Keval Kuda Kachra (Sansmaranatmak Lekh) – Rajmohan Gandhi, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution,

पाठ का सारांश

राजमोहन गांधी द्वारा लिखित लेख “केवल कूड़ा-कचरा” आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते बाज़ारवाद और उससे उत्पन्न कचरे की समस्या पर एक गंभीर प्रहार है। इस लेख का संक्षिप्त सार निम्नलिखित है –

  1. अतीत और वर्तमान की तुलना

लेखक अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि पहले मध्यम वर्गीय घरों में कचरा न के बराबर होता था। सामान कागज़ के लिफ़ाफ़ों या कपड़े की थैलियों में आता था, जिन्हें दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता था। रसोई में कचरे के लिए एक छोटा-सा टीन का डिब्बा होता था, जिसमें केवल सब्ज़ियों के छिलके होते थे। इसके विपरीत, आज के आधुनिक घरों में कचरे के बड़े-बड़े डिब्बे प्लास्टिक की थैलियों, विज्ञापनों के पर्चों और ‘फ्रोजन फूड’ के पैकेटों से ठसाठस भरे रहते हैं।

  1. बाज़ारवाद और प्लास्टिक का मायाजाल

लेखक के अनुसार, आज हमारी सुबह प्लास्टिक के पैकेटों से शुरू होती है। दूध से लेकर पानी तक, सब कुछ प्लास्टिक में बंद है। बाज़ारवाद ने हमें ऐसी चीज़ों का आदि बना दिया है जो अंततः कचरे के विशाल पहाड़ों (Landfills) में तब्दील हो जाती हैं। लेखक खुद को उन 40 करोड़ शहरी लोगों का हिस्सा मानते हैं जो इस ‘अमर कचरे’ के जनक हैं।

  1. कचरा प्रबंधन की विफलता

लेख का एक मुख्य बिंदु कचरे के निपटान की दोषपूर्ण व्यवस्था है। आँकड़ों के अनुसार, शहर जितना कचरा पैदा करते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा उठाया ही नहीं जाता। जो उठाया भी जाता है, उसे वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के बजाय बस एक जगह से दूसरी जगह फेंक दिया जाता है। यह कचरा अब शहरों की सीमा लांघकर खेतों, तालाबों और दलदलों को ज़हरीला बना रहा है।

  1. गिरता भूजल और पर्यावरण संकट

लेखक चेतावनी देते हैं कि एक तरफ कचरे के पहाड़ ऊँचे हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ ज़मीन के नीचे पानी का स्तर गिरता जा रहा है। वही प्रदूषित पानी बोतलों में भरकर हमें वापस बेचा जा रहा है। आने वाले समय में शहरी आबादी और उनकी आमदनी बढ़ने के साथ यह संकट और भी भयावह रूप ले लेगा।

  1. धरती की सहनशक्ति और विद्रोह

लेखक एम. डगलस मीक्स के हवाले से कहते हैं कि यह धरती निर्जीव नहीं है; इसमें संवेदना है। यदि हम इसे बिना सोचे-समझे लूटते रहेंगे और प्रदूषित करेंगे, तो यह ‘मरकर’ विद्रोह करेगी। अंत में, लेखक बाज़ार की तुलना एक ऑक्टोपस से करते हैं। वे सवाल पूछते हैं कि यदि समुद्र (पर्यावरण) ही सूख गया या ज़हरीला हो गया, तो बाज़ार रूपी ऑक्टोपस के आठ हाथ (तरक्की और मुनाफ़ा) उसे कैसे बचा पाएँगे?

 

कठिन शब्दार्थ

1 – अनुपयोगी – बेकार, जो काम का न हो – Useless / Unserviceable

2 – घातक – जानलेवा, हानिकारक – Deadly / Lethal

3 – वंचित – महरूम, रहित – Deprived

4 – कचरा – कूड़ा-करकट – Garbage / Trash

5 – कनस्तर – पीपा, टिन का डिब्बा – Canister / Tin container

6 – पेटी – संदूक या बक्सा – Box / Bin

7 – भूजल – ज़मीन के नीचे का पानी – Groundwater

8 – दूहकर – निचोड़कर (शोषण करके) – Exploiting / Draining

9 – बंबे – बड़े पाइप या नल – Large pipes / Hydrants

10 – अमर पहाड़ – कभी न खत्म होने वाला ढेर – Everlasting mountain (heap)

