जयशंकर प्रसाद –
जयशंकर प्रसादजी का जन्म सन् 1890 ई. में वाराणासी के एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री देवी प्रसाद व्यापारी थे। माता-पिता की मृत्यु के कारण बाल्यकाल में ही इन्हें अपना पैतृक व्यवसाय संभालना पड़ा। इन्हें स्कूल में केवल आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त हुई थी। पालि, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं तथा उनके साहित्य का समुचित ज्ञान प्राप्त कर लिया था। इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र और पुरातत्व के वे प्रकांड विद्वान थे। आपकी मृत्यु 1937 में हुई।
कविता परिचय
‘मधुमय देश हमारा’ या ‘कार्नेलिया का गीत’ प्रसाद के चंद्रगुप्त नाटक का एक प्रसिद्ध गीत है। कार्नेलिया सिकंदर के सेनापति सिल्यूकस की बेटी है। सिंधु के किनारे ग्रीक शिविर के पास वृक्ष के नीचे बैठी हुई है। कहती है-“सिंधु का यह मनोहर तट जैसे मेरी आँखों के सामने एक नया चित्रपट उपस्थित कर रहा है। इस वातावरण से धीरे—धीरे उठती हुई प्रशांत स्निग्धता जैसे हृदय में घुस रही है। लंबी यात्रा करके जैसे मैं वहीं पहुँच गई हूँ जहाँ के लिए चली थी। यह कितना निसर्ग सुंदर है, कितना रमणीय है? हाँ वह! आज वह भारतीय संगीत का पाठ देखूँ भूल तो नहीं गई?” तब वह यह गीत गाती है-‘अरुण यह मधुमय देश हमारा!’ इस गीत में हमारे देश की गौरवगाथा तथा प्राकृतिक सौंदर्य को भारतवर्ष की विशिष्टता और पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पक्षी भी अपने प्यारे घोंसले की कल्पना कर जिस ओर उड़ते हैं वही यह प्यारा भारतवर्ष है। अनजान को भी सहारा देना और लहरों को भी किनारा देना हमारे देश की विशेषता है सही मायने में भारत देश की यही पहचान है।
मधुमय देश हमारा
अरुण यह मधुमय देश हमारा!
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर-नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर-मंगल कुंकुम सारा!
लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा।
बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा।
हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।
सप्रसंग व्याख्या – मधुमय देश हमारा
- अरुण यह मधुमय देश हमारा!
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
प्रसंग – यह पंक्तियाँ जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ से ली गई हैं। ये नाटक की ग्रीक पात्र कार्नेलिया (सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की पुत्री) द्वारा सिंधु नदी के तट पर भारत की सुंदरता और उसकी विशिष्टता को देखकर गाई गई हैं। इन पंक्तियों में भारत की उदारता का वर्णन है।
व्याख्या – कार्नेलिया कहती है कि यह भारत देश लालिमा से भरा हुआ और अत्यंत मधुर है। इस देश की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उदारता है। यह वह भूमि है जहाँ पहुँचकर अनजान क्षितिज को भी एक आश्रय मिल जाता है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि भारत देश अपरिचितों, विदेशियों और निराश्रितों को भी शरण और आश्रय प्रदान करने वाला विशाल हृदय वाला देश है।
- सरस तामरस गर्भ विभा पर-नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर-मंगल कुंकुम सारा!
