पाठ का सारांश
श्रीमन्नारायण द्वारा लिखित लेख ‘काम या आराम’ श्रम (hard work) की महत्ता और समय के सदुपयोग पर प्रकाश डालता है। लेखक का मानना है कि जीवन का असली स्वाद मेहनत में है, केवल आराम में नहीं।
- गांधीजी और श्रम का विचार –
लेख का आरंभ गांधीजी के एक प्रसंग से होता है। वर्धा में गांधीजी ने समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति को आजीविका के लिए दिन में कम से कम आठ घंटे परिश्रम करना चाहिए। जब एक सज्जन ने केवल चार घंटे काम करने और बाकी समय फुर्सत में बिताने की बात कही, तो गांधीजी ने मजाक में पूछा कि क्या वे बचे हुए चौदह घंटों में दिन भर ‘हजामत’ बनाएँगे? गांधीजी का उद्देश्य यह समझाना था कि बिना काम के मनुष्य का दिमाग भटकने लगता है।
- यंत्र युग और मजदूर की समस्या –
आज मशीनों के बढ़ते प्रयोग ने अमीरों को बिना मेहनत धन कमाने का जरिया दे दिया है, जबकि मजदूर मशीनों के साथ काम करते-करते स्वयं मशीन बन गए हैं। मशीनों का शोर और प्रदूषण मजदूरों को जल्दी थका देता है, इसलिए वे कम घंटे काम और अधिक अवकाश की माँग करते हैं।
- मन का भूत –
लेखक ने एक कहानी के माध्यम से बताया कि हमारा ‘मन’ एक भूत की तरह है। यदि इसे रचनात्मक काम में न लगाया जाए, तो यह मनुष्य को ही नष्ट कर देता है। बर्नाड शॉ के अनुसार, “अनंत अवकाश ही नरक है”। लेखक का तर्क है कि अमीर लोग सुविधाओं के बीच रहकर भी मानसिक रूप से प्यासे ही रहते हैं, क्योंकि उनकी इच्छाएँ कभी तृप्त नहीं होतीं।
- महान विभूतियों का उदाहरण –
लेखक उन लोगों की दलील को गलत बताते हैं जो कहते हैं कि फुर्सत मिलने पर वे कला या विज्ञान की सेवा करेंगे। वे उदाहरण देते हैं कि दुनिया के बड़े आविष्कारक और लेखक स्वयं कठिन परिश्रम करते थे –
- गैलीलियो हकीमी करते थे और अपनी दूरबीन का काँच स्वयं गढ़ते थे।
- स्टीफेंसन (इंजन बनाने वाले) एक साधारण मजदूर थे।
- शेक्सपीयर शुरू में घोड़े सँभालने का काम करते थे।
- वाल्टर का आदर्श था— “हमेशा काम में लगे रहना”।
- हस्तकौशल बनाम मशीन –
पुराने समय में जब लोग घरों या गाँवों में चरखे या करघे पर काम करते थे, तो उन्हें अपने काम में आनंद और संतोष मिलता था। वे ताजी हवा में काम करते थे और स्वस्थ रहते थे। आज का मजदूर शहरों की मिलों में एक जैसा (monotonous) काम करके ऊब जाता है और उस नीरसता को भुलाने के लिए शराब जैसी बुराइयों का सहारा लेता है।
- निष्कर्ष –
लेखक विज्ञान की उन्नति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे आवश्यकता से अधिक मशीनीकरण के खिलाफ हैं क्योंकि इससे बेकारी और सुस्ती बढ़ती है। वे समाज की आर्थिक रचना को बदलने की वकालत करते हैं ताकि सबको श्रम और विश्राम उचित मात्रा में मिल सके।
मुख्य संदेश –
मेहनत ही जीवन की मिठास है।
खाली दिमाग शैतान का घर होता है, इसलिए मन को हमेशा काम में लगाए रखना चाहिए।
हाथ से किया गया काम (Handicraft) मनुष्य को अधिक संतोष और स्वास्थ्य प्रदान करता है।
कठिन शब्दार्थ
1 ग्रामोद्योग – गाँवों के उद्योग Village industries
2 आजीविका – रोजी-रोटी Livelihood
3 परिश्रम – कड़ी मेहनत Labor / Hard work
4 मानसिक – मन से संबंधित Mental
