Chalna Hamara Kaam Hai (Kavita) – Shiv Mangal Singh ‘Suman’, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution,

कविता का सारांश

पद 1 – लक्ष्य प्राप्ति तक अविराम गति

गति प्रबल पैरों में भरी, फिर क्यों रहूँ दर-दर खड़ा?

जब आज मेरे सामने, है रास्ता इतना पड़ा।

जब तक न मंज़िल पा सकूँ, तब तक मुझे न विराम है।

चलना हमारा काम है।

 

व्याख्या – कवि कहते हैं कि जब ईश्वर ने हमारे पैरों में आगे बढ़ने की असीम शक्ति दी है, तो हमें रुकना नहीं चाहिए। हमारे सामने संभावनाओं का अनंत रास्ता खुला है। कवि का संकल्प है कि जब तक वह अपने अंतिम लक्ष्य (मंजिल) तक नहीं पहुँच जाते, तब तक वे विश्राम नहीं करेंगे। रुकना हार है, और निरंतर बढ़ना ही जीवन का असली धर्म है।

 

पद 2 – सहयात्रियों का साथ और परिचय

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया, कुछ बोझ अपना बँट गया,

अच्छा हुआ तुम मिल गए, कुछ रास्ता ही कट गया।

क्या राह में परिचय कहूँ, राही हमारा नाम है।

चलना हमारा काम है।

व्याख्या – जीवन एक लंबी यात्रा है जहाँ कई लोग मिलते हैं। एक-दूसरे से सुख-दुख साझा करने से मन का बोझ हल्का हो जाता है। कवि कहते हैं कि सहयात्रियों के मिलने से कठिन रास्ता भी सरल हो जाता है। यहाँ किसी विशिष्ट परिचय की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस संसार में हम सबकी एक ही पहचान है—कि हम सभी ‘राही’ (यात्री) हैं और आगे बढ़ना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है।

 

पद 3 – सुख-दुख का संतुलन

जीवन अपूर्ण लिए हुए, पाता कभी खोता कभी,

आशा-निराशा से घिरा, हँसता कभी, रोता कभी।

गति-मति’ न हो अवरुद्ध इसका ध्यान आठों याम है।

चलना हमारा काम है।

व्याख्या – कवि स्वीकार करते हैं कि जीवन पूर्ण नहीं है। यहाँ लाभ-हानि, आशा-निराशा और हँसी-रुदन का क्रम चलता रहता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिस्थितियों के प्रभाव में आकर हमारी ‘गति’ (Physical progress) और हमारी ‘मति’ (Intellect) रुकनी नहीं चाहिए। हमें आठों पहर (चौबीसों घंटे) इसी बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम जड़ न हो जाएँ।

 

पद 4 – नियति को दोष न देना

इस विशद विश्व प्रवाह में, किसको नहीं बहना पड़ा,

सुख-दुख हमारी ही तरह, किसको नहीं सहना पड़ा?

फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ, मुझ पर विधाता वाम है।

चलना हमारा काम है।

व्याख्या – संसार के इस विशाल प्रवाह में हर प्राणी को समय के साथ बहना पड़ता है। सुख और दुख केवल हमारे साथ नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन में आते हैं। इसलिए कवि कहते हैं कि यह शिकायत करना बेकार है कि ‘भाग्य मेरे खिलाफ है’। जो सबके साथ हो रहा है, उसे स्वीकार कर आगे बढ़ना ही वीरता है।

 

पद 5 – बाधाओं में भी अडिग रहना

मैं पूर्णता की खोज में, दर-दर भटकता ही रहा,

प्रत्येक पग पर कुछ-न-कुछ, रोड़ा अटकता ही रहा।

पर हो निराशा क्यों मुझे? जीवन इसी का नाम है।

चलना हमारा काम है।

व्याख्या – कवि सत्य को स्वीकारते हैं कि पूर्णता की तलाश में उन्हें दर-दर भटकना पड़ा और हर कदम पर मुश्किलों के ‘रोड़े’ अर्थात् बाधाएँ आए। लेकिन वे निराश नहीं हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि संघर्ष ही जीवन की असली परिभाषा है। बाधाओं के बिना जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है।

