पाठ का सारांश
यह एकांकी ‘विश्वासघात’ स्वाभिमान, देशभक्ति और नैतिकता की एक सशक्त कहानी है। यह हमें सिखाती है कि सत्ता के लालच में किया गया विश्वासघात अंततः अपमान और पतन का कारण बनता है।
1. नवाब वाजिद अली और मीर खाँ की हताशा
नवाब वाजिद अली कई महीनों से रामगढ़ के छोटे से किले को जीतने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे। उनके सेनापति मीर खाँ ने बताया कि रामगढ़ के राजपूत ‘नायाब हीरे’ हैं, जो अपनी आन पर मिटना जानते हैं। नवाब ने झुंझलाकर किसी भी खुफिया तरीके या लालच से किले को फतह करने का आदेश दिया।
2. शेर सिंह का विश्वासघात
तभी रामगढ़ के राजा वीर सिंह का बड़ा भाई शेर सिंह, नवाब के शिविर में आता है। वह राजगद्दी के लालच में अपने भाई के साथ विश्वासघात करने को तैयार हो जाता है। वह नवाब को किले के गुप्त रास्ते बताता है और वादा करता है कि रात को रोशनी का संकेत देकर वह किले का मुख्य द्वार खोल देगा। नवाब उसे गद्दार मानकर मन ही मन नफरत करते हैं, लेकिन अपनी जीत के लिए उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं।
3. रामगढ़ का पतन और जौहर
शेर सिंह की गद्दारी के कारण नवाब की फौज किले में घुस जाती है और राजा वीर सिंह युद्ध में मारे जाते हैं। किले की राजपूत स्त्रियाँ, जिनमें शेर सिंह की पत्नी और वीर सिंह की बेटी भी शामिल थीं, अपनी अस्मत बचाने के लिए ‘जौहर’ (आग में कूदकर प्राण देना) कर लेती हैं।
4. तेज सिंह का स्वाभिमान
जब शेर सिंह अपने बेटे तेज सिंह को नवाब से मिलवाने लाता है, तो तेज सिंह उसे अपना पिता मानने से इनकार कर देता है। वह ओजस्वी स्वर में कहता है कि उसे अपने सगे-संबंधियों के खून से सना हुआ राज्य नहीं चाहिए। वह बताता है कि उसकी माँ ने शेर सिंह को ‘राजद्रोही’ मानकर उसके जीते-जी खुद को विधवा समझ लिया और जौहर कर लिया।
5. नवाब का हृदय परिवर्तन और न्याय
तेज सिंह की निडरता और वीरता देखकर नवाब वाजिद अली प्रभावित हो जाते हैं। उन्हें अपनी ‘धोखे की जीत’ पर शर्म आने लगती है। वे शेर सिंह को ‘देशद्रोही और कायर’ कहकर दुत्कारते हैं और उसे उम्रकैद की सजा सुनाते हैं। नवाब तेज सिंह को रामगढ़ का किला उपहार में देना चाहते हैं।
6. निष्कर्ष
तेज सिंह नवाब की दया को ठुकरा देता है। वह कहता है कि— “सिंह कभी मरा हुआ शिकार नहीं खाता।” वह संकल्प लेता है कि वह यह किला अपनी तलवार के बल पर जीतेगा, किसी की मेहरबानी से नहीं। वह नवाब को भविष्य में युद्ध के मैदान में मिलने की चुनौती देकर चला जाता है, और नवाब उसे चकित होकर देखते रह जाते हैं।
मुख्य संदेश –
- देशभक्ति सर्वोपरि है – गद्दारी करने वाले को दुश्मन भी सम्मान नहीं देता।
- नई पीढ़ी का साहस – तेज सिंह का चरित्र दिखाता है कि सही संस्कारों वाली युवा पीढ़ी गलत का साथ कभी नहीं देती।
