Giridhar Ki Kundaliyan (Madhyakaleen Kavita) – Giridhar Kaviray, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution

पाठ की व्याख्या

कवि गिरधर की कुंडलियाँ व्यवहारिक ज्ञान और नीतिपरक शिक्षाओं का भंडार हैं। ‘कुंडलिया’ छंद की विशेषता यह है कि यह जिस शब्द से शुरू होता है, उसी पर समाप्त होता है।

(1) गुणों का महत्त्व (Importance of Virtues)

गुन के गाहक सहस नर, बिनु गुन लहै न कोय।

जैसे कागा कोकिला, शब्द सुने सब कोय॥

शब्द सुने सब कोय, कोकिला सबै सुहावन।

दोऊ को इक रंग, काग सब भए अपावन॥

कह गिरधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के।

बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥

व्याख्या – कवि कहते हैं कि इस संसार में हज़ारों लोग केवल गुणों की कद्र करने वाले ग्राहक होते हैं। बिना गुण के कोई किसी को नहीं पूछता। कवि कौआ और कोयल का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि दोनों का रंग एक समान अर्थात् काला होता है और दोनों की आवाज़ सब सुनते हैं, लेकिन कोयल अपनी मीठी वाणी के कारण सबको प्रिय अर्थात् सुहावनी लगती है, जबकि कौआ अपनी कर्कश आवाज़ के कारण अपवित्र माना जाता है।

सीख – मनुष्य की पहचान उसके रूप-रंग से नहीं, बल्कि उसके गुणों और मधुर वाणी से होती है।

 

(2) विचारपूर्ण कार्य (Thinking before Acting)

बिना बिचारे जो करे, सो पाछे पछताए।

काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय॥

जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावे॥

खान-पान, सनमान’, राग-रँग मनहि’ न भावै॥

कह गिरधर कविराय, दुःख कछु टरत न टारे।

खटकत है जिय‘ माँहि, किए जो बिना बिचारे॥

व्याख्या – जो व्यक्ति किसी भी काम को बिना सोचे-विचारे जल्दबाजी में करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा करने से न केवल उसका काम बिगड़ जाता है, बल्कि दुनिया में उसकी जगहँसी भी होती है। काम बिगड़ने के बाद व्यक्ति का मन अशांत रहता है; उसे न खाना-पीना अच्छा लगता है, न सम्मान और न ही मनोरंजन सुहाता है। कवि कहते हैं कि बिना विचारे किए गए कार्य का दुख हृदय में हमेशा खटकता रहता है।

सीख – पछतावे और अपमान से बचने के लिए कोई भी कदम उठाने से पहले गंभीरता से सोच-विचार कर लेना चाहिए।

 

(3) स्वार्थी संसार (Selfish World)

साईं या संसार में, मतलब को ब्योहार”।

जब लगि पैसा गाँठ में, तब लगि ताके यार॥

तब लगि ताके यार, यार संग -ही-संग डोले।

पैसा रहा न पास, यार मुख से नहि बोले॥

कह गिरधर कविराय, जगत यहि लेखा भाई

करत बेगरजी प्रीत, यार बिरला कोई साईं॥

व्याख्या – कवि इस संसार की कड़वी सच्चाई बताते हुए कहते हैं कि यहाँ अधिकांश व्यवहार मतलब व स्वार्थ पर आधारित है। जब तक आपके पास धन है, तब तक हज़ारों मित्र आपके साथ घूमेंगे और आपसे रिश्ता रखेंगे। लेकिन जैसे ही धन समाप्त होता है, वही मित्र मुख मोड़ लेते हैं और बात तक नहीं करते। कवि कहते हैं कि इस जगत का यही दस्तूर है; बिना किसी स्वार्थ के प्रेम करने वाला मित्र तो कोई बिरला अर्थात् हज़ारों में एक ही होता है।

सीख – सच्चे और मतलबी मित्रों की पहचान करना आवश्यक है। धन के साथी कभी सच्चे मित्र नहीं होते।

