Hindi Sahitya

संप्रेषण की अवधारणा (Concept)

Sampreshan Ki Avadharana The Best Explanation

संप्रेषण की अवधारणा (Concept)

इच्छित बिंदु पर क्लिक करें। 

संप्रेषण (Communication) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके बिना मानव समाज की कल्पना करना असंभव है। सरल शब्दों में, दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों, भावनाओं या संदेशों का आदान-प्रदान ही संप्रेषण है।

व्युत्पत्ति – संप्रेषण को अंग्रेजी में ‘Communication’ कहते हैं, जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘Communis’ से हुई है। इसका अर्थ है— साझा करना (To share) ।

परिभाषा – जब एक व्यक्ति अपने विचारों या सूचनाओं को दूसरे व्यक्ति तक इस प्रकार पहुँचाता है कि दूसरा व्यक्ति उसे उसी अर्थ में समझ सके, तो उसे संप्रेषण कहते हैं।

द्विपक्षीय प्रक्रिया (Two-way Process) – संप्रेषण में कम से कम दो पक्ष होने चाहिए—एक संदेश भेजने वाला (Sender) और दूसरा संदेश प्राप्त करने वाला (Receiver)।

परस्पर समझ – केवल संदेश भेजना संप्रेषण नहीं है; प्राप्तकर्ता का उसे समझना और उस पर अपनी प्रतिक्रिया (Feedback) देना अनिवार्य है।

सतत प्रक्रिया – संप्रेषण जीवन भर चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है।

व्यापकता – यह जीवन के हर क्षेत्र (व्यक्तिगत, सामाजिक, व्यावसायिक) में आवश्यक है।

संप्रेषण की प्रक्रिया के मुख्य सात घटक (Elements) होते हैं –

  1. प्रेषक (Sender) – वह व्यक्ति जो संदेश भेजना चाहता है।
  2. संदेश (Message) – वह विचार, सूचना या निर्देश जिसे भेजा जाना है।
  3. कूटलेखन (Encoding) – विचारों को शब्दों, संकेतों या चित्रों में बदलना।
  4. माध्यम (Channel) – वह रास्ता जिसके जरिए संदेश जाता है (जैसे—फोन, ईमेल, आमने-सामने बात)।
  5. कूटवाचन (Decoding) – प्राप्तकर्ता द्वारा संदेश को समझने की प्रक्रिया।
  6. प्राप्तकर्ता (Receiver) – वह व्यक्ति जिसे संदेश भेजा गया है।
  7. प्रतिपुष्टि (Feedback) – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया, जिससे पता चलता है कि संप्रेषण सफल हुआ या नहीं।

 

मुख्य रूप से संप्रेषण दो प्रकार का होता है –

शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication) – इसमें शब्दों का प्रयोग होता है। यह मौखिक (बातचीत) या लिखित (पत्र, ईमेल) हो सकता है।

अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication) – इसमें शब्दों का प्रयोग नहीं होता। यह शारीरिक भाषा (Body Language), चेहरे के हाव-भाव, संकेतों और आँखों के इशारों के माध्यम से होता है।

 

विचारों के आदान-प्रदान में सहायक – समाज और परिवार में जुड़ाव पैदा करता है।

निर्णय लेने में सहायक – सही सूचना मिलने पर ही सही फैसला लिया जा सकता है।

प्रबंधन और समन्वय – किसी भी संस्था या कंपनी को चलाने के लिए प्रभावी संप्रेषण रीढ़ की हड्डी का काम करता है।

मानवीय संबंधों में सुधार – गलतफहमियों को दूर करने और संबंधों को मजबूत बनाने का एकमात्र जरिया है।

 

About the author

हिंदीभाषा

Leave a Comment

You cannot copy content of this page