Author - हिंदीभाषा

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सर्वोदयवाद

संसार में दो विचारधाराएँ अर्थ चक्र को संचालित कर रही हैं—एक लोक- तंत्री देशों की निजी उद्योग-पद्धति...

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साम्यवाद

दो प्रणालियाँ आज समस्त संसार दो भागों में बँटता जा रहा है। एक वे देश हैं, जहाँ समाजवाद या साम्यवाद...

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पूँजीवाद

यों तो बहुत प्राचीन काल से उत्पादन के साधनों पर मनुष्य का व्यक्तिगत अधिकार था, परंतु पूँजीवाद का...

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लोकमान्य तिलक

“लोकमान्य जनता के आराध्य देव थे। उनके वचन हजारों लोगों के लिए वेद-वाक्य थे। वे पुरुषों में पुरुष...

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महान मानव गांधी

महात्मा गांधी जैसी विभूतियाँ सदियों बाद आती हैं। राजनैतिक नेता प्रायः प्रत्येक देश में होते रहते...

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हमारे पड़ोसी

राजनीतिज्ञ आचार्य महामति चाणक्य ने कहा है कि सामान्यतया पड़ोसी देश अपना शत्रु होता है और उसके साथ...

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पंचशील

जिन कुछ शब्दों ने आज के अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में बहुत अधिक महत्त्व प्राप्त कर लिया है, उनमें से...

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भारत की विदेश नीति

जब तक भारत पराधीन था, उसकी अपनी कोई अंतर्राष्ट्रीय राजनीति नहीं थी। ब्रिटिश सरकार की नीति भारत...

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