11 – निपटारा – समाधान या निस्तारण – Disposal / Settlement

12 – ठिकाने लगाना – सही जगह पहुँचाना / अंत करना – To dispose of / To put away

13 – सिकुड़ती – कम होती हुई – Shrinking

14 – निरापद – सुरक्षित, बिना खतरे के – Safe / Secure

15 – निथारा – छानना या साफ़ करना – Filtered / Decanted

16 – मवाद – पीप (जख्म की गंदगी) – Pus

17 – संचयन – इकट्ठा करना – Harvesting / Accumulation

18 – प्रदूषण – गंदगी (वायु, जल आदि की) – Pollution

19 – गलना – सड़ना या घुलना – Decomposing / Melting

20 – अक्षुण्ण – जो खंडित न हो, अखंड – Intact / Unbroken

21 – मध्यम वर्ग – बीच का तबका – Middle class

22 – आधुनिक – नया, अर्वाचीन – Modern

23 – चौका – रसोईघर – Kitchen / Hearth

24 – पनसारी – किराने का दुकानदार – Grocer

25 – बर्नी – चीनी मिट्टी का जार – Ceramic jar

26 – लिफ़ाफ़े – कागज़ की थैलियाँ – Envelopes / Paper bags

27 – ठसाठस – पूरी तरह भरा हुआ – Crammed / Pack-full

28 – अनगिनत – जिसकी गिनती न हो – Countless

29 – निहायत – बहुत अधिक, अत्यंत – Extremely / Utterly

30 – सुविधाजनक – आरामदेह – Convenient

31 – दमघोंटू – जिससे सांस लेना मुश्किल हो – Suffocating

32 – बाज़ारवाद – बाज़ार की प्रधानता – Consumerism / Marketism

33 – विज्ञापन – प्रचार (मशहूरी) – Advertisement

34 – परचूनवाला – फुटकर विक्रेता – Retailer / Grocer

35 – दंपती – पति-पत्नी – Couple

36 – उपलब्धियों – सफलताएँ – Achievements

37 – उपभोक्ता – ग्राहक – Consumer

38 – उत्पादक – बनाने वाला – Producer / Manufacturer

39 – मुनाफ़ा – लाभ – Profit

40 – बौनी – छोटी – Dwarfed / Tiny

41 – दूभर – कठिन या मुश्किल – Difficult / Burdensome

42 – स्वभाव – आदत या प्रकृति – Nature / Temperament

43 – खीझ – चिड़चिड़ाहट – Irritation / Vexation

44 – झकझोरना – ज़ोर से हिलाना – To shake violently

45 – अखंडित – जो टूटा न हो – Unbroken

46 – खंडित – टूटा हुआ – Broken / Fragmented

47 – दचकी-पचकी – दबी या पिचकी हुई – Dent / Compressed

48 – जनक – जन्म देने वाला (पिता) – Progenitor / Creator

49 – उपेक्षा – ध्यान न देना – Neglect / Disregard

50 – विद्रोह – बगावत – Rebellion / Revolt

51 – संवेदना – महसूस करने की शक्ति – Sensitivity / Empathy

52 – दुरुपयोग – गलत इस्तेमाल – Misuse

53 – लूटते-खसोटते – बेदर्दी से लूटना – Plundering / Looting

54 – मरोड़ी – घुमाई हुई – Twisted

55 – पहचान – शिनाख्त – Identity / Recognition

56 – औसत – सामान्य – Average

57 – दरज़ा – श्रेणी या स्तर – Status / Rank

58 – कनस्तर – धातु का डिब्बा – Canister

59 – प्राणदायी – जीवन देने वाला – Life-giving

60 – पर्चियाँ – छोटे कागज़ के टुकड़े – Slips / Leaflets

61 – फलते-फूलते – बढ़ते हुए – Flourishing / Prospering

62 – सुखांत – जिसका अंत सुखद हो – Happy ending

63 – सीमा – सरहद – Boundary / Border

64 – दलदल – कीचड़ भरी ज़मीन – Swamp / Marsh

65 – भंडार – खज़ाना या ढेर – Store / Reserve

66 – अंतरिक्ष – आसमान के पार – Space

67 – निर्जीव – जिसमें जान न हो – Lifeless / Inanimate

68 – घायल – चोटिल – Wounded / Injured

69 – अमर – जो कभी न मरे – Immortal

70 – ऑक्टोपस – आठ भुजाओं वाला जीव – Octopus

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

शुद्ध, बर्नी, लिफ़ाफ़े, कनस्तर, ढक्कन, गैरज़रूरी, फ्रोज़न, ढेर, कॉफ़ी, दमघोंटू, अखंडित, ज़मीन, निथारा सुखांत, इंतज़ार, उपलब्धि

