पाठ का सारांश
यह पाठ रस्किन बांड द्वारा लिखित एक संस्मरण है, जो प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और बचपन की मासूम मित्रता को दर्शाता है।
- ताल की निराली दुनिया
लेखक को पहले लगता था कि उनके घर के पीछे वाले बरसाती तालाब (ताल) में केवल कीचड़ और भैंसें ही होती हैं। परंतु उनके दादा जी ने उन्हें उस ताल के भीतर छिपे प्रकृति के अद्भुत संसार से परिचित करवाया। दादा जी के साथ बैठकर लेखक ने काई के बीच से झाँकते मेढकों, उनके मधुर ‘वर्क-वर्क’ राग और पानी में हलचल करते हज़ारों नन्हे मेढकों को देखा।
- रामू से मित्रता और तैरना सीखना
एक दिन ताल पर लेखक की मुलाकात रामू नाम के एक चरवाहे लड़के से हुई। रामू उम्र में लेखक से थोड़ा ही बड़ा था और बहुत अच्छा तैराक था। उसने लेखक को अपनी भैंसों की पीठ पर बैठकर तैरना सिखाया। रामू स्कूल नहीं गया था, लेकिन उसे लोक-कथाओं और पशु-पक्षियों के बारे में गहरा ज्ञान था। दोनों गहरे दोस्त बन गए और गर्मी की हर दोपहर ताल पर बिताने लगे।
- भैंसों की सवारी और ताल का आनंद
लेखक और रामू अक्सर भैंसों की पीठ पर बैठकर दौड़ लगाते थे। भैंसों को वे ‘दलदल के समुद्र में चट्टान’ की तरह मानते थे। कभी-कभी सुस्त भैंसें बीच में ही लुढ़क जाती थीं, जिससे दोनों कीचड़ और काई में गिर जाते थे। लेखक घर लौटने से पहले गुसलखाने में छिपकर नहाते थे ताकि घर वालों को उनकी इस ‘हरी काई’ वाली मस्ती का पता न चले।
- जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता
पाठ में सारस पक्षी का विशेष वर्णन है। लेखक ने जाना कि सारस बहुत वफ़ादार और अच्छे मित्र होते हैं; यदि एक साथी मारा जाए, तो दूसरा उसके गम में हफ्तों तक वहीं चक्कर काटता है या प्राण त्याग देता है। दादा जी और रामू दोनों का मानना था कि पृथ्वी पर सभी जीवों को जीने का अधिकार है और हमें उनका आदर करना चाहिए। दादा जी जंगलों के विनाश और पशु-पक्षियों के छिनते घरों के प्रति चिंतित थे।
- विदाई और यादें
अंत में, जब लेखक वह स्थान छोड़कर चले गए, तो उन्हें विश्वास था कि रामू, वे भैंसें, मेढक और सारस उन्हें अपने संसार का हिस्सा मानते थे और आज भी उनके लौटने का इंतज़ार कर रहे होंगे।
मुख्य संदेश –
यह पाठ हमें सिखाता है कि प्रकृति का हर छोटा हिस्सा चाहे वह एक बरसाती तालाब ही क्यों न हो जीवन से भरपूर है। हमें बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि यह पृथ्वी जितनी हमारी है, उतनी ही उनकी भी है।
कठिन शब्दार्थ
1 पिछवाड़े – घर के पीछे का भाग Backyard
2 ताल – तालाब / सरोवर Pond / Lake
3 दलदल – कीचड़ भरी ज़मीन Marsh / Swamp
4 पहलुओं – पक्षों Aspects
5 सँजो – सँभालकर रखना Cherish / Preserve
6 तलैया – छोटा तालाब Small pond
7 तले – नीचे Beneath / Under
8 काई – पानी पर जमी हरी परत Moss / Algae
9 प्रकट – सामने आना Appear
10 घूर – टकटकी लगाकर देखना Stare / Gaze
11 जानी दुश्मन – प्राण लेने वाला शत्रु Deadly enemy
12 बगुला – एक सफ़ेद पक्षी Heron / Egret
13 धकियाने – धक्का देना Pushing / Shoving
14 तादाद – संख्या Number / Quantity
15 कुमुदिनी – जल में खिलने वाला फूल Water lily
16 जुगाली – मुँह चलाकर घास चबाना Rumination / Chewing cud
17 चट्टान – बड़ा पत्थर Rock / Cliff
18 सारस – एक लंबी टाँगों वाला पक्षी Crane (bird)
19 सर्वनाश – पूरी तरह विनाश Total destruction
20 निराली – अनोखी / अद्भुत Unique / Wonderful
21 परिचय – जान-पहचान Introduction