(4) धन का अभिमान न करना (Avoid Pride of Wealth)

दौलत पाय न कीजिए, सपने हू अभिमान।

चंचल जल दिन चारि को, ठाउँ न रहत निदान॥

ठाउँ न रहत निदान, जियत जग में जस लीजे।

मीठे वचन सुनाय, विनय सब ही की कीजे॥

कह गिरधर कविराय, अरे यह सब घट तौलत।

पाहुन निसि दिन चारि, रहत सब ही के दौलत॥

व्याख्या – कवि गिरधर कहते हैं कि धन-संपत्ति प्राप्त करके सपने में भी घमंड नहीं करना चाहिए। वे धन की तुलना ‘चंचल जल’ अर्थात् बहते हुए पानी से करते हैं, जो कभी एक स्थान पर टिककर नहीं रहता। चूँकि धन अस्थायी है, इसलिए जब तक यह आपके पास है, तब तक जग में सुयश अर्थात् अच्छे कर्म कमाना चाहिए। सबसे मीठे वचन बोलने चाहिए और विनय के साथ व्यवहार करना चाहिए। कवि के अनुसार, धन तो मात्र चार दिन का मेहमान है, जो आज आपके पास है तो कल किसी और के पास होगा।

सीख – धन आने-जाने वाली वस्तु है, इसलिए इंसान को अहंकार छोड़कर विनम्रता और परोपकार को अपनाना चाहिए।

 

कठिन शब्दार्थ

  1. प्रथम कुंडली (गुणों का महत्त्व)

 

 गाहक – ग्राहक / कद्र करने वाला Customer / Appreciator

 सहस – हज़ारों Thousands

 लहै – प्राप्त करना / मिलना To get / obtain

 कोय – कोई Anyone

 कागा – कौआ Crow

 कोकिला – कोयल Cuckoo

 सुहावन – प्यारा / सुखद Pleasant / Sweet

 दोऊ – दोनों Both

 अपावन – अपवित्र Impure / Unholy

 ठाकुर मन के – मन के मालिक (मनुष्य) Master of mind (Human)

 

  1. द्वितीय कुंडली (विचारपूर्ण कार्य)

 पाछे – बाद में Later / Afterwards

 बिगारे – बिगाड़ना / खराब करना To spoil / ruin

 हँसाय – उपहास / हँसी Ridicule / Mockery

 चित्त – मन / हृदय Mind / Heart

 चैन – शांति Peace / Relief

 भावै – अच्छा लगना To like / appeal

 टरत – टलना / हटना To avoid / avert

 जिय माँहि – हृदय के भीतर Inside the heart

 खटकत – चुभना / पीड़ा देना To prick / irritate

 

  1. तृतीय कुंडली (स्वार्थी संसार)

 साईं – स्वामी / ईश्वर / मित्र Lord / Friend

 ब्योहार – व्यवहार Dealings / Conduct

 जब लगि – जब तक As long as

 गाँठ – पास / जेब में In possession (pocket)

 यार – मित्र Friend

 डोले – साथ घूमना To wander / roam

 लेखा – दस्तूर / तरीका Tradition / Way

 बेगरजी – निस्वार्थ (बिना गरज के) Selfless / Without greed

 बिरला – कोई एक (दुर्लभ) Rare / Unique

 

  1. चतुर्थ कुंडली (धन और विनम्रता)

सपने हू – सपने में भी Even in dreams

 चंचल – अस्थिर (जो टिके नहीं) Fickle / Unstable

 ठाउँ – स्थान / जगह Place / Station

 निदान – निश्चित रूप से / अंत में Finally / Surely

 जस – यश / प्रसिद्धि Fame / Glory

 विनय – विनम्रता Humility / Politeness

 घट – शरीर / हृदय Body / Soul

 तौलत – परखना / जाँचना To weigh / evaluate

 पाहुन – मेहमान Guest

 निसि – रात Night

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

सुहावन, दोऊ, लहै, पाछे पछताय, हँसाय, सनमान, भावै, माँहि, साईं, ब्योहार, गाँठ, बेगरजी, ठाउँ, तौलत, पाहुन

