Kissa Barsati Taal Ka (Paryavaran Lekh) – Ruskin Bond, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह पाठ रस्किन बांड द्वारा लिखित एक संस्मरण है, जो प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और बचपन की मासूम मित्रता को दर्शाता है।

  1. ताल की निराली दुनिया

लेखक को पहले लगता था कि उनके घर के पीछे वाले बरसाती तालाब (ताल) में केवल कीचड़ और भैंसें ही होती हैं। परंतु उनके दादा जी ने उन्हें उस ताल के भीतर छिपे प्रकृति के अद्भुत संसार से परिचित करवाया। दादा जी के साथ बैठकर लेखक ने काई के बीच से झाँकते मेढकों, उनके मधुर ‘वर्क-वर्क’ राग और पानी में हलचल करते हज़ारों नन्हे मेढकों को देखा।

  1. रामू से मित्रता और तैरना सीखना

एक दिन ताल पर लेखक की मुलाकात रामू नाम के एक चरवाहे लड़के से हुई। रामू उम्र में लेखक से थोड़ा ही बड़ा था और बहुत अच्छा तैराक था। उसने लेखक को अपनी भैंसों की पीठ पर बैठकर तैरना सिखाया। रामू स्कूल नहीं गया था, लेकिन उसे लोक-कथाओं और पशु-पक्षियों के बारे में गहरा ज्ञान था। दोनों गहरे दोस्त बन गए और गर्मी की हर दोपहर ताल पर बिताने लगे।

  1. भैंसों की सवारी और ताल का आनंद

लेखक और रामू अक्सर भैंसों की पीठ पर बैठकर दौड़ लगाते थे। भैंसों को वे ‘दलदल के समुद्र में चट्टान’ की तरह मानते थे। कभी-कभी सुस्त भैंसें बीच में ही लुढ़क जाती थीं, जिससे दोनों कीचड़ और काई में गिर जाते थे। लेखक घर लौटने से पहले गुसलखाने में छिपकर नहाते थे ताकि घर वालों को उनकी इस ‘हरी काई’ वाली मस्ती का पता न चले।

  1. जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता

पाठ में सारस पक्षी का विशेष वर्णन है। लेखक ने जाना कि सारस बहुत वफ़ादार और अच्छे मित्र होते हैं; यदि एक साथी मारा जाए, तो दूसरा उसके गम में हफ्तों तक वहीं चक्कर काटता है या प्राण त्याग देता है। दादा जी और रामू दोनों का मानना था कि पृथ्वी पर सभी जीवों को जीने का अधिकार है और हमें उनका आदर करना चाहिए। दादा जी जंगलों के विनाश और पशु-पक्षियों के छिनते घरों के प्रति चिंतित थे।

  1. विदाई और यादें

अंत में, जब लेखक वह स्थान छोड़कर चले गए, तो उन्हें विश्वास था कि रामू, वे भैंसें, मेढक और सारस उन्हें अपने संसार का हिस्सा मानते थे और आज भी उनके लौटने का इंतज़ार कर रहे होंगे।

मुख्य संदेश –

यह पाठ हमें सिखाता है कि प्रकृति का हर छोटा हिस्सा चाहे वह एक बरसाती तालाब ही क्यों न हो जीवन से भरपूर है। हमें बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि यह पृथ्वी जितनी हमारी है, उतनी ही उनकी भी है।

कठिन शब्दार्थ

1  पिछवाड़े – घर के पीछे का भाग  Backyard

 2  ताल – तालाब / सरोवर  Pond / Lake

 3  दलदल – कीचड़ भरी ज़मीन  Marsh / Swamp

 4  पहलुओं – पक्षों  Aspects

 5  सँजो – सँभालकर रखना  Cherish / Preserve

 6  तलैया – छोटा तालाब  Small pond

 7  तले – नीचे  Beneath / Under

 8  काई – पानी पर जमी हरी परत  Moss / Algae

 9  प्रकट – सामने आना  Appear

 10  घूर – टकटकी लगाकर देखना  Stare / Gaze

 11  जानी दुश्मन – प्राण लेने वाला शत्रु  Deadly enemy

 12  बगुला – एक सफ़ेद पक्षी  Heron / Egret

 13  धकियाने – धक्का देना  Pushing / Shoving

 14  तादाद – संख्या  Number / Quantity

 15  कुमुदिनी – जल में खिलने वाला फूल  Water lily

 16  जुगाली – मुँह चलाकर घास चबाना  Rumination / Chewing cud

 17  चट्टान – बड़ा पत्थर  Rock / Cliff

 18  सारस – एक लंबी टाँगों वाला पक्षी  Crane (bird)

