कविता का सारांश
सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित कविता ‘ओस’ प्रकृति के सुंदर और मोहक रूप का वर्णन करती है।
प्रथम पद (First Stanza)
हरी घास पर बिखेर दी हैं,
किसने मोती की लड़ियाँ?
कौन रात में गूँथ गया है,
ये उज्ज्व‘ हीरों की कड़ियाँ?
व्याख्या – कवि सुबह-सवेरे घास पर पड़ी ओस की बूँदों को देखकर आश्चर्यचकित हैं। वे पूछते हैं कि हरी घास पर ये मोती की मालाएँ किसने बिखेर दी हैं? ओस की बूँदें सूरज की हल्की रोशनी में ऐसी चमक रही हैं जैसे किसी ने रात के अँधेरे में हीरों की कड़ियाँ पिरो दी हों। कवि ओस की तुलना मोती और हीरों से कर रहे हैं।
द्वितीय पद (Second Stanza)
जुगनू से जगमग जगमग ये,
कौन चमकते हैं यों चमचम?
नभ के नन्हें तारों से ये
कौन दमकते हैं यों दमदम?
व्याख्या – इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि ये ओस की बूँदें रात में चमकने वाले जुगनुओं की तरह जगमगा रही हैं। इन्हें देखकर ऐसा भ्रम होता है जैसे आकाश के नन्हे तारे ज़मीन पर उतर आए हों और अपनी चमक बिखेर रहे हों।
तृतीय पद (Third Stanza)
लुटा गया है कौन जौहरी
अपने घर का भरा खज़ाना?
पत्तों पर, फूलों पर पग-पग
बिखरे हुए रतन हैं नाना।
व्याख्या – कवि को ऐसा लगता है कि कोई जौहरी रात में यहाँ से गुज़रा है और उसने खुशी में अपने घर का सारा खज़ाना यहाँ लुटा दिया है। उपवन में हर कदम पर, पत्तों और फूलों पर विभिन्न प्रकार के रत्न अर्थात् ओस की बूँदें बिखरे हुए दिखाई दे रहे हैं।
चतुर्थ पद (Fourth Stanza)
बड़े सवेरे मना रहा है
कौन खुशी में यह दीवाली?
वन उपवन में जला रखी है
किसने दीपावली निराली”?
व्याख्या – सुबह के समय जब सूरज की किरणें ओस पर पड़ती हैं, तो वे दीपकों की तरह चमकने लगती हैं। कवि पूछते हैं कि इस सुबह की वेला में कौन खुशी से दीवाली मना रहा है? ऐसा लगता है कि पूरे जंगल और बगीचे में किसी ने ओस के रूप में अनगिनत दीप जलाकर एक अनोखी दीपावली मनायी है।
पंचम पद (Fifth Stanza)
जी होता इन ओस कणों
को अंजलि में भर घर ले आऊँ।
इनकी शोभा निरख-निरख कर
इन पर कविता एक बनाऊँ।
व्याख्या – अंतिम पंक्तियों में कवि अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं। वे इन ओस की बूँदों की सुंदरता से इतने प्रभावित हैं कि उनका मन करता है कि वे इन कणों को अपनी अंजलि में भरकर घर ले जाएँ। वे इनकी सुंदरता को जी भरकर देखना चाहते हैं और इस अद्भुत दृश्य पर एक सुंदर कविता लिखना चाहते हैं।
कठिन शब्दार्थ
1 ओस – तुषार / शबनम Dew
2 लड़ियाँ – माला के धागे में पिरोए हुए मोती Strings / Chains
3 गूँथना – पिरोना या बुनना To weave / To string
4 उज्ज्वल – चमकता हुआ / साफ़ Bright / Radiant
5 कड़ियाँ – ज़ंजीर के छल्ले Links
6 दमकना – चमकना To glow / To shine
7 नभ – आकाश Sky
8 जौहरी – रत्नों का पारखी / व्यापारी Jeweler
9 खज़ाना – कोष / धन-दौलत Treasure
10 पग-पग – हर कदम पर At every step
11 रतन (रत्न) – कीमती पत्थर Gems / Jewels
12 नाना – अनेक प्रकार के / तरह-तरह के Various / Different kinds
13 उपवन – छोटा बगीचा Garden / Orchard
14 निराली – अनोखी / सबसे अलग Unique / Wonderful
15 अंजलि – हथेलियों को मिलाकर बनाया गया गड्ढा Cupped hands
16 शोभा – सुंदरता Beauty / Splendor
17 निरखना – ध्यान से देखना To observe / To gaze
18 कण – छोटा टुकड़ा / बूँद Particle / Drop
मोती की लड़ियाँ – ओस की बूँदों को माला की तरह बताया गया है।
नभ के तारे – घास पर चमकती ओस को ज़मीन पर उतरे तारे कहा गया है।
जौहरी का खज़ाना – प्रकृति को एक जौहरी माना गया है जिसने ओस रूपी रत्न बिखेर दिए हैं।
मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –
गूँथ, उज्ज्वल, नन्हें, खज़ाना, अंजलि, कणों, निरख
गूँथ – गूँ-थ (Goonth)
उज्ज्वल – उज-ज्वल (Uj-jwal)
नन्हें – नन-हे (Nan-he)
खज़ाना – ख-ज़ा-ना (Kha-zaa-naa)
अंजलि – अन-ज-लि (An-ja-li)
कणों – क-णों (Ka-non)
निरख – नि-रख (Ni-rakh)
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-
(क) कवि को हीरे की कड़ियाँ कहाँ दिखाई दे रही हैं?
