ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Apna-Apna Bhagya, Jainendra Kumar, अपना-अपना भाग्य, जैनेंद्र कुमार

लेखक परिचय – जैनेंद्र कुमार

श्री जैनेंद्र कुमार का जन्म अलीगढ़ जिले में कोड़ियागंज नामक कस्बे में सन् 1905 में हुआ।

जैनेंद्र की रचनाओं पर गांधीवाद का बहुत प्रभाव पड़ा। ये अहिंसावादी और दार्शनिक थे। मुख्य रूप से तो ये कहानीकार थे, पर इन्होंने निबंध, उपन्यास और संस्मरण भी लिखे हैं।

‘सुनीता’, ‘सुखदा’, ‘मुक्तिबोध’ इनके प्रसिद्ध उपन्यास, ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’, ‘मंथन’ – प्रसिद्ध निबंध संग्रह तथा ‘फाँसी’, ‘जय संधि’, ‘वातायन’, ‘नीलम देश की राजकन्या’, ‘एक रात’, ‘दो चिड़ियाँ’, ‘पाजेब’ इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं।

इनकी कहानियों में कहानी कला को नया आयाम मिला है, जिसमें वर्णन और विवरण की अपेक्षा चिंतन और विश्लेषण की प्रधानता है।

पाठ का सारांश

जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित कहानी ‘अपना-अपना भाग्य’ सामाजिक असमानता, मानवीय निष्ठुरता और गरीबी के प्रति अमीरों की संवेदनहीनता पर एक गहरा कटाक्ष है। यह कहानी नैनीताल की पृष्ठभूमि में एक निर्दोष बालक के अंत का मार्मिक चित्रण करती है।

लेखक और उनके मित्र नैनीताल घूमने जाते हैं। एक ठंडी शाम उन्हें एक 10-12 वर्ष का पहाड़ी लड़का मिलता है जो अत्यंत दयनीय अवस्था में है। वह गरीबी के कारण अपने गाँव से भागकर काम की तलाश में आया है। उसके माता-पिता भूखे रहते थे, इसलिए वह यहाँ आया, लेकिन यहाँ उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। उसके पास न रहने को जगह है, न पहनने को पर्याप्त कपड़े।

लेखक के मित्र उसे अपने एक वकील दोस्त के पास नौकर रखने के लिए ले जाते हैं, लेकिन वकील साहब उसे ‘पहाड़ी और चोर’ समझकर दुत्कार देते हैं। लेखक और उसके मित्र भी उस समय उसकी कोई वास्तविक मदद नहीं करते और अपने गर्म बिस्तरों में सोने चले जाते हैं। अगली सुबह खबर मिलती है कि वह बालक सड़क के किनारे पेड़ के नीचे ठंड से ठिठुरकर मर गया। समाज की निष्ठुरता के बीच प्रकृति ने बर्फ की चादर बिछाकर उसके शव के लिए कफ़न का प्रबंध कर दिया था।

 

पाठ का उद्देश्य और छात्रों के लिए सीख

उद्देश्य – कहानी का मुख्य उद्देश्य समाज के समृद्ध वर्ग की संवेदनहीनता को उजागर करना है। यह दिखाना है कि कैसे लोग केवल बातों में सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन जब वास्तव में मदद की बात आती है, तो अपने स्वार्थ के पीछे छिप जाते हैं।

सीख – गरीबी किसी का स्वभाव या चरित्र तय नहीं करती।

समाज में जरूरतमंदों के प्रति केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सक्रिय सहायता की आवश्यकता है।

‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’—सिर्फ दर्शन झाड़ने से किसी का पेट नहीं भरता।

हमें अपने पूर्वाग्रहों जैसे ‘पहाड़ी शैतान होते हैं’ आदि को छोड़कर इंसानियत देखनी चाहिए।

 

पात्र परिचय

पहाड़ी बालक – कहानी का नायक। वह अत्यंत गरीब, स्वाभिमानी और सरल हृदय है। वह परिस्थितियों का मारा है और अंत में समाज की उपेक्षा के कारण मृत्यु को प्राप्त होता है।

लेखक (कथावाचक) – एक बौद्धिक व्यक्ति जो गरीबी को ‘स्वार्थ की फिलॉसफी’ (Philosophy) से देखता है। वह सहानुभूति रखता है पर कर्म करने में पीछे रहता है।

मित्र – लेखक का दोस्त जो भावुक है, बालक की मदद करना चाहता है, लेकिन वह भी लाचारी और निष्ठुरता के चक्र में फँसा रह जाता है।

वकील साहब – समृद्ध और संवेदनहीन वर्ग के प्रतीक। वे गरीबों पर अविश्वास करते हैं और मानवता से ऊपर अपने ऐश-ओ-आराम को रखते हैं।

पाठ के स्मरणीय बिंदु

नैनीताल की प्राकृतिक सुंदरता और बालक की कुरूप गरीबी का विरोधाभास।

बालक की मजबूरी – “माँ भूखी रहती थी, रोती थी, सो भाग आया।”