 

पद 6 – सफलता का रहस्य—अविराम प्रयास

कुछ साथ में चलते रहे, कुछ बीच से ही फिर गए,

पर गति न जीवन की रुकी, जो गिर गए सो गिर गए।

चलता रहे हरदम उसी की, सफलता अभिराम है।

चलना हमारा काम है।

व्याख्या – यात्रा के दौरान कुछ साथी अंत तक साथ देते हैं, तो कुछ बीच में ही हार मानकर लौट जाते हैं। कुछ मुश्किलों से टकराकर गिर जाते हैं। लेकिन जो गिर गए या रुक गए, उनके कारण जीवन की गति नहीं रुकती। अंततः सुंदर सफलता केवल उसी को प्राप्त होती है जो हर हाल में बिना रुके चलता रहता है।

कठिन शब्द और उनके अर्थ

 गति (Gati) – रफ़्तार, चाल – Speed / Pace

 प्रबल (Prabal) – बहुत शक्तिशाली, तीव्र – Powerful / Intense

 विराम (Viram) – ठहराव, रुकना, आराम – Rest / Halt / Pause

 मंज़िल (Manzil) – लक्ष्य, गंतव्य – Goal / Destination

 राही (Raahi) – यात्री, पथिक – Traveler / Wayfarer

 अपूर्ण (Apoorn) – जो पूरा न हो, अधूरा – Incomplete / Imperfect

 अवरुद्ध (Avaruddh) – रुका हुआ, बाधित – Blocked / Obstructed

 मति (Mati) – बुद्धि, विचार – Intellect / Mind

 आठों याम (Aatho Yaam) – चौबीसों घंटे, हर समय – Around the clock / All the time

 विशद (Vishad) – अत्यंत विशाल, बड़ा – Vast / Enormous

 प्रवाह (Pravah) – बहाव, धारा – Flow / Current

 विधाता (Vidhata) – भाग्य लिखने वाला, ईश्वर – Creator / Destiny / God

 वाम (Vaam) – प्रतिकूल, उल्टा, खिलाफ – Adverse / Against

 व्यर्थ (Vyarth) – बेकार, फिजूल – Useless / Vain

 रोड़ा (Roda) – बाधा, पत्थर, रुकावट – Obstacle / Hurdle

 अभिराम (Abhiram) – अत्यंत सुंदर, मनमोहक – Beautiful / Pleasing

 

कुछ विशेष वाक्यांशों के अर्थ (Contextual Meanings)

दर – दर खड़ा रहना – निठल्ला या बिना लक्ष्य के भटकना (To stand aimlessly).

बोझ बँट जाना – सुख – दुख साझा करना (To share the burden of emotions).

विधाता वाम होना – भाग्य का साथ न देना (Luck being unfavorable).

आठों याम – ‘याम’ या ‘प्रहर’ समय की एक इकाई है। एक दिन – रात में 8 प्रहर होते हैं, इसलिए आठों याम का अर्थ है—निरंतर या हमेशा।

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

प्रबल, मंज़िल, बँट, अपूर्ण, आशा – निराशा, अवरुद्ध, विशद, प्रवाह, व्यर्थ, फिरूँ, पूर्णता, प्रत्येक, अभिराम

शब्द (Word) – अंग्रेजी में उच्चारण (Pronunciation in English)

प्रबल – Pra-bal (प्र-बल)

मंज़िल – Man-zil (मन्-ज़िल)

बँट – Bant (बं-ट – इसमें ‘n’ का हल्का नासिक्य स्वर है)

अपूर्ण – A-poorn (अ-पूर्ण)

आशा – Aa-sha (आ-शा)

