Natak Mein Natak (Hasya Katha) – Mangal Saxena, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution

पाठ का सारांश

यह कहानी मंगल सक्सेना द्वारा लिखित है, जो यह सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और तुरत-बुद्धि (Presence of Mind) का उपयोग करके कैसे बिगड़े हुए काम को सँभाला जा सकता है।

  1. अधूरी तैयारी और मजबूरी –

राकेश के मोहल्ले के बच्चों ने एक नाटक खेलने की योजना बनाई। राकेश स्वयं कुशल निर्देशक था, लेकिन फुटबॉल खेलते समय हाथ में चोट लगने के कारण वह अभिनय नहीं कर पा रहा था। नाटक में अभिनय करने वाले उसके तीन मित्र—मोहन (चित्रकार), सोहन (शायर) और श्याम (संगीतकार)—बिल्कुल नए और अनाड़ी थे। राकेश को उनकी योग्यता पर संदेह था, फिर भी मोहल्ले की इज़्ज़त के लिए नाटक करना ज़रूरी था।

  1. मंच पर गड़बड़ी –

नाटक शुरू हुआ। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन अचानक संगीतकार श्याम अपना संवाद भूल गया। परदे के पीछे से राकेश धीरे से संवाद बोल रहा था, लेकिन श्याम को सुनाई नहीं दिया। घबराहट में शायर सोहन ने श्याम से कह दिया, “उधर जाकर सुन ले न।” इसके बाद मंच पर संवादों का मजाक बन गया। “स्वर लहरी” की जगह “पशु-पक्षी मुँह की खा जाते हैं” और “शायर साहब” की जगह “गाजर साहब” जैसे शब्दों का प्रयोग होने लगा।

  1. कलाकारों की आपसी लड़ाई –

अपनी गलती सुधारने के बजाय तीनों कलाकार मंच पर ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने लगे और आपस में लड़ने लगे। दर्शक ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे और राकेश को लगा कि अब मोहल्ले की इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी।

  1. राकेश की चतुराई –

जब स्थिति हाथ से निकल गई, तो राकेश अचानक हाथ में पट्टी बाँधे हुए मंच पर पहुँच गया। उसने बहुत अक्लमंदी से पूरी स्थिति को सँभाला। उसने कलाकारों को डाँटते हुए कहा कि यह उनकी ‘रिहर्सल’ (अभ्यास) चल रही है और वे रिहर्सल में भी गलती कर रहे हैं। उसने दर्शकों को यह विश्वास दिला दिया कि जो कुछ भी मंच पर हुआ, वह नाटक का हिस्सा था जिसमें नाटक की तैयारी की कमियों को दिखाया जा रहा था।

  1. सफल अंत –

दर्शक भौंचक्के रह गए। वे जिसे वास्तविक लड़ाई समझ रहे थे, उसे राकेश ने ‘नाटक के भीतर नाटक’ का रूप दे दिया। इस प्रकार राकेश की बुद्धि ने बिगड़ा हुआ खेल बना दिया और नाटक सफल रहा।

मुख्य संदेश –

बुद्धि की परख – संकट के समय घबराने के बजाय ठंडे दिमाग से सोचने पर समाधान अवश्य मिलता है।

टीम वर्क – सफलता के लिए आपसी तालमेल ज़रूरी है; मंच पर एक-दूसरे की गलती को ढंकना चाहिए, न कि उजागर करना।

 

