पाठ का सारांश
यह संस्मरण हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन की कुछ प्रेरक घटनाओं पर आधारित है। इसका सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है-
- बदला लेने का अनोखा तरीका
पाठ का शीर्षक “बदला तो मैंने भी लिया था” ध्यानचंद के खेल कौशल और नैतिक बल को दर्शाता है। 1933 के एक मैच के दौरान विपक्षी खिलाड़ी ने गुस्से में आकर ध्यानचंद के सिर पर हॉकी मार दी। घायल होने के बावजूद, उन्होंने मैदान पर लौटकर उस खिलाड़ी से कहा कि वे इसका बदला लेंगे। ध्यानचंद ने उसे मारकर नहीं, बल्कि 6 गोल दागकर बदला लिया। उन्होंने सिखाया कि खेल में गुस्सा नहीं, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन ही सबसे बड़ा जवाब है।
- हॉकी के जादूगर का उदय
ध्यानचंद का जन्म 1905 में इलाहाबाद में हुआ था। सेना में भर्ती होने से पहले उनका हॉकी में कोई विशेष रुझान नहीं था। सूबेदार मेजर बाले तिवारी की प्रेरणा से उन्होंने खेलना शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें इतना प्रसिद्ध बना दिया कि उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाने लगा। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में वे भारतीय टीम के कप्तान बने।
- खेल भावना और देशभक्ति
ध्यानचंद केवल खुद गोल करने में विश्वास नहीं रखते थे, बल्कि वे साथी खिलाड़ियों को गोल करने का अवसर देते थे। उनकी इसी खेल भावना और प्रतिभा से प्रभावित होकर जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने उन्हें जर्मनी की सेना में ऊँचे पद मार्शल का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया क्योंकि वे केवल अपने देश भारत के लिए खेलना चाहते थे।
- 15 अगस्त 1936 का ऐतिहासिक मैच
बर्लिन ओलंपिक का फाइनल मैच 15 अगस्त 1936 को हुआ। जर्मनी की टीम से अभ्यास मैच में हारने के कारण भारतीय टीम डरी हुई थी। मैदान गीला था, लेकिन मैनेजर पंकज गुप्ता द्वारा तिरंगा झंडा दिखाए जाने पर खिलाड़ियों का जोश बढ़ गया। भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। संयोगवश, यही तारीख आगे चलकर भारत का स्वतंत्रता दिवस बनी।
कठिन शब्दार्थ
1 – संस्मरण – यादें या अनुभव – Reminiscence / Memoirs
2 – विपक्षी – सामने वाली टीम – Opponent / Rival
3 – मान – सम्मान या गौरव – Honor / Respect
4 – स्वर्ण पदक – सोने का मेडल – Gold Medal
5 – रुझान – झुकाव या रुचि – Inclination / Tendency
6 – प्रतिभा – योग्यता या कौशल – Talent / Brilliance
7 – प्रेरणा – उत्साह देने वाली शक्ति – Inspiration
8 – प्रोन्नत – पद का बढ़ना – Promoted
9 – दिलचस्पी – रुचि – Interest
10 – नौसिखिया – नया सीखने वाला – Novice / Beginner
11 – निखरता – सुधार होना – Refined / Polished
12 – श्रेय – श्रेय या यश – Credit / Glory
13 – विचलित – परेशान या डरा हुआ – Disturbed / Distracted
14 – पराजय – हार – Defeat
15 – स्मरणीय – याद रखने योग्य – Memorable
16 – एकाग्रता – ध्यान केंद्रित करना – Concentration
17 – भंग – टूटना या बिखरना – Broken / Disturbed
18 – दिलचस्प – मज़ेदार – Interesting
19 – नाकाम – असफल – Unsuccessful / Failed
20 – व्यवहार – बर्ताव – Behavior
21 – जादूगर – चमत्कार करने वाला – Magician / Wizard
22 – विधिवत – नियम के अनुसार – Formal / Systematic
23 – प्रसिद्धि – ख्याति – Fame / Popularity
24 – साधना – कठिन अभ्यास – Dedicated practice / Discipline
25 – लगन – कड़ी मेहनत की इच्छा – Devotion / Dedication
