Class VIII, Amrai, Himalaya Aur Hum (Poem) – Gopal Singh ‘Nepali’, ICSE Board, The Best Solutions,

कुछ करके सीखिए

चित्र को पहचानकर इसकी उपयोगिता बताइए-

पवन चक्कियों (Windmills) की उपयोगिता –

पवन चक्कियाँ हवा की ऊर्जा से बिजली बनाती हैं।

यह ऊर्जा का स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोत है।

इससे प्रदूषण नहीं होता, इसलिए पर्यावरण सुरक्षित रहता है।

ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने में मदद मिलती है।

यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करती है।

हिमालय और हमसप्रसंग व्याख्या

प्रसिद्ध कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ राष्ट्रप्रेम और गौरव की भावना से ओत-प्रोत है। इस कविता में कवि ने हिमालय की महानता की तुलना भारतीय जनमानस के चरित्र और अडिग साहस से की है।

संदर्भ –

प्रस्तुत पंक्तियाँ छायावादोत्तर काल के प्रसिद्ध कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से ली गई हैं।

प्रसंग –

इस कविता में कवि ने हिमालय को भारत का ‘ताज’ और ‘रक्षक’ बताते हुए यह सिद्ध किया है कि भारतीयों का स्वभाव हिमालय जैसा ही विशाल, अडिग और शांत है। हिमालय केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है।

 

प्रथम अंश – (हिमालय का स्वरूप)

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही।

पर्वत – पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही।

अंबर में सिर, पाताल चरण

मन इसका गंगा का बचपन

तन वरण-वरण मुख निरावरण

इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है।

व्याख्या – कवि कहते हैं कि हिमालय पर्वतराज है और भारत का इससे बहुत गहरा और अटूट रिश्ता है। इसकी चोटियाँ इतनी ऊँची हैं कि यह पूरी धरती के ‘ताज’ अर्थात् मुकुट के समान है। इसका सिर आकाश को छूता है और चरण पाताल तक फैले हैं। इसके भीतर गंगा जैसी पवित्र नदी है जो इस देश का बचपन है, जिससे इसका मन अत्यंत पवित्र है। इसका शरीर विविध रंगों अर्थात् वनस्पतियों से ढका है, लेकिन मुख खुला और निश्छल है। कवि गर्व से कहते हैं कि हिमालय की छाया में रहने वाला भारतीय कभी किसी के सामने अपना मस्तक नहीं झुकाता; वह स्वाभिमानी है।

 

द्वितीय अंश – (प्राकृतिक सौंदर्य और दृष्टिकोण)

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती।

फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती।

इन शिखरों की माया ऐसी

जैसे प्रभात, संध्या वैसी

अमरों को फिर चिंता कैसी?

इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है।

व्याख्या – सूर्योदय की पहली किरणें सबसे पहले हिमालय की चोटियों को चूमती हैं और सूर्यास्त की अंतिम लाली भी यहीं बिखरती है। हिमालय के शिखरों पर सुबह और शाम की सुंदरता एक जैसी स्थिर रहती है। इसे देखकर देवता भी निश्चिंत हो जाते हैं। यही कारण है कि भारत का हर पुत्र जीवन के उतार-चढ़ाव को बिना घबराए खुशी-खुशी स्वीकार करता है।

 

तृतीय अंश – (संस्कृति और संपन्नता)

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

हर संध्या को इसकी छाया सागर-सी लंबी होती है।

हर सुबह वही फिर गंगा की चादर-सी लंबी होती है।

इसकी छाया में रंग गहरा

है देश हरा, प्रदेश हरा

हर मौसम है, संदेश भरा

इसका पद-तल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है।

 

