कुछ करके सीखिए
दिए गए चित्रों से संबंधित दोहे कक्षा में सुनाइए-
डाल पर
रहिमन ओछी डाल पर, बैठि न कीजै मोद।
हल्की झोंक बयार की, डारत है झकझोर॥
माला पर
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर॥
कुंडलियों की व्याख्या
01
बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै।
खान पान सनमान, राग रंग मनहिं न भावै॥
कह ‘गिरिधर कविराय’ दुख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माँहि, कियो जो बिना बिचारे॥
शब्दार्थ –
पाछे – बाद में।
पछिताय – पछताना।
आपनो – अपना।
हँसाय – हँसी उड़ना/मजाक बनना।
चित्त – मन।
चैन – शांति।
मनहिं न भावै – मन को अच्छा नहीं लगता।
जिय – हृदय/जी।
व्याख्या –
गिरिधर कविराय कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी भी काम को बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा करने से वह अपना काम तो बिगाड़ता ही है, साथ ही पूरी दुनिया में उसकी जगहँसाई भी होती है। जब काम बिगड़ जाता है और लोग मजाक उड़ाते हैं, तो मन की शांति खो जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को न तो खाना-पीना अच्छा लगता है और न ही मान-सम्मान या मनोरंजन। कवि कहते हैं कि बिना विचारे किए गए काम का दुख मन में हमेशा खटकता रहता है और वह दुख दूर करने से भी दूर नहीं होता।
02
दौलत पाय न कीजिए, सपने हू अभिमान।
चंचल जल दिन चारिको, ठाउँ न रहत निदान॥
ठाउँ न रहत निदान, जियत जग में जस लीजै।
मीठे बचन ‘सुनाय, विनय सबही की कीजै॥
कह ‘गिरिधर कविराय’ अरे यह सब घट तौलत।
पाहुन निसिदिन चारि, रहत सबही के दौलत॥
शब्दार्थ –
अभिमान – घमंड।
चंचल जल – बहता हुआ अस्थिर पानी।
ठाउँ – स्थान/जगह।
निदान – अंत में।
जस – यश/कीर्ति।
विनय – विनम्रता।
घट – शरीर/हृदय।
पाहुन – मेहमान।
निसिदिन – रात-दिन।
व्याख्या –
कवि कहते हैं कि धन-दौलत प्राप्त होने पर सपने में भी घमंड नहीं करना चाहिए। धन तो उस चंचल जल के समान है जो चार दिन अर्थात् थोड़े समय के लिए आता है और कभी एक जगह टिककर नहीं रहता। चूँकि धन अस्थायी है, इसलिए जब तक जीवन है, तब तक अच्छे कर्मों से यश कमाना चाहिए। व्यक्ति को सभी से मीठे वचन बोलने चाहिए और विनम्रता से व्यवहार करना चाहिए। कवि समझाते हैं कि यह दौलत तो मात्र चार दिन की मेहमान है, जो आज आपके पास है तो कल किसी और के पास होगी, लेकिन आपका व्यवहार और यश हमेशा साथ रहेगा।
03
लाठी में हैं गुण बहुत, सदा राखिये संग।
गहरि नदी, नाली जहाँ, तहाँ बचावै अंग॥
तहाँ बचावै अंग, झपटि कुत्ता कहँ मारै।
दुश्मन दावागीर होय, तिनहूँ को झारै॥
कह ‘गिरिधर कविराय’ सुनो हे दूर के बाठी।
सब हथियार छाँड़ि, हाथ महं लीजै लाठी॥
शब्दार्थ –
गहरि – गहरी।
अंग – शरीर।
झपटि – झपटकर।
दावागीर – हमला करने वाला/शत्रु।
झारै – धूल चटाना/हराना।
बाठी – यात्री/राहगीर।
छाँड़ि – छोड़कर।
महं – में।
व्याख्या –
इस कुंडली में कवि ने लाठी के व्यावहारिक गुणों का वर्णन किया है। वे कहते हैं कि लाठी को हमेशा अपने साथ रखना चाहिए क्योंकि इसके बहुत लाभ हैं। यदि रास्ते में कोई गहरी नदी या नाला आ जाए, तो लाठी शरीर का संतुलन बनाकर डूबने से बचाती है। यदि कोई कुत्ता झपटकर हमला करे, तो लाठी से उसे भगाया जा सकता है। यहाँ तक कि यदि कोई दुश्मन या लुटेरा सामने आ जाए, तो लाठी उसे भी धूल चटा सकती है। कवि सभी यात्रियों को सलाह देते हैं कि अन्य भारी हथियारों को छोड़कर हाथ में एक लाठी जरूर रखें, क्योंकि यह संकट में सबसे अच्छी साथी है।
मौखिक (बोध प्रश्न)
प्रश्न 1 – बिना सोचे-समझे काम करने से क्या होता है?
