पाठ का सारांश
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित कहानी ‘घर की वापसी’ एक अत्यंत भावुक कहानी है जो बाल मनोविज्ञान और अपनों से बिछड़ने के दर्द को दर्शाती है।
- गाँव का निडर नेता –
कहानी का मुख्य पात्र पाठक चक्रवर्ती अपने गाँव के लड़कों का नेता है। वह बहुत चंचल और शरारती है। एक दिन वह अपने साथियों के साथ मिलकर नदी किनारे पड़े एक भारी लट्ठे को लुढ़काने का खेल खेलता है। उसका छोटा भाई मक्खन विरोध स्वरूप उस लट्ठे पर बैठ जाता है। पाठक के आदेश पर लड़के लट्ठे को मक्खन सहित लुढ़का देते हैं, जिससे मक्खन गिर जाता है और रोता हुआ घर जाकर माँ से झूठ बोल देता है कि पाठक ने उसे मारा है।
- मामा का आगमन –
घर पहुँचने पर माँ पाठक को डाँटती है। इसी बीच पाठक के मामा विश्वंभर कई वर्षों बाद मुंबई से कोलकाता अपनी बहन से मिलने आते हैं। पाठक की माँ शिकायत करती है कि पाठक बहुत बिगड़ गया है, जबकि मक्खन पढ़ने में बहुत अच्छा है। मामा विश्वंभर पाठक को अपने साथ शहर (मुंबई) ले जाकर पढ़ाने का प्रस्ताव देते हैं, जिसे माँ और पाठक दोनों खुशी-खुशी मान लेते हैं।
- शहर का अनजाना परिवेश –
मुंबई पहुँचकर पाठक की खुशियाँ काफूर हो जाती हैं। उसकी मामी उसे बोझ समझती है क्योंकि उनके पास पहले से ही तीन बच्चे हैं। पाठक को गाँव की खुली हवा, पतंगबाजी और दोस्तों की याद सताने लगती है। शहर की तंग गलियों और मामी के रूखे व्यवहार के बीच उसे साँस लेना भी कठिन लगने लगता है। स्कूल में भी वह पिछड़ जाता है और अध्यापक की मार सहता है।
- बीमारी और घर की याद –
पाठक अपने मामा से पूछता है कि वह घर कब जाएगा, तो मामा छुट्टियों तक रुकने को कहते हैं। इसी बीच उसकी किताब खो जाती है और मामी उसे बुरी तरह फटकारती है। पाठक को तेज बुखार आ जाता है। वह डर जाता है कि वह दूसरों पर बोझ बन रहा है। वह अपनी बीमारी की हालत में ही घर के लिए निकल पड़ता है, लेकिन पुलिस उसे पकड़कर वापस मामा के घर ले आती है।
- हृदयस्पर्शी अंत –
पाठक की हालत बिगड़ जाती है। वह अचेत अवस्था में अपनी माँ को पुकारता रहता है। विश्वंभर उसकी माँ को बुलवाते हैं। जब माँ पाठक के पास पहुँचकर उसे पुकारती है, तो मृत्यु के निकट पहुँच चुका पाठक बहुत धीमी आवाज़ में अपनी माँ से पूछता है— “माँ! क्या छुट्टियाँ आ गई हैं?” यह सवाल पाठक की घर पहुँचने की उस तीव्र इच्छा को दर्शाता।
मुख्य संदेश –
बाल मनोविज्ञान – बच्चे प्रेम और स्वतंत्रता के भूखे होते हैं। तिरस्कार और कठोरता उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देती है।
घर का महत्त्व – एक बालक के लिए उसका अपना घर और माँ का आँचल ही दुनिया का सबसे सुरक्षित स्वर्ग होता है।
संवेदना – यह कहानी बच्चों के प्रति बड़ों के व्यवहार में संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता पर बल देती है।
कठिन शब्दार्थ
1 चंचलता – चुलबुलापन Playfulness / Restlessness
2 गुमसुम – शांत / चुपचाप Sullen / Quiet
3 नेता – नायक / अगुआ Leader
4 आज्ञा – हुक्म Command / Order
5 अनुमोदन – सहमति देना Approval / Support
6 मौन – चुप Silent
7 उपेक्षा – तिरस्कार Neglect / Indifference
8 इनकार – मना करना Refusal / Denial
9 इच्छुक – चाहने वाला Interested / Desirous
10 सहमत – राजी होना Agreed
11 धमाचौकड़ी – ऊधम मचाना Romping / Frolic
12 आफ़त – मुसीबत Trouble / Calamity
13 लट्ठे – लकड़ी का भारी टुकड़ा Log of wood
14 लुढ़काएँ – लुढ़काना To roll
15 परिणाम – नतीजा Result / Consequence
16 अपमान – बेइज्जती Insult / Humiliation
17 खेद – दुख / पछतावा Regret / Sorrow
18 अधेड़ – ढलती उम्र का Middle-aged
