हमारे ये कलामंदिर
इस बार निशा की मौसी ने दशहरे की छुट्टियों में निशा को अजंता और एलोरा दिखाने का वादा किया था। निशा ने पुस्तकों में अजंता, एलोरा के बारे में पढ़ा था। तभी से उसके मन में उत्सुकता थी कि ये गुफाएँ देखने में कैसी होंगी।
दशहरे की छुट्टियाँ आईं तो उनका अजंता और एलोरा जाने का कार्यक्रम बन गया। रेलगाड़ी में आरक्षण छत्रपति संभाजीनगर तक था। संभाजीनगर महाराष्ट्र राज्य का एक नगर है। संभाजीनगर पहुँचते-पहुँचते रात हो गई थी। निशा और मौसी ने स्टेशन पर ही विश्रामगृह में रात बिताई। दूसरे दिन बड़े सवेरे ही उठकर वे बस से अजंता की ओर चल पड़े। वहाँ से अजंता लगभग सौ किलोमीटर दूर था।
अजंता पहुँचकर जो दृश्य निशा ने देखा, वह बड़ा ही मनोरम था। एक ओर छोटी-सी नदी बह रही थी। नदी में बड़े-बड़े शिलाखंड पड़े थे। नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं। इन गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा की ओर होने के कारण प्रातःकाल के सूर्य की किरणें इनमें पड़ रही थीं। गुफा के ठीक नीचे एक कुंड बना था, जिसमें पानी भरा हुआ था। घाटी में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे।
निशा, मौसी के साथ गुफाओं को देखने के लिए अंदर गई। उसने देखा कि गुफाओं के अंदर दीवारों पर अत्यंत सुंदर चित्र बने हैं। गौतम बुद्ध का घर छोड़ना, भिक्षुओं को उपदेश देना, साधु के रूप में अपनी पत्नी से भिक्षा माँगने जाना आदि के चित्र अत्यंत सजीव थे। इनके अतिरिक्त पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, स्त्रियों आदि के भी चित्र थे। उन्हें देखते ही निशा के मुँह से निकला, “वाह!” उन सभी चित्रों में अत्यंत सुंदर रंग भरे थे। सैकड़ों साल बीत जाने पर भी ये रंग फीके नहीं पड़े थे। मौसी ने कहा, “निशा, ये गुफाएँ दो हजार वर्ष पुरानी हैं।”
निशा ने आश्चर्यचकित होकर कहा, “दो हजार वर्ष ! पर आज भी इनके रंग ज्यों के त्यों कैसे हैं?”
मौसी ने कहा, “उस समय रंग बनाने का काम बहुत अलग था। ये रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों, फूलों आदि से बनाए जाते थे।”
निशा टकटकी लगाए चित्रों को देखती रही। चित्रों में हाथों की मुद्रा, आँखों के भाव, अंगों की लोच, चेहरे पर सुख-दुख के भाव, चेहरे पर झुर्रियाँ सभी कुछ अत्यंत अद्भुत था। ऐसे सजीव चित्र थे कि लगता था अभी बोल पड़ेंगे।
कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थीं, कुछ छोटी। निशा को सबसे अधिक आश्चर्य यह देखकर हुआ कि ये गुफाएँ पहाड़ों को ही काटकर बनाई गई थीं। इन गुफाओं में बनी मूर्तियाँ भी पत्थरों को तराश कर बनाई गई थीं।
अजंता की गुफाएँ देखकर निशा और मौसी वापस संभाजीनगर आए। वहाँ से वे दूसरे दिन बस में बैठकर एलोरा की गुफाएँ देखने चल पड़े। संभाजीनगर से एलोरा लगभग चालीस किलोमीटर दूर है।
एलोरा पहुँचकर निशा ने देखा कि पहाड़ों को ही काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं। इन मंदिरों में बहुत ही सुंदर मूर्तियाँ देखने को मिलीं। ये मूर्तियाँ केवल बौद्ध धर्म से ही संबंधित नहीं थीं, बल्कि इनमें कुछ हिंदू और जैन धर्म से भी संबंधित थीं।
इन मूर्तियों की कारीगरी देखते ही बनती थी। बड़ी- बड़ी विशाल शिलाओं को तराश कर इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें तथा मूर्तियाँ गढ़ी गई थीं। निशा उन्हें देख-देखकर चकित हो रही थी। कैलाश मंदिर दिखाते हुए मौसी ने कहा, “निशा, यह अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है। पूरा मंदिर एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर की ओर से तराश कर बनाया गया है। देखो, एक ही चट्टान से बनी इतनी बड़ी और सुंदर इमारत कितनी अद्भुत है।”
