कुछ करके सीखिए
शब्द सीढ़ी बनाइए-
दोस्त – तीन – नल – लगाम – मशहूर
दावत – तसवीर – रमेश – शलगम – मर्जी
दावत की अदावत – सारांश
अन्नपूर्णानंद वर्मा द्वारा रचित कहानी ‘दावत की अदावत’ एक हास्य प्रधान कहानी है, जो मित्रों के बीच होने वाली शरारतों और ‘जैसे को तैसा’ (Tit for Tat) के सिद्धांत पर आधारित है।
- लेखक की दुर्दशा और मित्रों का धोखा
कहानी की शुरुआत लेखक की एक कठिन यात्रा से होती है। लेखक के मित्रों मुरारी, मुरली और माधो ने उन्हें एक बाग में दावत के लिए बुलाया था। मित्रों ने कहा था कि सड़क पक्की है, लेकिन हकीकत में सड़क पर एक-एक फुट धूल जमी थी। लेखक धूल में लथपथ होकर, भूख और प्यास से बेहाल पाँच मील साइकिल चलाकर बाग पहुँचे।
- बाग में सन्नाटा और पुरानी यादें
जब लेखक बाग पहुँचे, तो वहाँ कोई नहीं था। माली से पूछने पर पता चला कि वहाँ कोई नहीं आया है। लेखक समझ गए कि उनके मित्रों ने उन्हें तीसरी बार बेवकूफ़ बनाया है। इससे पहले भी वे लेखक को गंगा में भाँग पिलाकर सोता छोड़ चुके थे और एक बार घर पर खाना बनाने का झूठा नाटक करके भूखा लौटा चुके थे। लेखक गुस्से में घर लौटे और उनके मन में शरारतों का मुख्य सूत्रधार मुरारी के प्रति बहुत क्रोध था।
- ‘दावत‘ का नया जाल
तीन दिन बाद मित्र मंडली लेखक के घर आई और उनका मज़ाक उड़ाने लगी। लेखक ने अपना गुस्सा पी लिया और बदला लेने की योजना बनाई। उन्होंने मित्रों से कहा कि वे उन्हें शहर से दूर एक स्टेशन राहुलगंज पर दावत देंगे, जहाँ उनके मित्र पंडित नेकीराम स्टेशन मास्टर हैं। मित्र इस बात पर राजी हो गए और अगले दिन शाम को सब राहुलगंज पहुँच गए।
- पानी की टंकी पर महफ़िल
राहुलगंज पहुँचकर लेखक ने मित्रों को रात की दावत के लिए एक 20 फुट ऊँची पानी की टंकी पर बैठने का सुझाव दिया। उन्होंने तर्क दिया कि चाँदनी रात में ऊँचाई पर ठंडी हवा का आनंद आएगा। लोहे की सीढ़ी के सहारे चारों मित्र टंकी पर चढ़ गए। लेखक ने वहाँ दरी बिछवा दी और पीने के लिए पानी का एक घड़ा भी रखवा दिया।
- लेखक का प्रतिशोध अर्थात् अदावत
जब रात के नौ बजे और दोस्तों ने खाने की माँग की, तो लेखक नीचे उतरे। उन्होंने स्टेशन मास्टर के नौकर की मदद से लोहे की सीढ़ी हटाकर नीचे गिरा दी। अब मित्र ऊपर कैद हो गए और नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं बचा। लेखक ने नीचे बैठकर मजे से कचौड़ियाँ और रबड़ी खाई, जबकि उनके मित्र ऊपर से भूख और गुस्से में उन्हें देख रहे थे। लेखक ने उन्हें चिढ़ाते हुए कहा कि वे ऊपर से प्रकृति और चाँदनी का आनंद लें और आयुर्वेद के अनुसार खाली पेट ठंडा पानी पीकर रात काटें।
- परिणाम और अंत
लेखक ने जाने से पहले मित्रों को डराया कि यदि उन्होंने शोर मचाया तो पुलिस उन्हें पकड़ लेगी। लेखक रात की 3 -30 बजे वाली गाड़ी से स्टेशन मास्टर के साथ वापस शहर आ गए। उन्होंने स्टेशन मास्टर से कह दिया था कि सुबह 6 -00 बजे की गाड़ी के समय ही उन लोगों को सीढ़ी लगाकर उतारा जाए।
अंत में, लेखक कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले क्योंकि उनके मित्र अपना हाथ मलते हुए बदला लेने की ताक में उनके घर के चक्कर काट रहे थे।
कहानी का संदेश –
यह कहानी हास्य के माध्यम से यह बताती है कि मित्रों के बीच हँसी-मज़ाक की एक सीमा होनी चाहिए। यदि आप किसी को बार-बार परेशान करते हैं, तो कभी न कभी वह भी आपसे बदला ले सकता है।
मुख्य पात्र –
लेखक – कहानी का मुख्य पात्र जो बदला लेता है।
मुरारी – शरारतों की योजना बनाने वाला मुख्य मित्र।
पंडित नेकीराम – राहुलगंज का स्टेशन मास्टर।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न – बगीचे तक पहुँचने में लेखक को क्या परेशानी हुई?