व्याख्या – शाम के समय हिमालय की छाया समुद्र की तरह विशाल हो जाती है, और सुबह यही छाया गंगा की सफेद चादर जैसी पवित्र और लंबी जान पड़ती है। हिमालय के कारण ही देश का हर कोना हरा-भरा है और हर मौसम खुशहाली का संदेश लाता है। हिमालय की तलहटी ज्ञान और संस्कृति का केंद्र रही है; यहाँ रहने वाले ऋषि-मुनियों ने वेदों की रचना की और आज भी यहाँ की हवाओं में वेदों की गाथा गूँजती है।

 

चतुर्थ अंश – (अडिग भारतीयता)

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

जैसा यह अटल, अडिग-अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी।

है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी।

कोई क्या हमको ललकारे

हम कभी न हिंसा से हारे

दुख देकर हमको क्या मारे

गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुख में भी मुसकाता है।

व्याख्या – कवि हिमालय और भारतवासियों के चरित्र में समानता बताते हुए कहते हैं कि जैसा हिमालय स्थिर और अविचल है, वैसे ही भारतीय भी अपने संकल्पों में अडिग हैं। यदि हिमालय अमर है, तो भारतीय आत्मा भी अविनाशी है। हमें कोई डरा या ललकार नहीं सकता। हम हिंसा के सामने कभी नहीं झुकते। गंगा का पवित्र जल पीने वाले हम भारतीय दुखों और संकटों में भी मुसकराना जानते हैं।

पंचम अंश – (शक्ति और क्रांति)

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

टकराते हैं इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं।

तूफ़ान चले आते हैं, तो ठोकर खाकर सो जाते हैं।

जब-जब जनता को विपदा दी

तब-तब निकले लाखों गांधी

तलवारों-सी टूटी आँधी

इसकी छाया में तूफ़ान, चिरागों से शरमाता है।

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

व्याख्या – हिमालय की शक्ति ऐसी है कि बड़े-बड़े बादल इससे टकराकर पानी (शांत) हो जाते हैं और बड़े-बड़े तूफान भी इसकी ठोकर खाकर थम जाते हैं। जब-जब भारतीय जनता पर कोई विपदा आई है, तब-तब यहाँ लाखों ‘गांधी’ अर्थात् शांति समर्थक क्रांतिकारी पैदा हुए हैं जिन्होंने अन्याय की आँधियों को तलवारों की तरह काट दिया है। हिमालय की गोद में पलने वाले भारतीय इतने वीर हैं कि उनके सामने बड़े-बड़े तूफान भी बुझते हुए चिरागों की तरह लज्जित हो जाते हैं।

मौखिक (बोध प्रश्न)

गिरिराज हिमालय का किससे नाता हैं?

उत्तर – गिरिराज हिमालय का नाता भारत देश और भारतवासियों से है। कवि के अनुसार, यह नाता बहुत पुराना, अटूट और गौरवशाली है।

संध्या की अंतिम किरण किस पर बिखर जाती है?

उत्तर – संध्या की अंतिम लाली हिमालय के शिखरों पर झूमकर बिखर जाती है।

किसकी हर सुबह चादर-सी लंबी बताई है?

उत्तर – हिमालय की छाया की हर सुबह गंगा की सफेद चादर-सी लंबी बताई गई है।

 

मौखिक (बोध प्रश्न)

बादल किससे टकराकर पानी हो जाते हैं?

उत्तर – बादल हिमालय की ऊँची और विशाल चोटियों से टकराकर पानी (वर्षा) बन जाते हैं। यह हिमालय की शक्ति और उसके ऊँचे कद को दर्शाता है।

‘विपदा’ शब्द से लेखक का क्या आशय है?

