कुछ करके सीखिए
नीचे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र दिए गए हैं, इंटरनेट की सहायता से उनके नाम और उनके प्रसिद्ध नारे लिखिए-
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा!”
दो पंछी – सारांश
रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता ‘दो पंछी’ स्वतंत्रता और परतंत्रता के बीच के द्वंद्व को बड़ी ही सुंदरता से दर्शाती है।
छंद 1 – दो अलग संसारों का मिलन
सोने के पिंजरे में था पिंजरे का पंछी,
और वन का पंछी था वन में।
जाने कैसे एक बार दोनों का मिलन हो गया,
कौन जाने विधाता के मन में क्या था?
व्याख्या – कविता की शुरुआत दो पक्षियों के परिचय से होती है। एक पक्षी सोने के पिंजरे में कैद है, जिसे सारी सुख-सुविधाएँ प्राप्त हैं, और दूसरा वन का स्वतंत्र पक्षी है जो प्रकृति की गोद में रहता है। भाग्यवश अर्थात् विधाता की इच्छा से दोनों एक स्थान पर मिलते हैं। यह मिलन दो विपरीत जीवन-शैलियों का आमना-सामना है।
छंद 2 – एक-दूसरे को निमंत्रण
वन के पंछी ने कहा, “भाई पिंजरे के पंछी,
हम दोनों मिलकर वन में चलें।”
पिंजरे का पंछी बोला, “भाई वनपाखी आओ,
हम आराम से पिंजरे में रहें।”
व्याख्या – स्वतंत्र पक्षी कैद पक्षी को मुक्ति का मार्ग दिखाता है और साथ में खुले वन में उड़ने का प्रस्ताव देता है। इसके विपरीत, पिंजरे का पक्षी अपनी गुलामी को ही ‘आराम’ समझता है और वन के पक्षी को भी पिंजरे के सुरक्षित जीवन का लालच देता है।
छंद 3 – स्वतंत्रता बनाम सुरक्षा
“नहीं, मैं अपने-आपको बाँधने नहीं दूँगा,”
वनपाखी ने फ़रमाया।
“मगर मैं बाहर कैसे निकलूँगा?”
पिंजरे का पंछी बोला।
व्याख्या – यहाँ दोनों की वैचारिक असहमति स्पष्ट होती है। स्वतंत्र पक्षी के लिए आज़ादी सर्वोपरि है, वह बंधन स्वीकार नहीं कर सकता। वहीं, पिंजरे का पक्षी बाहर की दुनिया से डरा हुआ है और अपनी लाचारी व्यक्त करता है कि वह बाहर निकलने का रास्ता नहीं जानता।
छंद 4 – भाषा और अभिव्यक्ति का अंतर
बाहर बैठा-बैठा वन का पंछी वन के तमाम गीत गा रहा है
और पिंजरे का पंछी अपनी रटी-रटाई बातें दोहरा रहा है,
एक की भाषा का दूसरे की भाषा से मेल नहीं।
व्याख्या – वन का पक्षी प्रकृति के नए और मौलिक गीत गाता है, जो उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। पिंजरे का पक्षी केवल वही शब्द बोलता है जो उसे सिखाए गए हैं। उनकी भाषा का मेल न होना यह दर्शाता है कि एक गुलाम और एक स्वतंत्र व्यक्ति की सोच और अभिव्यक्ति कभी एक जैसी नहीं हो सकती।
छंद 5 – असीमता और परिपाटी (नियम)
वनपाखी कहता है, “आकाश गहरा नीला है,
उसमें कहीं कोई बाधा नहीं है।
पिंजरे का पंछी कहता है, “हाय,
बादलों में बैठने का ठौर कहाँ है?
पिंजरे की परिपाटी,
कैसी घिरी हुई है चारों तरफ़ से!”