उत्तर – बगीचे तक पहुँचने में लेखक को धूल भरी ‘पक्की’ सड़क का सामना करना पड़ा। सड़क पर एक-एक फुट धूल की परत जमी थी, जिसके कारण पाँच मील का रास्ता रेगिस्तान जैसा लग रहा था। लेखक धूल से लथपथ हो गए और बुरी तरह थक गए थे।
प्रश्न 2 – मित्र-मंडली ने लेखक को कहाँ बुलाया?
उत्तर – मित्र-मंडली ने लेखक को शहर से दूर एक बाग में दावत के लिए बुलाया था।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न – लेखक ने अपने मित्रों के बारे में किससे पूछा?
उत्तर – लेखक ने अपने मित्रों के बारे में बाग में काम कर रहे एक माली से पूछा।
प्रश्न – लेखक को मुरारी पर ही क्रोध क्यों आ रहा था?
उत्तर – लेखक को मुरारी पर ही क्रोध इसलिए आ रहा था क्योंकि वही ऐसी शरारतों का आविष्कारक और सूत्रधार (Mastermind) होता था। वह हमेशा लेखक को बेवकूफ बनाने की योजनाएँ बनाता था।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न – मुरारी ने लेखक को परेशान करने का क्या कारण बताया?
उत्तर – मुरारी ने हँसते हुए बताया कि जब तक लेखक उन्हें एक शानदार दावत नहीं दे देते, तब तक वे उन्हें इसी तरह बेवकूफ बनाकर छकाते रहेंगे।
प्रश्न – लेखक ने अपने मित्रों को कहाँ चलने का आग्रह किया?
उत्तर – लेखक ने अपने मित्रों को राहुलगंज चलने का आग्रह किया, जहाँ उनके मित्र पंडित नेकीराम स्टेशन मास्टर थे।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न – मित्रों की बैठक के लिए लेखक ने क्या राय दी?
उत्तर – लेखक ने राय दी कि वे सब स्टेशन के पास स्थित लोहे की ऊँची पानी की टंकी पर चढ़कर बैठें, ताकि चाँदनी रात और ठंडी हवा का आनंद लिया जा सके।
प्रश्न – टंकी पर पानी का घड़ा रखने के बाद नौकर ने क्या किया?
उत्तर – टंकी पर पानी का घड़ा रखने के बाद नौकर ने लेखक की मदद से लोहे की सीढ़ी खिसकाकर नीचे गिरा दी, जिससे मित्र ऊपर ही कैद हो गए।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न – लेखक ने चार जोड़ी आँखों की तुलना किससे की?
उत्तर – लेखक ने ऊपर टंकी से उन्हें घूर रहे मित्रों की चार जोड़ी आँखों की तुलना अँधेरे में चमकती बिल्ली की आँखों से की, जो गुस्से में आग फेंक रही थीं।
प्रश्न – लेखक सुबह कितने बजे रवाना हुए?
