पाठ का सारांश
‘चणना’ कहानी राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कथा है, जो एक आदिवासी किसान के अदम्य साहस, स्वाभिमान और अपनी मिट्टी के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाती है।
1. चणना का व्यक्तित्व और सूखा
चणना राजस्थान के एक छोटे से आदिवासी गाँव का निवासी है। वह शारीरिक रूप से गठा हुआ और मज़बूत है, लेकिन उसका असली बल उसका आशावादी स्वभाव है। राजस्थान में पिछले तीन-चार वर्षों से भयंकर सूखा पड़ा था, जिसके कारण गाँव के अधिकांश लोग पलायन कर चुके थे। लेकिन चणना उन गिने-चुने लोगों में से था जो अपनी धरती को छोड़कर नहीं गए। उसके बैल मर चुके थे और गाय को उसने दूसरों के साथ विदा कर दिया था, फिर भी वह अकेला अपनी सूखी ज़मीन से जूझ रहा था।
2. लेखिका से पहली भेंट
लेखिका, जो एक पत्रकार के रूप में अकाल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही थीं, उनकी मुलाक़ात चणना से तब हुई जब वह सूखी बंजर ज़मीन पर खुरपी चला रहा था। लेखिका ने जब पूछा कि सूखी धरती में बीज डालने से क्या फायदा, तो चणना का उत्तर उसकी अटूट आस्था को दर्शाता था— “धरती सूखी है, आकाश नहीं!” उसे विश्वास था कि एक न एक दिन वर्षा ज़रूर होगी।
3. चणना का घर और अतिथि सत्कार
चणना लेखिका को अपनी झोंपड़ी में ले गया। वह बाहर से साधारण थी, लेकिन अंदर से उसकी दिवंगत पत्नी द्वारा बनाए गए कलात्मक भित्ति-चित्रों (Mural paintings) और मिट्टी के बर्तनों से सजी थी। चणना ने अपनी पत्नी को याद करते हुए बताया कि उसके हाथों में जादू था। गरीबी के बावजूद, चणना ने लेखिका को ‘माँड़’ (चावल या अनाज का उबला हुआ पानी) पीने को दिया। लेखिका को उस साधारण से माँड़ में सुदामा के चावलों जैसी मिठास और ‘अतिथि देवो भव’ की महान संस्कृति का अनुभव हुआ।
4. विवशता और स्वाभिमान
समय बीतने के बाद लेखिका की दोबारा मुलाक़ात चणना से एक सड़क निर्माण स्थल पर हुई। इस बार चणना बीमार और कमज़ोर लग रहा था। उसने बताया कि भयंकर अकाल और बीमारी (ताप) के कारण उसे शहर के अस्पताल आना पड़ा और पेट भरने के लिए मज़दूरी करनी पड़ी। वह अपनी धरती से दूर होने के कारण बहुत दुखी था। उसने दस कोस दूर से घड़ों में पानी भरकर अपनी दो क्यारियों को जीवित रखने की कोशिश की थी, लेकिन अब उसे डर था कि वे सूख गई होंगी।
5. कहानी का अंत
लेखिका ने सहायता के रूप में चणना को कुछ पैसे देने चाहे, लेकिन स्वाभिमानी चणना ने मेहनत की कमाई पर भरोसा करते हुए पैसे लेने से मना कर दिया। वह बस इतना चाहता था कि मज़दूरी के थोड़े पैसे जुड़ जाएँ ताकि वह वापस अपनी ‘धाणी’ (गाँव) लौट सके। कहानी के अंत में, लेखिका आकाश में उमड़ती घटाओं को देख कल्पना करती हैं कि चणना जल्द ही अपने लहलहाते खेतों में वापस गीत गा रहा होगा।
कठिन शब्दार्थ
1 साँवला – श्याम वर्ण, हल्का काला Dusky / Swarthy
2 नाटा – कम ऊँचाई वाला Short-statured
3 गठा हुआ – सुगठित, मजबूत Well-built / Toned
4 विषमताओं – प्रतिकूलताओं, कठिनाइयों Odds / Adversities
