ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter – Bahu Ki Vida, Vinod Rastogi, The Best Solutions,  बहू की विदा, विनोद रस्तोगी

विनोद रस्तोगी – एकांकीकार का परिचय

विनोद रस्तोगी का जन्म सन् 1923 में उत्तर प्रदेश के फ़र्रूख़ाबाद जिले के शमसाबाद नामक गाँव में हुआ। आपकी आरंभिक शिक्षा फ़र्रुखाबाद में तथा स्नातक स्तर की शिक्षा कानपुर में हुई। हिंदी विषय में एम. ए. के बाद रस्तोगी जी आकाशवाणी के इलाहाबाद केंद्र में नाट्य निर्देशक के पद पर कार्य करने लगे। आपने नाट्य- साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश किया। अब तक आपके आठ उपन्यास तथा दो कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी अनेक रचनाएँ पुरस्कृत की जा चुकी हैं। ‘नए हाथ’, ‘आज़ादी के बाद’, ‘बर्फ़ की मीनार’, ‘गोपा का दान’, ‘दरारें’, ‘रुपया’, ‘रूप और रोटी’, ‘भगीरथ के बेटे’ आपकी बहुचर्चित रचनाएँ हैं। आपकी रचनाओं में जीवन की समस्याओं का चित्रण हुआ है। आधुनिक जीवन की मानसिक कुंठाओं को उन्होंने अपने एकांकियों में स्थान दिया है।

र प्रदेश में 21 जून, सन् 1912 में हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करके स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ समय तक इन्होंने पंजाब सरकार के कृषि विभाग में कार्य किया, पर बाद में ये नौकरी छोड़कर लेखन-कार्य में संलग्न हो गए।

श्री विष्णु प्रभाकर बहुमुखी प्रतिभासंपन्न साहित्यकार थे। इन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं; जैसे – कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी आदि पर अपनी लेखनी चलाई। 11 अप्रैल, सन् 2009 को इनका देहांत हो गया।

प्रभाकर जी की सभी रचनाओं में मानवतावादी दृष्टिकोण मुखरित हुआ है। इनके एकांकी समस्या – प्रधान तथा मानव-प्रकृति से ओत-प्रोत तथा भावनात्मक गहराई से संबंधित हैं।

एकांकी का कथानक

विनोद रस्तोगी द्वारा रचित एकांकी ‘बहू की विदा’ भारतीय समाज में व्याप्त ‘दहेज प्रथा’ की कुप्रथा पर कड़ा प्रहार करती है। यह एकांकी दिखाती है कि किस प्रकार एक व्यक्ति जब तक ‘बेटे वाला’ होता है, वह दहेज के लिए कठोर होता है, परंतु ‘बेटी वाला’ बनते ही उसे उसी पीड़ा का अहसास होता है।

  1. दहेज के कारण विदा से इनकार

एकांकी की शुरुआत एक धनी व्यापारी जीवनलाल के घर से होती है। प्रमोद अपनी बहन कमला को उसके पहले सावन के लिए विदा कराने आया है। परंतु जीवनलाल विदा करने से साफ मना कर देते हैं। उनका तर्क है कि बारात की खातिरदारी ठीक से नहीं हुई और दहेज के पाँच हज़ार रुपये अभी भी बाकी हैं। वे प्रमोद से दो टूक कहते हैं कि जब तक पाँच हज़ार रुपये नहीं मिलेंगे, विदा नहीं होगी।

  1. बहू और बेटी के बीच का अंतर

प्रमोद के गिड़गिड़ाने पर भी जीवनलाल का दिल नहीं पिघलता। वे कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी गौरी की शादी में बहुत दहेज दिया है और गर्व से कहते हैं कि उनकी ‘मूँछ ऊँची’ है। वे बहू और बेटी को एक ही तराजू में तौलने से इनकार कर देते हैं। उनके अनुसार, “बेटी बेटी है और बहू बहू!”

  1. प्रमोद का संकल्प और कमला की ममता

प्रमोद अपनी बहन कमला से मिलता है और उसे ढाँढस बँधाता है कि वह अपना घर बेचकर भी पाँच हज़ार रुपयों का प्रबंध करेगा। परंतु कमला एक आदर्श भारतीय नारी और बहन की तरह उसे ऐसा करने से रोकती है। वह नहीं चाहती कि उसकी विदा के लिए उसके भाई का घर बिके। इसी बीच जीवनलाल की पत्नी राजेश्वरी प्रवेश करती हैं। वे एक ममतामयी महिला हैं और अपने पति के लालच से दुखी हैं। वे प्रमोद को अपने पास से पाँच हज़ार रुपये देने का प्रस्ताव रखती हैं ताकि कमला की विदा हो सके, लेकिन प्रमोद स्वाभिमान के कारण इसे स्वीकार नहीं करता।

  1. विडंबना और हृदय परिवर्तन

तभी जीवनलाल का पुत्र रमेश अपनी बहन गौरी को विदा कराकर वापस लौटता है। जीवनलाल बहुत उत्साहित हैं, लेकिन रमेश को अकेला देखकर दंग रह जाते हैं। रमेश बताता है कि गौरी की विदा नहीं हुई क्योंकि उसके ससुराल वाले कह रहे थे कि दहेज पूरा नहीं दिया गया।

