Saragarhi Ka Yuddh (Shaurya Gatha) – Maj. Gen. Shivkumar Jaswal, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह पाठ ‘सारागढ़ी का युद्ध’ भारतीय सैन्य इतिहास की एक ऐसी गौरवशाली गाथा है, जो साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की पराकाष्ठा को दर्शाती है।

  1. युद्ध की पृष्ठभूमि

यह युद्ध 12 सितंबर 1897 को उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर जो अब पाकिस्तान का तिराह क्षेत्र है उसमें लड़ा गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान ‘सारागढ़ी’ एक संचार पोस्ट थी, जहाँ 36वीं सिख रेजीमेंट (वर्तमान में चौथी सिख) के केवल 21 जवान तैनात थे। इनके सामने 10,000 से 14,000 अफ़रीदी और ओराकज़ई कबीले के हमलावर थे।

  1. विषम परिस्थितियाँ और नेतृत्व

टुकड़ी के कमांडर हवलदार ईशर सिंह ने दूरबीन से शत्रुओं के विशाल जत्थों को अपनी ओर बढ़ते देखा। उन्होंने पास के ‘लोकहार्ट’ किले से सहायता माँगी, लेकिन काबायलियों ने रास्ता पहले ही काट दिया था। मदद की उम्मीद न देख हवलदार ईशर सिंह और उनके साथियों ने भागने के बजाय अपनी पोस्ट की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने का साहसी निर्णय लिया।

  1. अदम्य साहस और युद्ध का रोमांच

सिख सैनिकों ने अपनी पॉइंट थ्री नॉट थ्री (.303) राइफलों से हमलावरों को करारा जवाब दिया। ईशर सिंह ने ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयघोष से सैनिकों में उत्साह भरा। जब हमलावरों ने झाड़ियों में आग लगाकर धुएँ की आड़ ली और किले में सेंध मार दी, तब भी ईशर सिंह और उनके साथी जख्मी होने के बावजूद डटे रहे। गोला-बारूद खत्म होने पर उन्होंने बंदूकों पर संगीनें (Bayonets) लगाकर आमने-सामने का युद्ध किया।

  1. अंतिम योद्धा का बलिदान

अंत में केवल पाँच सैनिक बचे थे, जिन्होंने पीठ-से-पीठ सटाकर अंतिम साँस तक मुकाबला किया। सिग्नल टावर पर तैनात 19 वर्षीय गुरमुख सिंह ने सबसे अंत में युद्ध की अनुमति ली और अकेले ही 20 काबायलियों को मौत के घाट उतारकर शहीद हुए।

  1. ऐतिहासिक सम्मान

इस वीरता की गूँज ब्रिटिश पार्लियामेंट तक पहुँची –

महारानी विक्टोरिया ने सिखों की बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी सेना कभी हार नहीं सकती।

सभी 21 शहीदों को मरणोपरांत ‘इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट क्लास 1’ (आज के परमवीर चक्र के समान) दिया गया।

यूनेस्को (UNESCO) ने इस युद्ध को ‘सामूहिक शौर्य की आठ महान गाथाओं’ में स्थान दिया है।

आज भी 12 सितंबर को ‘सारागढ़ी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

प्रमुख पात्र और तथ्य

विषय

विवरण

मुख्य नायक

हवलदार ईशर सिंह

अंतिम शहीद

सिपाही गुरमुख सिंह (19 वर्ष)

रेजीमेंट

36वीं सिख रेजीमेंट

शौर्य का अनुपात

1 सिख सैनिक बनाम 500 काबायली

निष्कर्ष – सारागढ़ी का युद्ध हमें सिखाता है कि संख्या बल से अधिक वीरता और संकल्प का महत्त्व होता है। यह भारतीय सैनिकों के स्वाभिमान और बलिदान का अमर प्रतीक है।

