Gulli Danda (Kahani) – Premchand, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution

पाठ का सारांश

मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘गुल्ली-डंडा’ बचपन की मासूमियत और बड़े होने पर आए सामाजिक व पद के बदलावों का मार्मिक चित्रण करती है।

यहाँ कहानी का सारांश दिया गया है –

  1. बचपन की यादें और गया की श्रेष्ठता

कहानी का लेखक बचपन में अपने कस्बे में गुल्ली-डंडा खेला करता था। वह गुल्ली-डंडे को ‘सब खेलों का राजा’ मानता है क्योंकि इसमें किसी महँगे सामान की ज़रूरत नहीं होती। उसके हमजोलियों में ‘गया’ नाम का एक लड़का था, जो गुल्ली-डंडे का चैंपियन था। वह जाति और आर्थिक स्थिति में लेखक से छोटा था, लेकिन खेल में उसका कोई मुकाबला नहीं था।

  1. बचपन की एक घटना

एक बार खेलते समय लेखक जो थानेदार का लड़का था हारने लगा और अपनी बारी अर्थात् दाँव दिए बिना भागने लगा। गया ने उसे ज़बरदस्ती रोका, जिस पर लेखक ने उसे दाँत से काट लिया और गया ने उसे डंडे से पीटा। उस समय उनके बीच कोई ऊँच-नीच नहीं थी, वे केवल दो दोस्त और खिलाड़ी थे।

  1. बीस साल बाद का बदलाव

बीस साल बाद लेखक उसी कस्बे में एक इंजीनियर के रूप में लौटता है। वहाँ उसकी मुलाक़ात फिर से गया से होती है, जो अब एक साईस (घोड़ों की देख-रेख करने वाला) बन चुका है। लेखक गया को फिर से साथ खेलने के लिए आमंत्रित करता है।

  1. औपचारिकता का खेल

मैदान में जब दोनों खेलते हैं, तो लेखक पुरानी बेईमानियाँ और धाँधलियाँ करता है, लेकिन गया चुपचाप सब सह लेता है। वह न तो विरोध करता है और न ही पहले की तरह निशाना लगा पाता है। लेखक को लगता है कि गया अब अपना नैपुण्य भूल गया है और वह आसानी से जीत जाता है।

  1. सच्चाई का अहसास

अगले दिन लेखक एक मैच देखने जाता है जहाँ गया दूसरे खिलाड़ियों के साथ खेल रहा था। वहाँ गया का शानदार खेल देखकर लेखक दंग रह जाता है। गया की गुल्ली आसमान से बातें कर रही थी। लेखक को तुरंत समझ आता है कि कल गया उसके साथ खेल नहीं रहा था, बल्कि उसे ‘खिला’ रहा था।

  1. कहानी का निष्कर्ष

लेखक को अहसास होता है कि उसकी ‘अफ़सरी’ अर्थात् पद की गरिमा उनके बीच एक दीवार बन गई है। बचपन में वे ‘समकक्ष’ अर्थात् बराबर थे, लेकिन अब पद और प्रतिष्ठा के कारण गया उसे अपना दोस्त नहीं, बल्कि अपना ‘मालिक’ समझता है। गया ने उसे अपना जोड़ नहीं समझा और दया का पात्र मानकर उसे जीतने दिया। लेखक अंत में महसूस करता है कि वह पद पाकर छोटा हो गया है और गया अपनी सादगी में उससे कहीं बड़ा हो गया है।

 

