पाठ का सारांश
पाठ ‘कुसंग का ज्वर’ कुसंगति अर्थात् बुरी संगत के विनाशकारी प्रभावों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाने वाला एक शिक्षाप्रद पाठ है।
- कुसंगति की परिभाषा –
लेखक के अनुसार कुसंगति एक भयंकर बुखार की तरह है, जो न केवल शरीर को बल्कि मनुष्य की बुद्धि और विवेक को भी नष्ट कर देती है।
- समुद्र और रावण का उदाहरण –
अपार शक्ति और मर्यादा वाला समुद्र भी कुसंगति के प्रभाव से नहीं बच पाया। समुद्र की मर्यादा तब भंग हुई और उसकी छाती पर सेतु अर्थात् पुल बनाया गया, जब उसके पड़ोस में रावण जैसा दुष्ट राक्षस रहने लगा। लेखक के अनुसार, रावण के पड़ोस में होने के कारण ही समुद्र की महिमा घटी।
- कैकेयी और मंथरा –
अयोध्या का सुखी और प्रेमपूर्ण परिवार मंथरा की कुसंगति के कारण बिखर गया। दासी मंथरा ने रानी कैकेयी के कान भरकर उनके विवेक को नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप राम को वनवास हुआ और राजा दशरथ की मृत्यु हुई। एक बुरी सोच वाली दासी ने हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।
- हंस और कौआ –
एक उज्ज्वल और स्वच्छ मन वाला हंस एक दुष्ट कौए की बातों में आकर उसके साथ उड़ चला। कौए ने चोरी-छिपे दही खाने की योजना बनाई। जब ग्वाले ने आहट पाई, तो चंचल कौआ उड़ गया, लेकिन भोला-भाला हंस पकड़ा गया और मारा गया। यह सिद्ध करता है कि दुष्ट की थोड़ी देर की संगति भी मृत्यु का कारण बन सकती है।
- केला और बेर –
केले के पौधे ने अपने पास उगे बेर के पौधे को अनदेखा कर दिया। जब बेर का पेड़ बड़ा हुआ और हवा में झूमने लगा, तो उसके काँटों ने केले के कोमल पत्तों को चीर-चीर कर दिया। यहाँ बेर ‘दुष्ट’ का प्रतीक है जो अपनी प्रकृति के कारण पास रहने वाले ‘सज्जन’ को हानि पहुँचाता है।
मुख्य संदेश (Conclusion) –
कुसंगति मनुष्य के सौभाग्य और सम्मान को मिट्टी में मिला देती है।
दुष्ट व्यक्ति के पास रहने मात्र से भी सज्जन व्यक्ति को कष्ट भोगना पड़ता है।
बुद्धिमान व्यक्ति को हमेशा सज्जनों की संगति करनी चाहिए, क्योंकि बुरी संगत अंततः विनाश की ओर ले जाती है।
कठिन शब्दार्थ
1 ज्वर – बुखार Fever
2 कुसंगति – बुरी संगत Evil company
3 क्षीण – कमज़ोर / नष्ट Feeble / Wasted
4 दुर्भाग्य – बुरा भाग्य Misfortune
5 मर्यादा – सीमा / अनुशासन Boundary / Dignity
6 विवेक – भले-बुरे का ज्ञान Wisdom / Conscience
7 उत्पात – उपद्रव / दंगा Disturbance / Riot
8 नारकीय – नर्क के समान Hellish
9 व्याधि – रोग / बीमारी Disease / Ailment
10 उपाधि – यहाँ अर्थ – उपद्रव Trouble / Disturbance
11 नसाई – नष्ट होना Destroyed
12 क्षत-विक्षत – घायल / लहूलुहान Mutilated / Wounded
13 रौंदते – कुचलते हुए Trampling
14 तुच्छ – नीच / छोटा Mean / Petty
15 सोस – शोक / दुख Regret / Sorrow
16 दृष्टांत – उदाहरण Example / Illustration