यह सुनते ही जीवनलाल के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वे अपनी बेटी के अपमान पर तिलमिला उठते हैं और गौरी के ससुराल वालों को ‘लोभी’ कहने लगते हैं। तभी राजेश्वरी उन्हें आईना दिखाती हैं कि जो व्यवहार वे दूसरों की बेटी (कमला) के साथ कर रहे हैं, वही उनके साथ भी हुआ है।

  1. अंत – वास्तविकता का बोध

जीवनलाल को अपनी गलती का अहसास होता है। उन्हें समझ आता है कि बहू और बेटी दोनों एक समान सम्मान की पात्र हैं। वे लज्जित होकर प्रमोद को रोकते हैं और खुशी-खुशी कमला की विदा करने के लिए तैयार हो जाते हैं। एकांकी का अंत एक सुखद मोड़ पर होता है जहाँ दहेज की दीवार ढह जाती है और मानवीय संवेदनाएँ जीत जाती हैं।

एकांकी का संदेश

इस एकांकी का मूल संदेश यह है कि दहेज एक सामाजिक अभिशाप है। समाज में जब तक ‘बेटे वाले’ अपनी बहू को अपनी ‘बेटी’ के समान नहीं समझेंगे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। यह एकांकी आत्म-मंथन की प्रेरणा देती है कि हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम अपने लिए चाहते हैं।

 

पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ

(क) जीवनलाल

अहंकारी और धनी – जीवनलाल एक धनी व्यापारी है जिसे अपनी संपत्ति और सामाजिक प्रतिष्ठा पर बहुत घमंड है। वह अपनी ‘मूँछ ऊँची’ रखने के लिए दिखावे में विश्वास करता है।

दहेज-लोभी – वह बहू की विदा को व्यापार मानता है। जब तक बकाया पाँच हज़ार रुपये नहीं मिलते, वह बहू को विदा करने को तैयार नहीं होता।

दोहरा मापदंड – वह बहू और बेटी में भेदभाव करता है। उसके लिए बहू पैसा वसूलने का साधन है और बेटी लाड-प्यार की हकदार।

परिवर्तनशील – एकांकी के अंत में जब उसकी अपनी बेटी के साथ वही व्यवहार होता है, तो उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और उसे अपनी गलती का अहसास होता है।

 

(ख) राजेश्वरी – जीवनलाल की पत्नी

ममता की मूर्ति – राजेश्वरी एक सहृदय और संवेदनशील महिला है। वह कमला (बहू) को अपनी बेटी की तरह मानती है।

न्यायप्रिय – वह अपने पति के गलत व्यवहार का विरोध करती है और उन्हें आईना दिखाती है।

उदार – वह प्रमोद को अपने गहने या तिजोरी से रुपये देने का प्रस्ताव रखती है ताकि कमला की विदा हो सके।

 

(ग) प्रमोद – कमला का भाई

भावुक और स्वाभिमानी – वह अपनी बहन से बहुत प्यार करता है। अपमानित होने के बावजूद वह बहन की खुशी के लिए अपना घर बेचने को तैयार हो जाता है।

धैर्यवान – वह जीवनलाल की कड़वी बातों को सुनकर भी शिष्टाचार नहीं छोड़ता, लेकिन अंत में करारा व्यंग्य भी करता है।

 

(घ) कमला – बहू

आदर्श भारतीय नारी – वह शांत, सहिष्णु और त्याग की प्रतिमूर्ति है। वह नहीं चाहती कि उसकी विदा के लिए उसके भाई का घर बिके।

संस्कारवान – ससुराल में दुर्व्यवहार मिलने के बावजूद वह अपनी सास और पति का सम्मान करती है।

 

एकांकी का उद्देश्य

इस एकांकी के माध्यम से लेखक ने समाज के सामने कई महत्वपूर्ण उद्देश्य रखे हैं –

दहेज प्रथा पर प्रहार – एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली ‘दहेज की कुप्रथा’ के क्रूर चेहरे को उजागर करना है। लेखक दिखाना चाहता है कि कैसे लालच के कारण मानवीय रिश्ते मर जाते हैं।

बहू और बेटी की समानता – लेखक यह संदेश देना चाहता है कि बहू भी किसी की बेटी होती है। समाज में जब तक ‘बेटे वाले’ अपनी बहू को ‘बेटी’ के समान दर्जा नहीं देंगे, तब तक महिलाओं का शोषण होता रहेगा।

हृदय परिवर्तन का चित्रण – एकांकी का उद्देश्य यह दिखाना है कि जब मनुष्य पर स्वयं वही विपत्ति आती है जो उसने दूसरों को दी है, तभी उसे दूसरों के दुख का वास्तविक अहसास होता है जैसा कि जीवनलाल के साथ हुआ।

 

