पाठ का सारांश
यह हृदयस्पर्शी कहानी सुदर्शन द्वारा लिखित है, जिसमें महाराजा रणजीत सिंह की महानता और प्रजा-प्रेम का सजीव चित्रण किया गया है। कहानी एक सौ वर्षीय वृद्ध धोबी की जुबानी सुनाई गई है।
- सौ साल का गवाह –
लेखक एक वृद्ध धोबी से मिलता है जो अपनी उम्र पूरे 100 साल बताता है। धोबी ने अपनी आँखों से सिक्ख साम्राज्य का वह दौर देखा था जब महाराजा रणजीत सिंह का शासन था। वह महाराजा को राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक दयालु साधु के रूप में याद करता है।
- भीषण अकाल का प्रकोप –
धोबी बताता है कि जब वह सात-आठ साल का था, तब लाहौर में अकाल पड़ा था। ढाई साल तक वर्षा नहीं हुई, नदियाँ सूख गईं और लोग भूख से मरने लगे। अनाज इतना महँगा हो गया कि लोग पेड़ों के पत्ते और यहाँ तक कि मेढक-चूहे खाने पर मजबूर हो गए। धोबी का परिवार भी दाने-दाने को मोहताज था।
- महाराजा की घोषणा –
तभी महाराजा रणजीत सिंह ने किले के अनाज के भंडार जनता के लिए मुफ़्त खोल दिए। उन्होंने घोषणा की, “मेरी प्रजा मेरी संतान है, मैं उन्हें भूखा नहीं मरने दूँगा।” धोबी अपने बूढ़े बाबा के साथ अनाज लेने किले में पहुँचा।
- एक उदार सरदार से भेंट –
किले में भारी भीड़ थी। शाम हो गई लेकिन अज्जू और उसके बाबा को अनाज नहीं मिला। तभी एक दयालु ‘सरदार’ वहाँ आए। उन्होंने जग्गो धोबी और उसके बूढ़े बाबा पर तरस खाकर उन्हें दो बार में 40 सेर अनाज दिलवा दिया।
- स्वयं बोझ उठाना –
अनाज की गठरी बहुत भारी थी। बूढ़ा बाबा उसे उठा पाने में असमर्थ था और गिर पड़ा। जब बाबा ने असहाय होकर मदद माँगी, तो उस सरदार ने स्वयं वह भारी गठरी अपने सिर पर उठा ली और पैदल चलकर उसे धोबी के घर तक पहुँचा दिया।
- सत्य का उद्घाटन –
गठरी छोड़कर जब वह सरदार वापस लौटा, तो रास्ते में कुछ फौजियों ने उन्हें सलामी दी। बाबा ने जब फौजियों से पूछा कि ये कौन थे, तो उत्तर मिला—“ये हमारे महाराजा रणजीत सिंह थे।”
- दिलों पर राज –
बाबा और जग्गो यह जानकर दंग रह गए कि जिस राजा की एक आँख के इशारे पर फौजें चलती थीं, वह स्वयं एक गरीब के घर अनाज का बोझ उठाकर आया था। उसी रात बड़े ज़ोर की वर्षा हुई, जैसे प्रकृति भी महाराज के पुण्य से प्रसन्न हो गई हो।
मुख्य संदेश –
प्रजावत्सल राजा – राजा वही श्रेष्ठ है जो अपनी प्रजा को अपनी संतान समझे।
सादगी और सेवा – सत्ता का अहंकार पालने के बजाय असहायों की सेवा करना ही सच्ची मानवता है।
परोपकार – महाराजा रणजीत सिंह का राज केवल जमीन पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों पर था।
कठिन शब्दार्थ
1 अकाल – सूखा / भुखमरी Famine
2 अढ़ाई – ढाई (2.5) Two and a half
3 खुश्क – सूखा हुआ Dry / Arid
4 प्रलय – विनाश / कयामत Apocalypse / Catastrophe
5 दुर्भाग्य – बुरा भाग्य Misfortune / Bad luck
6 नौबत – स्थिति / हालत Condition / Situation
7 उकता – ऊब जाना / परेशान Fed up / Bored
8 तरस – दया Pity / Compassion
9 भर्राई – रुँधी हुई (आवाज़) Hoarse / Choked (voice)
10 आह – गहरी ठंडी साँस Sigh of grief
11 मर्मांतक – हृदय विदारक Heart-rending
12 सिक्खों – एक समुदाय / धर्म Sikhs