कठिन शब्दार्थ

1  मंचन – नाटक का प्रदर्शन  Staging / Performance

 2  अभिनय – नाटक में रोल करना  Acting

 3  मंच – स्टेज  Stage

 4  कलाकार – अभिनेता  Artist / Actor

 5  निर्देशक – डायरेक्टर  Director

 6  रिहर्सल – पूर्वाभ्यास  Rehearsal

 7  साज-सज्जा – श्रृंगार और तैयारी  Make-up / Decoration

 8  पर्दा – जवनिका  Curtain

 9  संवाद – बातचीत  Dialogue

 10  प्रशंसा – तारीफ  Praise

 11  प्रदर्शन – शो / नुमाइश  Show / Exhibition

 12  साज-सज्जा कक्ष – ड्रेसिंग रूम  Green room / Make-up room

 13  आड़ – ओट / पीछे  Cover / Behind

 14  दर्शक – देखने वाले  Audience

 15  स्वर लहरी – संगीत की गूँज  Musical notes / Melody

 16  विश्वास – भरोसा  Confidence / Trust

 17  घबराहट – बेचैनी  Nervousness / Anxiety

 18  मूर्खतापूर्ण – बेवकूफी भरा  Foolish

 19  नासमझ – नादान  Ignorant / Silly

 20  साहसी – बहादुर  Courageous

 21  उलझना – आपस में झगड़ना  To get entangled / Quarrel

 22  उत्साह – जोश  Enthusiasm

 23  तपाक से – फौरन / तेज़ी से  Instantly / Promptly

 24  अक्लमंदी – बुद्धिमानी  Intelligence / Wisdom

 25  क्रोध – गुस्सा  Anger

 26  भय – डर  Fear

 27  गंभीर – शांत और भारी  Serious

 28  मुग्ध – मोहित  Mesmerized / Fascinated

 29  सकपकाना – चकित होना  To be startled / Taken aback

 30  भौंचक्के – हैरान  Dumbfounded / Surprised

 31  इज़्ज़त – मान-मर्यादा  Respect / Honor

 32  सार्वजनिक – सरकारी / सबका  Public

 33  साधारण – मामूली  Simple / Ordinary

 34  हिदायतें – निर्देश  Instructions / Directions

 35  विवाद – झगड़ा / बहस  Dispute / Controversy

 36  मुलाकात – मिलना  Meeting

 37  फुसफुसाकर – धीरे से बोलना  Whispering

 38  दाँत पीसना – बहुत गुस्सा करना  Gnashing teeth (in anger)

 39  पानी फिरना – सब बेकार होना  To be ruined / Wasted

 40  मिट्टी में मिलना – बर्बाद होना  To be destroyed / Humiliated

 41  तू-तू, मैं-मैं – बहसबाज़ी  Altercation / Wordy duel

 42  मुँह की खाना – बुरी तरह हारना  To suffer a defeat

 43  लोट-पोट होना – बहुत हँसना  Roaring with laughter

 44  कठिनाइयों – मुश्किलें  Difficulties

 45  कमज़ोरियों – खामियाँ  Weaknesses / Flaws

 46  योग्यता – काबिलियत  Ability / Qualification

 47  अभ्यास – प्रैक्टिस  Practice

 48  चित्रकार – पेंटर  Painter

 49  शायर – कवि  Poet

 50  संगीतकार – म्यूजिशियन  Musician

 51  महान – बड़ा / श्रेष्ठ  Great

 52  सहसा – अचानक  Suddenly

 53  पलटकर – पीछे मुड़कर  Turning back

 54  खिसकना – धीरे से हटना  To slide / Move away

 55  झट से – तुरंत  Quickly

 56  मेहनत – परिश्रम  Hard work

 57  बुद्धूपना – बेवकूफी  Stupidity

 58  झख मारना – वक्त बर्बाद करना  To waste time

 59  तरकीब – उपाय  Trick / Scheme

 60  कूँची – ब्रश  Paintbrush

 61  आलूबुखारे – एक फल (यहाँ गाली)  Plum (used as an insult)

 62  सचमुच – असल में  Really / Truly

 63  तुरत-बुद्धि – हाज़िर जवाबी  Presence of mind

 64  सँभालना – नियंत्रण करना  To manage / Handle

 65  अस्पताल – चिकित्सालय  Hospital

 66  पशु-पक्षी – जानवर और पंछी  Animals and Birds

 67  मूर्ख – बेवकूफ  Fool

 68  मटक-मटककर – नखरे से  Swaggering

 69  झख मारना – बेकार काम करना  To do something useless

 70  अधूरा – जो पूरा न हो  Incomplete

 71  पट्टी – बैंडेज  Bandage

 72  गरदन – ग्रीवा  Neck

 73  सातों दिन – पूरा हफ्ता  All seven days

 74  महानता – बड़प्पन  Greatness

 75  खैर – जो भी हो  Anyway

 76  सहारे – मदद से  With support

 77  अक्लमंद – बुद्धिमान  Wise / Smart

 78  अनोखा – विचित्र  Unique / Strange

 79  योजना – स्कीम  Plan

 80  विरुद्ध – खिलाफ  Against

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

मंचन, कहाँ, हँस, संगीतकार, जहाँ, संवाद, स्वयं, कंधे, गूँजती, अक्लमंदी, दाँत, सँभलते, मुँह, बंद, कूँची, आँखें, बँधवाने, शांत, इज़्ज़त, ज़रूरी, तेज़, ज़ोर ज़बरदस्ती

फुटबॉल, पट्टी, मोहल्ले, इज़्ज़त, सार्वजनिक, योग्यता, सप्ताह, समझदार, मूर्खतापूर्ण, अभ्यास, निर्देशन, प्रदर्शन, साज-सज्जा, कक्ष, हिदायतें, चित्रकार, उर्दू, विवाद, फुसफुसाकर, मुग्ध, सूझ बुद्धूपना, रिहर्सल, डायरेक्टर, भौंचक्के