शुद्ध – Shudh

बर्नी – Bar-nee

लिफ़ाफ़े – Li-faa-fay

कनस्तर – Ka-nas-tar

ढक्कन – Dhak-kan

गैरज़रूरी – Gair-za-roo-ree

फ्रोज़न – Fro-zun

ढेर – Dhay-r

कॉफ़ी – Cau-fee

दमघोंटू – Dam-ghon-too

अखंडित – A-khan-dit

ज़मीन – Za-meen

निथारा – Ni-thaa-raa

सुखांत – Su-khaant

इंतज़ार – In-ta-zaar

उपलब्धि – Up-lab-dhee

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) लेखक के घर में महीने भर के राशन को कैसे रखा जाता था?

उत्तर – लेखक के घर में महीने के शुरू में आने वाले आटा, दाल, चावल, नमक और चीनी को ठीक से बर्नियों और डिब्बों में भरकर रखा जाता था। कागज़ के लिफ़ाफ़ों को मोड़कर फिर से इस्तेमाल के लिए रख लिया जाता था।

(ख) आजकल कचरे में क्या-क्या फेंका जाता है?

उत्तर – आजकल कचरे में प्लास्टिक के पैकेट, दूध की थैलियाँ, पास्ता और फ्रोजन मटर के पैकेट, प्लास्टिक की बोतलें और विज्ञापनों की रंग-बिरंगी पर्चियाँ फेंकी जाती हैं।

(ग) लेखक को शहरी कचरे के निपटान की कहानी सुखांत क्यों नहीं लगती?

उत्तर – क्योंकि शहर का कचरा वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने या खाद बनाने के बजाय केवल एक जगह से दूसरी जगह (तालाबों, खेतों या दलदलों में) फेंक दिया जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है और भूजल ज़हरीला होता है।

(घ) किस दौर को भगवान का भेजा दौर कहा गया है और क्यों?

उत्तर – आने वाले उस दौर को जिसमें शहरी आबादी 60 करोड़ हो जाएगी और लोगों की आमदनी चार गुना बढ़ जाएगी, उत्पादकों के लिए ‘भगवान का भेजा दौर’ कहा गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनकी प्लास्टिक की चीज़ों की खपत और मुनाफ़ा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।

लिखित

(क) चौके में कचरा फेंकने के लिए क्या होता था?

(i) कागज़ के लिफ़ाफ़े

(ii) कपड़े की थैलियाँ

(iii) बर्नियाँ

(iv) छोटा सा टीन का डिब्बा

(ख) सुबह घूमने के लिए निकलने पर लेखक को कुछ बड़े आकार में क्या दिखाई देता है?

(i) डाक का डिब्बा

(iii) कचरे का डिब्बा

(ii) दवा की दुकान

(iv) परचून वाले की दुकान

(ग) धरती किन बेमतलब की चीज़ों को सहन नहीं कर पाएगी?

(i) भूजल का दोहन

(ii) न गल सकने वाला कचरा

(iii) कूड़े के बढ़ते पहाड़

(iv) वातावरण में घुलने वाला ज़हर

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) लेखक के बचपन में कचरे के रूप में क्या होता था और उसे कहाँ डाला जाता था?

उत्तर – लेखक के बचपन में कचरे के रूप में केवल सब्ज़ी-भाजी के छिलके और छोटी-मोटी चीज़ें होती थीं। इन्हें आटे के पुराने कनस्तर से काटकर बनाए गए एक छोटे से टीन के डिब्बे में डाला जाता था।

(ख) शहरों से उठाए गए कचरे का क्या किया जाता है?

उत्तर – शहरों से उठाए गए कचरे को किसी खाली ज़मीन, तालाब, दलदल या खेतों में डाल दिया जाता है। उसे निरापद अर्थात् सुरक्षित तरीके से ठिकाने नहीं लगाया जाता।

(ग) लेखक ने भूजल का स्तर नीचे गिरने का क्या कारण बताया है?

उत्तर – लेखक के अनुसार, बढ़ती आबादी की ज़रूरतें पूरी करने के लिए भूजल को अत्यधिक ‘दूहकर’ अर्थात् निकालकर प्लास्टिक की बोतलों और बंबों में भरकर बेचा जा रहा है, जिससे जल स्तर गिर रहा है।

(घ) लेखक एम॰ डगलस मीक्स ने धरती के विषय में क्या कहा है?

