Thukra do ya Pyaar Karo (Padya) – Class IX, Hindi Reader, Hindi Book, Tamilnadu State Board, The Best Solutions.

श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान

सुभद्राकुमारी चौहान (1905-1948) का जन्म प्रयाग जिले के निहालपुर गाँव में हुआ था। इन्होंने प्रयाग में ही शिक्षा ग्रहण की। सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन के प्रभाव से इन्होंने शिक्षा अधूरी ही छोड़ दी और ये राजनीति में भाग लेने लगीं। स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भाग लेने के कारण इन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। काव्य-रचना की ओर इनकी प्रवृत्ति विद्यार्थी-काल से ही थी। अपनी ओजस्वी कविताओं के कारण सुभद्राकुमारी चौहान को भारत भर में लोकप्रियता प्राप्त हुई।

इनकी कविताएँ ‘त्रिधारा’ और ‘मुकुल’ में संकलित हैं। भाव की दृष्टि से इनकी कविताओं को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। प्रथम वर्ग में राष्ट्र-प्रेम की कविताएँ रखी जा सकती हैं जिनमें इन्होंने असहयोग या स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेनेवाले वीरों को अपना विषय बनाया है। इनकी ‘झाँसी की रानी’ कविता जनता में बहुत लोकप्रिय हुई। दूसरे वर्ग के अंतर्गत वे कविताएँ रखी जा सकती हैं जिनकी प्रेरणा इन्हें अपने पारिवारिक जीवन से प्राप्त हुई। ऐसी कविताओं में कुछ तो पति-प्रेम की भावना से अनुप्राणित हैं और कुछ में सन्तान के प्रति वात्सल्य की सहज एवं मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है। इनकी भाषा शैली भावों के अनरूप सरलता और गति लिए हुए है।

ठुकरा दो या प्यार करो।

देव! तुम्हारे कई उपासक

कई ढंग से आते हैं।

सेवा में बहुमूल्य भेंट वे

कई रंग की लाते हैं॥

धूमधाम से साजबाज से

मंदिर में वे आते हैं।

मुक्तामणि बहुमूल्य वस्तुएँ

लाकर तुम्हें चढ़ाते हें॥

मैं ही हूँ गरीबिनी ऐसी

जो कुछ साथ नहीं लायी।

फिर भी साहस कर मंदिर में

पूजा करने चली आयी॥

धूप दीप नैवेद्य नहीं है

झाँकी का शृंगार नहीं।

हाय! गले में पहनाने को

फूलों का भी हार नहीं॥

मैं कैसे स्तुति करूँ तुम्हारी?

है स्वर में माधुर्य नहीं।

मन का भाव प्रकट करने को

बाणी में चातुर्य नहीं॥

नहीं दान है, नहीं दक्षिणा

खाली हाथ चली आयी।

पूजा की विधि नहीं जानती

फिर भी नाथ! चली आयी॥

 

सप्रसंग व्याख्या

प्रसंग

प्रस्तुत पद्यांश श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता ‘ठुकरा दो या प्यार करो’ से उद्धृत है। इस कविता में कवियत्री ने आडंबर और विधि-विधान से रहित शुद्ध भक्ति के महत्व को दर्शाया है। वह स्वयं को एक गरीब भक्त के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिसके पास भगवान को चढ़ाने के लिए कोई भौतिक वस्तु या पूजा की विधि का ज्ञान नहीं है, फिर भी वह केवल अपनी निष्कपट श्रद्धा के बल पर प्रभु के पास चली आई हैं।

व्याख्या  –

“देव! तुम्हारे कई उपासक, कई ढंग से आते हैं।

सेवा में बहुमूल्य भेंट वे, कई रंग की लाते हैं॥”

हे प्रभु! आपकी उपासना करने वाले कई भक्त हैं, और वे आपको प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग ढंग अपनाते हैं। वे आपकी सेवा में चढ़ाने के लिए बहुमूल्य भेंटें और कई तरह की रंगीन वस्तुएँ लेकर आते हैं।

“धूमधाम से साजबाज से, मंदिर में वे आते हैं।

मुक्तामणि बहुमूल्य वस्तुएँ, लाकर तुम्हें चढ़ाते हें॥”