5 तल्लीन – मग्न, डूबा हुआ Engrossed / Absorbed
6 कर्मठ – मेहनती Hardworking / Diligent
7 हँसमुख – खुशमिजाज Cheerful
8 आशावादी – उम्मीद रखने वाला Optimistic
9 लथपथ – पूरी तरह भीगा हुआ Drenched
10 स्वाभिमानी – आत्म-सम्मान वाला Self-respecting
11 अदम्य – जिसे दबाया न जा सके Indomitable
12 ओजस्वी – प्रभावशाली, ओजपूर्ण Resplendent / Vigorous
13 कृशकाय – दुबला-पतला शरीर Emaciated / Lean
14 विषमताओं – कठिनाइयों Hardships
15 झंकृत – झनझनाहट पैदा करना Resonated
16 अकालग्रस्त – अकाल से पीड़ित Famine-stricken
17 सौभाग्यवश – किस्मत से Fortunately
18 बटोरता – इकट्ठा करना Gathering
19 बरबस – अचानक, बिना इच्छा के Involuntarily / Forcefully
20 उपहास – मज़ाक उड़ाना Mockery / Ridicule
21 पलायन – दूसरी जगह चले जाना Migration
22 मवेशियों – पालतू पशु Cattle
23 बंजर – अनुपजाऊ भूमि Barren
24 पगडंडी – पतला रास्ता Footpath / Trail
25 घटाएँ – काले बादल Dark clouds
26 अंधार – अंधकार Darkness
27 कलात्मक – कला से पूर्ण Artistic
28 निपुण – कुशल, माहिर Expert / Proficient
29 कूँची – पेंट करने वाली ब्रश Paintbrush
30 भित्ति चित्र – दीवार पर बनी पेंटिंग Mural / Wall painting
31 लिपाई – गोबर या मिट्टी से पोतना Plastering (with mud/dung)
32 कुट्टी – कटी हुई घास/मिट्टी का मिश्रण Chopped straw/Mud mix
33 पूँजी – धन-दौलत Capital / Assets
34 कल्पनालोक – खयालों की दुनिया World of imagination
35 बेल-बूटे – नक्काशी, फूल-पत्तियाँ Floral patterns / Embroidery
36 स्मृतियों – यादों Memories
37 पोटली – छोटा गट्ठर Bundle / Pouch
38 अंकित – छपा हुआ या लिखा हुआ Marked / Inscribed
39 आभास – महसूस होना Perception / Glimpse
40 आस्था – विश्वास, श्रद्धा Faith / Devotion
41 गहनता – गहराई Intensity / Depth
42 अटूट – जो न टूटे Unbreakable / Firm
43 पारदर्शी – साफ़-सुथरा, आर-पार दिखने वाला Transparent
44 आदर – सम्मान Respect
45 अभाव – कमी Scarcity / Lack
46 प्रतीत – महसूस होना Seem / Appear
47 अग्राह – विनती, बार-बार कहना Insistence / Urging
48 तुच्छ – छोटा, बेकार Petty / Trivial
49 ओतप्रोत – भरा हुआ Infused / Imbued
50 धूमिल – धुंधला Faded / Blurred
51 धिक्कारती – कोसना, बुरा कहना Reproaching / Cursing
52 दुर्भाग्य – बुरी किस्मत Misfortune
53 चेतना – होश Consciousness
54 विशद – विशाल Vast
55 स्वगत – अपने आप से To oneself
56 धाणी – छोटी बस्ती या गाँव Small settlement / Hamlet
57 मेह – वर्षा, बारिश Rain
58 दो टूक – साफ़-साफ़ Blunt / Direct
59 अनुपालना – पालन करना Adherence / Compliance
60 असंख्य – अनगिनत Innumerable
61 खुरपी – घास खोदने का औजार Trowel / Small hoe
62 फावड़ा – मिट्टी खोदने का औजार Spade / Shovel
63 माँड़ – पके अनाज का पानी Gruel / Starch water
64 दस कोस – लगभग 30 किलोमीटर Approx. 30 kilometres
65 ताप – बुखार Fever
66 घड़ा – मटका Pitcher / Clay pot