उत्तर – उन्होंने कहा है कि यह धरती निर्जीव नहीं है, इसमें संवेदना है। यदि इसका दुरुपयोग और शोषण किया गया, तो यह मरकर विद्रोह करेगी।

(ङ) ऑक्टोपस का उदाहरण देकर लेखक ने क्या समझाने का प्रयत्न किया है?

उत्तर – ऑक्टोपस के माध्यम से लेखक ने ‘बाज़ारवाद’ को समझाया है। जैसे ऑक्टोपस के आठ हाथ होते हैं, वैसे ही बाज़ार के भी कई रूप हैं। यदि पर्यावरण ही नष्ट हो गया, तो ये विकास रूपी हाथ हमें बचा नहीं पाएँगे।

  1. नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़कर सही कथन के लिए और गलत के लिए x लगाइए-

(क) कागज़ के लिफ़ाफ़ों को मोड़कर फिर इस्तेमाल के लिए रख लेते थे। ✓

(ख) आजकल कचरे के डिब्बे ठसाठस नहीं भरे रहते हैं। x

(ग) पीने का पानी नलों से आना चाहिए पर आता नहीं। ✓

(घ) आजकल दूध सुविधाजनक प्लास्टिक के पैकेट में आता है। ✓

(ङ) लेखक को घर के बाहर कहीं कचरा दिखाई नहीं देता। x

(च) लेखक स्वयं को कचरे के बढ़ते हुए पहाड़ का जनक मानते हैं। ✓

(छ) मिले आँकड़े के अनुसार कचरे में फेंकी गई 38 चीज़ों में से मात्र 30 चीजें ही उठाई जाती हैं। ✓

(ज) कचरे को दूसरी जगह ले जाकर उसकी खाद बनाई जाती है। x

(झ) धरती का बिना सोचे-समझे दुरुपयोग करने पर वह विद्रोह करेगी। ✓

(ञ) ‘वर्षा जल संचयन’ जैसे नए-नए शब्द हमारी भाषा में जुड़ने लगे हैं। ✓

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

  1. प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग बहुत कम क्यों कर देना चाहिए?

उत्तर – प्लास्टिक और पॉलिथीन का प्रयोग इसलिए कम करना चाहिए क्योंकि ये कभी नष्ट नहीं होते (Non-Biodegradable)। ये मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को खत्म करते हैं, जल स्रोतों को ज़हरीला बनाते हैं और इन्हें खाने से पशु-पक्षियों की मृत्यु हो जाती है। इसके सूक्ष्म कण (microplastics) हमारे भोजन में मिलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ पैदा करते हैं।

  1. धरती पर निरंतर बढ़ने वाले प्रदूषण का भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर – प्रदूषण के बढ़ने से भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघलेंगे और समुद्र का जलस्तर बढ़ जाएगा। पीने योग्य पानी और शुद्ध हवा का अभाव हो जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा) की संख्या बढ़ेगी और नई-नई बीमारियाँ फैलेंगी, जिससे मानव जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) दिए गए वर्ण-विच्छेद से क्या शब्द बनेगा?

ग् + ऐ + र् + अ + ज़् + अ + र् + ऊ + र् + ई

(i) गैरज़री

(ii) गेरज़रूरी

(iii) गैरज़रूरी

(iv) गैरजूररी

(ख) ‘प्राणदायी’ शब्द का विग्रह क्या होगा?

(i) प्राण में देने वाला

(ii) प्राण से देने वाला

(iii) प्राण के लिए देने वाला

(iv) प्राण को देने वाला

(ग) ‘पनसारी’ शब्द का क्या अर्थ है?

(i) पान-सुपारी बेचने वाला

(ii) पानी को सँभालने वाला

(iii) अनाज-दालों आदि का दुकानदार

(iv) पानी का व्यवसाय करने वाला

 

  1. कोष्ठक में दिए निर्देश के अनुसार क्रिया का काल बदलकर वाक्यों को लिखिए-

(क) महीने के शुरू में आने वाला सामान ठीक से रख दिया जाता था। (वर्तमान काल)

महीने के शुरू में आने वाला सामान ठीक से रख दिया जाता है।

(ख) मध्यम वर्ग के चौके में ठसाठस भरे कचरे के डिब्बे रहते हैं। (भविष्यत् काल)