19 मृत्यु – मौत Death
20 पश्चात् – बाद में After / Later
21 विपत्ति – संकट Adversity / Misfortune
22 स्वर्ग – जन्नत Heaven
23 साहस – हिम्मत Courage
24 दयनीय – करुणाजनक Pitiful / Miserable
25 मध्याह्न – दोपहर Mid-day / Noon
26 ज़बरदस्ती – बलपूर्वक Forcibly
27 अचेत – बेहोश Unconscious
28 सिसकियाँ – सुबकना Sobs
29 क्रोध – गुस्सा Anger / Wrath
30 भयभीत – डरा हुआ Terrified / Scared
31 सहानुभूति – हमदर्दी Sympathy
32 विकल – बेचैन Restless / Agitated
33 हर्ष – खुशी Joy / Delight
34 गुमसुम – उदास Gloomy
35 इच्छा – चाहत Wish / Desire
36 आश्चर्य – अचरज Wonder / Surprise
37 बड़बड़ाना – अस्पष्ट बोलना Muttering / Rambling
38 ज्वर – बुखार Fever
39 तीव्र – तेज़ Intense / High
40 नाड़ी – नब्ज़ Pulse
41 चेत – होश Consciousness
42 सिरहाने – सिर की ओर Headside
43 चारपाई – खाट Cot / Bedstead
44 कीचड़ – गारा Mud / Slush
45 सूचना – खबर Information / Notice
46 अपरिचित – अनजाना Unknown / Stranger
47 अध्यापक – शिक्षक Teacher
48 विवाह – शादी Marriage
49 सहना – बर्दाश्त करना To endure / bear
50 विद्यार्थी – छात्र Student
51 अपरिचित – अजनबी Stranger
52 गुमसुम – मौन Sullen
53 चंचलता – अस्थिरता Fickleness
54 समाप्त – खत्म Finished
55 लुढ़काएँ – घिसकाना Roll down
56 अनुमोदन – स्वीकृति Endorsement
57 बुरा परिणाम – बुरा फल Bad consequence
58 भयभीत – डरा हुआ Afraid
59 अधेड़ उम्र – उम्रदराज Middle-aged
60 उपेक्षा – ध्यान न देना Negligence
61 घरेलू नौकर – घर का काम करने वाला Domestic help
62 इनकार – ना करना Refusal
63 मालकिन – स्वामिनी Mistress
64 आश्चर्य – विस्मय Surprise
65 विवाह – शादी Wedding
66 पश्चात् – बाद में Afterwards
67 मृत्यु – देहांत Death
68 प्रसन्नता – खुशी Happiness
69 इच्छुक – चाहने वाला Keen
70 सहमति – रजामंदी Agreement
71 हर्ष – उल्लास Joy
72 सहानुभूति – दया Sympathy
73 विपत्ति – मुसीबत Trouble
74 स्वर्ग – सुखद स्थान Paradise
75 स्नान – नहाना Bath
76 विकल – व्याकुल Distressed
77 अध्यापक – गुरु Teacher
78 साहस – हिम्मत Daring
79 शेष – बचा हुआ Remaining
80 दयनीय – दयनीय Pitiable
81 प्रातः – सुबह Morning
82 अचेत – सुध-बुध खोना Unconscious
83 नाड़ी – नब्ज Pulse
84 आँख का तारा – बहुत प्यारा Apple of eye
85 हृदय की कोयल – प्रिय संतान Darling
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
चक्रवर्ती, क्रोध, पृथ्वी, उम्र, आश्चर्य, मृत्यु, हर्ष, स्वर्ग, विद्यार्थी, दर्द, वर्षा, तीव्र, हृदय, मोहल्ले, आज्ञा,
विरुद्ध, लट्ठा, लुढ़काएँ, मक्खन, क्षण, परिणाम, अधेड़, उपेक्षा, किस्सा, विश्वंभर, पढ़ाई, हत्थी, पत्थर, स्वप्न, ठहरो, शेष, विपत्ति, मध्याह्न, ज्वर, जबरदस्ती
चक्रवर्ती – Chak-ra-var-tee
हृदय – Hrid-ya
क्रोध – Krodh
विरुद्ध – Vi-ruddh
पृथ्वी – Prith-vee
विश्वंभर – Vish-vam-bhar
मृत्यु – Mrit-yu
मध्याह्न – Madh-yaahn
आश्चर्य – Aash-char-ya
ज्वर – Jvar
स्वर्ग – Svarg
स्वप्न – Svap-na
विद्यार्थी – Vid-yaar-thee
तीव्र – Teev-ra
मोहल्ले – Mo-hal-lay
अधेड़ – A-dhayd
आज्ञा – Aa-gyaa
लट्ठा – Lat-thaa
लुढ़काएँ – Ludh-kaa-ayn
मक्खन – Mak-khan
हत्थी – Hat-thee
पत्थर – Pat-thar
बड़प्पन – Ba-dap-pan
उपेक्षा – U-payk-shaa
हर्ष – Harsh
किस्सा – Kis-saa
वर्षा – Var-shaa
विपत्ति – Vi-pat-ti
उम्र – Um-ra
जबरदस्ती – Ja-bar-das-tee
क्षण – Kshan
ठहरो – Thah-ro
परिणाम – Pa-ri-naam
शेष – Shaysh
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) पाठक कैसा लड़का था?
