कुछ करके सीखिए
इन नाटकों के रचनाकार के चित्र नाम सहित बॉक्स चिपकाइए-
महाभोज – मन्नू भंडारी
अँधेर नगरी – भारतेंदु हरिश्चंद्र
असम की शान – डॉ. भूपेन हजारिका – सारांश
प्रस्तावना – एक बहुमुखी व्यक्तित्व
डॉ. भूपेन हजारिका दक्षिण एशिया के एक महान सांस्कृतिक दूत और विलक्षण कलाकार थे। वे केवल एक गायक ही नहीं, बल्कि एक कवि, संगीतकार, पत्रकार और बेहतरीन फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने अपनी कला और संगीत के माध्यम से न केवल असम को, बल्कि पूरे देश को मानवतावाद का संदेश दिया। उनके प्रसिद्ध गीत ‘मानुहे मानुहर बाबे’ ने दुनिया को मानवता की एक नई मिसाल दी।
बचपन और शिक्षा
डॉ. हजारिका का जन्म 8 सितंबर, 1926 को असम के सादिया में हुआ था। उनके पिता नीलकांत हजारिका एक शिक्षक थे। संगीत के प्रति उनका लगाव उनकी माँ शांतिप्रिय हजारिका के कारण हुआ, जिन्होंने उन्हें असमिया संगीत की शिक्षा दी।
प्रारंभिक शिक्षा – 13 वर्ष की उम्र में मैट्रिक पास कर वे गुवाहाटी आए और कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया।
उच्च शिक्षा – उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया और बाद में न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की डिग्री हासिल की।
सिनेमा और समाज परिवर्तन
डॉ. हजारिका के लिए सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का एक अस्त्र था। उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से मानव-प्रेम, एकता और स्वदेश-प्रेम का संदेश दिया।
प्रमुख फिल्में और योगदान –
- एरा बातर सुर (1956) – यह उनकी पहली फिल्म थी, जिसमें उन्होंने लता मंगेशकर से गाना गवाया था।
- माहुत बंधु रे (1958) – इस फिल्म में उन्होंने गोवालपारा जिले की लोक संस्कृति और भाषा को पहली बार फिल्मी पर्दे पर स्थान दिया। इसकी सराहना स्वयं पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
- शकुंतला (1961) – कालिदास रचित ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ पर आधारित इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
- प्रतिध्वनि (1964) – असमिया और खासी जनजाति के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई।
- लटिघटि (1966) – यह फिल्म सिनेमा जगत की व्यावसायिकता पर एक करारा व्यंग्य थी, जिसे राष्ट्रपति पुरस्कार मिला।
- रुदाली (1992) – इस फिल्म के संगीत को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली और इसे ऑस्कर के लिए मनोनीत किया गया।
पुरस्कार और सम्मान
भूपेन हजारिका की प्रतिभा को दुनिया भर में सराहा गया। उन्हें कला और संगीत के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए –
दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1992) – फिल्म जगत का सर्वोच्च सम्मान।
असम रत्न और संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (2009)।
पद्म भूषण (2011)।
भारत रत्न (2019) – मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
जीवन दर्शन और निष्कर्ष
डॉ. हजारिका एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने कभी भी अर्थ-प्राप्ति के लिए अपनी कला का सौदा नहीं किया। उनका लेखन और संगीत ‘स्वांत-सुखाय’ अर्थात् स्वयं के सुख और ‘लोकमंगल’ अर्थात् समाज का कल्याण के लिए था। 5 नवंबर, 2011 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार और गीत आज भी प्रत्येक असमिया और भारतीय के दिल में जीवित हैं। वे सच्चे अर्थों में मानवता के पुजारी और असम के गौरव थे।
मौखिक (बोध प्रश्न)
भूपेन हजारिका को दक्षिण एशिया में कौन-से दूतों में से एक माना जाता था?
