कुछ करके सीखिए
नाम लिखिए-
भारतीय श्वेत क्रांति के जनक – डॉ. वर्गीज कुरियन (Dr. Verghese Kurien)
भारतीय हरित क्रांति के जनक – एम. एस. स्वामीनाथन (M. S. Swaminathan)
विज्ञान के जनक – गैलीलियो गैलीली (Galileo Galilei)
कंप्यूटर के जनक – चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage)
संस्कृत के जनक – महर्षि पाणिनि (Maharishi Panini)
हाथों का मूल्य – सारांश
डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एकांकी ‘हाथों का मूल्य’ स्वावलंबन, श्रम के महत्त्व और शिक्षित बेरोज़गारी की समस्या पर आधारित एक प्रेरणादायक नाटक है। यह समाज में व्याप्त उस मानसिकता पर चोट करता है जहाँ युवा पढ़-लिखकर शारीरिक श्रम करने को छोटा काम समझने लगते हैं।
- पात्र और पृष्ठभूमि
कहानी एक बगीचे से शुरू होती है जहाँ एक संभ्रांत सज्जन अखबार पढ़ रहे हैं। तभी एक नवयुवक उनके पास आता है, जो फटे कपड़े पहने हुए है और अत्यंत निराश है। वह अपनी गरीबी के कारण सिसकियाँ ले रहा है।
- शिक्षित बेरोज़गारी का दर्द
नवयुवक बताता है कि उसने बी.ए. पास कर लिया है, लेकिन उसे कहीं चपरासी की भी नौकरी नहीं मिल रही। उसने अपनी माँ के गहने बेचकर पढ़ाई की थी, पर अब वह चारों ओर से निराश होकर आत्महत्या के बारे में सोच रहा है। उसका परिवार दो दिनों से भूखा है।
- शिक्षा पद्धति और श्रम के प्रति दृष्टिकोण
सज्जन उसे समझाते हैं कि हमारी शिक्षा पद्धति केवल ‘किताबी’ है, जो मात्र नौकरी करना सिखाती है। वे कहते हैं कि पढ़े-लिखे युवक शारीरिक मेहनत (श्रम) करना अपना अपमान समझते हैं, जो कि उनकी सबसे बड़ी भूल है।
- एक अनोखा प्रस्ताव – हाथों का मूल्य
युवक को अपनी शक्ति का अहसास कराने के लिए सज्जन एक काल्पनिक कहानी सुनाते हैं। वे कहते हैं कि उनके जान-पहचान के एक सेठ जी को वियना की प्रदर्शनी के लिए मानव हाथ चाहिए और वे युवक के दोनों हाथ काटने के बदले तीस हज़ार रुपए देने को तैयार हैं।
- आत्मविश्वास की जागृति
जब युवक हाथ देने से साफ़ मना कर देता है, तब सज्जन उसे आईना दिखाते हैं। वे कहते हैं कि जिस ‘अमूल्य संपदा’ (हाथों) को तुम तीस हज़ार में भी नहीं बेचना चाहते, उसके होते हुए तुम स्वयं को गरीब और असहाय कैसे कह सकते हो? वे उसे मशवरा देते हैं कि अपनी डिग्री का अहंकार छोड़ो और मज़दूरी या कोई भी छोटा काम करके जीवन की नई शुरुआत करो।
- आत्मनिर्भरता का संकल्प
सज्जन की बातों से नवयुवक की आँखें खुल जाती हैं। उसे समझ आ जाता है कि श्रम ही सबसे बड़ी पूजा है। सज्जन उसे भोजन के लिए दस रुपए देना चाहते हैं, लेकिन युवक स्वाभिमान के साथ उन्हें अस्वीकार कर देता है। वह संकल्प लेता है कि वह आज शाम तक खुद मेहनत करके कमाएगा और अपने परिवार का भरण-पोषण करेगा।
प्रमुख संदेश –
श्रम की महत्ता – कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।
स्वावलंबन – मनुष्य के अपने हाथ और उसकी मेहनत ही उसकी असली पूँजी है।
मानसिकता में बदलाव – केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोज़गार और शारीरिक श्रम को सम्मान देना चाहिए।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न 1 – सज्जन ने कौन-सी कहानी सुनाई?
