Kayantaran (Kahani) – Jayanandan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution

पाठ का सारांश

जयनंदन द्वारा लिखित कहानी ‘कायांतरण’ अर्थात् हृदय परिवर्तन एक बालक की निश्छल बालवृत्ति और उसकी दयालुता की मार्मिक कथा है, जो एक अपराधी के भीतर की मानवता को जगा देती है।

  1. आधी रात का सन्नाटा और श्लेष की सतर्कता –

आठ वर्षीय श्लेष आधी रात को अपने बीमार पिता के सिरहाने बैठा उनकी देखभाल कर रहा था। उसके पिता को आठ दिनों के बाद नींद आई थी। तभी उसे बरामदे से आहट मिली। श्लेष ने देखा कि एक आदमी काँच लगी चारदीवारी फाँदकर अंदर आने की कोशिश कर रहा है और उसके पैरों से खून टपक रहा है।

  1. बालक का निश्छल व्यवहार –

चोर को देखकर डरने या चिल्लाने के बजाय, श्लेष ने उसकी मदद की। उसने चोर को चोट से बचाने के लिए स्टूल लाकर दिया और उसे शोर न करने का आग्रह किया ताकि उसके बीमार पिता की नींद न टूट जाए। श्लेष ने अपने कोमल हाथों से चोर के ज़ख्मों पर मरहम-पट्टी की।

  1. चोर की हैरानी और श्लेष का तर्क –

चोर यह सोचकर हैरान था कि श्लेष उसे पहचानकर भी शोर क्यों नहीं मचा रहा। श्लेष ने निर्द्वंद्व भाव से कहा कि वह जानता है कि वह चोर है, लेकिन उसके पिता ने सिखाया है कि कोई भी व्यक्ति यदि तकलीफ में हो, तो उसकी सहायता करनी चाहिए। श्लेष ने उसे घर का सामान ले जाने के लिए खुद ताला खोलने का प्रस्ताव भी दिया ताकि वह दोबारा दीवार से कूदकर घायल न हो।

  1. चोर का हृदय परिवर्तन (कायांतरण) –

श्लेष ने अपनी माँ के न होने और घर के पुराने नौकर द्वारा सामान लेकर भाग जाने की बात बताई। उसने चोर को खाने के लिए ब्रेड और दर्द की दवा भी दी। बालक के इस निश्छल प्रेम और निस्वार्थ व्यवहार ने चोर के भीतर के पत्थर दिल इंसान को पिघला दिया। उसे अपने घृणित कार्यों पर ग्लानि हुई।

  1. कहानी का अंत –

चोर का पूरी तरह हृदय परिवर्तन हो गया। उसने श्लेष को गले लगा लिया और निर्णय लिया कि वह अब उस घर से नहीं जाएगा। उसने कहा कि वह श्लेष के पिता के जागने पर उनसे विनती करेगा कि उनके घर से एक नौकर चोर बनकर भागा था, लेकिन अब एक चोर आकर उनका वफादार नौकर बनना चाहता है।

मुख्य संदेश –

प्रेम, सहानुभूति और दया से किसी भी अपराधी का हृदय परिवर्तन किया जा सकता है।

निश्छल बाल मन में वह शक्ति होती है जो बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के पास भी नहीं होती।

संस्कार ही मनुष्य के व्यवहार की नींव होते हैं, जैसा कि श्लेष के पिता ने उसे सिखाया था।

