Meri bhi aabha hai ismein (Kavita) – Nagarjun, NCERT Class IX R3 Reva Hindi Book, The Best Solutions,

नागार्जुन – कवि परिचय

नागार्जुन का जन्म सन् 1911 में बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था। इनका नाम वैद्यनाथ मिश्र था। ये साहित्य जगत में नागार्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुए। ये हिंदी और मैथिली, दोनों भाषाओं के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। इन्होंने अपनी कविताओं में किसान, मजदूर और आम आदमी के जीवन को बड़ी सरलता और सच्चाई से व्यक्त किया है। इनकी भाषा सीधी, सरल और दिल को छू लेने वाली है।

कविता – मेरी भी आभा है इसमें

नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है

यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है

मेरी भी आभा है इसमें।

भीनी-भीनी खुशबू वाले

रंग-बिरंगे

यह जो इतने फूल खिले हैं

कल इनको मेरे प्राणों ने नहलाया था

कल इनको मेरे सपनों ने सहलाया था।

मेरी भी आभा है इसमें।

पकी सुनहली फसलों से जो

अबकी यह खलिहान भर गया

मेरी रग-रग के शोणित की बूँदें इसमें मुसकाती हैं।

नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है

यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है

मेरी भी आभा है इसमें।

नागार्जुन

मेरी भी आभा है इसमें – सप्रसंग व्याख्या

सामान्य प्रसंग

यह कविता जनकवि नागार्जुन द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने समाज के निर्माण, विकास और सुंदरता में एक साधारण किसान, मज़दूर और आम इंसान के श्रम और योगदान  का वर्णन किया है। दुनिया की हर नई चमक और सफलता के पीछे आम आदमी का खून-पसीना छिपा होता है।

पद्यांश 1

नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है

यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है

मेरी भी आभा है इसमें।

 

शब्दार्थ –

गगन (Gagan): आकाश / Sky

विशाल (Vishal): बहुत बड़ा / Vast, huge

भूखंड (Bhukhand): धरती का भाग / Land, earth

दमक (Damak): चमकना / Glowing, shining

आभा (Aabha): चमक, योगदान / Splendour, reflection (here, contribution)

व्याख्या –

कवि कहते हैं कि आज विकास के इस नए आकाश में जो नया सूरज चमक रहा है और यह जो हमारी विशाल धरती आज इतनी सुंदर और खुशहाल दिखाई दे रही है, यह सब अपने आप नहीं हुआ है। इस विकास और चमक में मेरा यानी एक आम मज़दूर और किसान का भी योगदान और मेहनत शामिल है।

 

पद्यांश 2

भीनी-भीनी खुशबू वाले

रंग-बिरंगे

यह जो इतने फूल खिले हैं

कल इनको मेरे प्राणों ने नहलाया था

कल इनको मेरे सपनों ने सहलाया था।

मेरी भी आभा है इसमें।

 

शब्दार्थ –

भीनी-भीनी (Bhini-bhini): हल्की-हल्की / Mild, faint (fragrance)

प्राण (Pran): जीवन शक्ति, मेहनत / Life force, sweat, hard work

सहलाया (Sehlaya): प्यार से हाथ फेरना / Caressed, nurtured

 

व्याख्या –

कवि कहते हैं कि बागों में जो हल्की-हल्की सुगंध वाले रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं, उनकी सुंदरता के पीछे मेरी मेहनत है। कल मैंने ही अपने पसीने और जीवन-शक्ति से इन्हें सींचा था और अपने सुनहरे सपनों से इन्हें प्यार से पाला-पोसा था। प्रकृति की इस सुंदरता में भी मेरी मेहनत की चमक शामिल है।

 

पद्यांश 3

पकी सुनहली फसलों से जो

अबकी यह खलिहान भर गया

मेरी रग-रग के शोणित की बूँदें इसमें

मुसकाती हैं।

 