उत्तर – सज्जन ने नवयुवक को डाकू अंगुलिमाल की कहानी सुनाई, जो लोगों की उँगलियाँ काटकर उनकी माला पहनता था। इसी के माध्यम से उन्होंने वियना की प्रदर्शनी का एक काल्पनिक संदर्भ दिया।
प्रश्न 2 – सज्जन ने सेठजी के कौन-से विचित्र शौक के बारे में बताया?
उत्तर – सज्जन ने बताया कि सेठजी को एक विचित्र शौक है—वे वियना की प्रदर्शनी में मानव विकास पर खोज हेतु भारत के निवासियों के तरह-तरह के हाथ काटकर भेजना चाहते हैं।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न 1 – नवयुवक ने हाथ कटवाने के संदर्भ में क्या उत्तर दिया?
उत्तर – नवयुवक ने हाथ कटवाने से साफ़ इनकार कर दिया और कहा कि वह किसी भी मूल्य पर अपने हाथ नहीं कटवा सकता, क्योंकि ये हाथ ही उसकी सबसे बड़ी संपदा हैं।
प्रश्न 2 – सज्जन ने अमूल्य संपत्ति के संबंध में क्या परामर्श दिया?
उत्तर – सज्जन ने परामर्श दिया कि इस अमूल्य संपदा (हाथों) से ऐसी संपत्ति अर्जित करो कि परिवार, समाज और देश गौरवान्वित हो। उन्होंने कहा कि बी.ए. पास होने का अहंकार छोड़ो और शारीरिक श्रम (मज़दूरी) से काम शुरू करो।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न 1 – नवयुवक ने हाथ कटवाने के संदर्भ में क्या उत्तर दिया?
उत्तर – नवयुवक ने हाथ कटवाने के प्रस्ताव को सुनकर स्पष्ट रूप से मना कर दिया। उसने कहा कि वह किसी भी मूल्य पर अपने हाथ नहीं कटवा सकता, क्योंकि ये हाथ ही उसकी सबसे बड़ी संपदा और जीवन का आधार हैं।
प्रश्न 2 – सज्जन ने अमूल्य संपत्ति के संबंध में क्या परामर्श दिया?
उत्तर – सज्जन ने परामर्श दिया कि जब तुम्हारे पास हाथों के रूप में इतनी अमूल्य संपत्ति है, तो इसके रहते हुए आत्महत्या की बात सोचना गलत है। उन्होंने सलाह दी कि बी.ए. पास होने का अहंकार छोड़ो और शारीरिक श्रम (मज़दूरी) करना शुरू करो। इस संपदा का उपयोग मेहनत करने के लिए करो ताकि तुम अपने परिवार और देश को गौरवान्वित कर सको।
शब्दार्थ (Word Meaning)
1 – संभ्रांत – प्रतिष्ठित / उच्च कुल का – Elite / Noble
2 – दीनता – गरीबी / लाचारी – Wretchedness / Poverty
3 – सिसकियाँ – सुबकना (रोने की आवाज़) – Sobs
4 – सहायता – मदद – Assistance / Help
5 – चपरासी – अर्दली / सेवक – Peon
6 – अरजी – प्रार्थना-पत्र – Application
7 – निराश – हताश – Hopeless / Disappointed
8 – समस्या – मुश्किल / कठिनाई – Problem
9 – संकीर्णता – छोटापन / तंगदिली – Narrow-mindedness
10 – मनोविज्ञान – मन का विज्ञान – Psychology
11 – व्यवसाय – पेशा / धंधा – Profession / Business
12 – नियमित – नियम के अनुसार – Regular
13 – बेरोज़गार – जिसके पास काम न हो – Unemployed
14 – पद्धति – तरीका / प्रणाली – System / Method
15 – शारीरिक – शरीर से संबंधित – Physical
16 – अपमान – बेइज्जती – Insult / Humiliation
17 – आत्महत्या – स्वयं की जान लेना – Suicide
18 – अतिरिक्त – अलावा – Additional / Besides
19 – चारा – उपाय / रास्ता – Option / Resort
20 – याचना – माँगना / प्रार्थना – Entreaty / Begging
21 – भिक्षा – भीख – Alms
22 – संपत्ति – धन-दौलत – Wealth / Property
23 – विचित्र – अजीब / अनोखा – Strange / Peculiar
24 – प्रदर्शनी – नुमाइश – Exhibition