प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि ने भारतीय प्रातःकाल (सुबह) और हरियाली के अद्भुत सौंदर्य का चित्रण किया है, जहाँ प्रकृति में मंगलमय वातावरण व्याप्त है।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि यहाँ की सुबह इतनी सुंदर है कि सरस कमल के भीतरी भाग में जो स्वर्ण जैसी चमक होती है, वैसी ही आभा चारों ओर फैलती है। उस आभा पर पेड़ों की मनोहर शाखाएँ नाचती हुई प्रतीत होती हैं। ऐसा लगता है जैसे जीवन रूपी हरियाली पर मंगलकारी कुमकुम चारों ओर बिखरा हुआ है। यह भाव भारतीय प्राकृतिक दृश्यों की पवित्रता और मंगलमयता को दर्शाता है।
- लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा।
प्रसंग – इस पद में कवि ने पक्षियों के माध्यम से यह बताया है कि भारत देश पक्षियों के लिए भी सर्वाधिक सुरक्षित और प्रिय निवास है, जहाँ वे विश्राम पाते हैं।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि इस देश में पक्षी भी छोटे इंद्रधनुष के समान अपने रंग-बिरंगे पंखों को फैलाकर, दक्षिण दिशा से आने वाली शीतल मलय पर्वत की हवा का सहारा लेते हुए, उसी ओर मुँह करके उड़ते हैं। वे भारत को ही अपना प्यारा घोंसला समझकर आश्रय पाने के लिए आते हैं। यह दर्शाता है कि भारत केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त जीवों के लिए भी एक प्रिय और सुरक्षित ठिकाना है।
- बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा।
प्रसंग – इन पंक्तियों में भारत की करुणा, दयालुता और आश्रय देने की भावना को प्राकृतिक प्रतीकों के माध्यम से अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि यह वह देश है जहाँ के लोगों की आँखें, बरसाती बादलों के समान, करुणा से भरे जल बन जाती हैं। अर्थात्, यहाँ के निवासी दुखियों को देखकर अत्यधिक सहानुभूति रखते हैं। साथ ही, यह भारत देश अनंत सागर की भटकती हुई लहरों को भी ठहरने के लिए किनारा प्रदान करता है। इसका भावार्थ यह है कि भारत की भूमि और यहाँ के लोग मानवता और दया से ओत-प्रोत हैं और सबको शरण व आश्रय देते हैं।
- हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।
प्रसंग – इस अंतिम पद में कवि ने भारतीय उषाकाल के सौंदर्य और उसके आगमन के प्रभाव का वर्णन किया है, जो सुख और आनंद का प्रतीक है।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि यहाँ उषा अपने साथ सोने का घड़ा लेकर आती है। वह इस घड़े से सुख भरकर मेरे ऊपर ढुलकाती है। यह उषा के आगमन का समय ऐसा होता है, जब पूरी रात जागने वाले तारे, अब मस्ती में मदहोश होकर ऊँघते रहते हैं। उषा का स्वर्ण कलश लेकर सुख बरसाना यह दर्शाता है कि भारत की प्रत्येक सुबह समृद्धि, मंगल और आनंद लेकर आती है, और रात के कष्टों को दूर कर देती है।
कठिन शब्दार्थ
अरुण – लाल
मधुमय – मधुर, मीठा
क्षितिज – वह जगह, जहाँ जमीन और आसमान मिलते नज़र आते हैं
सहारा – आश्रय, आसरा
तामरस – सोना
विभा – प्रकाश, रोशनी
तरुशिखा – पेड़ों की शाखाओं का अग्र भाग
सुरधुनु – इंद्र-धनुष
मलय – दक्षिण का पर्वत
समीर – हवा
खग – चिड़िया
नीड़ – घोंसला
अनंत – समुद्र
हेम – स्वर्ण, सोना
मदिर – मस्ती पैदा करनेवाला
रजनी – रात।
शब्द (Word) | हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) | தமிழ் அர்த்தம் (Tamil Meaning) | English Meaning |
मधुमय | मधुरता से भरा | தேன்மையான | Sweet or honey-like |
क्षितिज | horizon या दिगंत | அடிவானம் | Horizon |
सहारा | आश्रय या आधार | ஆதரவு | Support or shelter |
सरस | रसपूर्ण या आर्द्र | ரசமுள்ள | Juicy or moist |
तामरस | कमल का गर्भ (भीतरी भाग) | தாமரை உட்பகுதி | Lotus core |
विभा | आभा या चमक | ஒளி | Radiance or glow |
तरुशिखा | वृक्षों की शाखाएँ या चोटियाँ | மர உச்சிகள் | Tree tops or branches |
मनोहर | सुंदर या आकर्षक | அழகிய | Charming or beautiful |
छिटका | बिखरा हुआ | தெறித்த | Scattered or sprinkled |
मंगल | शुभ या कल्याणकारी | மங்கலமான | Auspicious or welfare |
कुंकुम | केसर या लाल चंदन | குங்குமம் | Saffron or vermilion |
लघु | छोटा | சிறிய | Small |
सुरधनु | इंद्रधनुष | இந்திர சிவப்பு வில் | Rainbow |
मलय समीर | मलय पर्वत की शीतल हवा | மலையக் குளிர் காற்று | Cool Malayan breeze |
खग | पक्षी | பறவை | Bird |
नीड़ | घोंसला | கூடு | Nest |
हेम | स्वर्ण या सोना | தங்கம் | Gold |
कुंभ | कलश या घड़ा | குடம் | Pot or pitcher |
उषा | प्रभात या सुबह की देवी | உஷா (விடியல் தேவி) | Dawn or morning goddess |
ढुलकाती | ढालती या उँड़ेलती | ஊற்றுகிறாள் | Pouring or spilling |
मदिर | मदहोश या नशे में | போதையில் | Intoxicated |
रजनी | रात | இரவு | Night |
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लिखिए —
- मधुमय देश हमारा किस पर आधारित गीत है?