कठिन शब्दार्थ

1 अंग्रेज़ीदाँ – अंग्रेजी जानने वाले English-knowing persons

 2 स्मृतियों – यादों Memories

 3 प्रातःकाल – सुबह का समय Early morning

 4 टहनियाँ – छोटी शाखाएँ Twigs / Small branches

 5 जमघट – भीड़ या समूह Gathering / Crowd

 6 उन्मुक्तता – खुलापन / आजादी Openness / Freedom

 7 हमजोलियों – साथ खेलने वाले दोस्त Playmates / Peers

 8 चैंपियन – विजेता Champion

 9 निश्चित – पक्का Certain / Definite

 10 विचित्र – अनोखा / अजीब Strange / Peculiar

 11 अखरना – बुरा लगना To feel bad / Displease

 12 दिल्लगी – मज़ाक Jest / Joke

 13 अस्त्र – हथियार Weapon

 14 अपमानजनक – बेइज्जती भरा Insulting / Humiliating

 15 तबादला – स्थानांतरण Transfer

 16 दौरा – निरीक्षण के लिए यात्रा Tour / Inspection

 17 कस्बे – छोटा शहर Small town / Settlement

 18 खंडहर – टूटा-फूटा मकान Ruins

 19 काया पलट – पूरी तरह बदलना Transformation

 20 सहसा – अचानक Suddenly

 21 इंजीनियरी – अभियंता का कार्य Engineering

 22 डाकबँगला – सरकारी विश्राम गृह Inspection Bungalow

 23 डिप्टी साहब – उप-अधिकारी Deputy Officer

 24 साईस – घोड़े की देख-रेख करने वाला Groom / Syce

 25 धंधे – काम-काज Profession / Business

 26 गंभीर – शांत और विचारमग्न Serious / Solemn

 27 उत्सुकता – जानने की इच्छा Curiosity / Eagerness

 28 मगन – डूबा हुआ Engrossed

 29 सन्नाटा – खामोशी Silence / Stillness

 30 लपककर – फुर्ती से Nimbly / Quickly

 31 अभ्यास – रियाज़ Practice

 32 धाँधलियाँ – बेईमानी Unfair means / Cheating

 33 बेकायदगियाँ – नियम के विरुद्ध Irregularities

 34 अचूक – जो न चुके Unerring / Accurate

 35 असंतोष – नाराज़गी Dissatisfaction

 36 मजाल – हिम्मत / ताकत Audacity / Daring

 37 घपला – गड़बड़ी Fraud / Mess

 38 प्रत्यक्ष – आँखों के सामने Direct / Evident

 39 उदारता – बड़ा दिल दिखाना Generosity

 40 नैपुण्य – कुशलता / निपुणता Skill / Expertise

 41 गुल्ली – खेल की छोटी लकड़ी Tip-cat (Small wooden peg)