अमीरों का अविश्वास – “पहाड़ी बड़े शैतान होते हैं।”

स्वार्थ की फिलॉसफी – “पहले बिस्तर में गरम हो लो, फिर चिन्ता करना।”

प्रकृति का न्याय – जब इंसानों ने कफ़न नहीं दिया, तो बर्फ ने उसे ढक लिया।

विडंबना – बालक की मौत का कारण केवल ठंड नहीं, बल्कि समाज की उदासीनता थी।

 

कठिन शब्दों के सरल अर्थ

1 – निरुद्देश्य – बिना किसी उद्देश्य के – Aimlessly

2 – अरुण – लाल रंग (सूर्योदय जैसा) – Reddish / Crimson

3 – झुंझलाहट – चिढ़ / झल्लाहट – Irritation / Annoyance

4 – चारा – उपाय / रास्ता – Option / Resource

5 – सनक – धुन / पागलपन – Obsession / Whim

6 – कुढ़ना – मन-ही-मन जलना – To fret / To feel resentful

7 – कुहरा – धुंध – Fog / Mist

8 – चुँगी – कर / नाका – Octroi / Tax post

9 – प्रकाश-वृत्त – उजाले का घेरा – Circle of light

10 – झुर्रियाँ – त्वचा की सिलवटें – Wrinkles

11 – एकाकी – अकेला – Lonely / Solitary

12 – वर्तमान – आज का समय – Present

13 – मूक – चुप / मौन – Mute / Silent

14 – जूठा – बचा हुआ भोजन – Leftovers

15 – अचरज – हैरानी – Wonder / Surprise

16 – दुशाला – कीमती ओढ़नी – Shawl

17 – लापरवाही – बेपरवाही – Carelessness

18 – अवगुण – बुराई / दोष – Vice / Flaw

19 – चम्पत होना – भाग जाना – To vanish / To run away

20 – खाक – मिट्टी / कुछ नहीं – Dust / Nothing

21 – मसहरी – मच्छरदानी वाला पलंग – Bed with mosquito net

22 – असमंजस – दुविधा – Dilemma / Confusion

23 – प्रेत गति – भूत जैसी चाल – Ghostly pace

24 – तीखी हवा – तेज और ठंडी हवा – Piercing wind

25 – निठुराई – निष्ठुरता / कठोरता – Cruelty / Harshness

26 – बेहयाई – बेशर्मी – Impudence / Shamelessness

27 – निश्चित – तय – Fixed / Certain

28 – आस – उम्मीद – Hope

29 – ठिठुरना – काँपना (ठंड से) – To shiver / To freeze

30 – चिथड़े – फटे-पुराने कपड़े – Rags

31 – उपहार – भेंट – Gift

32 – शव – लाश – Corpse / Dead body

33 – कफ़न – मुर्दे को ढकने का कपड़ा – Shroud

34 – प्रबंध – व्यवस्था – Arrangement

35 – संध्या – शाम – Evening

36 – भाप – वाष्प – Steam / Vapor

37 – बेरोक – बिना रुकावट के – Unhindered

38 – मैली – गंदी – Dirty / Filthy

39 – कोस – दूरी की माप – A measure of distance

40 – झटपट – जल्दी – Quickly

41 – भयानक – डरावना – Dreadful / Terrifying

42 – शीत – ठंड – Cold

43 – फिलासफी – दर्शन – Philosophy

44 – निस्तब्ध – अचल / शांत – Still / Motionless

45 – विरक्ति – उदासीनता – Detachment

46 – दुर्बलता – कमजोरी – Weakness

47 – करुण – दयाजनक – Pitiful / Mournful

48 – कृतज्ञता – आभार – Gratitude

49 – याचना – माँगना – Entreaty / Pleading

50 – सर्वस्व – सब कुछ – One’s all / Everything

संक्षिप्त प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-

(i) ‘नैनीताल की संध्या धीरे-धीरे उतर रही थी।

(क) नैनीताल की संध्या की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर – नैनीताल की संध्या बहुत ही सुंदर और काल्पनिक लग रही थी। रूई के रेशों और भाप जैसे बादल सिरों को छूते हुए बेरोक घूम रहे थे। वे बादल हल्के प्रकाश और अँधियारी के कारण कभी नीले, कभी सफेद और कभी हल्के लाल दिखाई दे रहे थे।

(ख) लेखक अपने मित्र के साथ कहाँ बैठा था? वह वहाँ बैठा-बैठा बोर क्यों हो रहा था और क्यों कुढ़ रहा था?

उत्तर – लेखक अपने मित्र के साथ सड़क के किनारे एक बेंच पर बैठा था। वह इसलिए बोर हो रहा था क्योंकि उसका मित्र वहाँ से उठने का नाम नहीं ले रहा था और उसे ज़बरदस्ती हाथ पकड़कर बैठा लिया गया था। वह अपनी आज़ादी छिन जाने के कारण मन ही मन कुढ़ रहा था।

(ग) लेखक के मित्र को अचानक क्या दिखाई पड़ा? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर – लेखक के मित्र को कुहरे की सफेदी में से आती हुई एक काली-सी मूर्ति अर्थात् एक बालक दिखाई दिया। वह कोई 10-12 वर्ष का पहाड़ी लड़का था। उसका रंग गोरा था पर मैल से काला पड़ गया था, उसकी आँखें सूनी थीं और माथे पर समय से पहले झुर्रियाँ आ गई थीं।

(घ) ज़रा-सी उम्र में उसकी मौत से पहचान कैसे हो गई थी?