उत्तर – बिना सोचे-समझे काम करने से व्यक्ति का काम बिगड़ जाता है, जिससे उसे बाद में पछताना पड़ता है। इसके कारण समाज में उसकी हँसी होती है और उसे मानसिक शांति नहीं मिलती।
प्रश्न 2 – धनी व्यक्ति को क्या नहीं करने को कहा है?
उत्तर – धनी व्यक्ति को अपनी धन-दौलत पर सपने में भी अभिमान (घमंड) नहीं करने को कहा गया है, क्योंकि धन चंचल जल के समान अस्थायी होता है।
प्रश्न 3 – हमें किस प्रकार के वचन बोलने चाहिए?
उत्तर – हमें सभी के साथ मीठे वचन बोलने चाहिए और विनम्रतापूर्वक व्यवहार करना चाहिए ताकि संसार में हमारा यश बना रहे।
प्रश्न 4 – कवि के अनुसार कुत्ते से बचने के लिए हमें अपने पास क्या रखना चाहिए?
उत्तर – कवि के अनुसार झपटते हुए कुत्ते से बचने और अपनी सुरक्षा के लिए हमें हमेशा अपने पास लाठी रखनी चाहिए।
लिखित
- एक वाक्य में उत्तर लिखिए-
क. काम बिगड़ जाने पर क्या होता है?
उत्तर – काम बिगड़ जाने पर व्यक्ति को बाद में पछताना पड़ता है और समाज में उसकी हँसी होती है।
ख. कवि गिरिधर के अनुसार जल और धन को क्या कहा गया है?
उत्तर – कवि के अनुसार जल और धन दोनों को ‘चंचल’ और अस्थिर कहा गया है।
ग. कवि ने अपने साथ सदैव क्या रखने को कहा है?
उत्तर – कवि ने संकट से बचने और सुरक्षा के लिए अपने साथ सदैव लाठी रखने को कहा है।
घ. गिरिधर द्वारा प्रयुक्त छंद का नाम लिखिए।
उत्तर – गिरिधर द्वारा प्रयुक्त छंद का नाम ‘कुंडलिया’ है।
- विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
क. बिना विचारे काम करने में क्या हानि होती है? समझाइए।
उत्तर – बिना विचारे काम करने से काम तो बिगड़ता ही है, साथ ही समाज में उपहास का पात्र बनना पड़ता है। व्यक्ति की मानसिक शांति छिन जाती है और वह पछतावे की आग में जलता रहता है।
ख. जब चित्त में शांति न हो तो क्या अच्छा नहीं लगता?
उत्तर – जब चित्त अर्थात् मन में शांति न हो, तो खान-पान, मान-सम्मान और किसी भी प्रकार का आमोद-प्रमोद या राग-रंग अच्छा नहीं लगता।
ग. धन पाकर हमें अभिमान क्यों नहीं करना चाहिए?
उत्तर – धन पाकर अभिमान इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि धन चंचल जल की तरह है, जो कभी एक स्थान पर टिककर नहीं रहता। यह आज है, तो कल नहीं।
घ. कवि ने लाठी में कौन-कौन से गुण बताए हैं?
उत्तर – लाठी के गुण – यह गहरी नदी-नालों में संतुलन बनाती है, झपटते हुए कुत्तों से बचाती है और दुश्मनों या हमलावरों का डटकर मुकाबला करने में सहायक होती है।
ङ. कवि ने कुत्ते का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तर – कवि ने कुत्ते का उदाहरण यह बताने के लिए दिया है कि यात्रा के दौरान अप्रत्याशित खतरों से बचने के लिए लाठी जैसा सरल साधन कितना उपयोगी हो सकता है।
- सही विकल्प चुनिए—
क. बिना विचारे काम करने से क्या हानि होती है?
धन की
मान की
मर्यादा की
पछताना पड़ता है
ख. यशस्वी बनने के लिए क्या करना चाहिए?
आलीशान महल बनवाना चाहिए।
लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए।
सबसे विनम्र होकर बात करनी चाहिए।
पैसों का घमंड दिखाना चाहिए।
ग. जिस समय कोई कार्य हो रहा है उस समय उसका ढोल नहीं पीटना चाहिए बल्कि –
धैर्य से प्रतीक्षा करनी चाहिए।
इशारे से पड़ोसी को बता देना चाहिए।
अपने विश्वसनीय मित्र को ही बताना चाहिए।
खुश होकर बता देना चाहिए।
- निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै।
खान पान सनमान, राग रंग मनहिं न भावै॥
कह ‘गिरिधर कविराय’ दुख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माँहि, कियो जो बिना बिचारे ॥
प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि ‘गिरिधर कविराय’ द्वारा रचित कुंडलियों से ली गई हैं। इसमें बिना सोचे-समझे कार्य करने के दुष्परिणामों का वर्णन किया गया है।
व्याख्या – कवि कहते हैं कि जो मनुष्य बिना विचार किए कार्य करता है, उसे अंत में पछताना ही पड़ता है। उसका कार्य तो असफल होता ही है, दुनिया भी उस पर हँसती है। हँसी और असफलता के कारण उसके मन को चैन नहीं मिलता और उसे भोजन या सुख-सुविधाएँ भी नहीं भातीं। यह पछतावा उसके हृदय में हमेशा खटकता रहता है।
भाषा-बोध (Language Skills)
- इन कुंडलियों को किस भाषा में लिखा गया है?
