Teesri Ladki (Kahani) – Surekha Panandiker, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution

पाठ का सारांश

‘तीसरी लड़की’ सुरेखा पाणंदीकर द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी भारतीय समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) और एक लड़की के संघर्ष व सफलता को दर्शाती है।

  1. घर में भेदभाव का माहौल

कहानी की मुख्य पात्र निशा अपने माता-पिता की तीसरी बेटी है। उसके घर में उसके छोटे भाई बबलू को ‘कुलदीपक’ मानकर उसे हर सुविधा (जैसे नाश्ते में ब्रेड और महँगे अंग्रेजी स्कूल की शिक्षा) दी जाती है, जबकि निशा को रात की बची रोटियाँ खानी पड़ती हैं और घर के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। निशा की माँ और बाबू जी का मानना है कि लड़कियों का काम केवल ‘चूल्हा-चौका’ करना है।

  1. निशा का संघर्ष और एन.सी.सी. कैंप

निशा पढ़ाई में बहुत तेज़ है और वह पुरानी किताबें माँगकर अपनी शिक्षा जारी रखती है। वह स्कूल के एन.सी.सी. (NCC) कैंप पर मनाली जाना चाहती है, लेकिन उसके माता-पिता मना कर देते हैं। अंत में, उसकी टीचर आशा मैडम के समझाने पर उसे जाने की इज़ाज़त मिलती है। कैंप में निशा के स्कूल को ‘शील्ड’ मिलती है, लेकिन घर लौटने पर उसे सम्मान के बजाय माँ के ताने और बाबू जी की पैसों की माँग का सामना करना पड़ता है।

  1. संकट की घड़ी और निशा की सूझबूझ

अचानक निशा के बाबू जी को दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ता है और वे बेहोश हो जाते हैं। जहाँ भाई बबलू केवल डॉक्टर को बुलाने तक सीमित रहता है और माँ रोने लगती है, वहीं निशा पूरी स्थिति को संभालती है। उसने एन.सी.सी. कैंप में सीखी गई ‘फर्स्ट-एड’ (प्राथमिक चिकित्सा) का उपयोग करते हुए बाबू जी की छाती मलना शुरू किया, जिससे उनकी साँसें लौट आईं।

  1. अस्पताल में सेवा और अटूट लगन

निशा अकेले अपने दम पर बाबू जी को अस्पताल में भर्ती कराती है, दवाइयों का प्रबंध करती है और दिन-रात उनकी सेवा करती है। वह अपने ऑफिस के बॉस को सुंदर अंग्रेजी में छुट्टी का पत्र भी लिखती है, जिसे देखकर वे हैरान रह जाते हैं क्योंकि बाबू जी को लगता था कि अंग्रेजी केवल उनके बेटे बबलू को आती है।

  1. कहानी का निष्कर्ष – नई पहचान

अस्पताल के डॉक्टर और बाबू जी के बॉस निशा की होशियारी और सेवा भाव से बहुत प्रभावित होते हैं। डॉक्टर उसे ‘छोटी डॉक्टर’ कहते हैं और उसे आगे पढ़ाने की सलाह देते हैं। हालाँकि बाबू जी अभी भी संकीर्ण सोच रखते हैं, लेकिन निशा दृढ़ निश्चय के साथ घोषणा करती है कि वह हर हाल में पढ़ेगी और डॉक्टर बनकर दिखाएगी।

 