उत्तर – लेखक सुबह साढ़े तीन बजे की गाड़ी से रवाना हुए।
शब्दार्थ (Word Meaning)
- अदावत – दुश्मनी / बैर, Enmity / Grudge
- बारीक – महीन, Fine / Thin
- बाजी मारना – जीत जाना, To win / To excel
- गढ़ना – बनाना / निर्माण, To mould / Create
- पुतला – ढांचा, Effigy / Dummy
- पग-पग पर – हर कदम पर, At every step
- फाँकना – चूर्ण की तरह खाना, To swallow powder
- पगडंडी – संकरा रास्ता, Footpath / Trail
- फाटक – बड़ा दरवाज़ा, Gate
- पस्त होना – बुरी तरह थकना, Exhausted
- वैतरणी – कष्टदायक नदी, A mythological river of hell
- प्रतीत होना – लगना / महसूस होना, To appear / Seem
- पींग मारना – झूले की तरह झूलना, To swing high
- बाटियाँ – राजस्थानी पकवान, Traditional wheat balls
- तर करना – भिगोना, To soak / Drench
- दाखिल – प्रवेश, Entry
- बारहदरी – खंभों वाला बरामदा, Pavilion with 12 doors
- चांडाल चौकड़ी – दुष्टों की टोली, Gang of mischievous friends
- लताड़ना – डाँटना, To scold / Rebuke
- छान डालना – पूरी तरह खोजना, To search thoroughly
- गन्ध – महक, Smell / Scent
- मामला – बात / घटना, Issue / Matter
- मुरारी – एक नाम (कृष्ण का), A proper name
- इकहरा बदन – दुबला-पतला शरीर, Lean body / Slim build
- मस्सा – त्वचा पर दाना, Mole / Wart
- झुँझलाना – चिढ़ना, To get irritated
- बेवकूफ़ – मूर्ख, Fool
- भाँग – नशीला पौधा, Hemp / Cannabis
- तवा – रोटी पकाने का पात्र, Griddle
- छींटे – पानी की बूँदें, Splashes
- झींकना – पछताना / रोना, To complain / Whine
- कोसों दूर – बहुत दूर, Miles away
- शरारत – बदमाशी, Mischief
- आविष्कारक – खोजने वाला, Inventor
- सूत्रधार – योजना बनाने वाला, Mastermind / Coordinator
- भेंट – मुलाकात, Meeting
- खून का प्यासा – जान का दुश्मन, Bloodthirsty
- बनैला सूअर – जंगली सूअर, Wild boar
- लिहाज़ – सम्मान / लिहाज, Respect / Regard
- बसेरा – ठहरना, Shelter / Stay
- मंजूर – स्वीकार, Approved / Accepted
- प्रार्थना – विनती, Request / Prayer
- पारा चढ़ना – गुस्सा आना, To get angry
- छकाना – तंग करना, To harass / Trick
- तलछट – नीचे जमी गंदगी, Sediment / Scum
- रमणीक – सुंदर, Picturesque / Scenic
- प्रबंध – इंतज़ाम, Arrangement
- रवाना – प्रस्थान, Depart
- घबराना – परेशान होना, To get nervous
- बहस – तर्क-वितर्क, Argument / Debate
- आसन – बैठने की जगह, Seat / Sitting posture
- जगत – कुएँ का चबूतरा, Platform around a well
- नवीनता – नयापन, Novelty
- समीप – पास, Near
- झुरमुट – झाड़ियों का समूह, Thicket / Cluster of trees
- तरी – नमी / शीतलता, Dampness / Coolness
- धमकना – आ पहुँचना, To arrive suddenly
- खिसकाना – धीरे से सरकाना, To slide / Shift
