Chandrashekhar Venkataraman (Sansmaran) – Vishnu Prabhakar,  NCERT Class IX R3 Reva Hindi Book, The Best Solutions

लेखक परिचय – विष्णु प्रभाकर

विष्णु प्रभाकर हिंदी के प्रसिद्ध लेखक हैं। उनका जन्म सन् 1912 को हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक और जीवनी जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया है। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना आवारा मसीहा है, जो शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है। उनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।

चंद्रशेखर वेंकटरमन

29 मई, 1957! … बंगलौर के सांध्य आकाश में श्यामल मेघ घिर आए हैं। घूमते-घूमते सहसा हमारे आतिथेय धनजी भाई बोल उठते हैं, “रमन इंस्टीच्यूट देखोगे?” और उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना गाड़ी को एक विशाल और भव्य भवन के अहाते की ओर मोड़ देते हैं। द्वार पर लिखा है, “यह आम रास्ता नहीं है। बिना आज्ञा प्रवेश वर्जित है।” मैं हठात् उस ओर संकेत करता हूँ तो धनजी भाई कहते हैं, “यह तो विदेशियों के लिए लिखा है। संस्था हमारी है। हमें कौन रोक सकता है?” और बरामदे के पास गाड़ी रोककर वह चपरासी को पुकारते हैं,

“रमन साहब हैं? उनको बोलो कि हम आए हैं।”

कुछ कहूँ कि इससे पूर्व ही देखता हूँ कि अंदर से आकर एक व्यक्ति तेजी से अंग्रेजी में कह रहा है, “मैं जानता हूँ तुम बिना आज्ञा अंदर आए हो, पर कोई बात नहीं। किसी से कहना मत। मेरे पास पंद्रह मिनट हैं…….”

हम लोग सँभलें कि वे तीव्र गति से आगे बढ़ जाते हैं। हम विश्वास ही नहीं कर पाते कि नोबेल पुरस्कार प्राप्त, प्रकाश एवं नाद विज्ञान के विशेषज्ञ, विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन ये ही हैं। कोट, पतलून, जूता, दक्षिण भारतीय शैली की पगड़ी, नाक कुछ लंबी, बाईं ओर का दाँत टूटा हुआ, बाँह और गले पर से कोट भी फटा हुआ। ये हैं— रमन ! यह व्यक्तित्व है इनका!

विचार तीव्र गति से उमड़ते-घुमड़ते हैं। उतनी ही तीव्र गति से वे बोलते चले जाते हैं। सहसा गंभीर होकर वे मेरी ओर मुड़ आते हैं और पूछते हैं, “जानते हो, मेरा मतलब क्या है?”

मैं अचकचाकर कहता हूँ, “जी… जी”

तभी यशपाल जी हँसते हुए मेरा हाथ दबाते हैं, “क्या खाक जानते हो। यह तो उनका तकियाकलाम है।”

सचमुच उस एक घंटे में वे अनेक बार इस वाक्य का प्रयोग करते हैं। आरंभ में उन्होंने कहा था, “मेरे पास तो पंद्रह मिनट हैं।” लेकिन जब हम उनसे विदा लेते हैं तो पता लगता है कि एक घंटा कभी का बीत चुका है। जल प्रलय के सिद्धांत की व्यर्थता से लेकर पत्तों के, कोयले के, नाना रूपों में रूपांतरण, हीरे के निर्माण, नाना धातुओं, ग्रेनाइट, न जाने इन सबके बारे में वे हम अवैज्ञानिकों को क्या-क्या बता देते हैं। तीव्रता से बोलते रहते हैं, “देखो, यह है ऑयल डायमंड। यह इंडस्ट्रियल डायमंड है, ये मोती हैं, चमकते हैं न? ना-ना, इन्हें छूना मत। हीरे कोयले की खानों में ही पैदा होते हैं, पर उनको चमकदार बनाने के लिए कितना परिश्रम करना पड़ता है। तुम तो जानते ही हो कि भारत में नोबेल प्राइज पाने वाले दो व्यक्ति थे। अब एक मैं ही जीवित हूँ इसीलिए मेरी मुसीबत है।”