उत्तर – ‘विपदा’ शब्द से लेखक का आशय देश पर आने वाले संकट, विदेशी आक्रमण या अन्यायपूर्ण परिस्थितियों से है। कवि कहते हैं कि जब भी भारत की जनता पर कोई विपदा आती है, तो हिमालय जैसी अडिग शक्ति वाले लाखों ‘गांधी’ खड़े हो जाते हैं।

शब्दार्थ (Word Meaning)

1 – गिरिराज – पर्वतों का राजा (हिमालय) – King of Mountains

2 – नाता – रिश्ता / संबंध – Relation / Bond

3 – सकल – संपूर्ण / पूरी – Entire / Whole

4 – धरा – पृथ्वी / धरती – Earth

5 – अंबर – आकाश – Sky

6 – चरण – पैर / पाँव – Feet

7 – वरण-वरण – रंग-बिरंगे / तरह-तरह के – Colourful / Of various kinds

8 – निरावरण – बिना ढका हुआ / खुला – Uncovered / Naked

9 – मस्तक – माथा / सिर – Forehead / Head

10 – अरुणोदय – सूर्योदय / सुबह का समय – Sunrise / Dawn

11 – शिखर – चोटी – Peak / Summit

12 – अमर – जो कभी न मरे – Immortal

13 – उदय-अस्त – जन्म और मृत्यु (उतार-चढ़ाव) – Rise and Fall

14 – पद-तल – चरणों के नीचे की भूमि – Foot-hills / Base

15 – गाथा – कहानी / कथा – Saga / Tale

16 – अटल – जो अपनी जगह से न हिले – Firm / Unshakeable

17 – अडिग – जो डगमगाए नहीं – Steadfast

18 – अविचल – स्थिर / शांत – Motionless / Stable

19 – अविनाशी – जिसका विनाश न हो सके – Indestructible

20 – ललकारना – चुनौती देना – To challenge

21 – हिंसा – मार-काट / लड़ाई – Violence

22 – विपदा – मुसीबत / संकट – Calamity / Trouble

23 – चिराग – दीपक – Lamp

24 – मुख – चेहरा – Face

25 – माया – जादू / चमत्कार – Illusion / Magic

अभ्यास – लिखित

  1. एक वाक्य में उत्तर लिखिए-

क. धरती का ताज किसे कहा गया है?

उत्तर – धरती का ताज हिमालय को कहा गया है।

ख. इस धरतीकहने से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर – ‘इस धरती’ कहने से कवि का तात्पर्य भारत की पावन भूमि से है।

ग. उदय और अस्त को समान भाव से कौन स्वीकारता है?

उत्तर – भारत का हर लाल अर्थात् प्रत्येक नागरिक उदय और अस्त को समान भाव से स्वीकारता है।

घ. दुख में कौन मुसकाता है?

उत्तर – जो गंगा का जल पी लेता है अर्थात् जो भारतीय संस्कारों में पला है, वह दुख में भी मुसकाता है।

 

  1. विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

क. हिमालय की छत्रछाया में हम स्वयं को सुरक्षित क्यों महसूस करते हैं?

उत्तर – हिमालय भारत के उत्तर में एक विशाल दीवार की तरह खड़ा है। यह दुश्मनों से हमारी रक्षा करता है और विदेशी आक्रमणों को रोकता है। इसकी ऊँचाई और अडिगता हमें साहस प्रदान करती है, इसलिए हम स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।

ख. अमरोंकिसे कहा गया है और उन्हें चिंता क्यों नहीं करनी चाहिए?

उत्तर – ‘अमरों’ देवताओं या हिमालय के दिव्य स्वरूप को कहा गया है। उन्हें चिंता इसलिए नहीं करनी चाहिए क्योंकि हिमालय की चोटियाँ सुबह और शाम एक समान अटल रहती हैं और इसकी गोद में पलने वाले वीर कभी हार नहीं मानते।

ग. भारत के मौसम संदेश भरे हैं। कैसे?

उत्तर – हिमालय के कारण भारत में ऋतुचक्र नियमित रहता है। हर मौसम अपनी प्रकृति के साथ खुशहाली, हरियाली और जीवन में नए उत्साह का संदेश लेकर आता है।

घ. इसका पद-तल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है।कवि ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर – हिमालय प्राचीन काल से ऋषियों और मुनियों की तपोभूमि रहा है। भारत की संस्कृति और वेदों का ज्ञान यहीं से जन्मा है। इसलिए जो हिमालय के करीब आता है, वह यहाँ की महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत अर्थात् वेदों से जुड़ जाता है।

ङ. गिरिराज से भारत का कैसा नाता है?

