ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter – Sukhi Dali, Upendranath ‘Ashk’, The Best Solutions,   सूखी डाली, उपेंद्रनाथ ‘अश्क’

उपेन्द्रनाथ अश्क – लेखक परिचय

(सन् 1910-1996)

हिंदी साहित्य को आधुनिक भावबोध से जोड़ने वाले रचनाकारों में उपेन्द्रनाथ अश्क का विशिष्ट स्थान है। इनका जन्म 14 दिसंबर, 1910 ई. को जालंधर में हुआ। ये एक सफल कहानीकार व उपन्यासकार ही नहीं, एक प्रतिभाशाली एकांकीकार भी हैं। यूँ तो इनके एकांकियों की विषयवस्तु जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से ली गई है परंतु ‘पारिवारिक जीवन’ इनका मुख्य क्षेत्र है। अभिनेयता के प्रति अश्क जी काफी सजग रहे हैं, इसी उद्देश्य से उन्होंने लंबे ‘रंग-निर्देश भी दिए हैं, इसीलिए इनके प्रायः सभी एकांकी सफलतापूर्वक मंच पर खेले जा सकते हैं। इन एकांकियों के संवाद भी सादगी, स्पष्टता व चुस्ती लिए हुए होते हैं। पात्रों का चरित्र चित्रण करते समय भी अश्क जी उनके भीतरी तनाव को अभिव्यक्ति देने का सफल प्रयास करते हैं। इनका देहावसान 19 जनवरी, 1996 को प्रयागराज में हो गया।

रचनाएँ एकांकी संग्रह – ‘देवताओं की छाया में’, ‘चरवाहे ‘पक्का गाना’, ‘पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ’, ‘अन्धी गली’, ‘साहब को जुकाम है’, ‘पच्चीस श्रेष्ठ एकांकी’ आदि।

नाटक – ‘छठा बेटा’, ‘कैद’, ‘उड़ान’ ‘जय-पराजय’, ‘अंजो दीदी’, ‘अलग-अलग रास्ते’, ‘पैंतरे’, ‘अंधी गली’ आदि।

उपन्यास – ‘सितारों के खेल’, ‘गिरती दीवारें’, ‘गर्म राख’, बड़ी-बड़ी आँखें’, ‘पत्थर- अलपत्थर’, ‘शहर में घूमता आइना’, ‘एक नन्हीं कन्दील’।

कहानी-संग्रह – ‘पिंजरा’, ‘जुदाई की शाम का गीत’, ‘दो धारा’, ‘छींटे’, ‘काले साहब’, ‘कहानी लेखिका और जेहलम के सात पुल’, ‘सत्तर श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘पलँग’ आदि।

एकांकी का कथानक

उपेन्द्रनाथ अश्क द्वारा रचित एकांकी ‘सूखी डाली’ संयुक्त परिवार की महत्ता और उसे बनाए रखने की चुनौतियों पर आधारित एक मार्मिक कहानी है।

  1. परिवार की संरचना और दादा जी का व्यक्तित्व

एकांकी की शुरुआत ‘दादा मूलराज’ के परिवार से होती है। दादा जी जिनकी उम्र 72 वर्ष है, परिवार के मुखिया हैं और वे एक महान वटवृक्ष अर्थात् बरगद की भाँति हैं। वे मानते हैं कि परिवार की एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उनके परिवार में उनके बेटे, पोते और बहुएँ सब एक साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं।

  1. परिवार में अशांति का कारण – बेला का आगमन

परिवार का सबसे छोटा पोता ‘परेश’ नायब तहसीलदार है। उसका विवाह लाहौर की एक सुशिक्षित और संपन्न घर की लड़की ‘बेला’ से हुआ है। बेला ग्रेजुएट है और आधुनिक विचारों वाली है। जब वह इस मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार में आती है, तो उसे यहाँ का माहौल ‘गँवार’ और ‘अअसभ्य’ लगता है। वह अपने मायके के अनुशासन और विलासिता की तुलना यहाँ से करती है, जिससे परिवार की अन्य स्त्रियों जैसे – इंदु, बड़ी बहू आदि के साथ उसका मनमुटाव शुरू हो जाता है।

  1. बेला का अलगाववाद

बेला नौकरानी रजवा को काम से निकाल देती है और कमरे का पुराना फर्नीचर बाहर फेंक देती है। वह परेश से शिकायत करती है कि यहाँ उसकी कोई इज्जत नहीं है और वह ‘बाग वाले मकान’ में अलग रहना चाहती है। परेश यह बात दादा जी को बताता है।

  1. दादा जी की दूरदर्शिता और आदेश

दादा जी परिवार को टूटने से बचाने के लिए एक मनोवैज्ञानिक चाल चलते हैं। वे जानते हैं कि “घृणा को घृणा से नहीं, स्नेह से जीता जा सकता है।” वे परिवार के सभी सदस्यों को बुलाकर आदेश देते हैं कि –

कोई भी बेला का अनादर नहीं करेगा।

सब उसे ‘छोटी बहू’ या ‘जी’ कहकर सम्मान देंगे।

कोई उसे काम करने के लिए नहीं कहेगा और उसे पढ़ने-लिखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

  1. सम्मान का बोझ और बेला की घुटन

दादा जी के आदेश के बाद घर का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। अब हर कोई बेला से डर-डर कर बात करता है। उसकी सास और जेठानियाँ उसके सामने खड़ी हो जाती हैं, उससे राय माँगती हैं और उसे काम को हाथ नहीं लगाने देतीं। बेला को अब ‘परायणता’ का अनुभव होने लगता है। उसे लगता है कि वह परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि कोई ‘बाहरी अतिथि’ है। उसे वह सहज प्रेम और हँसी-मजाक नहीं मिल रहा था जो बाकी सदस्य आपस में करते थे।

  1. आत्म-बोध और मिलन

अंत में, बेला को अपनी गलती का अहसास होता है। उसे समझ आता है कि अलग रहकर वह शायद सुखी न रह पाए। वह इंदु से कहती है कि उसे ‘जी’ कहकर न पुकारा जाए। वह परिवार के साथ घुलने-मिलने के लिए इंदु के साथ जबरदस्ती कपड़े धोने चली जाती है।

  1. एकांकी का मार्मिक अंत

जब दादा जी बेला को कपड़े धोते देखते हैं, तो वे उसे टोकते हैं। तब बेला एक बहुत गहरी बात कहती है –

“दादा जी, आप पेड़ से किसी डाली का टूट कर अलग होना पसंद नहीं करते, पर क्या आप यह चाहेंगे कि पेड़ से लगी-लगी वह डाल सूख कर मुरझा जाय?”

