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संप्रेषण के प्रकार

sampreshan Ke Prakaar

संप्रेषण के प्रकार

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संप्रेषण के प्रकार

संप्रेषण (Communication) को मुख्य रूप से सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके और संगठन की संरचना के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।

  1. माध्यम के आधार पर (Based on Channel)

(क) शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication)

(ख) अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication)

  1. संबंधों/औपचारिकता के आधार पर (Based on Formality)

(क) औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication)

(ख) अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication)

  1. संख्या के आधार पर (Based on Number of People)
  1. माध्यम के आधार पर (Based on Channel)

(क) शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication)

(ख) अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication)

यह वर्गीकरण इस आधार पर है कि संदेश भेजने के लिए किन साधनों का उपयोग किया गया है –

(क) शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication)

इसमें शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इसके दो रूप हैं –

मौखिक संप्रेषण (Oral) – संप्रेषण का वह रूप है जिसमें सूचनाओं, विचारों और संदेशों का आदान-प्रदान मुख से बोले गए शब्दों के माध्यम से किया जाता है। यह संचार का सबसे प्राचीन और प्रभावशाली माध्यम है। इसमें साधारणतः जब प्रेषक (Sender) और प्राप्तकर्ता (Receiver) अपनी बात कहने और समझने के लिए ध्वनि संकेतों और भाषा के उच्चारण का प्रयोग करते हैं, तो उसे मौखिक संप्रेषण कहते हैं। इसमें शब्दों के साथ-साथ वक्ता की आवाज़ का उतार-चढ़ाव (Tone), गति और उच्चारण की स्पष्टता महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मौखिक संप्रेषण के प्रमुख माध्यम

आमने-सामने की बातचीत (Face-to-Face) – सबसे प्रभावी माध्यम, जहाँ शब्दों के साथ शारीरिक हाव-भाव भी जुड़ जाते हैं।

टेलीफोन/मोबाइल कॉल – जहाँ केवल ध्वनि के माध्यम से संवाद होता है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग – आधुनिक समय में दूर बैठे लोगों से बातचीत का प्रमुख जरिया (जैसे Zoom, Google Meet)।

भाषण और सभाएँ – एक वक्ता द्वारा बड़े समूह को संबोधित करना।

रेडियो और पॉडकास्ट – जनसमूह तक सूचना पहुँचाने का एकतरफा मौखिक माध्यम।

 

मौखिक संप्रेषण के लाभ –

त्वरित फीडबैक – आप तुरंत जान सकते हैं कि सामने वाले को बात समझ आई या नहीं।

समय की बचत – जटिल समस्याओं को बातचीत से जल्दी सुलझाया जा सकता है।

लचीलापन – बातचीत के दौरान आप शब्दों को जरूरत के अनुसार बदल सकते हैं।

कम खर्चीला – यह माध्यम कम खर्चीला है।

गोपनीयता – लिखित संप्रेषण की तुलना में इसकी गोपनीयता अधिक बनी रहती है।

शरीरिक हाव-भाव के साथ प्रभावपूर्ण संप्रेषण हो पाता है।

भौतिक संसाधनों जैसे कागज़, कलम आदि की आवश्यकता नहीं होती है।

तीव्र होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में अधिक उपयोगी होती है।

यह सहज और स्वाभाविक होता है क्योंकि श्रोताओं के आधार पर शब्दों का चयन किया जाता है।

इसमें त्रुटियों की संभावनाएँ बहुत कम होती है।

 

मौखिक संप्रेषण की सीमाएँ –

कोई स्थायी रिकॉर्ड नहीं – बिना रिकॉर्डिंग के मौखिक बात को भविष्य के लिए प्रमाण नहीं माना जा सकता।

गलतफहमी की संभावना – शोर या ध्यान भटकने से संदेश का अर्थ बदल सकता है।

दूरी की समस्या – आमने-सामने की बातचीत के लिए दोनों का उपस्थित होना जरूरी है।

लिखित संप्रेषण की तुलना में मौखिक संप्रेषण की विधिवत् मान्यता कम होती है।

मौखिक संप्रेषण का प्रयोग क्षेत्र सीमित है।

अन्य संस्कृतियों या भाषायी लोगों से संप्रेषण उतना कारगर साबित नहीं हो पाता।

 

लिखित संप्रेषण (Written) – लिखित संप्रेषण (Written Communication) संप्रेषण का वह रूप है जिसमें सूचनाओं, संदेशों या विचारों को लिखित संकेतों, शब्दों या प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। यह संप्रेषण का एक औपचारिक और स्थायी माध्यम है। इसमें साधारणतः जब प्रेषक अपने विचारों को कागज पर लिखकर, टाइप करके या डिजिटल माध्यमों, जैसे- ईमेल या मैसेज के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाता है, तो उसे लिखित संप्रेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में भाषा की शुद्धता, व्याकरण और स्पष्टता का विशेष महत्त्व होता है क्योंकि वक्ता प्राप्तकर्ता के सामने मौजूद नहीं होता।

