लेखक परिचय – सियारामशरण गुप्त
सियारामशरण गुप्त का जन्म झाँसी के निकट चिरगाँव में सन् 1895 में हुआ। आप राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के अग्रज थे। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने घर पर ही गुजराती, अंग्रेजी और हिंदी, भाषा सीखी।
गुप्त जी विश्वप्रेम, विश्वशांति, सत्य और अहिंसा-से आजीवन प्रभावित रहे। इनके साहित्य में दरिद्रता, कुरीतियों के विरुद्ध आक्रोश जैसे भावों की बहुलता है।
गुप्त जी को दीर्घकालीन साहित्य सेवाओं के लिए सन् 1962 में ‘सरस्वती हीरक जयंती’ के अवसर पर सम्मानित किया गया। इन्हें ‘नागरी प्रचारिणी’ सभा वाराणसी द्वारा ‘सुधाकर पदक से भी विभूषित किया गया। 9 मार्च 1963 को इनका निधन हो गया।
‘अनाथ’, ‘आर्द्रा’, ‘दूर्वादल’ – इनके काव्य खंड: ‘मानुषी’ – कहानी संग्रह: ‘पुण्य पर्व’ नाटक; ‘अनुरूपा तथा अमृत पुत्र’ कविता संग्रह: ‘नारी और गोद’ – उपन्यास तथा ‘झूठ-सच’ निबंध संग्रह उल्लेखनीय हैं।
गुप्त जी की भाषा सरल, सहज तथा व्यावहारिक है।
पाठ का सारांश
सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित कहानी ‘काकी’ बाल-मनोविज्ञान पर आधारित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। यह एक मासूम बच्चे के अपनी मृत माँ के प्रति प्रेम और उसके वियोग को दर्शाती है।
श्यामू की माँ उमा की मृत्यु हो जाती है, जिसे घर के लोग ‘काकी’ कहते हैं। छोटा श्यामू मृत्यु का अर्थ नहीं समझता। जब लोग काकी को श्मशान ले जाने लगते हैं, तो वह उपद्रव मचाता है कि काकी सो रही हैं। घर के बड़े उसे बहलाते हैं कि काकी मामा के घर गई हैं, लेकिन जल्द ही उसे पता चल जाता है कि काकी ऊपर ‘राम जी’ के पास गई हैं।
श्यामू अपनी माँ को वापस लाने का एक मासूम रास्ता खोजता है। उसे लगता है कि यदि वह आसमान में पतंग उड़ाए, तो काकी उस पतंग की डोर पकड़कर नीचे उतर आएँगी। पैसे न होने के कारण वह अपने पिता विश्वेश्वर की जेब से पैसे चुराता है और अपने साथी भोला की मदद से पतंग और रस्सियाँ मँगाता है। वह पतंग पर ‘काकी’ लिखवाता है ताकि पतंग सही पते पर पहुँचे। कहानी के अंत में, जब उसके पिता उसे चोरी के लिए पीटते हैं और पतंग फाड़ देते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि यह सब श्यामू ने अपनी माँ को वापस लाने के लिए किया था। यह जानकर वे हतबुद्धि अर्थात् स्तब्ध रह जाते हैं।
पाठ का उद्देश्य और छात्रों के लिए सीख
उद्देश्य – कहानी का मुख्य उद्देश्य बच्चों की कोमल भावनाओं और उनके सोचने के अनूठे तरीके को दिखाना है। यह बड़ों को यह संदेश देती है कि बच्चों के साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए, क्योंकि उनका संसार कल्पनाओं और निस्वार्थ प्रेम से भरा होता है।
सीख – बच्चों के मन में उठने वाले सवालों को दबाना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सही ढंग से समझाना चाहिए।
चोरी करना गलत है, लेकिन कभी-कभी उसके पीछे का कारण बहुत मासूम होता है।
प्रेम और वियोग की भावनाएँ केवल बड़ों में ही नहीं, बच्चों में भी उतनी ही गहरी होती हैं।
पात्र परिचय
श्यामू – कहानी का मुख्य पात्र। वह एक अबोध (Innocent) बालक है जो अपनी माँ से बहुत प्यार करता है और उनके बिछोह में व्याकुल रहता है।
विश्वेश्वर – श्यामू के पिता। अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद वे अन्यमनस्क और उदास रहते हैं। वे कठोर स्वभाव के हैं लेकिन अंत में भावुक हो जाते हैं।
भोला – सुखिया दासी का बेटा और श्यामू का दोस्त। वह थोड़ा अधिक समझदार है और श्यामू की योजना में मदद करता है।