उत्तर – कवि को हरी घास पर ओस की बूँदों के रूप में हीरे की कड़ियाँ दिखाई दे रही हैं।
(ख) क्या देखकर कवि ने खज़ाना लुटाए जाने की कल्पना की है?
उत्तर – पत्तों और फूलों पर हर कदम पर बिखरी हुई ओस की अनगिनत चमकदार बूँदों को देखकर कवि ने खज़ाना लुटाए जाने की कल्पना की है।
(ग) कवि ने ओस की किन विशेषताओं को बताया है?
उत्तर – कवि ने बताया है कि ओस मोती और हीरे जैसी उज्ज्वल होती है, जुगनू और तारों की तरह जगमगाती है और रत्नों के समान बहुमूल्य दिखाई देती है।
लिखित
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) कवि को हरी घास पर किसकी लड़ियाँ दिखाई दे रही हैं?
(i) हीरे की
(ii) मोती की ✓
(iii) चाँदी की
(iv) सोने की
(ख) कवि को उपवन में दीपावली-सी लग रही है क्योंकि-
(i) चारों ओर जुगनू चमक रहे हैं।
(ii) जौहरी ने अपना खज़ाना लुटा दिया है।
(iii) फूल और पत्तों पर रत्न बिखरे हुए हैं।
(iv) ओस की बूँदें सूरज की किरणों में चमक रही हैं। ✓
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) कवि जुगनू और नन्हें तारों के रूप में किसे देखता है और वे उसे कैसे दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर – कवि ओस की बूँदों को जुगनू और नन्हें तारों के रूप में देखता है। वे उसे रात के अँधेरे में चमचम चमकते हुए और दमदम दमकते हुए दिखाई दे रहे हैं।
(ख) कवि ने रत्न किसे कहा है और वे कहाँ बिखरे हुए हैं?
उत्तर – कवि ने ओस की बूँदों को ‘रत्न’ कहा है। वे बगीचे में पत्तों और फूलों पर पग-पग पर बिखरे हुए हैं।
(ग) ओस के कणों को देखकर कवि के मन में क्या करने की इच्छा होती है?
उत्तर – ओस के कणों को देखकर कवि का मन करता है कि वह इन्हें अपनी अंजलि में भरकर घर ले आए और इनकी सुंदरता पर एक कविता लिखे।
जीवन मूल्यपरक प्रश्न
इस कविता के द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर – इस कविता के माध्यम से कवि प्रकृति की सुंदरता के प्रति प्रेम व्यक्त करना चाहता है। वह हमें सिखाता है कि प्रकृति के छोटे-छोटे रूपों (जैसे ओस) में भी अद्भुत सौंदर्य छिपा होता है, जिसे हमें निहारना और सहेजना चाहिए।
भाषा ज्ञान
- सही उत्तर पर ✓ लगाइए-
(क) सही वर्तनी वाला शब्द कौन सा है-
(i) उजवल
(ii) उज्वल
(iii) उज्ज्वल ✓
(iv) उज्ज्वल
(ख) ‘रात’ का विलोम रूप क्या होगा?
(i) सुबह
(ii) सवेरा
(iii) दिन ✓
(iv) उषा
- निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा और विशेषण अलग करके लिखिए-
हरी, हीरे, एक, घास, कविता, भरा, उज्ज्वल, खज़ाना
संज्ञा – घास, हीरे, खज़ाना, कविता।
विशेषण – हरी, उज्ज्वल, भरा, एक।
- अनुस्वार (ं) और अनुनासिक (ँ) से बने शब्द लिखिए-
अनुस्वार (ं) अंजलि, सुंदर, नंदन।
अनुनासिक (ँ) गूँथ, बूँदें, हूँ।
- निम्नलिखित प्रश्नवाचक शब्दों से कविता के आधार पर प्रश्न बनाइए-
(क) कौन – रात में मोतियों को कौन गूँथ गया है?
(ख) क्या – ओस की बूँदें पत्तों पर क्या बिखेर रही हैं?
(ग) किसने – हरी घास पर मोती की लड़ियाँ किसने बिखेरी हैं?
(घ) कैसे – ओस के कण कैसे चमक रहे हैं?
- निम्नलिखित शब्द के दो-दो पर्यायवाची लिखिए-
(क) रात – रात्रि, निशा
(ख) नभ – आकाश, गगन
(ग) फूल – पुष्प, सुमन
(घ) वन – जंगल, कानन
(ङ) घर – गृह, सदन
रोचक क्रियाकलाप
- किसी छुट्टी के दिन सुबह-सुबह उठकर अपने घर के पास पार्क में जाइए और वहाँ कुछ देर टहलिए। अपने अनुभव एक अनुच्छेद में लिखिए।
सुबह की सैर का अनुभव –
पिछले रविवार मैं सुबह जल्दी उठकर पास के पार्क में गया। वहाँ का दृश्य बहुत मनमोहक था। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी और चारों ओर हरियाली थी। हरी घास पर ओस की बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। पक्षियों के चहचहाने की आवाज़ मन को शांति दे रही थी। फूलों की खुशबू और ताजी हवा ने मुझे ऊर्जा से भर दिया। सचमुच, सुबह की प्रकृति हमें नया जीवन देती है।
गृहकार्य
अपनी स्क्रैप बुक में प्रातः काल का एक चित्र बनाइए। उसमें जहाँ-जहाँ ओस की बूँदें हो सकती हैं, दिखाइए।
छात्र इसे अपने स्तर पर करें।