लिखित संप्रेषण के प्रमुख माध्यम

पत्र (Letters) – व्यक्तिगत या आधिकारिक संवाद का पारंपरिक तरीका।

ईमेल (Email) – आधुनिक समय का सबसे तेज और पेशेवर लिखित माध्यम।

रिपोर्ट (Reports) – किसी विशेष विषय पर विस्तृत जानकारी या डेटा साझा करने के लिए।

नोटिस और मेमो (Notice & Memo) – कार्यालयों में सूचना प्रसारित करने के लिए।

सोशल मीडिया और चैटिंग – व्हाट्सएप, टेलीग्राम आदि के माध्यम से संक्षिप्त संवाद।

दस्तावेज और नियमावली (Documents & Manuals) – स्थायी निर्देश और नियम।

 

लिखित संप्रेषण के लाभ

स्थायी रिकॉर्ड – लिखित संदेश को भविष्य के संदर्भ और कानूनी साक्ष्य (Evidence) के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।

सटीकता और विचारशीलता – लिखने से पहले प्रेषक को सोचने और सुधारने का अवसर मिलता है, जिससे गलतियों की संभावना कम होती है।

जटिल सूचनाओं के लिए उपयुक्त – लंबी और जटिल जानकारियों, जैसे – डेटा या तकनीकी निर्देश को लिखित रूप में बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है।

एकसमान संदेश – एक ही सूचना को कई लोगों तक बिना किसी परिवर्तन के पहुँचाया जा सकता है।

लिखित संप्रेषण की सीमाएँ

देरी से प्रतिक्रिया – फीडबैक मिलने में समय लगता है।

समय और श्रम – ड्राफ्ट तैयार करने और भेजने में अधिक समय लगता है।

गोपनीयता का जोखिम – लीक होने या गलत हाथों में पड़ने का खतरा रहता है।

विविधता – अलग-अलग प्राप्तकर्ताओं द्वारा अलग-अलग प्रतिक्रिया प्राप्त होना।

(ख) अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication)

अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication) संप्रेषण का वह रूप है जिसमें शब्दों (न तो मौखिक और न ही लिखित) का प्रयोग किए बिना सूचनाओं और भावनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। इसमें शरीर की भाषा, चेहरे के हाव-भाव, संकेतों और स्पर्श के माध्यम से संदेश पहुँचाया जाता है। विस्तृत रूप में हम कह सकते हैं कि अशाब्दिक संप्रेषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें संदेश भेजने वाला अपनी शारीरिक चेष्टाओं, आँखों के संपर्क, बैठने के तरीके (Postures) और आवाज़ के लहजे (Tone) का उपयोग करके अपनी बात कहता है। यह अक्सर शाब्दिक संप्रेषण का समर्थन करता है या कभी-कभी उसके बिना भी स्वतंत्र रूप से अर्थ व्यक्त करता है।

अशाब्दिक संप्रेषण के प्रमुख माध्यम

  1. शारीरिक हाव-भाव (Gestures)

सिर हिलाना: किसी बात पर सहमति जताने के लिए सिर को ऊपर-नीचे हिलाना या असहमति के लिए दाएँ-बाएँ हिलाना।

अँगूठा दिखाना (Thumbs Up): सफलता, ‘ऑल द बेस्ट’ या किसी काम के पूरा होने का संकेत देना।

हाथ हिलाना: दूर से किसी का अभिवादन (Hello/Bye) करने के लिए हाथ हिलाना।

  1. मुखमुद्रा (Facial Expressions)

मुस्कुराहट: खुशी, मित्रता या स्वागत का भाव प्रकट करना।

भौंहे सिकोड़ना: क्रोध, उलझन या असहमति व्यक्त करना।

आँखें फैलाना: आश्चर्य या डर का संकेत देना।

  1. नेत्र संपर्क (Eye Contact)

लगातार आँखें मिलाना: यह आत्मविश्वास और सच्चाई का प्रतीक है।

आँखें नीची करना: यह शर्म, पछतावा या सम्मान प्रकट करने का उदाहरण है।

आँख मारना: किसी गुप्त बात या मज़ाक का संकेत देना।

  1. शारीरिक मुद्रा (Postures)

सीधे खड़े होना: आत्मविश्वास और सतर्कता को दर्शाता है।

कंधे झुकाकर बैठना: थकान, उदासी या आत्मविश्वास की कमी का उदाहरण है।

सीने पर हाथ बाँधकर खड़ा होना: रक्षात्मक रवैया या किसी बात से असहमत होने का संकेत।

  1. स्पर्श (Touch/Haptics)