5 हर्ज़ – नुकसान / आपत्ति Harm / Objection
6 फुर्सत – खाली समय Leisure / Free time
7 निर्वाह – गुजारा करना Subsistence / Survival
8 गणना – गिनती Calculation
9 हजामत – दाढ़ी-बाल बनाना Shaving / Barbering
10 मुनासिब – उचित / सही Appropriate / Proper
11 जटिल – कठिन / पेचीदा Complex / Complicated
12 यंत्र – मशीन Machine / Tool
13 पूँजी – धन-संपत्ति Capital / Wealth
14 चैन की वंशी बजाना – सुख से रहना To live at ease
15 शोरगुल – हल्ला / शोर Noise
16 वेग – गति / रफ़्तार Speed / Velocity
17 अवकाश – छुट्टी / फुर्सत Leisure / Vacation
18 तपस्या – साधना Penance / Austerity
19 बेढब – अजीब / अटपटा Awkward / Odd
20 फरमाइशें – माँग / इच्छा Requests / Demands
21 स्वादिष्ट – ज़ायकेदार Delicious / Tasty
22 एवमस्तु – ऐसा ही हो Be it so
23 जी-में-जी आना – चैन मिलना To feel relieved
24 कोरी कल्पना – केवल सोच Pure imagination
25 सर्वव्यापी – हर जगह मौजूद Omnipresent
26 प्रयत्नशील – कोशिश करने वाला Diligent / Striving
27 अनंत – जिसका अंत न हो Infinite / Endless
28 व्याख्या – अर्थ बताना Definition / Explanation
29 शाप – अभिशाप / बद्दुआ Curse
30 विषय-वासना – सांसारिक इच्छाएँ Sensual desires
31 तृप्त – संतुष्ट Satisfied
32 किश्ती – नाव Boat
33 चौगिर्द – चारों ओर All around
34 ज़ायका – स्वाद Taste / Flavor
35 दलील – तर्क Argument / Proof
36 आविष्कारक – खोज करने वाला Inventor
37 प्रयोगशाला – लैब Laboratory
38 सिद्ध करना – प्रमाण देना To prove
39 निरीक्षण – गौर से देखना Observation
40 दूरबीन – टेलीस्कोप Telescope
41 ईजाद – आविष्कार Invention
42 प्रख्यात – प्रसिद्ध Famous / Renowned
43 धंधा – व्यवसाय Business / Trade
44 रोज़गार – नौकरी / काम Employment
45 शिल्पी – कारीगर Sculptor / Artisan
46 संगीतज्ञ – संगीत जानने वाला Musician
47 सदुपयोग – सही इस्तेमाल Proper use
48 अभिशाप – लानत Curse / Bane
49 रवैया – तरीका / व्यवहार Attitude / Manner
50 ललाट – माथा Forehead
51 परमेश्वर – भगवान Almighty God
52 घृणा – नफ़रत Hatred / Disgust
53 जिज्ञासा – जानने की इच्छा Curiosity
54 कर्कश – चुभने वाली Harsh / Piercing
55 दूषित – गंदी / खराब Polluted / Contaminated
56 व्याकुल – परेशान Restless / Anxious
57 नीरस – जिसमें रस न हो Dull / Joyless
58 आफ़त – मुसीबत Calamity / Trouble
59 वेतन – तनख्वाह Salary / Wages
60 करघा – बुनाई का यंत्र Loom
61 परिश्रमालय – मेहनत करने की जगह Workplace
62 तंदुरुस्त – स्वस्थ Healthy / Fit
63 सृजनहार – बनाने वाला (ईश्वर) Creator
64 खुशहाल – सुखी Prosperous / Happy
65 न्योछावर – समर्पित करना Sacrifice / Dedicated
66 सहकारी – मिल-जुलकर काम करना Cooperative
67 बेकारी – बेरोजगारी Unemployment
68 उत्पादन – पैदावार Production
69 वृत्ति – स्वभाव / आदत Tendency / Inclination
70 नौबत – हालत / परिस्थिति Situation / Plight
71 सज्जन – भला आदमी Gentleman
72 हस्ताक्षर – दस्तखत (यहाँ हस्तकौशल) Skill / Handwriting
73 चरखा – सूत कातने का यंत्र Spinning wheel
74 कुटी – झोंपड़ी Cottage / Hut