मध्यम वर्ग के चौके में ठसाठस भरे कचरे के डिब्बे रहते होंगे।

(ग) पीने का पानी नलों से नहीं आता है। (भूतकाल)

पीने का पानी नलों से नहीं आता था।

(घ) सूरज की पहली किरन के साथ डिब्बों में कचरा फेंका जाएगा। (वर्तमान काल)

सूरज की पहली किरन के साथ डिब्बों में कचरा फेंका जाता है।

(ङ) लेखक रोज़ सुबह घूमने निकलता है। (भूतकाल)

लेखक रोज़ सुबह घूमने निकलते थे।

(च) भूजल का स्तर निरंतर गिर रहा है। (भविष्यत् काल)

भूजल का स्तर निरंतर गिरेगा।

 

  1. रिक्त स्थानों में कारक चिह्न लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-

(क) पानी रंग-बिरंगी बोतलों _______ भरा जाता है।

में

(ख) कूड़े को किसी और काम _______ बने स्थान पर डाल दिया जाता है।

के लिए

(ग) हम इस धरती _______ मरने नहीं देंगे।

को

(घ) धरती के विद्रोह _______ तरीका अलग होगा।

का

(ङ) कचरे के आधुनिक डिब्बे पैडल _______ खुलते हैं।

से

(च) लेखक _______ घर के बाहर भी कूड़े के ढेर देखे।

ने

  1. प्रत्येक के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-

(क) घर – सदन, गृह

(ख) पानी – जल, नीर

(ग) समुद्र – सागर, जलधि

(घ) पहाड़ – पर्वत, नग

(ङ) ज़मीन – पृथ्वी, धरा

 

  1. निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-

(क) जिस स्थान पर दम घुटता हो दमघोंटू

(ख) जिसके खंड न किए गए हों अखंडित

(ग) जिसका अंत सुख में हो सुखांत

(घ) किसी वस्तु का उपभोग करने वाला उपभोक्ता

(ङ) जो ज़रूरी न हो गैरज़रूरी

(च) जिसमें जीवन न हो निर्जीव

 

  1. (क) निम्नलिखित उपसर्गों के प्रयोग से शब्द बनाकर लिखिए-

अन + गिनत – अनगिनत

सु + रक्षित – सुरक्षित

अन + पढ़ – अनपढ़

अन + सुना – अनसुना

सु + पुत्र – सुपुत्र

सु + शोभित – सुशोभित

सु + गंध – सुगंध

अन + जान – अनजान

(ख) निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग और मूलशब्द को अलग करके लिखिए-

दुरुपयोग – दुर् + उपयोग

दुर्भाग्य – दुर् + भाग्य

दुर्बल – दुर् + बल

दुर्गंध – दुर् + गंध

निर्जीव – निर् + जीव

निर्जन – निर् + जन

निरादर – निर् + आदर

निर्गुण – निर् + गुण

रोचक क्रियाकलाप

  1. कूड़े-कचरे से हो रही हानियों को दिखाने वाला पोस्टर बनाइए।

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर करें।

  1. देश में चलाए जा रहे ‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाइए।

उत्तर – छात्र इसे शिक्षक की सहायता से अपने स्तर पर करें।

गृहकार्य – अनुच्छेद

शीर्षक – एक दिन कचरे के बोझ से दबी धरती मुझसे बोली

आज जब मैं सुबह सैर पर निकला, तो मुझे लगा जैसे धरती की सिसकियाँ सुनाई दे रही हैं। अचानक मेरे पैरों के नीचे की ज़मीन काँपी और एक कराहती हुई आवाज़ आई, “बस करो इंसान! अब और बोझ नहीं सहा जाता।” धरती ने मुझसे कहा कि मैंने उसे पहाड़ों जैसे कूड़े से ढँक दिया है। वह प्लास्टिक जिसे मैं ‘सुविधा’ समझकर फेंकता हूँ, वह धरती का दम घोंट रहा है। उसने चेतावनी दी कि यदि मैंने अपनी जीवनशैली नहीं बदली, तो आने वाली पीढ़ियों के पास न शुद्ध हवा होगी और न ही पीने योग्य पानी। वह विद्रोह नहीं करना चाहती, लेकिन हमारी लापरवाही उसे अंत की ओर ले जा रही है। उस दिन मैंने संकल्प लिया कि मैं कम से कम कचरा पैदा करूँगा और धरती को फिर से हरा-भरा बनाऊँगा।

 

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