22 विश्वास – भरोसा Trust / Belief
23 सहमत – एक राय होना Agreed
24 चरवाहा – पशु चराने वाला Herdsman / Shepherd
25 आयु – उम्र Age
26 मुसकराया – मंद हँसी हँसना Smiled
27 वायदा – वादा / वचन Promise
28 रोज़ाना – हर दिन Daily
29 शीघ्र – जल्दी Soon / Quickly
30 वफ़ादार – स्वामीभक्त Loyal / Faithful
31 आदर – सम्मान Respect / Honor
32 अधिकार – हक Right
33 मान्यता – स्वीकृति Recognition / Approval
34 दोपहरियाँ – दोपहर का समय Afternoons
35 उदासी – गम / दुख Sadness / Gloom
36 जमा – इकट्ठा Collected / Accumulated
37 घंटाभर – एक घंटे तक For an hour
38 शांति – चुप्पी Silence / Calmness
39 प्रकट – दृश्यमान होना Manifested
40 राग छिड़ना – संगीत शुरू होना Melody starting
41 नन्हे-नन्हे – बहुत छोटे Tiny / Little
42 पगला जाना – पागल हो जाना To go crazy
43 मौजूद – उपस्थित Present
44 तैरना – जल में हाथ-पाँव मारना Swimming
45 छलाँग – कूदना Leap / Jump
46 हाथ-पाँव मारना – कोशिश करना Making efforts
47 सुस्त – आलसी Lazy / Sluggish
48 लुढ़कना – गिर पड़ना Roll over / Tumble
49 चक्कर काटना – गोल-गोल घूमना Circling
50 सर्वनाश – पूरी तरह खत्म होना Annihilation
51 जीवित – ज़िंदा Alive
52 मुश्किल – कठिन Difficult
53 बदलना – परिवर्तित करना Change
54 पहचानना – जानना Recognize
55 लौटना – वापस आना Return
56 बरसाती – बरसात का Rain-fed / Monsoon
57 सिवाय – अलावा Except / Besides
58 प्रकृति – कुदरत Nature
59 सुंदरता – खूबसूरती Beauty
60 संसार – दुनिया World
61 बीचोंबीच – मध्य में Right in the middle
62 समाचार – खबर News / Information
63 पड़ोसियों – पास रहने वाले Neighbors
64 गले फूलना – सूजन या गुब्बारा बनना Throat swelling
65 कीचड़ – गीली मिट्टी Mud
66 घुटनों – पैरों का जोड़ Knees
67 साँवले – हल्के काले रंग का Dusky / Dark complexion
68 पीठ – कमर के ऊपर का भाग Back
69 लोक-कथाओं – जनश्रुतियाँ Folk tales
70 जानकारी – ज्ञान Knowledge / Info
71 आरामदेह – सुखद Comfortable
72 अवसरों – मौकों Occasions
73 गुसलखाने – स्नानघर Bathroom
74 भोंपू – हॉर्न जैसी आवाज़ Horn / Siren
75 हिस्सा – भाग Part / Share
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
पिछवाड़े, सँजो, स्नान, धब्बा, मेढक, ढूँढ़, दुश्मन, छुआ, धकियाने, घुटने, मुझसे, साँवले, छलाँग,
चट्टान, पक्षियों, लुढ़क, द्वार, व्यवहार, मान्यता, मुश्किल
प्रकृति, वृक्ष, वर्क-वर्क, शीघ्र, समुद्र, पृथ्वी, सर्वनाश
सफ़ेद, कमीज़, हाफ़पैंट, रोज़ाना, हफ़्तों, वफ़ादार
पिछवाड़े – Pich-vaa-day मुझसे – Mujh-say
सँजो – San-jo (Nasal)
साँवले – Saan-va-lay (Nasal)
स्नान – S-naan
छलाँग – Ch-laang
धब्बा – Dhab-baa
चट्टान – Chat-taan
मेढक – May-dhak
पक्षियों – Pak-shi-yon
ढूँढ़ – Dhoon-dh (Nasal)
लुढ़क – Lu-dhak
दुश्मन – Dush-man
द्वार – Dvaar
छुआ – Chhu-aa
व्यवहार – Vyav-haar
धकियाने – Dha-ki-yaa-nay
मान्यता – Maan-ya-taa
घुटने – Ghut-nay
मुश्किल – Mush-kil
प्रकृति – Pra-kri-ti
समुद्र – Sa-mud-ra
वृक्ष – Vrik-sh
पृथ्वी – Prith-vee
वर्क-वर्क – Vark-Vark
सर्वनाश – Sar-va-naash
शीघ्र – Shee-ghra
सफ़ेद – Sa-fayd
रोज़ाना – Ro-zaa-naa
कमीज़ – Ka-meez
हफ़्तों – Haf-ton
हाफ़पैंट – Haaf-paint
वफ़ादार – Va-faa-daar
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) दादा जी ने लेखक को ताल से कब परिचित करवाया?