- स्वाभिमान – पराए की दया पर मिलने वाले राज्य से अपनी मेहनत की जीत बड़ी होती है।
कठिन शब्दार्थ
1 एकांकी – एक अंक वाला नाटक One-act play
2 शिविर – पड़ाव / टेंट Camp / Tent
3 फतह – जीत / विजय Victory / Conquest
4 गुस्ताखी – ढिठाई / बदतमीजी Audacity / Impertinence
5 अर्ज़ – निवेदन / प्रार्थना Request / Petition
6 रियासत – छोटा राज्य Princely State
7 खुफ़िया – गुप्त Secret / Intelligence
8 सितारा बुलंद – भाग्यशाली होना To be lucky / High star
9 सुलह – समझौता Compromise / Peace treaty
10 पैगाम – संदेश Message
11 फ़ौज – सेना Army
12 घेरा – नाकाबंदी Siege / Blockade
13 खिदमत – सेवा Service
14 आक्रमण – हमला Attack / Assault
15 किलेबंदी – चारों ओर दीवार बनाना Fortification
16 नायाब – अनोखा / कीमती Rare / Precious
17 आन – सम्मान / मर्यादा Honor / Pride
18 बहादुरी – वीरता Bravery / Valor
19 निशानेबाज़ – सटीक वार करने वाला Marksman / Sharpshooter
20 फुर्ती – तेज़ी Agility / Swiftness
21 जौहर-व्रत – सतीत्व रक्षा के लिए आत्मदाह Mass self-immolation
22 कुर्बानी – बलिदान Sacrifice
23 माद्दा – क्षमता / शक्ति Capability / Spirit
24 क्षत्राणी – क्षत्रिय स्त्री Rajput warrior woman
25 भस्म – राख Ashes
26 मस्तक – माथा Forehead
27 ओज – तेज / चमक Splendor / Vigor
28 मर्यादा – सीमा / इज्जत Dignity / Limit
29 जागीर – इनाम में मिली ज़मीन Estate / Fiefdom
30 मेहरबानी – दया / कृपा Kindness / Mercy
31 विश्वासघात – धोखा देना Betrayal / Treachery
32 गद्दी – सिंहासन Throne
33 अधिकारी – हकदार Entitled / Authorized
34 आज्ञा – आदेश Order / Command
35 प्रबंध – इंतज़ाम Arrangement / Management
36 संकोच – हिचकिचाहट Hesitation
37 शिकायत – गिला Complaint
38 वायदा – वचन Promise
39 डंका बजना – प्रभाव होना To be highly influential
40 अहसानमंद – आभारी Grateful / Obliged
41 राजद्रोही – देश के खिलाफ काम करने वाला Traitor / Seditious
42 कलंक – दाग / बदनामी Stigma / Blemish
43 कायर – डरपोक Coward
44 देशद्रोही – गद्दार Traitor
45 गुनाह – अपराध Sin / Crime
46 हुज़ूर – श्रीमान Lord / Sir
47 इज़ाज़त – अनुमति Permission
48 मुमकिन – संभव Possible
49 यकीन – भरोसा Belief / Trust
50 नफ़रत – घृणा Hatred
51 गवाही – प्रमाण Testimony / Witness
52 इनायत – कृपा Favor / Grace
53 शुक्रिया – धन्यवाद Thank you
54 अलविदा – विदा लेना Farewell / Goodbye
55 नवाब – शासक / अमीर व्यक्ति Ruler / Nobleman
56 पराधीन – दूसरे के अधीन (गुलाम) Dependent / Enslaved
57 तिरस्कार – अपमान / उपेक्षा Disdain / Scorn
58 तत्पर – तैयार Ready / Prepared
59 परिक्षय – परिचय (यहाँ पात्रों का) Introduction