75 उत्पत्ति – निर्माण Origin / Production
76 लालच – लोभ Greed
77 न्योछावर – त्यागना Sacrifice
78 ऐश-आराम – सुख-सुविधा Luxury
79 एक तिहाई – 1/3 हिस्सा One-third
80 आर्थिक – धन से संबंधित Economic
ग्रामोद्योग, महत्त्व, परिश्रम, सज्जन, समस्या, मनुष्य, प्रसन्न, स्वादिष्ट, सर्वव्यापी, प्रयत्नशील, प्यास साहित्यिकों, प्रख्यात, व्यस्त, शिल्पियों, व्याकुल, तंदुरुस्त
ज़रूरी, हर्ज़, फुरसत, मज़ाक, ज़रूरत, मज़दूर, जिंदगी, गुज़ारनी, हाज़िर, ज़रा, जायका, बेढब, गिड़गिड़ाने
खिलाफ़
संघर्ष, धंधा, प्रसिद्ध, घड़ियों, अधिक, घृणा, बढ़ेगी, गिड़गिड़ाने, अठारह, ठहरो, घबरा, घंटे, घरों, धनिक
ग्रामोद्योग – Gra-mo-dyog
शिल्पियों – Shil-pi-yon
प्रयत्नशील – Pra-yat-na-sheel
प्रख्यात – Prakh-yaat
साहित्यिकों – Saa-hit-yi-kon
तंदुरुस्त – Tan-du-rust
महत्त्व – Ma-hat-va
सर्वव्यापी – Sar-va-vyaa-pee
परिश्रम – Pa-ri-shram
व्याकुल – Vyaa-kul
ज़रूरी – Za-roo-ree
ज़रा – Za-raa
फुरसत – Fur-sat
जायका – Zaa-ye-kaa
मज़दूर – Maz-door
हाज़िर – Haa-zir
ज़िंदगी – Zin-da-gee
खिलाफ़ – Khi-laaf
गुज़ारनी – Gu-zaar-nee
हर्ज़ – Harz
संघर्ष – San-gharsh
घृणा – Ghri-naa
धंधा – Dhan-dhaa
घबरा – Ghab-raa
घड़ियों – Gha-ri-yon
घंटे – Ghan-te
सज्जन – Saj-jan
प्रसन्न – Pra-sann
समस्या – Sa-mas-yaa
स्वादिष्ट – Svaa-disht
मनुष्य – Ma-nush-ya
गिड़गिड़ाने – Gid-gi-daa-nay
अठारह – At-haa-rah
बेढब – Bed-hab
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) मज़दूर अपने अवकाश का समय कैसे बिताना चाहते हैं?
उत्तर – मज़दूर अपने अवकाश का समय अमीरों की तरह नाच-गाने, सिनेमा और थियेटर में बिताने की चाह रखते हैं।
(ख) शंकर जी द्वारा किसान को दिए गए भूत के साथ क्या शर्त थी?
उत्तर – शंकर जी द्वारा किसान को दिए गए भूत के साथ शर्त यह थी कि अगर भूत को कोई काम न बताया जाए, तो वह किसान को हड़प जाएगा।
(ग) लेखक ने धनिकों का हाल कैसा बताया है?
उत्तर – लेखक ने धनिकों की तुलना यूनान के टेंटेलस से की है, जिनके पास भोग-सामग्री तो बहुत है पर उनकी विषय-वासना कभी तृप्त नहीं होती।
(घ) आज का मज़दूर धन के लालच में क्या करता है?
उत्तर – आज का मज़दूर धन के लालच में अपना गाँव छोड़कर शहर आ जाता है, पर वहाँ उसे न मन की शांति मिलती है और न ही वह खुशहाल रह पाता है।
लिखित
- सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-
(क) गांधी जी लोगों को क्या समझा रहे थे?
(i) फ़ुरसत से समय बिताना चाहिए।
(ii) आठ घंटे परिश्रम करना चाहिए। ✓
(iii) खाली बैठे रहना चाहिए।
(iv) छह घंटे सोना चाहिए।
(ख) किसी को कड़ी सज़ा देने के लिए क्या करना चाहिए?
(i) उस पर हुक्म चलाना चाहिए।
(ii) उसे बिलकुल अवकाश नहीं देना चाहिए।
(iii) उससे बहुत काम कराना चाहिए।
(iv) उसे काम न देकर खाली बैठाना चाहिए। ✓
(ग) मनुष्य की शक्तियों का विकास कैसे होता है?
(i) चैन की वंशी बजाकर
(ii) अवकाश का समय बढ़ाकर
(iii) श्रम और संघर्ष करके ✓
(iv) शरीर को आराम देकर
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) लेखक ने पसीना बहाने वाले मज़दूर की दशा कैसी बताई है?