बीच-बीच में वे ऐसी बातें कह जाते हैं जिनका कोई पूर्वापर संबंध नहीं होता, लेकिन अर्थ अवश्य होता है। उनके संग्रहालय में नाना प्रकार के शंख, सीपियाँ, तितलियों का भंडार, समुद्र के नाना रूप जीव-जंतु हैं। आग्रहपूर्वक वे एक-एक वस्तु को दिखाते हैं। दिखाते ही नहीं, समझाते हैं। घूम-घूमकर पूरा भवन दिखाते हैं, बाग दिखाते हैं, कहाँ क्या बनाने की उनकी कल्पना है, यह सब बड़ी आत्मीयता से समझाते हैं और बीच-बीच में सहसा हमारी ओर मुड़कर कह उठते हैं, “क्या तुम इस बारे में कुछ लिखोगे? मैं जानता हूँ, तुम कुछ नहीं लिखोगे।”

फिर एक क्षण बाद कहते हैं, “यदि लिखो तो यह अवश्य लिखना कि ऊपर की मंजिल की खिड़की से चारों ओर का दृश्य बहुत मनोरम दिखाई देता है।”

और फिर सांध्य मेघों की तरल छाया में दूर तक फैली हुई हरितवसना पहाड़ियों और ऊँचे वृक्षों को स्निग्ध दृष्टि से देखते हुए कहते हैं, “है न बंगलौर सुंदर !”

मैं कभी उनकी ओर देखता हूँ, कभी चारों ओर के सौंदर्य पर दृष्टि डालता हूँ। इंस्टीच्यूट के भीतर भी तो सब कुछ सुंदर ही सुंदर है। अचानक दृष्टि ब्लैकबोर्ड पर अटक कर रह जाती है। उस पर विज्ञान के किसी सिद्धांत के बारे में कुछ लिखा है। कह उठता हूँ, “कितने सुंदर अक्षर हैं, मोती जैसे!”

वैज्ञानिक रमन मुसकराकर कहते हैं, “विज्ञान आदमी को सौंदर्य की ही प्रेरणा देता है।” इसी प्रसंग में सुधीर कहता है, “मेरी पुस्तक में आपका चित्र है।”

वे तुरंत उसके कंधे पर हाथ रखकर बोल उठते हैं, “तो तुम विद्यार्थी हो! मैं तुमको कुछ ऐसी वस्तुएँ दिखाऊँगा जो किसी को दिखाना पसंद नहीं करता। मेरे साथ आओ।” और वे हमको अपने छोटे से कमरे में ले जाते हैं, जिसमें कई अलमारियाँ हैं। वे उन्हें खोलते हैं और देखते-देखते हमारे सामने नाना रंग के अनेक मैडल और अनेक प्रमाणपत्रों का ढेर लग जाता है। अनेक मैडलों के बीच में प्रकाश फेंकते हुए नोबेल पुरस्कार के उस भव्य पदक को हम बड़ी उत्सुकता से देखते हैं, जो उन्हें 1930 में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए मिला था। श्री रमन ने अपना जीवन भारतीय अर्थ विभाग में असिस्टेंट एकाउंटेंट जनरल के पद से आरंभ किया था, लेकिन शीघ्र ही वे विज्ञान के क्षेत्र में आ गए और फिर तो विश्व के सर्वोच्च कोटि के वैज्ञानिकों की श्रेणी में पहुँचकर ही रुके। उन्होंने विज्ञान की शिक्षा विदेशों में नहीं प्राप्त की। इसी देश की मिट्टी में अपनी महानता को खोजा। समुद्र को देखकर उन्होंने कल्पना की कि स्वच्छ जल में होकर जब प्रकाश चलता है, तब प्रकाश के फैलने की प्रक्रिया में नाना रंग उत्पन्न होते हैं।

उनकी इस खोज के बारे में सोचते-सोचते न जाने मैं कहाँ चला जाता हूँ कि सहसा सुनता हूँ, वे कह रहे हैं, “इस पदक को देखो, कितना असुंदर है।”