उत्तर – जब लेखक और दादा जी एक पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर पानी पर जमी हरी काई को देख रहे थे, तब दादा जी ने उन्हें ताल के संसार से परिचित करवाया।
(ख) पेड़ के पास की छाया को लकड़ी से छूने पर क्या हुआ?
उत्तर – पेड़ के पास की छाया को लकड़ी लकड़ी से छूने पर वहाँ हज़ारों नन्हे-नन्हे मेढक जाग उठे और एक-दूसरे को धकियाने लगे।
(ग) कीचड़वाले पानी में जाकर लेखक क्या करते थे?
उत्तर – घुटनों तक कीचड़वाले पानी में जाकर लेखक वहाँ लगे हुए कुमुदिनी के सफ़ेद फूलों को तोड़ लिया करते थे।
(घ) लेखक ने भैंसों की सुस्ती का क्या उदाहरण दिया है?
उत्तर – लेखक ने बताया कि भैंसें इतनी सुस्त थीं कि वे एक आरामदेह स्थान से दूसरे स्थान तक ही जाती थीं। कभी दौड़ लगाने का मन न होता, तो वे वहीं कीचड़ में लुढ़क जाती थीं।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
“उन्होंने हमें अपने संसार का हिस्सा मान लिया था।” इस पंक्ति के आधार पर उत्तर बताइए-
(क) ‘उन्होंने’ शब्द किसके लिए आया है?
(i) सभी जानवरों के लिए
(ii) लेखक और दादा जी के लिए
(iii) भैंस, मेढक और सारस के लिए ✓
(iv) मछली आदि के लिए
(ख) ‘अपने संसार’ का अर्थ है-
(i) पेड़ तले चबूतरा
(ii) खेल का मैदान
(iii) दलदल से भरा तालाब ✓
(iv) अपना प्यारा घर
(ग) उन्होंने उन्हें अपने संसार का हिस्सा मान लिया क्योंकि-
(i) वे उन्हीं के परिवार के थे।
(ii) वे अधिकतर समय तालाब में ही बिताते थे। ✓
(iii) वे घर छोड़कर वहीं रहने लगे थे।
(iv) उन्हें घर जाना अच्छा नहीं लगता था।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) अचानक वर्क-वर्क का राग क्यों छिड़ गया?
उत्तर – जब एक मेढक को विश्वास हो गया कि लेखक और दादा जी उसके दुश्मन अर्थात् बगुले नहीं हैं, तो उसने यह समाचार अपने मित्रों को दिया और देखते-ही-देखते सब बाहर आ गए और ‘वर्क-वर्क’ का राग छिड़ गया।
(ख) चरवाहे का लड़का तालाब में क्या कर रहा था?
उत्तर – चरवाहे का लड़का रामू तालाब में तैर रहा था और कभी किनारे न लौटकर भैंस की पीठ पर चढ़कर लेट जाता और गाने गाता था।
(ग) लेखक ने रामू के विषय में क्या-क्या बताया है?
उत्तर – लेखक ने बताया कि रामू उनसे आयु में थोड़ा बड़ा था, साँवले शरीर वाला था और उसके दाँत सफ़ेद चमकते थे। वह स्कूल नहीं गया था पर उसे लोक-कथाओं और पशु-पक्षियों की अच्छी जानकारी थी।
(घ) सारस पक्षियों के विषय में लेखक ने क्या जानकारी दी है?