बेला का आशय था कि वह परिवार के साथ एक होकर अर्थात् रसपूर्ण होकर रहना चाहती है, न कि केवल नाम के लिए जुड़ी हुई एक ‘सूखी डाली’ बनकर। इसी के साथ दादा जी की सीख सफल होती है और परिवार टूटने से बच जाता है।

एकांकी का उद्देश्य

संयुक्त परिवार का महत्त्व – परिवार एक वृक्ष के समान है और सदस्य उसकी डालियाँ।

सहिष्णुता – नए सदस्यों को पुराने परिवार में ढलने के लिए स्नेह और समय की आवश्यकता होती है।

मनोवैज्ञानिक समाधान – कठोरता के बजाय प्रेम और सम्मान से बड़े से बड़े विवाद सुलझाए जा सकते हैं।

पात्रों की चारित्रिक विशेषताएँ

(क) दादा मूलराज (परिवार के मुखिया)

अनुभवी और दूरदर्शी – 72 वर्षीय दादा जी परिवार के वटवृक्ष हैं। वे जानते हैं कि परिवार को केवल अनुशासन से नहीं, बल्कि ममता और समझदारी से जोड़ा जा सकता है।

अटल और दृढ़ निश्चयी – वे संयुक्त परिवार के कट्टर समर्थक हैं। उनका मानना है कि परिवार से अलग होना विनाशकारी है।

मनोवैज्ञानिक समझ – जब बेला के कारण परिवार टूटने लगता है, तो वे बल प्रयोग के बजाय ‘अत्यधिक सम्मान’ की नीति अपनाते हैं, जिससे बेला को अपनी गलती का अहसास हो जाता है।

स्नेहिल हृदय – वे कठोर दिखते हैं, लेकिन अपने बच्चों और पोते-पोतियों से गहरा प्रेम करते हैं।

 

(ख) बेला (छोटी बहू)

पढ़ी-लिखी और आधुनिक – वह लाहौर के संपन्न और सुशिक्षित परिवार से आई है। वह ग्रेजुएट है और उसे अपनी शिक्षा और मायके पर गर्व है।

अहंकारी और संवेदनशील – शुरुआत में वह घर के पुराने तौर-तरीकों और ‘गँवार’ माहौल से घृणा करती है। वह छोटी-छोटी बातों पर तिलमिला जाती है।

परिवर्तनशील स्वभाव – बेला बुरी नहीं है, वह केवल खुद को नए माहौल में ढाल नहीं पा रही थी। जब उसे परिवार का ‘कृत्रिम’ आदर मिलता है, तो उसे अपनी अकेलेपन और गलती का अहसास होता है।

भावुक – अंत में वह परिवार का हिस्सा बनने के लिए व्याकुल हो उठती है और अपनी ‘सूखी डाली’ जैसी स्थिति को खत्म करती है।

 

(ग) परेश (सबसे छोटा पोता)

कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी – वह नायब तहसीलदार है, लेकिन घर में अपने दादा और बड़ों का बहुत सम्मान करता है।

द्वंद्व में फंसा हुआ – वह अपनी पत्नी बेला की आधुनिक इच्छाओं और दादा जी के संयुक्त परिवार के आदर्शों के बीच पिसता रहता है।

शांतिप्रिय – वह घर में झगड़ा नहीं चाहता और बेला को समझाने की कोशिश करता है, हालांकि वह बेला के प्रभाव में आकर अलग रहने का प्रस्ताव भी दादा जी के पास ले जाता है।

 

(घ) इंदु (दादा की पोती)

स्पष्टवादी और चंचल – इंदु घर की सबसे पढ़ी-लिखी लड़की (प्राइमरी तक) मानी जाती थी। वह बेला के व्यवहार से सबसे ज्यादा आहत होती है और शुरू में उससे लड़ती है।

आज्ञाकारी – वह दादा जी के आदेश का अक्षरशः पालन करती है और बेला का आदर करने लगती है, भले ही वह मन से न हो।

एकांकी का उद्देश्य

लेखक उपेन्द्रनाथ अश्क ने इस एकांकी के माध्यम से समाज को एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है –

संयुक्त परिवार की महत्ता – एकांकी का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि संयुक्त परिवार एक वटवृक्ष की तरह होता है, जहाँ सब मिलकर सुरक्षित रहते हैं। परिवार से अलग होना एक डाली के टूटने जैसा है, जो अंततः सूख जाती है।

मानवीय संबंधों में सामंजस्य – नए और पुराने विचारों के बीच टकराव स्वाभाविक है, लेकिन उसे आपसी समझ और स्नेह से सुलझाया जाना चाहिए। बेला और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच का टकराव इसी का उदाहरण है।

बुजुर्गों की भूमिका – दादा मूलराज के माध्यम से लेखक ने बताया है कि घर के बुजुर्गों को तानाशाही के बजाय सहानुभूति और कूटनीति से घर संभालना चाहिए। ‘सम्मान देकर सम्मान पाना’ ही घर को जोड़ने का सूत्र है।

बड़प्पन की परिभाषा – लेखक स्पष्ट करते हैं कि बड़प्पन शिक्षा या ओहदे से नहीं, बल्कि व्यवहार और त्याग से आता है। दादा जी कहते हैं— “बड़प्पन बाहर की वस्तु नहीं, बड़प्पन तो मन का होना चाहिए।”