कठिन शब्दार्थ

1 कायांतरण – रूप या स्वभाव का बदलना Transformation

2 बेसुध – होश न रहना / गहरी नींद Unconscious / Fast asleep

3 सिरहाने – सिर की ओर At the head of the bed

4 सन्नाटा – चुप्पी Silence

5 किवाड़ – दरवाज़ा Door

6 चारदीवारी – अहाता Boundary wall

7 मानवाकृति – मनुष्य की आकृति Human figure

8 रुपहली – चाँदी जैसी सफेद Silvery

9 द्रव – तरल पदार्थ (खून) Liquid

10 तत्क्षण – उसी पल Instantly

11 युक्ति – उपाय / तरकीब Trick / Idea

12 अमल करना – लागू करना To implement

13 ठगा-सा रह जाना – चकित रह जाना To be stunned

14 कराहना – दर्द से आवाज़ निकालना To groan / Moan

15 अवाक – हैरान / चुप Speechless

16 अबोध – नासमझ / मासूम Innocent

17 विचित्र – अनोखा / अजीब Strange

18 सहानुभूति – हमदर्दी Sympathy

19 निद्वंद्व – बिना किसी संकोच के Without hesitation

20 नेकी – भलाई Goodness / Virtue

21 निश्चल – जिसमें छल न हो Guileless / Pure

22 बालवृत्ति – बच्चों जैसा स्वभाव Child-like nature

23 पराजित – हार जाना Defeated

24 विचलित – बेचैन Disturbed

25 पसीजकर – दया आना To be moved by pity

26 खुशामद – चापलूसी (यहाँ विनती) Flattery / Entreaty

27 लहजा – बोलने का ढंग Tone / Accent

28 मासूम – भोला Innocent

29 समर्पण – सौंप देना Surrender

30 धैर्य – धीरज Patience

31 ज़ख्मी – घायल Wounded

32 निर्णय – फैसला Decision

33 घृणित – नफरत के लायक Hateful / Despicable

34 बरताव – व्यवहार Behavior

35 अलाव – आग का ढेर Bonfire

36 छलछला आना – आँसू भर आना Eyes welling up

37 विनती – प्रार्थना Request

38 विस्मय – आश्चर्य Astonishment

39 सामर्थ्य – शक्ति / क्षमता Capability / Strength

40 ग्लानी – पछतावा Remorse

41 इरादा – संकल्प Intent

42 चुनौती – ललकार Challenge

43 झिझकते – हिचकिचाते हुए Hesitatingly

44 अनुराग – प्रेम / लगाव Affection

45 साधु – सज्जन / अच्छा Saintly / Noble

46 बेचारगी – लाचारी Helplessness

47 बोझिल – भारी Heavy / Burdened

48 परछाईं – छाया Shadow

49 आहिस्ता – धीरे से Slowly

50 वास्तव में – सचमुच In reality

51 क्षमा – माफ़ी Forgiveness

52 ऋषि-मुनि – तपस्वी Sages and Saints

53 वफादार – वफा करने वाला Loyal

54 देखभाल – सेवा Care

55 आश्रय – सहारा Shelter

56 शौकत – शान Splendor

57 भ्रम – गलतफहमी Illusion

58 व्यर्थ – बेकार Useless

59 सख्त – कठोर Hard / Tough

60 हृदय – दिल Heart

61 पवित्र – शुद्ध Pure / Holy

62 प्रभाव – असर Influence

63 परिवर्तन – बदलाव Change

64 सजग – सावधान Alert

65 आह्लादित – खुश Delighted

66 घोर – बहुत अधिक Extreme

67 विमुग्ध – मोहित Fascinated

68 मर्म – रहस्य Core / Essence

69 विदारक – फाड़ने वाला (दुखद) Heart-rending

70 अपेक्षा – तुलना / उम्मीद Expectation

71 निरंतर – लगातार Continuous

72 तृप्ति – संतोष Satisfaction

73 व्याकुलता – बेचैनी Anxiety

74 सांत्वना – ढाढ़स Consolation

75 कृतज्ञता – आभार Gratitude

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

द्रव, निद्वंद्व, सिर्फ, ब्रेड, दर्द, सामर्थ्य, सन्नाटा, वर्षीय, मानवाकृति, श्लेष, आकृति, तत्क्षण, ज़ख्मी, सहानुभूति, सख्त, झिझकते, बोझिल, आहिस्ता, बालवृत्ति, घृणित

द्रव – Drav ‘D’ और ‘R’ को मिलाकर बोलें।

निद्वंद्व – Nid-van-dva ‘D’ और ‘V’ को दो बार संयोजित करें।

श्लेष – Sh-laysh ‘Sh’ की ध्वनि तालू से निकालें।

तत्क्षण – Tat-kshan ‘क्ष’ के लिए ‘K’ और ‘Sh’ का प्रयोग करें।

सामर्थ्य – Saa-mar-thya अंत में ‘र’ और ‘थ्य’ को मिलाकर बोलें।

मानवाकृति – Maan-vaak-ri-ti ‘कृ’ को ‘Kri’ की तरह उच्चारित करें।

सिर्फ – Sirf ज़ख्मी – Zakh-mee

ब्रेड – Bread आहिस्ता – Aa-his-taa

घृणित – Ghri-nit बालवृत्ति – Baal-vrit-ti

सन्नाटा – San-naa-taa वर्षीय – Var-shee-ya

आकृति – Aak-ri-ti सहानुभूति – Sa-haa-nu-bhoo-ti

दर्द – Dard सख्त – Sakht

झिझकते – Jhi-jhak-tay बोझिल – Bo-jhil

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) चाँद की चाँदनी में श्लेष को क्या दिखाई दिया?