 19  सर्वनाश – पूरी तरह विनाश  Total destruction

 20  निराली – अनोखी / अद्भुत  Unique / Wonderful

 21  परिचय – जान-पहचान  Introduction

 22  विश्वास – भरोसा  Trust / Belief

 23  सहमत – एक राय होना  Agreed

 24  चरवाहा – पशु चराने वाला  Herdsman / Shepherd

 25  आयु – उम्र  Age

 26  मुसकराया – मंद हँसी हँसना  Smiled

 27  वायदा – वादा / वचन  Promise

 28  रोज़ाना – हर दिन  Daily

 29  शीघ्र – जल्दी  Soon / Quickly

 30  वफ़ादार – स्वामीभक्त  Loyal / Faithful

 31  आदर – सम्मान  Respect / Honor

 32  अधिकार – हक  Right

 33  मान्यता – स्वीकृति  Recognition / Approval

 34  दोपहरियाँ – दोपहर का समय  Afternoons

 35  उदासी – गम / दुख  Sadness / Gloom

 36  जमा – इकट्ठा  Collected / Accumulated

 37  घंटाभर – एक घंटे तक  For an hour

 38  शांति – चुप्पी  Silence / Calmness

 39  प्रकट – दृश्यमान होना  Manifested

 40  राग छिड़ना – संगीत शुरू होना  Melody starting

 41  नन्हे-नन्हे – बहुत छोटे  Tiny / Little

 42  पगला जाना – पागल हो जाना  To go crazy

 43  मौजूद – उपस्थित  Present

 44  तैरना – जल में हाथ-पाँव मारना  Swimming

 45  छलाँग – कूदना  Leap / Jump

 46  हाथ-पाँव मारना – कोशिश करना  Making efforts

 47  सुस्त – आलसी  Lazy / Sluggish

 48  लुढ़कना – गिर पड़ना  Roll over / Tumble

 49  चक्कर काटना – गोल-गोल घूमना  Circling

 50  सर्वनाश – पूरी तरह खत्म होना  Annihilation

 51  जीवित – ज़िंदा  Alive

 52  मुश्किल – कठिन  Difficult

 53  बदलना – परिवर्तित करना  Change

 54  पहचानना – जानना  Recognize

 55  लौटना – वापस आना  Return

 56  बरसाती – बरसात का  Rain-fed / Monsoon

 57  सिवाय – अलावा  Except / Besides

 58  प्रकृति – कुदरत  Nature

 59  सुंदरता – खूबसूरती  Beauty

 60  संसार – दुनिया  World

 61  बीचोंबीच – मध्य में  Right in the middle

 62  समाचार – खबर  News / Information

 63  पड़ोसियों – पास रहने वाले  Neighbors

 64  गले फूलना – सूजन या गुब्बारा बनना  Throat swelling

 65  कीचड़ – गीली मिट्टी  Mud

 66  घुटनों – पैरों का जोड़  Knees

 67  साँवले – हल्के काले रंग का  Dusky / Dark complexion

 68  पीठ – कमर के ऊपर का भाग  Back

 69  लोक-कथाओं – जनश्रुतियाँ  Folk tales

 70  जानकारी – ज्ञान  Knowledge / Info

 71  आरामदेह – सुखद  Comfortable

 72  अवसरों – मौकों  Occasions

 73  गुसलखाने – स्नानघर  Bathroom

 74  भोंपू – हॉर्न जैसी आवाज़  Horn / Siren

 75  हिस्सा – भाग  Part / Share

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

पिछवाड़े, सँजो, स्नान, धब्बा, मेढक, ढूँढ़, दुश्मन, छुआ, धकियाने, घुटने, मुझसे, साँवले, छलाँग,

चट्टान, पक्षियों, लुढ़क, द्वार, व्यवहार, मान्यता, मुश्किल

प्रकृति, वृक्ष, वर्क-वर्क, शीघ्र, समुद्र, पृथ्वी, सर्वनाश

सफ़ेद, कमीज़, हाफ़पैंट, रोज़ाना, हफ़्तों, वफ़ादार

पिछवाड़े – Pich-vaa-day मुझसे – Mujh-say

सँजो – San-jo (Nasal)