निराशा – Ni-raa-sha (नि-रा-शा)

अवरुद्ध – Av-ruddh (अव्-रुद्ध)

विशद – Vi-shad (वि-शद)

प्रवाह – Pra-vaah (प्र-वाह)

व्यर्थ – Vyarth (व्यर्थ)

फिरूँ – Phi-roon (फि-रूँ – ‘n’ का उच्चारण नाक से होगा)

पूर्णता – Poorn-ta (पूर्ण-ता)

प्रत्येक – Prat-yek (प्रत्-येक)

अभिराम – Abhi-raam (अभि-राम)



  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए –

(क) इस कविता में कवि ने जीवन का लक्ष्य क्या बताया है?

उत्तर – इस कविता में कवि ने अपनी ‘मंज़िल’ या अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर गतिशील रहना ही जीवन का लक्ष्य बताया है।

(ख) कविता में कवि अपना परिचय किस रूप में देते हैं?

उत्तर – कविता में कवि अपना परिचय एक ‘राही’ अर्थात् यात्री के रूप में देते हैं।

(ग) कवि किसकी खोज में भटकते रहे?

उत्तर – कवि ‘पूर्णता’ की खोज में दर-दर भटकते रहे।

(घ) ‘किसको नहीं बहना पड़ा’ का क्या अर्थ है?

उत्तर – ‘किसको नहीं बहना पड़ा’ का अर्थ यह है कि इस विशाल संसार रूपी प्रवाह में समय और परिस्थितियों के साथ हर किसी को आगे बढ़ना ही पड़ता है; कोई भी इससे अछूता नहीं है।

लिखित कार्य – 1. सही उत्तर पर () लगाइए

(क) साथी के मिल जाने से कवि को क्या लाभ हुआ?

उत्तर – (iv) कुछ रास्ता कट गया

(ख) ‘आठों याम’ कवि को किसका ध्यान रहता है?

उत्तर – (iii) गति-मति अवरुद्ध न होने का

(ग) कवि ने किसकी सफलता को ‘अभिराम’ कहा है?

उत्तर – (ii) जो सदा चलता रहता है।

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

(क) कवि ने चलते रहने को अपना कर्तव्य क्यों कहा है?

उत्तर – कवि ने चलते रहने को अपना कर्तव्य इसलिए कहा है क्योंकि रुकना जड़ता और मृत्यु का प्रतीक है, जबकि निरंतर गतिशीलता ही जीवन का असली धर्म और विकास का आधार है।

(ख) साथी के मिल जाने से कवि को क्या लाभ हुआ?

उत्तर – साथी के मिल जाने से कवि के मन का बोझ बँट गया और बातचीत करते हुए लंबा और कठिन रास्ता आसानी से कट गया।

(ग) कवि ईश्वर को अपने विरुद्ध क्यों नहीं मानता?

उत्तर – कवि ईश्वर (विधाता) को अपने विरुद्ध इसलिए नहीं मानता क्योंकि वह जानता है कि सुख-दुख और संघर्ष केवल उसके साथ नहीं, बल्कि संसार के हर व्यक्ति के साथ होते हैं। यह जीवन का सामान्य नियम है।

(घ) कवि ने ऐसा क्यों कहा—’जीवन इसी का नाम है’?

उत्तर – कवि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि जीवन में आशा-निराशा, सफलता-असफलता और बाधाएँ आती ही रहती हैं। इन उतार-चढ़ावों को स्वीकार कर आगे बढ़ते रहना ही जीवन की वास्तविकता है।

(ङ) किन परिस्थितियों में भी जीवन की गति नहीं रुकी?

