पाठ की व्याख्या
रामनेरश त्रिपाठी जी द्वारा रचित कविता ‘अरमान’ देशभक्ति और समाज सेवा की भावना से ओतप्रोत है। इस कविता में बच्चों के माध्यम से देश के प्रति उनके संकल्पों और सपनों अर्थात् अरमानों को दर्शाया गया है।
- प्रथम पद्यांश (नाम अमर करने का संकल्प)
है शौक यही अरमान यही,
हम कुछ करके दिखलाएँगे।
मरने वाली दुनिया में हम,
अमरों में नाम लिखाएँगे।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि बच्चों का यही शौक और यही सबसे बड़ी इच्छा (अरमान) है कि वे अपने जीवन में कुछ महान कार्य करके दिखाएँ। यह दुनिया नश्वर है (यहाँ सबको एक दिन मरना है), लेकिन बच्चे ऐसे नेक काम करना चाहते हैं कि मृत्यु के बाद भी उनका नाम ‘अमरों’ (इतिहास के महापुरुषों) की श्रेणी में गिना जाए।
- द्वितीय पद्यांश (दीन-दुखियों की सेवा)
जो लोग गरीब भिखारी हैं,
जिन पर न किसी की छाया है।
हम उनको गले लगाएँगे,
हम उनको सुखी बनाएँगे।
व्याख्या – बच्चे समाज के उन लोगों की मदद करना चाहते हैं जो गरीब हैं, बेसहारा हैं और जिनका साथ देने वाला कोई नहीं है। वे ऐसे उपेक्षित लोगों को प्यार से गले लगाना चाहते हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर सुखी बनाना चाहते हैं। यह सामाजिक समरसता का संदेश है।
- तृतीय पद्यांश (मेहनत का प्रकाश)
जो लोग अँधेरे घर में हैं,
अपनी ही नहीं नज़र में हैं।
हम उनके कोने-कोने में,
उद्यम का दीप जलाएँगे।
व्याख्या – समाज में कई लोग ऐसे हैं जो अज्ञानता और उपेक्षा के अंधेरे में जी रहे हैं। उन्होंने अपनी पहचान और आत्मविश्वास खो दिया है। बच्चे संकल्प लेते हैं कि वे उन लोगों के जीवन के हर कोने में ‘उद्यम’ (परिश्रम और मेहनत) का दीपक जलाएँगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
- चतुर्थ पद्यांश (निराशा में आशा का संचार)
जो लोग हारकर बैठे हैं,
उम्मीद मार कर बैठे हैं।
हम उनके बुझे दिमागों में
फिर से उत्साह जगाएँगे।
व्याख्या – जो लोग जीवन की असफलताओं से टूट चुके हैं और अपनी सारी उम्मीदें खोकर निराश होकर बैठ गए हैं, बच्चे उनके ‘बुझे हुए दिमागों’ (हताशा) में फिर से उत्साह और जोश भरेंगे। वे उन्हें जीवन में फिर से संघर्ष करने की प्रेरणा देंगे।
- पंचम पद्यांश (देशभक्ति और सर्वस्व अर्पण)
रोको मत, आगे बढ़ने दो,
आज़ादी के दीवाने हैं।
हम मातृभूमि की सेवा में,
अपना सर्वस्व” लगाएँगे।
रोको मत, आगे बढ़ने दो,
“आजादी के दीवाने हैं।
व्याख्या – बच्चे कहते हैं कि हमें उन्नति और विकास के मार्ग पर बढ़ने से मत रोको। हम भारत की स्वतंत्रता और सम्मान के दीवाने हैं। हम अपनी मातृभूमि की सेवा और रक्षा के लिए अपना ‘सर्वस्व’ अर्थात् सब कुछ – तन, मन, धन न्योछावर करने को तैयार हैं।
- षष्ठ पद्यांश (पूर्वजों का सम्मान)
हम उन वीरों के बच्चे हैं,
जो धुन‘ के पक्के सच्चे थे।
हम उनका मान बढ़ाएँगे,
हम जग‘ में नाम कमाएँगे।
व्याख्या – बच्चे गर्व से कहते हैं कि हम उन महान वीरों और पूर्वजों की संतानें हैं जो अपनी धुन अर्थात् संकल्प के पक्के और सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले थे। हम अपने अच्छे कार्यों से अपने उन पूर्वजों का मान बढ़ाएँगे और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।
कठिन शब्दार्थ
1 अरमान – इच्छा / अभिलाषा Desire / Ambition
2 शौक – चाव / रुचि Passion / Fondness
3 उत्साह – जोश / उमंग Enthusiasm / Zeal