उत्तर – डॉ. भूपेन हजारिका को दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता था।
भूपेन हजारिका ने अपनी पीएच.डी. की डिग्री कहाँ से हासिल की?
उत्तर – उन्होंने अपनी पीएच.डी. की डिग्री न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से हासिल की।
मौखिक (बोध प्रश्न)
भूपेन हजारिका की पहली फ़िल्म का नाम क्या था?
उत्तर – उनकी पहली फ़िल्म का नाम ‘एरा बातर सुर’ (1956) था।
किस फ़िल्म के लिए भूपेन हजारिका को सन् 1966 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
उत्तर – उन्हें ‘लटिघटि’ फ़िल्म के लिए सन् 1966 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
‘लटिघटि’ फ़िल्म किस आधार पर बनी थी?
उत्तर – ‘लटिघटि’ फ़िल्म चलचित्र जगत की व्यावसायिक दुनिया के आधार पर बनी थी, जिसमें उस क्षेत्र के दिखावे और व्यापार पर करारा व्यंग्य किया गया था।
मौखिक (बोध प्रश्न)
फ़िल्म जगत का सबसे बड़ा पुरस्कार कौन-सा है?
उत्तर – फ़िल्म जगत का सबसे बड़ा पुरस्कार ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार है।
डॉ. भूपेन हजारिका को भारत का कौन-सा सर्वोच्च सम्मान मरणोपरांत दिया गया था?
उत्तर – उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ मरणोपरांत, वर्ष 2019 में दिया गया था।
शब्दार्थ (Word Meaning)
1 – विलक्षण – अद्भुत / असाधारण – Extraordinary / Unique
2 – सांस्कृतिक – संस्कृति से संबंधित – Cultural
3 – दूत – संदेशवाहक – Messenger / Envoy
4 – शख्सियत – व्यक्तित्व – Personality
5 – मोहित – आकर्षित – Enchanted / Mesmerized
6 – ज़िक्र – चर्चा / उल्लेख – Mention
7 – मिसाल – उदाहरण – Example / Precedent
8 – मानवतावाद – मनुष्यता का भाव – Humanism
9 – लगाव – प्रेम / जुड़ाव – Attachment / Affection
10 – जनम-घुट्टी – बचपन के संस्कार – Early life values / First lesson
11 – बहुमुखी – अनेक प्रतिभा वाला – Versatile
12 – गद्य – गद्य साहित्य (कहानी/लेख) – Prose
13 – हुनर – कौशल / कला – Skill / Talent
14 – समन्वय – तालमेल – Coordination / Harmony
15 – उद्देश्य – लक्ष्य – Objective / Purpose
16 – अस्त्र – हथियार – Weapon
17 – जौहरी – रत्नों की परख करने वाला – Jeweler / Connoisseur
18 – परख – जाँच / पहचान – Testing / Appraisal
19 – चुनिंदा – चुने हुए – Selected / Chosen
20 – फ़नकार – कलाकार – Artist
21 – कोकिल कंठी – कोयल जैसी आवाज़ वाली – Sweet-voiced (like a cuckoo)
22 – पूर्वार्ध – समय का पहला भाग – First half
23 – श्रेय – यश / प्रशंसा – Credit
24 – प्रांत – राज्य / क्षेत्र – Province / State
25 – अभूतपूर्व – जो पहले न हुआ हो – Unprecedented
26 – मनोरम – मन को लुभाने वाला – Captivating / Scenic
27 – उत्साह – जोश – Enthusiasm / Zeal
28 – लोकप्रिय – जो सबको पसंद हो – Popular
29 – व्यावसायिक – व्यापार से संबंधित – Commercial
30 – व्यंग्य – ताना / कटाक्ष – Satire / Sarcasm
31 – क्षेत्रीय – क्षेत्र विशेष का – Regional
32 – परिचालित – संचालित / निर्देशित – Directed / Operated