निशा – “अद्भुत ! यह विश्वास करना भी कठिन है कि सैकड़ों वर्ष पहले भी हमारे देश में कला का इतना विकास हो चुका था।”
अजंता और एलोरा देखकर निशा और मौसी वापस लौट आए पर निशा का मन अभी भी उन बेजोड़ कलाकृतियों की ओर लगा था।
हमारे ये कलामंदिर – शब्दार्थ
शब्द (Word) | हिंदी अर्थ (Meaning in Hindi) | अंग्रेजी अर्थ (Meaning in English) |
उत्सुकता | जानने की प्रबल इच्छा | Curiosity / Eagerness |
आरक्षण | जगह सुरक्षित करना (सीट बुक करना) | Reservation |
विश्रामगृह | ठहरने या आराम करने का स्थान | Rest house / Waiting room |
मनोरम | मन को अच्छा लगने वाला, बहुत सुंदर | Captivating / Beautiful |
शिलाखंड | पत्थर के बड़े टुकड़े, चट्टानें | Boulders / Large rocks |
सजीव | जीवित के समान, जिसमें जान महसूस हो | Lifelike / Alive |
आश्चर्यचकित | हैरान होना, अचरज में पड़ना | Astonished / Amazed |
मुद्रा | हाव-भाव, हाथ या शरीर की स्थिति | Posture / Gesture |
तराश कर | पत्थर को काटकर या छीलकर आकार देना | Carved / Sculpted |
अद्भुत | अनोखा, हैरान करने वाला | Wonderful / Amazing |
कारीगरी | निर्माण कला, हस्तकौशल | Craftsmanship |
कलाकृतियों | कला के सुंदर नमूने | Artworks / Masterpieces |
हमारे ये कलामंदिर महत्त्वपूर्ण सीख –
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का ज्ञान – छात्रों को भारत की प्राचीन और प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों, जैसे- अजंता और एलोरा की गुफाओं के बारे में अहम जानकारी मिलती है।
भौगोलिक जानकारी – पाठ से यह ज्ञात होता है कि ये गुफाएँ महाराष्ट्र राज्य के छत्रपति संभाजीनगर जिले के पास स्थित हैं।
प्राचीन भारतीय कला और वास्तुकला – छात्रों को पता चलता है कि प्राचीन काल में पहाड़ों और विशाल चट्टानों को काटकर मंदिर और गुफाएँ कैसे बनाई जाती थीं, जैसे- एक ही चट्टान को तराश कर बनाया गया एलोरा का अद्भुत कैलाश मंदिर।
प्राकृतिक रंगों का उपयोग – पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि हजारों साल पहले अजंता की गुफाओं में चित्रकारी के लिए पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों और फूलों से प्राकृतिक रंग बनाए जाते थे, जिनकी चमक सदियों बाद भी फीकी नहीं पड़ी है।
धार्मिक सद्भाव – एलोरा की गुफाओं में बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियों का एक ही स्थान पर होना हमारे देश की सर्वधर्म समभाव की संस्कृति को दर्शाता है।
गर्व और सम्मान की भावना – छात्रों के मन में अपने देश के प्राचीन कलाकारों, उनकी कड़ी मेहनत और उनकी बेजोड़ कारीगरी के प्रति गर्व और सम्मान की भावना पैदा होती है।
बातचीत के लिए
- आप अपनी छुट्टियों में क्या-क्या करते हैं?
उत्तर – मैं अपनी छुट्टियों में अपने परिवार के साथ नई जगहें घूमने जाता हूँ, अपनी मनपसंद किताबें पढ़ता हूँ और दोस्तों के साथ खेलता हूँ।
- यदि आपको अपने मनपसंद स्थान पर घूमने का अवसर मिले तो आप कहाँ जाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर – मैं कश्मीर या मनाली जैसे पहाड़ी स्थानों पर जाना चाहूँगा क्योंकि मुझे पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ और शांत वातावरण बहुत पसंद है।
- आप जहाँ जाना चाहते हैं, आपके घर से वहाँ तक कैसे पहुँचा जा सकता है?