60 प्रस्थान – चले जाना Departure / Exit
61 सुलह – मेल-मिलाप Reconciliation
62 खि़दमत – सेवा Service
63 मूर्ख – बेवकूफ Fool
64 स्वीकार – मान लेना Acceptance
65 कारनामे – काम / गतिविधियाँ Deeds / Exploits
66 उपलब्ध – प्राप्त Available
67 सहन – बर्दाश्त Tolerance / Endurance
68 योजना – स्कीम Plan / Scheme
69 सुलगना – जलना To smolder
70 योग्य – काबिल Capable / Worthy
71 इच्छा – चाह Desire
72 नतीज़ा – परिणाम Result / Outcome
73 असंभव – जो न हो सके Impossible
74 निहायत – अत्यंत Extremely
75 बेगम – पत्नी (आदरणीय) Queen / Wife
76 व्यंग्य – ताना Sarcasm / Satire
77 निर्दोष – बेगुनाह Innocent
78 सम्मुख – सामने In front of
79 विधवा – जिसका पति मर गया हो Widow
80 महत्त्व – ज़रूरी होना Importance
81 निडरता – बेखौफ होना Fearlessness
82 सबूत – प्रमाण Proof / Evidence
83 हठी – ज़िद्दी Stubborn
84 आत्मा – रूह Soul
85 मुलाकात – भेंट Meeting
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
गुस्ताखी, मुआफ़, अर्ज़, खुफ़िया, बुलंद, इज़ाज़त, जन्मभूमि, उँगली, राज़, इंतज़ाम, आक्रमण, योग्य, निशानेबाज़, अहसानमंद, कुर्बानी, माद्दा, व्यंग्य, निर्दोष, क्षत्राणी, राजद्रोही, नफ़रत
गुस्ताखी – Gus-taa-khee – योग्य – Yog-ya
मुआफ़ – Mu-aaf
निशानेबाज़ – Ni-shaa-nay-baaz
अर्ज़ – Arz
अहसानमंद – Ah-saan-mand
खुफ़िया – Khu-fi-ya
कुर्बानी – Kur-baa-nee
बुलंद – Bu-land
माद्दा – Maad-daa
इज़ाज़त – I-zaa-zat
व्यंग्य – Vyan-gya
जन्मभूमि – Jan-ma-bhoo-mi
निर्दोष – Nir-dosh
उँगली – Un-ga-lee
क्षत्राणी – Kshat-raa-nee
राज़ – Raaz
राजद्रोही – Raaj-dro-hee
इंतज़ाम – In-ta-zaam
नफ़रत – Naf-rat
आक्रमण – Aa-kra-man
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) वाजिद अली ने रामगढ़ के किले में घुसने के लिए मीर खाँ को क्या सुझाव दिया?
उत्तर – वाजिद अली ने मीर खाँ को सुझाव दिया कि वह किसी खुफ़िया तरीके से किले के अंदर घुसे और वहाँ के सिपाहियों को लालच देकर अपनी ओर मिला ले।
(ख) राजपूतों के बारे में मीर खाँ की क्या राय थी?
उत्तर – राजपूतों के बारे में मीर खाँ की राय थी कि रामगढ़ का एक-एक राजपूत नायाब हीरा है। वे अपनी आन पर मिटने वाले वीर हैं, जिन्हें लालच देकर साथ मिलाना या जिनके किले में घुसना आसान नहीं है।
(ग) वाजिद अली ने वीर सिंह की वीरता से प्रभावित होकर उसके विषय में क्या कहा?
उत्तर – वाजिद अली ने वीर सिंह की वीरता से प्रभावित होकर उसके विषय में कहा कि वीर सिंह गज़ब का निशानेबाज़ था और तलवार भी अद्भुत फुर्ती से चलाता था। उन्होंने उसे एक ‘निर्दोष वीर’ भी माना।
(घ) तेज सिंह ने शेर सिंह को पिता मानने से इनकार क्यों कर दिया?