33 – पर्याय – विकल्प / समान – Synonym / Category
34 – मनोनीत – नामांकित – Nominated
35 – सम्मानित – आदर प्राप्त – Honored
36 – आभारी – कृतज्ञ – Grateful / Obliged
37 – प्रलोभन – लालच – Temptation / Allurement
38 – अटल – जो डगमगाए नहीं – Firm / Resolute
39 – स्वांत-सुखाय – स्वयं के सुख के लिए – For self-satisfaction
40 – लोकमंगल – जनता का कल्याण – Public welfare
41 – अर्थ-प्राप्ति – धन कमाना – Accumulation of wealth
42 – लोभ – लालच – Greed
43 – मरणोपरांत – मृत्यु के बाद – Posthumously
44 – बुलंद – ऊँचा – Grand / High
45 – जज्बा – भावना / जोश – Passion / Spirit
46 – सँजोकर – संभालकर – Cherished / Kept safely
47 – अंजाम – नतीजा / पूरा करना – Result / Execution
48 – विलक्षण – सबसे अलग – Unique
49 – दर्शन – देखना / विचार – View / Vision
50 – प्रतिष्ठा – सम्मान – Reputation / Prestige
51 – अविस्मरणीय – जो भुलाया न जा सके – Unforgettable
52 – श्रोता – सुनने वाला – Listener / Audience
लिखित
- एक वाक्य में उत्तर लिखिए-
क. डॉ. भूपेन हजारिका विलक्षण कलाकार क्यों कहलाते थे?
उत्तर – वे विलक्षण कलाकार इसलिए कहलाते थे क्योंकि वे अपने गीत खुद लिखते थे, उन्हें संगीतबद्ध करते थे और स्वयं गाते भी थे।
ख. भूपेन हजारिका का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर – भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर, 1926 को ऊपरी असम के सादिया में हुआ था।
ग. उम्दा गायक होने के साथ-साथ भूपेन हजारिका और क्या करते थे?
उत्तर – उम्दा गायक होने के साथ-साथ वे गीतकार, संगीतकार, पत्रकार और बेहतरीन फिल्म निर्माता भी थे।
घ. असमिया के अतिरिक्त डॉ. भूपेन हजारिका ने किस भाषा में काम किया है?
उत्तर – असमिया के अतिरिक्त उन्होंने हिंदी और बांग्ला भाषा में भी काम किया है।
ङ. कौन-सी असमिया फ़िल्म में डॉ. हजारिका ने संस्कृत के महान कवि कालिदास रचित ‘अभिज्ञान शाकुंतलम‘ को आधार बनाया?
उत्तर – सन् 1961 में उन्होंने ‘शकुंतला’ फिल्म में कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ को आधार बनाया।
च. असमिया और खासी जनजाति के लोगों में समन्वय और एकता स्थापित करने के लिए कौन-सी फ़िल्म बनाई थी?
उत्तर – सन् 1964 में उन्होंने ‘प्रतिध्वनि’ फिल्म बनाई थी।
छ. डॉ. भूपेन हजारिका ने अपने चलचित्रों के माध्यम से क्या संदेश दिया है?
उत्तर – उन्होंने अपने चलचित्रों के माध्यम से समन्वय, मानव-प्रेम और स्वदेश-प्रेम का संदेश दिया है।
- विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
क. दक्षिण एशिया में डॉ. भूपेन हजारिका किस कार्य के लिए प्रसिद्ध थे और उन्होंने किन क्षेत्रों में कार्य किया?
उत्तर – डॉ. भूपेन हजारिका दक्षिण एशिया में सांस्कृतिक दूत के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण और संगीत निर्देशन के क्षेत्रों में कार्य किया।
ख. डॉ. भूपेन हजारिका गायन में किससे प्रभावित थे और उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत की शिक्षा किसने दी?