- प्रतीक्षा – इंतज़ार, Waiting
- गायब – लुप्त, Vanished / Disappeared
- क्रांति – भारी बदलाव / हलचल, Revolution / Turmoil
- खेद – अफ़सोस, Regret / Sorrow
- उच्च – ऊँचा, High / Elevated
- भाग्य – किस्मत, Fortune / Luck
- बयार – ठंडी हवा, Breeze
- निर्मल – साफ़, Pure / Clear
- निरभ्र – बिना बादल का, Cloudless
- वितान – शामियाना / तंबू, Canopy / Spread
- प्रसार – फैलाव, Expansion / Spread
- मनोरम – मन को लुभाने वाला, Charming / Scenic
- लाजवाब – बेमिसाल, Excellent / Matchless
- कराहना – दर्द से चिल्लाना, To groan / Moan
- निगाह – नज़र, Sight / Gaze
- संहारक – विनाशक, Destroyer
- आग फेंकना – बहुत गुस्सा होना, To glare angrily
- त्रिदोषनाशक – बीमारी मिटाने वाला, Curative of three humours
- इजाज़त – अनुमति, Permission
- ऊधम – शोर-शराबा, Ruckus / Mischief
- मरणोपरांत – मृत्यु के बाद (संदर्भ), Posthumously (Word context)
- हाथ मलना – पछताना, To regret / Wring hands
लिखित
- एक वाक्य में उत्तर लिखिए-
क. लेखक के दोस्तों ने क्या झूठ बोला था?
उत्तर – दोस्तों ने लेखक से झूठ बोला था कि बाग तक जाने वाली सड़क ‘पक्की’ है और आराम से साइकिल पर चले आना।
ख. बाग में कौन था?
उत्तर – बाग में कोई भी दोस्त नहीं था, वहाँ केवल एक माली काम कर रहा था।
ग. पहली बार लेखक को मित्रों द्वारा कैसे बेवकूफ़ बनाया गया था?
उत्तर – पहली बार मित्रों ने गंगा में नाव पर दावत के बहाने बुलाकर लेखक को भाँग पिला दी थी और सोता हुआ छोड़कर भाग गए थे।
घ. पंडित नेकीराम कौन थे?
उत्तर – पंडित नेकीराम राहुलगंज रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर थे और लेखक के मित्र थे।
ङ. क्या आपके भी ऐसे ही दोस्त हैं?
उत्तर – जी हाँ, मेरे भी कुछ शरारती दोस्त हैं जो कभी-कभी मज़ाक करते हैं।
- विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
क. इस कहानी का नाम ‘दावत की अदावत‘ क्यों रखा गया है?
उत्तर – ‘दावत’ का अर्थ है भोज और ‘अदावत’ का अर्थ है दुश्मनी या बदला। लेखक के मित्रों ने दावत के नाम पर उनसे कई बार शरारत की थी। अंत में लेखक ने भी दावत देने के बहाने मित्रों को पानी की टंकी पर फँसाकर उनसे अपनी ‘अदावत’ पूरी की, इसलिए यह शीर्षक सार्थक है।
ख. बाग में पहुँचकर लेखक क्या कल्पना करने लगा?
उत्तर – लेखक कल्पना करने लगा कि मित्र बारहदरी में उसका इंतज़ार कर रहे होंगे, उन्होंने घी में तर की हुई बाटियाँ और रसोई तैयार कर ली होगी।
ग. लेखक ने अपने मित्रों को कहाँ बैठने की सलाह दी और क्यों दी?
उत्तर – लेखक ने मित्रों को लोहे की ऊँची पानी की टंकी पर बैठने की सलाह दी। उन्होंने तर्क दिया कि वहाँ से चाँदनी रात का दृश्य मनोरम दिखेगा और चारों ओर से शीतल हवा आएगी।
घ. लेखक ने अपने दुष्ट मित्रों से किस तरह बदला लिया?