उत्तर – पाठक अपने मोहल्ले के लड़कों का नेता था। वह बहुत चंचल, शरारती और साहसी लड़का था।
(ख) मुंबई जाने से पहले पाठक ने अपने भाई को क्या-क्या दिया?
उत्तर – पाठक ने अपने भाई मक्खन को अपनी मछली पकड़ने की हत्थी, पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े और अपनी बड़ी पतंग दे दी।
(ग) पाठक को देखकर उसकी मामी प्रसन्न क्यों नहीं हुई?
उत्तर – पाठक को देखकर पाठक की मामी इसलिए प्रसन्न नहीं हुई क्योंकि उनके लिए अपने तीन बच्चे ही काफी थे। उन्हें लगा कि एक चंचल लड़के का घर में आना उनके लिए विपत्ति जैसा होगा।
(घ) विश्वंभर ने पुलिस को सूचना क्यों दी?
उत्तर – जब पाठक घर से गायब हो गया और बहुत खोजने के बाद भी नहीं मिला, तब चिंता के कारण विश्वंभर ने पुलिस को सूचना दी।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) खेल शुरू होने से पहले पाठक के भाई ने क्या किया?
(i) लट्ठा लुढ़का दिया।
(ii) लट्ठे पर बैठ गया। ✓
(iii) पाठक को धक्का दे दिया
(iv) ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा।
(ख) पाठक की माँ का क्रोध आश्चर्य में बदल गया-
(i) पाठक को माफ़ी माँगते देखकर
(ii) घर में अतिथि को आया देखकर
(iii) अचानक अपने भाई को देखकर ✓
(iv) पाठक को पढ़ाई करता देखकर क्योंकि-
(ग) पाठक को अपना पाठ याद करना कठिन हो गया
(i) उसका पढ़ने में मन नहीं लगता था।
(ii) उसे पाठ समझ में नहीं आता था।
(iii) उसे पढ़ने से अधिक खेल में रुचि थी।
(iv) उसकी पुस्तक खो गई थी। ✓
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) नदी के किनारे लकड़ी के लट्ठे को देखकर पाठक ने क्या खेल सोचा?
उत्तर – नदी के किनारे लकड़ी के लट्ठे को देखकर पाठक ने सोचा कि सब मिलकर उस लट्ठे को लुढ़काएँ और उसे नदी के पानी में धकेल दें।
(ख) पाठक की माँ ने उसे मुंबई क्यों भेजा?
उत्तर – पाठक की माँ ने उसे मुंबई भेजा क्योंकि वह बहुत चंचल और जिद्दी हो गया था। माँ को लगा कि अपने मामा के साथ रहकर उसकी पढ़ाई अच्छी होगी और वह सुधर जाएगा।
(ग) मुंबई आने के बाद पाठक कैसा अनुभव करता था?
उत्तर – मुंबई आने के बाद पाठक बहुत उदास रहता था। उसे गाँव की खुली हवा, पतंगबाजी और अपनी माँ की याद सताती थी। उसे वहाँ साँस लेना भी कठिन लगता था।
(घ) मध्याह्न में पुलिस के सिपाही विश्वंभर के द्वार पर क्यों आए थे?
उत्तर – मध्याह्न में पुलिस के सिपाही पाठक को ढूँढकर लाए थे। वह बीमार और कीचड़ में लथपथ था।
(ङ) पाठक ने माँ से छुट्टियाँ होने के बारे में क्यों पूछा?