उत्तर – वे गायन में अपने पिता नीलकांत हजारिका और माँ शांतिप्रिय हजारिका से प्रभावित थे। उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत की शिक्षा उनकी माताजी ने ‘जनम-घुट्टी’ के रूप में दी थी।
ग. डॉ. भूपेन हजारिका को बहुमुखी प्रतिभा का धनी क्यों कहा जाता था?
उत्तर – उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का धनी इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे एक ही साथ गायक, लेखक, संगीत निर्देशक, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने गद्य साहित्य और सिनेमा, दोनों में महारत हासिल की थी।
घ. भूपेन हजारिका ने भाषा व संस्कृति के आधार पर कौन-सी फ़िल्म बनाकर एक नई हलचल पैदा कर दी थी? इसका क्या कारण था?
उत्तर – सन् 1958 में उन्होंने ‘माहुत बंधु रे’ फिल्म बनाकर हलचल पैदा की। इसका कारण यह था कि इसमें उन्होंने गोवालपारा की भाषा और संस्कृति को स्थान दिया, जिसे बंगाल और असम दोनों ने अपनाने से इनकार कर दिया था।
ङ डॉ. भूपेन हजारिका ने किस प्रकार अपने जीवन का लक्ष्य हासिल किया? विस्तार से लिखिए।
उत्तर – उन्होंने अपने मजबूत इरादों और बुलंद हौसले के दम पर लक्ष्य हासिल किया। जीवन में कई आकर्षक प्रलोभन मिलने के बावजूद उनका इरादा नहीं डगमगाया। वे ‘स्वांत-सुखाय’ और ‘लोकमंगल’ की भावना से प्रेरित होकर कार्य करते रहे।
- पाठांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
डॉ. हजारिका बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे जो अपनी कला के माध्यम से जीवन का रंग बिखेरते थे। संगीत के अतिरिक्त गद्य साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में भी उन्होंने अपने हुनर का अच्छा प्रदर्शन किया। असमिया के अतिरिक्त हिंदी, बांग्ला आदि भाषा में भी उन्होंने काम किया है। डॉ. हजारिका उम्दा गायक होने के साथ ही बेहतरीन चलचित्र निर्माता भी रहे हैं। उन्होंने अपने चलचित्रों के माध्यम से समन्वय, मानव-प्रेम, स्वदेश-प्रेम आदि का संदेश दिया है। दर्शकों का हलका मनोरंजन कभी उनका उद्देश्य न था। चलचित्र निर्माण के साथ ही उन्होंने अनेक भाषाओं के सिनेमाओं में संगीत निर्देशन का काम भी किया था।
क. किसने संगीत के अतिरिक्त साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में अपना हुनर दिखाया?
उत्तर – डॉ. भूपेन हजारिका संगीत के अतिरिक्त साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में अपना हुनर दिखाया।
ख. मनोरंजन के माध्यम से डॉ. हजारिका का उद्देश्य क्या था?
उत्तर – मनोरंजन कभी उनका मुख्य उद्देश्य नहीं था; उनका उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से समाज परिवर्तन और समन्वय स्थापित करना था।
ग. चलचित्र निर्माण के साथ ही उन्होंने और क्या कार्य किया?