व्याख्या – वन का पक्षी उसे असीमित आकाश की विशालता के बारे में बताता है जहाँ कोई बंधन नहीं है। लेकिन पिंजरे का पक्षी, जिसे हमेशा दीवारों और तीलियों की आदत रही है, उसे आकाश में असुरक्षा महसूस होती है। उसे लगता है कि पिंजरे के बाहर बैठने के लिए कोई निश्चित जगह ही नहीं है।
छंद 6 – बेबसी और दूरी
इस तरह दोनों एक-दूसरे को चाहते तो हैं,
किंतु पास-पास नहीं आ पाते।
पिंजरे की तीलियों में से,
एक-दूसरे की चोंच छू-छूकर रह जाते हैं,
चुपचाप एक-दूसरे को टुकुर-टुकुर देखते हैं।
व्याख्या – दोनों पक्षियों में आपस में लगाव है, वे एक होना चाहते हैं, लेकिन उनके बीच ‘पिंजरे की तीलियाँ’ अर्थात् सामाजिक और वैचारिक बाधाएँ दीवार बनकर खड़ी हैं। वे केवल एक-दूसरे को छूकर अपनी संवेदना व्यक्त कर पाते हैं, पर मिल नहीं पाते।
छंद 7 – अंतिम विदाई और लाचारी
वन का पंछी कहता है,
“नहीं, कौन जाने कब पिंजरे की खिड़की बंद कर दी जाए!”
पिंजरे का पंछी कहता है,
“हाय, मुझमें उड़ने की शक्ति नहीं है!”
व्याख्या – अंत में, दोनों अपनी-अपनी विवशता स्वीकार कर लेते हैं। स्वतंत्र पक्षी को डर है कि कहीं उसकी आज़ादी न छिन जाए अर्थात् खिड़की बंद न हो जाए। सबसे दुखद स्थिति पिंजरे के पक्षी की है, जो अंततः यह स्वीकार करता है कि गुलामी में रहते-रहते वह अब उड़ना ही भूल गया है।
निष्कर्ष
यह कविता सिखाती है कि गुलामी न केवल शरीर को कैद करती है, बल्कि आत्मा की शक्ति और साहस को भी मार देती है। पिंजरे का पक्षी सुनहरी तीलियों और ‘आराम’ के बदले अपनी सबसे बड़ी शक्ति—उड़ना—खो चुका है।
मौखिक (बोध प्रश्न)
वन के पंछी ने पिंजरे के पंछी से क्या कहा?
उत्तर – वन के पंछी ने पिंजरे के पंछी से कहा कि, “भाई, तुम पिंजरे से बाहर आओ और हम दोनों मिलकर स्वतंत्र रूप से वन में चलें।”
पिंजरे के पंछी के मन में क्या-क्या शंकाएँ थी?
उत्तर – पिंजरे के पंछी के मन में यह शंका थी कि वह बाहर कैसे निकलेगा। उसे डर था कि विशाल नीले आकाश और बादलों के बीच बैठने या आराम करने की कोई निश्चित जगह नहीं है, क्योंकि उसे हमेशा पिंजरे की सुरक्षित दीवारों की आदत रही है।
मौखिक (बोध प्रश्न)
दोनों पक्षियों के मन में एक-दूसरे के प्रति कैसी भावना थी?
उत्तर – दोनों पक्षियों के मन में एक-दूसरे के प्रति प्रेम और गहरी चाहत की भावना थी। वे एक-दूसरे के पास आना चाहते थे और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते थे, लेकिन अपनी-अपनी परिस्थितियों के कारण वे ऐसा कर नहीं पा रहे थे।
पिंजरे के पक्षी के निमंत्रण पर भी वन का पक्षी किस भय से पास नहीं जाता?
