Kabir ke dohe – Kabir, NCERT Class IX R3 Reva Hindi Book, The Best Solutions,

कबीर – कवि परिचय

माना जाता है कि कबीर का जन्म सन् 1398 में काशी में हुआ था। कबीर गुरु रामानंद के शिष्य थे। कबीर एक ऐसे संत थे जो करघे पर कपड़ा और मन में कविता बुनते-बुनते इतने प्रसिद्ध हो गए कि उनकी कविताएँ आज भी लोग भजनों की तरह सुनते और गुनगुनाते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन की सच्चाई को समझने और अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं। भाषा पर उनकी गहरी पकड़ थी। उनकी भाषा को ‘पंचमेल’ या ‘सधुक्कड़ी’ कहा जाता है।

कबीर के दोहे

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।

बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर

काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्ब।

पल मैं परलै होयगी बहुरि करैगा कब्ब॥

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥

 

कबीर के दोहे – व्याख्या

दोहा 1

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।

बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥

 

शब्दार्थ –

गोविंद (Govind) – भगवान / God

दोऊ (Dou) – दोनों / Both

काके (Kake) – किसके / Whose

पाँय (Paay) – पैर / Feet

बलिहारी (Balihari) – न्योछावर होना, कृतज्ञ होना / Grateful, sacrifice

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – इस दोहे में कबीर दास जी ने भगवान से भी ऊँचा स्थान गुरु को दिया है।

व्याख्या – कबीर जी कहते हैं कि यदि मेरे सामने गुरु और भगवान दोनों एक साथ खड़े हों, तो मैं सबसे पहले किसके चरण स्पर्श करूँ? ऐसी स्थिति में मैं अपने गुरु के चरण पहले छूऊँगा, क्योंकि गुरु ने ही मुझे वह ज्ञान दिया है जिससे मैं भगवान तक पहुँच सका हूँ।

 

दोहा 2

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥

 

शब्दार्थ –

बानी (Baani) – वाणी, बोली / Speech, words

आपा (Aapa) – अहंकार, घमंड / Ego, arrogance

औरन (Auran) – दूसरों को / To others

सीतल (Seetal) – शीतल, शांत / Cool, peaceful

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – इस दोहे में मीठी बोली और विनम्रता का महत्त्व बताया गया है।

व्याख्या – हमें अपने मन का अहंकार त्याग कर हमेशा मीठे और नम्र शब्द बोलने चाहिए। मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले को तो खुशी और शांति मिलती ही है, साथ ही बोलने वाले का अपना मन भी शांत और प्रसन्न रहता है।

 

दोहा 3

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥

 

शब्दार्थ –

अति (Ati) – बहुत अधिक, सीमा से ज्यादा / Excess, too much

भला/भली (Bhala/Bhali) – अच्छा / Good

चूप (Chup) – चुप रहना, मौन / Silence

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – इसमें जीवन में संतुलन रखने की सीख दी गई है और बताया गया है कि किसी भी चीज़ की अधिकता बुरी होती है।

व्याख्या – जीवन में न तो बहुत अधिक बोलना अच्छा है और न ही बहुत अधिक चुप रहना। जिस प्रकार बहुत अधिक बारिश होना भी नुकसानदायक है और बहुत तेज़ धूप निकलना भी हानिकारक है, उसी प्रकार जीवन में हर चीज़ सीमा में ही अच्छी लगती है।

 

दोहा 4

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर॥

 

शब्दार्थ –

पंथी (Panthi) – राहगीर, यात्री / Traveller

छाया (Chhaya) – छाँव / Shade

अति दूर (Ati Door) – बहुत ऊँचाई पर / Very high/far

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – यहाँ बताया गया है कि केवल शरीर या धन में बड़ा होना मायने नहीं रखता, मनुष्य के काम बड़े होने चाहिए।

व्याख्या – सिर्फ बड़ा होने का कोई फायदा नहीं है, जैसे खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और बड़ा होता है। लेकिन उस बड़े होने का क्या लाभ? वह न तो किसी थके हुए यात्री को छाँव दे सकता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं क्योंकि वे बहुत ऊँचाई पर लगते हैं। महानता दूसरों के काम आने में है।

 

दोहा 5

काल्ह करै सो आज कर, आज करै सो अब्ब।

पल मैं परलै होयगी, बहुरि करैगा कब्ब॥

 

शब्दार्थ –

काल्ह (Kalh) – कल (आने वाला) / Tomorrow

अब्ब (Abb) – अभी / Right now

परलै (Parlai) – प्रलय, विनाश, मृत्यु / Destruction, end

बहुरि (Bahuri) – फिर, बाद में / Then, later

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – इस दोहे में समय का महत्त्व बताया गया है और काम टालने की आदत छोड़ने की सलाह दी गई है।