सूखी डाली का रूपक – शीर्षक ‘सूखी डाली’ का उद्देश्य यह बताना है कि जो सदस्य परिवार (पेड़) से जुड़ा तो रहता है पर उसमें प्रेम का संचार (रस) नहीं होता, वह ‘सूखी डाली’ के समान है। पूर्ण समर्पण और मिलन ही परिवार की सार्थकता है।

एकांकी का सारांश सूत्र

“घृणा को घृणा से नहीं, बल्कि स्नेह और आदर से ही जीता जा सकता है।”

 

कठिन शब्दों के सरल अर्थ

1 – अराजकता – व्यवस्थाहीनता / मनमानी – Anarchy / Chaos

2 – निंदनीय – बुराई के योग्य – Condemnable / Censurable

3 – कुटुंब – परिवार – Family / Household

4 – प्रभुत्व – दबदबा / अधिकार – Dominance / Authority

5 – वट – बरगद का पेड़ – Banyan Tree

6 – आच्छादित – ढका हुआ – Covered / Overspread

7 – अगणित – अनगिनत – Innumerable / Countless

8 – संगति – साथ / साथ रहना – Company / Association

9 – प्रण – प्रतिज्ञा / कसम – Vow / Pledge

10 – मुरब्बा – जमीन का एक माप – A unit of land (25 acres)

11 – रुसूख – प्रभाव / रसूख – Influence / Clout

12 – नायब – उप-अधिकारी – Deputy

13 – प्रतिष्ठित – सम्मानित – Distinguished / Prestigious

14 – संपन्न – धनी / समृद्ध – Prosperous / Wealthy

15 – पतोहू – पुत्रवधू / बहू – Daughter-in-law

16 – ग्रेजुएट – स्नातक – Graduate

17 – स्थिर – शांत / रुका हुआ – Still / Stable

18 – कोलाहल – शोर-शराबा – Clamor / Noise

19 – रांदेवू – मिलन स्थल – Rendezvous / Meeting point

20 – निस्तब्धता – सन्नाटा / शांति – Silence / Stillness

21 – भृकुटी – भौहें – Eyebrow (frowning)

22 – बिफरी हुई – नाराज / चिढ़ी हुई – Infuriated / Angry

23 – गँवार – अनपढ़ / असभ्य – Rustic / Boorish

24 – मिश्रानी – रसोइया / नौकरानी – Cook / Maid-servant

25 – स्तंभित – हैरान / जड़ – Astonished / Petrified

26 – सलीका – तरीका / ढंग – Manners / Etiquette

27 – झाड़न – डस्टर / पोंछा – Duster / Cleaning cloth

28 – तमीज़ – शिष्टाचार – Manners / Decorum

29 – तुनककर – चिढ़कर – Snappishly / Peevishly

30 – परख – पहचान – Insight / Discernment

31 – फूहड़ – गंदा / लापरवाह – Slovenly / Untidy

32 – विस्मित – चकित – Amazed / Surprised

33 – अनादर – अपमान – Disrespect / Insult

34 – बरबस – जबरदस्ती – Forcibly / Compulsively

35 – अबाध – बिना रुकावट के – Unobstructed

36 – विद्वेष – ईर्ष्या / नफरत – Malice / Hatred

37 – अनुकरण – नकल करना – Imitation / Following

38 – आपत्ति – एतराज – Objection

39 – बेडौल – जिसका आकार सही न हो – Ill-shaped / Awkward

40 – बखान – वर्णन करना – Description / Praise

41 – कतरनी – कैंची (जुबान के लिए) – Sharp tongue / Snippers

42 – अबरों – रजाई का ऊपरी कपड़ा – Quilt-covers

43 – गुसलखाना – स्नानागार – Bathroom

44 – सरसता – ताजगी / रस – Juiciness / Vitality

45 – नासूर – पुराना घाव – Fistula / Ulcer

46 – दर्प – घमंड / गर्व – Pride / Arrogance

47 – लुप्त – गायब – Vanished / Extinct

48 – भीनी-भीनी – धीमी और मधुर – Soft and sweet (fragrance)

49 – पुलक – रोमांच / खुशी – Thrill / Joy

50 – दहेज – दान-सामग्री – Dowry

51 – हस्तक्षेप – दखल देना – Interference

52 – आलोचना – बुराई / समीक्षा – Criticism

53 – स्वेच्छापूर्वक – अपनी मर्जी से – Voluntarily / At will

54 – उद्विग्नता – बेचैनी – Agitation / Anxiety

55 – अन्यमनस्कता – अनमनापन – Absent-mindedness

56 – तिलमिलाहट – झल्लाहट – Irritation / Agony

57 – ठूंठ – बिना पत्तों का पेड़ – Stumpy / Leafless tree

58 – सिहर उठना – काँप जाना – To Shiver / Tremble

59 – तिरस्कार – उपेक्षा / अपमान – Disdain / Scorn

60 – सुसंस्कृत – अच्छे संस्कारों वाला – Civilized / Cultured

61 – साक्षी – गवाह – Witness

62 – अभिप्राय – मतलब / उद्देश्य – Meaning / Intent

63 – परामर्श – सलाह – Consultation / Advice

64 – परस – स्पर्श – Touch / Contact

65 – आकांक्षा – इच्छा – Desire / Aspiration

66 – सुदृढ़ – मजबूत – Solid / Strong

67 – आकुलता – व्याकुलता – Restlessness / Unease

68 – वृथा – बेकार / व्यर्थ – Uselessly / In vain

69 – सिफारिश – अनुशंसा – Recommendation

70 – भावुक – इमोशनल – Emotional / Sentimental

71 – दयानतदार – ईमानदार – Honest / Trustworthy

72 – हर्ज – नुकसान / बाधा – Harm / Loss

73 – कहकहे – जोर की हँसी – Loud laughter / Guffaw

74 – महारियाँ – काम करने वाली औरतें – Maidservants

75 – बाधा – रुकावट – Obstacle / Hindrance

76 – खलल – विघ्न – Disturbance

77 – सतर्क – सावधान – Alert / Cautious

78 – अपरिचित – अजनबी – Stranger / Unfamiliar

79 – निढाल – थका हुआ – Exhausted / Languid

80 – सिसकना – सुबकना – Sobbing

81 – दीर्घ – लम्बी – Deep / Long

82 – सहसा – अचानक – Suddenly

83 – अनादर – बेइज्जती – Disrespect

84 – भावावेश – भावनाओं का वेग – Emotional outburst

85 – रुंधा हुआ – भारी (आवाज़) – Choked (voice)