कठिन शब्दार्थ

1 अपेक्षा –  तुलना में  In comparison / Expectation

 2 महत्त्व –  उपयोगिता  Importance / Significance

 3 सिद्ध –  प्रमाणित करना  To prove

 4 होश सँभालना –  समझदार होना  To come of age / Conscious

 5 कुलदीपक –  वंश का चिराग  The light of the clan

 6 चूल्हा-चौका –  रसोई का काम  Kitchen chores / Hearth

 7 सँवारना –  सजाना  To decorate / To tidy up

 8 दस्तखत –  हस्ताक्षर  Signature

 9 इज़ाज़त –  अनुमति  Permission

 10 दाखिला –  प्रवेश  Admission

 11 धमकी –  डराना  Threat

 12 ताना कसना –  व्यंग्य करना  To taunt

 13 गनीमत –  पर्याप्त / संतोषजनक  Sufficient / Small mercy

 14 होनहार –  प्रतिभावान  Promising / Talented

 15 कोल्हू के बैल –  बहुत अधिक काम करने वाला  A drudge / Hard worker

 16 प्रशिक्षण –  ट्रेनिंग  Training

 17 प्रारंभ –  शुरुआत  Beginning / Commencement

 18 स्पर्धा –  प्रतियोगिता  Competition

 19 शील्ड –  पुरस्कार स्वरूप ढाल  Shield / Trophy

 20 रफूचक्कर –  गायब हो जाना  To vanish

 21 आनंद-विभोर –  बहुत खुश होना  Overjoyed

 22 मनोरंजन –  दिल बहलाव  Entertainment / Recreation

 23 तपाक से –  तुरंत  Instantly / Promptly

 24 प्रार्थना –  विनती / स्कूल की सभा  Prayer / Assembly

 25 यूनिफार्म्स –  वर्दी  Uniforms      

 26 सतर्क –  सावधान  Alert / Vigilant

 27 बेहोश –  अचेत  Unconscious

 28 दिल का दौरा –  हृदय घात  Heart Attack

 29 फ़र्स्ट-एड –  प्राथमिक चिकित्सा  First-aid

 30 छाती मलना –  मालिश करना  To massage chest

 31 डिस्पेंसरी –  औषधालय  Dispensary

 32 ब्लड ग्रुप –  रक्त समूह  Blood Group

 33 फ़ौरन –  तुरंत  Immediately

 34 बखूबी –  अच्छी तरह से  Efficiently / Well

 35 होशियारी –  समझदारी  Cleverness / Wisdom

 36 मरीज़ –  बीमार व्यक्ति  Patient

 37 इलाज –  उपचार  Treatment

 38 मालिश –  मर्दन  Massage

 39 स्थिति –  दशा  Situation / Condition

 40 कागजात –  दस्तावेज  Documents

 41 तंग आना –  परेशान होना  To be fed up

 42 हताश –  निराश  Hopeless / Despaired

 43 सुबकियाँ –  सिसकियाँ  Sobs

 44 थकावट –  थकान  Exhaustion / Fatigue

 45 सन्न रह जाना –  दंग रह जाना  Stunned / Dumbstruck

 46 खिला हुआ चेहरा –  प्रसन्न चेहरा  Radiant / Cheerful face

 47 हैरान –  चकित  Surprised / Astonished

 48 दृढ़ निश्चय –  पक्का इरादा  Determination

 49 विश्वास –  भरोसा  Faith / Confidence

 50 गुस्सा –  क्रोध  Anger

 51 हौसला –  साहस  Courage / Morale

 52 मनाना –  राजी करना  To persuade

 53 बहस –  तर्क-वितर्क  Argument

 54 बढ़ावा –  प्रोत्साहन  Encouragement

 55 चिल्लाना –  शोर मचाना  To scream / Shout

 56 साड़ी –  भारतीय पहनावा  Saree

 57 पहरावा –  पोशाक  Attire / Costume

 58 वरांडा –  बरामदा  Veranda

 59 सौदा –  बाजार का सामान  Grocery / Goods

 60 डायरी –  दैनिक नोंदणी  Diary

 61 बुजुर्ग –  वृद्ध  Elder / Senior citizen

 62 ज़िम्मेदारी –  उत्तरदायित्व  Responsibility

 63 प्रोग्राम –  कार्यक्रम  Program

 64 चिट्ठी –  पत्र  Letter

 65 वाकई –  सचमुच  Really / Indeed

 66 हरहाल –  किसी भी कीमत पर  In any case / At all costs

 67 राउंड –  दौरा (डॉक्टर का)  Round (Medical tour)