सामाजिक विडंबना का प्रदर्शन – यह उस सामाजिक मानसिकता पर चोट करती है जहाँ लोग अपनी बेटी की ससुराल वालों से तो शराफ़त की उम्मीद करते हैं, लेकिन अपनी बहू के प्रति स्वयं कसाई बन जाते हैं।

 

कठिन शब्दों के सरल अर्थ

1 – आधुनिक – नए जमाने का – Modern

2 – समृद्धि – संपन्नता / खुशहाली – Prosperity

3 – निराशाजन्य – निराशा से उत्पन्न – Born out of despair

4 – करुण – दया पैदा करने वाला – Pathetic / Piteous

5 – निर्णय – फैसला – Decision

6 – दशा – हालत / अवस्था – Condition / State

7 – सावन – वर्षा ऋतु का एक महीना – Monsoon month

8 – जमुहाई – उबासी लेना – Yawning

9 – मजबूर – असहाय / विवश – Helpless / Compelled

10 – सामर्थ्य – शक्ति / हैसियत – Capacity / Ability

11 – आवेश – जोश / क्रोध – Passion / Agitation

12 – बिरादरी – समाज / जाति के लोग – Community / Fraternity

13 – खातिर – सेवा-सत्कार – Hospitality

14 – मरहम – घाव पर लगाने वाली दवा – Ointment / Balm

15 – चेष्टा – कोशिश / प्रयत्न – Attempt / Effort

16 – गौना – विदा का दूसरा चरण – Consummation of marriage

17 – नकद – रोकड़ रुपया – Cash

18 – सरासर – पूरी तरह से – Downright / Utterly

19 – अन्याय – बेइंसाफी – Injustice

20 – हिम्मत – साहस – Courage

21 – बदतमीज़ी – अभद्रता – Impoliteness / Rudeness

22 – तिलमिलाना – तड़प उठना / क्रोधित होना – To be agitated / Stung

23 – अपमान – बेइज्जती – Insult

24 – दंग रहना – हैरान रह जाना – To be stunned / Amazed

25 – दाँतों तले उँगली दबाना – बहुत चकित होना – To be greatly surprised

26 – मूँछ ऊँची होना – प्रतिष्ठा बढ़ना – To have a high prestige

27 – व्यर्थ – बेकार – Useless / Vain

28 – विनती – प्रार्थना – Request / Plea

29 – तराजू – तुलना करने का यंत्र – Balance / Scale

30 – लॉन – घास का मैदान – Lawn

31 – सिसकना – रोते हुए गहरी साँस लेना – Sobbing

32 – आर्द्र – गीला / करुणा भरा – Moist / Emotional

33 – प्रबंध – इंतजाम – Arrangement

34 – सौगंध – कसम – Oath / Swear

35 – कामना – इच्छा – Desire / Wish

36 – पूर्ति – पूरा करना – Fulfillment

37 – पचड़े – झमेले / बेकार की बातें – Complications / Mess

38 – ममता की मूर्ति – अत्यंत दयालु – Embodiment of affection

39 – जिद्दी – हठी – Stubborn

40 – दिखावा – ढोंग / प्रदर्शन – Show-off / Pretence

41 – कुशल-क्षेम – खैरियत – Welfare / Well-being

42 – मौन – चुप – Silent

43 – गूढ़ – गहरा / रहस्यमयी – Deep / Mysterious

44 – तिजोरी – धन रखने की अलमारी – Safe / Locker

45 – कुंजियों का गुच्छा – चाबियों का गुच्छा – Bunch of keys

46 – मूर्तिवत् – मूर्ति की तरह स्थिर – Statue-like

47 – उतावली – जल्दबाजी – Eagerness / Haste

48 – बेढंगी – बेतुकी / बुरी – Awkward / Odd

49 – नकटा – बिना नाक वाला / निर्लज्ज – Shameless / Noseless

50 – स्वागत – अभिनंदन – Welcome

51 – थाल – बड़ी थाली – Platter / Large plate

52 – नेपथ्य – पर्दे के पीछे का स्थान – Backstage

53 – घबराहट – बेचैनी – Nervousness / Panic

54 – हतप्रभ – स्तब्ध – Dazed / Dumbfounded

55 – कंपन – थरथराहट – Vibration / Trembling

56 – शराफ़त – सज्जनता – Decency / Gentility

57 – इंसानियत – मानवता – Humanity

58 – दुहाई देना – पुकारना / सहायता माँगना – To appeal / To invoke

59 – लोभी – लालची – Greedy

60 – नाक-भौं सिकोड़ना – घृणा करना / असंतोष – To frown / To dislike

61 – अजीब – विचित्र – Strange / Weird

62 – उलझन – समस्या / फँसाव – Confusion / Dilemma

63 – लज्जित – शर्मिंदा – Ashamed

64 – इलाज – उपचार – Treatment / Cure

65 – यवनिका पात – पर्दा गिरना – Curtain fall

66 – धब्बा – दाग – Stain / Blemish