उत्तर – ‘मधुमय देश हमारा’ गीत जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित नाटक ‘चंद्रगुप्त’ पर आधारित है। इसे नाटक की एक पात्र कार्नेलिया (सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की बेटी) सिंधु नदी के तट पर बैठकर गाती है।
- मधुमय देश हमारा की विशेषता बताइए?
उत्तर – इस गीत के अनुसार, भारत देश की विशेषता है कि यह मधुर है, यहाँ अनजान क्षितिज को भी सहारा मिलता है, यह अत्यंत निसर्ग सुंदर और रमणीय है, और यह देश करुणा से भरा है।
- कवि उड़ते खगों के पंखों की तुलना किससे करते हैं?
उत्तर – कवि जयशंकर प्रसाद उड़ते खगों के पंखों की तुलना लघु सुरधनु अर्थात् छोटे इंद्रधनुष से करते हैं। वे कहते हैं कि चिड़ियाँ शीतल मलय समीर का सहारा लेकर, अपने छोटे इंद्रधनुष जैसे पंख फैलाकर अपने प्यारे घोंसले की ओर उड़ती हैं।
- बरसाती बादल क्या बने है?
उत्तर – कविता के अनुसार, भारत देश में बरसाती आँखों के बादल करुणा से भरे हुए करुणा जल बने हैं। यह भारत की वह विशेषता दर्शाता है जहाँ के लोगों की आँखें दुखियों को देखकर दया और सहानुभूति से भर जाती हैं।
- पद्य पूरा कीजिए।
अ. अरुण यह मधुमय ________ सहारा॥
उत्तर – अरुण यह मधुमय देश हमारा! जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा॥
आ. हेम कुंभ ले उषा _________ रजनी भर तारा।
उत्तर – हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे। मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।
- “मधुमय देश हमारा” कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर – ‘मधुमय देश हमारा’ कविता में कवि ने भारतवर्ष के प्राकृतिक सौंदर्य और मानवीय मूल्यों का गौरवगान किया है। विदेशी पात्र कार्नेलिया के माध्यम से कवि बताता है कि भारत एक मधुर और दयालु देश है जहाँ अनजान को भी सहारा मिलता है। यहाँ की सुबह मनोहारी होती है, वृक्षों की शाखाओं पर हरियाली पर मंगल कुंकुम जैसा प्रकाश फैलता है। यहाँ पक्षी भी अपने प्यारे घोंसले की कल्पना कर उड़ते हैं। यह देश करुणा से भरा है, जहाँ अनंत समुद्र की लहरों को भी किनारा मिलता है, और उषा स्वर्ण कलश लेकर सुख बिखेरती है, जबकि रात भर जगे तारे मदहोश होकर ऊँघते रहते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ पंक्तियाँ किस नाटक से ली गई हैं?
a) स्कंदगुप्त
b) चंद्रगुप्त
c) ध्रुवस्वामिनी
d) अजातशत्रु
उत्तर – b (जयशंकर प्रसाद के नाटक ‘चंद्रगुप्त’ से।)
ये पंक्तियाँ किस पात्र द्वारा गाई गई हैं?
a) चंद्रगुप्त
b) कार्नेलिया
c) सेल्युकस
d) चाणक्य
उत्तर – b (ग्रीक पात्र, सेल्युकस की पुत्री।)
भारत को ‘मधुमय’ क्यों कहा गया है?