 68 छुट्टी –  अवकाश  Leave / Vacation

 69 सूप –  अर्क  Soup

 70 अफ़सर –  अधिकारी  Officer

 71 सिलाई-कढ़ाई –  कसीदाकारी  Sewing and Embroidery

 72 ट्यूशन –  निजी शिक्षण  Tuition

 73 कार्यक्रम –  आयोजन  Event / Function

 74 समय-सारणी –  टाइम-टेबल  Schedule / Time-table

 75 प्रारंभ –  श्रीगणेश  Commencement

 76 लड़खड़ाना –  डगमगाना  To stumble / To totter

 77 नर्स –  परिचारिका  Nurse

 78 थर्ड डिवीज़न –  तृतीय श्रेणी  Third division

 79 स्पिरिट –  जज्बा / उत्साह  Spirit / Enthusiasm

 80 दृश्य –  नज़ारा  Scene / Sight

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

सब्ज़ी, पराँठे, ब्रेड, होश, सँवार, पढ़ना, चूल्हा, साफ़, शुक्रवार, दस्तखत, खर्चा, इज़ाज़त, दृढ़ बढ़ावा, छोडूंगी, ज़िम्मेदारी, ढूँढ़, ढक, ट्यूशन, कार्यक्रमों, प्रार्थना, इकट्ठा, प्रशिक्षण, ट्रेनिंग, स्पर्धा, मनोरंजन, रफूचक्कर, डेढ़, दरवाज़ा, सतर्क, फ़र्स्ट, बुजुर्ग, डिस्पेंसरी, कागजात, ग्रुप, फ़ौरन, सँभाली, गवर्नमेंट, मरीज़, डॉक्टर, ऑफ़िस, बॉस

सब्ज़ी – Sab-zee

ढूँढ़ – Dhoon-dh

पराँठे – Pa-raan-thay

ढक – Dhak

ब्रेड – Bread

ट्यूशन – Tyoo-shan

होश – Hosh

कार्यक्रमों – Kaar-ya-kra-mon

सँवार – San-vaar

प्रार्थना – Praarth-naa

पढ़ना – Padh-naa

इकट्टा – I-kat-thaa

चूल्हा – Chool-haa

प्रशिक्षण – Pra-shik-shan

साफ़ – Saaf

ट्रेनिंग – Tray-ning

शुक्रवार – Shuk-ra-vaar

स्पर्धा – Spar-dhaa

दस्तखत – Das-ta-khat

मनोरंजन – Ma-no-ran-jan

खर्चा – Khar-chaa

रफूचक्कर – Ra-foo-chak-kar

इज़ाज़त – I-zaa-zat

डेढ़ – Dedh

बढ़ावा – Bad-haa-vaa

दरवाज़ा – Dar-vaa-zaa

छोडूंगी – Chho-doon-gee

सतर्क – Sa-tark

ज़िम्मेदारी – Zim-may-daa-ree

फ़र्स्ट – First

बुजुर्ग – Bu-zurg

डिस्पेंसरी – Dis-pen-sa-ree

कागजात – Kaag-zaat

ग्रुप – Group

फ़ौरन – Fau-ran

सँभाली – San-bhaa-lee

गवर्नमेंट – Go-vern-ment

मरीज़ – Ma-reez

डॉक्टर – Doc-tor

ऑफ़िस – Of-fice

बॉस – Boss

दृढ़ – Dridh

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) निशा को अपने माता-पिता की किस बात पर गुस्सा आ गया?

उत्तर – निशा को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि उसके माता-पिता भाई बबलू को ‘कुलदीपक’ कहकर विशिष्ट सुविधाएँ, जैसे – ब्रेड और महँगा स्कूल, ट्यूशन आदि सुविधाएँ देते थे, जबकि निशा को घर के कामों के लिए मजबूर करते और उसे एन.सी.सी. कैंप में जाने से रोक रहे थे।

(ख) निशा ने माँ से क्यों कहा कि उसके स्कूल जाने से कोई खर्चा नहीं होता?

उत्तर – निशा ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह सरकारी स्कूल में पढ़ती थी जहाँ उसकी फीस नहीं लगती थी और वह पुरानी किताबें माँगकर पढ़ती थी, ताकि माँ-बाप उस पर होने वाले खर्च का बहाना न बना सकें।

(ग) एन. सी. सी. कैंप का जीवन कैसा था?

उत्तर – कैंप का जीवन अनुशासन और कड़ी मेहनत से भरा था। सुबह परेड और सैनिक प्रशिक्षण होता था, दोपहर में ट्रेनिंग क्लास, शाम को प्रतियोगिताएँ और रात में मनोरंजन के कार्यक्रम होते थे।

(घ) डॉ॰ चौधरी ने श्री चोपड़ा को निशा के बारे में क्या बताया?

उत्तर – डॉ॰ चौधरी ने बताया कि निशा की होशियारी और सतर्कता की वजह से ही उसके पिता की जान बची है। उसने दिन-रात सेवा की है और वह बहुत होनहार बच्ची है।

 

लिखित

1. सही उत्तर पर लगाइए

(क) माँ आलू के पराँठे क्यों नहीं बनाना चाहती थी?

उत्तर – (iii) बबलू के लिए रायता बनना था

(ख) निशा उदास क्यों थी?