उत्तर – लेखक ने मित्रों को दावत के बहाने पानी की टंकी पर चढ़ा दिया और फिर चुपके से सीढ़ी हटा दी। मित्र ऊपर ही कैद हो गए और लेखक ने नीचे बैठकर मजे से पकवान खाए और उन्हें भूखा छोड़ दिया।
ङ. आशय स्पष्ट कीजिए-
- इस समय मैं बनैले सूअर से भी ज़्यादा खतरनाक हो रहा था।
उत्तर – लेखक मित्रों द्वारा तीसरी बार बेवकूफ़ बनाए जाने पर अत्यंत क्रोधित था और बदला लेने के लिए आतुर था।
- मेरी पत्नी तुम लोगों को समाज की तलछट समझती है।
उत्तर – लेखक अपने मित्रों की बुरी आदतों और शरारतों के कारण उन्हें निम्न स्तर का (समाज की गंदगी) बता रहा था।
iii. बड़े भाग्य से ऐसा उच्च स्थान प्राप्त होता है।
उत्तर – लेखक ऊपर फँसे मित्रों पर व्यंग्य कर रहा था कि इतनी ऊँचाई और एकांत स्थान नसीब वालों को मिलता है।
- पाठांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
इधर मुरारी और मोहन में बहस हो रही थी कि आसन कहाँ जमाया जाए? मुरारी प्लेटफ़ॉर्म पर ही दर बिछाकर बैठना चाहता था। मोहन की राय थी कि सामने कुएँ की जगत पर बैठक जमे। पर मैंने जो राय द वह अपनी नवीनता के कारण सबको पसंद आई। स्टेशन के बिलकुल समीप और रेल की पटरियों से कुछ दूरी पर पानी की टंकी थी। ज़मीन से करीब 20 फुट की ऊँचाई पर यह लोहे के खंभों के ऊपर बिठा हुई थी। चढ़ने के लिए साथ में लोहे की पतली सीढ़ी रखी थी। टंकी ऊपर से ढकी हुई थी। मैंने कहा कि क्यों न इस टंकी पर चढ़कर बैठा जाए। चाँदनी रात में बड़ा मज़ा रहेगा।
क. मुरारी और मोहन में क्या बहस हो रही थी?
उत्तर – मुरारी और मोहन में बहस बैठने के लिए आसन जमाने को लेकर हो रही थी।
ख. मोहन की राय क्या थी?
उत्तर – मोहन की राय थी कि सामने कुएँ की जगत पर बैठक जमाई जाए।
ग. पानी की टंकी कहाँ थी?
उत्तर – पानी की टंकी स्टेशन के समीप और रेल की पटरियों से कुछ दूरी पर थी।
घ. लेखक की राय क्या थी और सबको क्यों पसंद आई?
उत्तर – लेखक की राय पानी की टंकी पर बैठने की थी। यह अपनी नवीनता के कारण सबको पसंद आई।
- दिए गए वाक्यों को कहानी के घटनाक्रम के अनुसार 1, 2, 3… क्रम दीजिए-
क. मैंने सारा बाग छान डाला। कहीं किसी की गंध भी न थी।
ख. आप बहुत थके-माँदे जान पड़ते हैं।
ग. पाँच मील का रास्ता मेरे लिए सहारा रेगिस्तान हो गया।
घ. मैं अपना सिर पकड़कर वहीं बैठ गया।
ङ. मैंने कहा कि क्यों न इस टंकी पर चढ़कर बैठा जाए।
च. अजी, रबड़ी की खुशबू से तो दिल हरा हो गया। छ. बारहदरी में कोई दिखाई न पड़ा।
1 (ग) पाँच मील का रास्ता मेरे लिए सहारा रेगिस्तान हो गया।
2 (छ) बारहदरी में कोई दिखाई न पड़ा।
3 (क) मैंने सारा बाग छान डाला। कहीं किसी की गंध भी न थी।
4 (घ) मैं अपना सिर पकड़कर वहीं बैठ गया।
5 (ख) आप बहुत थके-माँदे जान पड़ते हैं।
6 (ङ) मैंने कहा कि क्यों न इस टंकी पर चढ़कर बैठा जाए।
7 (च) अजी, रबड़ी की खुशबू से तो दिल हरा हो गया।
- सही विकल्प चुनिए-
क. पाँच मील का रास्ता लेखक को कैसा लग रहा था?