उत्तर – मेरे घर से वहाँ तक पहले रेलगाड़ी या हवाई जहाज़ से और फिर उसके बाद बस या टैक्सी के माध्यम से पहुँचा जा सकता है।
- यदि आपने किसी प्राचीन मूर्ति अथवा कलाकृति को देखा हो तो आपने क्या महसूस किया? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर – मैंने एक प्राचीन मंदिर की मूर्तियाँ देखी थीं। उन्हें देखकर मैं हैरान रह गया था कि बिना किसी आधुनिक मशीन के पुराने समय के लोगों ने इतनी बारीकी और सुंदरता से पत्थरों को कैसे तराशा होगा।
मेरी समझ से
नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।
- निशा अजंता और एलोरा जाने को उत्सुक क्यों थी?
(क) वहाँ तक पहुँचना रोमांचकारी होगा।
(ख) मौसी के साथ जाना सुखद होगा।
(ग) उसने गुफाओं के बारे में पढ़ा था।
(घ) छुट्टियों में घूमना मनोरंजक होगा।
उत्तर – (ग) उसने गुफाओं के बारे में पढ़ा था।★
- संभाजीनगर में निशा और मौसी ने विश्रामगृह में रात क्यों बिताई?
(क) सुबह से निकले हुए वे दोनों थक गए थे।
(ख) उनका आरक्षण संभाजीनगर तक ही था।
(ग) वे विश्रामगृह का अनुभव करना चाहते थे।
(घ) आगे जाने से पूर्व विश्रामगृह में रुकना अनिवार्य था।
उत्तर – (ख) उनका आरक्षण संभाजीनगर तक ही था।★
- गुफाओं के अंदर दीवारों पर किसके सुंदर चित्र बने थे?
(क) इंद्र, बारिश, नदी, पहाड़ और सूरज के चित्र
(ख) गौतम बुद्ध, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और स्त्रियों के चित्र
(ग) किसान, मजदूर और बढ़ई के चित्र
(घ) आधुनिक कल-कारखानों के चित्र
उत्तर – (ख) गौतम बुद्ध, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और स्त्रियों के चित्र★
- गुफाओं के चित्रों के रंग इतने वर्षों बाद भी फीके क्यों नहीं पड़े थे?
(क) रासायनिक रंगों को मिलाकर बनाए गए थे।
(ख) वहाँ की जलवायु के कारण सुरक्षित थे।
(ग) पत्तों, जड़ी-बूटियों, फूलों आदि से बनाए गए थे।
(घ) इन्हें फीके न पड़ने का वरदान प्राप्त था।
उत्तर – (ग) पत्तों, जड़ी-बूटियों, फूलों आदि से बनाए गए थे।★
- अजंता की गुफाएँ देखकर निशा को सबसे अधिक आश्चर्य क्या हुआ?
(क) इतनी पुरानी होकर भी नई लगती थीं।
(ख) इनके चित्र बहुत सुंदर और रंगीन थे।
(ग) पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं।
(घ) गुफाओं के अंदर पानी बह रहा था।
उत्तर – (ग) पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं।★
सोचिए और लिखिए
- चित्रों में कौन-सी विशेषताएँ थीं जिनके कारण निशा को लगा कि चित्र अभी बोल पड़ेंगे?
उत्तर – चित्रों में हाथों की मुद्रा, आँखों के भाव, अंगों की लोच और चेहरे पर सुख-दुख के भाव तथा झुर्रियाँ इतनी सजीव और असली लग रही थीं कि लगता था वे अभी बोल पड़ेंगे।
- एलोरा की गुफाओं को देखकर निशा चकित क्यों हो रही थी?
उत्तर – विशाल शिलाओं को तराश कर इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें और मूर्तियाँ बनी देखकर निशा बहुत चकित थी।
- अजंता की गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में क्यों बनाया गया होगा?
उत्तर – गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में इसलिए बनाया गया होगा ताकि सुबह के समय सूर्य की पहली किरणें सीधे गुफाओं के अंदर आ सकें और अंदर प्राकृतिक रोशनी रहे।
- आपको अजंता और एलोरा की गुफाओं में सबसे बड़ी विशेषता कौन-सी लगी?
उत्तर – मुझे सबसे बड़ी विशेषता यह लगी कि एलोरा का पूरा कैलाश मंदिर केवल एक ही ऊँचे पहाड़ को ऊपर से नीचे की ओर तराश कर बनाया गया था।
- अजंता की गुफाओं के अंदर गौतम बुद्ध के कौन-कौन से चित्र दिखाई दिए?