25 – निवासी – रहने वाले – Resident / Inhabitant
26 – प्राचीन – पुराना – Ancient
27 – स्वीकार – मंजूर – Accept
28 – मंजूर – सहमति – Approved / Agreed
29 – मूल्य – कीमत – Value / Price
30 – संपदा – पूँजी / खजाना – Wealth / Asset
31 – अमूल्य – अनमोल – Priceless
32 – अर्जित – कमाया हुआ – Earned / Acquired
33 – गौरवान्वित – गौरवांवित महसूस करना – Proud / Honoured
34 – आरंभ – शुरुआत – Start / Begin
35 – मज़दूरी – शारीरिक श्रम का मूल्य – Labor / Wages
36 – परिश्रम – मेहनत – Hard work / Labor
37 – पोषण – पालना – Nourishment / Upbringing
38 – अहंकार – घमंड – Ego / Pride
39 – दृष्टिकोण – नज़रिया – Perspective / Outlook
40 – स्वावलंबन – आत्मनिर्भरता – Self-reliance
41 – भविष्य – आने वाला समय – Future
42 – शासन – राज / सरकार – Rule / Governance
43 – मनुष्य – मानव – Human
44 – व्यवस्था – इंतज़ाम – Arrangement
45 – शक्ति – ताक़त – Power / Energy
46 – खोज – अनुसंधान – Research / Discovery
47 – मज़ाक – उपहास – Joke / Mockery
48 – विद्रोही – बागी – Rebellious
49 – यथार्थवादी – वास्तविकता मानने वाला – Realistic
50 – प्रगतिशील – आगे बढ़ने वाला – Progressive
लिखित
- एक वाक्य में उत्तर लिखिए-
क. इस एकांकी में कितने पात्र हैं?
उत्तर – इस एकांकी में मुख्य रूप से दो पात्र हैं—एक संभ्रांत सज्जन और एक नवयुवक।
ख. नवयुवक कितना शिक्षित है?
उत्तर – नवयुवक बी.ए. पास है।
ग. सज्जन के अनुसार हमारे यहाँ कैसी शिक्षा दी जाती है?
उत्तर – सज्जन के अनुसार हमारे यहाँ केवल किताबी शिक्षा दी जाती है जो मात्र नौकरी करना सिखाती है।
घ. सेठ जी दोनों हाथ का क्या मूल्य देते?
उत्तर – सेठ जी दोनों हाथों का मूल्य तीस हज़ार रुपए देते।
ङ सज्जन ने नवयुवक को कितने रुपए देने चाहे?
उत्तर – सज्जन ने नवयुवक को दस रुपए देने चाहे थे।
- विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
क. नवयुवक ने अखबार पढ़ते सज्जन को अपने बारे में क्या बताया?
उत्तर – नवयुवक ने बताया कि वह बी.ए. पास है, बेरोजगार है और उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं हैं। उसने यहाँ तक कहा कि यदि सहायता न मिली तो वह आत्महत्या कर लेगा।
ख. ‘तुमने बी. ए. पास क्यों किया?’ इस माध्यम से सज्जन क्या कहना चाहते थे?
उत्तर – इस माध्यम से सज्जन यह कहना चाहते थे कि यदि केवल चपरासी ही बनना था, तो इतनी उच्च शिक्षा की क्या आवश्यकता थी? वे शिक्षा के सही उद्देश्य और श्रम के महत्त्व की ओर संकेत कर रहे थे।
ग. हमारी शिक्षा प्रणाली में क्या कमी है?
उत्तर – हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) का अभाव है। यह केवल मानसिक रूप से ‘नौकर’ तैयार करती है, शारीरिक श्रम के प्रति सम्मान पैदा नहीं करती।
घ. सज्जन ने नवयुवक के दोनों हाथ क्यों माँगे?
उत्तर – सज्जन ने हाथ इसलिए माँगे ताकि वे युवक को यह अहसास करा सकें कि उसके पास जो शरीर और हाथ हैं, वे किसी भी धन-दौलत से कहीं अधिक कीमती हैं।
ङ. सज्जन ने नवयुवक के पास किस बड़ी संपत्ति के होने की बात कही?
उत्तर – सज्जन ने युवक के दोनों हाथों को उसकी सबसे बड़ी और अमूल्य संपत्ति बताया।
च. युवक ने दस रुपए क्यों नहीं लिए?