साँवले – Saan-va-lay (Nasal)

स्नान – S-naan

छलाँग – Ch-laang

धब्बा – Dhab-baa

चट्टान – Chat-taan

मेढक – May-dhak

पक्षियों – Pak-shi-yon

ढूँढ़ – Dhoon-dh (Nasal)

लुढ़क – Lu-dhak

दुश्मन – Dush-man

द्वार – Dvaar

छुआ – Chhu-aa

व्यवहार – Vyav-haar

धकियाने – Dha-ki-yaa-nay

मान्यता – Maan-ya-taa

घुटने – Ghut-nay

मुश्किल – Mush-kil

प्रकृति – Pra-kri-ti

समुद्र – Sa-mud-ra

वृक्ष – Vrik-sh

पृथ्वी – Prith-vee

वर्क-वर्क – Vark-Vark

सर्वनाश – Sar-va-naash

शीघ्र – Shee-ghra    

सफ़ेद – Sa-fayd

रोज़ाना – Ro-zaa-naa

कमीज़ – Ka-meez

हफ़्तों – Haf-ton

हाफ़पैंट – Haaf-paint

वफ़ादार – Va-faa-daar

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) दादा जी ने लेखक को ताल से कब परिचित करवाया?

उत्तर – जब लेखक और दादा जी एक पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर पानी पर जमी हरी काई को देख रहे थे, तब दादा जी ने उन्हें ताल के संसार से परिचित करवाया।

(ख) पेड़ के पास की छाया को लकड़ी से छूने पर क्या हुआ?

उत्तर – पेड़ के पास की छाया को लकड़ी लकड़ी से छूने पर वहाँ हज़ारों नन्हे-नन्हे मेढक जाग उठे और एक-दूसरे को धकियाने लगे।

(ग) कीचड़वाले पानी में जाकर लेखक क्या करते थे?

उत्तर – घुटनों तक कीचड़वाले पानी में जाकर लेखक वहाँ लगे हुए कुमुदिनी के सफ़ेद फूलों को तोड़ लिया करते थे।

(घ) लेखक ने भैंसों की सुस्ती का क्या उदाहरण दिया है?

उत्तर – लेखक ने बताया कि भैंसें इतनी सुस्त थीं कि वे एक आरामदेह स्थान से दूसरे स्थान तक ही जाती थीं। कभी दौड़ लगाने का मन न होता, तो वे वहीं कीचड़ में लुढ़क जाती थीं।

 

लिखित

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

“उन्होंने हमें अपने संसार का हिस्सा मान लिया था।” इस पंक्ति के आधार पर उत्तर बताइए-

(क) ‘उन्होंने’ शब्द किसके लिए आया है?

(i) सभी जानवरों के लिए

(ii) लेखक और दादा जी के लिए

(iii) भैंस, मेढक और सारस के लिए

(iv) मछली आदि के लिए

(ख) ‘अपने संसार’ का अर्थ है-

(i) पेड़ तले चबूतरा

(ii) खेल का मैदान

(iii) दलदल से भरा तालाब

(iv) अपना प्यारा घर

(ग) उन्होंने उन्हें अपने संसार का हिस्सा मान लिया क्योंकि-

(i) वे उन्हीं के परिवार के थे।

(ii) वे अधिकतर समय तालाब में ही बिताते थे।

(iii) वे घर छोड़कर वहीं रहने लगे थे।

(iv) उन्हें घर जाना अच्छा नहीं लगता था।

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) अचानक वर्क-वर्क का राग क्यों छिड़ गया?

उत्तर – जब एक मेढक को विश्वास हो गया कि लेखक और दादा जी उसके दुश्मन अर्थात् बगुले नहीं हैं, तो उसने यह समाचार अपने मित्रों को दिया और देखते-ही-देखते सब बाहर आ गए और ‘वर्क-वर्क’ का राग छिड़ गया।

(ख) चरवाहे का लड़का तालाब में क्या कर रहा था?

उत्तर – चरवाहे का लड़का रामू तालाब में तैर रहा था और कभी किनारे न लौटकर भैंस की पीठ पर चढ़कर लेट जाता और गाने गाता था।

(ग) लेखक ने रामू के विषय में क्या-क्या बताया है?