आपके ये भक्त बड़े ही उत्साह और शोरगुल (धूमधाम से साजबाज) के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं। वे मोतियों और रत्नों (मुक्तामणि) जैसी अत्यधिक कीमती चीजें तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ लाकर आपको समर्पित करते हैं।

“मैं ही हूँ गरीबिनी ऐसी, जो कुछ साथ नहीं लायी।

फिर भी साहस कर मंदिर में, पूजा करने चली आयी॥”

उन सभी उपासकों में मैं ही एक अभागी (गरीबिनी) हूँ, जो अपने साथ भेंट के रूप में कुछ भी नहीं ला सकी हूँ। इसके बावजूद, केवल साहस करके, मैं आपके मंदिर में आपकी पूजा करने चली आई हूँ। (यह साहस उनकी आंतरिक भक्ति को दर्शाता है)।

“धूप दीप नैवेद्य नहीं है, झाँकी का शृंगार नहीं।

हाय! गले में पहनाने को, फूलों का भी हार नहीं॥”

मेरे पास पूजन सामग्री के रूप में धूप, दीप या भोग (नैवेद्य) नहीं है। आपके दर्शन (झाँकी) के लिए सजाने हेतु शृंगार सामग्री भी नहीं है। विडंबना यह है कि मेरे पास आपके गले में पहनाने के लिए फूलों का एक साधारण हार तक भी नहीं है।

“मैं कैसे स्तुति करूँ तुम्हारी? है स्वर में माधुर्य नहीं।

मन का भाव प्रकट करने को, बाणी में चातुर्य नहीं॥”

मेरी यह भी चिंता है कि मैं आपकी स्तुति (प्रशंसा) कैसे करूँ, क्योंकि मेरे स्वर में मधुरता (माधुर्य) नहीं है। और मेरे पास अपने मन के गहरे भक्ति भाव को सही ढंग से व्यक्त करने के लिए वाणी की कुशलता (चातुर्य) भी नहीं है।

“नहीं दान है, नहीं दक्षिणा, खाली हाथ चली आयी।

पूजा की विधि नहीं जानती, फिर भी नाथ! चली आयी॥”

मेरे पास पूजा के लिए दान देने को कुछ नहीं है, और न ही पुरोहित को देने के लिए दक्षिणा है। मैं खाली हाथ आपके पास आई हूँ, और मैं पूजा के सही नियम (विधि) भी नहीं जानती। हे प्रभु! इन सब कमियों के बावजूद मैं आपके पास चली आई हूँ।

“ठुकरा दो या प्यार करो।”

इसलिए हे नाथ! मेरी पूजा में चाहे जितने भी भौतिक अभाव हों, मेरी एकमात्र विनती है कि आप मेरी निष्कपट भावना को देखकर या तो प्रेम से स्वीकार कर लें (प्यार करो), या मेरे इन सारे अभावों के कारण मुझे अस्वीकार कर दें (ठुकरा दो)।

विशेष

  1. रस – सम्पूर्ण कविता में शांत रस और भक्ति रस का सुंदर समन्वय है।
  2. शैली – भाषा अत्यंत सरल, सहज और भावानुरूप है। शैली आत्म-निवेदन की है।
  3. अलंकार – “धूप दीप नैवेद्य”, “नहीं दान है, नहीं दक्षिणा” आदि में अनुप्रास अलंकार है।
  4. भाव – कवियत्री ने स्पष्ट किया है कि सच्ची भक्ति दिखावे, विधि-विधान या धन-संपदा की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसका आधार केवल शुद्ध हृदय का भाव और निस्वार्थ प्रेम होता है।

 

कठिन शब्दार्थ

Hindi (हिंदी)

Tamil (தமிழ்)

English

ओजस्वी (Ojasvi)

தெம்பான (Thembana)

Vigorous, Energetic

संकलित (Sankalit)

திரட்டப்பட்ட (Thirattappatta)

Compiled, Collected

विभाजित (Vibhajit)

பிரிக்கப்பட்ட (Pirikkappatta)

Divided, Classified

अनुप्राणित (Anupranit)

ஊட்டப்பட்ட (Uttappatta)

Inspired, Animated

वात्सल्य (Vatsalya)

அன்பு/தாய்மை பாசம் (Anbu/Thaaimai Paasam)

Affection, Parental Love

मार्मिक (Marmik)

உணர்ச்சிகரமான (Unarchikaramana)