67 सपूत – अच्छा बेटा Worthy son
68 बाज़ी लगाना – जान दाँव पर लगाना To stake (life)
69 कतराते – हिचकिचाना Hesitate / Shy away
70 नियत – नियुक्त, तय किया हुआ Appointed / Fixed
71 सन्न – आश्चर्यचकित Stunned / Dumbstruck
72 फुरती – तेज़ी Agility / Quickness
73 उकहूँ – घुटने मोड़कर बैठना Squatting
74 अतीत – बीता हुआ समय Past
75 खुशहाली – समृद्धि Prosperity
76 मूलभूत – बुनियादी Basic / Fundamental
77 अनोखा – विचित्र, अलग Unique / Peculiar
78 संन्यासी – त्यागी Ascetic / Monk
79 अनुकरणीय – नकल करने योग्य Exemplary
80 प्रगति – विकास Progress
81 सिलसिले – क्रम में Sequence / Connection
82 दौरे – यात्रा Tour / Visit
83 हृदय – दिल Heart
84 मिसाल – उदाहरण Example / Precedent
85 कर्मरत – काम में लगा हुआ Engaged in work
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
साँवला, विषमताओं, संघर्षों, क्यारियों, तल्लीन, झंकृत, वर्षों, राजस्थान, कार्यालय, अकालग्रस्त, कूँची, भित्ति चित्र, चूल्हा, कल्पनालोक, उकडूं, दृष्टि, धाणी, स्मृतियों, माँड़, हफ़्ते, बढ़ाया, पारदर्शी, स्पष्ट, संन्यासी, संस्कृति, हृदय, मस्तिष्क, निर्माण, दक्षिणी, कृशकाय, बूढ़ी, हड्डियाँ, ढोकर, धिक्कारती दुर्भाग्य
साँवला – Saan-vlaa
उकडूं – Uk-doon
विषमताओं – Vi-sham-taon
दृष्टि – Drish-ti
संघर्षों – San-ghar-shon
धाणी – Dhaa-nee
क्यारियों – Kyaa-ri-yon
स्मृतियों – Smri-ti-yon
तल्लीन – Tal-leen
माँड़ – Maand (नाक से गूँज)
झंकृत – Jhan-krit
हफ़्ते – Haf-tay
वर्षों – Var-shon
बढ़ाया – Bad-haa-yaa
राजस्थान – Raa-jas-thaan
पारदर्शी – Paar-dar-shee
कार्यालय – Kaar-yaa-lay
स्पष्ट – Spash-t
अकालग्रस्त – Akaal-grast
संन्यासी – San-nyaa-see
कूँची – Koon-chee
संस्कृति – Sans-kriti
भित्ति चित्र – Bhit-ti Chit-ra
हृदय – Hrid-ya
चूल्हा – Chool-haa
मस्तिष्क – Mas-tish-k
कल्पनालोक – Kalp-naa-lok
निर्माण – Nir-maan
दक्षिणी – Dak-shi-nee
कृशकाय – Krish-kaay
बूढ़ी – Boo-dhee
हड्डियाँ – Had-di-yaan
ढोकर – Dho-kar
धिक्कारती – Dhik-kaar-tee
दुर्भाग्य – Dur-bhaag-ya
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) लेखिका ने चणना को पहली बार किस रूप में देखा?
उत्तर – लेखिका ने चणना को पहली बार पसीने से लथपथ, हाथ में खुरपी लिए क्यारियों की घास खोदते हुए एक कर्मठ और तल्लीन किसान के रूप में देखा।
(ख) गाँव के अधिकांश लोग गाँव छोड़कर क्यों चले गए थे?
उत्तर – राजस्थान में लगातार तीन-चार वर्षों से पड़ रहे भीषण अकाल और सूखे के कारण आजीविका का कोई साधन न बचने पर लोग मज़दूरी के लिए निकटवर्ती राज्यों में चले गए थे।
(ग) चणना ने अपनी झोंपड़ी में लेखिका का स्वागत कैसे किया?
उत्तर – चणना ने अत्यंत आदर और प्रसन्नता के साथ लेखिका को अपनी झोंपड़ी में बिठाया और पीने के लिए ‘माँड़’ (अनाज का उबला पानी) का कटोरा आगे बढ़ाकर उनका स्वागत किया।
(घ) चणना को अपनी धाणी क्यों छोड़नी पड़ी?
