Chhota Jadugar (Kahani) – Class IX, Hindi Reader, Hindi Book, Tamilnadu State Board, The Best Solutions.

छोटा जादूगर
जयशंकर प्रसाद
कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हँसी और विनोद का कलनाद गूँज रहा था। मैं खड़ा था उस छोटे फुहारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शराब पीनेवालों को देख रहा था। उसके गले में फटे कुरते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्‍सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्‍ते थे। उसके मुँह पर गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी। मैं उसकी ओर न जाने क्‍यों आकर्षित हुआ। उसके अभाव में भी संपन्‍नता थी।
मैंने पूछा, क्‍यों जी, तुमने इसमें क्‍या देखा?”
मैंने सब देखा है। यहाँ चूड़ी फेंकते हैं। खिलौनों पर निशाना लगाते हैं। तीर से नंबर छेदते हैं। मुझे तो खिलौनों पर निशाना लगाना अच्‍छा मालूम हुआ। जादूगर तो बिलकुल निकम्‍मा है। उससे अच्‍छा तो ताश का खेल मैं ही दिखा सकता हूँ। उसने बड़ी प्रगल्‍भता से कहा। उसकी वाणी में कहीं रूकावट न थी।
मैंने पूछा, और उस परदे में क्‍या है? वहाँ तुम गए थे?”
नहीं, वहाँ मैं नहीं जा सका। टिकट लगता है।
मैंने कहा, तो चलो, मैं वहाँ पर तुमको लिवा चलूँ। मैंने मन-ही-मन कहा, ‘भाई! आज के तुम्‍हीं मित्र रहे।’
उसने कहा, वहाँ जाकर क्‍या कीजिएगा? चलिए, निशाना लगाया जाए।
मैंने उससे सहमत होकर कहा, तो फिर चलो, पहले शरबत पी लिया जाए। उसने स्‍वीकार-सूचक सिर हिला दिया।
मनुष्‍यों की भीड़ से जाड़े की संध्‍या भी वहाँ गरम हो रही थी। हम दोनों शरबत पीकर निशाना लगाने चले। राह में ही उससे पूछा, तुम्‍हारे घर में और कौन हैं?”
माँ और बाबूजी।
उन्‍होंने तुमको यहाँ आने के लिए मना नहीं किया?”
बाबूजी जेल में हैं।
क्‍यों?”
देश के लिए। वह गर्व से बोला।
और तुम्‍हारी माँ?”
वह बीमार है।
और तुम तमाशा देख रहे हो?”
उसके मुँह पर तिरस्‍कार की हँसी फूट पड़ी। उसने कहा, तमाशा देखने नहीं, दिखाने निकला हूँ। कुछ पैसे ले जाऊँगा, तो माँ को पथ्‍य दूँगा। मुझे शरबत न पिलाकर आपने मेरा खेल देखकर मुझे कुछ दे दिया होता, तो मुझे अधिक प्रसन्‍नता होती!”
मैं आश्‍चर्य से उस तेरह-चौदह वर्ष के लड़के को देखने लगा।
हाँ, मैं सच कहता हूँ बाबूजी! माँजी बीमार हैं, इसीलिए मैं नहीं गया।
कहाँ?”
जेल में! जब कुछ लोग खेल-तमाशा देखते ही हैं, तो मैं क्‍यों न दिखाकर माँ की दवा करूँ और अपना पेट भरूँ।
मैंने दीर्घ नि -श्‍वास लिया। चारों ओर बिजली के लट्टू नाच रहे थे। मन व्‍यग्र हो उठा। मैंने उससे कहा, अच्‍छा चलो, निशाना लगाया जाए।
हम दोनों उस जगह पर पहुँचे जहाँ खिलौने को गेंद से गिराया जाता था। मैंने बारह टिकट खरीदकर उस लड़के को दिए।
वह निकला पक्‍का निशानेबाज। उसकी कोई गेंद खाली नहीं गई। देखने वाले दंग रह गए। उसने बारह खिलौनों को बटोर लिया, लेकिन उठाता कैसे? कुछ मेरी रूमाल में बँधे, कुछ जेब में रख लिये गए।
लड़के ने कहा, बाबूजी, आपको तमाशा दिखाऊँगा। बाहर आइए, मैं चलता हूँ। वह नौ-दो ग्‍यारह हो गया। मैंने मन-ही-मन कहा, ‘इतनी जल्‍दी आँख बदल गई!”
मैं घूमकर पान की दुकान पर आ गया। पान खाकर बड़ी देर तक इधर-उधर टहलता-देखता रहा। झूले के पास लोगों का ऊपर-नीचे आना देखने लगा। अकस्‍मात् किसी ने ऊपर के हिंडोले से पुकारा, बाबूजी!”
मैंने पूछा, कौन?”
मैं हूँ छोटा जादूगर।
कलकत्‍ते के सुरम्‍य बोटैनिकल-उद्यान में लाल कमलिनी से भरी हुई एक छोटी-सी झील के किनारे घने वृक्षों की छाया में अपनी मंडली के साथ बैठा हुआ मैं जलपान कर रहा था। बातें हो रही थीं। इतने में वही छोटा जादूगर दिखाई पड़ा। हाथ में चारखाने का खादी का झोला, साफ जाँघिया और आधी बाँहों का कुरता। सिर पर मेरी रूमाल सूत की रस्‍सी से बँधी हुई थी। मस्‍तानी चाल में झूमता हुआ आकर वह कहने लगा –
बाबूजी, नमस्‍ते! आज कहिए तो खेल दिखाऊँ?”
नहीं जी, अभी हम लोग जलपान कर रहे हैं।
फिर इसके बाद क्‍या गाना-बजाना होगा, बाबूजी?”