काकी (उमा) – श्यामू की माँ, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। वह पूरी कहानी की संवेदना का केंद्र है।
पाठ के स्मरणीय बिंदु
श्यामू का अपनी माँ के शव से लिपट जाना और उन्हें ले जाने से रोकना।
“सत्य के आवरण में असत्य बहुत समय तक छिपा न रह सका” – श्यामू को सच्चाई का पता चलना।
श्यामू की तुलना ‘वर्षा के बाद की पृथ्वी’ से करना, जहाँ ऊपर से पानी सूख जाता है पर भीतर नमी बनी रहती है।
पतंग को ‘सीढ़ी’ मानकर माँ को स्वर्ग से उतारने की बाल-कल्पना।
विश्वेश्वर का हृदय-परिवर्तन जब वे फटी पतंग पर ‘काकी’ लिखा देखते हैं।
पाठ के स्मरणीय बिंदु
श्यामू का अपनी माँ के शव से लिपट जाना और उन्हें ले जाने से रोकना।
“सत्य के आवरण में असत्य बहुत समय तक छिपा न रह सका” – श्यामू को सच्चाई का पता चलना।
श्यामू की तुलना ‘वर्षा के बाद की पृथ्वी’ से करना, जहाँ ऊपर से पानी सूख जाता है पर भीतर नमी बनी रहती है।
पतंग को ‘सीढ़ी’ मानकर माँ को स्वर्ग से उतारने की बाल-कल्पना।
विश्वेश्वर का हृदय-परिवर्तन जब वे फटी पतंग पर ‘काकी’ लिखा देखते हैं।
कठिन शब्दों के सरल अर्थ
1 – कुहराम – शोर-शराबा/मातम – Lamentation/Uproar
2 – भूमि-शयन – जमीन पर लेटना – Sleeping on floor
3 – करुण – दयाजनक/दुखद – Pathetic/Mournful
4 – विलाप – रोना-धोना – Wailing/Lamenting
5 – उपद्रव – दंगा/हंगामा – Disturbance/Riot
6 – दाह संस्कार – अंतिम संस्कार – Cremation
7 – आवरण – पर्दा/ढकाव – Cover/Veil
8 – अबोध – जिसे ज्ञान न हो – Innocent/Ignorant
9 – रुदन – रोना – Crying/Weeping
10 – क्रमशः – धीरे-धीरे – Gradually
11 – अनंतर – बाद में – After/Following
12 – अगोचर – जो दिखाई न दे – Invisible
13 – आर्द्रता – नमी – Moisture/Dampness
14 – अंतस्तल – हृदय की गहराई – Inner heart
15 – शून्य मन – खाली दिमाग – Blank mind
16 – अन्यमनस्क – कहीं और खोया हुआ – Absent-minded
17 – उत्कंठित – उत्सुक/बेचैन – Eager/Anxious
18 – खूँटी – टाँगने का स्थान – Peg/Hook
19 – टटोलना – खोजना/ढूँढना – To grope/Feel around
20 – आविष्कार – यहाँ अर्थ – खोज लेना – Discovery/Finding
21 – समवयस्क – समान आयु का – Same age/Peer
22 – गुपचुप – चुपचाप – Secretly
23 – हठ – जिद – Persistence/Stubbornness
24 – कठिनता – मुश्किल – Difficulty
25 – दया-माया – ममता/करुणा – Compassion/Mercy
26 – तरकीब – उपाय/योजना – Trick/Method
27 – ओछी – छोटी/कम – Short/Insufficient
28 – प्रफुल्ल – प्रसन्न/खुश – Cheerful/Joyful
29 – अकस्मात् – अचानक – Suddenly
30 – विघ्न – बाधा/रुकावट – Obstacle/Interruption
31 – उग्र – गुस्से वाला – Aggressive/Fierce
32 – सकपकाना – घबरा जाना – To be startled
33 – मुखबिर – भेद खोलने वाला – Informer
34 – हतबुद्धि – स्तब्ध/हैरान – Dumbfounded
35 – श्मशान – मुर्दाघाट – Crematorium
36 – बुद्धिमान – समझदार – Intelligent
37 – गुरुजन – बड़े बुजुर्ग – Elders
38 – असत्य – झूठ – Falsehood
39 – सत्य – सच – Truth
40 – छिपी – गुप्त – Hidden
41 – हृदय – दिल – Heart
42 – खिला उठना – बहुत खुश होना – To be delighted
43 – चवन्नी – 25 पैसे का सिक्का – 25 paise coin
44 – डोर – धागा – Thread/String
45 – कोठरी – छोटा कमरा – Small room
46 – तमाचा – थप्पड़ – Slap
47 – कान मलना – सजा देना – To twist ears
48 – चिट – कागज का टुकड़ा – Note/Slip
49 – जेल – कारागार – Prison
50 – सम्भाले रखना – नियंत्रण में रखना – To keep in check
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-