 42 डंडा – खेल की बड़ी लकड़ी Stick

 43 पदा रहा – दौड़ा रहा है/ बारी दे रहा To serve a turn

 44 पद रहा – दौड़ रहा है बारी ले रहा To take a turn

 45 दाँव – बारी Turn / Chance

 46 गुच्ची – छोटा गड्ढा Small pit in the ground

 47 निशाना – लक्ष्य Aim / Target

 48 टाँड़ – ऊँचा उछालना A high hit / Lofted shot

 49 लिहाज़ – सम्मान Deference / Regard

 50 अदब – शिष्टाचार Manners / Respect

 51 साहचर्य – साथ / मित्रता Companionship

 52 समकक्ष – बराबर Equal / Peer

 53 योग्य – काबिल Worthy / Capable

 54 दीवार – रुकावट Wall / Barrier

 55 मैच – मुकाबला Match / Contest

 56 सरल – सीधा-सादा Simple / Innocent

 57 छूत-अछूत – अस्पृश्यता Untouchability

 58 अंधकारमय – अँधेरे से भरा Gloomy / Dark

 59 डगमगाना – डोलना To waver / Totter

 60 हृदय – दिल Heart

 61 सहमे हुए – डरे हुए Cowed / Intimidated

 62 क्षण – पल Moment

 63 चिह्न – निशान Sign / Mark

 64 महारत – निपुणता Mastery

 65 विजय – जीत Victory

 66 उल्लास – बहुत खुशी Joy / Jubilation

 67 अनजान – जिसे जानकारी न हो Ignorant / Unaware

 68 दया – करुणा Pity / Compassion

 69 विशालता – बड़ा होना Vastness / Greatness

 70 फुरसत – खाली समय Leisure / Free time

 71 चकित – हैरान Amazed / Surprised

 72 लड़कपन – बचपन Childhood / Boyhood

 73 बहाना – ढोंग Pretense / Excuse

 74 पात्र – लायक व्यक्ति Deserving person

 75 अफ़सरी – पद का घमंड / रुतबा Officialdom

 76 लॉन – घास का मैदान Lawn

 77 थापी – क्रिकेट का बल्ला (पुरानी शैली) Bat / Paddle

 78 तिल्ली – शरीर का एक अंग Spleen

 79 रुचि – पसंद Interest / Taste

 80 वेग – तेज़ी Speed / Momentum

 81 विचारधारा – सोचने का तरीका Ideology / Thought process

 82 भविष्य – आने वाला समय Future

 83 सुविधा – आराम Convenience / Facility

 84 निश्चित – तय Fixed / Decided

 85 मुकाबला – प्रतियोगिता Competition / Confrontation

 86 अपमानजनक – शर्मनाक Humiliating

 87 शिकायत – गिला Complaint

 88 बीस साल – दो दशक Twenty years / Two decades

 89 मजाल – सामर्थ्य Power / Audacity

 90 अँधेरा – प्रकाश का अभाव Darkness

 91 चिराग – दीपक Lamp

 92 पड़ाव – रुकने की जगह Halt / Camp

 93 अधिकांश – ज़्यादातर Mostly / Majority

 94 तमाशा – खेल या नज़ारा Spectacle / Show

 95 मस्त – मगन Carefree / Absorbed

 96 दीवार – अंतर Separation / Barrier

 97 जोड़ – बराबरी Equal / Match

 98 उजागर – स्पष्ट करना To highlight / Expose

 99 उन्मुक्त – स्वतंत्र Unbound / Free

 100 तथ्य – सच्चाई Fact / Reality

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

डंडा, आँख, टाँग, टहनियाँ, अंधकारमय, दाँव, जाऊँ, देखूँ, दाँत, आँसू, हँसते, बँगले, खंडहर, सुंदर, गाँव, पाँच, धंधे, आनंद, गंभीर, धाँधलियाँ, बेकायदगियाँ, बाएँ, असंतोष, बंदूक, ईंट, अधिकांश, टाँड़ अंग्रेज़ीदाँ, लॉन, मज़े, स्मृतियों, निश्चित, स्वागत, हमजोलियों, अस्त्र, गुज़र, जिले, कस्बे, हृदय, ज़रा, साईस, कुल्हाड़ी, उत्सुकता, चिह्न, प्रत्यक्ष, अभ्यास, नैपुण्य, बेईमानियों, अफ़सर, लिहाज़, साहचर्य, समकक्ष

डंडा – Dan-daa

कस्बे – Kas-bay

आँख – Aankh (Nasal)

हृदय – Hri-day

टाँग – Taang (Nasal)

ज़रा – Za-raa (Z sound)

टहनियाँ – Tah-ni-yaan

साईस – Saa-ees

अंधकारमय – An-dh-kaar-may

कुल्हाड़ी – Kul-haa-dee

दाँव – Daanv (Nasal)

उत्सुकता – Ut-suk-taa

जाऊँ – Jaa-oon (Nasal)

चिह्न – Chih-na

देखूँ – Day-khoon (Nasal)

प्रत्यक्ष – Prat-yaksh

दाँत – Daant (Nasal)

अभ्यास – Ab-hyaas

आँसू – Aan-soo (Nasal)

नैपुण्य – Nai-pun-ya

हँसते – Hans-tay (Nasal)

बेईमानियों – Bay-ee-maa-ni-yon

बँगले – Bang-lay

अफ़सर – Af-sar (F sound)