उत्तर – श्लेष को चाँद की चाँदनी में दीवार फाँदकर आता हुआ एक चोर दिखाई दिया, जिसके पैरों से खून टपक रहा था।

(ख) दवा लेने गए श्लेष के विषय में आदमी ने क्या सोचा?

उत्तर – दवा लेने गए श्लेष के विषय में उस आदमी ने सोचा कि यह लड़का विचित्र है, शायद दिमाग से पैदल है या चालाकी कर रहा है। वह हैरान था कि श्लेष चिल्लाने के बजाय उसकी मदद कर रहा है।

(ग) चोर की आँख में आँसू देखकर श्लेष ने क्या किया?

उत्तर – चोर की आँख में आँसू देखकर श्लेष अंदर की ओर दौड़ा और दूसरे ही क्षण अपने साथ एक कैप्सूल, ब्रेड के स्लाइस और एक गिलास पानी लेकर लौटा ताकि वह चोर के दर्द और भूख को कम कर सके।

(घ) चोर श्लेष के पापा से क्या विनती करना चाहता था?

उत्तर – चोर श्लेष के पापा से यह विनती करना चाहता था कि उसके घर से एक नौकर चोर बनकर भागा था, अब एक चोर आकर वफादार नौकर बनना चाहता है।

लिखित

  1. सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-

(क) श्लेष दौड़कर स्टूल क्यों लाया?

(i) मानवाकृति के पैर से बहता रक्त देखकर

(ii) मानवाकृति की उतरने में सहायता करने के लिए

(iii) शोर होने से बचाने के लिए

(iv) पापा की नींद टूटने से बचाने के लिए

(ख) श्लेष की किस बात को सुनकर चोर भीतर से हिल गया?

(i) श्लेष के पिता की बीमारी को जानकर

(ii) श्लेष द्वारा की गई मरहम-पट्टी को देखकर

(iii) श्लेष की मम्मी के विषय में जानकर

(iv) श्लेष की परेशानियों के बारे में सोचकर

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) नीचे उतरा हुआ आदमी श्लेष की किस बात से ठगा-सा रह गया?

उत्तर – नीचे उतरा हुआ चोर श्लेष की इस बात से ठगा सा रह गया कि—”तुम दर्द से रोना या कराहना नहीं, नहीं तो मेरे पापा की नींद टूट जाएगी।”

(ख) आदमी को श्लेष से अपने लिए कैसे व्यवहार की उम्मीद थी?

उत्तर – चोर को उम्मीद थी कि लड़का उसे देखकर शोर मचाएगा और पूरे मोहल्ले को इकट्ठा कर लेगा।

(ग) क्या देखकर चोर के इरादे के सामने चुनौती खड़ी हो गई?

उत्तर – श्लेष की नेकी, बचपना और उसके भोलेपन को देखकर चोर के इरादे के सामने चुनौती खड़ी हो गई।

(घ) चोर की आँखें फिर से क्यों छलछला आई?

उत्तर – श्लेष ने जब कहा कि उसके घर का नौकर सामान लेकर भाग गया और फिर उसे खाने के लिए ब्रेड और दवा दी, तो बालक की निश्छलता देखकर चोर की आँखें छलछला आईं।

 

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

“मम्मी को मैंने देखा नहीं, पापा कहते हैं कि वे बहुत पहले ऐसी जगह चली गईं, जहाँ से कोई वापस नहीं आता।” चोर भीतर से हिल गया था। उसके चेहरे पर अनुराग की एक परछाईं उभर आई। स्वर में मिठास भरकर उसने पूछा,”तुम्हारा नाम क्या है?”“मेरा नाम श्लेष है, मगर तुम ये सब क्यों जानना चाहते हो? सुनो, अब तुम हमारे घर से जो कुछ ले जाना चाहो ले जा सकते हो। मैं ताला खोल देता हूँ। ऊपर से कूदना अच्छा नहीं, दीवार पर काँच के टुकड़े लगे हुए हैं… तुम्हारे पैर फिर से ज़ख्मी हो सकते हैं।” श्लेष ने आहिस्ता से समझाते हुए कहा।

(क) श्लेष ने चोर को अपनी माँ के बारे में क्या बताया?

