मन्नू भंडारी – लेखिका परिचय
(सन् 1931-2021)
मन्नू भंडारी नई कहानी की एक प्रसिद्ध लेखिका हैं।
आपके उपन्यास और कहानियाँ मानवीय भावनाओं को स्पर्श करते हैं। आपका जन्म 3 अप्रैल 1931 में भानपुर मध्यप्रदेश में हुआ। आपकी विद्यालय स्तर की शिक्षा अजमेर में हुई जबकि स्नातक स्तर की परीक्षा आपने कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1949 में उत्तीर्ण की। आपका विवाह हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार श्री राजेन्द्र यादव से हुआ आपने अपने पति श्री राजेन्द्र यादव के साथ मिलकर एक ‘इंच मुस्कान’ की रचना की! आपकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ ने बहुत ख्याति प्राप्त की। इन उपन्यासों के नाट्य रूपांतर भारत रंग महोत्सव नई दिल्ली में प्रस्तुत किए गए। आपकी रचनाएँ इतनी लोकप्रिय थीं कि इनका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया।
मन्नू भंडारी की कहानियों ने हिंदी फिल्मों में अत्यंत प्रसिद्धि प्राप्त की। ‘यही सच है’ उपन्यास के आधार पर ‘रजनीगंधा’ फ़िल्म बनी जिसे फिल्म फेयर अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। बासु चैटर्जी द्वारा निर्देशित ‘स्वामी’ फ़िल्म के संवाद भी आपने लिखे। सन् 1986 में आपकी कहानी समय की धारा प्रकाशित हुई। आपकी रचनाओं पर कई पुरस्कार मिले। विशेषत – ‘एक कहानी यह भी’ पर सन् 2008 में आपको व्यास सम्मान मिला। 15 नवंबर, 2021 को इनका देहावसान हो गया।
पाठ का सारांश
मन्नू भंडारी द्वारा रचित कहानी ‘दो कलाकार’ कला के दो भिन्न दृष्टिकोणों के बीच के द्वंद्व को दर्शाती है। एक ओर चित्रा की कला है जो कैनवास पर बेजान लकीरों के माध्यम से दुनिया की उलझनों को उकेरती है, और दूसरी ओर अरुणा की कला है जो असहायों की सेवा कर उनके जीवन में रंग भरती है।
चित्रा और अरुणा दो सहेलियाँ हैं जो एक ही हॉस्टल में रहती हैं। चित्रा एक चित्रकार है जो अपनी कला के प्रति समर्पित है और ख्याति पाना चाहती है। अरुणा एक समाज-सेविका है जो गरीब बच्चों को पढ़ाती है और बीमारों की सेवा करती है। चित्रा के लिए कला ही सब कुछ है, जबकि अरुणा के लिए मानवता की सेवा ही सच्ची कला है।
चित्रा विदेश जाकर बहुत प्रसिद्ध हो जाती है। विशेष रूप से एक मरी हुई भिखारिन और उसके दो रोते हुए अनाथ बच्चों के चित्र के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति और पुरस्कार मिलते हैं। तीन साल बाद जब वह भारत लौटती है और अपनी प्रदर्शनी में अरुणा से मिलती है, तो उसे पता चलता है कि जिस भिखारिन के बच्चों को उसने केवल कागज़ पर उतारा था, अरुणा ने उन्हें गोद लेकर उनका जीवन सँवारा है। अंत में चित्रा को अहसास होता है कि अरुणा ही ‘सच्ची कलाकार’ है।
पाठ का उद्देश्य और छात्रों के लिए सीख
उद्देश्य – यह कहानी कला की सार्थकता पर प्रश्न उठाती है। लेखक बताना चाहते हैं कि जो कला जीवन से कटकर केवल कागज़ और रंगों तक सीमित है, वह निर्जीव है। सच्ची कला वह है जो किसी के उजड़े हुए जीवन को फिर से बसा दे।
सीख – केवल नाम और शोहरत के पीछे भागने से बेहतर है कि हम अपने कर्मों से समाज का भला करें। मानवता की सेवा ही सर्वोच्च कला है।
पात्र परिचय
चित्रा – महत्त्वाकांक्षी चित्रकार, धनी पिता की इकलौती संतान, कला के प्रति जुनून रखने वाली, लेकिन मानवीय संवेदनाओं के प्रति थोड़ी उदासीन।
अरुणा – करुणामयी समाज-सेविका, कर्मठ, निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने वाली, व्यवहारिक और ममतामयी।
पाठ के स्मरणीय बिंदु