कठिन शब्दार्थ

1 – टुकड़ियाँ – सैन्य दल – Contingents / Units

2 – प्रशंसा – तारीफ – Praise / Appreciation

3 – महारानी – रानी – Queen

4 – शौर्य – वीरता / बहादुरी – Valor / Bravery

5 – कर्तव्यपरायणता – कर्तव्य के प्रति निष्ठा – Devotion to duty

6 – मिसाल – उदाहरण – Example / Benchmark

7 – फ्रंटियर – सीमावर्ती क्षेत्र – Frontier / Borderland

8 – परंपरा – रीति-रिवाज – Tradition

9 – समर्पण – हार मानना / आत्मसमर्पण – Surrender

10 – प्रकाशित – छपा हुआ – Published

11 – सामूहिक – मिल-जुलकर – Collective / Group

12 – गाथाओं – कहानियाँ – Sagas / Legends

13 – साम्राज्य – राजपाठ – Empire

14 – नियंत्रण – काबू – Control

15 – कबायली – कबीले के लोग – Tribesmen

16 – लश्कर – सेना का दल – Army / Troop

17 – शृंखला – कड़ी / श्रेणी – Chain / Series

18 – प्रायः – अक्सर – Often / Frequently

19 – छिटपुट – कभी-कभार होने वाले – Sporadic / Scattered

20 – अनुपात – हिस्सा – Ratio

21 – अतिशयोक्ति – बढ़ा-चढ़ाकर कहना – Exaggeration

22 – वैलिएंट (Valiant) – बहादुर – Valiant / Courageous

23 – तैनात – नियुक्त – Posted / Deployed

24 – गतिविधियों – हलचल – Activities

25 – मचान – ऊँचा स्थान – Scaffold / High platform

26 – दूरबीन – देखने का यंत्र – Binoculars

27 – जत्थे – समूह / टोली – Batches / Groups

28 – पंक्तिबद्ध – लाइन में लगे हुए – Lined up / Arrayed

29 – निकटवर्ती – पास का – Nearby / Adjacent

30 – हीिलयोग्राफ़ – संकेत भेजने वाला यंत्र – Heliograph (Signal device)

31 – शत्रु – दुश्मन – Enemy

32 – कुमुक – सहायता के लिए सेना – Reinforcements

33 – ध्वस्त – नष्ट – Destroyed / Demolished

34 – अपेक्षा – तुलना में – Expectation / Comparison

35 – रणकुशलता – युद्ध की कला – War skills / Tactical skill

36 – स्वभाव – प्रकृति – Nature / Disposition

37 – घोषणा – ऐलान – Declaration

38 – नायक – नेता / लीडर – Hero / Leader

39 – उपयुक्त – सही / उचित – Suitable / Appropriate

40 – बौछार – वर्षा (गोलियों की) – Volley / Shower

41 – विचलित – घबराना – Perturbed / Disturbed

42 – उद्घोष – जयघोष – Proclamation / Chant

43 – बेकार – व्यर्थ – Futile / Useless

44 – प्रलोभन – लालच – Temptation / Lure

45 – अनदेखा – ध्यान न देना – Ignored

46 – सामग्री – सामान – Material / Supplies

47 – परंपरागत – पुराने ढंग का – Traditional

48 – गुबार – बादल (धुएँ का) – Cloud (of smoke)