a) मधु उत्पादन के लिए
b) मधुरता और लालिमा से भरा
c) ठंडा होने से
d) बड़ा होने से
उत्तर – b (अरुण यह मधुमय देश।)
अनजान क्षितिज को भारत में क्या मिलता है?
a) धन
b) सहारा
c) युद्ध
d) भय
उत्तर – b (मिलता एक सहारा।)
दूसरी पंक्ति में ‘सरस तामरस गर्भ विभा’ से क्या अभिप्राय है?
a) सूर्य की किरणें
b) कमल के भीतरी भाग की स्वर्णिम चमक
c) नदी का जल
d) बादल
उत्तर – b (सरस कमल के गर्भ में स्वर्ण जैसी आभा।)
तरुशिखा पर क्या नाच रही है?
a) लहरें
b) विभा (आभा)
c) पक्षी
d) हवा
उत्तर – b (विभा पर नाच रही तरुशिखा।)
‘मंगल कुंकुम’ हरियाली पर कैसे है?
a) छिटका हुआ
b) जमा हुआ
c) सूखा हुआ
d) छिपा हुआ
उत्तर – a (छिटका जीवन हरियाली पर मंगल कुंकुम सारा।)
तीसरी पंक्ति में पक्षी पंख किसके समान फैलाते हैं?
a) बादल
b) लघु सुरधनु (छोटा इंद्रधनुष)
c) फूल
d) पत्ते
उत्तर – b (लघु सुरधनु से पंख पसारे।)
पक्षी किस हवा का सहारा लेते हैं?
a) उत्तर की
b) शीतल मलय समीर
c) गर्म पूर्वी
d) पश्चिमी
उत्तर – b (मलय पर्वत की शीतल हवा।)
पक्षी भारत को क्या समझते हैं?
a) शिकार स्थल
b) नीड़ निज प्यारा
c) युद्ध क्षेत्र
d) रेगिस्तान
उत्तर – b (समझ नीड़ निज प्यारा।)
चौथी पंक्ति में ‘बरसाती आँखों के बादल’ क्या बनते हैं?
a) क्रोध
b) भरे करुणा जल
c) हँसी
d) नींद
उत्तर – b (करुणा से भरे जल।)
अनंत की लहरें भारत में क्या पाती हैं?
a) तूफान
b) किनारा
c) गहराई
d) मछली
उत्तर – b (पाकर जहाँ किनारा।)
पाँचवीं पंक्ति में उषा क्या लेकर आती है?
a) चाँदी का कुंभ
b) हेम कुंभ
c) लोहे का कलश
d) मिट्टी का घड़ा
उत्तर – b (हेम कुंभ = सोने का घड़ा।)
उषा सुख को कैसे ढुलकाती है?
a) फेंककर
b) भरती ढुलकाती
c) छिपाकर
d) बाँटकर
उत्तर – b (भरती ढुलकाती सुख मेरे।)
रात भर जागने वाले कौन मदिर ऊँघते हैं?
a) पक्षी
b) तारा
c) बादल
d) पेड़
उत्तर – b (जगकर रजनी भर तारा।)
कवि कौन हैं?
a) मैथिलीशरण गुप्त
b) जयशंकर प्रसाद
c) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
d) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर – b (प्रसाद के नाटक से।)
पंक्तियाँ कहाँ गाई गई हैं?
a) गंगा तट
b) सिंधु नदी के तट
c) यमुना किनारे
d) हिमालय पर
उत्तर – b (सिंधु नदी के तट पर।)
भारत की मुख्य विशेषता क्या है?
a) युद्धक्षमता
b) उदारता और आश्रय देना
c) ठंडक
d) धन
उत्तर – b (अनजान क्षितिज को सहारा।)
प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किसमें अधिक है?
a) पहली पंक्ति
b) दूसरी पंक्ति
c) चौथी
d) पाँचवीं
उत्तर – b (हरियाली, कुंकुम, तरुशिखा।)
कुल मिलाकर कविता का मुख्य theme क्या है?
a) युद्ध
b) भारत की सुंदरता, उदारता और मंगलमयता
c) प्रेम
d) दुख
उत्तर – b (सभी पंक्तियाँ भारत की महिमा गाती हैं।)
अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
- प्रश्न – “अरुण यह मधुमय देश हमारा” पंक्ति के कवि कौन हैं?