(i) ‘वर्षा के अनंतर एक दो दिन में ही पृथ्वी के ऊपर का पानी तो अगोचर हो जाता है, परंतु भीतर ही भीतर उसकी आर्द्रता जैसे बहुत दिन तक बनी रहती है, वैसे ही उसके अंतस्तल में वह शोक जाकर बस गया था।‘
(क) ‘उसके‘ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसकी मनोदशा पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- ‘उसके’ शब्द का प्रयोग बालक श्यामू के लिए किया गया है। अपनी माँ की मृत्यु के बाद श्यामू अत्यंत उदास और अकेला रहने लगा था। यद्यपि उसका रोना समय के साथ कम हो गया था, लेकिन माँ के बिछोह का गहरा दुख उसके हृदय में समा गया था।
(ख) ‘असत्य के आवरण में सत्य बहुत दिन तक छिपा न रह सका‘- श्यामू को किस सत्य का, कैसे पता चला? इससे उस पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर- श्यामू को इस सत्य का पता चला कि काकी कहीं नहीं, बल्कि ऊपर राम के यहाँ चली गई हैं अर्थात् उनकी मृत्यु हो गई है। उसे यह जानकारी आसपास के अबोध बालकों के मुँह से पता चली। इस सत्य को जानकर वह और अधिक दुखी हो गया और अक्सर अकेला बैठकर आकाश की ओर ताकता रहता था।
(ग) ‘काकी‘ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर- इस कहानी का मुख्य उद्देश्य बाल-मनोविज्ञान का चित्रण करना है। यह दिखाना कि बच्चों का प्रेम कितना निश्छल और गहरा होता है, साथ ही यह संदेश देना कि बड़ों को बच्चों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें बिना सोचे-समझे दंड नहीं देना चाहिए।
(घ) ‘काकी‘ शीर्षक कहानी से बालकों के किस स्वभाव का पता चलता है?
उत्तर- इस कहानी से बालकों के कोमल, कल्पनाशील और निस्वार्थ स्वभाव का पता चलता है। बालक मृत्यु जैसे कठोर सत्य को नहीं समझते और अपनी मासूम कल्पनाओं जैसे इस पाठ में पतंग की सीढ़ी के सहारे अपनों को वापस पाने की कोशिश करते हैं।
(ii) ‘एक दिन उसने ऊपर एक पतंग उड़ती देखी। न जाने क्या सोचकर उसका हृदय एकदम खिल उठा।‘
(क) ‘उसने‘ – से किसकी ओर संकेत किया गया है? वह उदास क्यों रहा करता था?
उत्तर- ‘उसने’ से श्यामू की ओर संकेत किया गया है। वह अपनी माँ की मृत्यु और उनके वियोग के कारण हमेशा उदास रहा करता था।
(ख) उड़ती हुई पतंग को देखकर उसका हृदय क्या सोचकर खिल उठा?
उत्तर- उड़ती हुई पतंग को देखकर श्यामू का हृदय यह सोचकर खिल उठा कि वह पतंग को ऊपर राम के यहाँ भेजेगा और उसकी डोर पकड़कर उसकी काकी नीचे उतर आएँगी।
(ग) पतंग मँगवाने के लिए उसने किनसे प्रार्थना की? उसकी बात सुनकर उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर- श्यामू ने अपने पिता विश्वेश्वर से पतंग मँगाने की प्रार्थना की। उसकी बात सुनकर पत्नी की मृत्यु से दुखी विश्वेश्वर ने उदास भाव से “अच्छा, मँगा दूँगा” कह दिया, पर वास्तव में उन्होंने ध्यान नहीं दिया और चले गए।
(घ) पतंग प्राप्त करने के लिए उसने किस उपाय का सहारा लिया और पतंग मँगवाने के लिए किसकी सहायता ली? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर- उसने चोरी के उपाय का सहारा लिया और पिता के कोट की जेब से पैसे निकाले। उसने पतंग मँगाने के लिए सुखिया दासी के लड़के भोला की सहायता ली। इसका परिणाम यह हुआ कि अंत में उसके पिता ने उसे चोरी के लिए पीटा, पर असलियत जानकर वे ग्लानि से भर गए।
(iii) ‘देखो, खूब अकेले में जाना, कोई जान न पाए।‘
(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? दोनों का परिचय दीजिए।
उत्तर- वक्ता श्यामू है और श्रोता भोला है। श्यामू विश्वेश्वर का बेटा है और भोला सुखिया दासी का बेटा है। दोनों हमउम्र साथी हैं।
(ख) वक्ता ने श्रोता को अकेले में जाने के लिए क्यों कहा? उसे किस बात का भय था?