नहीं जी, तुमको…. क्रोध से मैं कुछ और कहने जा रहा था। श्रीमतीजी ने कहा, दिखलाओ जी, तुम तो अच्‍छे आए। भला, कुछ मन तो बहले। मैं चुप हो गया, क्‍योंकि श्रीमतीजी की वाणी में वह माँ की-सी मिठास थी, जिसके सामने किसी भी लड़के को रोका नहीं जा सकता। उसने खेल आरंभ किया।
उस दिन कार्निवल के सब खिलौने उसके खेल में अपना अभिनय करने लगे। भालू मनाने लगा। बिल्‍ली रूठने लगी। बंदर घुड़कने लगा। गुड़िया का ब्‍याह हुआ। गुड्डा वर काना निकला। लड़के की वाचालता से ही अभिनय हो रहा था। सब हँसते लोट-पोट हो गए।
मैं सोच रहा था। बालक को आवश्‍यकता ने कितना शीघ्र चतुर बना दिया। यही तो संसार है।
ताश के सब पत्‍ते लाल हो गए। फिर सब काले हो गए। गले की सूत की डोरी टुकड़े-टुकड़े होकर जुड़ गई। लट्टू अपने से नाच रहे थे। मैंने कहा, अब हो चुका। अपना खेल बटोर लो, हम लोग भी अब जाएँगे।
श्रीमतीजी ने धीरे से उसे एक रूपया दे दिया। वह उछल उठा।
मैंने कहा, लड़के!”
छोटा जादूगर कहिए। यही मेरा नाम है। इसी से मेरी जीविका है।
मैं कुछ बोलना ही चाहता था कि श्रीमतीजी ने कहा, अच्‍छा, तुम इस रुपए से क्‍या करोगे?”
पहले भरपेट पकौड़ी खाऊँगा। फिर एक सूती कंबल लूँगा।
मेरा क्रोध अब लौट आया। मैं अपने पर बहुत क्रुद्ध होकर सोचने लगा, ‘ओह! कितना स्‍वार्थी हूँ मैं। उसके एक रुपया पाने पर मैं ईर्ष्‍या करने लगा था न!”
वह नमस्‍कार करके चला गया। हम लोग लता-कुंज देखने के लिए चले।
उस छोटे से बनावटी जंगल में संध्‍या साँय-साँय करने लगी थी। अस्‍ताचलगामी सूर्य की अंतिम किरण वृक्षों की पत्तियों से विदाई ले रही थी। एक शांत वातावरण था। हमलोग धीरे-धीरे मोटर से हावड़ा की ओर आ रहे थे।
रह-रहकर छोटा जादूगर स्‍मरण हो आता था। तभी सचमुच वह एक झोंपड़ी के पास कंबल कंधे पर डाले मिल गया। मैंने मोटर रोककर उससे पूछा, तुम यहाँ कहाँ?”
मेरी माँ यहीं है न! अब उसे अस्‍पताल वालों ने निकाल दिया है। मैं उतर गया। उस झोंपड़ी में देखा तो एक स्‍त्री चिथड़ों से लदी हुई काँप रही थी।
छोटे जादूगर ने कंबल ऊपर से डालकर उसके शरीर से चिमटते हुए कहा, माँ!”
मेरी आँखों से आँसू निकल पड़े।
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बड़े दिन की छुट्टी बीत चली थी। मुझे अपने ऑफिस में समय से पहुँचना था। कलकत्‍ते से मन ऊब गया था। फिर भी चलते-चलते एक बार उस उद्यान को देखने की इच्‍छा हुई।साथ-ही-साथ जादूगर भी दिखाई पड़ जाता तो और भी…. मैं उस दिन अकेले ही चल पड़ा। जल्‍द लौट आना था।
दस बज चुके थे। मैंने देखा कि उस निर्मल धूप में सड़क के किनारे एक कपड़े पर छोटे जादूगर का रंगमंच सजा था। मैं मोटर रोककर उतर पड़ा। वहाँ बिल्‍ली रूठ रही थी।भालू मनाने चला था। ब्‍याह की तैयारी थी, यह सब होते हुए भी जादूगर की वाणी में वह प्रसन्‍नता की तरी नहीं थी। जब वह औरों को हँसाने की चेष्‍टा कर रहा था, तब जैसे स्‍वयं काँप जाता था। मानो उसके रोएँ रो रहे थे। मैं आश्‍चर्य से देख रहा था। खेल हो जाने पर पैसा बटोरकर उसने भीड़ में मुझे देखा। वह जैसे क्षण भर के लिए स्‍फूर्तिमान हो गया। मैंने उसकी पीठ थपथपाते हुए पूछा, आज तुम्‍हारा खेल जमा क्‍यों नहीं?”
माँ ने कहा है कि आज तुरंत चले आना। मेरी अंतिम घड़ी समीप है। अविचल भाव से उसने कहा।
तब भी तुम खेल दिखलाने चले आए!” मैंने कुछ क्रोध से कहा। मनुष्‍य के सुख-दु -ख का माप अपना ही साधन तो है। उसके अनुपात से वह तुलना करता है।
उसके मुँह पर वहीं परिचित तिरस्‍कार की रेखा फूट पड़ी।
उसने कहा, क्‍यों न आता?”
और कुछ अधिक कहने में जैसे वह अपमान का अनुभव कर रहा था।
क्षण भर में मुझे अपनी भूल मालूम हो गई। उसके झोले को गाड़ी में फेंककर उसे भी बैठाते हुए मैंने कहा, जल्‍दी चलो। मोटरवाला मेरे बताए हुए पथ पर चल पड़ा।
कुछ ही मिनटों में मैं झोंपड़े के पास पहुँचा। जादूगर दौड़कर झोंपड़े में माँ-माँ पुकारते हुए घुसा। मैं भी पीछे था, किंतु स्‍त्री के मुँह से, ‘बे…’ निकलकर रह गया। उसके दुर्बल हाथ उठकर गिर गए। जादूगर उससे लिपटा रो रहा था। मैं स्‍तब्‍ध था। उस उज्‍ज्‍वल धूप में समग्र संसार जैसे जादू-सा मेरे चारों ओर नृत्‍य करने लगा।