उत्तर – गिरिराज से भारत का नाता अटूट, प्राचीन और गौरवशाली है। हिमालय भारत का रक्षक, मुकुट और संस्कृति का संरक्षक है। जैसा अटल हिमालय है, वैसे ही अडिग भारतवासी हैं।

च. लाखों गांधीकौन हैं? वे क्यों अवतरित हो जाते हैं?

उत्तर – ‘लाखों गांधी’ वे भारतीय नागरिक हैं जो सत्य, अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलते हैं। जब-जब देश पर कोई विपदा या संकट आता है, तब-तब अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए ऐसे वीर अवतरित हो जाते हैं।

 

  1. सही विकल्प चुनिए-

क. हर संध्या को ‘हिमालय की छाया’ होती है-

आकाश-सी विशाल

सागर-सी लंबी

बादल-सी काली

वायु-सी शीतल

ख. इस धरती का हर लाल खुशी से अपनाता है-

हानि-लाभ

चिंता-धैर्य

उदय-अस्त

शांति-अशांति

ग. हिमालय से टकराकर बादल हो जाते हैं-

विपदा

आँधी

पानी

तूफ़ान

 

  1. ‘हिमालय और हम’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

इस कविता का मुख्य प्रतिपाद्य राष्ट्रप्रेम और गौरव है। कवि ने हिमालय की महानता, उसकी ऊँचाई और अडिगता की तुलना भारतवासियों के चरित्र से की है। कविता यह संदेश देती है कि भारतीयों का स्वाभिमान हिमालय जैसा ही ऊँचा है। हम शांतिप्रिय हैं, लेकिन संकट के समय हम हिमालय की तरह डटकर खड़े रहना जानते हैं।

 

  1. आशय स्पष्ट कीजिए-

क. इसकी छाया में रंग गहरा, है देश हरा, प्रदेश हरा

हर मौसम है, संदेश भरा।

आशय – हिमालय से निकलने वाली नदियों और वहाँ से टकराने वाले बादलों के कारण पूरा भारत हरा-भरा और समृद्ध है। यहाँ का हर मौसम खुशहाली का संदेश देता है।

ख. इसकी छाया में तूफ़ान, चिरागों से शरमाता है।

गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।

आशय – इसका अर्थ है कि हिमालय जैसी महान शक्ति के संरक्षण में बड़ी से बड़ी चुनौतियाँ (तूफान) भी भारतीयों के छोटे से संकल्प (चिराग) के सामने हार मान लेती हैं। भारतीयों का साहस तूफानों को भी छोटा कर देता है।

 

  1. दिए गए अर्थों की पंक्तियाँ कविता में से छाँटकर लिखिए-

क. हिमालय का मन पवित्र गंगा के बचपन की भाँति सरल है। शरीर प्रकृति के विविध रंगों से सुशोभित है और मुख निरावरण है अर्थात् उसमें किसी प्रकार का दुराव- छिपाव नहीं है।

“मन इसका गंगा का बचपन / तन वरण-वरण मुख निरावरण”

ख. यदि बादल भी टकराएँ तो बिखरकर बरस जाते हैं- यह कठोर सत्य स्पष्ट करता है कि हिमालय पर्वत से यदि कोई टकराएगा तो नष्ट हो जाएगा।

“टकराते हैं इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं।”

भाषा-बोध (Language Skills)

  1. नीचे कुछ शब्द-युग्म दिए गए हैं, शेष आप लिखिए-

विलोम शब्द – उदय-अस्त सुख-दुख  ऊपर-नीचे

समानार्थक – अडिग-अविचल, पर्वत-पहाड़, अटल-अविचल

पुनरुक्त – वरण-वरण, जैसे-जैसे, सुबह-सुबह, जब-जब

सार्थक-निरर्थक – गप-शप, चाय-वाय, रोटी-वोटी, पानी-वानी

 