17 धर्मात्मा – पुण्य आत्मा Righteous person
18 महिमा – गौरव / बड़प्पन Glory / Greatness
19 स्वच्छ – साफ़ Clean / Pure
20 उज्ज्वल – चमकता हुआ Bright / Radiant
21 दुष्ट – बुरा व्यक्ति Wicked / Evil
22 मृदुभाषी – मीठा बोलने वाला Soft-spoken
23 कटुभाषी – कड़वा बोलने वाला Harsh-spoken
24 उद्धार – कल्याण Salvation / Upliftment
25 चंचल – अस्थिर / नटखट Fickle / Restless
26 सुयोग्य – बहुत योग्य Highly capable
27 सज्जन – अच्छा आदमी Gentleman
28 साधु – सज्जन / संत Saintly person
29 असाधु – दुष्ट व्यक्ति Wicked person
30 औरस – सगा (पुत्र) Legitimate (son)
31 शिलाखंड – पत्थर का टुकड़ा Slab of stone
32 वक्षस्थल – छाती Chest / Bosom
33 योजन – दूरी की माप A measure of distance
34 सेतु – पुल Bridge
35 राज्याभिषेक – गद्दी पर बैठना Coronation
36 वज्रपात – बिजली गिरना / बड़ी विपत्ति Thunderbolt / Calamity
37 आकस्मिक – अचानक Sudden / Unexpected
38 जननी – माता Mother
39 साम्राज्य – राज्य Empire
40 उद्यान – बगीचा Garden
41 विस्तार – फैलाव Expansion
42 थाह – गहराई Depth
43 धारण – अपनाना To wear / Adopt
44 सदृश – समान Similar / Like
45 अभाव – कमी Lack / Scarcity
46 सहसा – एकाएक Suddenly
47 दुतकारते – फटकारना To rebuff / Scold
48 मस्ती – आनंद Joy / Revelry
49 संघर्ष – टकराव Conflict / Struggle
50 ढकेल – धक्का देना To push
51 झूमता – लहराना Swaying
52 आहट – पदचाप / आवाज़ Sound of footsteps
53 घसीट – खींचना Drag
54 नचाकर – हिलाना Twisting / Wagging
55 मना करना – इनकार To refuse
56 स्वीकार – मान लेना Accept
57 भोगते – सहना To suffer
58 नापना – मापना To measure
59 बाँध – रोकना / पुल बनाना To bind / Bridge
60 बिखर – फैल जाना Scattered
61 भारी-भरकम – बहुत वज़नी Massive / Heavy
62 निवास – रहने की जगह Residence
63 कुबड़ी – जिसकी पीठ झुकी हो Hunchback
64 दासी – नौकरानी Maidservant
65 मैदान – खुला क्षेत्र Plain
66 सम्मान – आदर Respect
67 स्वभाव – आदत Nature / Habit
68 काले कलूटे – बहुत काले Jet black
69 भेद – अंतर Difference
70 चोरी – स्तेय Theft
71 ग्वाला – दूध बेचने वाला Milkman
72 पात्र – बरतन Vessel / Pot
73 ग्रीवा – गर्दन Neck
74 बोझ – वज़न Burden / Weight
75 पहन – समय का भाग Watch (3 hours)
76 शाखाएँ – टहनियाँ Branches
77 चीर-चीर – फट जाना Torn to pieces
78 हिस्से – भाग Shares
79 लेन-देन – व्यापार Transaction
80 पड़ोस – आस-पास Neighbourhood
81 भयंकर – डरावना Fierce / Terrible
82 मदद – सहायता Help
83 सत्य – सच Truth
84 सफलता – कामयाबी Success
85 अनुभव – तजुर्बा Experience
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