कहानी ‘छोटा जादूगर’ – विस्तृत सारांश

कहानी ‘छोटा जादूगर’ जयशंकर प्रसाद की एक भावुक रचना है, जो गरीबी, मातृत्व, पितृत्व, देशभक्ति और बाल मनोविज्ञान को दर्शाती है। कहानी तीन भागों में विभक्त है। पहले भाग में कथावाचक कार्निवल के मैदान में एक 13-14 वर्षीय लड़के से मिलता है, जो गंभीर और धैर्यवान दिखता है। लड़का ताश के खेल और जादू दिखाकर पैसे कमाने आया है, क्योंकि उसके पिता देश के लिए जेल में हैं और माँ बीमार है। कथावाचक उसे शरबत पिलाता है और निशाना लगाने के खेल में मदद करता है, जहाँ लड़का सभी खिलौने जीत लेता है, लेकिन फिर गायब हो जाता है। कथावाचक निराश होता है, लेकिन बाद में झूले पर लड़के को देखता है।

दूसरे भाग में कथावाचक अपनी पत्नी और मंडली के साथ बोटैनिकल गार्डन में जलपान कर रहा होता है, तभी लड़का (जो खुद को ‘छोटा जादूगर’ कहता है) आता है और जादू दिखाने की पेशकश करता है। वह खिलौनों से अभिनय करवाता है, ताश के जादू दिखाता है और सभी को हँसाता है। पत्नी उसे एक रुपया देती है, जिससे वह पकौड़ी और कंबल खरीदने की बात करता है। कथावाचक को अपनी ईर्ष्या पर पछतावा होता है। शाम को वे लौटते हुए लड़के को उसकी माँ की झोपड़ी के पास देखते हैं, जहाँ माँ बीमार है और अस्पताल से निकाल दी गई है। लड़का माँ को कंबल ओढ़ाता है, और कथावाचक भावुक हो जाता है।

तीसरे भाग में बड़े दिन की छुट्टी के अंत में कथावाचक उद्यान जाता है और छोटे जादूगर को सड़क किनारे जादू दिखाते देखता है, लेकिन उसकी वाणी में उदासी है। लड़का बताता है कि माँ की अंतिम घड़ी है, फिर भी वह पैसे कमाने आया है। कथावाचक उसे मोटर से झोपड़ी ले जाता है, लेकिन वहाँ पहुँचते ही माँ की मृत्यु हो जाती है। लड़का रोता है, और कथावाचक स्तब्ध रह जाता है। कहानी गरीबी की विवशता, बालक की जिम्मेदारी और जीवन की क्षणभंगुरता पर समाप्त होती है, जहाँ उज्ज्वल धूप में भी संसार जादू-सा लगता है। यह कहानी सामाजिक असमानता और मानवीय संवेदना को उजागर करती है।

 

कठिन शब्दार्थ

हिंदी शब्द

हिंदी में अर्थ (व्याख्या)

तमिल में अनुवाद/समकक्ष

अंग्रेजी में अनुवाद/समकक्ष

विनोद

मनोरंजन या हँसी-मजाक

விளையாட்டு (Viḷaiyāṭṭu)

Amusement

कलनाद

शोरगुल या गूँजती हुई आवाज

எதிரொலி (Etirōli)

Echoing noise

विषाद

उदासी या दुख

சோகம் (Cōkam)

Melancholy

प्रगल्भता

परिपक्वता या बोलने की कुशलता

பக்குவம் (Pakkuvam)

Maturity

अभाव

कमी या गरीबी

பற்றாக்குறை (Paṟṟākkuṟai)

Scarcity

संपन्नता

पूर्णता या समृद्धि

செழிப்பு (Ceḻippu)

Affluence

निशाना

लक्ष्य या निशानेबाजी

இலக்கு (Ilakku)

Target/Aim

निकम्मा

बेकार या आलसी

பயனற்ற (Payaṉaṟṟa)

Useless

परदा

पर्दा या स्क्रीन

திரை (Tir ai)

Curtain

उद्विग्न

चिंतित या व्याकुल

கவலையான (Kavalaiyāṉa)

Anxious

तिरस्कार

अपमान या नफरत

இழிவு (Iḻivu)