उत्तर – सारस लंबी गर्दन और लाल टाँगों वाले वफ़ादार पक्षी होते हैं। यदि इनका एक साथी मारा जाए, तो दूसरा हफ़्तों तक वहीं चक्कर काटता है और कभी-कभी दुख में प्राण भी त्याग देता है।
(ङ) दादा के विचार से पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
उत्तर – दादा जी के विचार से हमें पशु-पक्षियों का आदर करना चाहिए, उन्हें मारना नहीं चाहिए और पृथ्वी पर उनके जीवित रहने के अधिकार को मान्यता देनी चाहिए।
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
मैंने दादा जी से पूछा, “ये खाते क्या हैं?”
दादा जी ने जवाब दिया, “ये एक-दूसरे को ही खाते हैं। यह सुनने में बुरा लगता है परंतु ये इतनी तादाद में पैदा होते हैं कि यदि ये सारे मेढक बन जाएँ तो यहाँ से हमारे घर तक मेढक ही मेढक भर जाएँगे।”
“इनके शोर से तो दादी माँ पगला जाएँगी!” मैंने कहा। दादा जी सहमत हो गए।
(क) लेखक ने दादा जी से क्या पूछा?
उत्तर – लेखक ने दादा जी से पूछा कि ये नन्हे मेढक खाते क्या हैं?
(ख) सुनने में क्या बुरा लगता है?
उत्तर – यह सुनना बुरा लगता है कि मेढक एक-दूसरे को ही खाते हैं।
(ग) तालाब से लेखक के घर तक मेढक ही मेढक कब हो सकते हैं?
उत्तर – यदि तालाब में पैदा होने वाले सभी नन्हे जीव मेढक बन जाएँ, तो वे लेखक के घर तक भर सकते हैं।
(घ) मेढकों के शोर का दादी माँ पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर – मेढकों के अत्यधिक शोर से दादी माँ पागल अर्थात परेशान हो सकती हैं।
(ङ) दादा जी लेखक की किस बात से सहमत हो गए?
उत्तर – दादा जी इस बात से सहमत हो गए कि मेढकों के शोर से दादी माँ परेशान हो जाएँगी।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
हमें पशु-पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
उत्तर – हमें पशु-पक्षियों के साथ दया, प्रेम और आदर का व्यवहार करना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि यह पृथ्वी जितनी हमारी है, उतनी ही उनकी भी है। हमें उनके प्राकृतिक आवासों (जंगलों) को नष्ट नहीं करना चाहिए।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) सही वर्तनी वाला शब्द चुनिए-
(i) परकृति
(ii) प्रकृति ✓
(iii) प्रकिरिति
(iv) प्रकृती
(ख) किस शब्द में अनुनासिक (ँ) का प्रयोग नहीं होगा?
(i) माँ
(ii) आँख
(iii) परंतु ✓
(iv) पहुँचा
(ग) ‘कुमुदनी’ शब्द का सही वर्ण-विच्छेद क्या होगा?