उत्तर – “अरुण यह मधुमय देश हमारा” पंक्ति के कवि जयशंकर प्रसाद हैं। - प्रश्न – यह पंक्तियाँ किस नाटक से ली गई हैं?
उत्तर – ये पंक्तियाँ जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ से ली गई हैं। - प्रश्न – इन पंक्तियों में कवि ने किस देश की महिमा का वर्णन किया है?
उत्तर – इन पंक्तियों में कवि ने भारत देश की महिमा और सौंदर्य का वर्णन किया है। - प्रश्न – “अरुण यह मधुमय देश हमारा” में ‘अरुण’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर – ‘अरुण’ शब्द का अर्थ है लालिमा या प्रभातकाल का लाल रंग, जो उषा का प्रतीक है। - प्रश्न – कार्नेलिया कौन थी?
उत्तर – कार्नेलिया सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की पुत्री थी, जो भारत की सुंदरता से प्रभावित थी। - प्रश्न – कार्नेलिया भारत की किस विशेषता से प्रभावित हुई थी?
उत्तर – कार्नेलिया भारत की उदारता और अतिथि-सत्कार की भावना से प्रभावित हुई थी। - प्रश्न – “जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा” का क्या भाव है?
उत्तर – इस पंक्ति का भाव है कि भारत देश अजनबियों और निराश्रितों को भी शरण और आश्रय देता है। - प्रश्न – “सरस तामरस गर्भ विभा पर” पंक्ति में किस दृश्य का चित्रण है?
उत्तर – इस पंक्ति में भारतीय प्रातःकाल की उज्ज्वल और सुंदर प्रकृति का चित्रण है। - प्रश्न – “तरुशिखा मनोहर” शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर – “तरुशिखा मनोहर” शब्द पेड़ों की सुंदर शाखाओं के लिए प्रयुक्त हुआ है जो नाचती प्रतीत होती हैं। - प्रश्न – कवि ने ‘मंगल कुंकुम’ शब्द का प्रयोग किस भाव के लिए किया है?
उत्तर – ‘मंगल कुंकुम’ का प्रयोग शुभता, आनंद और प्रकृति की पवित्रता को प्रकट करने के लिए किया गया है। - प्रश्न – “लघु सुरधनु से पंख पसारे” में पक्षियों की तुलना किससे की गई है?
उत्तर – पक्षियों की तुलना छोटे इंद्रधनुष से की गई है, जो रंग-बिरंगे पंख फैलाए उड़ते हैं। - प्रश्न – “शीतल मलय समीर सहारे” पंक्ति से क्या भाव व्यक्त होता है?
उत्तर – इस पंक्ति से यह भाव व्यक्त होता है कि भारत की हवा शीतल, मधुर और जीवनदायिनी है। - प्रश्न – “समझ नीड़ निज प्यारा” से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर – कवि का तात्पर्य है कि पक्षी भारत को अपना प्यारा घोंसला और सुरक्षित आश्रय समझते हैं। - प्रश्न – “बरसाती आँखों के बादल” से कवि ने क्या प्रतीक लिया है?
उत्तर – कवि ने यहाँ दया और करुणा से भरी आँखों का प्रतीक लिया है, जो दूसरों के दुख में अश्रुपूर्ण हो जाती हैं। - प्रश्न – “लहरें टकराती अनंत की” पंक्ति से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर – कवि कहना चाहते हैं कि भारत वह स्थान है जो भटकी हुई आत्माओं को भी ठहरने का किनारा देता है। - प्रश्न – भारत की किन विशेषताओं का उल्लेख कवि ने इन पंक्तियों में किया है?
उत्तर – कवि ने भारत की उदारता, करुणा, सौंदर्य, पवित्रता और आतिथ्य की विशेषताओं का उल्लेख किया है। - प्रश्न – “हेम कुंभ ले उषा सवेरे” पंक्ति में ‘हेम कुंभ’ का क्या अर्थ है?
उत्तर – ‘हेम कुंभ’ का अर्थ है स्वर्ण से भरा घड़ा, जो उषा के साथ आने वाले सुख और समृद्धि का प्रतीक है। - प्रश्न – “मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा” पंक्ति में कवि ने क्या दृश्य प्रस्तुत किया है?