  1. दिए गए शब्दों का वर्ण-विच्छेद कीजिए-

संध्या – स् + अ + न् + ध् + य् + आ

प्रभात – प् + र् + अ + भ् + आ + त् + अ

पर्वत – प् + अ + र् + व् + अ + त् + अ

प्रदेश – प् + र् + अ + द् + ए + श् + अ

तूफ़ान – त् + ऊ + फ़ + आ + न् + अ

 

  1. दिए गए उपसर्ग और प्रत्ययों से नए शब्द बनाइए-

बे + चैन – बेचैन, बेनाम, बेवजह

उप + स्थित – उपस्थित, उपयोग, उपवन

अन् + इष्ट – अनिष्ट, अन् + अंत (अनंत), अन् + आदर (अनादर)

उत्साह + इत – उत्साहित, पुष्पित, कल्पित

 

  1. इन शब्दों के विपरीतार्थक कविता से चुनकर लिखिए- (Word Power)

ऊँची x नीची

अंबर x पाताल

वरण x निरावरण

पहली x अंतिम

गहरा x उथला

प्रभात x संध्या

सुबह x शाम

विनाशी x अविनाशी

 

  1. रेखांकित परसर्ग के कारक का नाम लिखिए-

धरती का ताज – संबंध कारक

अंबर में सिर – अधिकरण कारक

चिरागों से शरमाता है -अपादान कारक

जनता को विपदा दी – संप्रदान कारक

हिमालय से भारत का – अपादान कारक

जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)

हिमालय की भाँति जीवन में हार और निराशा से तनिक भी घबराए बिना हमें अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

रचनात्मक गतिविधियाँ

अपने मुख से (Oral Expression)

दिए गए विषयों पर आशुभाषण/परिचर्चा का आयोजन कीजिए-

हिमालय  – प्रहरी भारत का

हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर एक सजग प्रहरी की तरह खड़ा है। यह उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं और दुश्मनों के आक्रमणों से देश की रक्षा करता है। नदियों का उद्गम स्थल होने के कारण यह देश को जल और जीवन प्रदान करता है। अपनी अचल और अडिग स्थिति से यह भारतीयों को अटूट साहस और शौर्य की प्रेरणा देता है।

हिमालय- भारत का मुकुट

हिमालय भारत के मस्तक पर सुशोभित एक भव्य मुकुट के समान है। इसकी गगनचुंबी बर्फीली चोटियाँ देश को अद्वितीय सुंदरता और गौरव प्रदान करती हैं। जिस प्रकार मुकुट सिर की शोभा बढ़ाता है, उसी प्रकार हिमालय भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है। यह अपनी दिव्यता से पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाता है।

अपनी कलम से (Creative Writing)

हिमालय हमारे देश का रक्षक है। यह कौन-कौन से देशों से हमारी रक्षा करता है?

हिमालय मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों की सीमाओं से हमारी रक्षा करता है –

चीन (China)

नेपाल (Nepal)

भूटान (Bhutan)

पाकिस्तान (Pakistan) – उत्तरी कश्मीर और काराकोरम क्षेत्र के माध्यम से

म्यांमार (Myanmar) – पूर्वांचल श्रेणियों के माध्यम से

इंटरनेट की सहायता से एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाले भारतीयों के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए। इस विषय पर निबंध लिखकर इसे शीर्षक दीजिए।

शीर्षक – एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा

माउंट एवरेस्ट, जो दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है, हमेशा से साहसी पर्वतारोहियों के लिए एक महान चुनौती रही है। भारत के जांबाज पर्वतारोहियों ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इस पर विजय भी प्राप्त की।