शब्दार्थ –

सुनहली (Sunhali): सोने के रंग की / Golden

खलिहान (Khalihan): अनाज रखने की जगह / Barn, granary

रग-रग (Rag-rag): नस-नस / Every vein

शोणित (Shonit): रक्त, खून / Blood

 

व्याख्या –

खेतों में पकी हुई सुनहरी फसलों को देखकर किसान के रूप में कवि कहते हैं कि इस बार जो खलिहान अनाज से भर गए हैं, वे केवल बीज और मिट्टी का परिणाम नहीं हैं। इन लहलहाती फसलों में मेरी नस-नस में बहने वाले खून की एक-एक बूँद मुस्कुरा रही है। अर्थात्, यह फसल मेरे खून-पसीने और कठोर परिश्रम का ही मीठा फल है।

 

पद्यांश 4

नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है

यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है

मेरी भी आभा है इसमें।

व्याख्या –

कवि अपनी बात को दोहराते हुए निष्कर्ष निकालते हैं कि दुनिया में जो भी नया बदलाव, प्रगति और सुंदरता दिखाई दे रही है, वह सब आम आदमी के अथक परिश्रम का ही परिणाम है। इस पूरे संसार की चमक में मेरी मेहनत की चमक अर्थात् आभा भी समाई हुई है।

बातचीत के लिए

  1. इस कविता को सुनकर या पढ़कर आपके मन में सबसे पहले क्या विचार आया?

उत्तर – इस कविता को पढ़कर मेरे मन में यह विचार आया कि हमारे आस-पास जो भी विकास, सुंदरता और सफलता है, उसके पीछे किसी न किसी आम इंसान की कड़ी मेहनत छिपी हुई है।

  1. क्या आपका भी कोई ऐसा सपना है जिसे आप पूरा करना चाहते हैं?

उत्तर – हाँ, मेरा सपना है कि मैं खूब पढ़-लिखकर एक अच्छा और सफल इंसान बनूँ और जीविका के रूप में चिकित्सक (डॉक्टर) बनकर देश के विकास में अपना योगदान दूँ।

  1. आपको आकाश किस मौसम में सबसे अच्छा लगता है? आप उसमें क्या-क्या देखते हैं?

उत्तर – मुझे आकाश बरसात के बाद सबसे अच्छा लगता है। बरसात के बाद मैं नीले आसमान में चमकता हुआ सूरज, सफ़ेद बादल और कभी-कभी सतरंगी इंद्रधनुष देखता हूँ।

 

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

  1. “मेरी भी आभा है इसमें ” पंक्ति में ‘आभा’ शब्द का भाव है-

(क) तेज

(ख) चमक

(ग) योगदान

(घ) श्रम

उत्तर – (ग) योगदान

  1. फूलों के सौंदर्य के पीछे किसका प्रमुख योगदान है?

(क) प्रकृति का

(ख) माली का

(ग) पानी का

(घ) किसान का

उत्तर – (ख) माली का

  1. कविता का मुख्य संदेश क्या है?

(क) प्रकृति का सौंदर्य सबसे महत्त्वपूर्ण है।

(ख) सफलता केवल भाग्य से मिलती है।

(ग) राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान होता है।

(घ) फूल और फसलें जीवन का आधार हैं।

उत्तर – (ग) राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान होता है।

  1. कथन – खलिहान पकी सुनहली फसलों से भर गया है। कारण- इसके लिए किसान ने अथक परिश्रम किया है।

(क) कथन सही है, किंतु कारण गलत है।

(ख) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।

(ग) कथन और कारण, दोनों गलत हैं।

(घ) कथन और कारण, दोनों सही हैं।

उत्तर – (घ) कथन और कारण, दोनों सही हैं।

 

सोचिए और लिखिए

  1. कवि “मेरी भी आभा है इसमें” कहकर किस भावना को व्यक्त करना चाहता है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर – कवि इस पंक्ति से यह भावना व्यक्त करना चाहते हैं कि देश की प्रगति, हरियाली और खुशहाली में एक आम मज़दूर, किसान और आम आदमी की मेहनत का भी पूरा योगदान है।

  1. कवि ने फसलों में अपने ‘शोणित की बूँदें’ मुसकाने की बात क्यों कही है?