26 – खेल-भावना – खेल के प्रति नैतिकता – Sportsmanship
27 – गुरुमंत्र – सफलता का मूल मंत्र – Secret of success
28 – साधारण – आम या मामूली – Simple / Ordinary
29 – निडर – जिसे डर न लगे – Fearless
30 – तानाशाह – निरंकुश शासक – Dictator
31 – गौरव – अभिमान या गर्व – Pride / Dignity
32 – लाज – सम्मान या शर्म – Honor / Grace
33 – स्मृित – याद – Memory
34 – शर्मिंदा – लज्जित – Ashamed
35 – विजयी – जीतने वाला – Victorious
36 – तबादला – स्थानांतरण – Transfer
37 – रेजीमेंट – सेना की टुकड़ी – Regiment
38 – सूबेदार – सेना का एक पद – Subedar (A rank)
39 – लांस नायक – सेना का एक पद – Lance Naik (A rank)
40 – सिपाही – सैनिक – Soldier / Private
41 – छावनी – सेना के रहने की जगह – Cantonment
42 – भरती – सेना में शामिल होना – Recruitment / Enlistment
43 – अधिकारी – पद पर आसीन व्यक्ति – Officer
44 – मार्शल – सेना का उच्चतम पद – Marshal (Highest rank)
45 – शाही सलामी – राजकीय सम्मान – Royal Salute
46 – धक्का-मुक्की – आपसी टकराव – Jostling / Shoving
47 – घायल – चोटिल – Injured / Wounded
48 – मनोदशा – मन की स्थिति – State of mind / Mood
49 – गूँज – आवाज़ की प्रतिध्वनि – Echo / Resonance
50 – एकाग्रता – एकचित्त होना – Concentration
51 – शर्मिंदा – पछतावा होना – Embarrassed
52 – बुराई – गलत काम – Evil / Bad deed
53 – विचित्र – अजीब – Strange / Peculiar
54 – भय – डर – Fear
55 – दहशत – गहरा डर – Terror / Panic
56 – कटु – कड़वा – Bitter
57 – प्रतिकूल – जो अनुकूल न हो – Adverse / Unfavorable
58 – परिस्थिति – हालात – Circumstance / Situation
59 – चिंतित – फिक्रमंद – Worried / Anxious
60 – निराश – आशा छोड़ देना – Hopeless / Disappointed
61 – आधारित – टिका हुआ – Based on
62 – विपक्षी – विरोधी – Opposition
63 – दनादन – तेज़ी से – Rapidly / One after another
64 – निश्चित – तय किया हुआ – Fixed / Certain
65 – निखरना – चमकना या सुधरना – To shine / To improve
66 – प्रभावित – असर पड़ना – Influenced / Impressed
67 – तानाशाह – मनमानी करने वाला – Dictator
68 – पद – औहदा – Post / Rank
69 – स्मरणीय – यादगार – Memorable
70 – ड्रेसिंग रूम – कपड़े बदलने का कमरा – Dressing room
71 – अभ्यास – कोशिश या रियाज़ – Practice
72 – परिणाम – नतीजा – Result / Outcome
73 – वर्षा – बारिश – Rain
74 – तिरंगा – तीन रंगों वाला झंडा – Tricolor (National flag)
75 – स्वतंत्रता – आज़ादी – Independence / Freedom
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
हॉकी, रुझान, ड्रॉ, प्रसिद्धि, प्रोन्नत, संस्मरण, धक्का-मुक्की, दिलचस्प, एकाग्रता, शर्मिंदा, गुरुमंत्र, ब्रह्मिन नौसिखिया, लांसनायक, श्रेय, स्मरणीय, ड्रेसिंग रूम, एकत्र, स्मृति, परिस्थिति, स्वतंत्रता
हॉकी – Hock-ee
रुझान – Ru-jhaan
ड्रॉ – Draw –
प्रसिद्धि – Pra-sid-dhee
प्रोन्नत – Pron-nat
संस्मरण – Sans-ma-ran
धक्का-मुक्की – Dhak-ka Muk-kee
दिलचस्प – Dil-chasp
एकाग्रता – E-kaag-ra-ta
शर्मिंदा – Shar-min-da
गुरुमंत्र – Guru-man-tra
ब्रह्मिन – Brah-min
नौसिखिया – Nau-si-khi-ya
लांसनायक – Lance-na-yak
श्रेय – Shray – Shray
स्मरणीय – Smar-nee-ya
ड्रेसिंग रूम – Dressing Room
एकत्र – E-ka-tra
स्मृति – Smri-ti
परिस्थिति – Pa-ris-thi-ti
स्वतंत्रता – Swa-tan-tra-ta
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) ध्यानचंद की प्रतिभा को किसने और कब पहचाना?