सहसा झटका लगता है, लेकिन जब उस बोर्ड पर लगे हुए पदकों को देखता हूँ तो सचमुच ही उनमें ‘भारत रत्न’ का पदक असुंदर ही दिखाई देता है। उससे असुंदर एक और पदक है ‘कलकत्ता विश्वविद्यालय’ का। गलतफहमी न हो, यहाँ भौतिक सौंदर्य की चर्चा है और मैं जानता हूँ, उन्होंने इस शब्द का प्रयोग इसीलिए किया कि कुछ क्षण पहले मैंने अक्षरों के सौंदर्य की प्रशंसा की थी।

एकाएक वे बोल उठते हैं, “आओ, आओ, आप लोगों को कुछ और सुंदर वस्तुएँ दिखाऊँ।”

और वे तीव्र गति से आगे बढ़ जाते हैं। पीछे-पीछे हम भी एक छोटे से कमरे में पहुँचते हैं। विज्ञान के नाना उपकरणों से सजा यह कमरा कुछ ही क्षणों में इंद्रधनुष के प्रकाश से जगमगा उठता है। आश्चर्य से हम एक-दूसरे को देखते हैं। जैसे हम सब रंगों के सागर में तैर रहे हों। वैसे ही, जैसे नाना रूप-रंग की परियाँ बच्चों के स्वप्न संसार में तैरा करती हैं और प्रकाश तथा रंग के जादूगर रमन हैं कि कभी यह स्विच दबाते हैं तो कभी वह, और फिर कोट की जेब में हाथ डालकर स्रष्टा की तरह निःसंग भाव से मुसकराने लगते हैं और वह पराबैंगनी प्रकाश हमको अलौकिक रूप देता रहता है।

काफी कुछ देख चुके हैं। अंत में सोने और हीरे के नाना रूपों को देखते हैं, इस बार हिंदी में कहते हैं, “सब देखा, हो गया।”

और फिर बोल उठते हैं, “मैंने तुम्हें इतना समय दिया। मेरा भी एक काम करना। तुम लोगों को कहीं से हीरे मिलें तो मेरे पास भेज देना, अच्छा!” और फिर वही शिशु-सुलभ शरारत भरी मुसकान। हम भी मुसकराते हुए कह देते हैं,“ अवश्य भेजेंगे।”

हम सब छत पर आ गए हैं। विदा लें, इससे पूर्व यशपाल जी उनसे प्रार्थना करते हैं, “आपका एक चित्र खींचने की इच्छा है।”

वे जैसे एकदम तड़प उठते हैं, “इस फटे कोट में चित्र खींचोगे? यानी आप दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि मैं फटा कोट पहनता हूँ? खैर, कोई बात नहीं, खींच लो।”

यशपाल भाई फोटो खींचते हैं और फिर हम इस आकस्मिक अद्भुत प्रसंग से अभिभूत कई क्षण मौन चलते रहते हैं।

वे उसी निःसंग भाव से हाथ मिलाते हैं, नमस्कार करते हैं और मुसकराते हुए धूमकेतु की तरह जैसे आए थे, वैसे ही भीतर चले जाते हैं। जब चले जाते हैं, तब हमें उनकी उपस्थिति का भान होता है।

छह वर्ष बाद आज (1963) मैं सोचता हूँ कि अनुसंधानकर्ता की लगन, वृद्ध की सनक और शिशु की सरलता – इनकी सीमा रेखा कितनी पतली है। इस चित्र में क्या वे एक साथ सरल स्वभाव, कल्पनाप्रिय, सद्भावी और आत्म-प्रदर्शन प्रिय, महत्त्वाकांक्षी नहीं जान पड़ते? परंतु सच यह है कि जो जितना ऊँचा उठता है, वह उतना ही सरल और सहज रहता है।

चंद्रशेखर वेंकटरमन शब्दार्थ

शब्द (Word)

हिंदी अर्थ (Meaning in Hindi)

अंग्रेजी अर्थ (Meaning in English)