उत्तर – जीवन यात्रा में कई साथी साथ छोड़ गए, कुछ बीच में ही लौट गए और कुछ असफल होकर गिर गए, परंतु इन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवन की गति कभी नहीं रुकी।

 

3. निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग अपने वाक्यों में कीजिए –

(क) मंज़िल – कठिन परिश्रम करने वालों को उनकी मंज़िल अवश्य मिलती है।

(ख) परिचय – इस दुनिया में हम सबकी पहचान एक राही के रूप में है, यही हमारा परिचय है।

(ग) जीवन – उतार-चढ़ाव और संघर्ष का दूसरा नाम ही जीवन है।

(घ) निराशा – असफल होने पर हमें निराशा को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

(ङ) सफलता – निरंतर प्रयास करने वाले व्यक्ति को ही अंत में सफलता प्राप्त होती है।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

प्रश्न – जीवन में किन्हें लक्ष्य की प्राप्ति होती है? समझाकर लिखिए।

उत्तर – जीवन में उन लोगों को लक्ष्य की प्राप्ति होती है जो दृढ़ निश्चयी होते हैं और रास्ते में आने वाली बाधाओं, सुख-दुख या हार-जीत की परवाह किए बिना निरंतर अपने पथ पर बढ़ते रहते हैं। जो व्यक्ति भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय कर्म में विश्वास रखते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी गति और मति (बुद्धि) को रुकने नहीं देते, वही अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।

 

भाषा ज्ञान

1. निम्नलिखित शब्दों से जातिवाचक और भाववाचक संज्ञा पद छाँटकर अलग कीजिए –

सफलता, पैर, रोड़ा, मंज़िल, विधाता, जीवन, पूर्णता, रास्ता, पग, निराशा

  • जातिवाचक संज्ञा – पैर, रोड़ा, मंज़िल, विधाता, रास्ता, पग।
  • भाववाचक संज्ञा – सफलता, जीवन, पूर्णता, निराशा।

 

  1. प्रत्येक के लिए दो – दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –

(क) रास्ता – मार्ग, पथ

(ख) पैर – चरण, पद

(ग) विश्व – संसार, जग

(घ) विधाता – ईश्वर, भाग्य विधाता

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए –

(क) चलना X रुकना

(ख) आशा X निराशा

(ग) हँसना X रोना

(घ) पूर्ण X अपूर्ण

(ङ) पाना X खोना

(च) गिरना X उठना

 

  1. जानें – कविता में प्रायः पंक्तियों के अंत के शब्दों में ध्वनि और मात्राओं में समानता होती है। इसे तुक मिलना कहते हैं; जैसे – दर – दर खड़ा – इतना पड़ा

पाठ से छाँटकर पाँच तुक मिलने वाले अंश लिखिए –

 

(क) राही हमारा नाम है – चलना हमारा काम है।

(ख) जीवन इसी का नाम है – चलना हमारा काम है

(ग) बँट गया – कट गया

(घ) खोता – रोता

(ङ) भटकता रहा – अटकता रहा

 

रोचक क्रियाकलाप

2. सूचना (Notice)

सूचना

दिनांक – 13 फरवरी, 2026

विषय – कविता पाठ प्रतियोगिता हेतु सूचना

समस्त छात्रों को सूचित किया जाता है कि अगले शुक्रवार को विद्यालय के सभागार में ‘कविता पाठ प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जा रहा है। जो छात्र इसमें भाग लेना चाहते हैं, वे अपना नाम अपनी कक्षा के कक्षा-अध्यापक को सोमवार तक लिखवा दें।

साहित्य सचिव

गृहकार्य – भाव स्पष्ट कीजिए

पंक्ति – “जब तक न मंज़िल पा सकूँ,

तब तक मुझे न विराम है।

चलना हमारा काम है।”

भाव – इन पंक्तियों का भाव यह है कि मनुष्य को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने के बाद उसे पाने के लिए तब तक चैन से नहीं बैठना चाहिए जब तक वह प्राप्त न हो जाए। रुकना या आलस्य करना मनुष्य के स्वभाव में नहीं होना चाहिए, क्योंकि निरंतर कर्म करना ही मानव का असली कर्तव्य है।

 

You cannot copy content of this page