खंडहर – Khan-d-har

लिहाज़ – Li-haaz (Z sound)

सुंदर – Sun-dar

साहचर्य – Saah-char-ya

गाँव – Gaanv (Nasal)

समकक्ष – Sam-kaksh

पाँच – Paanch (Nasal)

अंग्रेज़ीदाँ – Ang-ray-zee-daan

धंधे – Dhan-dhay

लॉन – Lawn (O sound)

आनंद – Aa-nand

मज़े – Ma-zay (Z sound)

गंभीर – Gam-bheer

स्मृतियों – Smri-ti-yon

धाँधलियाँ – Dhaan-dh-li-yaan

निश्चित – Nish-chit

बाएँ – Baa-ayn (Nasal)

स्वागत – Swaa-gat

असंतोष – A-san-tosh

हमजोलियों – Ham-jo-li-yon

बंदूक – Ban-dook

अस्त्र – As-tra

ईंट – Eent (Nasal)

गुज़र – Gu-zar (Z sound)

अधिकांश – A-di-kaansh

जिले – Zi-lay (Z sound)

टाँड़ – Taand (Nasal)

बेकायदगियाँ – Bay-kaa-yad-gi-yaan

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) लेखक ने गुल्ली-डंडे को खेलों का राजा क्यों कहा है?

उत्तर – लेखक ने गुल्ली-डंडे को खेलों का राजा इसलिए कहा है क्योंकि इसके लिए न तो किसी महँगे कोर्ट, नेट या बल्ले की ज़रूरत होती है और न ही किसी विशेष लॉन की। बस एक पेड़ की टहनी काटी और खेल शुरू हो गया।

(ख) बचपन में गया के डंडा मारने की शिकायत लेखक ने घर में किसी से क्यों नहीं की?

उत्तर – लेखक ने शिकायत इसलिए नहीं की क्योंकि उसे एक साधारण लड़के ‘गया’ के हाथों पिटना अपने आप में अपमानजनक मालूम हुआ। वह एक थानेदार का लड़का था और वह नहीं चाहता था कि किसी को उसकी हार और पिटाई का पता चले।

(ग) गया लेखक की किस बात के लिए मुश्किल से राज़ी हुआ?

उत्तर – गया लेखक के साथ दोबारा गुल्ली-डंडा खेलने के लिए बहुत मुश्किल से राज़ी हुआ, क्योंकि वह अब लेखक को अपने बचपन का दोस्त नहीं, बल्कि एक बड़ा अफ़सर मानकर संकोच कर रहा था।

(घ) बड़े हो जाने पर लेखक से हार जाने का गया ने क्या कारण बताया?

उत्तर – गया ने हार जाने का कोई सीधा कारण नहीं बताया, बल्कि उसने चुपचाप हार स्वीकार कर ली। वास्तव में वह हार नहीं रहा था, बल्कि लेखक के ‘अफ़सर’ पद का सम्मान करते हुए जानबूझकर उसे जिता रहा था।

लिखित

1. सही उत्तर पर लगाइए

(क) सब लड़के ‘गया’ को दूर से आते देखकर उसका स्वागत करते थे क्योंकि-

उत्तर – (ii) वह गुल्ली क्लब का चैंपियन था।

(ख) बचपन में भी लेखक को क्या अपमानजनक मालूम हुआ?

उत्तर – (iii) साधारण से लड़के से पिट जाना

(ग) बचपन में खेलते समय गया गरदन पर क्यों चढ़ बैठता था?

उत्तर – (iv) खेलते समय घपला करने पर

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) लेखक बचपन की किन मीठी स्मृतियों को याद कर रहा है?

उत्तर – लेखक सुबह उठते ही घर से निकल जाना, पेड़ों पर चढ़कर टहनियाँ काटना, गुल्ली-डंडा बनाना, दोस्तों का जमघट और खेल के दौरान होने वाले सरल वाद-विवाद जैसी मीठी स्मृतियों को याद कर रहा है।

(ख) बचपन में खेलते समय लेखक और गया परस्पर कैसा व्यवहार करते थे?