सांध्य

संध्या या शाम का समय

Evening (Time of dusk)

श्यामल मेघ

काले या साँवले रंग के बादल

Dark clouds

आतिथेय

मेहमान-नवाज़ी करने वाला (Host)

Host

हठात्

अचानक, बिना सोचे-समझे, बलपूर्वक

Suddenly / Involuntarily

विशेषज्ञ

किसी विषय का बहुत बड़ा जानकार

Expert / Specialist

तकियाकलाम

बात करते समय बार-बार दोहराया जाने वाला शब्द या वाक्य

Catchphrase / Pet phrase

रूपांतरण

रूप या आकार का बदलना

Transformation / Conversion

पूर्वापर संबंध

पहले और बाद की बातों का आपसी जुड़ाव (Context)

Sequential connection / Context

मनोरम

मन को मोह लेने वाला, बहुत सुंदर

Beautiful / Charming

स्निग्ध

चिकना, प्रेमपूर्ण, मुलायम

Affectionate / Smooth / Gentle

स्रष्टा

रचना करने वाला, बनाने वाला, रचयिता

Creator

निःसंग

जिसे किसी चीज़ का लगाव या मोह न हो, आसक्ति-रहित

Detached / Unattached

अलौकिक

इस लोक से अलग, जादुई या दिव्य

Supernatural / Divine / Unearthly

शिशु-सुलभ

बच्चों के समान, जो बच्चों के स्वभाव में होता है

Childlike

आकस्मिक

अचानक होने वाला

Sudden / Unexpected

अभिभूत

पूरी तरह से प्रभावित होना या भावनाओं में बह जाना

Overwhelmed

भान होना

अहसास होना, मालूम होना

To realize / To become aware of

महत्त्वाकांक्षी

बड़े और ऊँचे लक्ष्य पाने की इच्छा रखने वाला

Ambitious

 

चंद्रशेखर वेंकटरमनमहत्त्वपूर्ण सीख

महानता और सादगी का संगम – महान व्यक्ति अत्यंत सरल, सहज और दिखावे से दूर होते हैं। विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता होने के बावजूद सी.वी. रमन का पहनावा साधारण था और उनका स्वभाव एकदम बच्चों जैसा शिशु-सुलभ था।

विज्ञान और सौंदर्य का संबंध – विज्ञान केवल रूखी-सूखी पढ़ाई नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को प्रकृति के सौंदर्य को देखने और समझने की प्रेरणा देता है। रमन ने ब्लैकबोर्ड पर लिखे सुंदर अक्षरों और प्रकृति की सुंदरता (की भी उतनी ही प्रशंसा की जितनी विज्ञान की।

देश प्रेम और स्वदेशी खोज – यह जानना प्रेरणादायक है कि सी.वी. रमन ने विज्ञान की उच्च शिक्षा और अपनी महान खोजें (रमन प्रभाव) विदेशों में नहीं, बल्कि भारत की ही मिट्टी और साधनों से प्राप्त कीं।

जिज्ञासा और लगन – एक सफल वैज्ञानिक बनने के लिए हर पल काम करने की लगन, प्रकृति की छोटी-छोटी चीजों जैसे- शंख, सीप, तितलियाँ, कोयले से हीरा आदि में रुचि और निरंतर जानने की इच्छा का होना बहुत ज़रूरी है।

समय का मूल्य और आत्मीयता – यद्यपि वे बहुत व्यस्त थे और शुरू में उन्होंने केवल 15 मिनट देने की बात कही थी, लेकिन जब उन्होंने लेखकों विशेषकर एक विद्यार्थी की विज्ञान में रुचि देखी, तो पूरी आत्मीयता से उन्हें अपना पूरा संस्थान, पदक और प्रयोगशाला दिखाई।

 

बातचीत के लिए

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन की कौन-सी बात आपको सबसे अधिक प्रेरित करती है?