13 महाराजा – सम्राट Emperor / King
14 वाकया – घटना Incident / Event
15 मुनादी – ढोल पीटकर घोषणा Public proclamation
16 इर्द-गिर्द – चारों ओर Around / Nearby
17 कोठरियाँ – छोटे कमरे (भंडार) Small rooms / Granaries
18 प्रजा – जनता Subjects / Citizens
19 संतान – औलाद Offspring / Children
20 अनमोल – कीमती Priceless / Invaluable
21 घोषणा – ऐलान Announcement
22 फाटक – मुख्य द्वार Main gate
23 सिपाही – सैनिक Soldier
24 आदेश – हुक्म Order / Command
25 यश – कीर्ति / नाम Fame / Glory
26 फ़ौजी – सैनिक दल Military men
27 सलाम – अभिवादन Salute
28 सेर – तौल की पुरानी इकाई Ser (approx. 1 kg)
29 मासिक – महीने का Monthly
30 तराजू – तौलने का यंत्र Weighing scale
31 तौल-तौल कर – वजन करके By weighing
32 गठरी – भारी पोटली Bundle / Sack
33 हृदय – दिल Heart
34 उत्पन्न – पैदा होना Produced / Originated
35 गुदगुदी – सुखद सिहरन Tickling (thrill)
36 दयालु – रहमदिल Merciful / Kind
37 घमंड – अहंकार Pride / Arrogance
38 अधीरतावश – बेचैनी के कारण Out of impatience
39 नियत – मंशा / इरादा Intention
40 अनमोल – जिसका मूल्य न हो Priceless
41 मिन्नत – प्रार्थना / विनती Entreaty / Request
42 अभागे – बदकिस्मत Unfortunate
43 लोभी – लालची Greedy
44 बेगैरत – बेशर्म Shameless
45 आशीष – आशीर्वाद Blessing
46 सहमकर – डरकर Being terrified
47 अधीर – बेचैन Restless / Eager
48 निश्वास – लंबी साँस छोड़ना Exhalation / Deep sigh
49 आश्चर्य – अचरज Surprise / Wonder
50 सजल – आँसुओं से भरी Tearful / Moist (eyes)
51 अस्वीकृति – मना करना Rejection
52 सरका – खिसकाना To shift / move
53 उत्पन्न – शुरू होना Arise
54 वाकया – प्रसंग Occurrence
55 अढ़ाई – दो और आधा Two and a half
56 विधवा – जिसका पति मर गया हो Widow
57 नौबत – बुरी स्थिति Plight
58 उकता – परेशान होना Get tired of
59 मुनादी – डुग्गी पीटना Proclamation
60 इर्द-गिर्द – आसपास Surrounding
61 घसीटना – खींचना To drag
62 आपा-धापी – भगदड़ / स्वार्थ Chaos / Selfishness
63 निराश – दुखी Disappointed
64 मेहरबानी – कृपा Kindness / Favor
65 लोभी – लालची Greedy
66 बेगैरत – सम्मान खो चुका Shameless
67 दूना – दोगुना Double
68 दावत – भोज Feast
69 पचेगा – हजम होना To digest
70 मनोरंजक – आनंददायक Entertaining
71 वायुमंडल – वातावरण Atmosphere
72 दीर्घ – लंबा Long
73 हलचल – हलचल / शोर Stir / Agitation
74 सजल – नम Teary
75 पायजामे – एक वस्त्र Pajamas
76 कमीज़ें – शर्ट Shirts
77 रूपांतर – बदला हुआ रूप Adaptation
78 अभाव – कमी Scarcity
79 दृश्य – नजारा Scene
80 अस्थिर – जो टिके नहीं Unstable
81 प्रसन्न – खुश Happy
82 अविस्मरणीय – न भूलने वाला Unforgettable
83 सहनशीलता – बर्दाश्त करना Endurance
84 प्रतीक्षा – इंतज़ार Waiting
85 अनुकरण – नक़ल करना Imitation
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
उम्र, सत्तर, उत्पन्न, सिक्खों, हृदय, घमंड, खुश्क, अढ़ाई, गुरुद्वारों, मस्जिदों, दुर्भाग्य, महँगा, अधीरतावश, वृक्षों, आँगन, मेढक, गिर्द, घोषणा, मुफ़्त, मिन्नत, प्यासे, ढेर, बुड्ढे, कृपा, आशीष, ऋषि, गठरी, बँधवा, मनोरंजक, धारण, विश्वास, आश्चर्य, वर्षा