उत्तर – पाठक ने माँ से छुट्टियों के बारे में पूछा क्योंकि वह अब इस दुनिया से विदा लेकर अपने ‘असली घर’ यानी स्वर्ग जाना चाहता था, जहाँ उसकी सारी पीड़ा समाप्त हो जातीं।
- किसने – किससे कहा?
(क) “मक्खन यदि तू न उठेगा तो इसका बुरा परिणाम होगा।”
उत्तर – पाठक ने — मक्खन से।
(ख) “पाठक चक्रवर्ती कहाँ रहता है?”
उत्तर – अधेड़ उम्र के व्यक्ति (विश्वंभर) ने — पाठक से।
(ग) “क्यों दादा! तुम यहाँ कैसे आए?”
उत्तर – पाठक की माँ ने — विश्वंभर से।
(घ) “ठहरो जब तक छुट्टियाँ न हो जाएँ।”
उत्तर – मामा (विश्वंभर) ने — पाठक से।
(ङ) “अच्छा होता जो तुम इसको घर भिजवा देते।
उत्तर – मामी ने — विश्वंभर से।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
‘माँ की डाँट में भी प्यार छुपा होता है’ इस कहानी के आधार पर लिखिए।
उत्तर – ‘माँ की डाँट में प्यार’ तब दिखता है जब पाठक के बीमार होने पर उसकी माँ बदहवास होकर मुंबई आती है और उसे “मेरे प्यारे बेटे”, “आँख के तारे” कहकर पुकारती है। माँ की डाँट केवल बच्चे को सुधारने के लिए थी, लेकिन उनके हृदय में अपने बच्चे के प्रति अटूट ममता थी।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) ‘स्वर्ग’ का विलोम रूप क्या होगा?
(i) पृथ्वी
(ii) आकाश
(iii) नरक ✓
(iv) पाताल
(ख) सही वर्तनीवाला शब्द कौन सा है?
(i) चक्करवर्ती
(ii) चक्रवरती
(iii) चक्रवर्ति
(iv) चक्रवर्ती ✓
(ग) निम्नलिखित वाक्य में व्यक्तिवाचक संज्ञा पद कौन-सा है?
उसने पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े और अपनी पतंग भी मक्खन को दे दी।
(i) पत्थर
(ii) टुकड़े
(iii) मक्खन ✓
(iv) पतंग
- जानें- संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।
निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण छाँटकर लिखिए-
(क) पाठक ने एक नया खेल सोचा। नया
(ख) नौका में अधेड़ उम्र का व्यक्ति बैठा था। अधेड़
(ग) उसका घरेलू नौकर उसे बुलाने आया। घरेलू
(घ) मामी को चंचल लड़के का आना अच्छा नहीं लगा। चंचल
(ङ) मामी के पहले से ही तीन बच्चे थे। तीन
- रिक्त स्थानों में सही क्रियापद चुनकर लिखिए-
(क) धकेला, फिसला, लुढ़काएँ
(i) आओ, हम सब मिलकर लट्ठे को लुढ़काएँ ।
(ii) लड़कों ने ज़ोर लगाकर लट्ठे को धकेला ।
(iii) लट्ठा हिला और मक्खन फिसला ।
(ख) पूछा, कहा, बताया
(i) नौकर ने कहा तुम्हें मालकिन बुला रही हैं।
(ii) माँ ने भाई को बताया कि पाठक बहुत चंचल है।
(iii) विश्वंभर ने लड़कों की पढ़ाई के बारे में पूछा ________ ।
- निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए-
(क) उसने अपने मामा से पूछा मामा जी मैं घर कब जाऊँगा
उसने अपने मामा से पूछा, “मामा जी, मैं घर कब जाऊँगा?”
(ख) पाठक ने धीरे से कहा माँ क्या छुट्टियाँ आ गई हैं
पाठक ने धीरे से कहा, “माँ! क्या छुट्टियाँ आ गई हैं?”