उत्तर – मुझे उनकी सादगी, लगन और यह बात सबसे अधिक प्रेरित करती है कि उन्होंने बिना किसी घमंड के भारत में ही रहकर विज्ञान के क्षेत्र में इतनी बड़ी सफलता प्राप्त की।

  1. यदि आपको चंद्रशेखर वेंकटरमन से मिलने का अवसर मिलता तो आप उनसे कौन-सा प्रश्न पूछते और क्यों?

उत्तर – यदि मुझे चंद्रशेखर वेंकटरमन से मिलने का अवसर मिलता तो मैं उनसे पूछता, “कठिन परिस्थितियों और कम सुविधाओं में भी आपने अपना हौसला कैसे बनाए रखा?” ताकि मुझे भी अपने जीवन में संघर्ष करने की प्रेरणा मिल सके।

  1. हीरे के उदाहरण के माध्यम से चंद्रशेखर वेंकटरमन ने क्या संदेश दिया है?

उत्तर – उन्होंने यह संदेश दिया है कि जिस प्रकार कोयले से हीरा बनने और उसे चमकदार बनाने के लिए भारी दबाव और घिसाई सहनी पड़ती है, उसी प्रकार महान बनने के लिए मनुष्य को बहुत परिश्रम और संघर्ष करना पड़ता है।

  1. वैज्ञानिक बनने के लिए विद्यार्थियों को क्या करना होगा?

उत्तर – वैज्ञानिक बनने के लिए विद्यार्थियों को अपने आस-पास की चीजों को ध्यान से देखना होगा, सवाल पूछने की आदत डालनी होगी और नई चीजें सीखने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा।

  1. क्या विज्ञान की शिक्षा विदेशों में प्राप्त कर ही सफल वैज्ञानिक बना जा सकता है?

उत्तर – बिल्कुल नहीं। चंद्रशेखर वेंकटरमन ने अपनी विज्ञान की शिक्षा और महान खोजें विदेशों में नहीं, बल्कि अपने ही भारत देश की मिट्टी और सीमित साधनों से की थीं।

 

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन अपनी उपलब्धियों के बावजूद भी _____ बने रहे।

(क) जिद्दी

(ख) विनम्र

(ग) अहंकारी

(घ) संकोची

उत्तर – (ख) विनम्र

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन द्वारा बंगलौर (बेंगलुरु) की सुंदरता की प्रशंसा करना किस बात को दर्शाता है?

(क) वे केवल अपने शहर की प्रसिद्धि बढ़ाना चाहते थे।

(ख) उन्हें प्रकृति और सौंदर्य के प्रति विशेष लगाव था।

(ग) वे अतिथियों को प्रभावित करना चाहते थे।

(घ) उन्हें वैज्ञानिक कार्यों में रुचि नहीं थी।

उत्तर – (ख) उन्हें प्रकृति और सौंदर्य के प्रति विशेष लगाव था।

  1. एक आदर्श वैज्ञानिक में कौन-से गुण होने चाहिए?

(क) ज्ञान और प्रसिद्धि

(ख) चंचलता और जिद्दी

(ग) जिज्ञासा और परिश्रम

(घ) पुरस्कार और सम्मान की लालसा

उत्तर – (ग) जिज्ञासा और परिश्रम

  1. कथन चंद्रशेखर वेंकटरमन को विज्ञान के साथ-साथ सौंदर्य में भी रुचि थी।

कारण  – उन्होंने कहा था कि विज्ञान आदमी को सौंदर्य की प्रेरणा देता है।

(क) कथन सही है किंतु कारण गलत है।

(ख) कथन गलत है किंतु कारण सही है।

(ग) कथन और कारण, दोनों गलत हैं।

(घ) कथन और कारण, दोनों सही हैं।

उत्तर – (घ) कथन और कारण, दोनों सही हैं।

  1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए-

i चंद्रशेखर वेंकटरमन ने अपनी महानता इसी देश की मिट्टी में खोजी।

ii चंद्रशेखर वेंकटरमन बाहरी दिखावे को बहुत महत्त्व देते थे।

iii चंद्रशेखर वेंकटरमन अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करना पसंद करते थे।

विकल्प-

(क) i और ii सही हैं।

(ग) ii और iii सही हैं।

(ख) i और iii सही हैं।

(घ) i, ii और iii सभी सही हैं।

उत्तर – (ख) i और iii सही हैं।

 

सोचिए और लिखिए

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन की वेशभूषा देखकर लेखक को क्यों आश्चर्य हुआ?