(i) क् + उ + म् + ऊ + द् + अ + न् + ई
(ii) क् + उ + म् + उ + द् + अ + न् + अ
(iii) क् + उ + म् + उ + द् + अ + न् + ई ✓
(iv) क् + उ + म् + ऊ + द् + अ + न् + इ
- जानें- संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।
निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों में सही सर्वनाम चुनकर लिखिए-
हमें, वह, मैं, इन्हें, हम
(क) वह धीरे-धीरे ऊपर उठा।
(ख) हम एक पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे थे।
(ग) मैं अपने जूते उतारकर कीचड़वाले पानी में चला जाता था।
(घ) पशु-पक्षियों से हमें अच्छा व्यवहार करना चाहिए।
(ङ) गाँव के लोग इन्हें बहुत प्यार करते हैं।
- जानें- संज्ञा और सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।
जिन शब्दों की विशेषता बताई जाती हैं उन्हें विशेष्य कहते हैं।
निम्नलिखित विशेषणों को सही विशेष्य के साथ लिखिए-
साँवला, सुस्त, पालतू, आरामदायक, पुराने, अच्छा, काला, नन्हें-नन्हें
विशेषण विशेष्य
(क) आरामदायक ताल
(ख) पालतू कुत्ता
(ग) अच्छा व्यवहार
(घ) सुस्त जीव
(ङ) पुराने पीपल
(च) काला धब्बा
(छ) नन्हें-नन्हें मेढक
(ज) साँवला रंग
- निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
(क) घंटा – घंटे
(ख) छोटा – छोटे
(ग) धब्बा – धब्बे
(घ) बगुला – बगुले
(ङ) जूता – जूते
(च) घुटना – घुटने
- निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-
(क) पीछे की ओर का पिछवाड़ा
(ख) पानी और मिट्टी से बनी कीचड़ दलदल
(ग) नहाने का स्थान गुसलखाना/स्नानघर
(घ) पशु चराने वाला चरवाहा
(ङ) धीरे-धीरे काम करने वाला सुस्त/मंथर
रोचक क्रियाकलाप
- यदि आप लेखक के स्थान पर होते तो क्या करते? अपने विचार को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।
उत्तर – यदि मैं लेखक के स्थान पर होता (अनुच्छेद)
यदि मैं लेखक के स्थान पर होता, तो मैं भी प्रकृति के इस अनोखे संसार को देखकर उतना ही रोमांचित होता। मैं रामू की तरह भैंसों से दोस्ती करता और उनकी पीठ पर बैठकर तालाब की सैर का आनंद लेता। मैं अपने साथ एक छोटी डायरी और पेंसिल रखता, जिसमें ताल के किनारे दिखने वाले विभिन्न जीवों, जैसे—मेढक, बगुले और सारस के चित्र बनाता। मैं रामू से उन लोक-कथाओं को विस्तार से सुनता जो उसने अपने बुजुर्गों से सीखी थीं। साथ ही, मैं यह कोशिश करता कि तालाब के आसपास का वातावरण साफ़ रहे ताकि वहाँ रहने वाले जीवों को कोई असुविधा न हो। दादा जी की तरह मैं भी शांत होकर प्रकृति की छोटी-छोटी हलचलों को महसूस करता और उस जादुई दुनिया का हिस्सा बनकर अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ यादगार बनाता।
- अपने भाई/बहन को पत्र लिखकर बताइए कि पशु-पक्षियों के साथ हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर – दिनांक – 16 फरवरी, 2026
घर संख्या – W-414
टीसीआई, राउरकेला
ओड़िशा
प्रिय अनुज,
(शुभ स्नेहाशीष)
आशा है कि तुम ठीक होगे और तुम्हारी पढ़ाई अच्छी चल रही होगी। आज मैंने एक बहुत ही प्रेरणादायक पाठ पढ़ा, जिसने मुझे पशु-पक्षियों के प्रति हमारे व्यवहार के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। मैं पत्र के माध्यम से अपने विचार तुम्हारे साथ साझा करना चाहता हूँ।
हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं के लिए है। पशु-पक्षियों के साथ हमारा व्यवहार हमेशा दयालुता और आदर से भरा होना चाहिए। हमें उन्हें बिना कारण परेशान नहीं करना चाहिए और न ही उनके प्राकृतिक घरों जैसे पेड़ों और तालाबों को नुकसान पहुँचाना चाहिए। वे बोल नहीं सकते, लेकिन वे हमारी भावनाओं को समझते हैं। यदि हम उनके प्रति प्रेम दिखाएँगे, तो वे भी हमारे अच्छे मित्र बन सकते हैं। हमें उनके जीवित रहने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और भीषण गर्मी या ठंड में उनके लिए दाना-पानी का प्रबंध करना चाहिए।
मुझे उम्मीद है कि तुम भी मेरी इस बात से सहमत होगे और अपने आसपास के बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशील रहोगे। घर पर मम्मी-पापा को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा अग्रज,
अविनाश
गृहकार्य
निम्नलिखित शब्दों के लिए हिंदी में किन शब्दों का प्रयोग किया जाता है? लिखिए-
(क) दुश्मन – शत्रु
(ख) हफ़्ता – सप्ताह
(ग) वफ़ादार – स्वामिभक्त
(घ) तादाद – संख्या
(ङ) रोज़ाना – प्रतिदिन
(च) मुश्किल – कठिन