Heart-touching, Poignant

उपासक (Upasak)

பக்தர் (Bhakthar)

Devotee, Worshipper

भेंट (Bhent)

காணிக்கை (Kaannikkai)

Offering, Gift

मुक्तामणि (Muktamani)

முத்து மணி (Muthu Mani)

Pearl

गरीबिनी (Gareebini)

ஏழ்மை குடியிருப்பாள் (Elmai Kudiiruppaal)

Poor Woman

धूप दीप (Dhoop Deep)

சாம்பிராணி மற்றும் விளக்கு (Saambiraani & Vilakku)

Incense and Lamp

नैवेद्य (Naivedya)

பிரசாதம் (Prasaatham)

Food Offering (Prasadam)

झाँकी (Jhaanki)

அலங்கார காட்சி (Alangaara Kaatchi)

Decorative Display (in a procession)

स्तुति (Stuti)

புகழ் பாடல் (Pugazh Paadal)

Praise, Hymn

माधुर्य (Maadhurya)

இனிமை (Inimai)

Sweetness, Melody

बाणी (Bani)

பேச்சு (Pechu)

Speech, Words

चातुर्य (Chaturya)

திறமை/விறுவிறுப்பு (Thiramai/Viruviruppu)

Skill, Cleverness

दक्षिणा (Dakshina)

கொடை (Kodai)

Monetary Offering, Fee

विधि (Vidhi)

முறை (Murai)

Method, Ritual

नाथ (Nath)

ஆண்டவன்/கடவுள் (Aandavan/Kadavul)

Lord, Master

I निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर पूरे वाक्यों में लिखिए।

  1. सुभद्राकुमारी भगवान से क्या कहती है?

उत्तर – सुभद्राकुमारी भगवान से कहती है कि वह चाहे तो उन्हें ठुकरा दें या प्यार करें, क्योंकि वह पूजा के लिए खाली हाथ आई हैं और कोई विधि नहीं जानतीं।

  1. कवियत्री की दशा क्या है?

उत्तर – कवियत्री की दशा यह है कि वह एक गरीबिनी हैं, जो मंदिर में पूजा करने तो चली आई हैं, पर उनके पास भगवान को चढ़ाने के लिए कोई बहुमूल्य भेंट या सामग्री नहीं है।

  1. कवियत्री का स्वर में क्या नहीं था?

उत्तर – कवियत्री के स्वर में भगवान की स्तुति करने के लिए माधुर्य नहीं था।

 

II निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर तीन वाक्यों में लिखिए।

  1. देव के उपासक मंदिर में कैसे आते हैं?

उत्तर – देव के अन्य उपासक धूमधाम और साज-बाज के साथ मंदिर में आते हैं। वे अपने साथ सेवा में चढ़ाने के लिए कई रंग की बहुमूल्य भेंटें लाते हैं। वे मुक्तामणि जैसी बहुमूल्य वस्तुएँ लाकर भगवान को चढ़ाते हैं।

  1. कवियत्री अपना परिचय कैसे देती है?

उत्तर – कवियत्री अपना परिचय एक गरीबिनी के रूप में देती है, जो भगवान की सेवा में चढ़ाने के लिए अपने साथ कुछ भी नहीं लाई है। वह कहती है कि वह खाली हाथ, साहस करके, केवल अपनी भक्ति की भावना लेकर मंदिर में पूजा करने चली आई है।

  1. कवियत्री भगवान से क्या अपेक्षा रखती है?

उत्तर – कवियत्री भगवान से भौतिक चीज़ों की अपेक्षा नहीं रखती। वह केवल यह अपेक्षा रखती है कि भगवान उनके निस्वार्थ भाव को देखें और या तो उन्हें स्वीकार कर लें (प्यार करें) या उनकी अपूर्ण पूजा के कारण उन्हें ठुकरा दें। वह अपनी वाणी की कमी के बावजूद अपने भावों को स्वीकारने की अपेक्षा रखती है।

  1. देव के उपासक पूजा के लिए क्या-क्या लाते है?

उत्तर – देव के उपासक पूजा के लिए बहुमूल्य भेंटें लाते हैं। वे कई रंग की वस्तुएँ, मुक्तामणि (मोती और रत्न) तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ लाकर भगवान को चढ़ाते हैं। वे धूमधाम और साज-बाज के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं।

  1. कवियत्री की भावना और अनुभूति का परिचय लिखिए?