उत्तर – चंद्रशेखर वेंकटरमन की वेशभूषा देखकर लेखक को आश्चर्य हुआ क्योंकि वे विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता थे, फिर भी उन्होंने बहुत साधारण कपड़े पहने थे, एक फटा हुआ कोट, पतलून और दक्षिण भारतीय पगड़ी।

  1. लेखक ने चंद्रशेखर वेंकटरमन को ‘प्रकाश तथा रंग के जादूगर’ क्यों कहा है?

उत्तर – लेखक ने चंद्रशेखर वेंकटरमन को ‘प्रकाश तथा रंग के जादूगर’ कहा है क्योंकि उन्होंने प्रकाश और रंगों पर गहरी खोज की थी जो रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। वे अपनी प्रयोगशाला में बटन दबाकर प्रकाश से पूरे कमरे को इंद्रधनुष के रंगों से भर देते थे, जैसे कोई जादूगर जादू कर रहा हो।

  1. पाठ के आधार पर बताइए कि एक वैज्ञानिक में ज्ञान के साथ-साथ कौन-कौन से मानवीय गुण होने चाहिए।

उत्तर – एक अच्छे वैज्ञानिक में ज्ञान के साथ विनम्रता, सरलता, प्रकृति के प्रति प्रेम और बच्चों जैसी सहजता व जिज्ञासा होनी चाहिए।

  1. लेखक ने चंद्रशेखर वेंकटरमन के स्वभाव को शिशु-सुलभ क्यों कहा है?

उत्तर – लेखक ने चंद्रशेखर वेंकटरमन के स्वभाव को शिशु-सुलभ कहा है क्योंकि उनके स्वभाव में बच्चों जैसी मासूमियत और उत्साह था। वे बड़ी ही आत्मीयता से अपनी चीजें, जैसे- शंख, सीप, मैडल दिखाते थे और उनके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान रहती थी।

  1. “इसी देश की मिट्टी में उन्होंने अपनी महानता को खोजा” – आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – इसका आशय यह है कि उन्होंने विदेश जाकर काम करने के बजाय भारत में ही रहकर, यहाँ के सीमित संसाधनों के साथ कड़ी मेहनत की और अपनी खोजों से विश्व भर में महानता हासिल की।

 

भाषा की ओर

उच्चारण

  1. निम्नलिखित तालिका को पाठ में आए ‘र’ के विभिन्न रूपों वाले शब्दों से पूरा कीजिए-

गुरु        चित्र        प्रार्थना

रुकना      तीव्र        पूर्व

रुपया       प्रलय       सर्वोच्च

रूप        परिश्रम     वर्जित

रूपांतरण    इंडस्ट्रियल   अर्थ

गुरु        राष्ट्र       सूर्य

चारु        ड्रामा       कर्म

 

अनेकार्थी शब्द

  1. निम्नलिखित शब्दों के विभिन्न अर्थों का प्रयोग करते हुए दो-दो वाक्य बनाइए-

आम

  1. (फल) मुझे आम खाना बहुत पसंद है।
  2. (साधारण) आजकल महँगाई एक आम बात हो गई है।

उत्तर

  1. (जवाब) मेरे इस प्रश्न का उत्तर दो।
  2. (दिशा) हिमालय भारत के उत्तर में स्थित है।

नाना

  1. (रिश्ता) कल मेरे नाना जी हमारे घर आए थे।
  2. (अनेक) बगीचे में नाना प्रकार के सुंदर फूल खिले हैं।

पूर्व

  1. (दिशा) सूरज हमेशा पूर्व दिशा से निकलता है।
  2. (पहले) यह घटना कई वर्ष पूर्व घटी थी।