उत्तर – बचपन में उनके बीच ऊँच-नीच या अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं था। वे एक-दूसरे से लड़ते थे, अधिकार जताते थे और बराबर के साथी की तरह व्यवहार करते थे।

(ग) बीस साल बाद लौटने पर लेखक को कस्बे में क्या परिवर्तन दिखाई दिए?

उत्तर – लेखक ने देखा कि पुराने खंडहरों के स्थान पर पक्के मकान बन गए थे और जहाँ पहले पुराना बरगद का पेड़ था, वहाँ अब एक सुंदर बगीचा विकसित हो गया था। कस्बे की पूरी काया पलट हो चुकी थी।

(घ) बड़े हो जाने के बाद के खेल का वर्णन –

उत्तर – बड़े होने पर जब वे खेलने गए, तो खेल में वह पहले जैसा उत्साह नहीं था। लेखक बार-बार बेईमानी और धाँधली कर रहा था, और गया चुपचाप सब सहन कर रहा था। गया जानबूझकर अपना निशाना चूक रहा था ताकि लेखक जीत सके।

(ङ) लेखक को अनुभव हुआ कि गया उसे अपने जोड़ का नहीं समझता –

उत्तर – जब अगले दिन लेखक ने गया को अन्य युवाओं के साथ पूरी कुशलता और नैपुण्य के साथ खेलते देखा, तब उसे अहसास हुआ कि कल गया उसके साथ खेल नहीं रहा था बल्कि उसे ‘खिला’ रहा था। गया ने उसे एक दोस्त के बजाय ‘दया का पात्र’ समझा।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

उन्हीं दिनों पिता जी का वहाँ से तबादला हो गया। बीस साल गुज़र गए। मैंने इंजीनियरी पास की और उ ज़िले का दौरा करता हुआ उसी कस्बे में पहुँचा और डाक बँगले में ठहरा। उस स्थान को देखते ही इत मधुर बाल-स्मृतियाँ हृदय में जाग उठीं कि मैंने छड़ी उठाई और कस्बे की सैर करने निकला। जहाँ खंडहर वहाँ पक्के मकान खड़े थे। जहाँ बरगद का पुराना पेड़ था, वहाँ अब एक सुंदर बगीचा था। स्थान की कायापल हो गई थी। सहसा एक खुली जगह में मैंने दो-तीन लड़कों को गुल्ली डंडा खेलते देखा।

(क) पिता जी के तबादले के कितने साल बाद लेखक वापस कस्बे में लौटे?

उत्तर – पिता जी के तबादले के बीस साल बाद लेखक वापस कस्बे में लौटे।

(ख) उस स्थान को देखते ही लेखक के हृदय में क्या भावनाएँ जागीं?

उत्तर – उस स्थान को देखते ही लेखक के हृदय में मधुर बाल-स्मृतियाँ जाग उठीं।

(ग) लेखक ने खंडहर के स्थान पर क्या देखा?

उत्तर – लेखक ने खंडहर के स्थान पर पक्के मकान देखे।

(घ) सुंदर बगीचा कहाँ बन गया था?

उत्तर – पुराने बरगद के पेड़ के स्थान पर सुंदर बगीचा बन गया था ।

(ङ) एक खुली जगह में लेखक को क्या दिखाई दिया?

उत्तर – एक खुली जगह में लेखक को दो-तीन लड़के गुल्ली-डंडा खेलते हुए दिखे।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

लेखक और गया में ऐसा क्या परिवर्तन आ गया था कि गया लेखक की धाँधली और बेईमानियों पर क्रोध नहीं कर रहा था?