उत्तर – मशीनों के साथ काम करने वाले मज़दूर पसीना बहाते हैं, फिर भी उन्हें गरीबी में ज़िंदगी गुज़ारनी पड़ती है और मशीनों का शोर उन्हें जल्दी थका देता है।
(ख) किसान ने भूत से किन-किन चीज़ों की फ़रमाइश की और उसकी आखिरी फ़रमाइश क्या थी?
उत्तर – किसान ने महल, सैकड़ों नौकरों, स्वादिष्ट मिठाइयों और रंग-बिरंगी पोशाकों की फ़रमाइश की। उसकी आखिरी फ़रमाइश थी कि उसे वापस शंकर जी के पास ले जाया जाए।
(ग) घरों या गाँव की दुकान में काम करने वालों का जीवन कैसा था?
उत्तर – घरों या गाँव की दुकान में काम करने वाले लोग ताज़ी हवा में शांति से काम करते थे, वे तंदुरुस्त, आज़ाद और कलाकार थे तथा अपने सृजन में आनंद पाते थे।
(घ) आवश्यकता से अधिक कल-पुर्जों का उपयोग करने का क्या परिणाम होगा?
उत्तर – आवश्यकता से अधिक कल-पुर्जों के उपयोग से बेकारी बढ़ेगी, काम रसहीन और थकाने वाला बनेगा, सुस्ती जागेगी और ऐश-आराम की वृत्ति उमड़ेगी।
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
पाठांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
कार्लाइल तो श्रम को ही परमेश्वर की पूजा मानता है और सच बात तो यह है कि जो लोग अवकाश की अधिक माँग करते हैं, वे काम से घृणा नहीं करते, बल्कि जिस तरह का काम आज करना पड़ता है, उसमें उन्हें दिलचस्पी नहीं है। एक मिल मज़दूर अपने श्रम में क्योंकर रस ले सकता है? उसे तो बस कलों (मशीनों) की तरह कलों की देख-रेख करना और अपनी मज़दूरी प्राप्त करना है। इसके अलावा न उसे कोई जानकारी है, न जिज्ञासा। मशीनों की कर्कश आवाज़ से, गरमी से, मिल की दूषित हवा से वह घबरा उठता है। रोज़ाना एक सा काम करते-करते वह व्याकुल हो जाता है, उसकी नसें तनने लगती हैं, उसका दिमाग चक्कर खाने लगता है, उसका दिल नीरस बनने लगता है। फिर वह बेचारा आफ़त का मारा कम घंटे काम करने की और अधिक वेतन की माँग पेश न करे तो क्या करे?
(क) कार्लाइल क्या मानता है?
उत्तर – कार्लाइल श्रम को ही परमेश्वर की पूजा मानते हैं।
(ख) लोग काम में दिलचस्पी न होने पर क्या करते हैं?
उत्तर – लोग काम में दिलचस्पी न होने पर लोग अवकाश की अधिक माँग करते हैं।
(ग) मिल मज़दूर पर गरमी और मिल की दूषित हवा का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर – मिल मज़दूर मशीनों की कर्कश आवाज़, गरमी और दूषित हवा से घबरा उठता है और व्याकुल हो जाता है।
(घ) दिमाग चक्कर खाने और दिल नीरस बनने पर मज़दूर क्या करता है?
उत्तर – दिमाग चक्कर खाने और दिल नीरस बनने पर मज़दूर कम घंटे काम करने और अधिक वेतन की माँग पेश करता है।
(ङ) दिए गए शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
घृणा – हमें किसी के काम से घृणा नहीं करनी चाहिए।
श्रम – सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन श्रम आवश्यक है।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
लेखक ने पसीना बहाने वाले मज़दूरों की दशा कैसी बताई है? उनकी दशा को कैसे सुधारा जा सकता है?
उत्तर – लेखक ने बताया है कि मज़दूर मशीनों की तरह काम करते हुए पसीना बहाते हैं पर फिर भी गरीब रहते हैं। उनकी दशा समाज की वर्तमान आर्थिक रचना को जड़ से बदलकर और सबको श्रम व विश्राम की उचित मात्रा प्रदान करके सुधारी जा सकती है।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) ‘पसीना बहाना’ मुहावरे का अर्थ है-
(i) बहुत गरमी होना
(ii) बिजली चली जाना
(iii) मेहनत करना ✓
(iv) धूप में रहना
(ख) किस शब्द में अनुनासिक (ँ) का प्रयोग नहीं होगा?
(i) गाँव
(ii) घंटे ✓
(iii) हँस
(iv) माँग
(ग) ‘परमेश्वर’ शब्द कैसे बना है?