उत्तर – (iv) उसे एन. सी. सी. कैंप में नहीं जाने दे रहे थे

(ग) पिता को बीमार देखकर निशा ने क्या किया?

उत्तर – (iii) उनकी छाती पर मालिश करनी शुरू कर दी

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) ‘वह बेटा है कुलदीपक है।’ माँ के इस कथन से उसकी किस मानसिकता का पता चलता है?

उत्तर – माँ के इस कथन से समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और पुत्र-मोह की संकीर्ण मानसिकता का पता चलता है, जहाँ लड़के को वंश का रक्षक और लड़की को बोझ माना जाता है।

(ख) किस बात से पता चलता है कि निशा की माँ लड़कियों की शिक्षा को महत्त्व नहीं देती थी?

उत्तर – जब माँ कहती है, “पढ़ना-पढ़ना क्या लगा रखा है? कौन-सी अफ़सर बनना है तुझे? चूल्हा-चौका ही काम है लड़कियों का।” इस बात से पता चलता है कि वह लड़कियों की शिक्षा को व्यर्थ मानती थी।

(ग) निशा स्कूल में अपनी मैडम के सामने क्यों रो पड़ी?

उत्तर – निशा अपनी बेबसी और घर में होने वाले भेदभाव के कारण रो पड़ी। उसे दुःख था कि उसके भाई पर हज़ारों खर्च किए जा रहे थे, जबकि उसे एक कैंप में जाने की भी अनुमति नहीं मिल रही थी।

(घ) डॉ॰ चौधरी द्वारा पिता को निशा को डॉक्टर बनाने का सुझाव दिए जाने पर निशा ने क्या कहा?

उत्तर – निशा ने व्यंग्य और दृढ़ता के साथ कहा कि वह लड़की है और वह भी तीसरी, इसलिए उसके पिता उस पर पैसा नहीं लगाएंगे, लेकिन फिर उसने संकल्प लिया कि वह हर हाल में पढ़कर डॉक्टर बनकर दिखाएगी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

“पर क्या हुआ यह तो बताओ? अपनी मैडम को नहीं बताओगी?” निशा से नहीं रहा गया। मन का सारा दुर उमड़ पड़ा, “मैं माता-पिता की तीसरी लड़की हूँ ना! पहली दो बहनें, फिर मैं, मेरे बाद भाई बबलू। निम्मो दीव जो मुझसे दो साल बड़ी हैं, उनका भी स्कूल बंद, क्योंकि बबलू को अंग्रेज़ी स्कूल में ट्यूशन के लिए पैस चाहिए। कम्मो दीदी सिलाई-कढ़ाई करती है। मैं ही हूँ जो घर बैठने की बात न मानकर पढ़ रही हूँ। फ़ीस नह देनी पड़ती, तभी तो यहाँ तक पहुँची हूँ! बबलू के अंग्रेज़ी स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए चार हज़ार रुप दिए थे बाबू जी ने, और हर महीने फ़ीस और ट्यूशन अलग। मुझे आज स्कूल छुड़वाने की धमकी भी दी है एन. सी. सी. कैंप में कैसे जाने देंगे? अब आप ही बताइए मैं क्या करूँ?”

(क) निम्मो दीदी का स्कूल क्यों बंद करवा दिया गया?

उत्तर – निम्मो दीदी का स्कूल बंद करवा दिया गया क्योंकि भाई बबलू को अंग्रेज़ी स्कूल में पढ़ाने और ट्यूशन दिलाने के लिए पैसों की ज़रूरत थी।

(ख) कम्मो दीदी अपना समय कैसे बिताती हैं?

उत्तर – कम्मो दीदी घर पर सिलाई-कढ़ाई करके अपना समय बिताती हैं।

(ग) बाबू जी ने चार हज़ार रुपये किसलिए दिए थे?

उत्तर – बबलू का अंग्रेज़ी स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए।

(घ) बाबू जी ने निशा को किस बात की धमकी दी है?

उत्तर – बाबू जी ने निशा का स्कूल छुड़वाने की धमकी दी है।

(ङ) निम्नलिखित वर्ण-विच्छेद से क्या शब्द बनेगा?

छ् + उ + ड़ू + अ + व् + आ + न् + ए =

उत्तर – छुड़वाने

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

  1. निशा की बड़ी बहनों का स्कूल क्यों बंद करवा दिया गया?