उत्तर – सूबेदार मेजर बाले तिवारी ने ध्यानचंद की प्रतिभा को तब पहचाना जब वे सेना की रेजीमेंटों के बीच खेले जाने वाले एक मैच में भाग ले रहे थे।
(ख) न्यूज़ीलैंड में हॉकी के खेल में अच्छे प्रदर्शन का ध्यानचंद को क्या पुरस्कार मिला?
उत्तर – न्यूज़ीलैंड में शानदार प्रदर्शन के बाद जब वे स्वदेश लौटे, तो उन्हें प्रोन्नत करके ‘लांस नायक’ बना दिया गया।
(ग) ध्यानचंद के बारे में जानकर हिटलर ने अपने अधिकारी से क्या कहा?
उत्तर – हिटलर ने अपने अधिकारी से कहा कि ध्यानचंद से कहो कि वह जर्मनी आ जाए, मैं उसे मार्शल बना दूँगा।
(घ) फ़ाइनल मैच से पहले तिरंगे को सलामी देने का भारतीय खिलाड़ियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर – तिरंगे को सलामी देने से खिलाड़ियों में वीर सैनिकों जैसा जोश भर गया। वे अपने देश और झंडे की लाज रखने के लिए जी-जान से मैदान में उतर पड़े।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) ध्यानचंद की विधिवत शिक्षा कक्षा छह से आगे न हो सकी क्योंकि-
(i) वे आगे पढ़ना नहीं चाहते थे।
(ii) उनके गाँव में स्कूल नहीं था।
(iii) पिता के लगातार तबादले होते रहते थे।✓
(iv) उनकी पढ़ाई से अधिक खेल में रुचि थी।
(ख) ध्यानचंद की किस बात ने जर्मनी के तानाशाह हिटलर का दिल जीत लिया?
(i) उसके द्वारा किए गए गोलों ने
(ii) उसके खेलने के तरीके ने
(iii) उसकी खेल भावना ने✓
(iv) उसके साथी खिलाड़ियों के साथ व्यवहार ने
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) न्यूजीलैंड गई भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
उत्तर – भारतीय टीम का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा। टीम ने कुल अठारह मैच जीते, दो मैच ड्रा रहे और केवल एक मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
(ख) माइनर्स टीम के खिलाड़ी ने ध्यानचंद के सिर पर हॉकी क्यों मारी?
उत्तर – माइनर्स टीम का वह खिलाड़ी ध्यानचंद से गेंद छीनने की हर कोशिश में नाकाम हो रहा था, इसलिए उसने गुस्से में आकर ध्यानचंद के सिर पर हॉकी मार दी।
(ग) सफलता प्राप्त करने के लिए कौन-कौन से गुण आवश्यक होते हैं?
उत्तर – ध्यानचंद के अनुसार सफलता प्राप्त करने के लिए लगन, साधना और खेल-भावना जैसे गुण आवश्यक होते हैं।
(घ) 15 अगस्त 1936 के दिन को ध्यानचंद ने स्मरणीय क्यों कहा है?
उत्तर – क्योंकि उस दिन बर्लिन ओलंपिक के फाइनल मैच में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता और तिरंगे का मान बढ़ाया। साथ ही, यही तारीख आगे चलकर भारत का स्वतंत्रता दिवस बनी।
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
अब मुझे ही देखिए। मेरा जन्म 1905 में प्रयाग में एक साधारण राजपूत परिवार में हुआ था। बाद में हम लोग झाँसी आकर बस गए। सत्रह साल की उम्र में मैं एक साधारण सिपाही के रूप में फ़र्स्ट ब्रह्मिन रेजीमेंट में भरती हुआ। उस समय तक मुझे हॉकी खेलने में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन मेरी रेजीमेंट का हॉकी खेलने में बहुत नाम था। हमारी रेजीमेंट के सूबेदार मेजर बाले तिवारी बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते थे। हमारी छावनी में हॉकी खेलने का कोई निश्चित समय नहीं था। सैनिक जब चाहते मैदान में जाकर खेलने लगते। उस समय मैं एक नौसिखिया खिलाड़ी था।
(क) ध्यानचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर – ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ था।
(ख) ध्यानचंद सेना की किस रेजीमेंट में भरती हुए?