उत्तर – वन का पक्षी इस भय से पिंजरे के पास नहीं जाता कि कहीं अनजाने में वह भी बंधन में न फँस जाए। उसे डर है कि यदि वह पिंजरे में गया, तो पिंजरे की खिड़की बंद कर दी जाएगी और उसकी आज़ादी हमेशा के लिए छिन जाएगी।
शब्दार्थ (Word Meaning)
1 – वनपाखी – वन का पक्षी / जंगली पक्षी – Wild bird / Forest bird
2 – विधाता – ईश्वर / भाग्य लिखने वाला – Creator / Destiny / God
3 – मिलन – मेल या भेंट – Meeting / Union
4 – फ़रमाया – कहा (आदरसूचक शब्द) – Said / Commanded
5 – तमाम – सभी / सारा – All / Entire
6 – रटी-रटाई – याद की हुई (बिना समझे) – Rote-learned / Repetitive
7 – दोहराना – बार-बार कहना – To repeat
8 – तनिक – थोड़ा सा / ज़रा सा – A little / Slightly
9 – गान – गीत या भजन – Song / Chant
10 – बाधा – रुकावट या अड़चन – Obstacle / Hindrance
11 – हवाले करना – सौंप देना – To surrender / Hand over
12 – ठौर – स्थान या ठिकाना – Abode / Resting place
13 – परिपाटी – रीति या परंपरा (नियम) – Tradition / Customary way
14 – घिरी हुई – चारों ओर से बंद – Surrounded / Enclosed
15 – तीलियाँ – पिंजरे की छड़ें – Bars (of a cage)
16 – टुकुर-टुकुर – एकटक देखना – Gazing / Staring helplessly
17 – पंख फड़फड़ाना – पंख हिलाना – To flap wings
18 – कातर – व्याकुल या डरा हुआ – Distressed / Timid
19 – शक्ति – बल या सामर्थ्य – Power / Strength
20 – असीमता – जिसकी कोई सीमा न हो – Infinity / Boundlessness
21 – परतंत्रता – गुलामी – Slavery / Bondage
22 – स्वच्छंद – आज़ाद – Free / Independent
23 – संवाद – बातचीत – Dialogue / Conversation
24 – द्वंद्व – मानसिक कशमकश – Conflict / Dilemma
25 – विछोह – बिछड़ना – Separation
26 – अरण्य – जंगल – Forest / Wilderness
27 – नभ – आकाश – Sky / Firmament
28 – मूक – मौन या चुप – Silent / Mute
29 – लाचारी – बेबसी – Helplessness
30 – क्षितिज – जहाँ धरती और आकाश मिलें – Horizon
लिखित
- एक वाक्य में उत्तर लिखिए-
क. पिंजरे का पंछी किस तरह के पिंजरे में था?
उत्तर – पिंजरे का पंछी सोने के पिंजरे में था।
ख. पिंजरे का पंछी अचानक किससे मिला?
उत्तर – पिंजरे का पंछी अचानक वन के स्वतंत्र पंछी से मिला।
ग. वन का पंछी कौन-से गीत गा रहा था?
उत्तर – वन का पंछी वन के तमाम प्राकृतिक और स्वतंत्रता के गीत गा रहा था।
घ. पिंजरे का पंछी कौन-सी बातें बोल रहा था?
उत्तर – पिंजरे का पंछी दूसरों द्वारा सिखाई गई रटी-रटाई बातें बोल रहा था।
- विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
क. दोनों पक्षियों का जीवन एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न था? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – दोनों का जीवन विपरीत था। वन का पंछी स्वतंत्र था, वह अपनी इच्छा से कहीं भी उड़ सकता था और प्रकृति के गीत गाता था। वहीं पिंजरे का पंछी परतंत्र था, उसका जीवन सीमित दायरे और सुख-सुविधाओं का आदि था। उदाहरण के लिए, वन का पंछी बादलों में खो जाने की बात करता है, जबकि पिंजरे का पंछी बादलों में असुरक्षा महसूस करता है।
ख. दोनों पक्षी एक-दूसरे को अपनी बात समझा पाने में असमर्थ क्यों थे?
उत्तर – दोनों की जीवन-स्थितियाँ और अनुभव पूरी तरह अलग थे। वन का पक्षी असीमित आकाश की भाषा बोलता था, जबकि पिंजरे का पक्षी केवल अपने पिंजरे के नियमों और सीमाओं को समझता था। उनके संस्कारों और सोच में भारी अंतर होने के कारण वे एक-दूसरे की बात नहीं समझ पा रहे थे।
ग. वन का पक्षी पिंजरे के पक्षी का निमंत्रण क्यों नहीं स्वीकार कर रहा था?
उत्तर – वन का पक्षी स्वतंत्रता प्रेमी था। उसे भय था कि पिंजरे में जाते ही खिड़की बंद कर दी जाएगी और वह अपनी सबसे कीमती चीज़—अपनी आज़ादी—खो देगा। वह सुख-सुविधाओं के लिए अपनी मुक्ति का त्याग नहीं करना चाहता था।
घ. दोनों पक्षियों की परिस्थितियों और उनकी सोच में क्या अंतर था?