व्याख्या – जो काम तुम्हें कल करना है, उसे आज ही पूरा कर लो और जो काम आज करना है, उसे इसी पल शुरू कर दो। यदि अगले ही पल प्रलय आ गई या जीवन समाप्त हो गया, तो तुम अपना काम कब पूरा करोगे? अतः समय रहते काम कर लेना चाहिए।

 

दोहा 6

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय॥

 

शब्दार्थ –

सुमिरन (Sumiran) – याद करना, प्रार्थना करना / Remembering, praying

कोय (Koy) – कोई भी / Anyone

काहे (Kahe) – क्यों / Why

 

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग – इसमें मनुष्य के स्वार्थी स्वभाव के बारे में बताया गया है कि वह भगवान को सिर्फ मुसीबत में याद करता है।

व्याख्या – दुख और परेशानी के समय तो हर इंसान भगवान को याद करता है, लेकिन सुख के समय कोई उन्हें याद नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के समय में भी भगवान को उसी तरह याद करे, तो उसके जीवन में कभी कोई दुख आएगा ही क्यों?

बातचीत के लिए

  1. जब कोई हमसे कठोर वाणी में बात करता है, उस समय हम कैसा अनुभव करते हैं? कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि कैसी वाणी का प्रयोग हम सबके लिए सही है?

उत्तर – कठोर वाणी सुनकर हमें बहुत बुरा, अपमानजनक और दुखद लगता है। हम सबके लिए हमेशा मीठी, विनम्र और शांति देने वाली वाणी का प्रयोग करना ही सही है।

  1. क्या आपने कभी क्रोध में किसी से कठोर शब्द कहे हैं? क्रोध शांत होने के बाद आपको कैसा अनुभव हुआ?

उत्तर – मैंने एक बार अपने मित्र से किसी विषय पर मतभेद हो जाने के कारण उसे अनेक कठोर शब्द कह डाले थे। लेकिन क्रोध शांत होने के बाद मुझे गहरा पछतावा और ग्लानि का अनुभव हुआ था।

  1. आपके विचार में अधिक बोलना अच्छा है या चुप रहना? क्यों?

उत्तर – मेरे विचार में अधिक बोलना या चुप रहना, दोनों की अति बुरी है। हमें न तो बहुत अधिक बोलना चाहिए, जिससे बात का महत्त्व खत्म हो जाए और न ही हमेशा चुप रहना चाहिए जिससे हम अपनी बात ही न रख पाएँ। समय और परिस्थिति के अनुसार उचित बोलना ही सबसे अच्छा है।

  1. कुछ लोग काम को कल पर क्यों टाल देते हैं? क्या कभी आपने भी किसी काम को कल पर टाला है? इसका क्या परिणाम हुआ?

उत्तर – लोग अक्सर आलस्य, थकान या काम के प्रति रुचि न होने के कारण उसे कल पर टाल देते हैं। लेकिन छात्र होने के नाते जब मैं अपना होमवर्क कल पर टालता हूँ, तो अंत में काम का बोझ इतना बढ़ जाता है कि वह समय पर पूरा नहीं हो पाता और उसे डाँट सुननी पड़ती है।

  1. कबीर के इन दोहों में आपको कौन-सा दोहा सबसे अच्छा लगा और क्यों?

उत्तर – मुझे “काल्ह करै सो आज कर…” दोहा सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि यह जीवन में समय के महत्त्व को सिखाता है और हमें आलस्य छोड़कर तुरंत काम करने की महान प्रेरणा देता है।

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

  1. “ऐसी बानी बोलिए” दोहे में ‘आपा खोय’ का अर्थ है-

(क) मन से लोभ हटा देना

(ख) मन से अहंकार हटा देना

(ग) मन से क्रोध को हटा देना

(घ) मन से आलस्य को हटा देना

उत्तर – (ख) मन से अहंकार हटा देना

  1. “बड़ा हुआ तो क्या हुआ…” कहकर कबीर क्या समझाना चाहते हैं?

(क) ऊँचे पद का सब सदैव सम्मान करते हैं।

(ख) सेवा – भावना से ही व्यक्ति महान बनता है।

(ग) पढ़-लिखकर हमें ऊँचा पद प्राप्त करना चाहिए।

(घ) हमें पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए।

उत्तर – (ख) सेवा – भावना से ही व्यक्ति महान बनता है।

  1. किसी भी कार्य की अति (अधिकता) के बारे में कबीर का क्या विचार है?

