मूल्य’ एकांकी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि मानवता और भाईचारे का रिश्ता किसी भी धर्म या पुरानी शत्रुता से बड़ा होता है। यह हमें सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी विश्वास बनाए रखने की शिक्षा देता है।

 

भाषा ज्ञान 

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) कौन सा शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा नहीं है-

(i) जवाहरीबाई

(ii) मेवाड़

(iii) हुमायूँ

(iv) बादशाह

(ख) किस शब्द में ‘क्ष’ वर्ण का प्रयोग नहीं होगा-

(i) रक्षा

(ii) परीक्षा

(iii) कक्षा

(iv) इक्षा

(ग) ‘स्वर्गीय’ शब्द कैसे बना है?

(i) स्वर्गीय

(ii) स्वर्गीय

(iii) स्वर्ग + ईय

(iv) स्वर्ग + इय

  1. रिक्त स्थानों में पाठ से छाँटकर सही विशेषण लिखिए-

(क) राखी वह शीतल दवा है जो सारे घाव भर देगी।

(ख) गंगा तट पर हुमायूँ अपने खास तंबू में बैठा है।

(ग) हर एक बहादुर आदमी को मेवाड़ की इज़्ज़त करनी चाहिए।

(घ) वह तुम्हारे सगे भाई से बढ़कर है।

(ङ) राखी के धागों ने हज़ारों कुरबानियाँ कराई हैं।

 

  1. जानें- जब क्रिया को पूरा करने के लिए दो या उससे अधिक क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है तो उसे संयुक्त क्रिया करते हैं।

निम्नलिखित वाक्यों को संयुक्त क्रियाओं से पूरा कीजिए-

(क) मेवाड़ की सीमा में पैर रखने का साहस किसे हो सकता था

(ख) हम तो आज्ञापालन जानते हैं

(ग) ये धागे दुश्मन को भी मुहब्बत की जंजीरों में जकड़ देते हैं

(घ) हर एक बहादुर को मेवाड़ की इज़्ज़त करनी चाहिए

(ङ) क्या जहाँपनाह ने उनकी प्रार्थना मंजूर कर ली है

  1. निम्नलिखित के स्त्रीलिंग रूप लिखिए-

(क) राजपूत – राजपूतानी

(ख) आदमी – औरत

(ग) देवता – देवी

(घ) स्वामी – स्वामिनी

(ङ) राजा – रानी

(च) पति – पत्नी

  1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

(क) मुसीबत – मुसीबतें

(ख) तलवार – तलवारें

(ग) ज़ंजीर – ज़ंजीरें

(घ) मसजिद – मसजिदें

(ङ) डेरा – डेरे

(च) सपना – सपने

(छ) चश्मा – चश्मे

(ज) पिटारा – पिटारे

  1. शब्दों पर ध्यान दीजिए और उदाहरण के अनुसार लिखिए-

(क) राजा और रानी – राजा-रानी

(ख) रस्मोरिवाज़ – रस्म-रिवाज़

(ग) वैर-विरोध – वैर और विरोध

(घ) सोच-विचार – सोच और विचार

(ङ) राजा का पुत्र – राजपुत्र

(च) आज्ञापालक – आज्ञा का पालक

(छ) जन्मभूमि – जन्म की भूमि

(ज) गंगातट – गंगा का तट

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. यदि कर्णावती हुमायूँ के पास जाती तो दोनों क्या बात करते? अपनी कल्पना के आधार पर उसे संवाद के रूप में लिखिए।

उत्तर – स्थान – हुमायूँ का शाही शिविर (बिहार)

(रानी कर्णावती वीरता और गरिमा के साथ प्रवेश करती हैं, हुमायूँ सम्मान में खड़े हो जाते हैं)

हुमायूँ – (आश्चर्य से) मेवाड़ की तेजस्वी महारानी! आपने स्वयं यहाँ पधारने का कष्ट क्यों किया? दूत के हाथ संदेश भेजना ही पर्याप्त होता।

कर्णावती – सम्राट हुमायूँ! जब घर पर संकट के बादल मँडरा रहे हों, तो बहन को किसी मध्यस्थ की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। मैं यहाँ चित्तौड़ की रक्षा की भीख माँगने नहीं, बल्कि एक भाई को उसके कर्तव्य की याद दिलाने आई हूँ।

हुमायूँ – (नतमस्तक होकर) देवी, आपने मुझे भाई कहकर पुकारा, यह मेरा सौभाग्य है। पर क्या आप हमारी पुरानी शत्रुता भूल गईं? हमारे पिता एक-दूसरे के विरुद्ध युद्ध भूमि में खड़े थे।

कर्णावती – सम्राट, तलवारें घाव देती हैं, पर यह राखी (हाथ आगे बढ़ाते हुए) उन घावों को भरने का सामर्थ्य रखती है। हमारे बीच धर्म की दीवार हो सकती है, पर इंसानियत और भाईचारे की नहीं। क्या आप अपनी इस बहन के सम्मान की रक्षा करेंगे?

हुमायूँ – (अत्यंत भावुक होकर) आपने मेरी आँखों से संकुचित सोच का पर्दा हटा दिया। आज से मेवाड़ की इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है। यह हुमायूँ खुदा की कसम खाकर कहता है कि जब तक मेरे शरीर में रक्त की एक भी बूँद है, चित्तौड़ की ओर उठने वाली हर आँख को मैं झुका दूँगा।

कर्णावती – मुझे आप पर पूरा विश्वास था, भाई!

हुमायूँ – तातार खाँ! हिंदूबेग! जल्दी सेना को कूच का आदेश दो। हमें अपनी बहन के घर की रक्षा के लिए अभी निकलना है!

  1. इस एकांकी का कक्षा में मंचन कीजिए।

उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करें।

  1. विभिन्न प्रांतों में मनाए जाने वाले कुछ त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र करके एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाइए।

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

 

गृहकार्य

निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए-

(क) किस्म – प्रकार/भाग्य

(ख) खुशकिस्मत – भाग्यशाली

(ग) इज़्ज़त – मान/सम्मान

(घ) हिफ़ाज़त – रक्षा

(ङ) तारीफ़ – प्रशंसा

(च) कुरबानी – बलिदान

(छ) अफ़सोस – दुख/खेद

(ज) फ़ौज – सेना

 

 

 

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