(ग) उसने अपनी मछली पकड़ने की हत्थी पत्थर के टुकड़े और पतंग मक्खन को दे दी क्योंकि उसे मक्खन से सहानुभूति हो गई थी
उसने अपनी मछली पकड़ने की हत्थी, पत्थर के टुकड़े और पतंग मक्खन को दे दी; क्योंकि उसे मक्खन से सहानुभूति-सी हो गई थी।
(घ) पाठक ने ये शब्द सुने और सिसकियाँ लेकर कहने लगा मैं घर जा तो रहा था पर ये दोनों मुझे ज़बरदस्ती ले आए
पाठक ने ये शब्द सुने और सिसकियाँ लेकर कहने लगा, “मैं घर जा तो रहा था, पर ये दोनों मुझे ज़बरदस्ती ले आए।”
- निम्नलिखित शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखिए-
(क) भाई – बहन
(ख) नौकर – नौकरानी
(ग) अध्यापक – अध्यापिका
(घ) पिता – माता
(ङ) पति – पत्नी
(च) बेटा – बेटी
(छ) मालिक – मालकिन
(ज) मामा – मामी
रोचक क्रियाकलाप
- मान लीजिए आप पाठक हैं। एक अनुच्छेद में लिखिए कि आपको मुंबई में रहते हुए कैसा अनुभव हुआ?
उत्तर – यदि मैं पाठक होता, तो मुंबई मेरे लिए किसी जेल से कम नहीं होती। यहाँ की ऊँची इमारतें और तंग गलियाँ मुझे दमघोंटू लगती हैं। गाँव में, मैं नदी के किनारे अपनी मर्ज़ी का मालिक था, लड़कों का नेता था; पर यहाँ मैं एक अवांछित मेहमान हूँ जिसे कोई प्यार नहीं करता। मामी की तिरछी नज़रें और भाइयों का परायापन मेरे हृदय को छलनी कर देता है। स्कूल में भी मैं खुद को सबसे पीछे पाता हूँ क्योंकि मेरा मन तो उन पतंगों में अटका है जो मेरे गाँव के खुले आसमान में उड़ती हैं। यहाँ हर दिन मैं बस कैलेंडर पर छुट्टियाँ गिनता हूँ। सच कहूँ तो, अपनी माँ की डाँट सुनने के लिए भी मेरा मन तड़प उठता है, क्योंकि उस डाँट में कम से कम अपनापन तो था।
- कल्पना कीजिए कि पाठक मुंबई से अपने घर लौट आया है। अपनी कल्पना को संवाद के रूप में लिखिए कि उसके और मक्खन के बीच क्या बातचीत हुई होगी?
उत्तर – मक्खन – (झिझकते हुए) भैया… क्या आप सच में वापस आ गए?
पाठक – (मुस्कुराते हुए) हाँ मक्खन, इस बार ‘छुट्टियाँ’ सच में आ गई हैं। अब मुझे कहीं नहीं जाना।
मक्खन – मुझे बहुत बुरा लगा था जब आप बीमार होकर लौटे। क्या आपको मेरी याद आई?
पाठक – बहुत याद आई। मुंबई की उस भीड़ में मुझे अपने गाँव की धूल और तुम्हारी शरारतें बहुत याद आती थीं। अच्छा सुनो, मैंने जो अपनी पतंग और मछली पकड़ने की हत्थी तुम्हें दी थी, क्या वे सुरक्षित हैं?
मक्खन – (आँखें चमकाते हुए) हाँ भैया! मैंने उन्हें बहुत संभाल कर रखा है। मैंने एक बार भी उन्हें इस्तेमाल नहीं किया। मुझे लगा आप वापस आएँगे और हम फिर से साथ खेलेंगे।
पाठक – (मक्खन के कंधे पर हाथ रखकर) अब हम साथ ही खेलेंगे। और सुनो, इस बार अगर तुम लट्ठे पर बैठोगे, तो मैं तुम्हें धकेलूँगा नहीं, बल्कि तुम्हारे बगल में बैठ जाऊँगा।
मक्खन – (हँसते हुए) और मैं भी माँ से कभी आपकी झूठी शिकायत नहीं करूँगा। चलिए भैया, घर चलते हैं, माँ आपकी मनपसंद खीर बना रही हैं!
- इस कहानी का जो अंश आपको अच्छा लगा उसका नाटक के रूप में अभिनय कीजिए।
उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।
गृहकार्य
जानें एक ही व्यंजन जब स्वर रहित (बिना स्वर के) और स्वर सहित (स्वर के साथ) रूप में लिखते
हैं तो उन्हें द्वित्व व्यंजन कहते हैं।
निम्नलिखित द्वित्व व्यंजनों से शब्द बनाकर लिखिए-
(क) ल्ल – मोहल्ला, बल्ला, हल्ला
(ख) क्क – धक्का, चक्का, मुक्का
(ग) न्न – प्रसन्न, अन्न, आसन्न
(घ) च्च – बच्चे, कच्चे, सच्चा
(ङ) ट्ट – छुट्टियाँ, लट्टू, गिट्टी