उत्तर – कवि ने फसलों में अपने ‘शोणित की बूँदें’ मुसकाने की बात कही है क्योंकि फसलें केवल मिट्टी और पानी से नहीं उगतीं, बल्कि उन्हें उगाने के लिए किसान अपना खून-पसीना एक कर देता है। फसलें उसकी उसी कड़ी मेहनत का मीठा फल हैं।

  1. कवि ने फसलों को सुनहली क्यों कहा है?

उत्तर – जब फसलें, जैसे- गेहूँ पूरी तरह पक जाती हैं, तो वे धूप पड़ने पर सोने की तरह चमकने लगती हैं। इसलिए कवि ने उन्हें ‘सुनहली’ कहा है।

  1. गगन और सूर्य को कवि ने नया क्यों कहा है?

उत्तर – समाज में आ रहे नए बदलावों, नई उम्मीदों और प्रगति के नए दौर को दिखाने के लिए कवि ने गगन और सूर्य को ‘नया’ कहा है।

 

भाषा की ओर

उलझे शब्द सुलझाएँ

  1. कविता के शब्दों के अक्षर उलझ गए हैं, आइए मिलकर सुलझाते हैं-

उलझे अक्षर

सही शब्द

संकेत (अर्थ)

आपकी भाषा में (सरल शब्द)

नगग

गगन

आसमान

आकाश / अंबर

लिहा खन

खलिहान

फसल रखने की जगह

खलिहान / कोठार

भा आ

आभा

चमक / रोशनी

चमक / परछाई / योगदान

णि शो त

शोणित

रक्त

खून / लहू

ल विशा

विशाल

बहुत बड़ा

बड़ा / भारी

  1. आपकी मातृभाषा में पानी को क्या कहते हैं? लिखिए।

ओड़िया में इसे ‘पाणी’ कहते हैं, और हिंदी में इसे जल या नीर कहा जाता है।

  1. निम्नलिखित रिक्त स्थानों को दिए गए शब्दों के समानार्थी शब्दों से भरिए-

आसमान –  गगन, नभ, अंबर

सूर्य – रवि, दिनकर, भास्कर  

फूल – सुमन, पुष्प, सुमन  

शोणित – लहू, रक्त, खून  

  1. कविता में

प्रयुक्त पंक्तियों में कुछ गहरे भाव छुपे हुए हैं। आप कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए और बताइए कि कवि क्या कहना चाहता है—

कविता की पंक्ति

सही भाव

(i) मेरी रग-रग के शोणित की बूँदें

मेरे परिश्रम और बलिदान का अंश

(ii) मेरी भी आभा है इसमें

मैंने भी योगदान दिया है

(iii) सपनों ने सहलाया था

प्यार और उम्मीद से पाला

(iv) नया सूर्य जो चमक रहा है

नई आशा और नया आरंभ

(v) खलिहान भर गया

मेरी कड़ी मेहनत का फल

पाठ से आगे

  1. क्या सच में फूलों को सपनों से सहलाया जा सकता है? कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर – सच में फूलों को हाथों से सहलाया जाता है। कविता में ‘सपनों से सहलाने’ का अर्थ है— किसी काम को बहुत प्यार, उम्मीद और लगन के साथ करना। एक माली या किसान अपनी फसल के लिए सुनहरे सपने देखता है और उसी उम्मीद से उन्हें पालता-पोसता है।

  1. यदि आप एक किसान होते और आपका खलिहान सुनहली फसलों से भर जाता, तो उस समय आपके मन में क्या भावनाएँ होतीं? कल्पना करके बताइए।

