पाठ की व्याख्या
यह कविता चाँद और उसकी माँ के बीच एक काल्पनिक संवाद है, जिसमें चाँद विज्ञान की प्रगति और मनुष्यों द्वारा उसके रहस्यों को उजागर करने से दुखी है।
प्रथम पद्य
सककर बोला चाँद “अरे माता, तू इतनी भोली।
दुनियावालों के समान क्या तेरी मति भी डोली?
घटता-बढ़ता नहीं कभी मैं वैसा ही रहता हूँ,
केवल भ्रमवश दुनिया को घटता-बढ़ता लगता हूँ।
व्याख्या: चाँद अपनी माँ से कहता है कि तुम दुनिया वालों की तरह इतनी भोली क्यों हो? क्या तुम्हारी बुद्धि भी दुनिया वालों की तरह भटक गई है? वह स्पष्ट करता है कि वह कभी छोटा या बड़ा नहीं होता, वह हमेशा एक समान रहता है। केवल लोगों के भ्रम के कारण वह उन्हें घटता-बढ़ता दिखाई देता है।
द्वितीय पद्य
आधा हिस्सा सदा उजाला आधा रहता काला,
इस रहस्य को समझ न पाता केवल दुनियावाला।
अपना उजला भाग धरा को क्रमशः दिखलाता हूँ,
एक्कम, दूज, तीज से बढ़ता पूनम तक जाता हूँ।
व्याख्या: चाँद अपने अस्तित्व का रहस्य समझाते हुए कहता है कि मेरा आधा हिस्सा हमेशा उजाले में रहता है और आधा अँधेरे में। दुनिया वाले इस साधारण से रहस्य को नहीं समझ पाते। वह धीरे-धीरे पृथ्वी को अपना प्रकाशित भाग दिखाता है, जिससे वह तिथियों के अनुसार बढ़ता हुआ पूर्णिमा (पूनम) तक पहुँचता है।
तृतीय पद्य
फिर पूनम के बाद प्रकाशित हिस्सा घटता जाता,
पंद्रहवाँ दिन आते-आते पूर्ण लुप्त हो जाता।
दिखलाई मैं भले पडूँ ना यात्रा हरदम जारी,
पूनम हो या रात अमावस चलना ही लाचारी।
व्याख्या: पूर्णिमा के बाद चाँद का चमकता हुआ हिस्सा घटने लगता है और पंद्रहवें दिन यानी अमावस्या तक वह पूरी तरह छिप जाता है। वह कहता है कि चाहे मैं दुनिया को दिखाई दूँ या न दूँ, मेरी यात्रा कभी नहीं रुकती। पूनम हो या अमावस्या, आकाश में निरंतर चलते रहना ही मेरी नियति है।
चतुर्थ पद्य
चलता रहता आसमान में नहीं दूसरा घर है,
फ़िक्र नहीं जादू-टोने की सरदी का बस डर है।
दे-दे पूनम की ही साइज़ का कुरता सिलवाकर,
आएगा हर रोज़ बदन में इसकी मत चिंता कर।
व्याख्या: चाँद कहता है कि मेरा इस विशाल आसमान के अलावा कोई दूसरा घर नहीं है। मुझे किसी जादू-टोने का डर नहीं है, बस ठंड सताती है। वह अपनी माँ से कहता है कि तुम मुझे पूर्णिमा (पूनम) के आकार का ही कुर्ता सिलवा दो, वह मेरे शरीर पर हर दिन फिट आ जाएगा, तुम इसकी चिंता मत करो।
पंचम पद्य
अब तो सरदी से भी ज़्यादा एक समस्या भारी,
जिसने मेरी इतने दिन की इज्जत सभी उतारी।
कभी ‘अपोलो’ ने है रौंदा ‘लूका’ कभी सताता,
मेरी कंचन-सी काया को मिट्टी का बतलाता।
व्याख्या: यहाँ चाँद अपनी मुख्य व्यथा बताता है। वह कहता है कि अब ठंड से भी बड़ी समस्या विज्ञान है, जिसने उसकी प्रतिष्ठा कम कर दी है। कभी ‘अपोलो’ उस पर उतरता है, तो कभी ‘लूका’ उसे सताता है। जो लोग उसे सोने जैसी चमकदार काया वाला समझते थे, अब ये यान उसे केवल मिट्टी का ढेर बताते हैं।
षष्ठ पद्य
मेरी कोमल-सी काया को कहते रॉकेटवाले,
कुछ उबड़-खाबड़ ज़मीन है कुछ पहाड़ कुछ नाले।