86 – मुरझाना – कुम्हलाना – To wither / Fade

87 – नगण्य – जो गिनती में न हो – Negligible

88 – कचहरी – न्यायालय – Court

89 – निर्लज्ज – बेशर्म – Shameless

90 – विद्वान – समझदार – Scholar / Learned

91 – प्रसन्नता – खुशी – Happiness

92 – पृथक् – अलग – Separate

93 – निवारण – समाधान – Solution / Remedy

94 – जंगम – चल संपत्ति – Movable property

95 – यूनिट – इकाई – Unit

96 – निस्तब्ध – शांत – Motionless / Silent

97 – अहाता – प्रांगण – Compound / Courtyard

98 – अदृश्य – जो दिखाई न दे – Invisible

99 – ताकत – शक्ति – Strength

100 – अहंकार – घमंड – Ego / Pride

101 – आचरण – व्यवहार – Conduct / Behavior

102 – उत्साह – जोश – Enthusiasm

103 – गंभीर – शांत और धीमा – Serious / Solemn

104 – विवश – मजबूर – Compelled / Helpless

105 – क्षमा – माफ़ी – Forgiveness

106 – हृदय – दिल – Heart

107 – स्नेह – प्यार – Affection

108 – ताप – जलन / गर्मी – Heat / Mental agony

109 – अटल – जो टले नहीं – Firm / Unshakable

110 – प्रबुद्ध – जागरूक / ज्ञानी – Enlightened

अवतरणों पर आधारित प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(i) “वह तमीज़ तो बस आप लोगों को है” मैंने कहा तुम तो लड़ती हो। मैं तो सिर्फ़ यह कहना चाहती थी कि नौकर से काम लेने का भी ढंग होता है।

(क) वक्ता और श्रोता कौन हैं? कथन का आशय संदर्भ-सहित स्पष्ट कीजिए?

उत्तर – वक्ता इंदु है और श्रोता बड़ी बहू है। संदर्भ यह है कि इंदु अपनी नई भाभी ‘बेला’ के व्यवहार की शिकायत बड़ी बहू से कर रही है। बेला ने पुरानी नौकरानी रजवा को काम से निकाल दिया था, जिस पर इंदु ने उसे समझाने की कोशिश की थी।

(ख) वक्ता का परिचय दीजिए।

उत्तर – वक्ता का परिचय – इंदु दादा मूलराज की पोती है। वह प्राइमरी स्कूल तक शिक्षित है और घर में दादा जी की लाड़ली है। वह स्वभाव से स्पष्टवादी और अपने परिवार के प्रति समर्पित है।

(ग) “वह तमीज़ तो बस आप लोगों को है।’ यह वाक्य किसने, किससे कहा? इस कथन से उसके स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?

उत्तर – यह वाक्य बेला ने इंदु से कहा था। इससे बेला के अहंकारी, तुनुकमिजाज और आधुनिकता के दंभ का पता चलता है। वह ससुराल वालों को अपने मायके की तुलना में ‘गँवार’ समझती थी।

(घ) बेला का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर – बेला सुशिक्षित ग्रेजुएट और लाहौर के संपन्न परिवार की लड़की है। वह आधुनिक विचारों वाली है, किंतु शुरू में उसमें अपने मायके को लेकर बहुत गर्व है। वह संवेदनशील है और संयुक्त परिवार के पुराने तौर-तरीकों में खुद को उपेक्षित महसूस करती है।

(ii) “और वह ढंग मुझे नहीं आता, मैंने नौकर तो यहीं आकरे देखे हैं।” फिर कहने लगीं, “काम लेने का ढंग उसे आता है, जिसे काम की परख हो।”

(क) उपर्युक्त कथन किसका है? उसके संबंध में बताइए।

उत्तर – यह कथन बेला का है। वह परेश जो दादा जी के सबसे छोटे पोते हैं उसकी पत्नी है। वह लाहौर के एक प्रतिष्ठित कुल से आई है।

(ख) उपर्युक्त कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – बेला ने घर की पुरानी नौकरानी रजवा को काम से हटा दिया क्योंकि उसे बैठक साफ करने का ‘सलीका’ नहीं था। जब इंदु ने उसे टोकना चाहा, तब बेला ने व्यंग्य में यह बात कही।

(ग) वक्ता ने अपने परिवार के बारे में क्या कहा? वेत से यह बात कही

उत्तर – वक्ता बेला ने अपने ससुराल के परिवार के बारे में यह कहा कि यहाँ के लोग ‘फूहड़’ नौकरों से गुजारा कर लेते हैं और उन्हें काम की परख नहीं है। उसने यह बात तिरस्कार और घृणा के भाव से कही।

(घ) इंदु कौन है? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर – इंदु दादा मूलराज की पोती और परेश की छोटी बहन है। वह घर की चहेती है और बेला के आने से पहले घर में उसी की चलती थी।

(iii) ‘मेरे मायके में यह होता है, मेरे मायके में यह नहीं होता। (हाथ मटकाकर) अपने और अपने मायके के सामने तो वह किसी को कुछ गिनती ही नहीं। हम तो उसके लिए मूर्ख गँवार और असभ्य हैं।’

(क) प्रस्तुत अवतरण किस एकांकी से लिया गया है? उपर्युक्त पंक्तियाँ किसने, किससे, किस संदर्भ में कही हैं?

उत्तर – यह एकांकी ‘सूखी डाली’ से लिया गया है। ये पंक्तियाँ इंदु ने अपनी बड़ी भाभी से बेला के व्यवहार की चर्चा करते हुए कही हैं।

(ख) ‘वह किसी को कुछ गिनती ही नहीं’ – ‘वह’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उसके मायके में किस प्रकार का वातावरण था?