Contempt

दीर्घ

लंबा या गहरा

நீண்ட (Nīṇṭa)

Long/Deep

नि -श्वास

साँस या आह

மூச்சு (Mūccu)

Sigh

व्यग्र

बेचैन या उत्सुक

அமைதியற்ற (Amaitiyaṟṟa)

Agitated

नौ-दो ग्यारह

भाग जाना या गायब होना

ஓடிப்போதல் (Ōṭippōtal)

Disappear (idiom)

सुरम्य

सुंदर या मनोरम

அழகான (Aḻakāṉa)

Picturesque

बोटैनिकल

वनस्पति संबंधी (उद्यान)

தாவரவியல் (Tāvaraviyal)

Botanical

मंडली

समूह या दल

குழு (Kuḻu)

Group

वाचालता

बातूनीपन या वाक्पटुता

பேச்சுத்திறன் (Pēccuttiraṉ)

Loquacity

अभिनय

नाटक या एक्टिंग

நடிப்பு (Naṭippu)

Acting

ईर्ष्या

जलन या द्वेष

பொறாமை (Poṟāmai)

Jealousy

क्रुद्ध

गुस्सैल या क्रोधित

கோபமான (Kōpamāṉa)

Angry

अस्ताचलगामी

डूबता हुआ (सूर्य)

மறையும் (Maṟaiyum)

Setting (sun)

विदाई

अलविदा या प्रस्थान

விடைபெறுதல் (Viṭaipeṟutal)

Farewell

झोंपड़ी

छोटी झोपड़ी या कुटिया

குடிசை (Kuṭicai)

Hut

दुर्बल

कमजोर या निर्बल

பலவீனமான (Palavīṉamāṉa)

Weak

स्फूर्तिमान

ऊर्जावान या चेतन

உற்சாகமான (Uṟcākamāṉa)

Energetic

अविचल

स्थिर या अटल

உறுதியான (Uṟutiyāṉa)

Unwavering

चेष्टा

प्रयास या कोशिश

முயற்சி (Muyar ci)

Effort

स्तब्ध

स्तब्ध या अवाक

அதிர்ச்சியான (Atircciyāṉa)

Stunned

I निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर पूरे वाक्यों में लिखिए।

  1. लड़का छोटा जादूगर क्यों बना?

उत्तर – लड़का छोटा जादूगर इसलिए बना ताकि वह खेल-तमाशा दिखाकर कुछ पैसे कमा सके और अपनी बीमार माँ के लिए पथ्य तथा अपना पेट भरने का इंतज़ाम कर सके।

  1. लड़के को देखकर लेखक क्यों प्रभावित हुए?

उत्तर – लड़के को देखकर लेखक इसलिए प्रभावित हुए क्योंकि उसके गले में फटे कुरते के ऊपर सूत की मोटी रस्सी और जेब में ताश के पत्ते होने के बावजूद, उसके मुँह पर गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी और उसके अभाव में भी संपन्नता झलकती थी।

  1. छोटा जादूगर क्यों पैसा कमाना चाहता था?

उत्तर – छोटा जादूगर पैसा कमाना चाहता था ताकि वह अपनी बीमार माँ को पथ्य (दवा/भोजन) दे सके और अपना तथा माँ का पेट भर सके।

  1. बालक को उसकी आवश्यकता ने क्या बनाया?

उत्तर – बालक को उसकी आवश्यकता ने बहुत शीघ्र चतुर बना दिया।

  1. बालक को किस बात पर गर्व था?

उत्तर – बालक को इस बात पर गर्व था कि उसके बाबूजी देश के लिए जेल में थे।

  1. जरूरत किसको जन्म देती हैं?

उत्तर – इस पाठ के अनुसार, जरूरत चतुरता को जन्म देती है, जैसा कि लेखक ने सोचा, “बालक को आवश्‍यकता ने कितना शीघ्र चतुर बना दिया।”

 

II निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दो वाक्यों में लिखिए।

  1. निशानेबाज खेल पर जीते चीज़ों को लड़के ने क्या किया?

उत्तर – निशानेबाज खेल पर लड़के ने बारह खिलौने जीते। उसने इन खिलौनों को बटोर लिया; कुछ लेखक की रूमाल में बँधवाए और कुछ अपनी जेब में रख लिए।

  1. छोटा जादूगर ने अपना परिचय कैसे दिया?

उत्तर – छोटा जादूगर ने अपना परिचय देते हुए लेखक से कहा, “छोटा जादूगर कहिए। यही मेरा नाम है। इसी से मेरी जीविका है।” वह अपनी कला और मेहनत पर गर्व करता था।

  1. छोटे जादूगर की विशेषता क्या थी?

उत्तर – छोटे जादूगर की विशेषता यह थी कि मात्र तेरह-चौदह वर्ष की आयु में ही वह अपने पिता के जेल में होने और माँ के बीमार होने पर भी गंभीर विषाद के साथ धैर्य रखता था, और अपनी कला के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण करने की हिम्मत रखता था।

  1. छोटे जादूगर कहानी से आपको क्या शिक्षा मिली?