उत्तर – कवियत्री की भावना शुद्ध भक्ति और आत्म-समर्पण की है। वह महसूस करती है कि वह एक गरीब भक्त है, जिसके पास धूप, दीप, नैवेद्य, फूलों का हार या वाणी का चातुर्य नहीं है। उसकी अनुभूति यह है कि भले ही वह पूजा की विधि न जानती हो और उसके पास देने के लिए कुछ न हो, फिर भी वह केवल अपनी निष्कपट श्रद्धा के बल पर भगवान के पास चली आई है।

 

III. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर पाँच वाक्यों में लिखिए।

  1. देव के उपासक भगवान को खुश करने किन-किन विधियों का अपनाते है?

उत्तर – देव के अन्य उपासक भगवान को खुश करने के लिए बाहरी आडम्बर और बहुमूल्य भेंटों की विधि अपनाते हैं। वे धूमधाम और साज-बाज के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं। वे अपनी सेवा में मुक्तामणि जैसी बहुमूल्य वस्तुएँ और कई रंग की भेंटें लाते हैं, जिन्हें वे भगवान को चढ़ाते हैं। वे धूप, दीप, नैवेद्य और झाँकी का शृंगार आदि समस्त विधि-विधानों का पालन करते हैं। इस प्रकार, वे भौतिक संपन्नता और विधि-विधानों के माध्यम से भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।

  1. “ठुकरा दो या प्यार करो” कविता का सारांश लिखिए।

उत्तर – ‘ठुकरा दो या प्यार करो’ कविता में कवियत्री सुभद्राकुमारी चौहान ने आडंबर रहित सच्ची भक्ति के महत्व को दर्शाया है। कवियत्री कहती हैं कि भगवान के अन्य उपासक बहुत धूमधाम, साज-बाज और बहुमूल्य भेंटें लेकर मंदिर आते हैं और पूजा के सभी विधि-विधानों का पालन करते हैं। इसके विपरीत, कवियत्री स्वयं को गरीबिनी बताते हुए कहती हैं कि वह खाली हाथ आई हैं। उनके पास न धूप, दीप, नैवेद्य है, न फूलों का हार है, न ही वाणी में माधुर्य या चातुर्य है और न ही वह पूजा की विधि जानती हैं। अपनी इस निःसहाय अवस्था के बावजूद, वह केवल साहस और शुद्ध भाव के बल पर प्रभु के पास चली आई हैं। अंत में, वह प्रभु से विनती करती हैं कि वे उनकी इस अधूरी, पर निष्कपट भक्ति को या तो प्रेम से स्वीकार करें या ठुकरा दें। यह कविता आंतरिक श्रद्धा को बाहरी दिखावे से श्रेष्ठ सिद्ध करती है।

 