उत्तर – बड़ी बहनों का स्कूल इसलिए बंद करवाया गया क्योंकि परिवार की आर्थिक प्राथमिकता केवल इकलौते लड़के बबलू की शिक्षा थी। दक़ियानूसी समाज की यह सोच कि लड़कियों को केवल घर के काम सीखने चाहिए, इसके लिए ज़िम्मेदार थी।

  1. यह कहानी समाज की किस बुराई की ओर संकेत करती है?

उत्तर – यह कहानी समाज में ‘लड़का-लड़की के बीच भेदभाव’ और ‘पितृसत्तात्मक सोच’ जैसी बुराइयों की ओर संकेत करती है।

 

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए

(क) निम्नलिखित में कौन-सा शब्द जातिवाचक संज्ञा नहीं है?

(iii) बबलू (यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है)

 

(ख) सही वर्तनीवाला शब्द कौन-सा है?

(iv) सुबकियाँ

 

(ग) किस शब्द में नुक्ते का प्रयोग नहीं होगा?

(ii) इलाज़ (सही शब्द ‘इलाज’ है)

 

  1. जानें- जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के गुण-दोष, रंग, आकार, स्वाद, दशा, अवस्था और काल आदि का ज्ञान कराते हैं उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं; जैसे- परिश्रमी छात्र, हरा रंग लंबा-चौड़ा मैदान आदि।

जो शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम की संख्या संबंधी विशेषता बताते हैं उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं; जैसे- हर वर्ष, दोगुना लगान, तीन दर्जन केले आदि।

नीचे दिए गए वाक्यों में विशेषण छाँटिए और लिखिए कि वे गुणवाचक हैं अथवा संख्यावाचक हैं –

(क) निशा ने डेढ़ सौ रुपये बाबू जी को दे दिए।

डेढ़ सौ – संख्यावाचक

(ख) तुम तो बड़ी हिम्मतवाली लड़की हो।

हिम्मतवाली – गुणवाचक

(ग) निशा ने हताश स्वर में मैडम को बताया।

हताश – गुणवाचक

(घ) मैं आठ दिन के लिए कैंप में जाऊँगी।

आठ दिन – संख्यावाचक

(ङ) यह तो बड़ी होनहार बच्ची है।

होनहार – गुणवाचक

(च) मैं माता-पिता की तीसरी लड़की हूँ।

तीसरी – संख्यावाचक

 

  1. जानें- जो शब्द दो शब्दों अथवा दो उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें योजक अथवा समुच्चयबोधक कहते हैं। दिए गए योजक शब्दों से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थान में लिखिए-

क्योंकि, और, पर, जो, तब

(क) मैडम ने निशा के माता-पिता को मना लिया और अब निशा कैंप में जाएगी।

(ख) जब स्कूल को शील्ड मिली तब सारी थकावट दूर हो गई।

(ग) बहनों का स्कूल बंद करवा दिया है क्योंकि भाई को अंग्रेज़ी स्कूल में पढ़ाना है।

(घ) बड़ी बहनें तो चुपचाप काम करती हैं पर तू बहुत बहस करती है।

(ङ) मैं ही हूँ जो आगे पढ़ाई कर रही हूँ।

 

  1. जानें- दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से जब एक नया शब्द बन जाता है, तो उसे समास कहते हैं; जैसे- राष्ट्र का पिता-राष्ट्रपिता।

समास करते समय जब किसी कारक के परसर्ग या विभक्ति चिह्न का लोप होता है तो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

जब दो शब्दों के बीच से और, या, तथा अथवा जैसे शब्दों को हटाकर उन्हें योजक चिह्न से जोड़ा जाता है तो वहाँ द्वंद्व समास होता है।

समास करके बने शब्द को समस्तपद कहते हैं और समस्तपद से शब्दों को अलग करने को समास-विग्रह कहते हैं।

निम्नलिखित द्वंद्व समास के उदाहरणों का विग्रह करके लिखिए-

(क) चूल्हा-चौका – चूल्हा और चौका

(ख) माता-पिता – माता और पिता

(ग) दिन-रात – दिन और रात

(घ) चार-पाँच – चार या पाँच

 

  1. निम्नलिखित शब्दों में समास करके समस्त पद लिखिए-

(क) कुल का दीपक – कुलदीपक

(ख) क्लास की टीचर – क्लास-टीचर

(ग) आनंद से विभोर – आनंद-विभोर

(घ) टाइम के लिए बनाई गई टेबल – टाइम-टेबल

  1. रिक्त स्थानों में मुहावरे लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-