उम्र – Um-ra
मेढक – May-dhak
सत्तर – Sat-tar
दृष्टि – Drish-ti
उत्पन्न – Ut-pan-na
गिर्द – Gird
सिक्खों – Sik-khon
घोषणा – Gho-sh-naa
हृदय – Hrid-ya
मुफ़्त – Muft
अढ़ाई – Ad-haa-ee
मिन्नत – Min-nat
दुर्भाग्य – Dur-bhaag-ya
आशीष – Aa-sheesh
अधीरतावश – Adhee-ra-taa-vash
ऋषि – Ri-shi
विश्वास – Vish-vaas
आश्चर्य – Aash-char-ya
घमंड – Gha-mand
आँगन – Aan-gan
महँगा – Ma-han-gaa
बँधवा – Bandh-vaa
मनोरंजक – Ma-no-ran-jak
वर्षा – Var-shaa
मस्जिदों – Mas-ji-don
दरवाज़ों – Dar-vaa-zon
मुफ़्त – Muft
कमीज़ें – Ka-mee-zayn
खुश्क – Khush-k
प्यास – Pyaas
वृक्षों – Vrik-shon
गठरी – Gath-ree
गुरुद्वारों – Gu-rud-vaa-ron
ढेर – Dhayr
बुड्ढे – Bud-dhay
कृपा – Kri-paa
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) धोबी-बालक कौन-सी खबर घरवालों को सुनाना चाहता था?
उत्तर – धोबी-बालक घरवालों यह खबर सुनाना चाहता था कि महाराजा रणजीत सिंह ने किले के अनाज के भंडार गरीबों के लिए मुफ़्त खोल दिए हैं।
(ख) अनाज न मिलने के कारण गाँववाले क्या खाकर पेट भर रहे थे?
उत्तर – अनाज न मिलने के कारण गाँववाले वृक्षों के पत्ते, मेढक और चूहे खाकर अपना पेट भर रहे थे।
(ग) धोबी और उसके बाबा निराश क्यों हो गए?
उत्तर – संध्या होने पर जब हुकुम हुआ कि बाकी लोग कल आकर अनाज ले जाएँ, तब धोबी और उसके बाबा निराश हो गए क्योंकि वे कई दिनों से भूखे थे और उन्हें लगा कि आज भी अनाज नहीं मिला और कल भी नहीं मिलेगा।
(घ) धोबी और उसके बाबा को कैसे पता चला कि गठरी उठाने वाले स्वयं महाराजा रणजीत सिंह हैं?
उत्तर – जब सरदार (महाराजा) गठरी छोड़कर वापस जाने लगे, तब रास्ते में कुछ फ़ौजी सिक्खों ने उन्हें पहचान लिया और तलवारें निकालकर सलाम किया। तब फ़ौजियों से पूछने पर बाबा को पता चला कि वे स्वयं महाराजा थे।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) लेखक धोबी से यह सुनकर चौंक गया कि-
(i) उसने महाराजा रणजीत सिंह को देखा है।
(ii) अकाल के समय महाराजा रणजीत ने मुफ़्त अनाज बँटवाया।
(iii) धोबी की आयु सौ साल है। ✓
(iv) अनाज रुपये का बीस सेर बिकता था।
(ख) बाबा ने सरदार से क्या विनती की?
(i) वर्षा होने के लिए यज्ञ करवाएँ।
(ii) मुझे आज ही अनाज दे दें ✓
(iii) मेरा अनाज घर भिजवा दें।
(iv) अनाज तोलने वालों की संख्या बढ़ा दें।
(ग) सरदार ने अनाज ले जाने में बाबा की कैसे सहायता की?
(i) अनाज की गठरी बाबा के सिर पर रख दी।
(ii) सैनिकों से अनाज बाबा के घर पहुँचवा दिया।
(iii) दादा-पोते दोनों के लिए दो गठरियाँ बनवा दीं।
(iv) अपने सिर पर गठरी रखकर बाबा के घर तक पहुँचा दी।✓
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) लगातार अढ़ाई साल तक वर्षा न होने का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर – लगातार अढ़ाई साल तक वर्षा न होने से अकाल पड़ गया। तालाब और नदियाँ सूख गईं, अनाज बहुत महँगा हो गया और दुनिया भूखों मरने लगी।
(ख) अकाल के कारण धोबी के घर की स्थिति कैसी हो गई थी?