चित्रा का चित्र ‘उलझन’ आधुनिक जीवन की विसंगतियों का प्रतीक है।
अरुणा का ‘हाड़-तोड़ मेहनत’ करना और भिखारिन के बच्चों को अपनाना उसके महान चरित्र को दर्शाता है।
चित्रा की कला ‘बेजान’ है, जबकि अरुणा की कला ‘सजीव’ है।
कठिन शब्दों के सरल अर्थ
1 – झकझोरना – ज़ोर से हिलाना – To shake vigorously
2 – खिझलाहट – चिड़चिड़ापन – Irritation / Annoyance
3 – बदतमीज़ – अशिष्ट / अभद्र – Ill-mannered
4 – गलतफहमी – भ्रम / गलत समझना – Misunderstanding
5 – योनि – जन्म का प्रकार / प्रजाति – Species / Form of birth
6 – घनचक्कर – उलझन भरा – Muddled / Confusing
7 – प्रतीक – चिह्न – Symbol
8 – उलझन – फँसाव / दुविधा – Entanglement / Confusion
9 – पाठशाला – विद्यालय – School
10 – ढिंढोरा पीटना – बहुत प्रचार करना – To proclaim loudly
11 – छात्रावास – हॉस्टल – Hostel
12 – खुसर-पुसर – कानाफूसी – Whispering
13 – फाटक – मुख्य द्वार – Main Gate
14 – नवाबी – शान-शौकत – Royal style / Lordliness
15 – बर्दाश्त – सहन करना – To tolerate
16 – हाड़-तोड़ – बहुत कठिन (परिश्रम) – Back-breaking (work)
17 – सजना-सँवरना – श्रृंगार करना – To dress up
18 – भाषण – व्याख्यान – Speech
19 – स्नेह – प्यार – Affection / Love
20 – छलछला आना – आँखों में आँसू भरना – To be filled with tears
21 – उदासीन – विरक्त / बेपरवाह – Indifferent
22 – आदर्श – नमूना / मिसाल – Ideal
23 – लिफ़ाफ़ा – पत्र रखने का कवर – Envelope
24 – इकलौती – अकेली (संतान) – Only (child)
25 – शोहरत – प्रसिद्धि – Fame
26 – तमन्ना – इच्छा – Desire / Wish
27 – बेजान – जिसमें जान न हो – Lifeless
28 – कल्याण – भलाई – Welfare / Well-being
29 – निरक्षरता – अनपढ़ होना – Illiteracy
30 – हुनर – कला / कौशल – Skill / Talent
31 – ढाँचा – बनावट – Structure / Framework
32 – बाढ़-पीड़ित – बाढ़ से ग्रसित लोग – Flood victims
33 – स्वयंसेवक – अपनी इच्छा से सेवा करने वाला – Volunteer
34 – अनुमति – आज्ञा – Permission
35 – खस्ता – दयनीय (हालत) – Miserable / Dilapidated
36 – उल्लास – अत्यधिक खुशी – Jubilation / Joy
37 – लालसा – तीव्र इच्छा – Longing / Yearning
38 – विदाई – विदा करना – Farewell
39 – हड़बड़ाना – घबराहट में होना – To be in a flurry
40 – भिखारिन – भीख माँगने वाली – Beggar woman
41 – चर्चा – बातचीत – Discussion
42 – अनाथ – जिसका कोई सहारा न हो – Orphan
43 – बखान – प्रशंसा / वर्णन – Praise / Description
44 – प्रेरणा – उत्साह / बढ़ावा – Inspiration
45 – प्रदर्शनी – नुमाइश – Exhibition
46 – प्रतियोगिता – होड़ / मुकाबला – Competition
47 – शीर्षक – नाम (Heading) – Title
48 – बड़प्पन – महानता – Nobility / Greatness
49 – तुक – मेल / संगति – Logic / Rhyme
50 – आश्चर्य – हैरानी – Wonder / Surprise
51 – प्रसिद्धि – ख्याति – Renown / Fame
52 – मर्मस्पर्शी – दिल को छू लेने वाला – Heart-touching
53 – परियों – काल्पनिक दिव्य स्त्रियाँ – Fairies
54 – परिचय – जान-पहचान – Introduction
55 – हवाले करना – सौंपना – To hand over
56 – बेवकूफ़ – मूर्ख – Fool
57 – स्तब्ध – हैरान / जड़ – Stunned
58 – व्यंग्य – ताना / कटाक्ष – Sarcasm / Satire
59 – सृजन – निर्माण – Creation
60 – यथार्थ – सच – Reality
61 – संवेदना – हमदर्दी – Sensitivity / Sympathy
62 – औपचारिकता – रस्म – Formality
63 – दृश्य – नज़ारा – Scene / Sight
64 – घनिष्ठ – गहरा (संबंध) – Intimate / Close