सुहावन – Su-haa-van

साईं – Saa-ee-n (Nasal)

दोऊ – Do-oo

ब्योहार – Byo-haar

लहै – La-hai

गाँठ – Gaan-th

पाछे पछताय – Paa-chhay Pach-taay

बेगरजी – Bay-gar-jee

हँसाय – Han-saay

ठाउँ – Thaa-un (Nasal)

सनमान – San-maan

तौलत – Tau-lat

भावै – Bhaa-vai

पाहुन – Paa-hun

माँहि – Maan-hi

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए –

(क) गुणहीन व्यक्ति की तुलना कवि ने किससे की है और क्यों?

उत्तर – कवि ने गुणहीन व्यक्ति की तुलना कौवे से की है। जिस प्रकार कौवे और कोयल का रंग एक समान होता है, परंतु अपनी कर्कश आवाज़ के कारण कौवा ‘अपावन’ अर्थात् अपवित्र माना जाता है, उसी प्रकार गुणहीन व्यक्ति को भी समाज में कोई सम्मान नहीं मिलता।

(ख) कवि गिरिधर के अनुसार कैसा व्यक्ति समाज में उपहास का पात्र बन जाता है?

उत्तर – जो व्यक्ति बिना सोचे-विचारे जल्दबाजी में कार्य करता है, उसका काम बिगड़ जाता है और वह समाज में उपहास अर्थात् हँसी का पात्र बन जाता है।

(ग) कवि के अनुसार समाज में अधिकतर मित्र कैसे होते हैं?

उत्तर – कवि के अनुसार समाज में अधिकतर मित्र स्वार्थी और मतलबी होते हैं। वे तब तक साथ रहते हैं जब तक व्यक्ति के पास धन-दौलत होती है।

(घ) कवि ने धन संपत्ति की तुलना किससे की है?

उत्तर – कवि ने धन-संपत्ति की तुलना ‘चंचल जल’ और ‘पाहुन’ अथवा मेहमान से की है, क्योंकि यह कभी एक स्थान पर टिककर नहीं रहती।

 

लिखित

1. सही विकल्प पर लगाइए

(क) कौवे को ‘अपावन’ क्यों कहा गया है?

(i) उसके काले रंग के कारण

(ii) कोयल के मीठा बोलने के कारण

(iii) उसकी कर्कश बोली के कारण

(iv) उसके गंदगी खाने के कारण

(ख) कैसे व्यक्ति को चित्त में चैन नहीं मिलता ?

(i) जिसका दुख दूर न हुआ हो।

(ii) जिसे सम्मान नहीं मिला हो।

(iii) जिसका काम बिगड़ गया हो।

(iv) जिसने बिना विचारे काम किया हो।

(ग) कैसे मित्र ‘बिरले’ होते हैं?

(i) सदा साथ रहने वाले।

(ii) धन को महत्त्व देने वाले।

(iii) अपना स्वार्थ देखने वाले।

(iv) बिना किसी स्वार्थ के प्रेम करने वाले।

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) कवि गिरिधर ने कौवे और कोयल का उदाहरण देकर क्या सीख दी है?

उत्तर – कवि गिरिधर ने कौवे और कोयल का उदाहरण देकर यह सीख दी है कि रूप-रंग से अधिक महत्त्व गुणों और मधुर वाणी का होता है। गुणवान व्यक्ति को ही हज़ारों लोग पसंद करते हैं।

(ख) किन परिस्थितियों में व्यक्ति का काम-काज में मन नहीं लगता?

उत्तर – जब व्यक्ति बिना सोचे-समझे काम करके उसे बिगाड़ लेता है, तब उसकी जग में हँसाई होने के कारण उसका मन अशांत रहता है और काम-काज में मन नहीं लगता।

(ग) मतलबी लोगों का व्यवहार कैसा होता है?