उत्तर – तेज सिंह ने शेर सिंह को पिता मानने से इनकार कर दिया क्योंकि शेर सिंह ने सत्ता के लालच में अपने भाई और मातृभूमि के साथ विश्वासघात किया था। तेज सिंह के लिए एक राजद्रोही और कायर व्यक्ति पिता होने के योग्य नहीं था।
लिखित
1. सही विकल्प पर ✓ लगाइए-
(क) शेर सिंह वाजिद अली के पास क्यों गया?
(i) राजपूतों की ओर से सुलह का पैगाम लेकर
(ii) युद्ध में उसकी सहायता के लिए ✓
(iii) भाई वीर सिंह की मूर्खता को बताने के लिए
(iv) राजपूतों की युद्धकला बताने के लिए
(ख) पिता ने शेर सिंह को राज्य नहीं दिया था क्योंकि-
(i) प्रजा उसे नहीं चाहती थी।
(iii) वीर सिंह उससे अधिक योग्य था।✓
(ii) उसकी वाजिद अली से मित्रता थी।
(iv) वह बहुत घमंडी था।
(ग) तेजसिंह की माँ ने जौहर व्रत का पालन किया क्योंकि-
(i) शेरसिंह युद्ध करने चला गया था।
(ii) वह एक वीर क्षत्राणी थी।
(iii) वह वीरसिंह की हार सहन नहीं कर पाई थी।
(iv) वह राजद्रोही की पत्नी नहीं कहलाना चाहती थी। ✓
(ग) शेर सिंह ने वाजिद अली को अपने भाई वीर सिंह की किन विशेषताओं से परिचित कराया?
उत्तर – शेर सिंह ने बताया कि वीर सिंह अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए रक्त की एक-एक बूँद बहा देगा, वह अपने प्राण दे देगा पर शत्रु के आगे सिर नहीं झुकाएगा और गुलामी कभी स्वीकार नहीं करेगा।
(घ) ‘सिंह कभी मरा शिकार नहीं खाता’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – इस कथन का आशय यह है कि स्वाभिमानी और वीर व्यक्ति (सिंह के समान) कभी भी किसी की दया या खैरात में मिली हुई वस्तु (मरा शिकार) स्वीकार नहीं करते। तेज सिंह नवाब द्वारा जागीर में दिए गए किले को दान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और तलवार के बल पर जीतकर हासिल करना
- किसने किससे कहा?
(क) “राजपूत अपनी आन पर मिटने वाले होते हैं।”
मीर खाँ ने वाजिद अली से।
(ख) “तुम लोगों की बहादुरी के किस्से सुनकर तो हमें दाँतों तले उँगली दबानी पड़ती है।”
वाजिद अली ने शेर सिंह से।
(ग) “यह सिर वीरता के आगे ही झुकेगा, कायरों के सम्मुख नहीं।”
तेज सिंह ने शेर सिंह से।
(घ) “तुम्हारी वीरता की बातें सुनकर हमें अपने ऊपर शर्म आने लगी है।”
वाजिद अली ने तेज सिंह से।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
- वाजिद अली शाह ने शेर सिंह को रामगढ़ का राजा न बनाने के लिए क्या तर्क दिए?
उत्तर – वाजिद अली ने तर्क दिया कि जो व्यक्ति अपनी जन्मभूमि का नहीं हुआ और अपने सगे भाई का सगा नहीं हुआ, वह नवाब के साथ भी कभी भी धोखा कर सकता है। गद्दार पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
- वाजिद अली को अपने ऊपर शर्म क्यों आने लगी?
उत्तर – वाजिद अली को अपनी ‘वीरता’ पर शर्म आई क्योंकि उन्होंने एक धोखेबाज़ की मदद से, कायरों की तरह छिपकर किले में घुसकर निर्दोष वीरों की जान ली थी। उन्हें अहसास हुआ कि यह बहादुरी नहीं, कायरता है।
भाषा ज्ञान
- सही विकल्प पर ✓ लगाइए-
(क) ‘गुज़र चुकना’ शब्दों का क्या अर्थ है?