उत्तर – अकाल के कारण धोबी के घर के बर्तन और जेवर बिक गए। खाने को कुछ न बचा और परिवार के लोग पेड़ के पत्ते उबालकर खाने को मजबूर हो गए।
(ग) सरकारी आदमी के पास खड़े लोग खुश क्यों हो रहे थे?
उत्तर – सरकारी आदमी के पास खड़े लोग इसलिए खुश हो रहे थे क्योंकि सरकारी आदमी मुनादी कर रहा था कि महाराजा ने किले की अनाज की कोठरियाँ गरीबों के लिए मुफ़्त खोल दी हैं।
(घ) लेखक को किले के सिपाहियों के किस व्यवहार पर आश्चर्य हुआ?
उत्तर – लेखक को इस बात पर आश्चर्य हुआ कि अक्सर अमीरों के लिए सब दरवाज़े खुले होते हैं, पर वहाँ सिपाही सफ़ेद कपड़े वाले अमीरों को रोक रहे थे और गरीबों को अंदर जाने दे रहे थे।
- निम्नलिखित वाक्यों को पढ़कर पाठ के आधार पर ✓ या x लगाइए –
(क) ‘हाँ सरकार, मैंने महाराजा रणजीत सिंह के दर्शन किए हैं।’ -धोबी ने कहा। ✓
(ख) अनाज रुपये का पचास सेर बिकने लगा था। x
(ग) गाँव के लोग तो मेढक और चूहे तक खा रहे हैं। ✓
(घ) मेरी प्रजा मेरी संतान है, मैं उसे भूखा न मरने दूँगा। ✓
(ङ) सिपाही जिनके कपड़े सफ़ेद देखते उन्हें अंदर जाने देते। x
(च) आज मिल जाता तो रात में पीस कर खा लेते – बाबा ने कहा। ✓
(छ) बाबा ने अनाज बहुत ले लिया, और उसे उठाकर घर चला गया। x
(ज) सारा घर जागता था और महाराज के लिए दुआएँ माँगता था। ✓
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
महाराजा रणजीत सिंह का अपनी प्रजा के साथ व्यवहार हमें क्या शिक्षा देता है?
उत्तर – महाराजा रणजीत सिंह का व्यवहार हमें शिक्षा देता है कि एक शासक को अपनी प्रजा की सेवा अपनी संतान की तरह करनी चाहिए। सच्ची महानता सत्ता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि अहंकार को त्याग कर दीन-दुखियों की प्रत्यक्ष सहायता करने में है।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) ‘बाबा’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या होगा?
(i) बाबी
(ii) अम्मा
(iii) दादी ✓
(iv) बीबी
(ख) किस शब्द में नुक्ते () का प्रयोग नहीं किया जाएगा?
(i) बाज़ार
(ii) नज़र
(iii) हज़ार
(iv) अनाज़✓
(ग) कौन सा शब्द ‘वृक्ष’ का पर्यायवाची नहीं है?
(i) तरु
(ii) पादप
(iii) टहनी ✓
(iv) पेड़
- निम्नलिखित वर्ण-विच्छेद से शब्द बनाकर लिखिए-
(क) उ + त् + त् + अ + र् + अ = उत्तर
(ख) उ + त् + प् + अ + न् + न् + अ = उत्पन्न
(ग) र् + आ + ज् + य् + अ = राज्य
(घ) ह् + ऋ + द् + अ + य् + अ = हृदय
(ङ) व् + ऋ + द् + ध् + अ = वृद्ध
- रिक्त स्थानों में उचित सर्वनाम शब्द लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-
(क) मगर तुम इतने बड़े मालूम तो नहीं होते।
(ख) धोबी ने बताया कि वह उस ज़माने में बहुत छोटा था।
(ग) मैंने बाबा से कहा, बाबा बहुत भूख लगी है।
(घ) मेढक और चूहे वे कैसे खा लेते हैं?