उत्तर – चलचित्र निर्माण के साथ ही उन्होंने अनेक भाषाओं के सिनेमाओं में संगीत निर्देशन का कार्य भी किया।
- सही विकल्प चुनिए-
क. ‘मानुहे मानुहर बाबे’ (मानव, मानव के लिए) ________ की एक नई मिसाल कायम गाकर की है।
संस्कृति
संगीत
देशभक्ति
मानवता
ख. चलचित्र निर्माता होने के बाद भी दर्शकों का ________ कभी उनका उद्देश्य न था।
हलका मनोरंजन
विकास
उत्थान
स्वदेश-प्रेम
भाषा-बोध (Language Skills)
- दिए गए रिक्त स्थानों में सही समुच्चयबोधक शब्द लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-
और, इसलिए, बल्कि, तो, क्योंकि
क. वे ऐसे शख्सियत थे जिन्होंने अपने संगीत से केवल असम को ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश को मोहित किया था।
ख. डॉ. भूपेन हजारिका हीरा थे इसलिए सिनेमा जगत में वे एक जौहरी की भूमिका निभाते हुए नज़र आते हैं।
ग. उन्हें ‘असम रत्न और ‘संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया गया।
घ. मैं स्कूल जाता तो मेरा भी कायापलट हो जाता।
ङ. डॉ. हजारिका को पारंपरिक असमिया संगीत से लगाव था क्योंकि उनकी माताजी ने यह शिक्षा जनम घुट्टी के रूप में दी थी।
- नीचे लिखे सामासिक शब्दों का विग्रह कीजिए-
सुबह-शाम – सुबह और शाम
पढ़ना-लिखना – पढ़ना और लिखना
स्वदेश-प्रेम – स्वदेश के लिए प्रेम
संगीत-निर्देशन – संगीत का निर्देशन
भाषा-संस्कृति – भाषा और संस्कृति
चलचित्र जगत – चलचित्र का जगत
अर्थ-प्राप्ति – अर्थ की प्राप्ति
मानव-प्रेम – मानव से प्रेम
- संयुक्त व्यंजनों की रचना समझकर शब्द बनाइए-
क् + ष = क्ष – विलक्षण, क्षेत्र, क्षत्रिय, क्षमा
त् + र = त्र – पत्रकारिता, त्रिशूल, त्रिकोण, नक्षत्र
ज् + ञ = ज्ञ – अभिज्ञान, ज्ञान, जिज्ञासु, कृतज्ञ
श् + र = श्र – श्रेष्ठतम, श्रम, विश्राम, श्रीमान
- विपरीतार्थक शब्द लिखिए- (Word Power)
श्रेष्ठ X अधम
बेहतरीन X बदतरीन/घटिया
पूर्वार्ध X उत्तरार्ध
आधार X निराधार
संपूर्ण X अपूर्ण / अधूरा
साहसी X कायर
सफलता X असफलता
प्रथम X अंतिम
- निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए- (Word Power)
श्रेष्ठतम – उत्तम, उत्कृष्ट
सर्वोच्च – उच्चतम, सबसे ऊँचा
प्रलोभन – लालच, लोभ
मशहूर – प्रसिद्ध, विख्यात
प्रबल – शक्तिशाली, तीव्र
दुनिया – जगत, संसार
- दिए गए अनुच्छेद में उचित विराम-चिह्न लगाइए-
सन 1956 में भूपेन हजारिका ने अपनी पहली फ़िल्म की थी जिसका नाम था एरा बातर सुर उन्होंने इस कार्य को बड़े सुंदर और सफल रूप में पूरा किया था डॉ. हरिचरण दास ने हजारिका के व्यक्तित्व के प्रबल पक्ष को उभारते हुए कहा उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम न था यह था समाज परिवर्तन का माध्यम उनके गीत थे समाज परिवर्तन का अस्त्र
सन् 1956 में भूपेन हजारिका ने अपनी पहली फ़िल्म की थी, जिसका नाम था— ‘एरा बातर सुर’। उन्होंने इस कार्य को बड़े सुंदर और सफल रूप में पूरा किया था। डॉ. हरिचरण दास ने हजारिका के व्यक्तित्व के प्रबल पक्ष को उभारते हुए कहा है, “उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम न था, यह था समाज परिवर्तन का माध्यम। उनके गीत थे समाज परिवर्तन का अस्त्र।”
जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)