67 – करारी – ज़ोरदार – Sharp / Hard

68 – हरा घाव – नया जख्म – Raw wound

69 – छोकरा – लड़का – Lad / Boy

70 – बेवकूफ़ – मूर्ख – Fool

71 – आखिरी – अंतिम – Final

72 – हकीकत – सच्चाई – Reality

73 – बराबर – समान – Equal

74 – बिगाड़ना – खराब करना – To spoil / To ruin

75 – बदला – प्रतिशोध – Revenge

76 – हिम्मत – साहस – Courage

77 – आवारा – बिना काम के घूमने वाला – Vagabond / Loafer

78 – अँगुली – उँगली – Finger

79 – खिड़की – झरोखा – Window

80 – सफेद – धवल – White

81 – कलाई – पहुँचा – Wrist

82 – रेशमी – सिल्क का – Silky

83 – पवित्र – साफ-सुथरा – Holy / Pure

84 – मूल्य – कीमत – Value / Price

85 – पिघलना – गलना – To melt

86 – प्रबंध – व्यवस्था – Management

87 – व्याकुलता – बेचैनी – Restlessness

88 – कलेजा – हृदय – Heart / Liver

89 – धातु – मटेरियल – Metal

90 – साक्ष्य – प्रमाण – Evidence

91 – उपक्रम – शुरुआत – Attempt / Initiative

92 – चिट्ठी – पत्र – Letter

93 – इंसान – मनुष्य – Human / Person

94 – उत्साह – उमंग – Enthusiasm / Zeal

95 – घूँसा – मुक्का – Punch / Fist

96 – कमाई – आय – Earnings / Income

97 – नज़र – दृष्टि – Sight / View

98 – अपमान – अनादर – Insult / Disrespect

99 – शांति – चैन – Peace

100 – अचरज – विस्मय – Astonishment

101 – आज्ञा – अनुमति – Permission / Order

102 – हर्ष – खुशी – Joy / Delight

103 – शीघ्रता – जल्दी – Haste / Speed

104 – यथार्थ – वास्तविक – Realistic / Actual

105 – कठोर – सख्त – Hard / Harsh

106 – मापदंड – पैमाना – Criteria / Standard

107 – पराजित – हारा हुआ – Defeated

108 – दृश्य – नजारा – Scene / Sight

109 – प्रस्थान – जाना – Departure

110 – सन्तोष – तृप्ति – Contentment

अवतरणों पर आधारित प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(i) ‘अगर तुम्हारी सामर्थ्य कम थी, तो अपनी बराबरी का घर देखते। झोंपड़ी में रहकर महल से नाता क्यों जोड़ा?’

(क) उपर्युक्त कथन किसने, किससे, कब तथा क्यों कहा है?

उत्तर – यह कथन जीवनलाल ने प्रमोद से कहा। जब प्रमोद अपनी बहन कमला को विदा कराने के लिए जीवनलाल के घर आया और उसने दहेज की शेष राशि देने में असमर्थता जताई, तब जीवनलाल ने अहंकारवश यह बात कही।

(ख) श्रोता ने अपने ‘सामर्थ्य’ के संबंध में क्या कहा?

उत्तर – श्रोता प्रमोद ने कहा कि उसने अपनी हैसियत और सामर्थ्य के अनुसार जितना बन सका, उतना दहेज दिया है।

(ग) ‘झोंपड़ी’ तथा ‘महल’ से वक्ता का संकेत किस-किस ओर है?

उत्तर – ‘झोंपड़ी’ से वक्ता का संकेत प्रमोद के मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार की ओर है और ‘महल’ से संकेत जीवनलाल के अपने धनी और समृद्ध परिवार की ओर है।

(घ) वक्ता किस बात पर क्रोधित है तथा क्यों?

उत्तर – वक्ता जीवनलाल इस बात पर क्रोधित है कि प्रमोद के परिवार ने बारात का स्वागत ठीक से नहीं किया और दहेज की पूरी रकम (पाँच हजार रुपये कम) नहीं दी। उसे लगता है कि इससे उसकी बिरादरी में बदनामी हुई है।

(ii) ‘मेरे नाम पर जो धब्बा लगा, मेरी शान को जो ठेस पहुँची, भरी बिरादरी में जो हँसी हुई, उस करारी चोट का घाव आज भी हरा है। जाओ, कह देना अपनी माँ से कि अगर बेटी को विदा कराना चाहती हैं तो पहले उस घाव के लिए मरहम भेजें।’

(क) वक्ता कौन है? उसके अनुसार उसकी शान को क्या ठेस पहुँची थी?

उत्तर – वक्ता जीवनलाल है। उसके अनुसार उसकी शान को ठेस तब पहुँची जब बारात की विदाई के समय उसे अपेक्षित दहेज नहीं मिला और बिरादरी के बीच उसकी हँसी हुई।

(ख) ‘घाव’ शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया गया है?

उत्तर – ‘घाव’ शब्द का प्रयोग मानसिक चोट, अपमान और अहंकार को लगी ठेस के अर्थ में किया गया है।

(ग) वक्ता ने ‘घाव के लिए मरहम भेजने की बात कहकर क्या संकेत किया?