चंद्रमुखी सुन कौन करेगी गौरव निज मुखड़े पर,
खुश होगी कैसे नारी ऐसी भद्दी उपमा पर।
व्याख्या: चाँद दुखी होकर कहता है कि रॉकेट वाले उसकी कोमल काया को ‘उबड़-खाबड़’ जमीन, पहाड़ और गड्ढे कहते हैं। वह सोचता है कि अब कोई भी स्त्री अपने चेहरे को ‘चंद्रमुखी’ सुनकर गर्व कैसे करेगी? ऐसी भद्दी उपमा पर कोई भी नारी खुश नहीं हो सकती।
सप्तम पद्य
कौन पसंद करेगा ऐसे गड्ढों और नालों को,
किसकी नज़र लगेगी अब चंदा से मुखवालों को।
चंद्रयान भेजा भारत ने भेद और कुछ लाने,
रही सही जो पोल बची थी उसे उजागर करने।
व्याख्या: चाँद को डर है कि अब उसके मुख की सुंदरता का उदाहरण कोई नहीं देगा क्योंकि उसमें गड्ढे बताए गए हैं। वह भारत के ‘चंद्रयान’ का उल्लेख करते हुए कहता है कि भारत ने भी यान भेजकर उसके बचे-खुचे रहस्यों को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
अष्टम पद्य
एक सुहाना भ्रम दुनिया का क्या अब मिट जाएगा?
नन्हा मुन्ना क्या चंदा की लोरी सुन पाएगा?
अब तो तू ही बतला दे माँ, कैसे लाज बचाऊँ?
ओढ़ अँधेरे की चादर क्या सागर में छिप जाऊँ?
व्याख्या: अंत में चाँद भावुक होकर पूछता है कि क्या चाँद की सुंदरता का वह सुहाना भ्रम अब दुनिया से मिट जाएगा? क्या अब छोटे बच्चे ‘चंदा मामा’ की लोरी सुन पाएँगे? वह अपनी माँ से पूछता है कि अब वह अपनी इज्जत कैसे बचाए? क्या वह अँधेरे की चादर ओढ़कर समुद्र में जाकर छिप जाए?
कठिन शब्दार्थ
मति – बुद्धि / समझ Intellect / Mind
भ्रमवश – धोखे से / गलती से By illusion / Mistakenly
रहस्य – भेद / राज़ Mystery / Secret
धरा – पृथ्वी / धरती Earth
क्रमशः – धीरे-धीरे / बारी-बारी से Gradually / Sequentially
पूनम – पूर्णिमा (पूरी चाँद की रात) Full Moon night
अमावस – अमावस्या (बिना चाँद की रात) New Moon night
लाचारी – विवशता / मजबूरी Helplessness
लुप्त – गायब हो जाना Vanished / Hidden
अपोलो – अमरीका का एक अंतरिक्ष यान Apollo (Space mission)
लूका – लूना / चाँद का एक अभियान Luna (Space mission)
रौंदना – कुचलना / पैरों के नीचे आना To trample / Tread upon
काया – शरीर / देह Body
कंचन – सोना (स्वर्ण) Gold
उबड़-खाबड़ – ऊँची-नीची (जमीन) Uneven / Rugged
चंद्रयान – भारत का चंद्रमा पर भेजा गया यान Chandrayaan (Indian Lunar craft)
भेद – रहस्य / आंतरिक बात Secret / Internal info
पोल खोलना – रहस्य उजागर करना To expose the truth
चंद्रमुखी – चाँद जैसे मुख वाली स्त्री Moon-faced (Beautiful) woman
गौरव – अभिमान / गर्व Pride / Glory
उपमा – तुलना करना Metaphor / Comparison
भद्दी – बदसूरत / जो अच्छी न लगे Ugly / Unpleasant
सुहाना – सुखद / प्यारा Pleasant / Beautiful
लाज – इज्जत / शर्म Honour / Modesty
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
भ्रमवश, रहस्य, क्रमशः, पंद्रहवाँ, लुप्त, इज़्ज़त, रौंदा, कंचन, रॉकेट, मुखड़े, भद्दी, गड्ढों, नन्हा-मुन्ना ओढ़, अँधेरे
भ्रमवश – Bhram-vash – ‘भ्र’ के लिए ‘Bhr’ की संयुक्त ध्वनि निकालें।