(i) निकल जाना
(ii) चले जाना
(iii) बीत जाना ✓
(iv) कर चुकना
(ख) सही वर्तनी वाला शब्द कौन सा है?
(i) खूबसुरत
(ii) खुबसूरत
(iii) खबसूरत
(iv) खूबसूरत ✓
(ग) ‘मुमकिन’ शब्द का विलोम क्या है?
(i) कममुमकिन
(iii) नामुमकिन ✓
(ii) लामुमकिन
(iv) बदमुमकिन
- अर्थ के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों के भेद लिखिए-
(क) शायद यह आदमी सुलह का पैगाम लेकर ही आया है। संदेहवाचक
(ख) नौजवान तुम कौन हो, और हमारे पास कैसे आना हुआ? प्रश्नवाचक
(ग) मैं आपकी सहायता करना चाहता हूँ। विधानवाचक/इच्छावाचक
(घ) वह शत्रु के आगे सिर नहीं झुकाएगा। निषेधवाचक
(ङ) शाबाश बेटे! हम तुमसे बहुत खुश हुए। विस्मयादिबोधक
(च) कहो नौजवान, हम तुम्हारी बात सुनेंगे। आज्ञावाचक
(छ) यहाँ किले में लड़कियाँ दिखाई नहीं देतीं। निषेधवाचक
(ज) नवाब साहब! इस इनायत के लिए शुक्रिया। विस्मयादिबोधक (कृतज्ञता प्रकट करना)
- निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
(क) उँगली – उँगलियाँ
(ख) मेहरबानी – मेहरबानियाँ
(ग) गद्दी – गद्दियाँ
(घ) गुस्ताखी – गुस्ताखियाँ
(ङ) सितारा – सितारे
(च) तरीका – तरीके
(छ) टीका – टीके
(ज) महीना – महीने
(झ) तलवार – तलवारें
(ञ) शिकायत – शिकायतें
(ट) फ़ौज – फ़ौजें
(ठ) बूँद –बूँदें
- निम्नलिखित शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखिए-
(क) नौजवान – नौजवान महिला
(ख) क्षत्रिय – क्षत्राणी
(ग) शेर – शेरनी
(घ) राजपूत – राजपूतनी
(ङ) विधुर – विधवा
(च) राजकुमार –राजकुमारी
- निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-
(क) जिसके पति की मृत्यु हो गई हो विधवा
(ख) जिसका कोई दोष न हो निर्दोष
(ग) देश से द्रोह करने वाला राजद्रोही/देशद्रोही
(घ) जहाँ जन्म लिया हो जन्मभूमि
- निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
(क) दाँतों तले उँगली दबाना (दंग रह जाना) – तेज सिंह की वीरता देखकर नवाब ने दाँतों तले उँगली दबा ली।
(ख) मुँह की खाना (हार जाना) – रामगढ़ के वीरों के सामने नवाब की फौज को बार-बार मुँह की खानी पड़ी।
(ग) टक्कर लेना (मुकाबला करना) – राजपूतों से टक्कर लेना आसान काम नहीं है।
(घ) उँगली उठाना (दोष निकालना/बदनाम करना) – राजद्रोही की पत्नी होने पर लोग उसकी माँ पर उँगली उठाते।
रोचक क्रियाकलाप
- वाजिद अली से अपने पुत्र तेज सिंह की प्रशंसा सुनकर शेरसिंह के मन में जो विचार उठे होंगे उन्हें अनुच्छेद के रूप में लिखिए।