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

  1. सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म कहाँ हुआ था?
    (a) झाँसी
    (b) निहालपुर, प्रयाग
    (c) रीवाँ
    (d) इलाहाबाद शहर
  2. उन्होंने अपनी शिक्षा क्यों छोड़ दी?
    (a) आर्थिक समस्याएँ
    (b) असहयोग आंदोलन का प्रभाव
    (c) बीमारी
    (d) शादी
  3. सुभद्रा कुमारी चौहान की सबसे लोकप्रिय राष्ट्रवादी कविता कौन-सी है?
    (a) वीरों का कैसा हो बसंत
    (b) यह कदम्ब का पेड़
    (c) झाँसी की रानी
    (d) खूब लड़ी मर्दानी
  4. उनकी कविताओं के दो संकलन कौन-से हैं?
    (a) साखी और सबद
    (b) त्रिधारा और मुकुल
    (c) गीतांजलि और मेघदूत
    (d) रश्मिरथी और परिमल
  5. ठुकरा दो या प्यार करो” कविता में वक्ता कौन है?
    (a) एक राजकुमारी
    (b) एक समृद्ध व्यापारी
    (c) एक गरीब महिला
    (d) एक पुजारी
  6. कविता में मुक्तामणिकिसका प्रतीक है?
    (a) सादगी
    (b) कीमती भेंट
    (c) प्रार्थना
    (d) आशीर्वाद
  7. मन का भाव प्रकट करने को बाणी में चातुर्य नहीं” – इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
    (a) उसके पास बोलने का हुनर नहीं है।
    (b) उसकी आवाज बहुत तेज है।
    (c) वह बहुत चालाक है।
    (d) वह बहुत अच्छा गा सकती है।
  8. वात्सल्यभाव का संबंध किससे है?
    (a) देशभक्ति
    (b) पति-पत्नी का प्रेम
    (c) मित्रता
    (d) माता-पिता और बच्चों का सहज प्रेम
  9. नाथशब्द का क्या अर्थ है?
    (a) भाई
    (b) स्वामी, ईश्वर
    (c) राजा
    (d) गुरु
  10. कवयित्री के अनुसार, अन्य भक्त कैसे आते हैं?
    (a) चुपचाप और अकेले
    (b) धूमधाम और साज-सज्जा के साथ
    (c) खाली हाथ
    (d) उदास होकर
  11. ओजस्वीकविताओं का क्या लक्षण है?
    (a) वे दुखद हैं।
    (b) वे प्रेम से भरी हैं।
    (c) वे ऊर्जा और जोश से भरी हैं।
    (d) वे हास्यपूर्ण हैं।
  12. दक्षिणासे क्या तात्पर्य है?
    (a) एक प्रकार का भोजन
    (b) एक प्रकार का गीत
    (c) पूजा के बाद दिया जाने वाला धन
    (d) एक प्रकार का वस्त्र
  13. कवयित्री के पास पूजा के लिए क्या नहीं है?
    (a) विश्वास
    (b) साहस
    (c) फूलों का हार
    (d) समय
  14. सुभद्रा कुमारी चौहान की भाषा-शैली की क्या विशेषता है?
    (a) जटिल और दार्शनिक
    (b) सरल और गतिमय
    (c) उबाऊ और नीरस
    (d) कठिन और अलंकृत
  15. अनुप्राणितका English में क्या अर्थ है?
    (a) Discouraged
    (b) Inspired
    (c) Written
    (d) Forgotten
  16. स्तुतिका Tamil अर्थ क्या है?
    (a) நன்றி (Nandri)
    (b) புகழ் பாடல் (Pugazh Paadal)
    (c) கோபம் (Kopam)
    (d) பயம் (Bayam)
  17. कविता में गरीबिनीशब्द किसकी ओर संकेत करता है?
    (a) धन की कमी
    (b) भक्ति की कमी
    (c) समय की कमी
    (d) ज्ञान की कमी
  18. कवयित्री की पूजा की क्या विशेषता है?
    (a) यह सबसे महंगी है।
    (b) यह सबसे लंबी है।
    (c) यह निस्वार्थ और सहज है।
    (d) यह सबको दिखाने के लिए है।
  19. मार्मिक अभिव्यक्तिसे क्या आशय है?
    (a) हास्यपूर्ण अभिव्यक्ति
    (b) हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति
    (c) क्रोधित अभिव्यक्ति
    (d) उदासीन अभिव्यक्ति
  20. इस कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
    (a) ईश्वर भक्ति का बाह्य आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे भाव को महत्व देता है।
    (b) केवल अमीर लोग ही ईश्वर की पूजा कर सकते हैं।
    (c) पूजा का एक निश्चित तरीका होना चाहिए।
    (d) ईश्वर केवल मंदिर में रहते हैं।

 

Answer Key (उत्तर कुंजी)