(i) पर + मेश्वर
(ii) परम + एश्वर
(iii) परम + ईश्वर ✓
(iv) परमे + श्वर
(घ) कौन-सा शब्द क्रिया नहीं है?
(i) कहा
(ii) दिया
(iii) सुना
(iv) चिंता ✓
- निम्नलिखित आगत शब्दों के हिंदी रूप लिखिए- –
- (क) मुनासिब – उचित
- (ख) किश्ती – नाव
- (ग) रोज़गार – धंधा/नौकरी
- (घ) पोशाक – वस्त्र/कपड़े
- (ङ) ज़ायका – स्वाद
- (च) तंदुरुस्त – स्वस्थ
- जानें – ‘की’ का प्रयोग दो शब्दों के बीच संबंध बताने के लिए किया जाता है। ‘कि’ अव्यय है जो दो वाक्यों को जोड़ने का काम करता है।
रिक्त स्थानों में ‘कि’ अथवा ‘की’ लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-
(क) गांधी जी कहते थे कि परिश्रम से सफलता मिलती है।
(ख) मजदूर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
(ग) घर की छत से पानी टपक रहा है।
(घ) किसान ने भूत से कहा कि मुझे शंकर जी के पास ले चलो।
(ङ) हमें मिलकर समाज की बुराइयों को दूर करना चाहिए।
(च) मैं चाहता हूँ कि हमारे देश से गरीबी दूर हो जाए।
- निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
- (क) पसीना बहाना – किसान खेत में पसीना बहाकर अनाज उगाता है।
- (ख) चैन की वंशी बजाना – परीक्षा खत्म होने के बाद छात्र चैन की वंशी बजा रहे हैं।
- (ग) पसीने की रोटी खाना – ईमानदार व्यक्ति हमेशा अपने पसीने की रोटी खाता है।
- पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों की संधि करके लिखिए-
(क) प्रति + एक = प्रत्येक
(ख) सद + उपयोग = सदुपयोग
(ग) परिश्रम + आलय = परिश्रमालय
(घ) सत् + जन = सज्जन
(ङ) परम + ईश्वर = परमेश्वर
(च) ग्राम + उद्योग = ग्रामोद्योग
रोचक क्रियाकलाप
- पाठ में आए वैज्ञानिकों के विषय में जानकारी एकत्र कर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन बनाइए।
उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।
- विद्यालय के माली, बस ड्राइवर, चपरासी, सफ़ाई कर्मचारी से यदि आप उनके काम के बारे में जानकारी लेना चाहें, तो क्या – क्या पूछेंगे? चार प्रश्न बनाकर लिखिए।
उत्तर – आपको अपने काम में सबसे ज़्यादा क्या पसंद है?
क्या आपको काम के बीच आराम का पर्याप्त समय मिलता है?
आपके काम में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
आपके काम के लिए किन औज़ारों की ज़रूरत पड़ती है?
3. ‘मैं माता जी के काम में सहायता करता/करती हूँ’ इस विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए।
‘काम या आराम’ पाठ हमें सिखाता है कि श्रम ही जीवन का सच्चा आनंद है। मैं प्रतिदिन अपनी माता जी के घरेलू कार्यों में हाथ बँटाता हूँ। सुबह उठकर मैं अपने बिस्तर को व्यवस्थित करता हूँ और पौधों में पानी डालता हूँ। रसोई के छोटे-छोटे कार्यों, जैसे—सब्जियाँ धोना या मेज सजाने में मैं उनकी मदद करता हूँ। माता जी की सहायता करने से न केवल उनका काम आसान होता है, बल्कि मुझे स्वयं भी नई चीज़ें सीखने को मिलती हैं। हाथ से काम करने से मेरा शरीर तंदुरुस्त रहता है और मुझे मानसिक शांति व संतोष प्राप्त होता है।
गृहकार्य
जानें – आगत शब्दों के सही उच्चारण के लिए ‘ज’ और ‘फ’ के नीचे एक बिंदु का प्रयोग भी किया जाता है; जैसे ‘ज़’, ‘फ़’। इस बिंदु को नुक्ता कहते हैं।
पाठ से छाँटकर नुक्ते के प्रयोग वाले शब्दों की सूची बनाइए। इनका सही उच्चारण भी सीखिए।
फ़ुरसत, मज़दूर, ज़िंदगी, गुज़ारनी, हाज़िर, ज़रा, ज़ायका, फ़ायदा, खिलाफ़, आफ़त, ताज़गी।