विस्तार, वक्षस्थल, क्षत-विक्षत, हृदय, सौभाग्यशाली, सदृश, राज्याभिषेक, आकस्मिक, उत्पात, उद्यान, राक्षसी, उज्ज्वल, मृदुभाषी, कटुभाषी, उद्धार, ग्वाले, दधि-पात्र, ज्वर, नारकीय, संघर्ष साम्राज्य, वज्रपात, ग्रीवा, प्रयोजन अनिवार्य, संघर्ष, मर्यादा, स्वर्ग, पर्वत
विस्तार – Vis-taar ‘स्त’ को ‘St’ की तरह जल्दी बोलें।
वक्षस्थल – Vak-sha-sthal ‘क्ष’ (Ksha) और ‘स्थ’ (Stha) का स्पष्ट उच्चारण करें।
क्षत-विक्षत – Khat-vi-khat इसे ‘Khat-Vi-Khat’ की तरह बोलें।
हृदय – Hrid-ya ‘हृ’ को ‘Hri’ की तरह उच्चारित करें।
मृदुभाषी – Mri-du-bhaa-shee ‘मृ’ को ‘Mri’ की तरह बोलें।
सौभाग्यशाली – Sau-bhaag-ya-shaa-lee
उज्ज्वल – Uj-jval
राज्याभिषेक – Raaj-ya-bhi-shayk
उद्धार – Ud-dhaar
आकस्मिक – Aa-kas-mik
वज्रपात – Vaj-ra-paat
साम्राज्य – Saam-raaj-ya
दधि-पात्र – Da-dhi Paat-ra
स्वर्ग – Svarg
पर्वत – Par-vat
सदृश – Sa-drish
ग्रीवा – Gree-vaa
उत्पात – Ut-paat
नारकीय – Naar-ki-ya
उद्यान – Ud-yaan
संघर्ष – San-gharsh
राक्षसी – Raak-sha-see
मर्यादा – Mar-yaa-daa
कटुभाषी – Ka-tu-bhaa-shee
प्रयोजन – Pra-yo-jan
ग्वाले – Gvaa-lay
अनिवार्य – A-ni-vaar-ya
ज्वर – Jvar
एकाएक – E-kaa-ayk
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) समुद्र को क्यों बाँधा गया?
उत्तर – श्री राम की सेना को लंका पहुँचने का मार्ग देने के लिए समुद्र पर सेतु बनाकर उसे बाँधा गया।
(ख) अयोध्या पर क्या वज्रपात हुआ?
उत्तर – श्री राम को 14 वर्ष का वनवास और राजा दशरथ की आकस्मिक मृत्यु अयोध्या पर हुए मुख्य वज्रपात थे।
(ग) समुद्र की महिमा मिट्टी में क्यों मिल गई?
उत्तर – समुद्र की महिमा मिट्टी में मिल गई क्योंकि उसके पड़ोस में रावण जैसे राक्षसों का निवास था। राक्षसों की कुसंगति के कारण उसे मर्यादा भंग करनी पड़ी और सेतु से बँधना पड़ा।
(घ) कौआ, हंस के साथ क्यों रहना चाहता था?
उत्तर – कौआ देखना चाहता था कि हंस की समाज में इतनी पूजा क्यों होती है और वह उसके साथ रहकर अपना उद्धार करना चाहता था।
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) कौए ने हंस के किस विशेष गुण के विषय में बताया है?
(i) उसका रंग उज्ज्वल होता है।
(ii) वह दूध और पानी को अलग कर देता है। ✓
(iii) लोग उसकी पूजा करते हैं।
(iv) वह भोला-भाला होता है।
(ख) जीवन नारकीय बन जाता है-
(i) बेर के पौधे के पास रहने से
(ii) केले और बेर के पौधे के एक साथ होने से
(iii) दुष्टों के पड़ोस में बसने से ✓
(iv) दूसरों के साथ भाई-बाँट करने से
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) पाठ में कुसंग को दुर्भाग्य क्यों कहा गया है?
उत्तर – कुसंग को दुर्भाग्य कहा गया है क्योंकि यह शरीर, मन और बुद्धि को क्षीण कर देता है। बड़े-बड़े वीर और धर्मात्मा भी कुसंगति में फँसकर अपना विनाश कर लेते हैं।
(ख) लेखक ने राजा दशरथ को सौभाग्यशाली क्यों कहा है?