(क) यह सदैव हानिकारक होती है।

(ख) यह सदैव लाभदायक होती है।

(ग) अति से ही हम कुशल बनते हैं।

(घ) यह कभी लाभदायक और कभी हानिकारक होती है।

उत्तर – (क) यह सदैव हानिकारक होती है।

  1. “काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्ब” पंक्ति का आशय है-

(क) समय के महत्त्व को समझना

(ख) परिश्रम के महत्त्व को समझना

(ग) अनुशासन के महत्त्व को समझना

(घ) विद्यार्थी जीवन के महत्त्व को समझना

उत्तर – (क) समय के महत्त्व को समझना

  1. कबीर के अनुसार प्रभु का स्मरण (सुमिरन) कब करना चाहिए?

(क) सुख के दिनों में

(ख) दुख के दिनों में

(ग) सुख और दुख दोनों ही पलों में

(घ) जब मन की कोई इच्छा पूरी करवानी हो

उत्तर – (ग) सुख और दुख दोनों ही पलों में

 

 

सोचिए और लिखिए

  1. कबीर ने गुरु को अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों माना है?

उत्तर – कबीर ने गुरु को भगवान से भी अधिक महत्त्वपूर्ण माना है क्योंकि गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं, जो हमें अज्ञानता से निकालकर ईश्वर तक पहुँचने का सही रास्ता दिखाते हैं।

  1. कबीर ने खजूर के पेड़ का उदाहरण क्यों दिया है?

उत्तर – कबीर ने खजूर का उदाहरण यह समझाने के लिए दिया है कि केवल शरीर, धन या पद में बड़ा होने से कोई महान नहीं बनता। खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है, लेकिन न तो वह किसी राहगीर को छाँव दे पाता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं। महानता दूसरों की मदद करने में है।

  1. “किसी भी कार्य की अति अच्छी नहीं होती।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – जैसे बहुत अधिक बारिश होने से बाढ़ आ जाती है और सब कुछ डूब जाता है, वहीं बहुत अधिक तेज़ धूप होने से धरती सूख जाती है। इसी प्रकार जीवन में किसी भी चीज़ की अधिकता हमेशा नुकसान पहुँचाती है।

  1. “औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय” पंक्ति के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर – कबीर कहना चाहते हैं कि जब हम अहंकार छोड़कर दूसरों से मीठे और विनम्र शब्द बोलते हैं, तो सुनने वाले को तो खुशी और शांति मिलती ही है, साथ ही हमारा अपना मन भी शांत और प्रसन्न रहता है।

 

भाषा की ओर

मिलान करें

  1. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके भावों से जोड़िए-

“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” — पद बड़ा होने के साथ व्यक्ति में सेवा-भाव भी होना चाहिए। इसी में उसकी महानता है।

“औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।” — मीठी वाणी स्वयं और सुनने वाले दोनों के मन को आनंदित करती है।

“अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।” — किसी भी कार्य की अधिकता अच्छी नहीं होती है।

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” — गुरु का महत्त्व ईश्वर से भी बड़ा है।

 

तुकांत शब्द

  1. इसी प्रकार अन्य दोहों के तुकांत शब्द छाँटकर उनसे मिलते-जुलते दो अन्य शब्द भी लिखिए।

खोय – होय (अन्य शब्द: सोय, रोय)

चूप – धूप (अन्य शब्द: कूप, सूप)

खजूर – दूर (अन्य शब्द: मज़दूर, कसूर)

कोय – होय (अन्य शब्द: बोय, ढोय)

 

  1. आपकी भाषा में निम्नलिखित शब्दों को क्या कहा जाता है? इन शब्दों के साथ-साथ कुछ अन्य शब्दों को भी अपनी भाषा में लिखिए-

शब्द       आपकी भाषा में शब्द

गुरु        शिक्षक, उस्ताद

पेड़         वृक्ष, तरु

छाया       छाँव, परछाई

सुख        आनंद, हर्ष

 

  1. आइए, इनसे दो-दो शब्द बनाइए-

रु (छोटा उ): रुकावट, रुचि, पुरुष

रू (बड़ा ऊ): रूप, रूठना, शुरू

 

  1. आइए, इन वाक्यों के शब्दों को उपयुक्त क्रम में लगाएँ-

(क) बोलनी चाहिए मीठी बोली हमें।

हमें मीठी बोली बोलनी चाहिए।

(ख) बुरी होती है अति किसी भी कार्य की।

किसी भी कार्य की अति बुरी होती है।

(ग) हमें करना चाहिए नहीं अधिक प्रयोग मोबाइल का।

हमें मोबाइल का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(घ) कल पर नहीं टालना चाहिए कोई भी कार्य हमें।

हमें कोई भी कार्य कल पर नहीं टालना चाहिए।

पाठ से आगे

अनुमान एवं कल्पना

  1. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥

अगर सभी मनुष्य अपनी वाणी को मीठी और शांति देने वाली बना लें तो उससे समाज में क्या बदलाव दिखाई देगा?