उत्तर – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जिम्मेदारी का एहसास मनुष्य को समय से पहले परिपक्व और चतुर बना देता है। साथ ही, हमें यह भी समझना चाहिए कि मनुष्यों के सुख-दुःख का माप उनके परिस्थितियों के अनुपात में होता है, और हमें किसी पर ईर्ष्या या क्रोध करने से पहले उसकी कठिनाइयों को समझना चाहिए।

  1. “छोटे जादूगर” पाठ का सारांश लिखिए।

उत्तर – ‘छोटा जादूगर’ कहानी एक तेरह-चौदह साल के लड़के की संघर्ष-गाथा है, जिसके पिता जेल में हैं और माँ बीमार है। वह कार्निवल में जादू का खेल दिखाकर और निशाना लगाकर पैसे कमाता है ताकि अपनी माँ के लिए दवा और भोजन जुटा सके। यह कहानी अभाव में भी आत्म-सम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और बालक की विषम परिस्थितियों से उपजी परिपक्वता को दर्शाती है।

 

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

कहानी की शुरुआत कहाँ होती है?

a) बोटैनिकल उद्यान में

b) कार्निवल के मैदान में

c) झोपड़ी में

d) ऑफिस में

उत्तर – b) कार्निवल के मैदान में

छोटा जादूगर की उम्र कितनी है?

a) 10-11 वर्ष

b) 13-14 वर्ष

c) 15-16 वर्ष

d) 18 वर्ष

उत्तर – b) 13-14 वर्ष

छोटे जादूगर के गले में क्या पड़ा हुआ है?

a) सोने की चेन

b) सूत की रस्सी

c) फूलों की माला

d) घड़ी

उत्तर – b) सूत की रस्सी

छोटा जादूगर कार्निवल में क्यों आया है?

a) तमाशा देखने

b) जादू दिखाकर पैसे कमाने

c) दोस्तों से मिलने

d) शरबत पीने

उत्तर – b) जादू दिखाकर पैसे कमाने

छोटे जादूगर के पिता कहाँ हैं?

a) घर पर

b) जेल में

c) विदेश में

d) अस्पताल में

उत्तर – b) जेल में

कथावाचक छोटे जादूगर को क्या पिलाता है?

a) चाय

b) शरबत

c) दूध

d) पानी

उत्तर – b) शरबत

निशाना लगाने के खेल में छोटा जादूगर कितने खिलौने जीतता है?

a) 6

b) 9

c) 12

d) 15

उत्तर – c) 12

दूसरे भाग में कथावाचक कहाँ जलपान कर रहा है?

a) कार्निवल में

b) बोटैनिकल उद्यान में

c) झोपड़ी में

d) ऑफिस में

उत्तर – b) बोटैनिकल उद्यान में

छोटा जादूगर कथावाचक की पत्नी से मिले रुपए से क्या खरीदता है?

a) खिलौने

b) पकौड़ी और कंबल

c) किताबें

d) कपड़े

उत्तर – b) पकौड़ी और कंबल

छोटे जादूगर की माँ को कहाँ से निकाल दिया गया है?

a) घर से

b) स्कूल से

c) अस्पताल से

d) जेल से

उत्तर – c) अस्पताल से

तीसरे भाग में कथावाचक छोटे जादूगर को कहाँ जादू दिखाते देखता है?

a) कार्निवल में

b) उद्यान की सड़क किनारे

c) झोपड़ी में

d) मोटर में

उत्तर – b) उद्यान की सड़क किनारे

छोटा जादूगर अपनी माँ की अंतिम घड़ी में भी क्यों जादू दिखाने जाता है?

a) मज़े के लिए

b) पैसे कमाने के लिए

c) दोस्तों के लिए

d) कथावाचक के लिए

उत्तर – b) पैसे कमाने के लिए

कहानी के अंत में छोटे जादूगर की माँ की क्या स्थिति है?

a) स्वस्थ हो जाती है

b) मृत्यु हो जाती है

c) अस्पताल जाती है

d) घर लौटती है

उत्तर – b) मृत्यु हो जाती है

कथावाचक छोटे जादूगर को किस वाहन से झोपड़ी ले जाता है?

a) साइकिल

b) बस

c) मोटर

d) ट्रेन

उत्तर – c) मोटर

छोटा जादूगर खुद को क्या नाम देता है?

a) छोटा निशानेबाज

b) छोटा जादूगर

c) छोटा खिलाड़ी

d) छोटा गायक

उत्तर – b) छोटा जादूगर

कथावाचक को छोटे जादूगर के रुपया पाने पर क्या महसूस होता है?

a) खुशी

b) ईर्ष्या

c) गर्व

d) उदासी

उत्तर – b) ईर्ष्या

छोटे जादूगर के जादू में क्या शामिल है?

a) ताश के पत्ते, लट्टू, खिलौनों का अभिनय

b) गाना-बजाना

c) नाचना

d) पढ़ना

उत्तर – a) ताश के पत्ते, लट्टू, खिलौनों का अभिनय

कहानी का मुख्य विषय क्या है?

a) अमीरी

b) गरीबी और जिम्मेदारी

c) खेल

d) यात्रा

उत्तर – b) गरीबी और जिम्मेदारी

कथावाचक कहानी के अंत में क्या महसूस करता है?

a) खुशी

b) स्तब्धता और भावुकता

c) क्रोध

d) उदासीनता

उत्तर – b) स्तब्धता और भावुकता

छोटे जादूगर के पिता जेल में क्यों हैं?