उत्तर – ध्यानचंद सेना की फ़र्स्ट ब्रह्मिन रेजीमेंट में भरती हुए थे।
(ग) हॉकी खेलने में किस रेजीमेंट का नाम था?
उत्तर – हॉकी खेलने में फ़र्स्ट ब्रह्मिन रेजीमेंट का नाम था।
(घ) ध्यानचंद को हॉकी खेलने के लिए किसने?
उत्तर – ध्यानचंद को हॉकी खेलने के लिए सूबेदार मेजर बाले तिवारी ने प्रेरित किया ।
(ङ) निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
साधारण × असाधारण
निश्चित x अनिश्चित।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
ध्यानचंद ने विरोधी टीम से बदला कैसे लिया? इससे हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर – ध्यानचंद ने विरोधी खिलाड़ी को मारकर नहीं, बल्कि मैच में एक के बाद एक 6 गोल दागकर अपना बदला लिया। इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपना आपा नहीं खोना चाहिए। बदला हिंसा से नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा और श्रेष्ठ कार्य से लेना चाहिए।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-
(क) किस शब्द में अनुस्वार (ं) का प्रयोग नहीं होगा?
(i) संसार
(ii) ओलंपिक
(iii) संस्मरण
(iv) घटनाएँ ✓
(ख) सही वर्तनी वाला शब्द कौन-सा है?
(i) नौसखिया
(ii) नौसिखया
(iii) नौसिखिया ✓
(iv) नौसिखीया
(ग) ‘स्मृति’ का बहुवचन रूप क्या होगा?
(i) स्मृतिएँ
(ii) स्मृतियाँ ✓
(iii) स्मृतीएँ
(iv) स्मृतीयाँ
- वाक्यों से संज्ञा पदबंध छाँटकर लिखिए-
(क) शुरू में ये सेना की रेजीमेंटों के बीच खेले जाने वाले मैचों में भाग लेते थे।
पदबंध – सेना की रेजीमेंटों के बीच खेले जाने वाले मैचों
(ख) ध्यानचंद के खेल की प्रसिद्धि की गूँज सारे संसार में छा गई।
पदबंध – ध्यानचंद के खेल की प्रसिद्धि की गूँज
(ग) बच्चे मुझे घेरकर मेरी सफलता का राज़ जानना चाहते हैं।
पदबंध – मेरी सफलता का राज़
(घ) अभ्यास मैच में जर्मनी द्वारा मिली पराजय का असर हम सभी पर दिख रहा था।
पदबंध – जर्मनी द्वारा मिली पराजय का असर
- रेखांकित शब्दों के स्थान पर उनके समानार्थक शब्द प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए-
(क) मैं अपने जीवन की कुछ दिलचस्प घटनाएँ आपको सुनाता हूँ।
मैं अपने जीवन की कुछ रोचक घटनाएँ आपको सुनाता हूँ।
(ख) दोस्त इतना गुस्सा अच्छा नहीं होता।
सखा/मित्र इतना क्रोध अच्छा नहीं होता।
(ग) वह खिलाड़ी अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हुआ।
वह खिलाड़ी अपने किए पर बहुत लज्जित हुआ।
(घ) हार या जीत मेरी नहीं मेरे देश की है।
विजय या पराजिय मेरी नहीं मेरे देश की है।
- पाठ से छाँटकर निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-
(क) याद करने योग्य स्मरणीय
(ख) जिसने सीखना शुरू किया है नौसिखिया
(ग) भारत में रहने वाले भारतीय
(घ) तीन रंगों से बना है जो तिरंगा
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) बुराई × भलाई
(ख) निराश × आशावान
(ग) रुचि × अरुचि
(घ) प्रतिकूल × अनुकूल
(ङ) विजयी × पराजित
(च) स्वदेश × विदेश
- निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय अलग करके लिखिए-
(क) प्रसिद्धि – प्र (उपसर्ग) + सिद्ध (मूल शब्द) + इ (प्रत्यय)
(ख) प्रभावित – प्र (उपसर्ग) + भाव (मूल शब्द) + इत (प्रत्यय)
(ग) सफलता – स (उपसर्ग) + फल (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
(घ) स्वतंत्रता – स्व (उपसर्ग) + तंत्र (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
रोचक क्रियाकलाप
- यदि आपको ध्यानचंद से प्रश्न पूछने का अवसर मिलता तो आप उनसे क्या-क्या प्रश्न पूछते- चार प्रश्नबनाकर लिखिए।
उत्तर – यदि मुझे हॉकी के जादूगर ध्यानचंद जी से मिलने का अवसर मिलता, तो मैं उनसे निम्नलिखित प्रश्न पूछता –
प्रश्न 1 – “जब विरोधी खिलाड़ी ने आपके सिर पर हॉकी मारी, तो उस समय अपने गुस्से को नियंत्रित कर उसे खेल से जवाब देने का विचार आपके मन में कैसे आया?”