बहुत लंबा
धूल से भरा
सहारा रेगिस्तान
कच्चा-पक्का
ख. बाग में मित्रों को न पाकर लेखक ने क्या किया?
लौट गए।
पेड़ के नीचे बैठ गए।
माली से उनके बारे में पूछा।
पानी पीने लगे।
ग. लेखक के घर आकर उनके मित्रों ने क्या कहा?
हमें माफ़ कर दो।
हम तुम्हें दावत खिलाएँगे।
चलो, घूमने चलें।
दावत दो, नहीं तो परेशान करते रहेंगे।
भाषा-बोध (Language Skills)
- नीचे लिखे पदों से प्रविशेषण और विशेषण छाँटकर अलग-अलग लिखिए-
पद प्रविशेषण विशेषण
क. इतनी लंबी पगडंडी – इतनी लंबी
ख. ऐसी खराब सड़क – ऐसी खराब
ग. बहुत बड़ी टंकी – बहुत बड़ी
घ. बिलकुल निर्जन स्थान – बिलकुल निर्जन
ङ. लगभग सभी मित्र – लगभग सभी
इन पदों में कहाँ दो विशेषण हैं और कहाँ प्रविशेषण और विशेषण हैं-
क. लंबी कच्ची सड़क – दो विशेषण लंबी कच्ची
ख. काफ़ी नई कहानी – प्रविशेषण और विशेषण काफ़ी नई
ग. हवादार खुली जगह – दो विशेषण हवादार खुली
घ. बहुत पतली सीढ़ी – प्रविशेषण और विशेषण बहुत पतली
ङ शीतल स्वच्छ जल – दो विशेषण शीतल स्वच्छ
- नीचे लिखे विशेषणों के स्त्रीलिंग / पुल्लिंग रूप लिखिए-
विद्वान — विदुषी
वीर — वीरांगना
बलवान — बलवती
दुष्ट — दुष्टा
- निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य बनाइए-
क. हवा से बाज़ी मारना (बहुत तेज़ दौड़ना) – लेखक की साइकिल की धूल हवा से बाज़ी मार रही थी।
ख. धूल फाँकना (दर-दर भटकना/परेशान होना) – मित्रों के झूठ के कारण लेखक को पक्की सड़क पर धूल फाँकनी पड़ी।
ग. आनंद की पींग मारना (अत्यधिक खुश होना) – दावत की बात सोचकर लेखक का मन आनंद की पींग मारने लगा।
घ. आग फेंकना (अत्यधिक क्रोधित होना) – टंकी पर फँसे मित्र अपनी आँखों से आग फेंक रहे थे।
- उदाहरण के अनुसार सरल वाक्य बनाकर लिखिए-
उदाहरण – मुझे नीचे भेजा गया क्योंकि मुझे ही सारा प्रबंध करना था।
सारा प्रबंध करने के लिए मुझे नीचे भेजा गया।
क. मैंने सारा बाग छान डाला, पर कोई भी न मिला।
सारा बाग छान डालने पर भी कोई न मिला।
ख. सड़क खत्म हो गई और मैं उस बाग के फाटक पर पहुँचा।
सड़क खत्म होते ही मैं बाग के फाटक पर पहुँचा।
ग. धूप बहुत तेज़ थी और लू के थपेड़े मेरे मुँह पर पड़ रहे थे।
तेज़ धूप के कारण लू के थपेड़े मेरे मुँह पर पड़ रहे थे।
घ. मेरे फेफड़ों में इतनी धूल भर गई थी कि चलना भी मुश्किल था।
फेफड़ों में धूल भर जाने के कारण चलना मुश्किल था।
- निम्नलिखित वाक्यों में सही विराम-चिह्न लगाइए-
क. यह बाग स्वर्ग-सा प्रतीत हो रहा था।
ख. मैंने पूछा, “आप कल सुबह जा रहे हैं?”
ग. पंडित जी ने अपना नौकर मेरे साथ किया।
घ. अरे! हम लोग क्या खाएँगे?
- नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ लिखिए- (Word Power)
क. और – तथा / अधिक
ओर – तरफ / दिशा
ख. पक्की – मजबूत / दृढ़
पकी – जो पक गई हो (फल आदि)
ग. पार – दूसरी तरफ जाना
पर – पंख / लेकिन
घ. घाटा – नुकसान
घटा – बादल / कम होना
जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)
जीवन में हर रोज़ कुछ न कुछ अनोखा होता है। अपने अनुभवों से आपने सीखा होगा कि जीवन में हँसने का बहुत महत्त्व है। किसी मुसीबत में आपने कैसे मुसकराकर समस्या का समाधान किया है? बताइए।
जीवन में हँसना केवल तनाव कम नहीं करता, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक सोचने की शक्ति देता है। एक बार भारी बारिश के कारण जब मैं बीच रास्ते में फँस गया और घबराहट होने लगी, तब मैंने अपनी बेबसी पर मुस्कुराते हुए उसे एक ‘साहसिक यात्रा’ का नाम दिया। शांत मन और मुस्कुराहट ने मुझे घबराने के बजाय सुरक्षित रास्ता खोजने और मदद माँगने का साहस दिया।
रचनात्मक गतिविधियाँ
अपने मुख से (Oral Expression)
‘जैसे को तैसा’ विषय पर कक्षा में वार्ता का आयोजन कीजिए।
उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।
ऐसी ही हास्य-व्यंग्य की कुछ रचनाएँ पढ़िए अकबरी लोटा, चाचा छक्कन ने केले खरीदे, मामा जी की मेहमानी आदि। कोई एक रचना कक्षा में सुनाइए।
उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।
अपनी कलम से (Creative Writing)
‘परीक्षा के दिनः अध्ययन के स्थान पर अध्ययन से भागने के सपने सजने लगते हैं।’ इस विचार पर एक हास्य-व्यंग्य रचना लिखिए।
परीक्षा के दिन आते ही किताबों से ऐसी ‘अदावत’ हो जाती है कि पन्ना खोलते ही नींद की ‘दावत’ शुरू हो जाती है। जब इतिहास की तारीखें याद करनी होती हैं, तब मन क्रिकेट के स्कोरकार्ड के सपने सजाने लगता है। अलार्म घड़ी चिल्लाती रह जाती है और हम सपनों के उस लोक में पहुँच जाते हैं जहाँ न कोई गणित का सूत्र होता है और न ही विज्ञान का कोई जटिल सिद्धांत। अंत में जब आँख खुलती है, तो पता चलता है कि जिस ‘कल’ को पढ़ने वाले थे, वह ‘आज’ परीक्षा बनकर सामने खड़ा है!
अपनी कल्पना से (From my Imagination)
यदि आपको लेखक के मित्रों का साक्षात्कार लेने का अवसर मिले तो क्या प्रश्न पूछेंगे? दो समूहों में एक-दूसरे से प्रश्न पूछिए।
उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।
परियोजना कार्य (Project Work)
‘सारस और लोमड़ी’ जैसे को तैसा भाव की एक और प्रसिद्ध कथा है। इसे अथवा ऐसी ही कोई कहानी चुनकर चित्रों के रूप में प्रदर्शित कीजिए और अपने शिक्षक को दिखाइए।
उत्तर – छात्र शिक्षक की सहायता से इसे पूरा करेंगे।
शब्द- खेल
नीचे दिए गए शब्द व्यवस्थित कीजिए और अधिकतम सार्थक शब्द बनाइए-
ल पु त कि – पुलकित – पुल, लत, तपु, तल
प रू री धा – रूपधारी – रूप, धारी, पूरी, परी
ल क बा त – बालक – बात, बाल, कल, तक
न स मा र – सरनाम – समान, मानस, मार, नर, रस
ल म क द – दमकल – कलम, मद, कल, दल, कम
र भा क त – भारत – भार, भात, तक
हि मा य ल – हिमालय – हिम, हाल, माल, लय
सु त क्षि आ र – असुरक्षित – सुरक्षित, सुत, सुर, रक्षित