ये कुंडलियाँ ब्रजभाषा में लिखी गई हैं।
- नीचे लिखे शब्दों को शुद्ध रूप में लिखिए-
सनमान – सम्मान
कछु – कुछ
तौलत – तोलता
कारन – कारण
होय – हो/होना
झपटि – झपटकर
- निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची लिखिए- (Word Power)
दौलत – संपत्ति, धन
संसार – जग, दुनिया
अभिमान – गर्व, घमंड
पाहुन – अतिथि, मेहमान
- इसी प्रकार निम्नलिखित तालिका में से तुकांत शब्दों के मिलान कीजिए-
क. पावै i. दौलत
ख. लीजै ii. लाठी
ग. तौलत iii. भावै
घ. मारै iv. कीजै
ङ बाठी v. अंग
च. संग vi. झारै
पावै — भावै
लीजै — कीजै
तौलत — दौलत
मारै — झारै
बाठी — लाठी
संग — अंग
- रंगीन शब्दों के वचन बदलकर वाक्य दोबारा लिखिए-
क. हमें अपने साथ सदैव लाठियाँ रखनी चाहिए।
ख. मेरे हाथ बहुत छोटे हैं।
ग. मैंने कबीर के दोहे पढ़े हैं।
घ. आज मैं दुकान से कपड़े खरीद कर लाई हूँ।
जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)
कुंडलिया, दोहे आदि हमारे जीवन को सरल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये संस्कृति और धरोह के अंग हैं, जिनमें ज्ञान, अनुभव और दर्शन के सार छिपे होते हैं। इन्हें पढ़ने और समझने से हमारे जीवन नेतृत्व, साहस, संवेदनशीलता और धैर्य जैसे गुणों का विकास होता है। आपको कौन-सा दोहा सबसे अधिक पसंद है?
मुझे कबीरदास जी का यह दोहा बहुत पसंद है –
“ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥”
यह दोहा हमें सिखाता है कि मधुर वाणी न केवल दूसरों को सुख देती है, बल्कि हमारे स्वयं के व्यक्तित्व को भी शांत और प्रभावशाली बनाती है।
रचनात्मक गतिविधियाँ (Creative Activities)
अपने मुख से (Oral Expression)
रहीम के दोहों को कक्षा में पढ़कर एक मौखिक प्रस्तुति दीजिए।
छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।
हिंदी दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए गिरिधर की कुंडलियों से संबंधित एक प्रस्तुति तैयार कीजिए।
छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।
अपनी कलम से (Creative Writing)
गिरिधर की कुंडलियों को एक कहानी के रूप में लिखिए और उसमें रहीम के दोहे की कुछ पंक्तियों का उपयोग कीजिए तथा अपने शिक्षक को दिखाइए।
एक समय की बात है, एक धनी व्यापारी को अपनी संपत्ति पर बहुत घमंड था। वह बिना सोचे-समझे बड़े निवेश कर देता था। एक दिन उसका सारा धन डूब गया। तब उसे गिरिधर की कुंडली याद आई— “बिना बिचारे जो करै, सो पाछे पछिताय।” वह दुखी रहने लगा, तब एक साधु ने उसे रहीम का दोहा सुनाया— “बिगरी बात बने नहीं, लाख करौ किन कोय।” व्यापारी ने समझ लिया कि पछताने से बेहतर है अब धैर्य से काम लेना और मधुर व्यवहार से पुनः यश प्राप्त करना।
अपनी कल्पना से (From my Imagination)
रहीम के दोहों में समस्याओं के समाधान दिए गए हैं, उनके उदाहरण दीजिए। उन्हें अपने समाज में लागू करने के तरीकों पर चर्चा कीजिए।
छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।
परियोजना कार्य (Project Work)
एक प्रोजेक्ट के रूप में गिरिधर की कुंडलियों की विशेषताओं का अध्ययन कीजिए और उनका प्रयोग किसी वर्तमान समाजिक विषय की रिसर्च रिपोर्ट पर कीजिए। यह गतिविधि सामूहिक रूप से भी कर सकते हैं।
छात्र इसे अपने स्तर पर करेंगे।