उत्तर – युवक ने दस रुपए इसलिए नहीं लिए क्योंकि उसे अपनी शक्ति का अहसास हो गया था। वह अब माँगने के बजाय स्वयं परिश्रम करके कमाना चाहता था।
छ. इस एकांकी का नाम ‘हाथों का मूल्य’ क्यों रखा गया है? आप इसका क्या नाम रखना चाहेंगे?
उत्तर – इस एकांकी का नाम ‘हाथों का मूल्य’ इसलिए रखा गया है क्योंकि यह शारीरिक श्रम की महत्ता को दर्शाता है। इसका वैकल्पिक नाम ‘स्वावलंबन’ या ‘श्रम की विजय’ हो सकता है।
- सही विकल्प चुनिए-
क. नवयुवक कितना शिक्षित था?
पाँचवीं पास
बी.ए. पास
दसवीं पास
बारहवीं पास
ख. नवयुवक ने अपनी सबसे बड़ी संपदा किसे बताया?
अपनी शिक्षा को
माँ के गहने को
अपने परिवार को
अपने दोनों हाथों को
- सही मिलान कीजिए-
क. सज्जन i. बेरोज़गार
ख. नवयुवक ii. परिवार का पोषण
ग. किताबी शिक्षा iii. संभ्रांत
घ. अमूल्य संपदा iv. संकीर्णता
ङः परिश्रम v. दोनों हाथ
क. सज्जन — iii. संभ्रांत
ख. नवयुवक — i. बेरोज़गार
ग. किताबी शिक्षा — iv. संकीर्णता
घ. अमूल्य संपदा — v. दोनों हाथ
ङ. परिश्रम — ii. परिवार का पोषण
भाषा-बोध (Language Skills)
- रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित समुच्चयबोधक शब्द लिखकर कीजिए-
क. वे सिर्फ़ नौकरी करना चाहते हैं और कोई दूसरा काम करेंगे नहीं।
ख. अंग्रेज़ लोग अपने काम के लिए नौकर चाहते थे इसलिए उन्होंने ऐसी शिक्षा पद्धति चला दी।
ग. कोई सहायता कीजिए अन्यथा मेरा सारा परिवार भूख से मर जाएगा।
घ. मैंने बी.ए. पास कर लिया है परन्तु मुझे कहीं चपरासी की नौकरी भी नहीं मिली।
- विपरीतार्थक शब्द लिखिए- (Word Power)
समझदार X नासमझ
समस्या X समाधान
उपयोगी X अनुपयोगी
सज्जन X दुर्जन
कठिनाई X सरलता
व्यवस्था X अव्यवस्था
- निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए- (Word Power)
संपत्ति – विरासत, संपदा
अरज़ी – प्रार्थना-पत्र, आवेदन
अर्जित – कमाया हुआ, प्राप्त
संकीर्णता – संकुचित, तंगदिली
पोषण – भरण-पोषण, परवरिश
अमूल्य – अनमोल, बहुमूल्य
- उपसर्ग और मूलशब्द अलग करके लिखिए-
बेरोज़गार – बे + रोज़गार
नवयुवक – नव + युवक
अमूल्य – अ + मूल्य
उपयोगी – उप + योगी (मूल शब्द – योग)
प्रगति – प्र + गति
अपमान – अप + मान
- मूलशब्द से इक और इत प्रत्ययवाले शब्द लिखिए-
इक – शारीरिक, वार्षिक, मानसिक, सामाजिक
इत – शिक्षित, मोहित, अर्जित, अंकित
- पाठ से छाँटकर नीचे दिए गए ‘र’ के दोनों रूपों के शब्द लिखिए-
र (रेफ) – विद्यार्थी, मर्जी, अर्जी
र (पदेन) – प्राप्त, प्रगति, प्रदर्शनी
- निर्देशानुसार पाठ से वाक्य चुनिए-
प्रश्नवाचक – तो आपने बी.ए. पास क्यों किया?