उत्तर – लेखक ने बताया कि रामू उनसे आयु में थोड़ा बड़ा था, साँवले शरीर वाला था और उसके दाँत सफ़ेद चमकते थे। वह स्कूल नहीं गया था पर उसे लोक-कथाओं और पशु-पक्षियों की अच्छी जानकारी थी।

(घ) सारस पक्षियों के विषय में लेखक ने क्या जानकारी दी है?

उत्तर – सारस लंबी गर्दन और लाल टाँगों वाले वफ़ादार पक्षी होते हैं। यदि इनका एक साथी मारा जाए, तो दूसरा हफ़्तों तक वहीं चक्कर काटता है और कभी-कभी दुख में प्राण भी त्याग देता है।

(ङ) दादा के विचार से पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

उत्तर – दादा जी के विचार से हमें पशु-पक्षियों का आदर करना चाहिए, उन्हें मारना नहीं चाहिए और पृथ्वी पर उनके जीवित रहने के अधिकार को मान्यता देनी चाहिए।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

मैंने दादा जी से पूछा, “ये खाते क्या हैं?”

दादा जी ने जवाब दिया, “ये एक-दूसरे को ही खाते हैं। यह सुनने में बुरा लगता है परंतु ये इतनी तादाद में पैदा होते हैं कि यदि ये सारे मेढक बन जाएँ तो यहाँ से हमारे घर तक मेढक ही मेढक भर जाएँगे।”

“इनके शोर से तो दादी माँ पगला जाएँगी!” मैंने कहा। दादा जी सहमत हो गए।

(क) लेखक ने दादा जी से क्या पूछा?

उत्तर – लेखक ने दादा जी से पूछा कि ये नन्हे मेढक खाते क्या हैं?

(ख) सुनने में क्या बुरा लगता है?

उत्तर – यह सुनना बुरा लगता है कि मेढक एक-दूसरे को ही खाते हैं।

(ग) तालाब से लेखक के घर तक मेढक ही मेढक कब हो सकते हैं?

उत्तर – यदि तालाब में पैदा होने वाले सभी नन्हे जीव मेढक बन जाएँ, तो वे लेखक के घर तक भर सकते हैं।

(घ) मेढकों के शोर का दादी माँ पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर – मेढकों के अत्यधिक शोर से दादी माँ पागल अर्थात परेशान हो सकती हैं।

(ङ) दादा जी लेखक की किस बात से सहमत हो गए?

उत्तर – दादा जी इस बात से सहमत हो गए कि मेढकों के शोर से दादी माँ परेशान हो जाएँगी।

 

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

हमें पशु-पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

उत्तर – हमें पशु-पक्षियों के साथ दया, प्रेम और आदर का व्यवहार करना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि यह पृथ्वी जितनी हमारी है, उतनी ही उनकी भी है। हमें उनके प्राकृतिक आवासों (जंगलों) को नष्ट नहीं करना चाहिए।

 

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) सही वर्तनी वाला शब्द चुनिए-

(i) परकृति

(ii) प्रकृति

(iii) प्रकिरिति

(iv) प्रकृती

(ख) किस शब्द में अनुनासिक () का प्रयोग नहीं होगा?

(i) माँ

(ii) आँख

(iii) परंतु

(iv) पहुँचा

(ग) ‘कुमुदनी’ शब्द का सही वर्ण-विच्छेद क्या होगा?

(i) क् + उ + म् + ऊ + द् + अ + न् + ई

(ii) क् + उ + म् + उ + द् + अ + न् + अ

(iii) क् + उ + म् + उ + द् + अ + न् + ई

(iv) क् + उ + म् + ऊ + द् + अ + न् + इ

 

  1. जानें- संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों में सही सर्वनाम चुनकर लिखिए-

हमें, वह, मैं, इन्हें, हम

(क) वह धीरे-धीरे ऊपर उठा।

(ख) हम एक पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे थे।

(ग) मैं अपने जूते उतारकर कीचड़वाले पानी में चला जाता था।

(घ) पशु-पक्षियों से हमें अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

(ङ) गाँव के लोग इन्हें बहुत प्यार करते हैं।

 