उत्तर – भीषण गर्मी और सूखे के कारण चणना को तेज़ बुखार (ताप) चढ़ गया था और उसकी चेतना चली गई थी। कोई उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती करा गया, जिसके बाद पेट भरने के लिए उसे मज़दूरी हेतु धाणी छोड़नी पड़ी।
लिखित
1. सही उत्तर पर ✓ लगाइए–
(क) लेखिका को राजस्थान क्यों भेजा गया था?
उत्तर – (iii) अकालग्रस्त क्षेत्र का दौरा करने ✓
(ख) चणना के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य क्या था?
उत्तर – (iv) बाप-दादों की धरती छोड़ जाना ✓
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) लेखिका की भेंट चणना से कब और कहाँ हुई?
उत्तर – लेखिका की भेंट चणना से तब हुई जब वे समाचार-पत्र कार्यालय की ओर से अकाल प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थीं। यह भेंट राजस्थान के एक आदिवासी भील गाँव के सूखे खेतों में हुई।
(ख) लेखिका ने चणना को धरती का लाल क्यों कहा है?
उत्तर – लेखिका ने चणना को ‘धरती का लाल’ इसलिए कहा है क्योंकि अकाल की विकट स्थिति में जब सब लोग गाँव छोड़कर भाग रहे थे, तब भी वह अपनी धरती और उसकी सुगंध से जुड़ा रहा और विषम परिस्थितियों में भी अपनी ज़मीन को नहीं छोड़ा।
(ग) चणना ने लेखिका को अपनी पत्नी के विषय में क्या-क्या बताया?
उत्तर – चणना ने बताया कि उसकी पत्नी बहुत भली थी और उसके हाथों में जादू था। वह मिट्टी के कलात्मक बरतन और बाँस की छाल से सुंदर टोकरे व चटाइयां बनाती थी। वह बहुत अच्छा नाचती थी और झोंपड़ी की दीवारों पर कलात्मक चित्र भी उसी ने बनाए थे।
(घ) विश्व के कीमती उपहार भी लेखिका को किसके समक्ष तुच्छ और हीन लगे और क्यों?
उत्तर – चणना द्वारा भेंट किए गए ‘माँड़’ के कटोरे के समक्ष लेखिका को विश्व के कीमती उपहार भी तुच्छ लगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उस भेंट में चणना का निश्छल प्रेम, अपार श्रद्धा और ‘अतिथि देवो भव’ की महान भावना निहित थी।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
- लेखिका के मन में आदिवासी भीलों के प्रति अनोखा सा आदर भाव क्यों पैदा हो गया?
उत्तर – चणना के मन में जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव के बावजूद कोई शिकायत नहीं थी। उसकी साफ़-सुथरी बातें, पारदर्शी विचार और अतिथि सत्कार की भावना देखकर लेखिका के मन में आदिवासियों के प्रति आदर पैदा हो गया।
- चणना की किस बात से लेखिका को लगा कि उसे अपने श्रम पर अटूट विश्वास है?
उत्तर – जब चणना ने कहा— “धरती सूखी है, आकाश नहीं!” तो लेखिका को लगा कि उसे अपने श्रम और भविष्य की उम्मीद पर अटूट विश्वास है।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए–
(क) ‘स्वाभिमान’ शब्द कैसे बना है?
(iv) स्व + अभिमान ✓
(ख) ‘सौभाग्यवश’ का विलोम –
(iii) दुर्भाग्यवश ✓
(ग) अनुनासिक (ँ) का प्रयोग किसमें नहीं होगा?