मंचन – Man-chan 

जहाँ / कहाँ – Ja-haan / Ka-haan

संगीतकार – San-geet-kaar 

गूँजती – Goonj-tee

संवाद – Sam-vaad 

सँभलते – Sam-bhal-tay

स्वयं – Sva-yam 

कूँची – Koon-chee

दाँत – Daant 

आँखें – Aan-khayn

मुँह – Moonh 

बँधवाने – Bandh-vaa-nay

इज़्ज़त – Iz-zat 

ज़बरदस्ती – Za-bar-das-tee

ज़रूरी – Za-roo-ree 

फुटबॉल – Foot-ball

तेज़ – Tayz 

साज-सज्जा – Saaj-Saj-jaa

ज़ोर – Zor 

हिदायतें – Hi-daa-ya-tayn

अक्लमंदी – Ak-la-man-dee 

प्रदर्शन – Pra-dar-shan

योग्यता – Yog-ya-taa 

निर्देशन – Nir-day-shan

सप्ताह – Sap-taah 

भौंचक्के – Bhaun-chak-kay

मूर्खतापूर्ण – Moorkh-taa-poorn 

रिहर्सल – Ri-har-sal

अभ्यास – Abhy-aas 

डायरेक्टर – Di-rec-tor

मोहल्ले – Mo-hal-lay 

विवाद – Vi-vaad

सार्वजनिक – Saar-va-ja-nik 

फुसफुसाकर – Phus-phu-saa-kar

चित्रकार – Chit-ra-kaar 

मुग्ध – Mugdh

उर्दू – Ur-doo 

सूझ – Soojh

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) राकेश के निर्देशन की क्या विशेषता थी?

उत्तर – राकेश का निर्देशन अत्यंत सूक्ष्म और प्रभावी था। उसने छोटी-से-छोटी और साधारण-सी बात को भी इतनी अच्छी तरह समझाया था कि नए कलाकार भी उसे आसानी से समझ सकें।

(ख) सज्जा कक्ष में नाटक के पात्रों की क्या दशा हो रही थी?

उत्तर – सज्जा कक्ष अर्थात् ग्रीन रूम में नाटक के पात्र बहुत घबराए हुए थे। मोहन और सोहन का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और वे अपनी बारी आने पर डरे हुए थे।

(ग) संगीतकार साहब ने संवाद बोलने में क्या गलती की?

उत्तर – संगीतकार साहब ने ‘स्वर लहरी’ गूँजने पर पशु-पक्षियों के ‘मुग्ध’ होने की जगह ‘मुँह की खा जाते हैं’ बोल दिया और ‘शायर साहब’ को ‘गाजर साहब’ कह दिया।

(घ) नाटक की किन बातों पर दर्शक ठठा कर हँस पड़े?

उत्तर – जब संगीतकार घबराकर राकेश के पास संवाद सुनने के लिए खिसक आए, गलत संवाद बोले और मंच पर ही तीनों कलाकार आपस में लड़ने लगे, तो दर्शक ठठा कर हँस पड़े।

 

लिखित

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) राकेश नाटक में स्वयं अभिनय नहीं कर रहा था क्योंकि-

(i) वह निर्देशन कर रहा था।

(ii) वह संवाद याद नहीं कर पा रहा था।

(iii) उसकी तैयारी अधूरी थी।

(iv) उसके हाथ में चोट लग गई थी।

(ख) श्याम नाटक के बीच में घबरा गया क्योंकि-

(i) अचानक परदा गिर गया।

(ii) उसे राकेश दिखाई नहीं दिया।

(iii) वह अपना संवाद भूल गया।

(iv) सोहन उससे विवाद करने लगा।

(ग) सभी पात्र चुप होकर सकपका गए क्योंकि-

(i) दर्शक ठठा कर हँस रहे थे।

(ii) तेज़ी से राकेश मंच पर पहुँच गया।

(iii) नाटक में गड़बड़ हो गई थी।

(iv) उनकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) हर एक के अपने को दूसरों से अधिक समझदार मानने का क्या परिणाम होता था?

उत्तर – हर एक के अपने को अधिक समझदार मानने का यह परिणाम होता था कि वे आपसी मूर्खतापूर्ण बातों पर उलझने लगते थे और अपनी भूमिका भूल जाते थे।

(ख) संगीतकार बने श्याम को मंच पर आकर क्या करना था?