a) चोरी के लिए

b) देश के लिए

c) झगड़े के लिए

d) बीमारी के लिए

उत्तर – b) देश के लिए

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – कहानी “छोटा जादूगर” का लेखक कौन है?
    उत्तर – कहानी “छोटा जादूगर” के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।
  2. प्रश्न – कहानी की शुरुआत कहाँ से होती है?
    उत्तर – कहानी की शुरुआत कार्निवल के मैदान से होती है जहाँ बिजली जगमगा रही थी।
  3. प्रश्न – लेखक को छोटा लड़का कहाँ मिला?
    उत्तर – लेखक को छोटा लड़का कार्निवल के छोटे फव्वारे के पास मिला।
  4. प्रश्न – लड़के के गले में क्या पड़ा हुआ था?
    उत्तर – लड़के के गले में मोटी सूत की रस्सी पड़ी हुई थी।
  5. प्रश्न – लड़के की जेब में क्या था?
    उत्तर – लड़के की जेब में कुछ ताश के पत्ते थे।
  6. प्रश्न – लेखक को लड़का देखकर क्या महसूस हुआ?
    उत्तर – लेखक को वह लड़का अत्यंत आकर्षक और गंभीर प्रतीत हुआ।
  7. प्रश्न – लड़के ने किसे निकम्मा कहा?
    उत्तर – लड़के ने जादूगर को निकम्मा कहा।
  8. प्रश्न – लड़के को कौन-सा खेल अच्छा लगा?
    उत्तर – लड़के को खिलौनों पर निशाना लगाना अच्छा लगा।
  9. प्रश्न – लड़का परदे के अंदर क्यों नहीं गया था?
    उत्तर – लड़का परदे के अंदर नहीं गया क्योंकि वहाँ टिकट लगता था।
  10. प्रश्न – जब लेखक ने उसे परदे के अंदर ले जाने की बात कही, तो उसने क्या कहा?
    उत्तर – उसने कहा कि वहाँ जाकर क्या कीजिएगा, चलिए निशाना लगाया जाए।
  11. प्रश्न – लड़के के परिवार में कौन-कौन थे?
    उत्तर – लड़के के परिवार में उसकी माँ और बाबूजी थे।
  12. प्रश्न – उसके बाबूजी कहाँ थे?
    उत्तर – उसके बाबूजी जेल में थे।
  13. प्रश्न – उसके बाबूजी को जेल क्यों हुई थी?
    उत्तर – उसके बाबूजी को देश के लिए कार्य करने के कारण जेल हुई थी।
  14. प्रश्न – उसकी माँ की क्या स्थिति थी?
    उत्तर – उसकी माँ बीमार थी।
  15. प्रश्न – लड़का कार्निवल में क्यों आया था?
    उत्तर – लड़का कार्निवल में तमाशा दिखाने और पैसे कमाने के लिए आया था ताकि माँ की दवा कर सके।
  16. प्रश्न – लड़के ने लेखक से क्या कहा कि उसे क्या करना चाहिए था?
    उत्तर – लड़के ने कहा कि शरबत पिलाने के बजाय यदि उसका खेल देखकर कुछ पैसे दे देते तो उसे अधिक प्रसन्नता होती।
  17. प्रश्न – लेखक ने लड़के को कितने टिकट दिए?
    उत्तर – लेखक ने उसे बारह टिकट दिए।
  18. प्रश्न – लड़के ने निशाना लगाने में कैसा प्रदर्शन किया?
    उत्तर – लड़के ने सभी खिलौनों पर सटीक निशाना लगाया और कोई गेंद खाली नहीं गई।
  19. प्रश्न – लोगों की प्रतिक्रिया क्या थी?
    उत्तर – लोग उसके अद्भुत निशाने को देखकर दंग रह गए।
  20. प्रश्न – खेल समाप्त होने के बाद लड़का क्या कर गया?
    उत्तर – खेल समाप्त होने के बाद लड़का सब खिलौने समेटकर चुपचाप चला गया।
  21. प्रश्न – लेखक ने पुनः छोटे जादूगर को कहाँ देखा?
    उत्तर – लेखक ने छोटे जादूगर को कलकत्ते के बोटैनिकल गार्डन में देखा।
  22. प्रश्न – उस समय जादूगर किस हाल में था?
    उत्तर – उस समय जादूगर साफ कपड़े पहने था, सिर पर सूत की रस्सी से बँधी लेखक की रूमाल थी और हाथ में खादी का झोला था।
  23. प्रश्न – जब लेखक ने खेलने से मना किया, तब किसने अनुमति दी?
    उत्तर – लेखक की श्रीमतीजी ने उसे खेलने की अनुमति दी।
  24. प्रश्न – छोटे जादूगर ने कौन-कौन से खेल दिखाए?
    उत्तर – उसने भालू, बिल्ली, बंदर और गुड़िया-गुड्डे के विवाह जैसे खेल दिखाए।
  25. प्रश्न – उसके खेल देखकर लोग कैसे हुए?
    उत्तर – उसके खेल देखकर सब लोग हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।
  26. प्रश्न – छोटे जादूगर के ताश के पत्तों में क्या जादू हुआ?
    उत्तर – उसके ताश के सब पत्ते लाल हो गए फिर काले हो गए।
  27. प्रश्न – उसकी सूत की डोरी में क्या हुआ?
    उत्तर – उसकी सूत की डोरी टुकड़े-टुकड़े होकर फिर जुड़ गई।
  28. प्रश्न – श्रीमतीजी ने उसे क्या दिया?
    उत्तर – श्रीमतीजी ने छोटे जादूगर को एक रुपया दिया।
  29. प्रश्न – उसने रुपए से क्या करने की बात कही?
    उत्तर – उसने कहा कि पहले भरपेट पकौड़ी खाऊँगा और फिर एक सूती कंबल लूँगा।
  30. प्रश्न – लेखक को अपने व्यवहार पर क्यों क्रोध आया?
    उत्तर – लेखक को इस बात पर क्रोध आया कि उसने एक गरीब बालक की खुशी देखकर ईर्ष्या की थी।
  31. प्रश्न – लेखक ने जादूगर को फिर कहाँ देखा?
    उत्तर – लेखक ने उसे फिर सड़क के किनारे धूप में खेल दिखाते हुए देखा।
  32. प्रश्न – उस दिन उसके खेल में क्या कमी थी?
    उत्तर – उस दिन उसके खेल में प्रसन्नता की कमी थी, वह उदास था।
  33. प्रश्न – उसने उदासी का कारण क्या बताया?
    उत्तर – उसने बताया कि उसकी माँ की अंतिम घड़ी समीप है।
  34. प्रश्न – लेखक ने उसे क्या कहा?
    उत्तर – लेखक ने कहा कि तब भी तुम खेल दिखाने चले आए?
  35. प्रश्न – लड़के ने जवाब में क्या कहा?
    उत्तर – उसने कहा कि क्यों न आता, और फिर चुप हो गया।
  36. प्रश्न – लेखक ने उसके साथ क्या किया?
    उत्तर – लेखक ने उसके झोले को गाड़ी में रखकर उसे भी बैठा लिया और झोंपड़ी की ओर चल पड़ा।
  37. प्रश्न – झोंपड़ी में क्या हुआ?
    उत्तर – झोंपड़ी में पहुँचते ही लड़के की माँ ने अंतिम साँस ली और मर गई।
  38. प्रश्न – छोटे जादूगर ने माँ के साथ क्या किया?
    उत्तर – छोटे जादूगर ने कंबल माँ पर डालकर उसे गले से लगा लिया और रोने लगा।
  39. प्रश्न – लेखक की क्या अवस्था हुई?
    उत्तर – लेखक की आँखों से आँसू बह निकले और वह स्तब्ध रह गया।
  40. प्रश्न – कहानी हमें क्या सिखाती है?
    उत्तर – कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा परिश्रम, जिम्मेदारी और मातृभक्ति जीवन का सबसे बड़ा जादू है, जो किसी भी तमाशे से बढ़कर है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – कार्निवल के मैदान में लेखक ने छोटा जादूगर को कहाँ देखा और वह क्या कर रहा था?