उत्तर – वन के पंछी की परिस्थिति ‘स्वतंत्रता’ की थी और उसकी सोच ‘साहस’ व ‘जोखिम’ से भरी थी। पिंजरे के पंछी की परिस्थिति ‘परतंत्रता’ की थी और उसकी सोच ‘भय’ व ‘आराम’ की आदत से दबी हुई थी।
ङ. ‘एक की भाषा का दूसरे की भाषा से मेल नहीं‘ का क्या आशय है?
उत्तर – इसका आशय यह है कि एक आज़ाद व्यक्ति के विचार और एक गुलाम व्यक्ति की सोच के धरातल अलग-अलग होते हैं। गुलामी में रहने वाले व्यक्ति का नजरिया संकुचित हो जाता है, जिससे वह स्वतंत्रता के व्यापक अर्थ को नहीं समझ पाता।
- सही विकल्प चुनिए-
क. वन के पंछी ने पिंजरे के पंछी से सबसे पहले क्या कहा?
पिंजरे में चलने को
आकाश में उड़ने को
वन में चलने को
पिंजरे में रहने को
ख. पिंजरे के पंछी की रटी-रटाई बातें क्या हैं?
दूसरों की सिखाई गई भाषा
स्वतंत्र सोच का न होना
दूसरों के मंत्र
परतंत्र विचार
ग. पिंजरे के पंछी में है-
सुरक्षित होने की इच्छा।
आराम की आदत।
आलस्य की प्रवृत्ति।
आत्मनिर्भरता की कमी।
घ. वन के पंछी में कौन-सी विशेषता नहीं थी?
कायरता
बहादुरी
स्वतंत्र सोच
आत्मनिर्भरता
भाषा-बोध (Language Skills)
- नीचे दिए गए पुनरुक्त शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
बैठा-बैठा – वह घर पर बैठा-बैठा ऊब गया था।
आते-आते – घर आते-आते उसे बहुत देर हो गई।
रटी-रटाई – तोता अपनी रटी-रटाई बातें बोलता रहा।
पास-पास – हम दोनों बिल्कुल पास-पास बैठे थे।
छू-छूकर – बच्चा फूलों को छू-छूकर देख रहा था।
- नीचे दिए गए शब्दों का वर्ण-विच्छेद लिखिए-
पिंजरा – प् + इ + न् + ज् + अ + र् + आ
पंछी – प् + अ + न् + छ् + ई
निकलूँगा – न् + इ + क् + अ + ल् + ऊ + ङ् + अ + ग् + आ
शक्ति – श् + अ + क् + त् + इ
- दिए गए शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए- (Word Power)
चुपचाप X शोरगुल
बाहर X अंदर
जंगली X पालतू
बाँधना X खोलना
- रेखांकित पदों में कारक के भेद लिखिए-
क. वन के पंछी ने कहा। कर्ता कारक
ख. हम आराम से पिंजरे में रहेंगे। अधिकरण कारक
ग. बादलों में बैठने का ठौर कहाँ? अधिकरण कारक
घ. अपने मन की बात समझा पाते। संबंध कारक
ङ वनपाखी वहाँ से उड़ गया। अपादान कारक
च. हाय! मुझमें उड़ने की शक्ति कहाँ! सम्बोधन कारक
छ. उसने भरे गले से कहा। करण कारक
ज. मेरे मित्र को बुला दो। कर्म कारक
- अपठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
माथे को फूल जैसा अपने चढ़ा दे जो
रुकती-सी दुनिया को आगे बढ़ा दे जो
मरना वही अच्छा है।
लहरों के आने पर काई-सा फटे नहीं
रोटी के लालच में तोते-सा रटे नहीं
प्राणी वही प्राणी है।
बोले तो हमेशा सच, सच से हटे नहीं झूठ के डराए से हरगिज़ डरे नहीं
सचमुच वही अच्छा है!
क. माथे को फूल जैसा चढ़ाने का क्या अर्थ है?