4 दीवाने – पागल / प्रेमी (यहाँ देशप्रेमी) Obsessed / Devotee
5 उम्मीद – आशा Hope / Expectation
6 अमरों में – इतिहास के महापुरुषों में Among the Immortals
7 छाया – सहारा / आश्रय Shadow / Shelter
8 उद्यम – मेहनत / परिश्रम Effort / Hard work
9 दीप – दीपक / मशाल Lamp / Torch
10 मान – सम्मान / आदर Honor / Respect
11 मातृभूमि – जन्मभूमि Motherland
12 सर्वस्व – अपना सब कुछ Everything / All one’s belongings
13 धुन के पक्के – लगनशील / दृढ़ निश्चय वाले Firm in determination
14 जग – संसार / दुनिया World / Universe
15 सेवा – सुश्रूषा / सहायता Service / Help
कुछ विशेष पदों का अर्थ –
अमरों में नाम लिखाना – ऐसे महान कार्य करना कि मरने के बाद भी दुनिया याद रखे।
उद्यम का दीप जलाना – लोगों को आलस्य छोड़कर मेहनत करने की प्रेरणा देना।
धुन के पक्के – जो व्यक्ति एक बार ठान ले, तो उसे पूरा करके ही दम ले।
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
भिखारी, अँधेरे, नज़र, उम्मीद, बुझे, उत्साह, आज़ादी, मातृभूमि, सर्वस्व
भिखारी – Bhi-khaa-ree
अँधेरे – An-dhay-ray
नज़र – Na-zar (नुक्ता की वजह से ‘Z’ की ध्वनि)
उम्मीद – Um-meed
बुझे – Bu-jhay
उत्साह – Ut-saah
आज़ादी – Aa-zaa-dee (‘Z’ की साफ़ ध्वनि)
मातृभूमि – Maa-tri-bhoo-mi
सर्वस्व – Sar-vas-va
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) कवि ने दुनिया को कैसी कहा है?
उत्तर – कवि ने दुनिया को ‘मरने वाली’ अर्थात् नश्वर कहा है, जहाँ जो भी आया है उसे एक दिन जाना है।
(ख) जिन लोगों के पास आत्मसम्मान नहीं है, उन्हें किस अँधेरे ने घेर रखा है?
उत्तर – जिन लोगों के पास आत्मसम्मान नहीं है, उन्हें अज्ञानता, उपेक्षा और हीन भावना के अँधेरे ने घेर रखा है, जिसके कारण वे अपनी ही नज़र में अपनी कीमत खो चुके हैं।
(ग) कवि ने अपने आपको किनकी संतान कहा है?
उत्तर – कवि ने अपने आपको उन वीरों की संतान कहा है जो अपनी धुन के पक्के और सच्चे थे।
(घ) कवि किनके सम्मान को बढ़ाना चाहता है?
उत्तर – कवि अपने उन पूर्वजों और वीरों के सम्मान को बढ़ाना चाहता है जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) कवि अपना नाम किनके साथ लिखवाना चाहता है?
(i) मरने वालों के साथ
(ii) गरीबों के साथ
(iv) भिखारियों के साथ
(iii) अमरों के साथ ✓
(ख) कवि किन्हें गले से लगाना चाहता है?
(i) अमरों को
(ii) दुनियावालों को
(iii) सुखी लोगों को
(iv) बेसहारा लोगों को ✓
(ग) कवि निराश लोगों की सहायता कैसे करने की बात करते हैं?
(i) उन्हें सुखी बनाकर
(ii) उनमें उत्साह जगाकर ✓
(iii) उन्हें गले लगाकर
(iv) उन्हें अमर बनाकर
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) कवि अपने किस अरमान और शौक की बात कह रहा है?
उत्तर – कवि का अरमान और शौक यह है कि वह इस दुनिया में कुछ महान कार्य करके दिखाए और समाज के दीन-दुखियों की सेवा करे।
(ख) कवि ने गरीबों की दशा कैसी बताई है?
उत्तर – कवि के अनुसार गरीबों की दशा दयनीय है; उनके पास न घर है, न सुख-सुविधाएँ और न ही समाज में किसी का सहारा है।
(ग) लोगों के मन में आत्मसम्मान जगाने के लिए कवि के मन में क्या इच्छा है?
उत्तर – लोगों के मन में आत्मसम्मान जगाने के लिए कवि उनके जीवन में ‘उद्यम’ अर्थात् परिश्रम का दीप जलाना चाहता है ताकि वे अपनी शक्ति को पहचान सकें।
(घ) कविता में आज़ादी के दीवाने क्या करने की बात कह रहे हैं?