उत्तर – ‘वह’ शब्द का प्रयोग बेला के लिए किया गया है। उसके मायके में संपन्नता, आधुनिकता, अनुशासन और उच्च सामाजिक स्तर का वातावरण था।

(ग) उसके मायके तथा ससुराल के वातावरण में क्या अंतर है?

उत्तर – बेला का मायका आधुनिक और विलासितापूर्ण था, जबकि उसका ससुराल एक मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार है जहाँ सादगी, मर्यादा और पुराने मूल्यों को महत्त्व दिया जाता है।

(घ) उसका मन ससुराल में क्यों नहीं लगता? अपनी गृहस्थी अलग बसाने के लिए वह क्या चाहती है?

उत्तर – उसका मन ससुराल में इसलिए नहीं लगता क्योंकि उसे यहाँ का वातावरण पिछड़ा हुआ लगता है और उसे सबकी रोक-टोक पसंद नहीं है। वह अपनी गृहस्थी अलग बसाने के लिए ‘बाग वाला मकान’ चाहती है।

 

(iv) फिर कैसे चलेगा? हमारे घर में तो मिलकर रहना, बड़ों का आदर करना, अपने घर की रूखी को दूसरी की चुपड़ी से अच्छा समझना, नौकरों पर दया और छोटों पर ……..  

(क) वक्ता और श्रोता कौन है? कथन का संदर्भ स्पष्ट करें।

उत्तर – वक्ता छोटी भाभी अर्थात् बेला की सास है और श्रोता इंदु और बड़ी बहू हैं। संदर्भ यह है कि वे बेला के घर में न घुलने-मिलने पर चिंता प्रकट कर रही हैं।

(ख) फिर कैसे चलेगा? वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका आशय है कि यदि घर की नई बहू परिवार के संस्कारों और रीति-रिवाजों को नहीं अपनाएगी, तो परिवार की एकता भंग हो जाएगी।

(ग) उपर्युक्त पंक्तियों में वक्ता अपने परिवार की किस विशेषता का उल्लेख कर रहा है?

उत्तर – वक्ता अपने परिवार की एकता, बड़ों का सम्मान, संतोष  और दयालुता जैसी विशेषताओं का उल्लेख कर रही है।

(घ) वक्ता के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर – वह एक पारंपरिक, शांत और परिवार को जोड़कर रखने वाली महिला है। वह बेला के व्यवहार से चिंतित है लेकिन फिर भी उसे ‘बच्ची’ समझकर माफ कर देती है।

 

(v) इस फ़र्नीचर पर हमारे दादा बैठते थे, पिता बैठते थे, चाचा बैठते थे। उन लोगों को कभी शर्म नहीं आई, उन्होंने कभी फ़र्नीचर के गले-सड़े होने की शिकायत नहीं की।

(क) उपर्युक्त वाक्य का संदर्भ लिखिए।

उत्तर – बेला ने परेश के कमरे से पुराने फर्नीचर को ‘गला-सड़ा’ कहकर बाहर निकाल दिया था। इस पर परेश ने अपनी आपत्ति जताई।

(ख) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? दोनों का परिचय दीजिए।

उत्तर – वक्ता परेश है और श्रोता बेला है। परेश नायब तहसीलदार है और बेला उसकी सुशिक्षित पत्नी है।

(ग) फ़र्नीचर के संबंध में किसका कथन उद्धृत किया जा रहा है?

उत्तर – फर्नीचर के संबंध में यह कथन परेश का है, जो वह बेला को घर की परंपरा और बुजुर्गों के सम्मान की याद दिलाने के लिए कह रहा है।

(घ) परेश का चरित्र चित्रण कीजिए।

उत्तर – परेश पढ़ा-लिखा और सरकारी अधिकारी है, लेकिन वह अपने दादा जी का बहुत सम्मान करता है। वह अपनी पत्नी के आधुनिक विचारों और परिवार के पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।

 

(vi) ‘तुम भी बहन, बस …… क्या इतना पढ़ लिखकर छोटी बहू कपड़े धोएगी?’

(क) उपर्युक्त वाक्य किसने, किससे, किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर – वक्ता बड़ी भाभी है और श्रोता छोटी भाभी अर्थात् बेला की सास है। संदर्भ यह है कि जब छोटी बहू बेला ने दादा जी के कपड़े धोने के लिए उन्हें गुसलखाने में डाल दिया और खुद धोने नहीं गई, तब घर की अन्य स्त्रियाँ उसकी इस लापरवाही पर चर्चा कर रही थीं।

(ख) छोटी बहू कौन है? वह किस पारिवारिक परिवेश से आई है?

उत्तर – छोटी बहू बेला है। वह लाहौर के एक अत्यंत प्रतिष्ठित, संपन्न और सुशिक्षित परिवार से आई है। उसका मायका आधुनिक सुख-सुविधाओं से पूर्ण था।

(ग) वह परिवार से क्यों अलग होना चाहती थी?

उत्तर – वह परिवार के पुराने ढंग के रहन-सहन, संयुक्त परिवार की भीड़-भाड़ और बड़ों के हस्तक्षेप को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा मानती थी। उसे ससुराल के लोग ‘गँवार’ और ‘असभ्य’ लगते थे।

(घ) वह बात-बात में किस बात की चर्चा करती रहती थी?

उत्तर – वह बात-बात में अपने मायके की चर्चा करती रहती थी—वहाँ का खाना-पीना, वहाँ का फर्नीचर, वहाँ के नौकर और वहाँ के रहन-सहन का गुणगान करके ससुराल वालों को नीचा दिखाने की कोशिश करती थी।

 

(vii) ‘मैं कहा करता हूँ न बेटा कि एक बार वृक्ष से जो डाली टूट गई, उसे लाख पानी दो, उसमें वह सरसता न आएगी और हमारा यह परिवार बरगद के इस महान पेड़ की भाँति है।’

(क) वक्ता कौन है? उसके मन में ये विचार किस घटना को देखकर आए?