उत्तर – यदि मैं किसान होता, तो अपने खलिहान को सुनहली फसलों से भरा देखकर मेरा मन खुशी और गर्व से भर जाता। मेरी दिन-रात की सारी थकान मिट जाती और मुझे लगता कि मेरी कड़ी मेहनत आखिरकार सफल हो गई।

  1. यदि इस कविता में सूर्य और फूल बोल सकते, तो वे कवि से क्या संवाद करते? अपनी कल्पना से निम्नलिखित संवाद को पूरा कीजिए—

(सुबह का समय है। आकाश में सूर्य चमक रहा है। बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। कवि खेत की मेड़ पर बैठा है।)

सूर्य – मैं हर रोज उगता हूँ, पर आज कुछ अलग लग रहा है।

फूल – हाँ, कुछ ऐसा ही मैं भी महसूस कर रहा हूँ।

कवि – आज यह धरती इसलिए अलग लग रही है क्योंकि इसमें हमारे खून-पसीने और मेहनत की महक शामिल हो गई है।

सूर्य – सच कहा! तुम्हारी इस मेहनत ने ही तो मेरी चमक को और सार्थक कर दिया है।

फूल – और तुम्हारे प्यार से सींचने के कारण ही मेरे रंगों में इतनी जान आ गई है।

कवि – हाँ, जब प्रकृति का सौंदर्य और इंसान की मेहनत मिलती है, तभी यह दुनिया इतनी खूबसूरत और खुशहाल बनती है।

फूल – हम सब मिलकर ही इस विशाल धरती को दमका रहे हैं!

परियोजना

  1. एक सप्ताह तक प्रकृति से जुड़ी चीजों को ध्यान से देखिए। प्रतिदिन अपने अवलोकनों को लिखिए। अब इन्हें चित्र सहित कक्षा में प्रस्तुत कीजिए— जैसे-

आज आकाश कैसा था?

आकाश साफ और नीला था।

कौन-सा फूल देखा?

मैंने गेंदे का पीला फूल देखा। इसकी पंखुड़ियाँ घनी और महक बहुत अच्छी थी।

उसका रंग, उसकी बनावट और सुगंध कैसी थी?

मैंने पीले गेंदे फूल देखे। यह छूने में मखमली था और इसकी खुशबू बहुत मीठी थी।

कहीं कोई पेड़, बगीचा या खेत दिखा?

पास के बगीचे में एक बड़ा आम का पेड़ देखा, जिसकी डाल पर एक कोयल बैठी थी।

उसमें आपने क्या देखा?

पास के खेत में हरी फसलें लहलहा रही थीं, जहाँ कुछ गौरैया (Sparrow) दाना चुग रही थीं।

कोई चिड़िया, कोई जीव-जंतु या कुछ अन्य?

एक नीम के पेड़ के तने पर मैंने एक गिलहरी को तेजी से चढ़ते हुए देखा।

  1. आप अपने परिवार के जिन कार्यों में सहयोग करते हैं, उनकी सूची बनाइए।

पौधों को नियमित रूप से पानी देना।

घर की साफ-सफाई और चीजों को व्यवस्थित रखने में मदद करना।

बाजार से घर का छोटा-मोटा सामान लाना।

आज की पहेली

नीचे दिए अक्षर-जाल में कविता के छुपे हुए पाँच शब्दों को ढूँढ़कर उन पर गोला लगाइए-

खलिहान

सपनों

आभा

खुशबू

शोणित

खोजबीन

  1. पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से इस कविता के कवि नागार्जुन तथा उनकी रचनाओं के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र कीजिए तथा कक्षा में साझा कीजिए।
  2. नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ी (लिंक) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।

https://youtu.be/ydeDMPnnzec?si = TUuHVORBlqgn T4mR

शब्द-संपदा

शब्द अर्थ आपकी भाषा में शब्द

गगन आसमान

दमक आकर्षण युक्त चमक

आभा चमक, योगदान, भागीदारी

खलिहान कटी फसल को इकट्ठा रखने का स्थान

शोणित रक्त

भूखंड धरती का भाग

 

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