उत्तर – कवि ने रातभर जगने वाले तारों का दृश्य प्रस्तुत किया है, जो सुबह होते ही उनींदे हो जाते हैं। - प्रश्न – कविता में भारत की सुबह का चित्रण कैसे किया गया है?
उत्तर – कविता में भारत की सुबह को सुख, आनंद और समृद्धि बरसाने वाली स्वर्णिम उषा के रूप में चित्रित किया गया है। - प्रश्न – “अरुण यह मधुमय देश हमारा” कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर – इस कविता का मुख्य संदेश है कि भारत एक सुंदर, उदार, करुणामय और समृद्ध देश है जो सबको अपनाता है और आनंद से भर देता है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
- प्रश्न – ‘मधुमय देश हमारा’ गीत किसने लिखा है और यह कहाँ से लिया गया है?
उत्तर – यह गीत जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित है। यह उनके प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ का एक अंश है और इसे नाटक की पात्र कार्नेलिया सिंधु नदी के किनारे बैठकर गाती है, जो भारत के सौंदर्य और उदारता का बखान करती है।
- प्रश्न – ‘अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर – इस पंक्ति का तात्पर्य भारत की अतिथि-परायणता और उदारता से है। क्षितिज का अर्थ है दूर का अपरिचित किनारा। कवि कहते हैं कि भारत वह देश है जहाँ अज्ञात या अपरिचित व्यक्ति को भी सहजता से आश्रय और सहारा प्राप्त हो जाता है।
- प्रश्न – ‘सरस तामरस गर्भ विभा’ पर ‘तरुशिखा मनोहर’ किस प्रकार नाचती है?
उत्तर – ‘तामरस’ का अर्थ है कमल या सोना, जिसकी स्वर्ण जैसी चमक (विभा) भोर के समय चारों ओर फैलती है। इस सुनहरी आभा में पेड़ों की मनोहर शाखाएँ (तरुशिखा) पवन के झोंकों से हिलती हुई दिखाई देती हैं, जो ऐसा लगता है जैसे वे खुशी से नाच रही हों।
- प्रश्न – जीवन हरियाली पर ‘मंगल कुंकुम’ छिटकने का भाव क्या है?
उत्तर – इस भाव का अर्थ है कि भारत की हरियाली (प्रकृति) और जीवन पर भोर का अरुण प्रकाश (लालिमा) इस तरह फैला हुआ है, जैसे किसी शुभ कार्य के लिए मंगलकारी कुंकुम बिखेर दिया गया हो। यह प्राकृतिक सौंदर्य में पवित्रता और शुभता का मिश्रण दर्शाता है।
- प्रश्न – पक्षी (खग) किस ओर और क्यों उड़ते हैं?
उत्तर – पक्षी शीतल मलय समीर (हवा) का सहारा लेकर, अपने छोटे इंद्रधनुष (लघु सुरधनु) जैसे पंख पसारे हुए भारत की ओर मुँह करके उड़ते हैं। वे इस देश को ही सबसे प्यारा और सुरक्षित घोंसला (नीड़) समझकर आश्रय पाने के लिए आते हैं।
- प्रश्न – ‘बरसाती आँखों के बादल’ किस बात का प्रतीक हैं?
उत्तर – ‘बरसाती आँखों के बादल’ भारतवासियों की करुणा (दया) और सहानुभूति का प्रतीक हैं। इसका अर्थ है कि यहाँ के लोगों की आँखें दुखियों को देखकर दया से भर जाती हैं, जैसे बादल जल से भरे होते हैं।
- प्रश्न – अनंत की लहरें भारत में क्या पाती हैं?
उत्तर – भारत देश को अनंत सागर (समुद्र) की भटकती हुई लहरों को भी ठहरने के लिए किनारा प्रदान करने वाला बताया गया है। यह पंक्ति फिर से भारत की विशालता, स्थिरता और सबको शरण देने की क्षमता को उजागर करती है।
- प्रश्न – उषा सवेरे क्या लेकर आती है और वह क्या करती है?
उत्तर – उषा (भोर) सवेरे अपने साथ हेम कुंभ (सोने का घड़ा) लेकर आती है। वह इस घड़े से सुख भरकर सब पर ढुलकाती है, जिससे चारों ओर सुख, समृद्धि और आनंद का वातावरण फैल जाता है।
- प्रश्न – जब उषा सुख ढुलकाती है, तब तारे क्या कर रहे होते हैं?