भारत के एवरेस्ट अभियान का गौरवशाली इतिहास 1965 में शुरू हुआ, जब कैप्टन एम.एस. कोहली के नेतृत्व में भारतीय दल ने सफलता प्राप्त की। इस दल के सदस्य अवतार सिंह चीमा एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। इसके बाद 1984 में बछेंद्री पाल ने शिखर पर पहुँचकर पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त किया।

समय के साथ भारतीयों ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए। संतोष यादव दुनिया की पहली महिला बनीं जिन्होंने दो बार (1992 और 1993) एवरेस्ट की चढ़ाई की। वहीं, अरुणिमा सिन्हा ने एक कृत्रिम पैर (Prosthetic leg) के सहारे एवरेस्ट फतह कर पूरी दुनिया को अपनी हिम्मत से चौंका दिया। इसके अलावा, पूर्णा मलावत ने मात्र 13 वर्ष की आयु में इस चोटी पर पहुँचकर सबसे कम उम्र की भारतीय पर्वतारोही होने का रिकॉर्ड बनाया।

निष्कर्षतः, इन पर्वतारोहियों की सफलता हमें सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो दुनिया की कोई भी ऊँचाई बाधा नहीं बन सकती। ये भारतीय नायक आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

अवतार सिंह चीमा, प्रथम भारतीय पुरुष,1965

बछेंद्री पाल,प्र थम भारतीय महिला,1984

संतोष यादव, दो बार फतह करने वाली प्रथम महिला,”1992, 1993″

अरुणिमा सिन्हा, प्रथम दिव्यांग भारतीय महिला, 2013

पूर्णा मलावत, सबसे कम उम्र की भारतीय, 2014

अपनी कल्पना से (From my Imagination)

हिमालय को भारत का रक्षक कहा जाता है। यदि हिमालय न हो तो क्या हम स्वयं को असुरक्षित महसूस करेंगे? आप इस बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर – सामरिक सुरक्षा – हिमालय एक अभेद्य दीवार की तरह उत्तर से होने वाले विदेशी आक्रमणों को रोकता है। इसके बिना हमारी सीमाएँ पूरी तरह खुली और असुरक्षित हो जाएँगी।

पर्यावरणीय सुरक्षा – हिमालय मध्य एशिया की बर्फीली हवाओं को रोककर भारत को रेगिस्तान बनने से बचाता है और मानसून को रोककर वर्षा कराता है। इसके अभाव में भारत में जल और भोजन का भीषण संकट पैदा हो जाएगा। अतः हिमालय हमारा अभेद्य कवच है।

परियोजना कार्य (Project Work)

* देश-प्रेम की कुछ कविताएँ और गीत एकत्र कर कवि सम्मेलन / अंत्याक्षरी का आयोजन कीजिए। कविताओं का इंटरनेट से संकलन कीजिए। संदर्भ के लिए- www.kavitakosh.org, www.abhivyakti.com

  • वह देश कौन-सा है— रामनरेश त्रिपाठी
  • मेरा भारत – रमानाथ अवस्थी
  • मेरे नगपति – मेरे विशाल – रामधारी सिंह ‘दिनकर’
  • ऐ मेरे प्यारे वतन प्रेम धवन

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर करें।

 

शब्द- खेल

नीचे दिए गए शब्द व्यवस्थित कीजिए और अधिकतम सार्थक शब्द बनाइए-

ल पु त कि – पुलकित – पुल, लत, तपु, तल

प रू री धा – रूपधारी – रूप, धारी, पूरी, परी

ल क बा त – बालक – बात, बाल, कल, तक

न स मा र – सरनाम – समान, मानस, मार, नर, रस

ल म क द – दमकल – कलम, मद, कल, दल, कम

र भा क त – भारत – भार, भात, तक

हि मा य ल – हिमालय – हिम, हाल, माल, लय

सु त क्षि आ र – असुरक्षित – सुरक्षित, सुत, सुर, रक्षित

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