उत्तर – लेखक ने राजा दशरथ को सौभाग्यशाली कहा है क्योंकि उनके यहाँ स्वयं भगवान ने मानव शरीर धारण करके जन्म लिया था। उनका परिवार प्रेम और सुखों से भरा था।
(ग) कौए के कहने पर भी ग्वाले की दही को हंस क्यों नहीं खाना चाहता था?
उत्तर – कौए के कहने पर भी ग्वाले की दही को हंस नहीं खाना चाहता था क्योंकि हंस का मन साफ़ था और वह जानता था कि बिना पूछे किसी की दही खाना चोरी का काम है। वह एक गरीब ग्वाले को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता था।
(घ) पास में बेर का पेड़ उग आने पर केले के पौधे को क्या कष्ट हुआ?
उत्तर – पास में बेर का पेड़ उग आने पर केले के पौधे को यह कष्ट हुआ कि जब हवा चलती थी, तो बेर का पेड़ मस्ती में झूमता था और उसके काँटों से टकराकर केले के कोमल पत्ते चीर-चीर (फट) जाते थे।
- पाठ के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों के आगे ✓ अथवा x लगाइए-
(क) राक्षसों की कुसंगति समुद्र की महिमा को ले बैठी। [✓]
(ख) राजा दशरथ का घर स्वर्ग जैसा नहीं था। [x]
(ग) मंथरा की कुसंगति ने कैकेयी का सारा विवेक धो दिया। [✓]
(घ) दुष्टों की थोड़ी देर की संगति भी बड़े दुख का कारण बन जाती है। [✓]
(ङ) हंस का मन चोरी से दही खाने का कर रहा था। [x]
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
अच्छे लोगों की संगति में रहने से क्या लाभ होता है?
उत्तर – अच्छे लोगों की संगति से हमारी बुद्धि सात्विक बनती है, हमारे दुखों और बीमारियों का नाश होता है और हम जीवन में उन्नति के सही मार्ग पर चलते हैं।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) नीचे दिए गए शब्दों के जोड़ों में से कौन-सा जोड़ा प्रयोग नहीं किया जाता?
(i) काला-गोरा
(ii) खाना-पीना
(iii) लेन-देन
(iv) उल्टा – नीचा ✓
(ख) ‘हंसराज’ शब्द कैसे बना है?
(i) हंसों में राजा
(ii) हंसों का राजा ✓
(iii) हंसों के लिए राजा
(iv) हंसों से राजा
- निम्नलिखित विशेषण पाठ में से किन संज्ञा शब्दों (विशेष्यों) के लिए प्रयोग किए गए हैं-
(क) भारी-भरकम – वृक्ष/शिलाखंड
(ख) सुयोग्य – पुत्र
(ग) भोला-भाला – हंस
(घ) सौभाग्यशाली – राजा दशरथ
(ङ) हरा-भरा – उद्यान
(च) छोटा-सा — बेर का पौधा
- निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध करके लिखिए-
(क) हिरदै – हृदय
(ख) समुंदर – समुद्र
(ग) राच्छस – राक्षस
(घ) मिरित्यू – मृत्यु
(ङ) प्रतियेक – प्रत्येक
(च) लछमन – लक्ष्मण
- नीचे भूतकाल में दिए गए वाक्यों को वर्तमान काल में बदलकर लिखिए-
(क) एक हंस उड़कर चला आ रहा था।
उत्तर – एक हंस उड़कर चला आ रहा है।
(ख) सड़क पर दही बेचने वाला जा रहा था।
उत्तर – सड़क पर दही बेचने वाला जा रहा है।
(ग) केले के पौधे के साथ बेर का पेड़ उगा था।
उत्तर – केले के पौधे के साथ बेर का पेड़ उगा है।
(घ) उनका घर स्वर्ग जैसा बना था।
उत्तर – उनका घर स्वर्ग जैसा बना है।
(ङ) बेर के पौधे पर खूब सारे काँटे थे।
उत्तर – बेर के पौधे पर खूब सारे काँटे हैं।
- निम्नलिखित उपसर्गों को जोड़कर नए शब्द बनाइए-
(क) दुर् – दुर्भाग्य, दुर् + गंध = दुर्गंध, दुर् + बल = दुर्बल
दुर् + जन = दुर्जन, दुर् + दशा = दुर्दशा
(ख) कु – संगति, कु + रूप = कुरूप, कु + मार्ग = कुमार्ग
कु + मति = कुमति, कु + चक्र = कुचक्र
(ग) सु – सुयोग्य, सु + कन्या – सुकन्या, सु + पुत्र – सुपुत्र
सु + मति = सुमति, सु + शासन = सुशासन
रोचक क्रियाकलाप
- कुसंगति से होने वाली हानियाँ बताते हुए अपने छोटे भाई/बहन को पत्र लिखिए।
दिनांक – 20 फरवरी, 20XX
घर संख्या – W-414
टीसीआई, राउरकेला
ओड़िशा
प्रिय अनुज,
(ढेर सारा प्यार और शुभाशीष!)