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज हैं। उनके मन में ये विचार अपने पोतों मल्लू और जगदीश को खेलते हुए देखने पर आए, जिन्होंने बरगद की एक टूटी डाली को जमीन में गाड़कर पानी देना शुरू किया था।

(ख) वक्ता ने अपने परिवार की तुलना बरगद के पेड़ से क्यों की है?

उत्तर – दादा जी ने परिवार की तुलना बरगद से इसलिए की है क्योंकि बरगद बहुत विशाल, गहरा और आश्रय देने वाला होता है। परिवार भी एकता के बल पर ही तूफानों का सामना कर सकता है।

(ग) ‘एक बार वृक्ष से जो डाली टूट गई, उसे लाख पानी दो, उसमें वह सरसता न आएगी।’- इस कथन से वक्ता का क्या आशय है?

उत्तर – इसका आशय है कि जो सदस्य परिवार से एक बार अलग हो जाता है, वह फिर कभी पहले जैसा अपनापन और सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता। अलग होने पर व्यक्ति का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

(घ) उपर्युक्त कथन किस एकांकी से लिया गया है, उसमें एकांकीकार ने क्या संदेश दिया है?

उत्तर – एकांकीकार उपेन्द्रनाथ अश्क ने संदेश दिया है कि संयुक्त परिवार में ही सुरक्षा और सुख है। व्यक्ति की पहचान परिवार से है, उससे अलग होकर वह ‘सूखी डाली’ की तरह निर्जीव हो जाता है।

 

(viii) बड़प्पन बाहर की वस्तु नहीं-बड़प्पन तो मन का होना चाहिए। और फिर बेटा घृणा को घृणा से नहीं मिटाया जा सकता।

(क) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिए तथा कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज और श्रोता उनका मँझला बेटा कर्मचंद है। संदर्भ यह है कि कर्मचंद बेला के घमंडी स्वभाव की शिकायत दादा जी से कर रहा है।

(ख) वक्ता एवं श्रोता का संबंध स्पष्ट करते हुए वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – वे अत्यंत बुद्धिमान, धैर्यवान और दूरदर्शी हैं। वे तानाशाही के बजाय मनोवैज्ञानिक तरीके से घर चलाना जानते हैं। वे कर्मचंद के पिता हैं।

(ग) ‘मन में बड़प्पन’ से वक्ता का क्या आशय है?

उत्तर – इसका अर्थ है कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने या अधिक पढ़ने से कोई बड़ा नहीं होता; असली बड़प्पन दूसरों को सम्मान देने और उदार हृदय रखने में है।

(घ) छोटी बहू कौन है? उसके चरित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – वह आधुनिक और स्वाभिमानी है, लेकिन उसमें धैर्य की कमी है। अंत में वह परिवार के स्नेह के आगे झुक जाती है।

 

(ix) ठूठा वृक्ष आकाश को छूने पर भी अपनी महानता का सिक्का हमारे दिलों पर उस समय तक नहीं बैठा सकता, जब तक अपनी शाखाओं में वह ऐसे पत्ते नहीं लाता जिनकी शीतल सुखद छाया मन के समस्त ताप को हर ले और जिसके फूलों की भीनी-भीनी सुगंध हमारे प्राणों में पुलक भर दे।

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज और श्रोता कर्मचंद हैं। संदर्भ यह है कि दादा जी परिवार के सदस्यों को समझा रहे हैं कि बड़प्पन दूसरों को सुख देने में है।

(ख) वक्ता का परिचय दीजिए।

उत्तर – दादा जी मूलराज 72 वर्ष के अनुभवी बुजुर्ग हैं जो अपने परिवार को एक यूनिट मानकर चलते हैं।

(ग) वक्ता ने बड़प्पन एवं महानता के संबंध में क्या-क्या कहा है?

उत्तर – दादा जी का मानना है कि केवल ऊँचा पद या धन महानता नहीं है। असली महानता वह है जो दूसरों को ‘शीतल सुखद छाया’ शांति और प्रेम दे सके।

(घ) ‘सूखी डाली’ एकांकी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘सूखी डाली’ एकांकी का उद्देश्य – संयुक्त परिवार की महत्ता को प्रतिपादित करना और यह दिखाना कि प्रेम और सम्मान से किसी का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है।

 

(x) ‘तुम्हारी बहू को रज़ाई के अबरे और मलमल का थान पसंद नहीं आया। तुम्हारे ताऊ ठहरे पुराने समय के आदमी, वे नए फ़ैशन की चीजें खरीदना क्या जानें?’

(क) उपर्युक्त कथन किसने, किससे तथा किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता उनका छोटा पोता परेश है। संदर्भ यह है कि दादा जी को पता चला कि बेला को घर के बड़ों द्वारा लाई गई चीजें पसंद नहीं आईं, इसलिए वे परेश से इस विषय में बात कर रहे हैं।

(ख) रज़ाई के अबरे और मलमल के थान के अलावा बहू को कौन-सी चीज़ पसंद नहीं थी?

उत्तर – रज़ाई के अबरे और मलमल के थान के अलावा बेला को घर का पुराना फर्नीचर और घर की पुरानी नौकरानी रजवा का काम करने का ढंग भी पसंद नहीं था।

(ग) ‘ताऊ’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है? उन्होंने दादा जी से ‘बहू’ के संबंध में क्या बात कही थी?

उत्तर – यहाँ ‘ताऊ’ शब्द दादा जी के बड़े बेटे परेश के ताऊ के लिए प्रयोग किया गया है। उन्होंने दादा जी से शिकायत की थी कि बहू को उनकी लाई हुई चीजें पसंद नहीं आईं और वह उन्हें ‘पुराने फैशन’ का समझती है।

(घ) वक्ता ने श्रोता को इस समस्या से निपटने के लिए क्या सुझाव दिया?

उत्तर – दादा जी ने परेश को सुझाव दिया कि वह बेला को खुद बाज़ार ले जाए और उसकी पसंद का नया सामान और फर्नीचर खरीद लाए, ताकि वह घर में खुश रह सके।

 

(xi) इतना जल्दी उसका मन कैसे लग सकता है बेटा, अभी कै दिन हुए हैं उसे आए? फिर बेटा मन लगता नहीं लगाया जाता है।

(क) उपर्युक्त वाक्य किसने, किस संदर्भ में किससे कहा है?