उत्तर – श्लेष ने चोर को बताया कि उसने अपनी मम्मी को कभी देखा नहीं है क्योंकि वे बहुत पहले ऐसी जगह चली गई हैं जहाँ से कोई वापस नहीं आता अर्थात् उनकी मृत्यु हो चुकी है।

(ख) श्लेष के उत्तर का चोर पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – श्लेष की बात सुनकर चोर भीतर से हिल गया। उसके मन में बालक के प्रति प्रेम और सहानुभूति जागी, जिससे उसके कठोर चेहरे पर अनुराग की परछाईं उभर आई।

(ग) श्लेष ने ताला खोलने की बात क्यों कही?

उत्तर – श्लेष ने ताला खोलने की बात इसलिए कही क्योंकि वह नहीं चाहता था कि चोर दोबारा काँच लगी ऊँची दीवार से कूदकर अपने पैरों को ज़ख्मी करे।

(घ) लेखक ‘चोर भीतर से हिल गया था’ कहकर क्या बताना चाहता है?

उत्तर – लेखक इस पंक्ति के माध्यम से यह बताना चाहता है कि एक छोटे से बालक की निश्छलता और उसकी दुखद पारिवारिक स्थिति जानकर चोर का पत्थर जैसा कठोर हृदय पिघल गया और उसके भीतर की सोई हुई इंसानियत जाग उठी।

 

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

श्लेष की निश्छल बालवृत्ति का चोर पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – श्लेष की निश्छल बालवृत्ति, निस्वार्थ सेवा और बिना किसी डर के चोर की मदद करने के स्वभाव ने चोर को पूरी तरह बदल दिया। चोर को अपनी घृणित ज़िंदगी पर ग्लानि (पछतावा) हुई। बालक के प्रेम ने उसके ‘चोर’ वाले व्यक्तित्व को समाप्त कर उसे एक ‘वफादार इंसान’ बना दिया। वह इतना प्रभावित हुआ कि उसने चोरी का रास्ता छोड़कर उसी घर में सेवा करने का संकल्प ले लिया।

भाषा ज्ञान

(क) ‘ठगा सा रहा जाना’ मुहावरे का अर्थ है-

  1. सही उत्तर पर लगाइए-

(i) किसी को धोखा देना

(ii) किसी को ठग लेना

(iii) आश्चर्यचकित रह जाना

(iv) ठग जैसा दिखाई देना

 (ख) दिए गए वर्ण-विच्छेद से कौन सा शब्द बनेगा?

श् + ल् + ए + ष् + अ =

(i) शलेष

(ii) श्लेष

(iii) शेलष

(iv) शल्ष

(ग) किस शब्द में चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग नहीं होगा?

(i) आँख

(ii) वहाँ

(iii) झाँका

(iv) अँदर

 

  1. निम्नलिखित गद्यांश में उचित विराम-चिह्न लगाइए-

चोर भरे गले से बोला बेटा जो व्यवहार तुम्हें आता है वह तो बड़े-बड़े ऋषि मुनियों को भी नहीं आता जब

तुम्हारे पापा जागेंगे तो मैं उनसे एक विनती करूँगा

श्लेष ने विस्मय से कहा क्या

चोर भरे गले से बोला, “बेटा! जो व्यवहार तुम्हें आता है, वह तो बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों को भी नहीं आता। जब तुम्हारे पापा जागेंगे, तो मैं उनसे एक विनती करूँगा।”

श्लेष ने विस्मय से कहा, “क्या?”

  1. जानें – संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

पाठ के आधार पर लिखिए कि निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित सर्वनाम किस संज्ञा शब्द के स्थान पर प्रयोग किए गए हैं-

(क) मैं उतरने के लिए स्टूल लेकर आता हूँ।

उत्तर – मैं – श्लेष के लिए

(ख) तुम दर्द से रोना या कराहना नहीं।

उत्तर – तुम – चोर के लिए

(ग) कई दिनों के बाद आज उन्हें नींद आई है।

उत्तर – उन्हें – पापा के लिए

(घ) वे बहुत पहले हमें छोड़कर चली गईं।

उत्तर – वे – मम्मी के लिए

(ङ) पापा के जागने पर वह पूछेगा कि ऐसा क्यों हुआ?