(ii) अँधकार ✓ (इसमें अनुस्वार ‘अं’ का प्रयोग होता है)
- जानें- व्यक्तियों के गुण-दोषों के परस्पर मिलान को तुलना कहते हैं। तुलना की तीन अवस्थाएँ होती हैं- मूल अवस्था, उत्तर अवस्था और उत्तम अवस्था। जो विशेषण शब्द संस्कृत से आए हैं उनमें मूल अवस्था के साथ ‘तर’ लगाकर उत्तर अवस्था और ‘तम’ लगाकर उत्तम अवस्था बनती है।
निम्नलिखित शब्दों के उत्तर अवस्था (तर) और उत्तम अवस्था (तम) के रूप लिखिए-
मूल अवस्था उत्तर अवस्था उत्तम अवस्था
(क) कठिन कठिनतर कठिनतम
(ख) उच्च उच्चतर उच्चतम
(ग) मधुर मधुरतर मधुरतम
(घ) कोमल कोमलतर कोमलतम
(ङ) सुंदर सुंदरतर सुंदरतम
- जानें- जब वाक्य में दो या दो से अधिक क्रियाएँ मिलकर एक ही कार्य पूर्ण करती हैं तो उन्हें संयुक्त क्रिया कहते हैं। पाठ में आए इस प्रकार के प्रयोग देखिए-
एक व्यक्ति जीप की ओर दौड़ा आ रहा था।
क्या हाल बना रखा है?
कटोरे में माँड़ लिए नज़दीक आ बैठा।
चणना की आवाज़ उसके स्वाभिमान का गीत गाती लग रही थी।
पाठ से छाँटकर तीन ऐसे वाक्य लिखिए जिनमें संयुक्त क्रिया का प्रयोग किया गया हो-
(क) चणना बरबस आँखों के समक्ष उपस्थित हो जाता है।
(ख) धरती भी सूखकर पत्थर-सी हो गई थी।
(ग) वे भी घबरा गए।
- दिए गए अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-
(क) अपने ऊपर अभिमान करने वाला – स्वाभिमानी
(ख) जिसके आर-पार दिखाई देता हो – पारदर्शी
(ग) जोश (ओज) से भरा हुआ – ओजस्वी
(घ) अच्छे भाग्य के कारण – सौभाग्यवश
- पाठ से छाँटकर वे शब्द लिखिए जिनमें ‘ऋ’ की मात्रा (ृ) का प्रयोग किया गया है-
- कृशकाय, स्मृतियों, संस्कृति, हृदय, भृकुटी ।
रोचक क्रियाकलाप
- चणना के गाँव में अच्छी वर्षा हुई और उसकी फ़सल भी खूब अच्छी हुई। इसके बाद यदि चणना लेखिका से मिलता तो उनके बीच जो बातें होतीं कल्पना करके उसे संवाद के रूप में लिखिए।
चणना – बाई सा! देखिए, बादलों ने मेरी सुन ली। आज मेरे खेत मक्के की फसल से लहलहा रहे हैं।
लेखिका – सचमुच चणना! तुम्हारी मेहनत और विश्वास की जीत हुई।
चणना – मैंने कहा था न बाई सा, आकाश कभी सूखा नहीं रहता। अब मेरी धाणी फिर से खुशहाल है।
- राजस्थान में भयंकर सूखा पड़ रहा है, लोग गाँव छोड़कर जा रहे हैं- इसे छपवाने के लिए समाचार के रूप में लिखिए।
उत्तर – राजस्थान में अकाल का तांडव – खाली हो रहे गाँव
जयपुर – राजस्थान के कई जिलों में पिछले चार वर्षों से वर्षा न होने के कारण भीषण अकाल की स्थिति पैदा हो गई है। धरती सूखकर पत्थर जैसी सख्त हो चुकी है और पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा है। आजीविका का कोई साधन न बचने के कारण किसान और पशुपालक भारी मन से अपनी पुश्तैनी ज़मीन छोड़कर पड़ोसी राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। मवेशी चारे के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। गाँवों में अब केवल सन्नाटा और मायूसी पसरी है। ग्रामीण अब केवल प्रशासन से मदद और आकाश से बारिश की अंतिम उम्मीद लगाए बैठे हैं।
- भारत के विभिन्न भागों में रहने वाले आदिवासियों के विषय में जानकारी एकत्र करके एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाइए-
उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।
गृहकार्य
चणना की पत्नी सपने में आकर उसे क्यों धिक्कारती है?
उत्तर – चणना की पत्नी सूवटी उसे सपने में आकर इसलिए धिक्कारती है क्योंकि चणना अपने बाप-दादों की धरती और सूखी क्यारियों को अकेला छोड़कर मज़दूरी के लिए शहर चला गया था। उसकी आत्मा अपनी मिट्टी से दूर होने के कारण दुखी थी।