उत्तर – संगीतकार बने श्याम को मंच पर आकर चित्रकार और शायर के बीच चल रहे कला के विवाद में संगीत की कला को महान सिद्ध करना था।

(ग) राकेश परदे की आड़ में क्यों खड़ा था?

उत्तर – राकेश परदे की आड़ में इसलिए खड़ा था ताकि वह कलाकारों को उनके संवाद याद दिला सके यदि वे भूल जाएँ।

(घ) चित्रकार महोदय ने बिगड़ी बात कैसे सँभाली?

उत्तर – चित्रकार महोदय ने अक्लमंदी दिखाते हुए संगीतकार की गलती को छिपाने के लिए कहा कि इनका मतलब है कि आपकी शायरी ‘गाजर-मूली’ की तरह है।

(ङ) दर्शक क्या देखकर भौंचक्के रह गए?

उत्तर – दर्शक यह देखकर भौंचक्के रह गए कि जो वे अब तक देख रहे थे, वह वास्तव में नाटक नहीं बल्कि नाटक की रिहर्सल का एक हिस्सा था।

 

  1. निम्नलिखित संवाद किसने किससे कहे?

(क) “मेरा दिल तो बहुत ज़ोरों से धड़क रहा है।”

उत्तर – मोहन ने — सोहन/राकेश से।

(ख) “तुम लोग पानी पियो और मन को साहसी बनाओ।”

उत्तर – राकेश ने — अपने साथी कलाकारों से।

(ग) “इनका मतलब है आपकी शायरी गाजर मूली की तरह है और आप गाजर साहब हैं।”

उत्तर – चित्रकार (मोहन) ने — शायर (सोहन) से।

(घ) “जब संगीत की स्वर लहरी गूँजती है तो पशु-पक्षी तक मुँह की खा जाते हैं।“

उत्तर – संगीतकार (श्याम) ने — शायर (सोहन) से।

(ङ) “अरे, मैंने कह नहीं दिया था कि रिहर्सल में भी यह मानकर चलो कि दर्शक सामने बैठे हैं।”

उत्तर – राकेश ने — मंच पर तीनों कलाकारों से (दर्शकों के सामने)।

 

1. राकेश ने क्या कहकर अपने साथियों की हिम्मत बढ़ाई?
उत्तर – जब साज-सज्जा कक्ष में मोहन और सोहन घबराहट के कारण काँप रहे थे और उनका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, तब राकेश ने बड़े ही धैर्य के साथ उनकी हिम्मत बढ़ाई। उसने उनसे कहा— “तुम लोग पानी पियो और मन को साहसी बनाओ।” राकेश ने उन्हें विश्वास दिलाया कि डरने की कोई बात नहीं है और उन्हें अपने अभ्यास पर भरोसा रखना चाहिए।


2. आपको कहानी का कौन सा पात्र सबसे समझदार लगा और क्यों?
उत्तर – मुझे पूरी कहानी में राकेश सबसे समझदार पात्र लगा। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –
तुरत-बुद्धि (Presence of Mind) – जब नाटक पूरी तरह बिगड़ चुका था और कलाकार मंच पर आपस में लड़ रहे थे, तब राकेश ने घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का प्रयोग किया।
संकट का समाधान – वह अचानक मंच पर पहुँचा और पूरी स्थिति को ‘नाटक की रिहर्सल’ बताकर सँभाल लिया। उसने बिगड़े हुए काम को अपनी चतुराई से एक नया मोड़ दे दिया।
कुशल नेतृत्व – चोटिल होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी और परदे के पीछे से अंत तक अपने मित्रों का मार्गदर्शन किया।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(क) ‘समझदार’ शब्द कैसे बना है?

(i) समझा + दार

(ii) समझ + आदार

(iii) सम + झदार

(iv) समझ + दार

(ख) ‘अपना’ शब्द का विलोम रूप क्या होगा?

(i) दूसरा

(ii) सबका

(iii) पराया

(iv) तुम्हारा

(ग) कौन सा शब्द ‘फूल’ का पर्यायवाची नहीं है?