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता परेश है। संदर्भ यह है कि परेश दादा जी को बता रहा है कि बेला का मन इस घर में नहीं लग रहा है और वह अलग रहना चाहती है।

(ख) वक्ता ने उपर्युक्त वाक्य श्रोता की कौन-सी बात सुनकर कहा?

उत्तर – परेश ने जब दादा जी से कहा कि “इस घर में बेला का मन नहीं लगता,” तब दादा जी ने धैर्य दिखाते हुए उपर्युक्त उत्तर दिया।

(ग) श्रोता ने इस बात का क्या उत्तर दिया?

उत्तर – परेश ने कहा कि “वह मन लगाती ही नहीं,” अर्थात् उसने कोशिश करने के बजाय खुद को परिवार से काट लिया है।

(घ) श्रोता की बात सुनकर वक्ता ने पुनः क्या कहा?

उत्तर – दादा जी ने कहा कि हमें उसका मन लगाना चाहिए। वह एक बड़े घर से आई है और यहाँ की भीड़-भाड़ से घबराती होगी। हमें उसे प्यार और आदर देकर इस घर का हिस्सा बनाना होगा।

 

(xii) और फिर मेरी आँखों के सामने इस महान वृक्ष की कलियाँ मैं टूटने लगती हैं और वह केवल ठूंठ रह जाता है। (स्वर धीमा, जैसे अपने आप से कह रहे हैं) और मैं सिहर उठता हूँ। न बेटा, मैं अपने जीते जी यह सब न होने दूँगा। तुम चिंता न करो। मैं सबको समझा दूँगा।

(क) ‘महान वृक्ष और उसकी कलियाँ’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर – ‘महान वृक्ष’ संयुक्त परिवार है और ‘कलियाँ/डालियाँ’ परिवार के सदस्य हैं।

(ख) वक्ता कौन है और वे क्या सोचकर सिहर उठते हैं तथा क्यों?

उत्तर – दादा जी यह सोचकर सिहर उठते हैं कि यदि परिवार का एक भी सदस्य जैसे परेश और बेला अलग हो गए, तो धीरे-धीरे पूरा परिवार बिखर जाएगा और केवल ‘ठूँठ’ अर्थात् अकेलापन रह जाएगा।

(ग) वक्ता ने अपने परिवार को एकजुट रखने में किस प्रकार सफलता प्राप्त की?

उत्तर – दादा जी ने पूरे परिवार को आदेश दिया कि वे बेला का अत्यधिक आदर करें और उसे काम न करने दें। इस कृत्रिम आदर से बेला को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह परिवार में घुल-मिल गई।

(घ) ‘सूखी डाली’ एकांकी के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – ‘सूखी डाली’ वह सदस्य है जो परिवार से तो जुड़ा है पर उसमें प्रेम का रस नहीं है। बेला अंत में ‘सूखी डाली’ बनने के बजाय ‘हरी डाली’ बनना स्वीकार करती है, इसलिए शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।

 

(xiii) बड़ा वास्तव में कोई उमर से या दर्जे में नहीं होता। बड़ा तो बुद्धि से होता है, योग्यता से होता है।

(क) प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? यह वाक्य किसके लिए कहा गया है और क्यों?

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज हैं। यह वाक्य बेला के लिए कहा गया है। दादा जी परिवार के सदस्यों को समझा रहे हैं कि बेला शिक्षित है, इसलिए हमें उसकी योग्यता का सम्मान करना चाहिए।

(ख) वक्ता ने जिसके विषय में यह वाक्य कहा है उसका वक्ता से क्या संबंध है? उसके चरित्र की

उत्तर – बेला दादा जी की पौत्र-वधू अर्थात् पोते की पत्नी है। बेला सुशिक्षित और स्वाभिमानी है, लेकिन उसमें अनुकूलन की कमी है। हालांकि, वह अंततः भावुक है और परिवार के सच्चे स्नेह को पहचान लेती है।

(ग) उपर्युक्त कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – दादा जी का मानना है कि केवल उम्र में बड़ा होना ही काफी नहीं है। यदि कोई कम उम्र का व्यक्ति अधिक शिक्षित और योग्य है, तो उसे उचित सम्मान और स्थान दिया जाना चाहिए ताकि वह अपमानित महसूस न करे।

(घ) ‘सूखी डाली’ एकांकी का संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – एकांकी का संदेश है कि संयुक्त परिवार की एकता आपसी तालमेल, त्याग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान पर टिकी होती है। कठोरता के बजाय प्रेम से किसी का भी मन जीता जा सकता है।

 

(xiv) यही मेरी आकांक्षा है कि सब डालियाँ साथ-साथ फले-फूलें, जीवन की सुखद, शीतल वायु के स्पर्श से झूमें और सरसाएँ। विटप से अलग होने वाली डाली की कल्पना ही मुझे सिहरा देती है।

(क) वक्ता और श्रोता कौन हैं? कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – वक्ता दादा मूलराज हैं और श्रोता इंदु और मँझली बहू हैं। संदर्भ यह है कि दादा जी उन्हें बेला के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करने और उसकी हँसी न उड़ाने का आदेश दे रहे हैं।

(ख) इनके फलने-फूलने से वक्ता का क्या आशय है?