उत्तर – जब उषा अपने स्वर्ण कलश से सुख ढुलकाती है, तब पूरी रात जागने वाले तारे अब मस्ती में मदहोश (मदिर) होकर ऊँघते रहते हैं। यह दृश्य रात की समाप्ति और नई आशा से भरी सुबह के आगमन का प्रतीक है।
- प्रश्न – गीत में ‘अरुण’ और ‘मधुमय’ शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर – ‘अरुण’ का प्रयोग प्रातःकाल की लालिमा और देश के गौरव के लिए किया गया है, जबकि ‘मधुमय’ का प्रयोग भारत देश के माधुर्य, प्रेम और मीठे व्यवहार के लिए किया गया है। ये दोनों शब्द भारत के सौंदर्य और स्वभाव को दर्शाते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
- प्रश्न – ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ कविता में भारत की मुख्य पहचान या विशिष्टताएँ क्या बताई गई हैं?
उत्तर – कविता में भारत की विशिष्टताएँ उसकी उदारता, करुणा और प्राकृतिक सौंदर्य हैं। यह देश अनजानों को सहारा देता है और अनंत की लहरों को किनारा देता है। यहाँ की सुबह मंगलकारी होती है और हरियाली पर शुभता छिटकी रहती है। सबसे महत्त्वपूर्ण, यहाँ के लोग करुणा जल से भरे बादल जैसे होते हैं, जो दया और सहानुभूति का प्रतीक हैं।
- प्रश्न – कवि ने पक्षियों के माध्यम से भारत को किस प्रकार एक आदर्श निवास सिद्ध किया है?
उत्तर – कवि ने दर्शाया है कि भारत केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों (खगों) के लिए भी सबसे प्रिय निवास है। पक्षी अपने पंख फैलाकर, शीतल मलय हवा के सहारे, भारत की ओर मुँह करके उड़ते हैं क्योंकि वे इसे अपना सबसे प्यारा घोंसला (नीड़) समझते हैं। यह सिद्ध करता है कि भारत की जलवायु और वातावरण समस्त जीवों के लिए शांति और सुरक्षा प्रदान करने वाला है।
- प्रश्न – ‘बरसाती आँखों के बादल’ और ‘लहरें टकराती अनंत की’—इन प्रतीकों द्वारा कवि भारत की किस भावना को उजागर करते हैं?
उत्तर – ये दोनों प्रतीक भारत की आश्रय और दया की भावना को उजागर करते हैं। ‘बरसाती आँखों के बादल’ प्रतीक हैं कि यहाँ के लोग मानवता और करुणा से भरे हैं। ‘अनंत की लहरें’ प्रतीक हैं कि भारत भटके हुए, निराश्रितों और दूर-दराज से आने वालों को भी स्थायित्व और सुरक्षित किनारा प्रदान करता है, जो भारत की उदार और विशाल हृदयता को सिद्ध करता है।
- प्रश्न – उषाकाल का वर्णन करते हुए कवि ने किस प्रकार सुख और आनंद की अभिव्यक्ति की है?
उत्तर – कवि ने उषा (भोर) का चित्रण एक ऐसी देवी के रूप में किया है जो सोने का घड़ा (हेम कुंभ) लेकर आती है और उससे सुख ढुलकाती है। यह दृश्य जीवन में मंगल और समृद्धि के आगमन का प्रतीक है। रात भर जागने वाले तारों का ऊँघते रहना रात के कष्टों की समाप्ति और एक आनंदमय, ऊर्जावान दिन की शुरुआत को दर्शाता है।
- प्रश्न – इस कविता में प्रकृति का चित्रण भारत की सांस्कृतिक पहचान को कैसे पुष्ट करता है?
उत्तर – प्रकृति का चित्रण भारत की सांस्कृतिक पहचान को पुष्ट करता है क्योंकि यहाँ प्राकृतिक सुंदरता को मंगल, करुणा और स्नेह जैसे मानवीय मूल्यों से जोड़ा गया है। हरियाली पर कुंकुम, करुणा जल बने बादल, और सुख ढुलकाती उषा—ये सभी प्रतीक बताते हैं कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्रकृति और संस्कृति एकाकार होकर पवित्रता और उदारता का संदेश देते हैं।