उत्तर – कविता में आजादी के दीवाने अपनी मातृभूमि की सेवा में अपना ‘सर्वस्व’ अर्थात् सब कुछ न्योछावर करने और निरंतर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
संसार में नाम कमाने की इच्छा रखने वालों को क्या करना चाहिए?
उत्तर – संसार में नाम कमाने की इच्छा रखने वालों को परोपकार, कठिन परिश्रम और देश के प्रति त्याग की भावना रखनी चाहिए। उन्हें समाज के उपेक्षित वर्ग की सहायता करनी चाहिए और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) ‘उम्मीद’ का बहुवचन रूप क्या होगा?
(i) उम्मीदा
(ii) उम्मीदें ✓
(iii) उम्मीदियाँ
(iv) उम्मीदीं
- जानें- क्रिया किस समय में हो रही है इससे उसके काल का पता चलता है।
क्रिया के जिस रूप से उसके बीते हुए समय में होने का पता चलता है उसे भूतकाल कहते हैं।
क्रिया के जिस रूप से उसके वर्तमान समय में/अभी होने का पता चलता है उसे वर्तमान काल कहते हैं।
क्रिया के जिस रूप से उसके आने वाले समय में होने का पता चलता है उसे भविष्यत् काल कहते हैं।
(क) कविता से छाँटकर वर्तमान काल और भविष्यत् काल के तीन-तीन क्रियापद लिखिए-
वर्तमान काल – हैं, बैठे हैं, जलाते हैं।
भविष्यत् काल – दिखलाएँगे, लिखाएँगे, जगाएँगे।
(ख) अब इन सभी क्रियापदों के भूतकाल के रूप लिखिए-
- हैं – थे
- दिखलाएँगे – दिखलाया
- लिखाएँगे – लिखाया
- जगाएँगे – जगाया
- प्रत्येक के लिए दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
(क) जग – दुनिया, संसार
(ख) अँधेरा – अंधकार, तम
(ग) भूमि – धरती, वसुधा
(घ) घर – सदन, गृह
- कविता से खोजकर निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) नश्वर – अमर
(ख) अमीर – गरीब
(ग) प्रकाश – अँधेरा
(घ) सच्चे – झूठे
(ङ) गुलामी – आज़ादी
(च) कायर – वीर
रोचक क्रियाकलाप
- अपनी नानी माँ/ दादी माँ को पत्र लिखकर बताएँ कि आपने इस कविता से क्या सीखा?
दिनांक – 16 फरवरी, 2026
घर संख्या – W-414
टीसीआई, राउरकेला
ओड़िशा
पूजनीय दादी जी,
(सादर चरण स्पर्श!)
मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी स्वस्थ और प्रसन्न होंगी। आज मैंने अपनी हिंदी की कक्षा में रामनरेश त्रिपाठी जी की एक बहुत ही सुंदर कविता ‘अरमान’ पढ़ी। इस कविता को पढ़कर मुझे जो प्रेरणा मिली, उसे मैं आपको पत्र लिखकर बताना चाहता हूँ।
नानी माँ, इस कविता से मैंने सीखा कि जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा करने में है। मैंने यह संकल्प लिया है कि मैं समाज के उन लोगों की मदद करूँगा जो गरीब और बेसहारा हैं। जो लोग हार मानकर बैठ गए हैं, मैं अपनी मेहनत और उत्साह से उनके जीवन में नई आशा जगाऊँगा।
यह कविता हमें सिखाती है कि हम उन वीरों की संतान हैं जो अपनी धुन के पक्के थे। मैं भी बड़ा होकर खूब मेहनत करूँगा ताकि अपने देश का मान बढ़ा सकूँ और अपने पूर्वजों की तरह जग में नाम कमा सकूँ। आप अपना आशीर्वाद मुझ पर बनाए रखिएगा। दादा जी को मेरा प्रणाम कहिएगा। शेष अगले पत्र में।
आपका प्यारा पोता,
अविनाश
- देशभक्ति की कुछ कविताओं का संग्रह करके कक्षा में एक काव्य-गोष्ठी आयोजित कीजिए।
उत्तर – छात्र इसे शिक्षक की सहायता से अपने स्तर पर पूरा करें।
गृहकार्य
निम्नलिखित शब्दों के लिए हिंदी पर्याय लिखिए-
(क) अरमान – इच्छा / अभिलाषा
(ख) गरीब – निर्धन / दीन
(ग) दुनिया – जग / संसार
(घ) नज़र – दृष्टि / निगाह
(ङ) आज़ादी – स्वतंत्रता
(च) उम्मीद – आशा

