Phir Kya Hoga Uske Baad (Kavita) – Balkrishna Rao, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

प्रथम पद (First Stanza)

फिर क्या होगा उसके बाद?

उत्सुकहोकर शिशु ने पूछा,

माँ, क्या होगा उसके बाद?”

रविसे उज्ज्वल‘, शशिसे सुंदर,

नव किसलय दल से कोमलतर,

वधू तुम्हारी घर आएगी,

उस विवाह उत्सव के बाद।

सारांश – कविता की शुरुआत एक छोटे बालक की उत्सुकता से होती है। वह अपनी माँ से जीवन के भविष्य के बारे में पूछता है। माँ उसे सुखद भविष्य का सपना दिखाते हुए कहती है कि जब तुम बड़े हो जाओगे, तो तुम्हारा विवाह होगा। वह वधू कैसी होगी? वह सूर्य जैसी तेजस्विनी, चंद्रमा जैसी सुंदर और नई कोमल पत्तियों जैसी सुकुमार होगी। माँ बालक को सांसारिक सुखों की ओर ले जाने का प्रयास करती है।

द्वितीय पद (Second Stanza)

पलभर मुख पर स्मितकी रेखा खेल गई,

फिर माँ ने देखा- कर गंभीर मुखाकृति,

शिशु ने फिर पूछा, “माँ, उसके बाद?”

सारांश – विवाह की बात सुनकर बालक के चेहरे पर पलभर के लिए मुस्कुराहट आती है, लेकिन वह तुरंत गंभीर हो जाता है। उसकी जिज्ञासा केवल विवाह तक सीमित नहीं है। वह फिर से वही गहरा प्रश्न पूछता है कि माँ, इस विवाह उत्सव और खुशी के बाद क्या होगा?

तृतीय पद (Third Stanza)

फिर नभ के नक्षत्र मनोहर,

स्वर्ग-लोक से उतर उतरकर,

तेरे शिशु बनने को मेरे

घर आएँगे उसके बाद।

मेरे नए खिलौने लेकर,

चले न जाएँ वे अपने घर।

चिंतित हो कह उठा,

किंतु फिर पूछा शिशु ने, “उसके बाद?”

सारांश – माँ बालक को जीवन चक्र के अगले पड़ाव के बारे में बताती है। वह कहती है कि उसके बाद तुम्हारे घर में सुंदर बच्चे जन्म लेंगे, जो आकाश के तारों के समान मनोहर होंगे। बालक बच्चों की बात सुनकर अपने खिलौनों के प्रति चिंतित हो जाता है कि कहीं वे बच्चे उसके खिलौने लेकर अपने घर न चले जाएँ। लेकिन अपनी इस चिंता के बीच भी वह अपना मूल प्रश्न नहीं भूलता और फिर पूछता है— “उसके बाद?”

चतुर्थ पद (Fourth Stanza)

अब माँ का जी ऊब चुका था,

हर्ष-श्रांति में डूब चुका था।

बोली, “फिर मैं बूढ़ी होकर,

मर जाऊँगी उसके बाद।”

सारांश – बालक के बार-बार एक ही प्रश्न पूछने से माँ थक जाती है। वह खुशी और थकान के भाव में डूबी हुई अचानक जीवन का कठोर सत्य कह देती है। वह कहती है कि बच्चों के आने और उनके बड़े होने के बाद मैं बूढ़ी हो जाऊँगी और फिर मेरी मृत्यु हो जाएगी। माँ यहाँ जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर इशारा करती है।

पंचम पद (Fifth Stanza)

यह सुनकर भर आए लोचन‘,

किंतु पोंछकर उन्हें उसी क्षण,

सहज कुतूहल से फिर शिशु ने पूछा,

“माँ, क्या होगा उसके बाद?”

सारांश – माँ की मृत्यु की बात सुनकर बालक भावुक हो जाता है और उसकी आँखों में आँसू भर आते हैं। वह माँ से प्रेम करता है, इसलिए दुखी होता है। परंतु, वह तुरंत अपने आँसू पोंछ लेता है और अपनी सहज जिज्ञासा (Curiosity) के कारण फिर वही सवाल करता है। वह जानना चाहता है कि माँ, तुम्हारे मरने के बाद भी तो कुछ होगा, वह क्या होगा?

छठा पद (Sixth Stanza)

कवि को बालक ने सिखलाया

सुख-दुख हैं पलभर की माया,

अनंतका तत्त्व‘- प्रश्न यह,

फिर क्या होगा उसके बाद?