65 – व्यस्त – काम में लगा हुआ – Busy
66 – उपलब्धि – प्राप्ति – Achievement
67 – अद्वितीय – जिसके समान कोई न हो – Unique
68 – मदद – सहायता – Help / Assistance
69 – परोपकार – दूसरों की भलाई – Altruism
70 – सार्थक – अर्थपूर्ण – Meaningful
71 – निरर्थक – बेकार – Futile / Meaningless
72 – अनायास – अचानक – Effortlessly / Suddenly
73 – दृष्टिकोण – नज़रिया – Perspective / Viewpoint
74 – संघर्ष – लड़ाई / मेहनत – Struggle
75 – विभोर – मग्न – Overwhelmed
76 – आजीविका – रोज़गार – Livelihood
77 – अतुलनीय – जिसकी तुलना न हो – Incomparable
78 – प्रतिभा – बुद्धि / कौशल – Talent
79 – कुरुपता – बुरा रूप – Ugliness
80 – सौंदर्य – खूबसूरती – Beauty
81 – मानवता – इंसानियत – Humanity
82 – विमुख – मुँह मोड़ने वाला – Averse
83 – सक्रिय – फुर्तीला – Active
84 – दृढ़ – मज़बूत – Firm / Determined
85 – विस्मृति – भूल जाना – Oblivion
86 – अहंकार – घमंड – Ego / Pride
87 – तृप्ति – संतुष्टि – Satisfaction
88 – दुविधा – कश्मकश – Dilemma
89 – प्राथमिकता – पहल – Priority
90 – निस्वार्थ – बिना स्वार्थ के – Selfless
91 – संकोच – झिझक – Hesitation
92 – प्रेयसी – प्रेमिका – Beloved
93 – साधना – तपस्या – Dedication / Practice
94 – प्रभावशाली – असरदार – Influential
95 – उपेक्षित – जिस पर ध्यान न दिया गया हो – Neglected
96 – करुणा – दया – Compassion
97 – अटूट – जो टूटे नहीं – Unbreakable
98 – सफलता – कामयाबी – Success
99 – ममता – माँ का प्यार – Maternal love
100 – कृतज्ञता – आभार – Gratitude
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-
संक्षिप्त प्रश्न
(i) अरे, यह क्या? इसमें तो सड़क, आदमी, ट्राम, बस, मोटर, मकान सब एक दूसरे पर चढ़ रहे हैं। मानो सबकी खिचड़ी पकाकर रख दी हो। क्या घनचक्कर बनाया है?
(क) ‘अरे, यह क्या?‘ – वाक्य का वक्ता और श्रोता कौन है? उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- वक्ता अरुणा है और श्रोता चित्रा है। संदर्भ यह है कि चित्रा ने एक आधुनिक चित्र बनाया है जिसमें सब कुछ उलझा हुआ है, और वह नींद से जगाकर अरुणा को उसे दिखाने ले जाती है।
(ख) चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता ने श्रोता को चित्रों के संबंध में क्या सुझाव दिया था?
उत्तर- चित्र को चारों ओर घुमाते हुए वक्ता अरुणा ने सुझाव दिया कि चित्रा को चित्र के नीचे उसका नाम लिख देना चाहिए ताकि लोगों को गलतफहमी न हो कि उसने क्या बनाया है वरना हाथी को लोग उल्लू समझ सकते हैं।
(ग) ‘खिचड़ी पकाकर‘ और ‘घनचक्कर‘ शब्दों का आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि इनका प्रयोग किस संदर्भ में किया गया है और क्यों?
उत्तर- ‘खिचड़ी पकाकर’ का अर्थ है सब कुछ मिला देना और ‘घनचक्कर’ का अर्थ है अत्यंत उलझा हुआ। चित्रा के चित्र में सड़क, बस, ट्राम और मकान सब एक-दूसरे पर चढ़े हुए थे, इसलिए अरुणा ने ये शब्द कहे।
(घ) श्रोता ने अपने चित्र को किसका प्रतीक बताया? वक्ता ने उसकी खिल्ली किस प्रकार उड़ाई?
उत्तर- चित्रा ने चित्र को ‘आज के जीवन की उलझन’ का प्रतीक बताया। अरुणा ने उसकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यह उसके ‘दिमाग की उलझन’ का प्रतीक है और वह बिना मतलब समय बर्बाद कर रही है।
(ii) पर सच कहती हूँ मुझे तो सारी कला इतनी निरर्थक लगती है, इतनी बेमतलब लगती है कि बता न सकती।
(क) वक्ता को किसकी कला निरर्थक लगती थी और क्यों?