उत्तर – लेखक ने छोटा जादूगर को उस छोटे फुहारे के पास देखा। वह चुपचाप शराब पीनेवालों को देख रहा था और उसके चेहरे पर अभाव में भी गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी।

  1. प्रश्न – छोटे जादूगर ने जादूगर को निकम्मा क्यों कहा और अपनी कला पर क्या दावा किया?

उत्तर – छोटे जादूगर ने परदे के पीछे के जादूगर को निकम्मा कहा क्योंकि उसे लगता था कि उससे अच्छा ताश का खेल तो वह स्वयं दिखा सकता है। उसकी वाणी में आत्मविश्वास और प्रगल्भता थी।

  1. प्रश्न – लेखक ने छोटे जादूगर को शरबत पीने के बाद क्या करने का प्रस्ताव दिया, और लड़का किस बात पर ज़ोर देता रहा?

उत्तर – शरबत पीने के बाद लेखक ने उसे निशाना लगाने चलने को कहा। लड़का भी निशाने पर ही ज़ोर दे रहा था, क्योंकि वह वहाँ जाकर अपना खेल दिखाकर कुछ पैसे कमाना चाहता था।

  1. प्रश्न – छोटे जादूगर को निशाना लगाने पर कौन-सी बड़ी सफलता मिली?

उत्तर – लेखक द्वारा बारह टिकट खरीदने पर, छोटा जादूगर पक्का निशानेबाज निकला। उसकी कोई गेंद खाली नहीं गई और उसने बारह खिलौनों को बटोर लिया।

  1. प्रश्न – लेखक ने जब छोटे जादूगर को एक रुपया दिया तो उसकी क्या प्रतिक्रिया हुई और उसने रुपए से क्या करने की योजना बताई?

उत्तर – श्रीमतीजी ने जब उसे एक रुपया दिया तो वह उछल उठा। उसने बताया कि पहले वह भरपेट पकौड़ी खाएगा, और फिर एक सूती कंबल खरीदेगा।

  1. प्रश्न – लेखक को छोटे जादूगर के एक रुपया पाने पर क्यों क्रोध आया?

उत्तर – लेखक को पहले तो छोटा जादूगर के एक रुपया पाकर खुश होने पर ईर्ष्या हुई थी, लेकिन तुरंत ही उन्हें अपनी भूल मालूम हुई। उन्होंने स्वयं को ‘स्वार्थी’ कहकर इस क्रोध के लिए फटकारा।

  1. प्रश्न – कलकत्ते के बोटैनिकल-उद्यान में छोटा जादूगर किस वेश-भूषा में मिला?