उत्तर – ‘मरहम’ भेजने की बात कहकर वक्ता ने स्पष्ट संकेत किया कि यदि दहेज के बाकी पाँच हजार रुपये नकद दे दिए जाएँ, तभी वह अपनी बहू को विदा करेगा।

(घ) क्या वक्ता के उपर्युक्त कथन को आप सही मानते हैं? स्पष्ट कीजिए।  

उत्तर – नहीं, वक्ता का कथन पूर्णतः गलत है। दहेज माँगना और उसके लिए बहू को विदा न करना एक सामाजिक अपराध और अमानवीय कृत्य है।

(iii) ‘ये बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुए हैं। और तुम (उत्तेजित स्वर में) कल के छोकरे मुझे बेवकूफ़ बनाना चाहते हो?’

(क) उपर्युक्त कथन में कौन, किससे किस संदर्भ में बात कर रहा है

उत्तर – यहाँ जीवनलाल प्रमोद से बात कर रहे हैं। जब प्रमोद भविष्य में अर्थात् गौने के समय दहेज पूरा करने का आश्वासन देता है, तब जीवनलाल अपनी चतुरता दिखाते हुए यह कहते हैं।

(ख) ‘बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुए हैं’- से उसका क्या आशय है?

उत्तर – इसका आशय है कि जीवनलाल बहुत अनुभवी और दुनियादार व्यक्ति है और उसे धोखे या बातों में नहीं फँसाया जा सकता।

(ग) वक्ता ने उपर्युक्त कथन श्रोता के किस कथन के उत्तर में कहे हैं?

उत्तर – प्रमोद ने जब कहा कि “हम गौने में आपकी हर माँग पूरी करने की चेष्टा करेंगे”, तब जीवनलाल ने उसे अविश्वसनीय मानते हुए यह उत्तर दिया।

(घ) वक्ता की क्या माँग थी? वक्ता के अनुसार उसके नाम पर क्या धब्बा लगा था?

उत्तर – वक्ता की माँग पाँच हजार रुपये नकद थी। उसके अनुसार नाम पर धब्बा दहेज की कमी और खराब खातिरदारी के कारण लगा था।

 

(iv) ‘तो वह क्या कर लेता? मेरे सामने मुँह खोलने की हिम्मत नहीं है उसमें।’

(क) ‘वह’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?

उत्तर – ‘वह’ शब्द का प्रयोग जीवनलाल के पुत्र रमेश के लिए किया गया है।

(ख) वक्ता ने उपर्युक्त बात श्रोता के किस कथन के उत्तर में कही है?

उत्तर – जब प्रमोद ने कहा कि “अगर रमेश बाबू होते…”, तब जीवनलाल ने अपने बेटे के ऊपर अपने पूर्ण नियंत्रण को दर्शाने के लिए यह कहा।

(ग) वक्ता ने अपने बेटे की क्या विशेषताएँ बताईं?

उत्तर – वक्ता ने बताया कि उसका बेटा आज्ञाकारी है और वह बड़ों के मुँह लगने वाला बदतमीज़ लड़का नहीं है।

(घ) वक्ता का बेटा कहाँ गया हुआ था और क्यों? क्या उसका जाना सफल रहा?

उत्तर – वक्ता का बेटा रमेश अपनी बहन गौरी को ससुराल से विदा कराने गया था। उसका जाना असफल रहा क्योंकि गौरी के ससुराल वालों ने दहेज कम होने के कारण उसे विदा नहीं किया।

 

(v) ‘तुम्हारी बहन के सपने कभी पूरे नहीं होंगे और उसके सपनों के खून का दाग तुम्हारे हाथों और तुम्हारी माँ के आँचल पर होगा। समझे’

(क) उपर्युक्त वाक्य किस एकांकी से लिया गया है? वाक्य किसने तथा किससे कहा है?

उत्तर – यह ‘बहू की विदा’ एकांकी से लिया गया है। यह वाक्य जीवनलाल ने प्रमोद से कहा है।

(ख) ‘तुम्हारी बहन के सपने कभी पूरे नहीं होंगे’- आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका आशय है कि यदि दहेज नहीं मिला तो कमला कभी अपने मायके नहीं जा पाएगी और सावन में सहेलियों के साथ हँसने-खेलने का उसका अरमान अधूरा रह जाएगा।

(ग) वक्ता ने सपने पूरे न होने के लिए किस-किस को ज़िम्मेदार बताया? क्या आप वक्ता के कथन को उचित मानते हैं?

उत्तर – वक्ता ने इसके लिए प्रमोद और उसकी माँ को जिम्मेदार बताया। वक्ता का कथन सर्वथा अनुचित है क्योंकि वह स्वयं लालच के कारण कमला को रोक रहा था।

(घ) वक्ता ने अपनी बेटी गौरी के विवाह के संबंध में वक्ता से क्या कहा? इससे वक्ता के चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है।

उत्तर – उसने कहा कि रमेश गौरी को लेने गया है और वह अपना सावन यहीं बिताएगी। इससे जीवनलाल के दोहरे चरित्र और अहंकार का पता चलता है—वह अपनी बेटी के लिए तो सुख चाहता है पर बहू के लिए नहीं।

(vi) ‘बेटी और बहू को एक तराजू में तौलना चाहते हो? बेटी-बेटी है, बहू-बहू।’

(क) उपर्युक्त कथन किसने, किससे कहा है तथा कब?