उत्तर – वह – चोर के लिए

  1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

(क) (i) रात – रातें

(ii) बात – बातें

(iii) आँख – आँखें

(iv) नज़र – नज़रें

(ख) (i) परछाईं – परछाइयाँ

(ii) आकृति – आकृतियाँ

(iii) चुनौती – चुनौतियाँ

(iv) पट्टी – पट्टियाँ

 

  1. पाठ में कुछ शब्दों का जोड़े के रूप में प्रयोग किया गया है- साफ़-साफ़, टप-टप, बड़े-बड़े।

अपने पढ़े हुए शब्दों के कुछ जोड़े लिखिए-

  • जैसे-तैसे, धीरे-धीरे, कभी-कभी, चलते-चलते।

रोचक क्रियाकलाप

  1. स्वयं को श्लेष मानकर इस घटना का वर्णन करते हुए अपनी दादी माँ/नानी माँ को पत्र लिखिए।

दिनांक – 20 फरवरी, 20XX

घर संख्या – W-414

टीसीआई, राउरकेला

ओड़िशा

 

आदरणीय दादी माँ,

(सादर चरण स्पर्श!)

दादी माँ, आप कैसी हैं? ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आप कुशल हों। दादी, कल रात हमारे घर एक ऐसी घटना घटी जिसे सुनकर आप दंग रह जाएँगी। रात को जब मैं पापा के पास बैठा था, तो एक चोर दीवार फाँदकर अंदर आने लगा। काँच की वजह से उसके पैर ज़ख्मी हो गए थे। मैंने उसे डराने या चिल्लाने के बजाय स्टूल दिया ताकि वह गिरे नहीं।

मैंने उसकी मरहम-पट्टी की और उसे खाना भी दिया। वह बहुत हैरान था कि मैं उसे पकड़वा क्यों नहीं रहा। मैंने उसे बताया कि पापा बीमार हैं और उनकी नींद नहीं टूटनी चाहिए। दादी माँ, पापा की सीख काम आई कि मुसीबत में सबकी मदद करनी चाहिए। अंत में उस चोर का मन इतना बदल गया कि उसने चोरी छोड़ दी और हमारे यहाँ वफादार नौकर बनकर रहने का फैसला किया। अब वह बहुत अच्छा इंसान बन गया है।

आप जल्दी मिलने आइएगा। पापा अब ठीक हैं।

आपका पोता,

श्लेष

  1. यदि श्लेष के मुहल्लेवाले जाग जाते तो वे चोर के साथ जिस तरह का व्यवहार करते उसे अनुच्छेद के

रूप में लिखिए।

उत्तर – यदि श्लेष के मोहल्लेवाले जाग जाते, तो दृश्य बहुत डरावना होता। लोग हाथ में लाठी-डंडे लेकर बाहर निकल आते और “चोर-चोर” का शोर मचाते। उस शोर-शराबे से श्लेष के बीमार पिता की नींद टूट जाती और उनकी तबीयत और बिगड़ सकती थी। मोहल्लेवाले शायद चोर की बात सुने बिना ही उसे पीटना शुरू कर देते और उसे पुलिस के हवाले कर देते। श्लेष ने जो दया और सहानुभूति दिखाकर चोर का हृदय परिवर्तन किया, वह अवसर पूरी तरह समाप्त हो जाता। अक्सर गुस्सा और हिंसा किसी को सुधारने के बजाय और अधिक विद्रोही बना देते हैं।

 

गृहकार्य

पाठ में आए मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

पाठ में आए प्रमुख मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग निम्नलिखित है –

ठगा-सा रह जाना (आश्चर्यचकित रह जाना) –

वाक्य – श्लेष की दयालुता देखकर चोर ठगा-सा रह गया।

दिमाग से पैदल होना (मूर्ख होना) –

वाक्य – शुरुआत में चोर को लगा कि श्लेष दिमाग से पैदल है जो एक अपराधी की मदद कर रहा है।

हृदय हिल जाना (बहुत अधिक द्रवित होना) –

वाक्य – श्लेष की माँ के बारे में सुनकर चोर का हृदय हिल गया।

पसीज जाना (दया आ जाना) –

वाक्य – चोर को दर्द में देखकर बालक श्लेष का मन पसीज गया।

फटी-फटी आँखों से देखना (हैरानी से देखना) –

वाक्य – जब चोर ने नौकर बनने की बात कही, तो श्लेष उसे फटी-फटी आँखों से देखने लगा।

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