उत्तर – लेखक और गया के बीच ‘अफ़सरी’ की दीवार खड़ी हो गई थी। गया अब लेखक को अपना बचपन का साथी नहीं, बल्कि अपना ‘मालिक’ समझ रहा था। उसके मन में लेखक के पद के प्रति ‘अदब’ और ‘लिहाज़’ था, इसलिए वह उसकी बेईमानियों पर क्रोध नहीं कर रहा था।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए

(क) ‘डाकबंगला’ शब्द का सही समास विग्रह क्या होगा?

(i) अपमान से जनक

(iii) डाक के लिए बंगला

(ii) अपमान पर जनक

(iv) अपमान का जनक

(ख) किस शब्द में नुक्ते का प्रयोग नहीं किया जाएगा?

(i) लिहाज़

(ii) ज़रा

(iii) जोड़

(iv) मज़े

(ग) कौन-सा शब्द ‘अ’ उपसर्ग के प्रयोग से नहीं बना है?

(i) अचूक

(iii) असंतोष

(ii) अभ्यास

(iv) अस्वीकार

 

  1. जानें – अर्थ के आधार पर वाक्य आठ प्रकार के होते हैं-

(क) विधानवाचक – ऐसे वाक्य जिनमें किसी कार्य का होना बताया जाता है उन्हें विधानवाचक वाक्य

कहते हैं; जैसे- उसने मेरी पीठ पर डंडा जमा दिया।

(ख) निषेधवाचक -ऐसे वाक्य जिनसे किसी कार्य के न होने का बोध होता है उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे- उसकी फेंकी गुल्ली डंडे में लगती ही नहीं थी।

(ग) विस्मयादिवाचक- वे वाक्य जिनसे हर्ष, शोक, विस्मय आदि भाव प्रकट होते हैं, विस्मयवाचक वाक्य कहलाने हैं; जैसे- इस उम्र में भला गुल्ली-डंडा खेलूँगा!

(घ) संदेहवाचक ऐसे वाक्य जिनसे कार्य के होने या न होने के प्रति शंका या संदेह प्रकट होता है, उ

संदेहवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे- शायद गुल्ली डंडे में नहीं लगी।

(ङ) आज्ञावाचक- वे वाक्य जिनसे आज्ञा, अनुमति, आदेश आदि का पता चलता है, आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं; जैसे- आओ, आज मेरे साथ गुल्ली-डंडा खेलो।

(च) संकेतवाचक ऐसे वाक्य जिनसे किसी शर्त के साथ क्रिया के होने का पता चलता है संकेतवाचक

कहलाते हैं; जैसे- यदि गया तुम्हारी ओर से खेलेगा तो तुम्हारी जीत निश्चित है।

(छ) इच्छावाचक ऐसे वाक्य जिनसे इच्छा या कामना प्रकट करने का भाव पता चलता है, उन्हें इच्छावाचक वाक्य कहते हैं; जैसे- काश! गया मेरी अफ़सरी भूलकर मुझ अपना मित्र मान ले।

(ज) प्रश्नवाचक जिन वाक्यों से प्रश्न करने का भाव प्रकट होता है, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं; जैसे-

कहो गया, क्या अब भी गुल्ली-डंडा खेलते हो?

पाठ की घटनाओं के आधार पर इन आठों प्रकार के वाक्य बनाइए-

(क) विधानवाचक – गया हमारे क्लब का चैंपियन था।

(ख) निषेधवाचक – गया की गुल्ली डंडे में नहीं लगी।

(ग) विस्मयादिवाचक – वाह! गया का क्या अचूक निशाना है!

(घ) संदेहवाचक – शायद कल पुराने खिलाड़ी फिर से खेलेंगे।

(ङ) आज्ञावाचक – गया, तुम अपना दाँव ले लो।

(च) संकेतवाचक – यदि मैं धाँधली न करता, तो गया मुझे कभी जीतने न देता।

(छ) इच्छावाचक – काश! मैं फिर से बचपन का वही निडर बालक बन पाता।

(ज) प्रश्नवाचक – क्या तुम अब भी गुल्ली-डंडा खेलते हो?