उत्तर – यह कथन जीवनलाल ने प्रमोद से तब कहा जब प्रमोद ने कमला के अधिकारों की बात की।

(ख) ‘बेटी’ और ‘बहू’ से किस-किस की ओर संकेत है?

उत्तर – ‘बेटी’ से संकेत जीवनलाल की पुत्री गौरी की ओर है और ‘बहू’ से संकेत प्रमोद की बहन कमला की ओर है।

(ग) बेटी वाला होकर भी बक्ता को किस बात पर अहंकार था?

उत्तर – उसे इस बात का अहंकार था कि उसने अपनी बेटी के विवाह में बहुत दहेज दिया है और अपनी शान दिखाई है।

(घ) ‘बेटी-बेटी है, बहू-बहू’इस कथन से वक्ता की किस मानसिकता पर प्रकाश पड़ता है? इस संबंध में अपने विचार भी प्रकट कीजिए।

उत्तर – इससे उसकी संकीर्ण और भेदभावपूर्ण मानसिकता का पता चलता है। वह बहू को केवल एक वस्तु या धन प्राप्ति का साधन समझता है, जबकि बेटी को प्रेम का पात्र। मेरा विचार है कि समाज में जब तक बहू और बेटी को समान नहीं समझा जाएगा, तब तक पारिवारिक कलह और दहेज प्रथा समाप्त नहीं होगी।

 

(vii) ‘जरूर। और हाँ, उसे यह भी बताते जाना कि अगली बार मेरे लिए ‘मरहम’ लेकर विदा कराने कब

आओगे?’

(क) ‘ज़रूर’ शब्द का प्रयोग वक्ता ने किस प्रश्न के उत्तर में किया है और क्यों?

उत्तर – वक्ता ने ‘ज़रूर’ शब्द का प्रयोग प्रमोद के उस प्रश्न के उत्तर में किया जब प्रमोद ने विदा न होने की स्थिति में अपनी बहन कमला से मिलने की अनुमति माँगी।

(ख) जीवनलाल के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – जीवनलाल एक अहंकारी, दहेज-लोभी, कठोर और भौतिकवादी व्यक्ति है जिसे भावनाओं से अधिक धन से प्रेम है।

(ग) ‘मरहम’ शब्द का आशय स्पष्ट कीजिए। वक्ता किस प्रकार के ‘मरहम’ की बात कर रहा है और क्यों?

उत्तर – ‘मरहम’ का आशय यहाँ दहेज की शेष राशि (पाँच हजार रुपये) से है। वह इस राशि को अपना अपमान मिटाने का साधन मानता है।

(घ) दहेज़ प्रथा पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर – दहेज प्रथा एक सामाजिक अभिशाप है जो बेटियों के सम्मान को ठेस पहुँचाती है और परिवारों को आर्थिक रूप से नष्ट कर देती है।

 

(viii) ‘मैं कहता हूँ रोओ मत। इन मोतियों का मूल्य समझने वाला यहाँ कोई नहीं है। पानी में पत्थर नहीं

पिघल सकता।

(क) कौन, किससे किस संदर्भ में बात कर रहा है?

उत्तर – वक्ता प्रमोद अपनी बहन कमला से उस समय बात कर रहा है जब विदा न होने के कारण कमला रोने लगती है।

(ख) रोने वाला कौन है? उसके रोने का क्या कारण है?

उत्तर – रोने वाली कमला है। उसके रोने का कारण उसके ससुर जीवनलाल द्वारा दहेज के कारण उसकी विदा रोक देना है।

(ग) वक्ता ने ‘मोतियों’ का प्रयोग किस अर्थ में किया है?

उत्तर – वक्ता ने ‘मोतियों’ का प्रयोग कमला के आँसुओं के लिए किया है, जिन्हें वह अमूल्य मानता है।

(घ) ‘पानी में पत्थर नहीं पिघलता’- वाक्य का व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका व्यंग्य यह है कि जीवनलाल और उसका परिवार पत्थर दिल (संवेदनाहीन) है, जहाँ कमला की करुणा और आँसुओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

(ix) ‘किस लड़की की यह कामना नहीं होगी, भैया? लेकिन उस कामना की पूर्ति के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाना कहाँ तक ठीक है …?’

(क) हर लड़की की कामना क्या होती है? एकांकी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – हर लड़की की कामना होती है कि वह शादी के बाद पहला सावन अपने मायके में सखी-सहेलियों के साथ हँस-खेलकर बिताए।

(ख) उस कामना की पूर्ति में बाधा क्यों आ रही है?

उत्तर – बाधा जीवनलाल का दहेज के प्रति लालच है। वह पाँच हजार रुपये न मिलने तक विदा करने को तैयार नहीं है।

(ग) श्रोता उस कामना की पूर्ति के लिए क्या कीमत चुकाने को तैयार है?

उत्तर – श्रोता (प्रमोद) उस कामना की पूर्ति के लिए अपना घर बेचने की कीमत चुकाने को तैयार है।

(घ) वक्ता ने उसे ऐसा करने से क्यों रोका?