सारांश – अंतिम पद में कवि स्वयं की दार्शनिक सोच को व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि इस अबोध बालक ने उन्हें जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ा दिया। हम जीवन के सुखों जैसे विवाह, बच्चे और दुखों अर्थात् मृत्यु में फँसे रहते हैं, जबकि ये सब तो क्षणभंगुर माया हैं। असली प्रश्न तो ‘अनंत’ (Infinity) का है। मृत्यु के बाद का रहस्य क्या है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर ब्रह्मांड के पास भी शायद नहीं है।

कठिन शब्दार्थ

1  उत्सुक – जानने की इच्छा रखने वाला  Curious / Eager

 2  शिशु – छोटा बालक  Infant / Young child

 3  रवि – सूर्य  Sun

 4  उज्ज्वल – चमकदार / साफ़  Bright / Radiant

 5  शशि – चंद्रमा  Moon

 6  नव किसलय दल – नई कोमल पत्तियों का समूह  Group of new tender leaves

 7  कोमलतर – बहुत अधिक मुलायम  Softer / More tender

 8  वधू – बहू / दुल्हन  Bride / Daughter-in-law

 9  उत्सव – त्योहार / जश्न  Festival / Celebration

 10  स्मित – मंद मुस्कान  Gentle smile

 11  गंभीर – शांत और विचारमग्न  Serious / Solemn

 12  मुखाकृति – चेहरे की बनावट  Facial expression

 13  नभ – आकाश  Sky

 14  नक्षत्र – तारे  Stars / Constellations

 15  मनोहर – मन को हरने वाला (सुंदर)  Captivating / Beautiful

 16  स्वर्ग-लोक – देवलोक  Heaven / Celestial world

 17  चिंतित – परेशान  Worried / Anxious

 18  जी ऊबना – मन भर जाना / थक जाना  To get bored / Weary

 19  हर्ष-श्रांति – प्रसन्नता और थकान  Joy mixed with tiredness

 20  लोचन – आँखें  Eyes

 21  सहज – स्वाभाविक  Natural / Simple

 22  कुतूहल – जिज्ञासा / जानने की इच्छा  Curiosity / Wonder

 23  माया – भ्रम / छल  Illusion

 24  अनंत – जिसका कोई अंत न हो  Infinite / Eternal

 25  तत्त्व – मूल तत्व / रहस्य  Element / Essence

विशेष शब्द-युग्म (Special Phrases) –

रवि से उज्ज्वल – सूरज जैसी चमक वाला।

शशि से सुंदर – चाँद जैसी खूबसूरती।

पलभर की माया – थोड़े समय का भ्रम (संसार)।

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

उत्सुक, शिशु, उज्ज्वल, शशि, स्मित, मुखाकृति, नक्षत्र, स्वर्ग, चिंतित, हर्ष-श्रांति, क्षण, कुतूहल, अनंत, तत्त्व उच्चारण के लिए दिए गए शब्दों को श्रुतलेख के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

उत्सुक – उत-सुक (Ut-suk)

शिशु – शि-शु (Shi-shu)

उज्ज्वल – उज-ज्वल (Uj-jwal)

शशि – श-शि (Sha-shi)

स्मित – स्-मित (S-mit)

मुखाकृति – मु-खा-कृ-ति (Mu-kha-kri-ti)

नक्षत्र – नक-षत्र (Nak-shatra)

स्वर्ग – स्वर-ग (Swar-ga)

चिंतित – चिन-तित (Chin-tit)

हर्ष-श्रांति – हरष-शरान-ति (Harsh-shraan-ti)

क्षण – क-षण (Kshan)

कुतूहल – कु-तू-हल (Ku-too-hal)

अनंत – अ-नंत (A-nant)

तत्त्व – तत्-व (Tat-va)

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) शिशु ने माँ से पहला प्रश्न क्या किया?

उत्तर – शिशु ने माँ से पहला उत्सुकतापूर्ण प्रश्न किया— “माँ, विवाह के बाद क्या होगा?”

(ख) माँ ने शिशु के पुत्रों की कल्पना किस रूप में की है?

उत्तर – माँ ने शिशु के पुत्रों की कल्पना आकाश के सुंदर नक्षत्रों और तारों के रूप में की है, जो स्वर्ग-लोक से उतरकर घर आएँगे।

(ग) माँ का आखिरी उत्तर सुनकर शिशु की आँखें क्यों भर आईं?