 

  1. निम्नलिखित शब्दों में अनुस्वार (ं) अथवा अनुनासिक (ँ) लगाकर लिखिए-

(क) डंडा

(ख) टहनियाँ

(ग) तुरंत

(घ) आनंद

(ङ) डाकबँगला

(च) धाँधली

  1. नीचे दिए गए समस्त पदों का विग्रह करके लिखिए-

(क) गुल्ली-डंडा – गुल्ली और डंडा

(ख) कायदे-कानून – कायदे और कानून

(ग) लड़ाई-झगड़े – लड़ाई और झगड़े

(घ) अमीर-गरीब – अमीर और गरीब

(ङ) दाहिने-बाएँ – दाहिने और बाएँ

(च) छूत-अछूत – छूत और अछूत

  1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

(क) गुल्ली – गुल्लियाँ

(ख) टहनी – टहनियाँ

(ग) हथेली – हथेलियाँ

(घ) आँख – आँखें

(ङ) ईंट – ईंटें-

(च) शिकायत – शिकायतें

  1. निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-

(क) असंतोष – संतोष

(ख) विजय – पराजय

(ग) आसानी – कठिनाई

(घ) अनजान – जानकार

(ङ) प्रत्यक्ष – परोक्ष

(च) सरलता – कुटिलता

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. यदि गया अपने परिवार वालों को लेखक के अफ़सर बन जाने के बाद उसके साथ गुल्ली-डंडा खेलने की घटना बताता तो क्या-क्या कहता? खुद को गया मानकर एक अनुच्छेद में लिखिए।

उत्तर – “आज मैं तुम सबको एक बड़ी अचंभित करने वाली बात बताता हूँ। आज हमारे बचपन के वो साथी, जो अब बड़े ‘इंजीनियर साहब’ बन गए हैं, अचानक कस्बे में आ पहुँचे। उन्होंने मुझे पहचाना और बड़े ही मान के साथ अपनी मोटर में बिठाकर मैदान ले गए। वे कहने लगे कि वे अपना बचपन का उधार ‘दाँव’ चुकाना चाहते हैं।

खेल शुरू हुआ, तो मुझे पुराने दिन याद आ गए। साहब बिल्कुल वैसे ही बेईमानी और धाँधली कर रहे थे जैसे बचपन में किया करते थे, पर अब वे हमारे साथी नहीं, सरकार के बड़े अफ़सर हैं। मेरा दिल नहीं माना कि मैं उनके अफ़सरी के मान को ठेस पहुँचाऊँ। मैंने अपनी गुल्ली उनके डंडे में लगने ही नहीं दी और उनके झूठ को सच मान लिया। वे बार-बार धाँधली कर रहे थे, और मैं बस मुस्कुराकर हार रहा था।

उनकी जीत में जो खुशी दिख रही थी, उसे देखकर मुझे संतोष हुआ। वे अब भी दिल से वही छोटे बालक हैं, पर दुनिया की नज़र में वे बड़े साहब हैं। मैंने उनके साथ खेलकर उन्हें उनकी अफ़सरी का मान तो दिया, पर हमारी वह पुरानी बराबरी और बेतकल्लुफ़ी अब कहीं खो गई है। वे जीत तो गए, पर सच तो यह है कि मैं उन्हें बस ‘खिला’ रहा था।”

  1. इस कहानी को नाटक के रूप में लिखकर मंचित कीजिए।

उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करें।

  1. किसी खेल को आधार बनाकर एक अनुच्छेद में लिखिए।

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

 

गृहकार्य

निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए-

(क) चिराग – दीपक

(ख) फुरसत – खाली समय / अवकाश

(ग) जीत – विजय

(घ) ज़रूरत – आवश्यकता

(ङ) बचपन – लड़कपन / बाल्यकाल

(च) हमजोली – साथी / मित्र

(छ) साल – वर्ष

(ज) बहादुर – वीर

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