49 – वस्तुस्थिति – असली स्थिति – Actual situation

50 – अवगत – सूचित करना – Informed / Apprised

51 – दरार – छेद / गैप – Breach / Crack

52 – गोला-बारूद – अस्त्र-शस्त्र – Ammunition

53 – संगीनें – बंदूक की नोक पर चाकू – Bayonets

54 – प्रवेश – अंदर जाना – Entry

55 – अविस्मरणीय – न भूलने वाला – Unforgettable

56 – अप्रतिम – बेजोड़ / अनोखा – Peerless / Matchless

57 – अनुमति – आज्ञा – Permission

58 – मृत्यु का वरण – मौत को चुनना – Embracing death

59 – योद्धा – लड़ने वाला – Warrior

60 – प्रशंसा – तारीफ – Commendation / Praise

61 – मरणोपरांत – मृत्यु के बाद – Posthumously

62 – पुरस्कृत – सम्मान देना – Rewarded

63 – अनूठी – अद्भुत – Unique

64 – अवकाश – छुट्टी – Holiday / Leave

65 – स्मारक – यादगारी – Memorial

66 – श्रद्धांजलि – याद में सम्मान – Tribute / Homage

67 – अर्पित – भेंट करना – Offered

68 – नमन – प्रणाम – Salutation / Bow

69 – अवकाश प्राप्त – रिटायर्ड – Retired

70 – साहस – हिम्मत – Courage

71 – भलीभाँति – अच्छी तरह – Thoroughly

72 – परिचित – जानने वाला – Familiar

73 – पितृतुल्य – पिता के समान – Father-like

74 – रणक्षेत्र – युद्ध का मैदान – Battlefield

75 – विजेता – जीतने वाला – Winner / Victor

76 – आक्रमण – हमला – Attack / Assault

77 – नष्ट – खत्म करना – Ruined / Vanished

78 – इतिहास – बीता हुआ समय – History

79 – प्रमाण – सबूत – Evidence / Proof

80 – अमर – जो कभी न मरे – Immortal

81 – सशस्त्र – हथियारों के साथ – Armed

82 – बलिदान – त्याग – Sacrifice

83 – गर्व – अभिमान – Pride

84 – दृढ़ – मजबूत – Firm / Resolute

85 – सामना – मुकाबला – Encounter / Confront

विशेष प्रयोग-

“जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल”- सिख धर्म को मानने वाले इसका प्रयोग एक-दूसरे को अभिवादन करने के लिए करते हैं।

इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति कहेगा कि ईश्वर ही अंतिम सत्य है, उस पर ईश्वर का आशीर्वाद सदा बना रहेगा।

भारतीय सेना की तीन पलटनें (रेजीमेंट) पंजाब रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट और सिख लाइट इन्फेंट्री इस वाक्यांश को अपने ‘रणनाद’ के रूप में प्रयोग करती हैं।

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

कर्तव्यपरायणता, लश्कर, अतिशयोक्ति, पंक्तिबद्ध, माध्यम, ध्वस्त, रणकुशलता, उपयुक्त, पंक्तियों, उद्घोष, वस्तुस्थिति, ज़ख्मी, परस्पर, अविस्मरणीय, प्रशंसा, स्मारक

क्षेत्र, मृत्यु, समर्पण, साम्राज्य, शौर्य, नियंत्रण, शृंखला, निकटवर्ती, मार्ग, हीलियोग्राफ़, शत्रु, रक्षा, पूर्णतः, आक्रमण, श्री, मात्र, प्रवेश, आर्थिक, श्रद्धांजलि, प्रलोभन

कर्तव्यपरायणता – कर-तव्य-प-रा-यण-ता (Kar-tavya-pa-ra-yan-ta)

 लश्कर – लश-कर (Lash-kar)

 अतिशयोक्ति – अ-ति-श-योक्-ति (A-ti-sha-yok-ti)

 पंक्तिबद्ध – पंक-ति-बद्ध (Pank-ti-baddh)

 माध्यम – माध-यम (Maadh-yam)

 ध्वस्त – ध्वस-त (Dh-vast)

 रणकुशलता – रण-कु-शल-ता (Ran-ku-shal-ta)

 उपयुक्त – उप-युक्त (Up-yukt)

 पंक्तियों – पंक-ति-यों (Pank-ti-yon)

 उद्घोष – उद-घोष (Ud-ghosh)

 वस्तुस्थिति – वस-तु-स्थि-ति (Vas-tu-sthi-ti)

 ज़ख्मी – ज़ख-मी (Zakh-mee)

 परस्पर – पर-स-पर (Pa-ras-par)