(i) पुष्प

(ii) कुसुम

(iii) कलिका

(iv) सुमन

  1. पाठ से छाँटकर पाँच जातिवाचक संज्ञा शब्द लिखिए और उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

(क) बच्चे – मैदान में बच्चे खेल रहे हैं।

(ख) मैदान – हमारा खेल का मैदान बहुत बड़ा है।

(ग) कुर्सी – राकेश कुर्सी पर बैठकर चिल्लाने लगा।

(घ) पशु – संगीत सुनकर पशु भी मुग्ध हो जाते हैं।

(ङ) कलाकार – मंच पर सभी कलाकार घबराए हुए थे।

  1. रिक्त स्थानों में ‘ही’ अथवा ‘भी’ लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-

(क) वे नासमझों की तरह आपस में ही उलझने लगते थे।

(ख) संगीतकार महोदय भी राकेश की ओर देखने लगे।

(ग) प्रदर्शन का दिन और समय भी आ गया।

(घ) जो सुनाई पड़ा उसे ही बोलने लगे।

(ङ) राकेश की योग्यता पर सबको विश्वास ही था।

(च) वह तो सचमुच ही अपने आप को चित्रकार समझ बैठा था।

  1. निम्नलिखित अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए-

(क) समय पर सही बात कह सकने की बुद्धि तुरत-बुद्धि

(ख) वह कक्ष जहाँ नाटक के कलाकार तैयार होते हैं साज-सज्जा कक्ष

(ग) नाटक देखने आए लोग दर्शक

(घ) सर्वसाधारण से संबंधित सार्वजनिक

(ङ) जो उर्दू भाषा में कविता लिखता हो शायर

 

  1. पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

(क) तू, तू-मैं, मैं होना (बहस होना) – खिलौने को लेकर बच्चों में तू, तू-मैं, मैं होने लगी।

(ख) मुँह की खाना (हारना) – भारतीय सेना के सामने शत्रुओं को मुँह की खानी पड़ी।

(ग) पानी फिर जाना (व्यर्थ होना) – बारिश होने से किसान की मेहनत पर पानी फिर गया।

(घ) ठठा कर हँसना (ज़ोर से हँसना) – चुटकुला सुनकर सब ठठा कर हँसने लगे।

(ङ) इज़्ज़त मिट्टी में मिलना (बर्बाद होना) – गलत काम करने से खानदान की इज़्ज़त मिट्टी में मिल गई।

रोचक क्रियाकलाप

  1. आपको इस नाटक के मंचन की सूचना विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगानी है। इसके लिए नोटिस बनाइए।

उत्तर – सर्वोदय विद्यालय, दिल्ली

सूचना

दिनांक – 18 फरवरी, 2026

विषय – नाटक ‘तैयारी का नाटक’ का मंचन

विद्यालय के सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि आगामी शुक्रवार को स्कूल सभागार में ‘नाटक में नाटक’ का मंचन किया जाएगा। यह नाटक एक रिहर्सल की हास्यप्रद कठिनाइयों पर आधारित है।

  • समय – दोपहर 12 -00 बजे
  • स्थान – विद्यालय सभागार

सभी की उपस्थिति प्रार्थनीय है।

राकेश कुमार

सांस्कृतिक सचिव

  1. नाटक समाप्त हो जाने पर मोहन, सोहन, श्याम और राकेश के बीच जो बातचीत हुई होगी उसे अपनी कल्पना के आधार पर संवाद रूप में लिखिए।

उत्तर – राकेश – (लंबी साँस लेकर) दोस्तों! आज तो तुमने मेरी जान ही निकाल दी थी।

मोहन – यार राकेश, हम तो घबरा गए थे। तुमने मंच पर आकर कमाल कर दिया।

सोहन – सच में! अगर तुम ‘रिहर्सल’ वाली बात न कहते, तो हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाती।

श्याम – मुझे माफ कर दो, मैं संवाद भूल गया था। पर राकेश की ‘तुरत-बुद्धि’ ने हमें हीरो बना दिया।

राकेश – कोई बात नहीं, पर अगली बार से हम पूरी तैयारी के साथ ही मंच पर उतरेंगे!

  1. इस कहानी को नाटक के रूप में लिखकर उसका मंचन कीजिए।

उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।

 

गृहकार्य

  1. निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए-

(क) मेहनत – परिश्रम

(ख) इज़्ज़त – मान/प्रतिष्ठा

(ग) शायर – कवि

(घ) अक्लमंदी – बुद्धिमानी

(ङ) मुलाकात – भेंट/मिलना

(च) तरकीब – उपाय

 

  1. ‘समझदार’ शब्द में आए ‘झ’ और ‘मूर्खतापूर्ण’ शब्द में आए ‘ण’ के प्रयोग वाले पाँच-पाँच वाक्य लिखिए।

‘झ’ और ‘ण’ अक्षर के प्रयोग वाले वाक्य

  1. मोहन और सोहन छोटी-सी बात को लेकर आपस में उलझ पड़े।
  2. कलाकारों की मूर्खतापूर्ण बातों पर दर्शक ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।
  3. शायर साहब ने संगीतकार से कहा कि तुम्हारी चित्रकला केवल झख मारना है।

 

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