निषेधात्मक – और कोई दूसरा काम हम जानते ही नहीं।
इच्छावाचक – देखिए कुछ दिनों में आप मिट्टी से सोना बनाते हैं या नहीं।
जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)
जीवन में किसी भी कार्य को छोटा नहीं समझना चाहिए।
इस सोच के लिए हमें कौन-सी दृष्टि और मानसिकता अपनानी चाहिए इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
जीवन में ‘श्रम की गरिमा’ (Dignity of Labour) को समझना आवश्यक है। हमें यह मानसिकता अपनानी चाहिए कि सफलता का संबंध काम के प्रकार से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और ईमानदारी से है। परिचर्चा के मुख्य बिंदु –
अहंकार का त्याग – डिग्री को केवल ज्ञान का आधार मानें, काम चुनने में बाधा नहीं।
स्वावलंबन – दूसरों पर निर्भर रहने से बेहतर है छोटा काम करके आत्मनिर्भर बनना।
सकारात्मक दृष्टि – हर कार्य समाज की एक महत्वपूर्ण इकाई है; कोई भी काम तुच्छ नहीं होता।
रचनात्मक गतिविधियाँ
अपने मुख से (Oral Expression)
शरीर के अंगों के महत्त्व पर कक्षा में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
हमारे शरीर का प्रत्येक अंग एक अद्भुत मशीन की तरह कार्य करता है, जिसका अपना विशिष्ट महत्त्व है। हाथ हमें कर्म और सृजन की शक्ति देते हैं, तो पैर हमें प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। आँखें दुनिया का सौंदर्य दिखाती हैं और मस्तिष्क सही-गलत का निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इन अंगों का तालमेल ही जीवन को सुचारू बनाता है। अतः हमें अपने शरीर को ईश्वर की अनमोल ‘संपदा’ मानकर इसकी रक्षा और सदुपयोग करना चाहिए।
अपनी कलम से (Creative Writing)
विभिन्न कारणों से दिव्यांग हुए लोग अपने जीवन को कुशलता से जीते हैं और अपने उत्कृष्ट कार्यों से आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। ऐसी ही कुछ हस्तियों की सूची बनाइए और इनमें से किसी एक पर लेख तैयार कीजिए।
दिव्यांगता शरीर की सीमा हो सकती है, मन की नहीं। समाज को प्रेरित करने वाली कुछ प्रमुख हस्तियाँ –
अरुणिमा सिन्हा – कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला।
सुधा चंद्रन – एक पैर खोने के बावजूद विश्व प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना।
स्टीफन हॉकिंग – गंभीर बीमारी के बावजूद ब्रह्मांड विज्ञान के महान वैज्ञानिक।
दीपा मलिक – पैरालंपिक खेलों में पदक विजेता एथलीट।
लेख – सुधा चंद्रन (साहस की प्रतिमूर्ति)
सुधा चंद्रन एक प्रख्यात नृत्यांगना और अभिनेत्री हैं। एक दुर्घटना में अपना पैर खो देने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने ‘जयपुर फुट’ (कृत्रिम पैर) की सहायता से पुनः नृत्य सीखा और अपने जुनून को जीवित रखा। उनकी सफलता यह सिखाती है कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो कोई भी शारीरिक बाधा आपको अपनी मंजिल पाने से नहीं रोक सकती। आज वे करोड़ों लोगों के लिए आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।
अपनी कल्पना से (From my Imagination)
कल्पना कीजिए कि आपका एक अंग, जिसके ऊपर आप सबसे ज्यादा निर्भर हैं, वह किसी कारणवश कार्य नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?
यदि मेरा कोई महत्वपूर्ण अंग कार्य करना बंद कर दे, तो सबसे पहले मैं अपनी मानसिक शक्ति और धैर्य को आधार बनाऊँगा। मैं उस स्थिति को स्वीकार कर अपनी अन्य इंद्रियों और क्षमताओं को और अधिक विकसित करूँगा। तकनीक और सहायक उपकरणों की मदद लेकर मैं अपने कार्यों को नए तरीके से सीखने का प्रयास करूँगा। मेरा मानना है कि शारीरिक बाधा शरीर को रोक सकती है, लेकिन अडिग इच्छाशक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण से जीवन को पुनः सार्थक बनाया जा सकता है।
परियोजना कार्य
(Project Work)
एक प्रस्तुति (Presentation) तैयार कीजिए जिसमें ऐसे संगठनों की सूची हो जो बेरोजगारों के लिए कार्य करती है, उन्हें रोजगार प्रदान करने में सहायता करती है। उस संगठन की भूमिका क्या होती है और वे उन्हें रोज़गार प्रदान करने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाते हैं?