 अविस्मरणीय – अ-विस-म-र-णीय (A-vis-ma-ra-neeya)

 प्रशंसा – प्र-शंसा (Pra-shan-sa)

 स्मारक – स्मा-रक (Smaa-rak)

 क्षेत्र – क्षे-त्र (Kshetra)

 मृत्यु – मृत-यु (Mrit-yu)

 समर्पण – स-मर-पण (Sa-mar-pan)

 साम्राज्य – साम-राज्य (Saam-rajya)

 शौर्य – शौर-य (Shaur-ya)

 नियंत्रण – नि-यंत्र-ण (Ni-yan-tran)

 शृंखला – शृंख-ला (Shrinkh-la)

 निकटवर्ती – नि-कट-वर-ती (Ni-kat-var-tee)

 मार्ग – मार-ग (Maarg)

 हीलियोग्राफ़ – ही-लि-यो-ग्राफ़ (Hee-li-yo-graph)

 शत्रु – शत्र-उ (Shat-ru)

 रक्षा – रक-षा (Rak-sha)

 पूर्णतः – पूरण-तः (Poor-na-tah)

 आक्रमण – आ-क्र-मण (Aa-kra-man)

 श्री – श्री (Shree)

 मात्र – मात-र (Maat-ra)

 प्रवेश – प्र-वेश (Pra-vesh)

 आर्थिक – आर-थिक (Aar-thik)

 श्रद्धांजलि – श्रद-धांज-लि (Shrad-dhaan-ja-li)

 प्रलोभन – प्र-लो-भन (Pra-lo-bhan)

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) ईशर सिंह ने अपने मचान से क्या देखा?

उत्तर – ईशर सिंह ने अपने मचान से देखा कि पठानों के जत्थे के जत्थे पंक्तिबद्ध होकर सारागढ़ी पोस्ट की ओर बढ़ रहे हैं।

(ख) काबायलियों ने सिखों की शक्ति कम करने के लिए क्या किया?

उत्तर – काबायलियों ने सिखों को अलग-अलग स्थानों पर बाँटने के लिए दुतरफ़ा आक्रमण किया—एक मुख्य द्वार से और दूसरा किले के खाली स्थान की ओर से।

(ग) लेफ्टिनेंट कर्नल हॉटन काबायलियों की गतिविधियों को क्यों देख पा रहे थे?

उत्तर – क्योंकि लोकहार्ट का किला सारागढ़ी से ऊँचाई पर स्थित था, जहाँ से नीचे की गतिविधियों को साफ़ देखा जा सकता था।

(घ) ईशर सिंह का कौन सा कार्य एक सच्चे सेनानायक का पाठ पढ़ाने वाला था?

उत्तर – बहुत अधिक ज़ख्मी हो जाने और गोला-बारूद समाप्त हो जाने के बावजूद, ईशर सिंह का अपनी बंदूक पर संगीन लगाकर शत्रुओं पर टूट पड़ना और अंतिम सांस तक डटे रहना एक सच्चे सेनानायक का पाठ पढ़ाने वाला कार्य था।

लिखित

  1. सही उत्तर पर सही () का निशान लगाइए
  2. सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-

(क) सारागढ़ी के युद्ध में सिखों ने अपनी किस परंपरा का पालन किया?

(i) युद्ध लड़ने की

(ii) आत्मसमर्पण कर देने की

(iii) मृत्यु को गले लगाने की

(iv) काबायलियों को हराने की

(ख) लोकहार्ट के किले से सहायता क्यों नहीं आ सकी?

(i) लेफ्टिनेंट कर्नल हॉटन सहायता भेजना नहीं चाहते थे।

(ii) हवलदार ईशर सिंह सहायता माँग नहीं सके।

(iii) सहायता माँगने का संदेश पहुँच नहीं पाया।

(iv) पठानों ने सहायता आने का मार्ग ध्वस्त कर दिया था।

(ग) काबायलियों ने अपना कौन सा पारंपरिक तरीका अपनाया?