प्रश्न 2 – “आजकल के युवा खिलाड़ियों के लिए आप ‘एकाग्रता’ (Concentration) बढ़ाने का क्या गुरुमंत्र देना चाहेंगे?”
प्रश्न 3 – “हिटलर जैसे शक्तिशाली तानाशाह के सामने उसके देश का पद ठुकराते समय आपके मन में क्या भावनाएँ थीं?”
प्रश्न 4 – “हॉकी स्टिक के साथ गेंद को इस कदर चिपकाए रखने के पीछे आपकी जादुई तकनीक या अभ्यास का क्या रहस्य है?”
- भारत ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत लिया है। यह सूचना समाचार पत्र में छपवानी है। इसे समाचार रूप में लिखिए।
उत्तर – तिरंगे की शान – भारतीय हॉकी टीम ने बर्लिन ओलंपिक में जीता स्वर्ण पदक
बर्लिन, 15 अगस्त 1936 – आज बर्लिन का मैदान भारतीय हॉकी टीम के ऐतिहासिक कौशल का गवाह बना। भारी वर्षा और फिसलन भरे मैदान की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय टीम ने फाइनल मैच में जर्मनी को 8-1 के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी। कप्तान ध्यानचंद ने अपनी जादुई हॉकी का प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक कई गोल दागे। मैच शुरू होने से पहले भारतीय खिलाड़ियों ने तिरंगे को शाही सलामी दी, जिससे टीम में देशभक्ति का नया संचार हुआ। खेल के अंत में जब भारतीय तिरंगा बर्लिन के आसमान में लहराया, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने भी ध्यानचंद की खेल भावना की सराहना की है। यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
- अपने साथ खेल के मैदान में हुई किसी रोचक घटना को एक अनुच्छेद में लिखिए।
उत्तर – मेरे साथ खेल के मैदान में हुई सबसे रोचक घटना पिछले साल के वार्षिक खेल उत्सव की है। मैं अपनी कक्षा की फुटबॉल टीम का गोलकीपर था। फाइनल मैच बहुत ही रोमांचक मोड़ पर था और स्कोर 1-1 की बराबरी पर था। खेल के आखिरी मिनट में विरोधी टीम के स्ट्राइकर ने एक बहुत तेज़ किक मारी। मैं गेंद को रोकने के लिए बाईं ओर कूदा, लेकिन मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर पड़ा। मुझे लगा कि गोल हो जाएगा और हम हार जाएँगे। लेकिन तभी चमत्कार हुआ! गिरते-गिरते मेरा जूता पैर से निकलकर हवा में गेंद से जा टकराया और गेंद गोल पोस्ट के ऊपर से निकल गई। रेफरी और दर्शक सब दंग रह गए। हालाँकि मुझे थोड़ी चोट लगी, लेकिन उस ‘जूते के बचाव’ (Boot Save) ने हमारी टीम को हारने से बचा लिया और अंत में हमने पेनल्टी शूटआउट में मैच जीत लिया। वह दिन मुझे हमेशा याद रहेगा।
गृहकार्य
- निम्नलिखित समस्तपदों का विग्रह करके लिखिए-
(क) खेल-भावना – खेल की भावना
(ख) स्वर्ण-पदक – स्वर्ण का पदक
(ग) अभ्यास-मैच – अभ्यास के लिए मैच
(घ) ड्रेसिंग रूम – ड्रेस बदलने का रूम (कमरा)
- निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
(क) हॉकी – हॉकियाँ (खेल के संदर्भ में ‘हॉकी स्टिक्स’)
(ख) तरक्की – तरक्कियाँ
(ग) बुराई – बुराइयाँ
(घ) स्मृति – स्मृतियाँ