उत्तर- वक्ता अरुणा को चित्रा की कला निरर्थक लगती थी क्योंकि वह केवल कागज़ पर बेजान लकीरें खींचती थी, जबकि बाहर दुनिया में लोग दुख और गरीबी से मर रहे थे।
(ख) वक्ता ने उसकी कला पर व्यंग्य करते हुए क्या कहा और उसे क्या सलाह दी?
उत्तर- वक्ता अरुणा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि कागज़ पर बेजान चित्र बनाने के बजाय ‘दो-चार की ज़िंदगी क्यों नहीं बना देती’ और उसे सलाह दी कि समाज का भला करने वाले काम करे।
(ग) वक्ता की बात पर श्रोता ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की और क्यों?
उत्तर- वक्ता अरुणा की बात पर श्रोता चित्रा ने हँसते हुए प्रतिक्रिया दी कि समाज सुधार का काम उसने अरुणा और मनोज के लिए छोड़ दिया है। उसे अपनी प्रसिद्धि की चिंता थी, समाज के ढाँचे की नहीं।
(घ) आपके अनुसार सच्ची कला की क्या पहचान है?
उत्तर- सच्ची कला वह है जो केवल सौंदर्य तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाए और पीड़ित मानवता को सहारा दे।
(iii) वह काम तो तेरे लिए छोड़ दिया। मैं चली जाऊँगी तो जल्दी से सारी दुनिया का कल्याण करने के लिए झंडा लेकर निकल पड़ना।
(क) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए।
उत्तर- वक्ता चित्रा है जो एक चित्रकार है और श्रोता अरुणा है जो एक समाज-सेविका है। दोनों गहरी सहेलियाँ हैं।
(ख) ‘वह काम‘ से वक्ता का संकेत किस ओर है? वक्ता और श्रोता में अपने-अपने कामों को लेकर किस प्रकार की नोंक-झोंक चलती रहती थी?
उत्तर- ‘वह काम’ का संकेत समाज सेवा और दूसरों का कल्याण करने की ओर है। दोनों के बीच अक्सर नोंक-झोंक होती थी। चित्रा अरुणा के काम को ‘बंदर पालना’ कहती थी और अरुणा चित्रा की कला को ‘समय की बर्बादी’।
(ग) वक्ता कहाँ जा रही थी और क्यों?
उत्तर- चित्रा विदेश अर्थात् यूरोप जा रही थी ताकि वह अपनी चित्रकला की उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके और प्रसिद्धि पा सके।
(घ) ‘वक्ता और श्रोता‘ के जीवन-उद्देश्यों में अंतर होते हुए भी उनमें घनिष्ठ मित्रता थी‘ – स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- दोनों के विचार अलग थे—चित्रा स्व-केंद्रित कलाकार थी और अरुणा परोपकारी। फिर भी उनकी मित्रता घनिष्ठ थी क्योंकि वे एक-दूसरे के स्वभाव का सम्मान करती थीं और अरुणा ने चित्रा के जाने तक उसकी हर संभव मदद की।
(iv) “कहा तो मेरे।” अरुणा से हँसते हुए कहा।
“अरे बता न, मुझे ही बेवकूफ़ बनाने चली है।”
(क) ‘कहा तो मेरे‘ वाक्य का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- संदर्भ दिल्ली में आयोजित चित्रा के चित्रों की प्रदर्शनी का है, जहाँ अरुणा दो बच्चों के साथ आती है।
(ख) ‘मुझे ही बेवकूफ़ बनाने चली है‘- वाक्य का संदर्भ स्पष्ट करते हुए बताइए कि वक्ता को श्रोता की किस बात पर विश्वास नहीं हुआ और क्यों?
उत्तर- वक्ता चित्रा को विश्वास नहीं हुआ कि वे बच्चे अरुणा के अपने हैं। उसे लगा कि अरुणा मज़ाक कर रही है क्योंकि वह अरुणा के विवाह और परिवार के बारे में कुछ नहीं जानती थी।
(ग) अरुणा की कौन-सी बात सुनकर चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं?
उत्तर- जब अरुणा ने चित्रा को यह बताया कि ये वे ही बच्चे हैं जो ‘मरी हुई भिखारिन’ के पास रो रहे थे, जिनका चित्र बनाकर चित्रा प्रसिद्ध हुई थी, तब चित्रा की आँखें फैली की फैली रह गईं।
(घ) चित्रा को किस चित्र से प्रसिद्धि मिली थी? चित्र का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर- चित्रा को ‘अनाथ’ शीर्षक वाले चित्र से प्रसिद्धि मिली थी। चित्र में एक मरी हुई भिखारिन और उसके शरीर से लिपटकर रोते हुए दो बच्चों का मर्मस्पर्शी दृश्य था।

