“हमको आपको भइया नहीं कहना चाहिए था!”, एक साँवली किंतु लावण्य से भरी महिला ने मुझसे आकर कहा।
मैं कुछ समझ पाता और अपनी प्रतिक्रिया दे पाता इससे पहले ही वह चली गई क्योंकि पीछे से उसके दो बच्चे उसे लगातार पुकार रहे थे।
हाँ, मुझे इतना तो याद आया कि अभी कुछ देर पहले ही रसमलाई के काउंटर पर उसने मुझसे थोड़ी जगह माँगी थी।
सच कहूँ तो पार्टियों में मुझे सिलेक्टेड खाद्य वस्तुएँ ही खाने की इच्छा रहती है और रसमलाई उनमें से एक थी। हालाँकि, उस वक्त तो भीड़ में मैं रसमलाई नहीं ले पाया था इसलिए थोड़ी देर बाद मेरी सबकुछ जब मेरे पास रसमलाई लेकर पहुँची तो इस घटना का ज़िक्र मैंने उससे किया।
पहले तो वो ज़रा मुसकराई और फिर सारा इतिहास कह डाला जिसकी मुझे टोह तक न थी।
बात कुछ ऐसी है कि जिसकी पार्टी में मैं अपने परिवार के साथ आज आया हुआ हूँ। इसी परिवार ने कई वर्ष पहले बिहार की रहने वाली उस तरुणी के साथ मेरा विवाह प्रस्ताव प्रेषित किया था। परंतु किसी अज्ञात कारणों से उसके पिता और मेरे न बन सकने वाले ससुर ने मुझे अपने घर के दामाद बनने के सौभाग्य से वंचित कर दिया था।
सत्य यह भी है कि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो आपके अंतर्निहित गुणों को सीमित समय में पहचान लेते हैं। वरना अधिकतर लोग तो बाहरी दिखावे, साजो-सामान और घर-मकान देखकर ही आपके व्यक्तित्व का अनुमान लगा लेते हैं। मुझे अपनी बेटी के अनुकूल न जानकर ही उसके पिता ने अपनी बेटी की शादी कहीं और तय कर दी।
इस घटना से मैं वाकिफ तो था ही पर यह वही तरुणी दो बच्चों की माता के रूप में मेरे सम्मुख आई थी, यह नहीं जनता था। आज जिसकी पार्टी में हम गए हुए थे उसमें से किसी ने जिसकी मेरी सबकुछ के साथ अच्छी पटती है उसे सारी बातें बता दी थी। इसका एक संयोगमिश्रित कारण यह भी था कि दोनों के नाम ‘पूजा’ ही हैं और दोनों दो-दो पुत्र रत्नों की माताएँ हैं।
पार्टी चल रही थी मगर ग्यारह बज चुके थे और हम निकल रहे थे। निकलते-निकलते संयोग से हमारी नज़र एक दूसरे पर पड़ी। एक औपचारिक मुसकान के साथ एक दूसरे को अलविदा कह दिया।
विशेष – Rejection are also important part of the life. It teaches us that there is room for improvement in your life.
अविनाश रंजन गुप्ता