हाथ मिलाना: औपचारिक मुलाकात या समझौते का उदाहरण।

पीठ थपथपाना: शाबाशी या प्रोत्साहन देना।

कंधे पर हाथ रखना: सहानुभूति या ढाँढस बँधाने का उदाहरण।

  1. पहनावा और दिखावा (Appearance)

वर्दी (Uniform): एक पुलिसकर्मी या डॉक्टर की वर्दी बिना बोले उनके पद और कार्य को बता देती है।

गहरे रंग के कपड़े: शोक सभा में काले कपड़े पहनना उदासी का प्रतीक है।

  1. दृश्य संकेत (Visual Signs)

ट्रैफिक सिग्नल: लाल बत्ती का मतलब ‘रुकना’ और हरी बत्ती का मतलब ‘जाना’ है।

खतरे का निशान: खोपड़ी और दो हड्डियों वाला निशान बिजली या ज़हर के खतरे को दर्शाता है।

अशाब्दिक संप्रेषण के लाभ

पूरक की भूमिका – यह शाब्दिक संप्रेषण के प्रभाव को बढ़ाता है। जैसे—मुस्कुराते हुए ‘स्वागत है’ कहना शब्दों को अधिक प्रभावी बनाता है।

भावनाओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति – चेहरे के भाव और आँखों का संपर्क शब्दों की तुलना में भावनाएँ जैसे – गुस्सा, खुशी, डर आदि को अधिक सच्चाई से प्रकट करते हैं।

अनपढ़ व्यक्तियों के लिए उपयोगी – जो लोग पढ़-लिख नहीं सकते या भाषा नहीं समझते, वे संकेतों और चित्रों के माध्यम से बात समझ सकते हैं।

समय की बचत – कई बार केवल सिर हिलाकर या हाथ के इशारे से बात पूरी हो जाती है, जिसमें शब्दों की आवश्यकता नहीं पड़ती।

गोपनीयता – भीड़भाड़ वाली जगह पर बिना बोले संकेतों के जरिए गुप्त संदेश साझा किए जा सकते हैं।

 

अशाब्दिक संप्रेषण की सीमाएँ

अस्पष्टता (Ambiguity) – संकेतों का अर्थ अलग-अलग परिस्थितियों में अलग हो सकता है, जिससे भ्रम (Confusion) पैदा होने का डर रहता है।

सांस्कृतिक भिन्नता – एक देश में ‘थंब्स अप’ (अँगूठा दिखाना) सफलता का प्रतीक है, तो दूसरे देश में यह अपमानजनक माना जा सकता है।

लंबे संदेशों के लिए अनुपयुक्त – केवल संकेतों के माध्यम से जटिल विषय, तकनीकी जानकारी या लंबी कहानियाँ नहीं समझाई जा सकतीं।

नियंत्रण में कठिनाई – कई बार हम अनजाने में अपनी बॉडी लैंग्वेज से अपनी घबराहट या अरुचि प्रकट कर देते हैं, जिसे हम छिपाना चाहते हैं।

फीडबैक की कमी – अशाब्दिक संकेतों में कई बार यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि प्राप्तकर्ता ने संदेश को सही अर्थ में समझा है या नहीं।

 

  1. संबंधों/औपचारिकता के आधार पर (Based on Formality)

(क) औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication)

(ख) अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication)

(क) औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication)

यह नियमों और मर्यादाओं के भीतर होता है। यह पेशेवर होता है और अक्सर लिखित रूप में होता है, जैसे- ऑफिस की मीटिंग, आधिकारिक पत्र इत्यादि। इसके तीन मुख्य मार्ग हैं –

अधोमुखी (Downward) – उच्चाधिकारी से अधीनस्थ कर्मचारी की ओर (आदेश/निर्देश)।

उपरिमुखी (Upward) – कर्मचारी से अधिकारी की ओर (शिकायत/सुझाव)।

क्षैतिज/समतल (Horizontal) – समान पद वाले व्यक्तियों के बीच जैसे दो मैनेजरों के बीच चर्चा।

(ख) अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication)

यह बिना किसी नियम के होता है और सामाजिक संबंधों पर आधारित होता है। इसे अक्सर ‘ग्रेपवाइन’ (Grapevine) भी कहा जाता है, क्योंकि यह अंगूर की बेल की तरह किसी भी दिशा में फैल सकता है, जैसे – दोस्तों के बीच गपशप।

 

  1. संख्या के आधार पर (Based on Number of People)

अंतःवैयक्तिक (Intrapersonal) – खुद से बात करना (चिंतन, मनन या डायरी लिखना)।

अंतर-वैयक्तिक (Interpersonal) – दो व्यक्तियों के बीच संवाद।

समूह संप्रेषण (Group Communication) – एक छोटे समूह या टीम के बीच चर्चा।

जन संप्रेषण (Mass Communication) – एक बड़े जनसमूह तक सूचना पहुँचाना (जैसे न्यूज़, विज्ञापन या इंटरनेट)।

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