रहस्य – Ra-has-ya – ‘स’ और ‘य’ को मिलाकर ‘Sya’ बोलें।
क्रमशः – Kram-shah – अंत में ‘ह’ की हल्की ध्वनि (Visarg) निकालें।
पंद्रहवाँ – Pan-drah-vaan – ‘वाँ’ के लिए नाक से ध्वनि (Nasal sound) निकालें।
लुप्त – Lup-ta – ‘प’ और ‘त’ को जोड़कर ‘Pta’ बोलें।
इज़्ज़त – Iz-zat – ‘ज़’ के नीचे बिंदु (नुक्ता) होने के कारण ‘Z’ की ध्वनि निकालें।
रौंदा – Raun-daa – ‘रौ’ पर बिंदी होने के कारण नासिका ध्वनि का प्रयोग करें।
कंचन – Kan-chan – ‘क’ के बाद ‘n’ की ध्वनि निकालें।
रॉकेट – Rau-ket – ‘रॉ’ को ‘Raw’ की तरह उच्चारित करें।
मुखड़े – Mukh-ray – ‘ड़’ के लिए जीभ को झटके से नीचे गिराएँ।
भद्दी – Bhad-dee – ‘द’ और ‘दी’ को जोड़कर ‘Ddee’ बोलें।
गड्ढों – Gad-dhon – ‘ड’ और ‘ढ’ को मिलाकर ‘Ddhon’ जैसा उच्चारण करें।
नन्हा-मुन्ना – Nan-haa Mun-naa – ‘न्हा’ और ‘न्ना’ में ‘N’ की ध्वनि पर ज़ोर दें।
ओढ़ – Orh – ‘ढ़’ के लिए ‘Rh’ की गहरी ध्वनि निकालें।
अँधेरे – An-dhay-ray – ‘अँ’ के लिए नाक और मुँह दोनों से ध्वनि निकालें।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) चाँद दुनिया को घटता-बढ़ता क्यों लगता है?
उत्तर: चाँद दुनिया को घटता-बढ़ता लगता है क्योंकि वह पृथ्वी को अपना प्रकाशित उजला भाग क्रमशः धीरे-धीरे दिखाता है। यह केवल दुनियावालों का एक भ्रम है।
(ख) चाँद ने अपनी क्या लाचारी बताई है?
उत्तर: चाँद की लाचारी यह है कि चाहे पूर्णिमा हो या अमावस्या, उसे आसमान में निरंतर चलते ही रहना पड़ता है क्योंकि उसका आसमान के अलावा कोई दूसरा घर नहीं है।
(ग) भारत ने चंद्रयान क्यों भेजा?
उत्तर: भारत ने चाँद के और अधिक रहस्यों को जानने और जो सच्चाई छिपी हुई थी उसे उजागर करने के लिए चंद्रयान भेजा है।
लिखित
1. सही उत्तर पर ✓ लगाइए–
(क) चाँद का हिस्सा कब घटता जाता है?
(i) पंद्रहवें दिन
(ii) पूनम के बाद ✓
(iii) एक्कम, दूज, तीज से
(iv) यात्रा करते-करते
(ख) चाँद को किसका डर है?
(i) जादू-टोने का
(ii) अमावस का
(iii) सरदी का
(iv) पूर्ण लुप्त होने का ✓
(ग) चाँद लाज बचाने के लिए कहाँ छिप जाना चाहता है?
(i) अँधेरे में
(ii) चंद्रयान में
(iii) गड्ढों में
(iv) सागर में ✓
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) चाँद ने माता को दुनियावालों के किस भ्रम के विषय में बताया?
उत्तर – चाँद ने बताया कि दुनियावाले इस भ्रम में रहते हैं कि चाँद घटता-बढ़ता है, जबकि वह हमेशा वैसा ही रहता है।
(ख) चाँद अपना उजला भाग क्रमशः किस रूप में दिखाता है?
उत्तर – चाँद अपना उजला भाग क्रमशः तिथियों के अनुसार—एक्कम, दूज, तीज के रूप में दिखाता है।
(ग) ‘अपोलो’ और ‘लूका’ से चाँद को क्या समस्या है?
उत्तर -‘अपोलो’ और ‘लूका’ जैसे अभियानों से चाँद को यह समस्या है कि इन्होंने उसकी सोने जैसी चमकदार काया को मिट्टी का बताकर उसकी इज्जत कम कर दी है।
(घ) रॉकेटवालों की बात सुनकर चंद्रमुखी अपने मुखड़े पर गर्व क्यों नहीं करेगी?