छाया

  1. (परछाई/छाँव) पेड़ की छाया में बहुत सुकून मिलता है।
  2. (प्रभाव) उस पर बुरी संगत की छाया पड़ गई है।

 

मिलान करें

  1. पाठ की कुछ पंक्तियों में गहरे भाव छुपे हुए हैं। आप निम्नलिखित पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए-

(क) “विज्ञान आदमी को सौंदर्य की ही प्रेरणा देता है।” -> विज्ञान और सौंदर्य का संबंध

(ख) ‘शिशु-सुलभ शरारत भरी मुसकान’ -> बालक जैसी सरलता

(ग) “जो जितना ऊँचा उठता है, वह उतना ही सरल और सहज रहता है।” -> महानता के साथ विनम्रता भी आवश्यक

(घ) “है न बंगलौर सुंदर !” -> प्रकृति-प्रेम और सौंदर्य-बोध

(ङ) ‘अनुसंधानकर्ता की लगन, वृद्ध की सनक और शिशु की सरलता’ -> व्यक्तित्व में जिज्ञासा, दृढ़ता और सरलता का अद्भुत मेल

 

श्रुतिसमभिन्नार्थक

  1. तालिका में दिए गए शब्दों का उचित वाक्य प्रयोग कीजिए—

ग्रह- ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

गृह- मेरा गृह विद्यालय के पास है।

ओर – नदी की ओर मत जाओ।

और – राम और श्याम अच्छे मित्र हैं।

शौक – मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है।

शोक – दुर्घटना की खबर सुनकर गाँव में शोक छा गया।

अन्य – मुझे इसके अलावा अन्य कोई जानकारी नहीं है।

अन्न – किसान खेतों में मेहनत करके अन्न उगाता है।

मेल – सभी त्योहार हमें आपसी मेल-जोल सिखाते हैं।

मेला – आज हमारे शहर में दीवाली का मेला लगा है।

उत्तर – इस सवाल का उत्तर कॉपी में लिखो।

उतर – वह सीढ़ियों से नीचे उतर गया।

आपकी भाषा में भी कुछ ऐसे शब्द होंगे। अपने सहपाठियों से चर्चा कर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए।

छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।

पाठ से आगे

समझ और अनुभव

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन ने विज्ञान को सौंदर्य से जोड़ा। अपने आस-पास की किसी ऐसी वस्तु का उदाहरण दीजिए जिसमें आपको विज्ञान और सौंदर्य दोनों दिखाई देते हों।

उत्तर – ‘इंद्रधनुष’ इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। विज्ञान हमें बताता है कि यह प्रकाश के फैलाव के कारण बनता है, और यह देखने में प्रकृति का सबसे सुंदर दृश्य लगता है।

  1. चंद्रशेखर वेंकटरमन ने विद्यार्थी सुधीर को विशेष वस्तुएँ दिखाने का निर्णय क्यों लिया होगा?

उत्तर – चंद्रशेखर वेंकटरमन ने विद्यार्थी सुधीर को विशेष वस्तुएँ दिखाने का निर्णय लिया होगा क्योंकि सुधीर एक विद्यार्थी था। रमन जी विद्यार्थियों से बहुत प्रेम करते थे और उन्हें विज्ञान के प्रति प्रेरित और उत्साहित करना चाहते थे।

  1. क्या जिज्ञासा केवल वैज्ञानिकों के लिए आवश्यक है या हर व्यक्ति के लिए? पाठ के आधार पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर – हाँ, जिज्ञासा हर व्यक्ति के लिए बहुत ज़रूरी है। जब हम नई चीजों के बारे में जानने की इच्छा अर्थात् जिज्ञासा रखते हैं, तभी हम कुछ नया सीख पाते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं।

 

सृजन

  1. कल्पना कीजिए कि आप रमन इंस्टीच्यूट गए हैं। वहाँ के अपने अनुभव के बारे में अपने मित्र को एक पत्र लिखिए।

उत्तर –

दिनांक – 03.05.20XX

घर संख्या – W-444

बोलानी, केंदुझर

 

प्रिय मित्र, रमेश

(सप्रेम नमस्ते)