उत्तर – कमला ने उसे ऐसा करने से इसलिए रोका क्योंकि वह अपने भाई और परिवार को संकट में नहीं डालना चाहती थी। साथ ही उसे अपनी छोटी बहन विमला के विवाह की भी चिंता थी।

 

(x) ‘धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा, भैया। माँ जी तो ममता की मूर्ति हैं ही, बाबू जी जरा ज़िद्दी स्वभाव के हैं। समय के साथ वे भी सब भूल जाएँगे।’

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? धीरे-धीरे कौन-सी बात ठीक हो जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है?

उत्तर – वक्ता कमला है और श्रोता उसका भाई प्रमोद है। विदा न होने के कारण पैदा हुए तनाव और दुख के ठीक हो जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

(ख) ‘माँ जी’ के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – ‘माँ जी’ (राजेश्वरी) ममतामयी, न्यायप्रिय और दयालु हैं। वे बहू को अपनी बेटी की तरह मानती हैं।

(ग) ‘बाबूजी’ के किस व्यवहार से उनके ज़िद्दी होने का आभास होता है? उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – जीवनलाल का यह व्यवहार कि “पाँच हजार रुपये के बिना विदा नहीं होगी”, उनके ज़िद्दी और लोभी होने का प्रमाण है।

(घ) बाबू जी को कौन-सी बात खल रही थी? ‘भैया’ उनकी शिकायत दूर करने के लिए क्या करने को तैयार था?

उत्तर – बाबू जी को दहेज की कमी खल रही थी। भैया प्रमोद उनकी शिकायत दूर करने के लिए अपना मकान बेचने को तैयार था।

(xi) ‘बस! मैं देती हूँ तुम्हें रुपये। उनके मुँह पर मारकर कहना कि यह लो कागज़ के रंग-बिरंगे टुकड़े जिन्हें तुम आदमी से ज्यादा प्यार करते हो। (उठकर सामने वाले द्वार की ओर बढ़ती हुई) मैं अभी लाती हूँ।’

(क) कौन रुपये देने की बात कर रही है? और किसके मुँह पर कागज़ के टुकड़े फेंके जाने हैं? वक्त का परिचय दीजिए।

उत्तर – राजेश्वरी रुपये देने की बात कर रही है। रुपये जीवनलाल के मुँह पर फेंके जाने हैं। राजेश्वरी जीवनलाल की पत्नी और एक उदार हृदय वाली महिला है।

(ख) यहाँ रंग-बिरंगे टुकड़ों से क्या अभिप्राय है? कुछ लोग इनके पीछे क्यों भागते हैं? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर – ‘रंग-बिरंगे टुकड़ों’ से अभिप्राय रुपये/नोटों से है। लोग इनके पीछे अंधे होकर मानवीय मूल्यों और रिश्तों को भूल जाते हैं।

(ग) उपर्युक्त पंक्तियों में समाज की किस विकृति की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर – यहाँ समाज की दहेज-लोभी प्रवृत्ति और भौतिकवाद की विकृति की ओर संकेत है।

(घ) ‘बहू की विदा’ एकांकी का संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘बहू की विदा’ एकांकी का संदेश यह हौ कि बहू और बेटी में कोई अंतर नहीं करना चाहिए। दहेज एक सामाजिक बुराई है जिसे मानवीय संवेदनाओं से ही जीता जा सकता

(xii) ठीक ही कहा है आपने। आज के युग में पैसा ही नाक और मूँछ है। जिसके पास पैसा नहीं वह नाक- मूँछ होते हुए भी नकटा है, मूँछ-कटा है।

(क) वक्ता और श्रोता कौन है? वह किस बात पर व्यंग्य कर रहा है?

उत्तर – वक्ता प्रमोद है और श्रोता जीवनलाल है। वह जीवनलाल के उस अहंकार पर व्यंग्य कर रहा है जिसमें वे पैसे को ही इज्जत मान रहे हैं।

(ख) उपर्युक्त पंक्तियों में आज के युग में किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – यहाँ इस बुराई की ओर संकेत है कि आज समाज में व्यक्ति की योग्यता या चरित्र के बजाय उसकी धन-दौलत से उसकी प्रतिष्ठा मापी जाती है।

(ग) क्या आप वक्ता की बात से सहमत हैं? कारण सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर – मैं वक्ता के कथन से सहमत नहीं हूँ, क्योंकि पैसा सुविधा दे सकता है पर सम्मान और संस्कार नहीं। नकटा वह है जो मानवीयता खो चुका है, न कि वह जिसके पास धन नहीं है।

(घ) ‘बहू की विदा’ एकांकी द्वारा एकांकीकार ने क्या संदेश दिया है?

उत्तर – ‘बहू की विदा’ एकांकी द्वारा एकांकीकार ने यह संदेश दिया है कि रिश्तों की अहमियत पैसों से ऊपर है।

 

(xiii) (बिगड़कर) ‘हमने तो जीवनभर की कमाई दे दी और उनकी नज़र में दहेज़ पूरा नहीं दिया गया लोभी कहीं के!’