  1. जानें- संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।

जिन शब्दों की विशेषता बताई जाती हैं उन्हें विशेष्य कहते हैं।

निम्नलिखित विशेषणों को सही विशेष्य के साथ लिखिए-

साँवला, सुस्त, पालतू, आरामदायक, पुराने, अच्छा, काला, नन्हें-नन्हें

विशेषण     विशेष्य

(क) आरामदायक ताल

(ख) पालतू कुत्ता

(ग) अच्छा व्यवहार

(घ) सुस्त जीव

(ङ) पुराने पीपल

(च) काला धब्बा

(छ) नन्हें-नन्हें मेढक

(ज) साँवला रंग

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

(क) घंटा – घंटे

(ख) छोटा – छोटे

(ग) धब्बा – धब्बे

(घ) बगुला – बगुले

(ङ) जूता – जूते

(च) घुटना – घुटने

 

  1. निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-

(क) पीछे की ओर का पिछवाड़ा

(ख) पानी और मिट्टी से बनी कीचड़ दलदल

(ग) नहाने का स्थान गुसलखाना/स्नानघर

(घ) पशु चराने वाला चरवाहा

(ङ) धीरे-धीरे काम करने वाला सुस्त/मंथर

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. यदि आप लेखक के स्थान पर होते तो क्या करते? अपने विचार को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

उत्तर – यदि मैं लेखक के स्थान पर होता (अनुच्छेद)

यदि मैं लेखक के स्थान पर होता, तो मैं भी प्रकृति के इस अनोखे संसार को देखकर उतना ही रोमांचित होता। मैं रामू की तरह भैंसों से दोस्ती करता और उनकी पीठ पर बैठकर तालाब की सैर का आनंद लेता। मैं अपने साथ एक छोटी डायरी और पेंसिल रखता, जिसमें ताल के किनारे दिखने वाले विभिन्न जीवों, जैसे—मेढक, बगुले और सारस के चित्र बनाता। मैं रामू से उन लोक-कथाओं को विस्तार से सुनता जो उसने अपने बुजुर्गों से सीखी थीं। साथ ही, मैं यह कोशिश करता कि तालाब के आसपास का वातावरण साफ़ रहे ताकि वहाँ रहने वाले जीवों को कोई असुविधा न हो। दादा जी की तरह मैं भी शांत होकर प्रकृति की छोटी-छोटी हलचलों को महसूस करता और उस जादुई दुनिया का हिस्सा बनकर अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ यादगार बनाता।

  1. अपने भाई/बहन को पत्र लिखकर बताइए कि पशु-पक्षियों के साथ हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?

उत्तर – दिनांक – 16 फरवरी, 2026

घर संख्या – W-414

टीसीआई, राउरकेला

ओड़िशा

 

प्रिय अनुज,

(शुभ स्नेहाशीष)

 

आशा है कि तुम ठीक होगे और तुम्हारी पढ़ाई अच्छी चल रही होगी। आज मैंने एक बहुत ही प्रेरणादायक पाठ पढ़ा, जिसने मुझे पशु-पक्षियों के प्रति हमारे व्यवहार के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं पत्र के माध्यम से अपने विचार तुम्हारे साथ साझा करना चाहता हूँ।

हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं के लिए है। पशु-पक्षियों के साथ हमारा व्यवहार हमेशा दयालुता और आदर से भरा होना चाहिए। हमें उन्हें बिना कारण परेशान नहीं करना चाहिए और न ही उनके प्राकृतिक घरों जैसे पेड़ों और तालाबों को नुकसान पहुँचाना चाहिए। वे बोल नहीं सकते, लेकिन वे हमारी भावनाओं को समझते हैं। यदि हम उनके प्रति प्रेम दिखाएँगे, तो वे भी हमारे अच्छे मित्र बन सकते हैं। हमें उनके जीवित रहने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और भीषण गर्मी या ठंड में उनके लिए दाना-पानी का प्रबंध करना चाहिए।

मुझे उम्मीद है कि तुम भी मेरी इस बात से सहमत होगे और अपने आसपास के बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशील रहोगे। घर पर मम्मी-पापा को मेरा प्रणाम कहना।

तुम्हारा अग्रज,

अविनाश

 

गृहकार्य

निम्नलिखित शब्दों के लिए हिंदी में किन शब्दों का प्रयोग किया जाता है? लिखिए-

(क) दुश्मन – शत्रु

(ख) हफ़्ता – सप्ताह

(ग) वफ़ादार – स्वामिभक्त

(घ) तादाद – संख्या

(ङ) रोज़ाना – प्रतिदिन

(च) मुश्किल – कठिन

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