उत्तर – इसका अर्थ है—देश या महान उद्देश्य के लिए स्वयं का बलिदान देना।
ख. मजबूत व्यक्ति कब नहीं घबराता?
उत्तर – मजबूत व्यक्ति मुसीबतों अर्थात् लहरों के आने पर नहीं घबराता।
ग. तोते सा रटने का काम कैसे लोग करते हैं?
उत्तर – स्वार्थी और लालची लोग रोटी के लालच में तोते की तरह रटते हैं।
घ. सच्चे मनुष्य की क्या पहचान है?
उत्तर – सच्चा मनुष्य हमेशा सच बोलता है और झूठ के डर से कभी नहीं झुकता।
ङ. ‘काई’ कैसे व्यक्तित्व का प्रतीक है?
उत्तर – काई कमजोर और बिखर जाने वाले व्यक्तित्व का प्रतीक है जो संकट आने पर फट जाता है।
जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)
देश हमें सरंक्षण देता है, हमारा पालन-पोषण करता है। देश की सुरक्षा में ही हमारी सुरक्षा है। हमें प्रत्येक कार्य देश के हित में करना चाहिए।
रचनात्मक गतिविधियाँ (Creative Activities)
अपने मुख से (Oral Expression)
सीमित दायरे में रहकर सुख-सुविधाओं के बंधन में बँधकर रहने से अच्छा है स्वतंत्र होकर जीवन जीना। ‘मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं’- इस विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए। अपने विद्यालय के पुस्तकालय से शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की प्रसिद्ध कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’। और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की ‘मुक्ति की आकांक्षा’ लेकर पढ़िए और अपनी कक्षा में सुनाइए।
छात्र इसे शिक्षक की सहायता से पूरा करें
अपनी कलम से (Creative Writing)
आपके अनुसार क्या स्वतंत्रता की कोई सीमा होनी चाहिए? आप अपनी स्वतंत्रता का उपयोग स्कूल, घर, सड़क, सभा, सार्वजनिक स्थानों आदि पर किस प्रकार करना चाहेंगे? अनुच्छेद लिखिए।
स्वतंत्रता का अर्थ ‘मनमानी’ नहीं है। समाज में रहने के लिए स्वतंत्रता की कुछ मर्यादाएँ और सीमाएँ आवश्यक हैं। मेरी स्वतंत्रता वहाँ समाप्त होती है जहाँ से दूसरे की नाक शुरू होती है। स्कूल में मैं अपनी स्वतंत्रता का उपयोग ज्ञान प्राप्त करने और शिष्टाचार के साथ प्रश्न पूछने में करूँगा। सार्वजनिक स्थानों पर सड़क के नियमों का पालन करना और कचरा न फैलाना भी मेरी स्वतंत्रता की ज़िम्मेदारी है। बिना अनुशासन के स्वतंत्रता उच्छृंखलता बन जाती है, जो समाज के लिए हानिकारक है।
अपनी कल्पना से (From my Imagination)
यदि पिंजरे का पक्षी बाहर आ जाता तो क्या उसके विचारों में कोई परिवर्तन होता? वह तब वन के पक्षी से क्या बातचीत करता? अपने विचार सहपाठियों से साझा कीजिए।
पिंजरे का पक्षी यदि बाहर आता, तो शुरुआत में वह भयभीत होता, परंतु धीरे-धीरे उसे स्वतंत्रता के आनंद का अनुभव होता। वह वन के पक्षी से कहता, “सचमुच, आकाश की असीमता पिंजरे के सोने से कहीं श्रेष्ठ है।”
मनुष्य की सोच के निर्माण में उसकी परिस्थितियों की क्या भूमिका होती है? अपने विचार लिखिए।
परिस्थितियाँ मनुष्य की सोच का आधार होती हैं। पिंजरे का पक्षी सुरक्षा को सुख मानता था क्योंकि उसकी दुनिया सीमित थी। अक्सर हमारी सोच उसी दायरे में बँध जाती है जिसमें हम रहते हैं।
परियोजना कार्य (Project Work)
रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए तथा उनपर एक परियोजना बनाइए। उनकी लिखी कहानी ‘काबुलीवाला’ पर फ़िल्म बनी है, उसे देखिए।
छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करेंगे।