उत्तर – गुफाओं में गौतम बुद्ध का घर छोड़ना, भिक्षुओं को उपदेश देना और एक साधु के रूप में अपनी पत्नी से भिक्षा माँगने जाने के अत्यंत सुंदर चित्र दिखाई दिए।
भाषा की ओर
मिलान करें
- पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें उपयुक्त अर्थों के साथ रेखाएँ खींचकर मिलाइए—
शब्द | अर्थ |
विश्रामगृह | आराम करने की जगह, आरामगृह, विश्राम भवन, विश्राम स्थल, विश्रामागार |
गुफा | जमीन या पहाड़ के नीचे या अंदर की विस्तृत और खाली जगह जो नीचे दूर तक चली गई हो, कंदरा, गुहा |
कुंड | तालाब, जलाशय |
भिक्षु | संन्यासी, याचक |
- नीचे वाक्यों में दिए गए रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
(उनतीस तीस चालीस सौ)
(क) संभाजीनगर से अजंता सौ किलोमीटर दूर है।
(ख) नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं।
(ग) संभाजीनगर से एलोरा चालीस किलोमीटर दूर है।
(घ) एलोरा में पहाड़ों को काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं।
- दी गई संख्याओं के साथ संज्ञा अथवा सर्वनाम जोड़कर वाक्य बनाइए-
बीस – मेरी कक्षा में बीस विद्यार्थी पढ़ते हैं।
सफेद – मुझे सफेद रंग की कमीज़ बहुत पसंद है।
एक दर्जन – पिताजी ने बाज़ार से एक दर्जन केले खरीदे।
पतला – मेरा दोस्त राहुल बहुत पतला है।
पत्र
- निशा अजंता और एलोरा देखकर वापस आ चुकी है। वह अपनी सहपाठी विजया को पत्र लिखकर बताना चाहती है कि अजंता और एलोरा की गुफाएँ उसे कैसी लगीं। स्वयं को निशा मानकर पत्र के प्रारूप में विजया को पत्र लिखिए-
निशा का पता – 12, विकास नगर, दिल्ली
दिनांक – 15 नवंबर, 2026
प्रिय मित्र विजया,
(बहुत प्यार!)
मैं अपनी छुट्टियों में मौसी के साथ अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखने गई थी। यह जगह बहुत ही अद्भुत है! तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि अजंता की गुफाओं के अंदर बने चित्र दो हज़ार साल पुराने हैं, फिर भी प्राकृतिक रंगों के कारण वे आज भी बिल्कुल नए और सजीव लगते हैं। एलोरा में हमने पहाड़ों को काटकर बनाए गए विशाल मंदिर देखे। वहाँ का कैलाश मंदिर एक ही चट्टान से तराश कर बनाया गया है, जो बहुत ही अनोखा है। मैंने वहाँ बहुत मजे किए। तुम भी कभी समय निकालकर इसे देखने ज़रूर जाना।
तुम्हारी मित्र
निशा
पाठ से आगे
समझ और अनुभव
- अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखकर निशा के मन में कई प्रश्न उठे। आप जब नई जगहों पर जाते हैं, तो कौन-कौन से प्रश्न आपके मन में उठते हैं?
उत्तर – जब मैं नई जगह जाता हूँ, तो मेरे मन में प्रश्न उठते हैं कि यह स्थान कितना पुराना है? इसे किसने और कैसे बनाया होगा? यहाँ के लोग पहले कैसे रहते होंगे?