उत्तर – बोटैनिकल-उद्यान में छोटा जादूगर चारखाने का खादी का झोला लिए था। उसने साफ़ जाँघिया और आधी बाँहों का कुरता पहन रखा था। सिर पर उसकी रूमाल सूत की रस्सी से बँधी हुई थी।

  1. प्रश्न – छोटा जादूगर जब हावड़ा की ओर लौटते हुए मिला, तो वह कहाँ था और क्यों?

उत्तर – हावड़ा की ओर लौटते हुए वह एक झोंपड़ी के पास कंबल कंधे पर डाले मिल गया। उसकी माँ को अस्पताल वालों ने निकाल दिया था, इसलिए वह वहीं अपनी बीमार माँ के पास था।

  1. प्रश्न – अंतिम बार खेल दिखाते समय छोटे जादूगर की वाणी और अवस्था कैसी थी?

उत्तर – अंतिम बार खेल दिखाते समय छोटा जादूगर औरों को हँसाने की चेष्टा कर रहा था, लेकिन उसकी वाणी में वह प्रसन्नता की तरी नहीं थी। वह स्वयं काँप रहा था, मानो उसके रोएँ रो रहे थे।

  1. प्रश्न – अंतिम खेल के बाद लेखक के पूछने पर छोटे जादूगर ने अपनी उदासी का क्या कारण बताया?

उत्तर – लेखक के पूछने पर उसने अविचल भाव से बताया कि उसकी माँ ने उसे तुरंत चले आने को कहा है क्योंकि उसकी अंतिम घड़ी समीप है। यही कारण था कि उसका खेल उस दिन जम नहीं पाया।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – छोटे जादूगर की गरीबी और स्वाभिमान का चित्रण करते हुए बताइए कि उसने लेखक के शरबत पिलाने पर क्या प्रतिक्रिया दी?

उत्तर – छोटा जादूगर अत्यंत गरीब था, फिर भी उसमें ग़ज़ब का स्वाभिमान था। लेखक द्वारा शरबत पिलाने पर उसने तिरस्कार की हँसी के साथ कहा कि वह तमाशा देखने नहीं, दिखाने निकला है। उसने कहा कि शरबत पिलाने के बजाय यदि लेखक उसका खेल देखकर कुछ पैसे दे देते, तो उसे अधिक प्रसन्नता होती, क्योंकि इससे वह अपनी बीमार माँ को पथ्य दे पाता।

  1. प्रश्न – लेखक ने जब श्रीमतीजी के कहने पर जादूगर का खेल देखा, तो उसका अभिनय किस प्रकार का था और लेखक ने क्या विचार किया?

उत्तर – श्रीमतीजी के कहने पर जब जादूगर ने खेल शुरू किया, तो कार्निवल के खिलौने ही उसका अभिनय करने लगे। भालू मनाता, बिल्ली रूठती, बंदर घुड़कता और गुड़िया का ब्याह होता। लड़के की वाचालता से ही यह अभिनय हो रहा था, जिससे सब हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। लेखक ने यह देखकर सोचा कि आवश्यकता ने बालक को कितनी शीघ्र चतुर बना दिया है।

  1. प्रश्न – लेखक अपनी कौन-सी भूल स्वीकार करते हैं? यह भूल और स्वीकार उनके चरित्र के किस पक्ष को उजागर करता है?

उत्तर – लेखक अपनी भूल स्वीकार करते हैं जब उन्हें छोटे जादूगर के एक रुपया पाने पर ईर्ष्या होने लगती है। वह सोचते हैं, ‘ओह! कितना स्वार्थी हूँ मैं!’ यह भूल और उसका तुरंत स्वीकार लेखक के मानवीय और संवेदनशील पक्ष को उजागर करता है, जो क्षणिक स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरे की विषम परिस्थितियों के प्रति सहानुभूति रखता है।

  1. प्रश्न – छोटे जादूगर ने माँ की अंतिम घड़ी समीप होने पर भी खेल दिखाना क्यों ज़रूरी समझा? इस पर लेखक की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर – छोटे जादूगर ने अविचल भाव से कहा, “क्यों न आता?” उसके अनुसार, मनुष्य के सुख-दुःख का माप अपना ही साधन होता है। वह माँ की बीमारी और अपने पेट के लिए पैसे कमाने को सबसे ज़रूरी समझता था। लेखक ने पहले क्रोध से पूछा था, “तब भी तुम खेल दिखलाने चले आए!” लेकिन बाद में उसे अपनी भूल मालूम हुई और वह लड़के की कर्तव्यपरायणता पर स्तब्ध रह गए।

  1. प्रश्न – कहानी के अंत में झोंपड़ी का दृश्य कैसा था और लेखक उस समय कैसा महसूस कर रहे थे?

उत्तर – झोंपड़ी के पास पहुँचते ही जादूगर दौड़कर माँ-माँ पुकारते हुए भीतर घुसा। लेखक ने देखा कि एक स्त्री चिथड़ों से लदी हुई काँप रही थी। माँ के मुँह से ‘बे…’ निकलकर रह गया और उसके दुर्बल हाथ उठकर गिर गए। जादूगर उससे लिपटकर रो रहा था, और लेखक स्तब्ध थे। उस उज्ज्वल धूप में, लेखक को समग्र संसार जैसे जादू-सा अपने चारों ओर नृत्य करता हुआ प्रतीत हुआ, जो जीवन की विडंबना को दर्शाता है।

 

 

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