उत्तर – अगर सभी लोग मीठा बोलने लगें, तो समाज से सभी लड़ाई-झगड़े, द्वेष और तनाव खत्म हो जाएँगे। चारों ओर प्रेम, शांति और भाईचारे का माहौल होगा और हर व्यक्ति खुशहाल रहेगा।

  1. अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥

दोहे के आधार पर बताइए कि अगर हम आवश्यकता से अधिक मोबाइल या सोशल मीडिया का प्रयोग करेंगे तो उसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं।

उत्तर – मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से हमारी आँखों की रोशनी कम हो सकती है, एकाग्रता भंग होने से पढ़ाई का नुकसान हो सकता है, और हम अपने वास्तविक दोस्तों व परिवार से कटकर अकेलेपन का शिकार हो सकते हैं।

 

सृजन

  1. यदि आपको कभी कबीर मिल जाएँ तो आप उनसे क्या-क्या बातें करेंगे? अपनी कल्पना से आपके और कबीर के बीच संवाद लिखिए।

आप : कबीर जी आप इतने अच्छे दोहे कैसे बना लेते हैं?

कबीर : क्या सचमुच आपको ये दोहे अच्छे लगते हैं?

आप : हाँ जी! आपके दोहे जीवन जीने की एकदम सही राह दिखाते हैं।

कबीर : यह सब तो जीवन के सीधे-सादे अनुभव हैं, जो मैंने समाज की अच्छाइयों और बुराइयों को देखकर सीखे हैं।

आप : मैं भी आपकी तरह समाज की भलाई के लिए कुछ लिखना चाहता हूँ।

कबीर : बहुत उत्तम विचार है! बस अपने मन में अहंकार मत रखना और सदैव सत्य का ही साथ देना।

 

  1. “काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब्बा” (हमें कल पर कोई कार्य नहीं टालना चाहिए।) इस विषय पर आपने भी कुछ न कुछ अनुभव अवश्य किया होगा। उन्हीं अनुभवों के आधार पर लगभग 60-70 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए।

हमें अपना कोई भी काम कल पर नहीं टालना चाहिए। एक बार मैंने अपने स्कूल का साइंस प्रोजेक्ट यह सोचकर टाल दिया कि अभी जमा करने में बहुत दिन बचे हैं। प्रोजेक्ट जमा करने से ठीक एक दिन पहले मुझे तेज़ बुखार हो गया और मेरा काम अधूरा रह गया। इसके कारण कक्षा में मुझे डाँट पड़ी और कम अंक मिले। उस दिन मुझे बहुत पछतावा हुआ। तब मुझे समझ आया कि समय कभी किसी का इंतज़ार नहीं करता। आज का काम आज ही पूरा कर लेना ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।

परियोजना

  1. अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या अन्य स्रोतों की सहायता से कबीर के दोहों, भजनों, गीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में भी लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक हस्तलिखित पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।

छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

  1. कबीर के इन दोहों का सस्वर अथवा संगीतबद्ध वाचन कीजिए। इसमें आप अपने शिक्षकों और अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।

छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

 

खोजबीन

नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं।

संत कबीर

कबीर वाणी

https://www.youtube.com/watch?v=UNEIlugmwV0&t=13s&ab_channel-NCERTOFFICIAL

दोहे— कबीर, रहीम, तुलसी

 

 

शब्द-संपदा

शब्द       अर्थ        आपकी भाषा में शब्द

दोऊ – दोनों

काके – किसके

लागौं – स्पर्श करना, छूना

पाँय – पैर, चरण न्योछावर होना

बलिहारी – न्योछावर होना

गोविंद – आराध्य, भगवान

बानी – वाणी, बोली, वचन

आपा खोय – अहंकार भाव त्याग देना

औरन को – दूसरों को

सीतल – शीतल, शांत

आपहुँ – स्वयं को, अपने आप को

अति – अधिकता

चूप – चुप रहना, मौन

धूप – सूर्य का प्रकाश और ताप

खजूर – एक वृक्ष, जो बहुत ऊँचा होता है

पंथी – राहगीर, मुसाफ़िर, यात्री

छाया – छाँव

अति दूर – बहुत ऊँचाई पर, बहुत दूर

काल्ह – कल (आने वाला समय / कल)

करै – करना है

सो – वह, उसे

अब्ब / अब – इसी समय, तुरंत विनाश/अंत

परलै / प्रलय बहुरि – फिर से / दुबारा

कब्ब/ कब – किस समय

सुमिरन – स्मरण, याद करना

काहे को – क्यों, किसलिए

कोय – कोई

 

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