मानव प्रेम और स्वदेश प्रेम दोनों ही मूल्यवान और सार्थक भावनाएँ हैं जो हमारे जीवन में न सिर्फ़ समृद्धि बढ़ाती हैं, बल्कि हमें समझाती हैं कि हमें दूसरों का सम्मान करना, सहायता करना, और समर्थ बनना क्यों महत्त्वपूर्ण है।
उत्तर – मानव प्रेम हमें संवेदनशीलता और दूसरों की सहायता करना सिखाता है, जिससे समाज में एकता आती है। वहीं, स्वदेश प्रेम हमें अपनी जड़ों से जोड़कर देश के प्रति जिम्मेदार बनाता है। ये भावनाएँ न केवल हमारे व्यक्तित्व को समृद्ध करती हैं, बल्कि हमें एक समर्थ और सम्मानित नागरिक बनने की प्रेरणा भी देती हैं। इनके समन्वय से ही हम स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र का कल्याण सुनिश्चित कर सकते हैं।
रचनात्मक गतिविधियाँ
अपने मुख से (Oral Expression)
इंटरनेट की सहायता से दादा साहब फाल्के के विषय में जानकारी प्राप्त करके कक्षा में बताइए।
धुंडीराज गोविंद फाल्के, जिन्हें दादा साहब फाल्के कहा जाता है, ‘भारतीय सिनेमा के पितामह’ हैं। उन्होंने 1913 में भारत की पहली पूर्णकालिक मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में लगभग 95 फिल्में और 26 लघु फिल्में बनाईं। उनके सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ शुरू किया, जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
अपनी कलम से (Creative Writing)
आपके विद्यालय में प्रधानाचार्य के नेतृत्व में आयोजित किए गए एक समारोह की रिपोर्ट लिखिए। इसमें समारोह के उद्देश्य, उसमें शामिल किए गए कला और साहित्य के कार्यक्रम और छात्र-छात्राओं की भावुक प्रतिक्रिया भी शामिल कीजिए।
समारोह की रिपोर्ट
दिनांक – 15 मार्च, 2026
स्थान – विद्या मंदिर ऑडिटोरियम
हमारे सेंट मेरी विद्यालय, बड़बिल, में प्रधानाचार्य जी के नेतृत्व में ‘सांस्कृतिक संगम’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य छात्रों में कला और साहित्य के प्रति रुचि जगाना था। कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी, शास्त्रीय नृत्य और ‘अंधेर नगरी’ नाटक का मंचन किया गया, जिसने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहित्यिक चर्चाओं और कलात्मक प्रस्तुतियों ने वातावरण को प्रेरणादायक बना दिया। अंत में, छात्रों की भावुक प्रतिक्रिया देखने को मिली; कई विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार अनुभव बताया। प्रधानाचार्य जी के प्रेरक संबोधन के साथ समारोह का सफल समापन हुआ।
अपनी कल्पना से (From my Imagination)
विश्व की सबसे अद्भुत चित्रकारी प्रदर्शनी का वर्णन कीजिए जो आपके सपनों की दुनिया को जीवंत करती है।
मेरे सपनों की अद्भुत चित्रकारी प्रदर्शनी एक ऐसी जगह है जहाँ कैनवस की सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं। यहाँ दीवारों पर बने ऊँचे पहाड़ असल में ठंडी हवा का एहसास कराते हैं और नीली झीलों के रंगों से पानी की कल-कल सुनाई देती है। इस प्रदर्शनी में ‘कल्पना और वास्तविकता’ का मिलन होता है। हर चित्र एक अलग दुनिया का द्वार है, जहाँ रंग आपस में बातें करते हैं और भावनाएँ जीवंत होकर दर्शकों के मन को सुकून से भर देती हैं।
परियोजना कार्य
(Project Work)
अपने आस-पास के गरीब इलाके में भ्रमण कीजिए। वहाँ के लोगों का रहन-सहन, शिक्षा की स्थिति और स्वच्छता, रोज़गार के अवसरों आदि पर जानकारी लेकर एक प्रस्तुति / प्रेजेंटेशन तैयार कर कक्षा में दिखाइए।
उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर करें।