  1. (b) निहालपुर, प्रयाग
  2. (b) असहयोग आंदोलन का प्रभाव
  3. (c) झाँसी की रानी
  4. (b) त्रिधारा और मुकुल
  5. (c) एक गरीब महिला
  6. (b) कीमती भेंट
  7. (a) उसके पास बोलने का हुनर नहीं है।
  8. (d) माता-पिता और बच्चों का सहज प्रेम
  9. (b) स्वामी, ईश्वर
  10. (b) धूमधाम और साज-सज्जा के साथ
  11. (c) वे ऊर्जा और जोश से भरी हैं।
  12. (c) पूजा के बाद दिया जाने वाला धन
  13. (c) फूलों का हार
  14. (b) सरल और गतिमय
  15. (b) Inspired
  16. (b) புகழ் பாடல் (Pugazh Paadal)
  17. (a) धन की कमी
  18. (c) यह निस्वार्थ और सहज है।
  19. (b) हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति
  20. (a) ईश्वर भक्ति का बाह्य आडंबर नहीं, बल्कि सच्चे भाव को महत्व देता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
    उत्तर – सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1905 में प्रयाग जिले के निहालपुर गाँव में हुआ था।
  2. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
    उत्तर – सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी शिक्षा प्रयाग में ही प्राप्त की।
  3. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान ने शिक्षा अधूरी क्यों छोड़ दी?
    उत्तर – सुभद्रा कुमारी चौहान ने सन् 1921 में असहयोग आंदोलन के प्रभाव से शिक्षा अधूरी छोड़ दी।
  4. प्रश्न – स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण उन्हें क्या सहना पड़ा?
    उत्तर – स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण सुभद्रा कुमारी चौहान को कई बार जेल जाना पड़ा।
  5. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता कौन-सी है?
    उत्तर – सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘झाँसी की रानी’ है।
  6. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएँ किन संग्रहों में संकलित हैं?
    उत्तर – उनकी कविताएँ ‘त्रिधारा’ और ‘मुकुल’ नामक संग्रहों में संकलित हैं।
  7. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं को भाव की दृष्टि से कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है?
    उत्तर – उनकी कविताओं को भाव की दृष्टि से दो वर्गों में बाँटा जा सकता है।
  8. प्रश्न – पहले वर्ग की कविताएँ किन भावों से प्रेरित हैं?
    उत्तर – पहले वर्ग की कविताएँ राष्ट्रप्रेम और स्वतंत्रता संग्राम के वीरों से प्रेरित हैं।
  9. प्रश्न – दूसरे वर्ग की कविताओं में कौन-से भाव प्रकट होते हैं?
    उत्तर – दूसरे वर्ग की कविताओं में पति-प्रेम और सन्तान के प्रति वात्सल्य की मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है।
  10. प्रश्न – सुभद्रा कुमारी चौहान की भाषा-शैली की क्या विशेषता है?
    उत्तर – उनकी भाषा-शैली भावों के अनुरूप सरल और गतिशील है।
  11. प्रश्न – कवयित्री ने देवता से क्या निवेदन किया है?
    उत्तर – कवयित्री ने देवता से कहा है कि या तो उन्हें ठुकरा दो या प्यार करो।
  12. प्रश्न – देवता की सेवा में अन्य उपासक किस प्रकार आते हैं?
    उत्तर – अन्य उपासक देवता की सेवा में बहुमूल्य भेंट और अनेक रंगों की चीजें लेकर आते हैं।
  13. प्रश्न – कवयित्री ने स्वयं को किस रूप में प्रस्तुत किया है?
    उत्तर – कवयित्री ने स्वयं को एक गरीबिनी और निःसंपत्ति उपासक के रूप में प्रस्तुत किया है।
  14. प्रश्न – कवयित्री मंदिर में क्या लेकर नहीं आई है?
    उत्तर – कवयित्री मंदिर में कोई भी वस्तु, दान, दक्षिणा, धूप, दीप या हार लेकर नहीं आई है।
  15. प्रश्न – कवयित्री के पास पूजा की कौन-कौन सी वस्तुएँ नहीं हैं?
    उत्तर – कवयित्री के पास धूप, दीप, नैवेद्य, शृंगार और फूलों का हार नहीं है।
  16. प्रश्न – कवयित्री अपनी स्तुति क्यों नहीं कर पा रही है?
    उत्तर – कवयित्री कहती हैं कि उनके स्वर में माधुर्य नहीं है और वाणी में चातुर्य नहीं है, इसलिए वे स्तुति नहीं कर पा रही हैं।
  17. प्रश्न – कवयित्री ने अपने मन के भाव प्रकट करने में असमर्थता क्यों जताई है?
    उत्तर – कवयित्री ने कहा है कि वाणी में चातुर्य न होने के कारण वे मन के भाव प्रकट नहीं कर पा रही हैं।
  18. प्रश्न – कवयित्री देवता के सामने किस भाव से उपस्थित हुई हैं?
    उत्तर – कवयित्री देवता के सामने निःस्वार्थ, विनम्र और सच्चे भाव से उपस्थित हुई हैं।
  19. प्रश्न – कवयित्री ने अपनी पूजा में क्या प्रमुखता दी है—सामग्री को या भावना को?
    उत्तर – कवयित्री ने सामग्री की अपेक्षा भावना को प्रमुखता दी है।
  20. प्रश्न – इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
    उत्तर – इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर की सच्ची उपासना बाहरी भेंटों या आडंबरों से नहीं, बल्कि सच्चे हृदय और निःस्वार्थ भावना से की जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म कहाँ हुआ था और उन्होंने कहाँ शिक्षा ग्रहण की?