(क) उपर्युक्त वाक्य का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – उपर्युक्त वाक्य का संदर्भ – यह वाक्य जीवनलाल ने तब कहा जब उसे पता चला कि उसकी अपनी बेटी गौरी की विदा दहेज की कमी के कारण उसके ससुराल वालों ने रोक दी है।

(ख) किसने जीवनभर की कमाई किसे दे दी और क्यों?

उत्तर – जीवनलाल ने अपनी बेटी गौरी के विवाह में अपनी जीवनभर की कमाई दहेज के रूप में दे दी थी ताकि उसकी शान बनी रहे।

(ग) दहेज़ के दुष्प्रभाव पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर – दहेज प्रथा से समाज में असमानता बढ़ती है, बेटियाँ बोझ समझी जाने लगती हैं और लालच के कारण घर टूट जाते हैं।

(घ) ‘लोभी’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर – ‘लोभी’ शब्द का प्रयोग गौरी के ससुराल वालों के लिए किया गया है। वे जीवनलाल की तरह ही लालची और संवेदनहीन हैं।

 

(xiv) ‘अब भी आँखें नहीं खुलीं? जो व्यवहार अपनी बेटी के लिए तुम दूसरों से चाहते हो वही दूसरे की बेटी को भी दो। जब तक बहू और बेटी को एक-सा नहीं समझोगे, न तुम्हें सुख मिलेगा और न शांति!’

(क) किसकी आँखें नहीं खुली और क्यों?

उत्तर – जीवनलाल की आँखें नहीं खुलीं क्योंकि वह अपनी बहू को सताते समय यह भूल गया था कि उसकी अपनी बेटी भी किसी की बहू है।

(ख) उपर्युक्त अवतरण का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – उपर्युक्त अवतरण का संदर्भ – राजेश्वरी अपने पति जीवनलाल को तब फटकारती है जब वे अपनी बेटी की विदा न होने पर विलाप कर रहे होते हैं।

(ग) वक्ता कौन है? उसके चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – वक्ता राजेश्वरी है। वह साहसी, स्पष्टवादी, ममतामयी और बुद्धिमान महिला है।

(घ) बहू और बेटी में अंतर क्यों किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – अंतर इसलिए किया जाता है क्योंकि समाज बहू को ‘पराया धन’ या ‘संपत्ति’ समझता है जबकि बेटी को ‘अपना खून’।

(xv) ‘बहू और बेटी ! बेटी और बहू!! अजीब उलझन है। कुछ समझ में नहीं आता।’

(क) वक्ता और श्रोता कौन है? कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – वक्ता जीवनलाल है और श्रोता उसकी पत्नी राजेश्वरी है। संदर्भ तब का है जब जीवनलाल को अपनी गलती का अहसास होने लगता है।

(ख) वक्ता की क्या उलझन है? इस उलझन का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर – वक्ता की उलझन यह है कि जो दुख वह दूसरों को दे रहा था, वही दुख उसे अपनी बेटी के माध्यम से मिला। परिणाम यह हुआ कि उसका हृदय परिवर्तन हो गया।

(ग) बेटी और बहू कौन हैं? आजकल बेटी और बहू में क्यों तथा किस प्रकार अंतर किया जाता है?

उत्तर – बेटी गौरी है और बहू कमला है। आजकल लोग बेटी को लेने के समय ‘बेटी वाले’ और बहू को लाने के समय ‘बेटे वाले’ बनकर अलग-अलग व्यवहार करते हैं।

(घ) दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।

उत्तर – दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए सुझाव – कठोर कानून का पालन, युवाओं द्वारा दहेज विरोधी शपथ, और सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना इत्यादि।

 

(xvi) कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है, बेटा। (राजेश्वरी की ओर मुड़कर) अरे, खड़ी- खड़ी हमारा मुँह क्या ताक रही हो? अंदर जाकर तैयारी क्यों नहीं करतीं? बहू की विदा नहीं करनी है क्या?

(क) ‘कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है।’ -वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका आशय है कि जीवनलाल को बेटी की विदा न होने पर जो मानसिक चोट लगी, उसने उनके दहेज के लालच की बीमारी का इलाज कर दिया।

(ख) उपर्युक्त वाक्य किसने, किससे कहे और कब?

उत्तर – यह वाक्य जीवनलाल ने प्रमोद से तब कहा जब उसे अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने कमला को विदा करने का निश्चय किया।

(ग) ‘चोट और मरहम’ शब्दों का प्रयोग किन-किन संदर्भों में किया गया है?

उत्तर – ‘चोट’ का प्रयोग अपमान/दुख के लिए और ‘मरहम’ का प्रयोग हृदय परिवर्तन/सुधार के लिए किया गया है।

(घ) जीवनलाल का हृदय परिवर्तन कैसे हुआ?

उत्तर – जीवनलाल का हृदय परिवर्तन तब हुआ जब उसने देखा कि जो पीड़ा वह कमला और प्रमोद को दे रहा था, वही पीड़ा उसे अपनी बेटी गौरी की विदा रुकने पर सहनी पड़ी।

 

 

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