(ङ) कई दिनों तक हमने पत्ते उबाल कर खाए।
- रिक्त स्थानों में ‘ओर’ अथवा ‘और’ लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-
(क) धोबी ने मेरी ओर देखा और कहना शुरू किया।
(ख) बाबा हुक्का पी रहा था और आकाश की ओर देख रहा था।
(ग) चारों ओर अकाल का शोर मचा था।
(घ) अनाज महँगा हो गया था और हमारे पास पैसे नहीं थे।
(ङ) लोग सुनते थे और खुश होते थे।
- निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-
(क) हँसते हुए मुखवाला – हँसमुख
(ख) सरकार से संबंधित – सरकारी
(ग) जहाँ जाकर सिख पूजा करते हैं – गुरुद्वारा
(घ) अच्छे भाग्य वाला – भाग्यवान
(ङ) जिसका कोई मोल न हो – अनमोल
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) विश्वास x अविश्वास
(ख) दयालु X निर्दयी
(ग) प्रसन्न X अप्रसन्न/उदास
(घ) उत्तर X प्रश्न
(ङ) दुर्भाग्य X सौभाग्य
(च) महँगा x सस्ता
रोचक क्रियाकलाप
- अपने भाई/बहन को पत्र लिखकर बताइए कि महाराजा रणजीत सिंह द्वारा बाबा का अनाज उनके घर तक पहुँचाना महाराजा के चरित्र की किस विशेषता को बताता है?
उत्तर – दिनांक – 12.10.20XX
घर संख्या – W-414
टीसीआई, राउरकेला
ओड़िशा
प्रिय अनुज,
(शुभ स्नेहाशीष!)
आशा है कि तुम स्वस्थ होगे। आज मैंने महाराजा रणजीत सिंह की एक बहुत ही प्रेरक कहानी पढ़ी। अकाल के समय जब एक गरीब बूढ़ा आदमी अनाज की भारी गठरी नहीं उठा पा रहा था, तब महाराजा ने स्वयं वह बोझ अपने सिर पर उठाया और उसके घर तक पहुँचा दिया।
यह घटना महाराजा के चरित्र की सादगी और दयालुता को दिखाती है। इससे पता चलता है कि वे एक शासक होने के बावजूद घमंडी नहीं थे और अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह प्यार करते थे। वे एक सच्चे प्रजा-पालक राजा थे।
हमें भी इस कहानी से दूसरों की मदद करने की सीख लेनी चाहिए।
तुम्हारा अग्रज,
अविनाश
- समेकित परियोजना (Integrated project) – इतिहास के शिक्षक महोदय से महाराजा रणजीत सिंह के विषय में जानकारी एकत्र करें। उसे चित्रों सहित अपनी स्क्रैप बुक में लगाएँ। आप इस पर एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन भी बना सकते हैं।
उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करने की कोशिश करें।
गृहकार्य
निम्नलिखित वाक्यों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) आदमी बने रहें यह भी बड़ी बात है।
उत्तर – इसका भाव है कि ऊँचे पदों पर बैठकर अहंकार करना आसान है, लेकिन एक सच्चा मनुष्य बने रहना और दूसरों का दर्द समझना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
(ख) गरीब आदमी दावत में जाकर खाता बहुत है, यह नहीं सोचता, पचेगा या नहीं।
उत्तर – इसका आशय है कि जो व्यक्ति लंबे समय से अभाव और भूख झेल रहा हो, वह अवसर मिलने पर भविष्य की चिंता किए बिना अत्यधिक संग्रह या उपभोग करने की कोशिश करता है।
(ग) धोबी ने खाली वायुमंडल की ओर इस प्रकार देखा जैसे कोई खोई हुई वस्तु खोज रहा है।
उत्तर – इसका भाव है कि धोबी अतीत की उन सुनहरी यादों और महाराजा की दयालुता को स्मृतियों में वैसे ही खोज रहा था जैसे कोई शून्य में अपनी कीमती खोई हुई चीज़ ढूँढता है।
रोचक क्रियाकलाप (पत्र लेखन)
प्रिय भाई,
आज मैंने महाराजा रणजीत सिंह की एक कहानी पढ़ी। जब एक वृद्ध बाबा भारी अनाज की गठरी नहीं उठा पाए, तो महाराजा ने स्वयं वह बोझ अपने सिर पर उठाया और उनके घर तक पहुँचाया। यह उनके चरित्र की परम सादगी, अहंकार-शून्यता और प्रजा के प्रति अगाध प्रेम को दर्शाता है। वे केवल महलों के राजा नहीं, बल्कि लोगों के दिलों के राजा थे।