उत्तर – रॉकेटवालों ने चाँद को उबड़-खाबड़ जमीन, पहाड़, गड्ढों और नालों वाला बताया है, इसलिए ऐसी भद्दी तुलना सुनकर चंद्रमुखी अपने मुखड़े पर गर्व नहीं करेगी।
- कविता के आधार पर वाक्य पूरे कीजिए-
(क) दुनियावाले इस रहस्य को समझ नहीं पाते।
(ग) चाँद के दिखाई न देने पर भी उसकी यात्रा हरदम जारी रहती है।
(घ) भारत ने कुछ और भेद लाने के लिए चंद्रयान भेजा है।
(ङ) क्या अब दुनिया का एक सुहाना भ्रम मिट जाएगा?
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
- बच्चों और सुंदर स्त्रियों के मुख का चाँद से क्या संबंध है?
उत्तर – सुंदर स्त्रियों और बच्चों के मुख की तुलना चाँद की सुंदरता, शीतलता और कोमलता से की जाती है जैसे ‘चंद्रमुखी’ या ‘चंदा मामा’।
- चंद्रयान द्वारा लाई गई जानकारी का इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर – चंद्रयान द्वारा लाई गई वैज्ञानिक जानकारी जैसे चाँद की सतह, गड्ढे, धूल, उबड़-खाबड़ जमीन से चाँद की सुंदरता का ‘सुहाना भ्रम’ टूट जाएगा और पारंपरिक उपमाएँ अपना महत्व खो सकती हैं।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-
(क) ‘प्रकाशित’ शब्द बना है-
(i) प्रका + शित
(iii) प्रकाशि + त
(ii) प्रकाश + इत ✓
(iv) प्रकाशि + इत
(ख) ‘चंद्रमुखी’ शब्द बना है-
(i) चंद्र का मुख
(ii) चंद्र है मुख जिसका
(iii) चाँद के जैसे मुखवाली ✓
(iv) मुख पर चाँद रखने वाली
- जानें – जब काम करने वाला कोई काम स्वयं न करके किसी दूसरे से करवाता है, तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं; जैसे- क्रिया खुद करने पर देखना, किसी दूसरे से करवाने पर दिखलाना।
निम्नलिखित क्रियाओं के प्रेरणार्थक रूप लिखिए-
स्वयं करने पर प्रेरणार्थक रूप
(क) सीना — सिलवाना
(ख) देना — दिलवाना
(ग) खाना — खिलाना
(घ) सोना — सुलाना
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखिए-
(क) घटता x बढ़ता
(ख) कोमल x कठोर/खुरदरा
(ग) ज़्यादा x कम
(घ) अँधेरा x उजाला
(ङ) भेजना x मँगाना
(च) सरदी x गरमी
- खंड ‘क’ और खंड ‘ख’ से चुनकर समानार्थक शब्दों के जोड़े बनाकर लिखिए-
(क) धरा — पृथ्वी
(ख) पहाड़ — पर्वत
(ग) चाँद — राकेश
(घ) सागर — समुद्र
(ङ) आसमान — गगन
रोचक क्रियाकलाप
- चंद्रयान मिशन के विषय में जानकारी एकत्र कर एक अनुच्छेद लिखिए-
चंद्रयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक महत्वाकांक्षी चंद्रमा अन्वेषण कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के रहस्यों को सुलझाना और वहां पानी, खनिजों तथा मिट्टी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करना है।
चंद्रयान-1: यह भारत का पहला चंद्र मिशन था, जिसने चंद्रमा की कक्षा में पहुँचकर वहां पानी के अणुओं की ऐतिहासिक खोज की थी।
चंद्रयान-2: इस मिशन के अंतर्गत एक ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) भेजे गए थे। हालांकि लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग सफल नहीं हो पाई थी, लेकिन इसका ऑर्बिटर आज भी चंद्रमा की सतह की महत्वपूर्ण तस्वीरें भेज रहा है।
चंद्रयान-3: 2023 में भारत ने चंद्रयान-3 के माध्यम से इतिहास रचा, जब इसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना।
इस मिशन ने कविता में चाँद द्वारा व्यक्त की गई “पोल खुलने” की चिंता को सच कर दिया है, क्योंकि अब हम जानते हैं कि चाँद की सतह कोमल नहीं बल्कि उबड़-खाबड़, चट्टानी और गड्ढों वाली है। इन मिशनों ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
- अपने भूगोल शिक्षक महोदय की सहायता से जानकार पूर्णमासी से अमावस्या तक आकाश में धीरे-धीरे घटता हुआ चाँद कैसा दिखाई देता है इसके चित्र अपनी स्क्रैप बुक में बनाइए।
छात्र इसे स्वयं करें।
गृहकार्य
अपने बचपन में चाँद के ऊपर सुनी हुई कोई कविता याद करके लिखिए।
छात्र इसे स्वयं करें।