उत्तर- श्यामू ने अकेले में जाने के लिए इसलिए कहा क्योंकि वह अपनी योजना को गुप्त रखना चाहता था। उसे भय था कि यदि घर के बड़ों को पता चला तो वे उसे रोक देंगे या डाँटेंगे।
(ग) वक्ता ने उससे क्या मँगवाया? उस वस्तु को लाने के लिए उसने उसे कितने पैसे दिए? वे पैसे उसने कहाँ से प्राप्त किए थे और क्यों?
उत्तर- वक्ता श्यामू ने भोला से एक पतंग और डोर मँगवाई। इसके लिए उसने उसे एक चवन्नी दी। यह चवन्नी उसने अपने पिता के कोट की जेब से चुपचाप निकाल ली थी ताकि वह अपनी माँ को वापस लाने की योजना पूरी कर सके।
(घ) वक्ता उस वस्तु का प्रयोग किस लिए करना चाहता था? वह उसका प्रयोग क्यों नहीं कर पाया?
उत्तर- वक्ता श्यामू पतंग का प्रयोग अपनी मृत माँ को स्वर्ग से नीचे उतारने के लिए करना चाहता था। वह इसका प्रयोग इसलिए नहीं कर पाया क्योंकि ऐन वक्त पर उसके पिता वहाँ आ पहुँचे और उन्होंने गुस्से में पतंग फाड़ डाली।
(iv) अकस्मात् शुभ कार्य में विघ्न की तरह उग्र रूप धारण किए हुए विश्वेश्वर वहाँ आ पहुँचे।
(क) ‘शुभ कार्य‘ और ‘विघ्न‘ शब्दों का प्रयोग किस-किस संदर्भ में किया गया है?
उत्तर- यहाँ ‘शुभ कार्य’ पतंग में रस्सी बाँधकर काकी को नीचे उतारने की मासूम योजना के लिए कहा गया है। ‘विघ्न’ शब्द का प्रयोग पिता विश्वेश्वर के अचानक वहाँ आ पहुँचने और गुस्से में काम रोकने के संदर्भ में किया गया है।
(ख) विश्वेश्वर कौन हैं? उनकी उग्रता का क्या कारण था?
उत्तर- विश्वेश्वर श्यामू के पिता हैं। उनकी उग्रता का कारण उनके कोट से एक रुपया चोरी होना था, जिसे लेकर उन्हें संदेह था कि बच्चों ने ही निकाला है।
(ग) वहाँ कौन-कौन थे और वे क्या कर रहे थे?
उत्तर- वहाँ श्यामू और भोला थे। वे एक अँधेरी कोठरी में बैठकर बड़ी सावधानी और उत्साह के साथ पतंग में रस्सियाँ बाँध रहे थे।
(घ) विश्वेश्वर ने धमकाकर किससे क्या पूछा और उन्हें असलियत का पता कैसे चला? उन्होंने अपराधी को क्या दंड दिया?
उत्तर- विश्वेश्वर ने धमकाकर पूछा कि “तुमने हमारे कोट से रुपया निकाला है?” उन्हें असलियत का पता भोला के बताने से चला। दंड के रूप में उन्होंने श्यामू को दो तमाचे जड़े और उसकी पतंग फाड़ दी।
(v) ‘भोला सकपकाकर एक ही डाँट में मुखबिर हो गया।‘
(क) भोला कौन था? वह क्यों सकपका गया? ‘मुखबिर‘ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर- भोला सुखिया दासी का पुत्र और श्यामू का मित्र था। विश्वेश्वर का उग्र रूप और डाँट देखकर वह सकपका गया। ‘मुखबिर’ का अर्थ है—भेद खोलने वाला या सूचना देने वाला।
(ख) डाँटने वाले का परिचय दीजिए? उसके डाँटने का क्या कारण था?
उत्तर- डाँटने वाले व्यक्ति विश्वेश्वर अर्थात् श्यामू के पिता थे। उनके डाँटने का कारण यह था कि उन्हें पता चला था कि बच्चों ने उनके कोट से पैसे निकाले हैं।
(ग) भोला ने डाँटने वाले को क्या बताया? भोला की बात सुनकर डाँटने वाले ने किसे क्या दंड दिया
उत्तर- भोला ने बताया कि श्यामू भैया ने रस्सी और पतंग मँगाने के लिए पैसे निकाले थे ताकि वे काकी को राम के यहाँ से नीचे उतार सकें। यह सुनकर विश्वेश्वर ने श्यामू को थप्पड़ मारे, लेकिन असलियत जानकर वे खुद सुन्न रह गए।
(घ) भोला की बात सुनकर डाँटने वाले की क्या मनोदशा हुई?
उत्तर- भोला की बात सुनकर विश्वेश्वर हतबुद्धि होकर खड़े रह गए। जब उन्होंने फटी पतंग पर ‘काकी’ लिखा देखा, तो उनका गुस्सा गायब हो गया और वे पश्चात्ताप और करुणा से भर गए।