उत्तर – बालक ने बताया कि वह अपने एक साथी के साथ यहाँ आया था, जो उससे उम्र में बड़ा था, परंतु अब वह नहीं रहा। जब लेखक ने पूछा कि वह कैसे मरा, तो बालक ने सहज भाव से कहा—”साहब ने मारा, मर गया।” इतनी छोटी उम्र में अपने साथी को खो देने के कारण उसकी मौत से पहचान हो गई थी।

(ii) बालक फिर आँखों से बोलकर मूक खड़ा रहा। आँखें मानो बोलती थीं- यह भी कैसा मूर्ख प्रश्न है।

(क) किस प्रश्न को सुनकर बालक मूक खड़ा रहा? उसकी आँखों ने क्या कह दिया?

उत्तर – जब लेखक के मित्र ने पूछा कि “क्या तू इन्हीं कपड़ों में सो जाएगा?” तब बालक मूक खड़ा रहा। उसकी आँखों ने मानो यह कह दिया कि जिसके पास पहनने को और कपड़े ही न हों, उससे ऐसा सवाल पूछना मूर्खता है।

(ख) अपने परिवार के बारे में बालक ने क्या बताया?

उत्तर – बालक ने बताया कि उसका घर पंद्रह कोस दूर गाँव में है। उसके कई भाई-बहन हैं। माँ-बाप भूखे रहते थे और माँ रोटी न होने के कारण रोती थी, इसीलिए वह काम की तलाश में घर से भाग आया।

(ग) लेखक को बालक की किस बात को सुनकर अचरज हुआ?

उत्तर – लेखक को बालक की इस बात पर अचरज हुआ कि वह मृत्यु जैसी गंभीर बात को कितनी सहजता और सरलता से कह रहा था। बालक का यह कहना कि उसका साथी ‘साहब के मारने’ से मर गया, लेखक को झकझोर गया।

(घ) लेखक और उसका मित्र बालक को कहाँ ले गए और क्यों? वकील साहब का पहाड़ी बालकों के संबंध में क्या मत था?

उत्तर – लेखक और उसके मित्र बालक को अपने वकील दोस्त के पास ले गए ताकि उसे वहाँ नौकरी मिल सके। वकील साहब का मत था कि ये पहाड़ी बालक बड़े शैतान और बेईमान होते हैं, और इनके भीतर कई अवगुण छिपे रहते हैं।

(iii) ‘भयानक शीत है। उसके पास कम बहुत कम कपड़े……..?‘ ‘यह संसार है यार,’ मैंने स्वार्थ की बना फ़िलासफ़ी सुनाई।

(क) लेखक के मित्र की उदासी का कारण स्पष्ट करते हुए बताइए कि वह पहाड़ी बालक की सहायता क्यों नहीं कर सका?

उत्तर – लेखक के मित्र की उदासी का कारण उस गरीब बालक की दयनीय स्थिति थी। वह उसकी सहायता इसलिए नहीं कर सका क्योंकि उसके वकील दोस्त ने उसे नौकरी पर रखने से मना कर दिया और मित्र के पास खुद भी बालक को देने के लिए कोई तुरंत समाधान या ठहरने की व्यवस्था नहीं थी।

(ख) यह संसार है यार‘- वाक्य आजकल के मनुष्यों की किस प्रवृत्ति का द्योतक है?

उत्तर – यह वाक्य आजकल के मनुष्यों की संवेदनहीनता और घोर स्वार्थपरता का द्योतक है। यह दर्शाता है कि लोग दूसरों के दुख को ‘संसार का नियम’ मानकर अनदेखा कर देते हैं और अपनी सुख-सुविधाओं में सिमट जाना पसंद करते हैं।

(ग) अपना-अपना भाग्यकहानी में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – कहानी में समाज की खोखली सहानुभूति पर व्यंग्य किया गया है। लेखक और उसका मित्र बालक के प्रति दया तो दिखाते हैं, लेकिन वास्तव में उसकी जान बचाने के लिए कुछ नहीं करते। अमीर वर्ग जैसे वकील साहब की निष्ठुरता पर भी कड़ा कटाक्ष है।

(घ) अपना-अपना भाग्यकहानी के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – शीर्षक ‘अपना-अपना भाग्य’ बहुत ही अर्थपूर्ण है। यह समाज की उस सोच पर करारी चोट करता है जहाँ लोग गरीब की बेबसी और मृत्यु को उसका ‘भाग्य’ मानकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वास्तव में बालक की मृत्यु उसका भाग्य नहीं, बल्कि समाज की निष्ठुरता का परिणाम थी।

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