(i) सैनिकों को प्रलोभन देने का

(ii) आग लगाकर धुआँ करने का

(iii) रास्तों को ध्वस्त करने का

(iv) गोलियों की बौछार करने का

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

(क) उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर प्रोविंस में किलों की शृंखला क्यों तैयार की गई थी?

उत्तर – उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर प्रोविंस को नियंत्रण में रखने और पश्तून, अफ़रीदी और ओराकज़ई कबीलों के काबायलियों से ब्रिटिश लश्कर की सुरक्षा के लिए किलों की शृंखला तैयार की गई थी।

(ख) महारानी विक्टोरिया ने पार्लियामेंट में सिखों की प्रशंसा में क्या कहा था?

उत्तर – महारानी विक्टोरिया ने पार्लियामेंट में सिखों की प्रशंसा में क्या कहा था — “यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि जिन सेनाओं में बहादुर सिख सैनिक होते हैं, वे कभी हार का मुँह नहीं देख सकतीं।”

(ग) सिखों ने काबायलियों की पहली पंक्ति किस रणनीति से ध्वस्त की?

उत्तर – हवलदार ईशर सिंह के आदेश पर सिखों ने दो पंक्तियाँ बनाईं—एक बैठी हुई और दूसरी खड़ी हुई। जब शत्रु 250 मीटर की दूरी पर था, तब दोनों पंक्तियों से गोलियों की ऐसी बौछार की गई कि शत्रु की पहली पंक्ति ध्वस्त हो गई।

(घ) किले के अंदर स्थित सिखों ने काबायलियों का सामना किस प्रकार किया?

उत्तर – किले के अंदर स्थित सिखों ने काबायलियों का सामना पूरी वीरता से किया। गोला-बारूद खत्म होने पर भी सिखों ने हार नहीं मानी। वे परस्पर पीठ से पीठ सटाकर खड़े हो गए और अपनी बंदूकों पर लगी संगीनों (Bayonets) से शत्रुओं पर चौतरफ़ा वार करके उनका सामना किया।

(ङ) ब्रिटिश सरकार ने सारागढ़ी के शहीद सिखों को किस प्रकार पुरस्कृत और सम्मानित किया?

उत्तर – सभी 21 सिपाहियों को मरणोपरांत ‘इंडियन ऑर्डर ऑफ़ मेरिट क्लास 1’ प्रदान किया गया। उनके परिवारों को 50 एकड़ ज़मीन और 500 रुपये की सहायता दी गई। साथ ही, 12 सितंबर को सेना में अवकाश घोषित किया गया और उनकी याद में स्मारक बनवाए गए।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

निम्नलिखित पाठांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

उस दिन प्रातः सारागढ़ी पोस्ट पर तैनात टुकड़ी के कमांडर ईशर सिंह आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाए गए अपने मचान पर खड़े थे। अपनी दूरबीन से उन्होंने देखा कि पठानों के जत्थे के जत्थे पंक्तिबद्ध होकर उनकी ओर बढ़ रहे हैं। सिपाही गुरमुख सिंह ने निकटवर्ती लोकहार्ट किले पर इसकी सूचना देने के लिए अपना हीलियोग्राफ़ निकाला। वहाँ 36वीं सिख रेजीमेंट के कमांडिंग अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल हॉटन को उन्होंने सिग्नल के माध्यम से सूचना भेजी कि शत्रु मुख्य द्वार की ओर बढ़ रहा है। कुमुक भेजी जाए।

(क) मचान क्यों बनाया गया था?

उत्तर – आसपास की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए।

(ख) ईशर सिंह ने दूरबीन से क्या देखा?

उत्तर – उन्होंने देखा कि पठानों के जत्थे पंक्तिबद्ध होकर उनकी ओर बढ़ रहे हैं।

(ग) सिपाही गुरमुख ने अपना हीलियोग्राफ़ क्यों निकाला?