उत्तर – सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म सन् 1905 में प्रयाग जिले के निहालपुर गाँव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रयाग में ही ग्रहण की, जहाँ उनकी काव्य-रचना की प्रवृत्ति विद्यार्थी-काल से ही शुरू हो गई थी।

  1. प्रश्न – सुभद्राकुमारी चौहान ने अपनी शिक्षा क्यों और कब अधूरी छोड़ दी?

उत्तर – उन्होंने सन् 1921 में असहयोग आन्दोलन के प्रभाव के कारण अपनी शिक्षा अधूरी छोड़ दी। वह राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के प्रति समर्पित थीं, इसलिए उन्होंने शिक्षा त्यागकर सक्रिय रूप से राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया।

  1. प्रश्न – स्वाधीनता संग्राम में कवियत्री की क्या भूमिका रही?

उत्तर – सुभद्राकुमारी चौहान ने स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। अपनी भागीदारी और राष्ट्र-प्रेम की ओजस्वी कविताओं के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इसी कारण उन्हें भारत भर में लोकप्रियता मिली।

  1. प्रश्न – सुभद्राकुमारी चौहान की कविताएँ किन दो संकलनों में संकलित हैं?

उत्तर – उनकी कविताएँ मुख्यतः दो संग्रहों में संकलित हैं – ‘त्रिधारा’ और ‘मुकुल’। ये संग्रह उनकी काव्य प्रतिभा को दर्शाते हैं, जिसमें राष्ट्र-प्रेम और पारिवारिक जीवन के भावों का समन्वय है।

  1. प्रश्न – भाव की दृष्टि से कवियत्री की कविताओं को किन दो वर्गों में विभाजित किया जाता है?

उत्तर – उनकी कविताओं को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है – प्रथम वर्ग में राष्ट्र-प्रेम की कविताएँ, और दूसरे वर्ग में पारिवारिक जीवन (पति-प्रेम और वात्सल्य) से प्रेरित कविताएँ रखी गई हैं।

  1. प्रश्न – कवियत्री ने अपनी किस कविता के कारण अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त की?

उत्तर – कवियत्री ने अपनी ओजस्वी कविताओं के कारण भारत भर में लोकप्रियता प्राप्त की। विशेष रूप से, उनकी ‘झाँसी की रानी’ नामक कविता जनता के बीच बहुत लोकप्रिय हुई, जिसने उन्हें एक राष्ट्रीय कवियत्री के रूप में स्थापित किया।

  1. प्रश्न – कवियत्री के अनुसार, देव के अन्य उपासक मंदिर में किस प्रकार आते हैं और क्या लाते हैं?

उत्तर – देव के अन्य उपासक मंदिर में धूमधाम और साज-बाज के साथ आते हैं। वे अपनी सेवा में मुक्तामणि तथा अन्य बहुमूल्य भेंटें लाते हैं, जिन्हें वे कई रंग की वस्तुओं के रूप में भगवान को चढ़ाते हैं।

  1. प्रश्न – कवियत्री ने खुद को ‘गरीबिनी’ क्यों कहा है?

उत्तर – कवियत्री ने खुद को ‘गरीबिनी’ इसलिए कहा है क्योंकि उनके पास अन्य उपासकों की तरह बहुमूल्य वस्तुएँ, धूप, दीप, नैवेद्य या फूलों का हार नहीं है। वह भौतिक रूप से खाली हाथ मंदिर में पूजा करने आई हैं।

  1. प्रश्न – कवियत्री के पास भगवान को अर्पित करने के लिए किन वस्तुओं का अभाव है?

उत्तर – कवियत्री के पास भगवान को अर्पित करने के लिए धूप, दीप, नैवेद्य का अभाव है। यहाँ तक कि उनके पास झाँकी के लिए शृंगार और गले में पहनाने के लिए फूलों का हार तक नहीं है, जो उनकी गरीबी और सादगी को दर्शाता है।

  1. प्रश्न – कवियत्री ने अपनी स्तुति में किन कमियों का उल्लेख किया है?