उत्तर – मतलबी लोगों का व्यवहार स्वार्थ पर आधारित होता है। जब तक मित्र की जेब में पैसा होता है, वे साथ घूमते हैं, पर पैसा खत्म होते ही वे बोलना भी छोड़ देते हैं।

(घ) कवि के अनुसार धनवान व्यक्ति को अपना जीवन किस प्रकार व्यतीत करना चाहिए?

उत्तर – धनवान व्यक्ति को अभिमान छोड़कर मीठे वचन बोलने चाहिए, सभी के साथ विनम्रता का व्यवहार करना चाहिए और जग में यश कमाने का प्रयास करना चाहिए।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

  1. गुणवान व्यक्ति को समाज किस दृष्टि से देखता है?

उत्तर – समाज गुणवान व्यक्ति को सम्मान और आदर की दृष्टि से देखता है। हज़ारों लोग उसके गुणों के ग्राहक अर्थात् चाहनेवाले होते हैं।

  1. धन-संपत्ति प्राप्त करके अभिमान क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर – धन-संपत्ति प्राप्त करके अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि धन-संपत्ति अस्थायी है। यह आज है और कल नहीं, इसलिए आने-जाने वाली वस्तु पर गर्व करना मूर्खता है।

भाषा ज्ञान

  1. सही विकल्प पर लगाइए-

(क) ‘अपावन’ का विलोम रूप क्या होगा?

(i) वन

(ii) आवन

(iii) पावन

(iv) अनपावन

(ख) ‘बेगरजी’ का समानार्थक शब्द क्या होगा?

(i) अगरज

(ii) स्वार्थी

(iii) मतलबी

(iv) निस्वार्थ

 

  1. निम्नलिखित वर्ण विच्छेद अंशों से शब्द बनाकर लिखिए-

(क) स् + उ + ह् + आ + व् + अ + न् + अ = सुहावन

(ख) क् + अ + व् + इ + र् + आ + य् + अ = कविराय

(ग) प् + र् + ई + त् + अ = प्रीत

(घ) प् + आ + ह् + उ + न् + अ = पाहुन

(ङ) च् + अ + ञ् + च् + अ + ल + अ = चंचल

 

  1. दिए गए शब्दों से तत्सम तद्भव और देशज शब्द अलग करके लिखिए- ब्योहार, जस, अभिमान, टारे, गाँठ, प्रीत, जग, बिगारै, लहै, निसि, खटकत, नर
  • तत्सम – अभिमान, प्रीत, निसि, नर।
  • तद्भव – जस, जग, गाहक (पाठ के आधार पर), सपना।
  • देशज – ब्योहार, टारे, गाँठ, बिगारै, लहै, खटकत।

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए-

(क) जग – संसार, दुनिया, विश्व

(ख) कोयल – कोकिला, पिक, श्यामा

(ग) मित्र – दोस्त, सखा, मीत

(घ) धन – दौलत, संपत्ति, लक्ष्मी

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-

(क) गुन – गुण

ख) सनमान – सम्मान

(ग) ब्योहार – व्यवहार

(घ) गाहक – ग्राहक

(ङ) सहस – सहस्र

(च) सपना –स्वप्न

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. गिरधर की कुंडलियों को पढ़कर आपने जो शिक्षा प्राप्त की उसे दादा जी/नाना जी को पत्र लिखकर बताइए।

उत्तर – दिनांक – 28 फरवरी, 20XX

घर संख्या W-414

टीसीआई, राउरकेला

ओड़िशा

पूजनीय दादा जी,

(सादर चरण स्पर्श!)

मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि पटना में आप भी स्वस्थ होंगे। आज मैंने अपनी कक्षा में ‘गिरधर की कुंडलियाँ’ पढ़ीं। इन कुंडलियों ने मुझे जीवन जीने के बहुत ही व्यावहारिक और अनमोल सूत्र सिखाए हैं, जिन्हें मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

मैंने सीखा कि इस संसार में केवल बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि गुणों का महत्त्व होता है, ठीक उसी तरह जैसे कोयल अपनी मीठी वाणी के कारण सबको प्रिय लगती है। साथ ही, अब मैंने यह प्रण लिया है कि मैं कभी भी बिना सोचे-विचारे कोई कार्य नहीं करूँगा, ताकि बाद में मुझे पछताना न पड़े। कवि गिरधर ने यह भी समझाया कि धन-संपत्ति तो मेहमान की तरह आती-जाती रहती है, इसलिए हमें कभी घमंड नहीं करना चाहिए।

आपकी दी हुई शिक्षाएँ भी इन कुंडलियों जैसी ही हैं। मैं इन गुणों को अपने जीवन में उतारने का पूरा प्रयास करूँगा। दादी जी/नानी जी को मेरा प्रणाम कहिएगा।

आपका पोता

अविनाश

 

  1. बिना विचारे कार्य करने का जो परिणाम हो सकता है उसे अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

उत्तर – “बिना बिचारे जो करे, सो पाछे पछताए”

मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है, और उसकी सफलता का आधार उसके द्वारा लिए गए सही निर्णय होते हैं। जब कोई व्यक्ति आवेश में आकर या जल्दबाजी में बिना सोचे-विचारे किसी कार्य को करता है, तो उसके परिणाम अक्सर विनाशकारी होते हैं। बिना सोच-विचार के किया गया कार्य न केवल बिगड़ जाता है, बल्कि समाज में व्यक्ति के हँसाई का कारण भी बनता है। कार्य बिगड़ने के बाद व्यक्ति का मानसिक चैन छीन जाता है; उसे न खान-पान सुहाता है और न ही किसी प्रकार का मनोरंजन। पछतावे की अग्नि उसे भीतर ही भीतर जलाती रहती है। जैसा कि गिरधर कविराय ने कहा है कि बिना विचार किए गए कार्य का दुख हृदय में हमेशा खटकता रहता है, जिसे कोई भी दूसरा उपाय टाल नहीं सकता। अतः विवेकपूर्ण ढंग से सोच-समझकर कार्य करना ही समझदारी है।

  1. दो मित्रों का वार्तालाप लिखिए जिसमें मीठी वाणी बोलने के लाभ के विषय में चर्चा की गई हो।

उत्तर – दो मित्रों का वार्तालाप (मीठी वाणी के लाभ) –

राम – श्याम, तुमने देखा कि शिक्षक ने आज मधुर बोलने वाले छात्र की कितनी प्रशंसा की?

श्याम – हाँ राम, गिरधर कविराय ने भी कहा है कि कोयल अपनी मीठी वाणी से ही सबकी चहेती बनती है।

राम – बिल्कुल, कड़वा बोलने वाला तो कौवे की तरह तिरस्कृत होता है। मीठी वाणी से तो शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।

श्याम – सोलह आने सही बात

 

गृहकार्य

जानें- प्राणीवाचक संज्ञा शब्द स्त्री और पुरुष दोनों का ज्ञान कराते हैं। कुछ शब्द सदा पुल्लिंग और कुछ शब्द सदा स्त्रीलिंग रूप में रहते हैं।

  • सदा पुल्लिंग रहने वाले कुछ शब्द हैं- खरगोश, हिरन, भालू, तोता, खटमल
  • सदा स्त्रीलिंग रहने वाले कुछ शब्द हैं- मक्खी, मछली, गिलहरी, भेड़, लोमड़ी।

ऐसे शब्दों का लिंग परिवर्तन करते समय उनके आगे ‘नर’ या ‘मादा’ शब्द जोड़ा जाता है; जैसे-

नर कोयल

नर कौआ

मादा कोयल

मादा कौआ

अपने पढ़े हुए पाठों में आए प्राणीवाचक शब्दों से सदा स्त्रीलिंग और सदा पुल्लिंग रहने वाले शब्द खोजकर लिखिए-

सदा स्त्रीलिंग – मक्खी, मछली, गिलहरी, कोयल, मैना।

सदा पुल्लिंग – कौआ, तोता, खरगोश, भालू, चीता।

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