उत्तर – निकटवर्ती लोकहार्ट किले पर शत्रु के आने की सूचना भेजने के लिए।

(घ) गुरमुख सिंह ने किसे सूचना भेजी?

उत्तर – 36वीं सिख रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हॉटन को।

(ङ) लोकहार्ट किले को क्या सूचना भेजी गई?

उत्तर – यह सूचना भेजी गई कि शत्रु मुख्य द्वार की ओर बढ़ रहा है, अतः कुमुक (सहायता सेना) भेजी जाए।

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

  1. किसी को जबरदस्ती अपने घर में घुसते देखकर क्या करना चाहिए?

उत्तर – हमें किसी को जबरदस्ती अपने घर में घुसते देखकर साहस के साथ उसका विरोध करना चाहिए, अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाने चाहिए और निकटतम अधिकारियों या पुलिस को सूचित करना चाहिए।

  1. कठिन परिस्थितियों में कहीं से सहायता न मिलने पर क्या करना चाहिए?

उत्तर – कठिन परिस्थितियों में कहीं से सहायता न मिलने की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहिए। हमें उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए स्वयं पर विश्वास रखकर मुकाबला करना चाहिए।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर सही () का निशान लगाइए

(क) ‘अतिशयोक्ति’ शब्द कैसे बना है?

(i) अति + शयोक्ति

(ii) अतिश + योक्ति

(iii) अतिशय + उक्ति

(iv) अ + तिशयोक्ति

(ख) ‘अविस्मरणीय’ शब्द का क्या अर्थ है?

(i) जिसे अभी-अभी भूले हैं

(ii) जिसे भुलाया न जा सके

(iii) जिसे अंत में भूले हैं

(iv) जिसे भुला दिया गया है

(ग) ‘गोला-बारूद’ का सही विग्रह क्या होगा?

(i) बारूद के गोले

(ii) गोले में बारूद

(iii) बारूद के साथ गोले

(iv) गोला और बारूद

  1. वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए –

(क) सिपाही उन्हें किले के अंदर घुसते देखा।

सिपाही ने उन्हें किले के अंदर घुसते देखा।

(ख) सिख किले की रक्षा करने का निर्णय लिए।

सिखों ने किले की रक्षा करने का निर्णय लिया।

(ग) पठान ने सारागढ़ी मार्ग को ध्वस्त कर दिए थे।

पठानों ने सारागढ़ी मार्ग को ध्वस्त कर दिया था।

(घ) सारागढ़ियों के युद्ध में सिख ने हार नहीं मानी थी।

सारागढ़ी के युद्ध में सिखों ने हार नहीं मानी थी।

(ङ) जिस सेना में बहादुर सिख सैनिक होता है वह कभी हार का मुख नहीं देखता।

जिस सेना में बहादुर सिख सैनिक होते हैं, वह कभी हार का मुख नहीं देखती।

  1. निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिए गए निर्देश के अनुसार बदलिए-

(क) जाँबाज़ सिख अंत तक लड़ते रहे। (भविष्यत् काल)

जाँबाज़ सिख अंत तक लड़ते रहेंगे।

(ख) ईशर सिंह मचान पर खड़े हैं। (भूतकाल)

ईशर सिंह मचान पर खड़े थे।

(ग) 36वीं सिख रेजीमेंट को आज से चौथी सिख रेजीमेंट कहा जाएगा। (वर्तमान काल)

36वीं सिख रेजीमेंट को आज से चौथी सिख रेजीमेंट कहा जाता है।

(घ) वे शत्रु के आक्रमण का डटकर सामना करते रहे। (वर्तमान काल)

वे शत्रु के आक्रमण का डटकर सामना करते हैं।

(ङ) लोकहार्ट के किले से सहायता नहीं भेजी जा रही। (भूतकाल)

लोकहार्ट के किले से सहायता नहीं भेजी गई थी।

(च) शत्रु द्वार की ओर बढ़ रहा था। (भविष्यत् काल)