उत्तर – कवियत्री अपनी स्तुति में दो कमियों का उल्लेख करती हैं – पहला, उनके स्वर में माधुर्य नहीं है। दूसरा, उनके मन के भावों को प्रकट करने के लिए उनकी बाणी में चातुर्य (कुशलता) नहीं है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सुभद्राकुमारी चौहान के साहित्यिक जीवन और उनकी कविताओं के विभाजन पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – सुभद्राकुमारी चौहान में काव्य-रचना की प्रवृत्ति विद्यार्थी-काल से थी। उनकी कविताएँ ‘त्रिधारा’ और ‘मुकुल’ में संकलित हैं। भाव की दृष्टि से उनकी कविताओं को दो वर्गों में बाँटा गया है – पहला, राष्ट्र-प्रेम  और दूसरा, पारिवारिक। उनकी भाषा शैली भावों के अनुरूप सरल और गतिशील है।

  1. प्रश्न – ‘ठुकरा दो या प्यार करो’ कविता में कवियत्री किस विरोधाभास को उजागर करती हैं और वह स्वयं को किस रूप में प्रस्तुत करती हैं?

उत्तर – कविता में कवियत्री बाहरी आडंबर और निष्कपट भक्ति के बीच के विरोधाभास को उजागर करती हैं। जहाँ अन्य उपासक धन और विधि से भगवान को खुश करते हैं, वहीं कवियत्री स्वयं को खाली हाथ आई हुई गरीबिनी के रूप में प्रस्तुत करती हैं। वह जानती हैं कि उनके पास न दान है, न दक्षिणा, और न ही कोई विधि, पर फिर भी वह केवल साहस और शुद्ध भाव से प्रभु के पास चली आई हैं।

  1. प्रश्न – कवियत्री अपनी पूजा की कमियों को स्वीकार करते हुए भी भगवान से क्यों अपेक्षा रखती हैं?

उत्तर – कवियत्री स्पष्ट रूप से स्वीकार करती हैं कि उनके पास भौतिक चढ़ावे और वाणी का माधुर्य या चातुर्य नहीं है। इन कमियों के बावजूद, वह यह अपेक्षा रखती हैं कि भगवान उनके निर्दोष और सच्चे मन के भाव को स्वीकार करेंगे। वह जानती हैं कि सच्ची भक्ति विधि-विधान या दान-दक्षिणा में नहीं, बल्कि आत्म-समर्पण में होती है, इसलिए वह प्रभु से ठुकराने या प्यार करने का निर्णय उनके भावों पर छोड़ने का आग्रह करती हैं।

  1. प्रश्न – कवियत्री ने अपनी भक्ति को कैसे परिभाषित किया है, जो अन्य उपासकों से अलग है?

उत्तर – कवियत्री की भक्ति सरल, निस्वार्थ और आडम्बर रहित है। अन्य उपासक जहाँ बहुमूल्य वस्तुएँ और जटिल विधि-विधान लाते हैं, वहीं कवियत्री केवल साहस और खाली हाथ आई हैं। उनकी भक्ति का आधार बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक श्रद्धा है। वह अपनी बाणी की कमी को भी स्वीकार करती हैं, जिससे सिद्ध होता है कि उनकी पूजा का मूल्य भावना है, न कि भौतिक सामग्री या प्रदर्शन।

  1. प्रश्न – ‘ठुकरा दो या प्यार करो’ पंक्ति द्वारा कवियत्री क्या भाव व्यक्त करना चाहती हैं?

उत्तर – इस पंक्ति के द्वारा कवियत्री पूर्ण आत्म-समर्पण का भाव व्यक्त करना चाहती हैं। वह जानती हैं कि उनकी पूजा भौतिक रूप से अपूर्ण है, इसलिए वह भगवान के सामने खुद को निर्णय के लिए समर्पित कर देती हैं। इस पंक्ति का आशय यह है कि या तो प्रभु उनकी गरीबी और अपूर्णता के कारण उन्हें अस्वीकार कर दें, या केवल उनके शुद्ध भाव और साहस के कारण उन्हें स्वीकार कर लें ।

 

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