कल मैं रमन इंस्टीच्यूट घूमने गया था। वहाँ मैंने महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन जी का कमरा, उनके विज्ञान के उपकरण और नोबेल पुरस्कार का पदक देखा। वहाँ की प्रयोगशाला और बगीचे की सुंदरता देखकर मेरा मन विज्ञान के प्रति और भी आकर्षित हो गया है। तुम भी कभी वहाँ ज़रूर जाना।

तुम्हारा मित्र,

अविनाश रंजन गुप्ता

  1. “जो जितना ऊँचा उठता है, वह उतना ही सरल और सहज रहता है।” इस विचार पर आधारित एक लघुकथा लिखिए।

उत्तर – एक बार एक आम का पेड़ फलों से पूरी तरह लद गया। फलों के वजन से उसकी डालियाँ नीचे की ओर झुक गईं। पास ही खड़े एक सूखे पेड़ ने पूछा, “तुम इतने झुक क्यों गए?” आम के पेड़ ने मुस्कुराकर कहा, “जिसके पास गुण और फल होते हैं, वह हमेशा विनम्र होकर झुक जाता है।” सूखे पेड़ को सचमुच बहुत ही अच्छा उत्तर मिला। इसी तरह महान इंसान भी हमेशा सरल और विनम्र होते हैं।

 

परियोजना

विभिन्न क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले अन्य भारतीय महापुरुषों के योगदान के बारे में एक भित्ति पत्रिका तैयार कर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।

छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करेंगे।

खोजबीन

  1. पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से चंद्रशेखर वेंकटरमन तथा उनके योगदान के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र कीजिए तथा कक्षा में साझा कीजिए।
  2. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब मनाया जाता है? इस दिवस का चंद्रशेखर वेंकटरमन से क्या संबंध है? पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से पता लगाइए।

भारत में हर साल 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है। इसी दिन चंद्रशेखर वेंकटरमन ने अपनी विश्व प्रसिद्ध खोज ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) की घोषणा की थी, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

  1. नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ी (लिंक) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।

.

शब्द – संपदा

शब्द अर्थ             आपकी भाषा में शब्द

सांध्य – संध्या का

आतिथेय – अतिथि सत्कार करने वाले

इंस्टीच्यूट – संस्था

वर्जित – निषिद्ध, मना

हठात् – सहसा, अचानक

सँभलना – सावधान होना, सतर्क होना

नाद – ध्वनि

अचकचाकर – चौंककर, भौचक्का होकर

तकियाकलाम – बोलते समय किसी एक शब्द या वाक्य को बार-बार प्रयोग करने की आदत

व्यर्थता – निरर्थकता, अनुपयोगिता

ग्रेनाइट – पत्थर का एक प्रकार

इंडस्ट्रियल डायमंड – उद्योग-धंधों में प्रयुक्त होने वाला एक प्रकार का हीरा

पूर्वापर संबंध – आगे-पीछे का संबंध

आत्मीयता – अपनापन, मैत्री

मनोरम – मन को लुभाने वाला, सुंदर

तरल छाया – हलकी छाया

हरितवसना – हरी-भरी

स्निग्ध – मृदुल, दयालु

सर्वोच्च – सबसे बड़ा, सर्वोपरि

गलतफहमी – कुछ का कुछ समझना, भ्रम होना

उपकरण – औजार, यंत्र

स्रष्टा – सृष्टि को रचने वाला, सृजन करने वाला

निःसंग भाव – बिना किसी लगाव के, निर्लिप्त

धूमकेतु – पुच्छल तारा

अलौकिक – लोकोत्तर, अद्भुत, असाधारण

शिशु-सुलभ – बच्चों जैसा सरल

महत्त्वाकांक्षी – बड़ा बनने की अभिलाषा रखने वाला

आकस्मिक – अचानक होने वाला

अभिभूत होना – अत्यधिक प्रभावित होना

अनुसंधानकर्ता – शोध करने वाला, खोज करने वाला

सनक – धुन, पागलपन, दीवानगी

 

You cannot copy content of this page