- निशा का मन अभी भी उन बेजोड़ कलाकृतियों की ओर लगा था।
निशा को उन कलाकृतियों की कौन-कौन सी बातें याद आ रही होंगी। अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कर लिखिए।
पत्थर को तराश कर बनाई गई विशाल गुफाएँ और मंदिर।
जड़ी-बूटियों और फूलों से बने वे रंग जो कभी फीके नहीं पड़े।
चेहरे के सजीव भावों वाले अद्भुत चित्र।
एक ही चट्टान से बना एलोरा का विशाल कैलाश मंदिर।
परियोजना
निशा दशहरे की छुट्टियों में अपनी मौसीजी के साथ अजंता एलोरा घूमने गई। आप जब कभी छुट्टियों में घूमने जाते हैं तो आपको बहुत-सी तैयारियाँ करनी पड़ती हैं। यात्रा पर जाने से पहले, यात्रा के दौरान एवं यात्रा के बाद आप क्या-क्या तैयारी करते हैं? अपने समूह में चर्चा कर लिखिए-
उदाहरण के लिए-
यात्रा से पहले
उस स्थान से संबंधित जुटाना
टिकट खरीदना
घूमने के स्थान की जानकारी जुटाना, जाने-आने के टिकट बुक करना, और मौसम के अनुसार कपड़े तथा ज़रूरी दवाइयाँ पैक करना।
यात्रा के दौरान
उस स्थान से संबंधित जानकारी बातें करना
खाने-पीने का प्रबंध करना
वहाँ की संस्कृति और इतिहास को समझना, स्थानीय भोजन का आनंद लेना, और सुंदर तस्वीरें खींचना।
यात्रा से आने के बाद
यात्रा के अनुभव अपने मित्रों के साथ साझा करना
यात्रा में प्रयोग हुए कपड़े धोने के लिए निकालना
अपने अनुभव मित्रों और परिवार के साथ साझा करना, यात्रा के गंदे कपड़े धोने के लिए निकालना, और तस्वीरों को सँभालकर रखना।
खोजबीन
- आपने अजंता एलोरा के बारे में एक पाठ पढ़ा है। अब भारत के अन्य दर्शनीय स्थानों के बारे में अपने पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से खोजबीन कीजिए और पढ़िए। कक्षा में उसके बारे में बताइए।
- “इन मूर्तियों की कारीगरी देखते ही बनती थी। बड़ी-बड़ी विशाल शिलाओं को तराश कर इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें तथा मूर्तियाँ गढ़ी गई थीं।”
आप जिस प्रांत में रहते हैं, वहाँ पर कोई न कोई ऐसा स्मारक अथवा मंदिर अवश्य होगा जो बहुत प्राचीन होगा। अवश्य ही आपने अपने या किसी दूसरे प्रांत में कोई ऐसा स्मारक या मंदिर देखा होगा। पता लगाइए कि सैकड़ों साल पहले आज की तरह बिजली और उससे चलने वाली मशीनें नहीं थी। बिजली एवं मशीनों के बिना मूर्तियाँ बनाने के पत्थर कैसे काटे जाते होंगे?
पुराने समय में पत्थरों को काटने और तराशने के लिए लोहे की छेनी, हथौड़े और अन्य मज़बूत धातु के औज़ारों का उपयोग किया जाता था। कारीगर अपने हाथों से धीरे-धीरे पत्थरों को आकार देते थे।
ये मंदिर अथवा स्मारक बहुत ऊँचाई पर भी बने हैं। पता लगाइए कि इतनी ऊँचाई पर चढ़कर कार्य कैसे किया जाता होगा?
ऊँचाई तक पहुँचने के लिए बाँस और लकड़ियों के बड़े-बड़े ढाँचे बाँधे जाते थे। भारी पत्थरों को ऊपर ले जाने के लिए मिट्टी और ईंटों का ढलान बनाकर हाथियों या मजदूरों की मदद से पत्थरों को खींचा जाता था।
- नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।
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शब्द-संपदा
शब्द अर्थ आपकी भाषा में शब्द
उत्सुकता – किसी विशेष कार्य, वस्तु या घटना के प्रति मन की तीव्र अभिलाषा, उत्कंठा या जानने की इच्छा
कार्यक्रम – किसी कार्य की सूची, किए जाने वाले या होने वाले कामों का क्रम, व्यवस्था या रूपरेखा
आरक्षण किसी वस्तु अथवा स्थान को विशेष उपयोग या व्यक्ति के लिए अलग से सुरक्षित रखना
विश्रामगृह – आराम करने या ठहरने का स्थान
मनोरम – मन को भाने वाला, मन को रमाने वाला, सुंदर या आकर्षक
शिलाखंड – पत्थर का बड़ा टुकड़ा या चट्टान
कारीगरी – किसी वस्तु को बनाने या सँवारने का कौशल, हुनर या शिल्पकला
अद्भुत – आश्यर्चजनक, विलक्षण, अनोखा या विचित्र
प्रसिद्ध – विख्यात या मशहूर
बेजोड़ – जिसके जोड़ या बराबरी का और कोई न हो, अद्वितीय, अनुपम और बेमिसाल
कलाकृति – कला की कोई सुंदर वस्तु, कलात्मक रचना या शिल्प की वस्तु