शत्रु द्वार की ओर बढ़ेगा।

  1. जानें- जब दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से एक नया शब्द बनाया जाता है तो इस प्रकार शब्द बनाने की विधि को समास कहते हैं।

निम्नलिखित शब्दों का समास द्वारा एक शब्द बनाइए-

(क) शासन का काल – शासनकाल

(ख) रण में कुशलता – रणकुशल

(ग) पिता के तुल्य – पितृतुल्य

(घ) सेना का नायक – सेनानायक

(ङ) वस्तु की स्थिति – वस्तुस्थिति

(च) पंक्ति में बद्ध – पंक्तिबद्ध

  1. जानें- कुछ शब्दांश शब्दों से पहले लगकर नए शब्द बनाते हैं। इन्हें उपसर्ग कहते हैं।

निम्नलिखित उपसर्गों से नए शब्द बनाइए-

(क) अन+ देखी – अनदेखी

अन + जाना – अनजाना

अन + पढ़ – अनपढ़

(ख) चौ + तरफ़ा – चौतरफ़ा

चौ + राहा – चौराहा

चौ + पाई – चौपाई

(ग) दु + तरफ़ा – दुतरफ़ा

दु + मंज़िला – दुमंज़िला

दु + गुना – दुगुना

 

रोचक क्रियाकलाप

  1. सेना के अधिकारी ईशर सिंह को मरणोपरांत दिया गया पुरस्कार लेकर उनके घर पहुँचे। अपनी कल्पना से ईशर सिंह के भाई और सैनिक अधिकारी के बीच क्या वार्तालाप हुआ होगा उसे संवाद रूप में लिखिए।

उत्तर –

संवाद – मेजर स्मिथ और बलविंदर सिंह (भाई)

मेजर – सत श्री अकाल। मैं आपके भाई ईशर सिंह का वीरता पदक ‘इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ लेकर आया हूँ।

भाई – (भावुक होकर) सत श्री अकाल साहब। मेरे भाई ने शहादत देकर पूरे देश का नाम रोशन कर दिया।

मेजर – हवलदार ईशर सिंह और उनके 21 जवानों ने 10,000 शत्रुओं का सामना कर इतिहास रच दिया है। पूरा ब्रिटिश साम्राज्य उन्हें नमन करता है।

भाई – यह पदक हमारी आने वाली पीढ़ियों को साहस की प्रेरणा देता रहेगा।

  1. सारागढ़ी में वीरता दिखाने वाले सिख सैनिकों को दिए गए पुरस्कारों को समाचार पत्र में छपवाने के लिए समाचार के रूप में लिखिए।

उत्तर – समाचार – सारागढ़ी के वीरों का सम्मान

शीर्षक – सारागढ़ी के 21 अमर शहीदों को सर्वोच्च सैन्य सम्मान

लंदन – सारागढ़ी के युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले 36वीं सिख रेजीमेंट के सभी 21 जवानों को मरणोपरांत ‘इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ प्रदान किया गया है। महारानी विक्टोरिया ने उनकी वीरता को ‘अविस्मरणीय’ बताया। सरकार ने प्रत्येक शहीद के परिवार को 50 एकड़ भूमि और 500 रुपये देने की घोषणा की है। उनकी याद में अमृतसर और फिरोजपुर में स्मारक बनाए जाएँगे।

 

गृहकार्य

जानें – वर्णों के परस्पर मेल से उनमें जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं; जैसे

हिम + आलय = हिमालय;

अतिशय + उक्ति = अतिशयोक्ति;

पर + उपकार = परोपकार आदि।

निम्नलिखित शब्दों की संधि करके लिखिए-

(क) मरण + उपरांत = मरणोपरांत

(ख) श्रद्धा + अंजलि = श्रद्धांजलि

(ग) अतिशय + उक्ति = अतिशयोक्ति

(घ) पुरः + कार = पुरस्कार

(ङ) सम् + अर्पण = समर्पण

 

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