उत्तर – माँ का आखिरी उत्तर यह था कि वह बूढ़ी होकर मर जाएगी। अपनी प्यारी माँ की मृत्यु की बात सुनकर वियोग के दुःख से शिशु की आँखें भर आईं।

लिखित प्रश्न

  1. सही उत्तर पर () लगाइए

(क) शिशु माँ की किस बात को सुनकर मुसकरा उठा?

(i) तुम्हारा विवाह होगा।

(ii) चाँद और सूरज उज्ज्वल होते हैं।

(iii) वृक्षों के नए पत्ते कोमल होते हैं।

(iv) विवाह के बाद तुम्हारी वधू घर आएगी।

(ख) एक ही प्रश्न को बार-बार सुनकर थक चुकी माँ ने बालक के प्रश्न का क्या उत्तर दिया?

(i) मेरा जी ऊब गया है।

(ii) खुश होकर मैं थक गई हूँ।

(iii) मैं बूढ़ी होकर मर जाऊँगी।

(iv) सुख-दुख आते-जाते रहते हैं।

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) माँ ने अपने शिशु की वधू का वर्णन किस रूप में किया है?

उत्तर – माँ ने वधू का वर्णन करते हुए कहा कि वह सूर्य के समान उज्ज्वल, चंद्रमा के समान सुंदर और नए पत्तों अर्थात् किसलय के समान कोमल होगी।

(ख) घर में बच्चों के आने की बात सुनकर शिशु को क्या चिंता हुई?

उत्तर – शिशु को यह चिंता हुई कि कहीं वे नए बच्चे उसके खिलौने लेकर अपने घर न चले जाएँ।

(ग) कवि ने बालक से क्या सीखा?

उत्तर – कवि ने बालक से यह सीखा कि जीवन के सुख-दुख मात्र पलभर की माया अर्थात् भ्रम हैं। असली महत्त्व उस अनंत प्रश्न का है कि अंततः जीवन के बाद क्या होगा।

(घ) कविता में ‘अनंत का तत्त्व’ प्रश्न किसे कहा गया है?

उत्तर – कविता में “फिर क्या होगा उसके बाद?” इस निरंतर पूछे जाने वाले प्रश्न को ‘अनंत का तत्त्व’ कहा गया है, क्योंकि यह जीवन और मृत्यु के अटूट रहस्य को दर्शाता है।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

माँ का आखिरी उत्तर सुनकर शिशु की आँखें क्यों भर आईं?

उत्तर – माँ का उत्तर मृत्यु से जुड़ा था। शिशु अपनी माँ से निस्वार्थ प्रेम करता था और वह उसे कभी खोना नहीं चाहता था। मृत्यु के कारण माँ से बिछड़ने के डर और दुःख ने उसकी आँखों में आँसू ला दिए। यह बालक के कोमल हृदय और माँ के प्रति उसके लगाव को दर्शाता है।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर () लगाइए

(क) ‘मुखाकृति’ शब्द कैसे बना है?

(i) मुख जैसी आकृति

(ii) मुख और आकृति

(iii) मुख की आकृति

(iv) मुख पर आकृति

(ख) सही वर्तनीवाला शब्द कौन-सा है?

(i) उज्वल

(ii) उज्जवल

(iii) उजवल

(iv) उज्ज्वल

  1. निम्नलिखित शब्दों का वर्ण-विच्छेद कीजिए-

(क) स्वर्ग – स् + व् + अ + र् + ग् + अ

(ख) उत्सुक – उ + त् + स् + उ + क् + अ

(ग) नक्षत्र – न् + अ + क् + ष् + अ + त् + र् + अ

(घ) स्मित – स् + म् + इ + त् + अ

(ङ) कुतूहल – क् + उ + त् + ऊ + ह् + अ + ल् + अ

  1. जानें- कुछ वस्तुएँ अच्छी होती हैं, कुछ ज़्यादा अच्छी और कुछ सबसे अच्छी। वस्तुओं की विशेषता बताने वाले विशेषण पदों में इनके लिए क्रमशः ‘तर’ और ‘तम’ का प्रयोग किया जाता है;

जैसे- कोमल – कोमलतर – कोमलतम

कोष्ठक में दिए गए शब्दों में ‘तर’ अथवा ‘तम’ प्रत्यय लगाकर रिक्त स्थानों में लिखिए-

(क) हवा की गति तीव्र से तीव्रतर होती जा रही है। (तीव्र)