उत्तर – जब नवाब वाजिद अली ने मेरे पुत्र तेज सिंह की वीरता और निडरता की प्रशंसा की, तो उस क्षण मेरा हृदय ग्लानि और गर्व के द्वंद्व में फँस गया। एक ओर जहाँ पिता होने के नाते मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया कि मेरा बेटा इतना साहसी और स्वाभिमानी है, वहीं दूसरी ओर नवाब की दुत्कार ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। मुझे अपनी छोटी सोच और लालच पर बेहद शर्म महसूस हुई। मैंने जिसे ‘मूर्ख’ समझा था, उसी भाई वीर सिंह की वीरता का लोहा आज दुश्मन भी मान रहा है। मैंने सत्ता के लिए अपना परिवार, अपनी पत्नी और अपना सम्मान सब कुछ दाँव पर लगा दिया, लेकिन अंत में मुझे केवल ‘देशद्रोही’ का कलंक और जेल की सलाखें मिलीं। मेरा पुत्र आज मेरी ही गद्दारी के कारण मुझे पिता मानने से इनकार कर रहा है। आज मुझे अहसास हुआ कि धोखे से हासिल किया गया राजपाट कभी सुख नहीं दे सकता।
- छोटे भाई/बहन को पत्र लिखकर ‘जौहर व्रत’ के विषय में बताइए।
उत्तर – दिनांक – 10 फरवरी, 20XX
घर संख्या – W-414
टीसीआई, राउरकेला
ओड़िशा
प्रिय अनुज
(शुभ स्नेहाशीष)
आज मैंने अपनी पाठ्यपुस्तक में ‘विश्वासघात’ नामक एकांकी पढ़ी, जिसमें ‘जौहर व्रत’ का उल्लेख किया गया है। मुझे लगा कि तुम्हें भी भारतीय इतिहास की इस गौरवशाली और साहसी परंपरा के बारे में जानना चाहिए।
‘जौहर व्रत’ प्राचीन काल में राजपूत स्त्रियों द्वारा निभाई जाने वाली एक अत्यंत कठिन और साहसी परंपरा थी। जब युद्ध में हार निश्चित होती थी और राजपूत वीर अपने प्राणों की बाजी लगा देते थे, तब किले की स्त्रियाँ अपनी आन-बान और गरिमा की रक्षा के लिए पवित्र अग्नि में स्वयं को समर्पित कर देती थीं। वे ऐसा इसलिए करती थीं ताकि वे शत्रुओं के हाथों में पड़कर अपमानित न हों। पाठ में तेज सिंह की माँ और रामगढ़ की अन्य स्त्रियों ने भी अपनी अस्मत बचाने के लिए इसी ‘जौहर’ का पालन किया। यह त्याग हमें सिखाता है कि हमारे पूर्वजों के लिए स्वाभिमान और आत्म-सम्मान उनके प्राणों से भी बढ़कर था।
आशा है कि तुम इस जानकारी से गौरवान्वित महसूस करोगे। पढ़ाई पर ध्यान देना और बड़ों को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा अग्रज,
अविनाश
- ‘सच्चे वीर की प्रशंसा तो शत्रु भी करते हैं’- इस विषय पर कक्षा में वार्ता आयोजित कीजिए।
उत्तर – छात्र शिक्षक के दिशानिर्देश में इस क्रियाकलाप को पूरा करेंगे।
- इस एकांकी का जो अंश आपको अच्छा लगा हो उसका मंचन कीजिए।
उत्तर – छात्रगण शिक्षक की सहायता से एकांकी का मंचन कार्य करेंगे।
गृहकार्य
- निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्यायवाची लिखिए-
(क) फतह – विजय/जीत
(ख) इंतज़ाम – प्रबंध
(ग) नफ़रत – घृणा
(घ) पैगाम – संदेश
(ङ) सुलह – समझौता
(च) खिदमत – सेवा
- पाठ से छाँटकर निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
(क) सम्मान X अपमान
(ख) सधवा X विधवा
(ग) बेइज़्ज़ती X इज़्ज़त
(घ) पराजय X विजय/जीत
(ङ) कायरता X वीरता
(च) संभव X असंभव