(क) निशा ने पिता की देखभाल की। भाग-दौड़ देखकर लगता था मानों निशा के _______ है।

पैरों में चक्की लग गई है

(ख) माली को आता देखकर लड़के पेड़ से उतरकर _______।

रफूचक्कर हो गए

(ग) इस कारखाने में सभी मज़दूर _______ की तरह काम करते हैं।

कोल्हू के बैल

(घ) चोरी करके घर से बाहर निकलते ही सामने पुलिस को देखकर चोर _______।

सन्न रह गया

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. ‘लड़का-लड़की एक समान’ विषय पर कक्षा में वार्ता आयोजित कीजिए।

उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे करें।

  1. निशा के पिता के अस्पताल से घर लौटने के बाद उसके माता-पिता ने उसके बारे में क्या बातचीत की होगी? अनुमान और कल्पना के आधार पर उसे संवाद के रूप में लिखिए।

उत्तर – एक नई सोच की शुरुआत

पिता (शर्मा जी) – (सोफे पर बैठते हुए) आज अपनी इस ‘तीसरी बेटी’ की वजह से ही मैं अपने घर वापस लौट पाया हूँ। अगर उस दिन निशा ने अपनी सूझबूझ न दिखाई होती, तो आज सब कुछ खत्म हो गया होता।

माँ – सच कह रहे हैं आप। मैं तो डर के मारे सुध-बुध खो बैठी थी, पर निशा बिल्कुल एक सिपाही की तरह डटी रही। अस्पताल में भी उसने जिस तरह डॉक्टरों से बात की और आपकी सेवा की, उसे देख मेरा सिर गर्व से ऊँचा हो गया।

पिता – हम कितने गलत थे! हमने हमेशा बबलू को ‘कुलदीपक’ समझा और निशा को बोझ। जबकि वक्त आने पर उसने साबित कर दिया कि योग्यता लड़के या लड़की होने में नहीं, बल्कि लगन और शिक्षा में है।

माँ – मुझे अपनी बातों पर बहुत पछतावा हो रहा है। वह डॉक्टर बनना चाहती है और अब मैं उसे कभी नहीं रोकूँगी।

पिता – हाँ, अब बबलू और निशा में कोई भेद नहीं होगा। कल ही मैं निशा के कॉलेज और आगे की पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम करूँगा। वह पढ़ेगी भी और डॉक्टर भी बनेगी!

  1. एन. सी. सी. के बारे में जानकारी एकत्र करके एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन बनाइए-

उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे करें।

गृहकार्य

  1. निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए-

(क) इज़ाज़त — अनुमति, आज्ञा

(ख) दिमाग — मस्तिष्क, बुद्धि

(ग) दस्तखत — हस्ताक्षर, स्वलेख

(घ) ज़रूरत — आवश्यकता, दरकार

(ङ) खर्च — व्यय, लागत

(च) ज़िम्मेदारी — उत्तरदायित्व, भार

  1. जानें – निम्नलिखित शब्दों के उच्चारण पर ध्यान दीजिए-

(क) काल (समय)

कॉल (call)

(ख) बाल (केश)

बॉल (ball)

(घ) टाल (टालना)

टॉल (tall)

(ङ) हाल (हाल-चाल)

हॉल (hall)

(ग) काट (काटना)

कॉट (caught)

जिन शब्दों में ‘ऑ’ (ॉ) (अर्धचंद्र) का प्रयोग किया गया है, ये सभी अंग्रेज़ी भाषा के हैं। अर्धचंद्र इनका उच्चारण में सहायता करता है। हिंदी में इससे मिलती-जुलती दो ध्वनियाँ हैं- ‘ओ’ और ‘औ’। अंग्रेज़ी की यह ध्वनि ‘ओ’ और ‘उ’ की मिली-जुली ध्वनि है। अंग्रेजी शब्दों को हिंदी में स्वीकार कर लिए जाने के बाद इसका (ॉ) अर्धचंद्र का प्रयोग किया जाने लगा है। इसे आगत स्वर कहते हैं।

‘ऑ’ (ॉ) की ध्वनिवाले कुछ अन्य स्वर लिखिए-

डॉक्टर, ऑफिस, बॉस, कॉलेज, कॉपी, टॉफी।

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