(ख) चींटी जैसा लघुतम प्राणी भी निरंतर काम में लगा रहता है। (लघु)

(ग) इस कठिनतम कार्य को हम सब मिलकर पूरा करेंगे। (कठिन)

(घ) कोणार्क का निकटतर समुद्रतट पुरी है। (निकट)

(ङ) आज तापमान अपने उच्चतम स्तर पर है।  (उच्च)

  1. जानें- इस कविता में तेरे, मेरे, मैं, तुम्हारी, उन्हें, सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया गया है। ये सभी पुरुषवाचक सर्वनाम हैं।

बोलने वाला अपने लिए जो सर्वनाम शब्द प्रयोग करता है वे उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – मैं, हम।

बात को सुनने वाले के लिए जो सर्वनाम शब्द प्रयोग किए जाते हैं वे मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे – तुम, आप।

किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु जिसके विषय में बात की जा रही है, के लिए प्रयोग किए जाने वाले सर्वनाम अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे- वह, वे।

तीनों प्रकार के पुरुषवाचक सर्वनामों का प्रयोग करके कविता के आधार पर एक-एक वाक्य बनाइए-

(क) उत्तम पुरुष (मैं) – मैं बूढ़ी होकर मर जाऊँगी।

(ख) मध्यम पुरुष (तेरी/तुम्हारी) – वधू तुम्हारी घर आएगी।

(ग) अन्य पुरुष (वे) – नक्षत्र स्वर्ग से उतरकर तेरे घर आएँगे।

  1. कविता से छाँटकर निम्नलिखित शब्दों के लिए समानार्थक शब्द लिखिए-

(क) चंद्रमा — शशि

(ख) सूर्य — रवि

(ग) गगन — नभ

(घ) नया — नव

(ङ) बच्चा — शिशु

(च) गृह — घर

(छ) जननी — माँ

(ज) चक्षु — लोचन

(झ) आनन — मुख

(ञ) दुल्हन — वधू

रोचक क्रियाकलाप

  1. अपनी दादी माँ/ नानी माँ को पत्र लिखकर बताइए कि आप उन्हें कितना याद करते हैं।

दिनांक – 16 फरवरी, 2026

घर संख्या W-414

टीसीआई, राउरकेला

ओड़िशा

 

पूजनीय दादी जी

(सादर चरण स्पर्श!)

मैं यहाँ कुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी स्वस्थ और प्रसन्न होंगी।

दादी माँ, आज आपकी बहुत याद आ रही थी, इसलिए आपको यह पत्र लिख रहा हूँ। घर पर जब भी रात को कहानियाँ सुनने का मन होता है, तो सबसे पहले आपका चेहरा सामने आ जाता है। मुझे आपकी गोद में सिर रखकर सोना और आपके हाथ का बना स्वादिष्ठ खाना बहुत याद आता है। यहाँ शहर की भागदौड़ में आपके साथ बिताए वह सुकून के पल और आपकी मीठी बातें बहुत याद आती हैं।

गर्मी की छुट्टियाँ आने वाली हैं और मैं आपके पास आने के लिए बहुत उत्सुक हूँ। हमने साथ में जो बगीचा लगाया था, मैं देखना चाहता हूँ कि उसके पौधे कितने बड़े हो गए हैं। आप अपना ध्यान रखिएगा और समय पर दवाइयाँ लीजिएगा।

दादाजी को मेरा प्रणाम कहिएगा।

आपका लाड़ला

अविनाश

  1. अपने साथियों के साथ मिलकर कक्षा में इस कविता का भाव – अभिनय कीजिए।

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

गृहकार्य

  1. कविता का आरंभ खुशी से और अंत दुख से होने का कारण –

उत्तर – कविता का आरंभ जीवन के सुखद पड़ावों जैसे विवाह, बच्चों का आना आदि की कल्पना से होता है, इसलिए वहाँ खुशी है। परंतु अंत में माँ द्वारा ‘मृत्यु’ का सत्य बताने और बालक के विलाप के कारण वातावरण दुखी हो जाता है। यह जीवन की वास्तविकता को दर्शाता है कि सुख और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

  1. कविता के आधार पर लिखिए-

किससे उज्ज्वल — रवि से

किससे सुंदर — शशि से

किससे कोमलतर — नव किसलय दल से

कौन मनोहर — नक्षत्र

क्या गंभीर — मुखाकृति

 

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