उत्तर – इसका आशय है कि परिवार के सभी सदस्य आपसी प्रेम, शांति और समृद्धि के साथ एक ही छत के नीचे रहें और परिवार रूपी वृक्ष की शोभा बढ़ाएँ।

(ग) श्रोता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – इंदु चंचल और स्पष्टवादी है। वह अपने परिवार और दादा जी से बहुत प्यार करती है। शुरुआत में वह बेला से झगड़ती है, लेकिन दादा जी के आदेश पर वह अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँग लेती है।

(घ) वक्ता के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – दादा जी एक वटवृक्ष के समान संरक्षक हैं। वे अनुभवी, कूटनीतिज्ञ, और ममतामयी हैं। वे परिवार को बिखरने से बचाने के लिए किसी भी हद तक झुकने और त्याग करने को तैयार रहते हैं।

 

(xv) मैं किन लोगों में आ गई हूँ? ये कैसे लोग हैं कुछ भी तो समझ नहीं सकी आज कुछ हैं कल कुछ पल में तोला पल में माशा …….. इनका कुछ भी तो पता नहीं चलता। गर्म होते हैं तो आग बन जाते हैं और नर्म होते हैं तो मोम से भी कोमल दिखाई देते हैं। आज जिस बात को बुरा कहते हैं, कल उसी की प्रशंसा करते हैं।

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? उनका परिचय दीजिए।

उत्तर – वक्ता बेला है। वह अपने आप से बातें कर रही है।

(ख) ‘पल में तोला पल में माशा’ वाक्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – अत्यंत अस्थिर स्वभाव होना। बेला को लगता है कि परिवार के लोग कभी बहुत सख्त हो जाते हैं और कभी अचानक बहुत अधिक सम्मान देने लगते हैं।

(ग) वक्ता के अनुसार उसे किस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है और क्यों?

उत्तर – बेला को ‘अत्यधिक आदर’ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। दादा जी के आदेश के कारण सब उसके साथ ‘परायणता’ का व्यवहार कर रहे हैं, जिससे वह अलग-थलग महसूस कर रही है।

(घ) बेला के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – वह संवेदनशील है। उसे समझ में आता है कि बिना काम और बिना सहज हँसी-मजाक के जो आदर उसे मिल रहा है, वह वास्तव में एक सजा है।

 

(xvi) मैंने एक अनुभवी नौकरानी खोज लाने के लिए कह दिया है। जो नए फ़ैशन के बड़े घरों में काम कर चुकी हो।

(क) बेला ने इंदु से नौकरानी के बारे में क्या कहा था?

उत्तर – बेला ने इंदु से कहा था कि रजवा को काम करना नहीं आता और उसे सलीका नहीं है। उसने रजवा को हटा दिया था क्योंकि उसके मायके में ऐसे ‘गँवार’ नौकर दो घड़ी भी नहीं टिकते थे।

(ख) उपर्युक्त वाक्य किसने, किससे कहा?

उत्तर – उपर्युक्त वाक्य मँझली भाभी ने बेला से कहा।

(ग) वक्ता ने नौकरों के संबंध में दादा जी की किस बात का उल्लेख किया?

उत्तर – मँझली भाभी ने बताया कि दादा जी पुराने नौकरों के पक्ष में रहते हैं क्योंकि वे दयानतदार अर्थात् ईमानदार और विश्वसनीय होते हैं और पीढ़ियों से परिवार की सेवा करते आ रहे हैं।

(घ) वक्ता ने रजवा के संबंध में बेला को क्या बताया तथा बेला को क्या सुझाव दिया?

उत्तर – मँझली भाभी ने बताया कि रजवा अनुभवी है पर उसे बेला के आधुनिक ढंग का पता नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि नया फर्नीचर आने पर बेला खुद अपने सामने खड़े होकर रजवा को झाड़ना-बुहारना सिखा दे, वह जल्दी सीख जाएगी।

 

(xvii) आप मुझे क्यों काँटों में घसीटती हैं? आप मेरे साथ क्यों परायों का-सा व्यवहार करती हैं?

(क) वक्ता और श्रोता कौन-कौन हैं? दोनों का परिचय दीजिए।

उत्तर – वक्ता बेला है और श्रोता मँझली भाभी या बड़ी बहू हैं। बेला परेश की बहू है और सुशिक्षित महिला है जबकि मँझली भाभी या बड़ी बहू आदर्श गृहिणी हैं।

(ख) ‘काँटों में घसीटने’ का आशय एवं संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘काँटों में घसीटना’ का आशय है—अत्यधिक औपचारिक और बनावटी आदर देकर शर्मिंदा करना। बेला को परिवार वालों का यह ‘जी-जी’ कहना और उसे काम न करने देना काँटों की तरह चुभ रहा था।

(ग) वक्ता ने उपर्युक्त कथन किन परिस्थितियों में कहा है और क्यों?

उत्तर – जब घर की स्त्रियाँ बेला के पास आकर औपचारिक बातें करने लगीं और उसे काम करने से मना किया, तब बेला फूट-फूटकर रो पड़ी।

(घ) उपर्युक्त कथन के आधार पर वक्ता की मानसिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।

उत्तर – बेला इस समय भारी मानसिक तनाव और पश्चात्ताप में है। वह परिवार का सहज हिस्सा बनना चाहती है, न कि कोई पूजनीय अतिथि।

 

(xviii) ‘आप मुझे मेरे मायके भेज दीजिए? मुझे ऐसा लगता है, जैसे मैं अपरिचितों में आ गई हूँ।’

(क) उपर्युक्त कथन किसने, किससे किस संदर्भ में कहा है?

उत्तर – वक्ता बेला है और श्रोता उसका पति परेश है। संदर्भ यह है कि बेला परिवार के कृत्रिम व्यवहार से तंग आ चुकी है। 

(ख) वक्ता को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था?

उत्तर – बेला को लग रहा है कि कोई उससे दिल से बात नहीं करता, सब उससे डरते हैं और उसे परिवार की गतिविधियों से अलग रखा जा रहा है।

(ग) उसे ऐसा क्यों लगने लगा कि वह अपरिचितों में आ गई है?

उत्तर – बेला को ऐसा लगने लगा कि वह अपरिचितों में आ गई है क्योंकि अब घर में कोई उसे टोकता नहीं, कोई उससे लड़ता नहीं; सब बस औपचारिकता निभाते हैं। यह ‘अत्यधिक आदर’ उसे पराया होने का अहसास कराता है।

(घ) वक्ता की बात सुनकर श्रोता ने क्या उत्तर दिया?

उत्तर – परेश ने उत्तर दिया कि “तुम पहले शिकायत करती थी कि कोई आदर नहीं करता, अब सब आदर करते हैं तो भी तुम्हें परेशानी है। आखिर तुम चाहती क्या हो?”

 

 

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