आशा है कि तुम स्वस्थ होगे। आज मैंने कक्षा में ‘कुसंग का ज्वर’ नामक पाठ पढ़ा, जिससे मुझे एक बहुत बड़ी सीख मिली जो मैं तुम्हारे साथ साझा करना चाहता हूँ।
बुरी संगति एक भयानक बीमारी की तरह है। यह न केवल हमारे समय को बर्बाद करती है, बल्कि हमारी बुद्धि और अच्छे संस्कारों को भी नष्ट कर देती है। जिस प्रकार एक सड़ी हुई मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है, वैसे ही एक गलत दोस्त हमारे पूरे चरित्र को बिगाड़ सकता है। कुसंगति में फँसकर इंसान सही और गलत का भेद भूल जाता है और अंत में उसे केवल दुख और पछतावा ही मिलता है।
इसलिए मेरी सलाह है कि हमेशा ऐसे मित्र बनाओ जो तुम्हें अच्छी बातें सिखाएँ और प्रगति के मार्ग पर ले जाएँ।
तुम्हारा अग्रज,
अविनाश
- पता करके लिखिए-
(क) राजा दशरथ कहाँ के राजा थे?
उत्तर – राजा दशरथ अयोध्या के राजा थे
(ख) उनकी तीनों रानियों के क्या-क्या नाम थे?
उत्तर – कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी उनकी तीनों रानियों के नाम थे।
(ग) प्रत्येक रानी के पुत्र/पुत्रों का क्या नाम था?
उत्तर – कौशल्या – राम
सुमित्रा – लक्ष्मण और शत्रुघ्न
कैकेयी – भरत
गृहकार्य
- अपनी नानी माँ/दादी माँ से राम के वन जाने की कहानी सुनिए।
उत्तर – छात्र इसे सुविधानुसार पूरा करने की कोशिश करें।
- पाठ में बताए गए बेर के पौधे जैसे लोगों के साथ आप कैसा व्यवहार करेंगे? अपना विचार एक अनुच्छेद में लिखिए।
उत्तर – पाठ में बताया गया बेर का पौधा उन लोगों का प्रतीक है जो अपनी बुरी आदतों या स्वभाव के कारण दूसरों को कष्ट पहुँचाते हैं। मैं ऐसे लोगों के प्रति सचेत और सावधान रहूँगा। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति से लड़ना ज़रूरी नहीं है, लेकिन अपनी मर्यादा और चरित्र की रक्षा के लिए दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों से ‘उचित दूरी’ बनाए रखना अनिवार्य है। मैं उनके साथ अभद्र व्यवहार तो नहीं करूँगा, लेकिन उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन में इतना करीब भी नहीं आने दूँगा कि उनके ‘काँटे’ अर्थात् कड़वी बातें या गलत आदतें मेरे व्यक्तित्व को नुकसान पहुँचाएँ। जैसे चंदन का पेड़ साँपों के बीच रहकर भी अपनी शीतलता नहीं खोता, मैं भी अपने संस्कारों को इतना मजबूत रखूँगा कि उन पर किसी की बुराई का असर न हो।

